भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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शुक्रवार, 25 जून 2010

पेट्रोल, डीजेल, मिट्टी के तेल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करो - भाकपा

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य कौंसिल ने अपने सभी साथिओं को पेट्रोल, डीजेल, मिट्टी के तेल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। लखनऊ में कल २५ जून को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कैसर बाग ऑफिस में दोपहर ११ बजे संप्रग दो सरकार का पुतला फूका जायेगा। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की लखनऊ जिला कौंसिल ने आम जनता से अनुरोध किया है कि वह अधिक से अधिक संख्या में इस प्रदर्शन में शामिल...
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CPI UP APPEALS YOU TO DONATE FOR ORGANISING UNORGANISED WORKING CLASS

COMMUNIST PARTY OF INDIA IS THE PARTY OF THE WORKING CLASS. SINCE 1925, WE ARE FIGHTING FOR THE CAUSE OF TOILING MILLIONS OF THE COUNTRY.DURING LAST TWO YEARS, WE ARE TRYING REBUILD THE WORKING CLASS MOVEMENT AS WELL AS THE PARTY OF THE WORKING CLASS IN UTTAR PRADESH. WE UNDERTAKEN SO MANY TASKS IN THE PAST. TO CONTINUE OUR EFFORTS...
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नये मनुष्य, नये समाज के निर्माण की कार्यशाला: क्यूबा-5

साम्राज्यवाद का दुःस्वप्नः क्यूबा और फिदेलआइजनहावर, कैनेडी, निक्सन, जिमी कार्टर, जानसन, फोर्ड, रीगन, बड़े बुश औरछोटे बुश, बिल क्लिंटन और अब ओबामा-भूलचूक लेनी-देनी भी मान ली जाए तोअमेरिका के 10 राष्ट्रपतियों की अनिद्रा की एक वजह लगातार एक ही मुल्कबना रहा - क्यूबा।1991 में जब सोवियत संघ बिखरा और यूरोप की समाजवादी व्यवस्थाएँ भी एक केबाद एक ढहती चली गईं तो यह सिर्फ पूँजीवादियों को ही नहीं वामपंथियों कोभी लगने लगा था कि अब क्यूबा नहीं...
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नये मनुष्य, नये समाज के निर्माण की कार्यशाला: क्यूबा -1

1959 में जब क्यूबा में सशस्त्र संघर्ष द्वारा बटिस्टा की सरकार कोअपदस्थ करके फिदेल कास्त्रो, चे ग्वेवारा और उनके क्रान्तिकारी साथियोंने क्यूबा की जनता को पूँजीवादी गुलामी और शोषण से आजाद कराया तो उसकेबाद मार्च 1960 में माक्र्सवाद के दो महान विचारक और न्यूयार्क से निकलनेवाली माक्र्सवादी विचार की प्रमुखतम् पत्रिकाओं में से एक के संपादकद्वयपॉल स्वीजी और लिओ ह्यूबरमेन तीन हफ्ते की यात्रा पर क्यूबा गए थे। अपनेअध्ययन, विश्लेषण और अनुभवों...
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नये मनुष्य, नये समाज के निर्माण की कार्यशाला: क्यूबा -2

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद हालात और खराब हुए। बटिस्टा ने क्यूबा कोअमेरिका से निकाले गए अपराधियों की पनाहगाह बना दिया। बदले में अमेरिकीमाफिया ने बटिस्टा को अपने मुनाफों में हिस्सेदारी और भरपूर ऐय्याशियाँमुहैया कराईं। उस दौर में क्यूबा का नाम वेश्यावृत्ति, कत्ले आम, औरनशीली दवाओं के कारोबार के लिए इतना कुख्यात हो चुका था कि 22 दिसंबर1946 को हवाना के होटल में कुख्यात हवाना कांफ्रेंस हुई जिसमें अमेरिकाके अंडर वल्र्ड के सभी सरगनाओं ने...
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नये मनुष्य, नये समाज के निर्माण की कार्यशाला: क्यूबा-3

हम कम्युनिस्ट नहीं हैं: फिदेल (1959)1 जनवरी 1959 को क्यूबा में बटिस्टा के शोषण को हमेशा के लिए समाप्त करनेके बाद अप्रैल, 1959 में फिदेल एसोसिएशन आॅफ न्यूजपेपर एडिटर्स केआमंत्रण पर अमेरिका गये जहाँ उन्होंने एक रेडियो इंटरव्यू में कहा कि’मैं जानता हूँ कि दुनिया सोचती है कि हम कम्युनिस्ट हैं पर मैंनेबिल्कुल साफ तौर पर यह कहा है कि हम कम्युनिस्ट नहीं हैं।’ उसी प्रवास केदौरान फिदेल की साढ़े तीन घंटे की मुलाकात अमेरिकी उप राष्ट्रपति...
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नये मनुष्य, नये समाज के निर्माण की कार्यशाला: क्यूबा-4

क्यूबा का इंकलाबः एक अलग मामलाक्यूबा की क्रान्ति न रूस जैसी थी न चीन जैसी। वहाँ क्रान्तिकारीकम्युनिस्ट पार्टियाँ पहले से क्रान्ति के लिए प्रयासरत थीं और उन्होंनेनिर्णायक क्षणों में विवेक सम्मत निर्णय लेकर इतिहास गढ़ा। उनसे अलग,क्यूबा में जो क्रान्ति हुई, उसे क्यूबा की कम्युनिस्ट पार्टी का भीसमर्थन या अनुमोदन हासिल नहीं था। उस वक्त क्यूबा की कम्युनिस्ट पार्टीफिदेल के गुरिल्ला युद्ध का समर्थन नहीं करती थी बल्कि बटिस्टा सरकार केऊपर...
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भाकपा के प्रदेशव्यापी आन्दोलन के कारण अस्पतालों के निजीकरण से पीछे हटी सरकार

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने प्रदेश सरकार द्वारा चार जनपदों के सरकारी अस्पतालों के निजीकरण को रद्द करने के फैसले को भाकपा के आन्दोलन का नतीजा बताते हुए भाकपा की प्रदेश में सभी जिला इकाइयों को बधाई दी है। ज्ञात हो कि भाकपा ने अस्पतालों के निजीकरण पर आन्दोलन छेड़ रखा था।यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डॉ. गिरीश ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अस्पतालों के निजीकरण, विद्युत वितरण व्यवस्था को विदेशी एवं...
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गोडसे और कसाव

हाँ! उसे फांसी दे देमौत के घाट उतार दो उसकोउसने हत्या की हैनृशंस हत्या-आदमी की,एक नहीं सैकड़ोंनिर्दोष लोगों कीजान ली है उसनेजिन्हें वह जानता भी नहीं थान थी उनसे उसकी कोई अदावत हीकुछ लेना-देना भी नहीं थाउसका उनसे। फिर भी बेरहमी से मार डाला उसने सैकड़ों निर्दोष लोगों को उसे फांसी दे दे मौत के घाट उतार दो उसको। लेकिन मैं सोच रहा हूं, शायद बेवजह ही सोच रहा हूं और मेरा सोचना शायद गलत भी हो बेहद गलत। शायद सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के खिलाफ...
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भाकपा की जिला कौंसिल बैठक सम्पन्न

मुरादाबाद 6.6.2010। भाकपा की मुरादाबाद जिला काउन्सिल की बैठक असालतपुरा में का. नईम कुरैशी के निवास पर का. हरीश भटनागर की अध्यक्षता में हुई। जिला सचिव का. नेम सिंह ने विस्तृति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि आज पूरे विश्व में अमरीका का वर्चस्व होने के कारण पूंजीवाद के पक्ष में हवा बह रही है। विकासशील देशों के लिए निश्चय ही यह अच्छा संकेत नहीं है और काफी सजग रहने की जरूरत है। हमारा देश भी इस अमरीकी आंधी का बुरी तरह शिकार है।...
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जन समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरे कम्युनिस्ट

मुरादाबाद। प्रादेशिक समस्याओं की ओर जनता को लामबन्द कर आन्दोलन के लिये आकर्षित करने के उद्देश्य से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के तत्वाधान में आज रैली के आयोजन के साथ-साथ जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन भी किया गया। मांगों के समर्थन में डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भी भेजा गया।प्रान्तीय आह्वान पर असालतपुरा से शुरू हुई रैली स्टेशन रोड, चौक ताड़ीखाना, गंज गुरहट्टी, कोर्ट रोड होती हुई जिला मुख्यालय पहुंचकर सभा के रूप में परिवर्तित...
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दशहरी गांव में कूड़ाघर न बनाने की भाकपा की मांग

लखनऊ 22 जून, 2010। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और फलपट्टी किसान वेलफेयर एसोसियेशन के नेताओं ने आज भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश के नेतृत्व में जनपद की काकोरी तहसील के दशहरी गांव का दौरा किया जहां कि ऐतिहासिक दशहरी वृक्ष के पास कूड़ाघाट बनवाने की सरकार की योजना है।प्रतिनिधिमंडल ने 150 वर्ष पुराने मदर ट्री दशहरी को देखा और कूड़ाघर के निर्माण से उस वृक्ष और उस क्षेत्र को होने वाली भारी हानि का जायजा लिया। प्रतिनिधिमंडल ने वहां किसानों और...
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नगर निकाय निर्वाचन पद्धति में अलोकतांत्रिक परिवर्तन का भाकपा द्वारा विरोध

लखनऊ। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने पार्टी चिन्ह पर निकाय चुनाव न कराये जाने, नगर निकायों में नामित सदस्यों की संख्या-4 से बढ़ाकर 13 किये जाने की तथा उनको वोट का अधिकार दिये जाने जैसे कदमों की कठोर शब्दों में निन्दा करते हुए उन्हें तत्काल रद्द करने की मांग की है।उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और महामहिम राज्यपाल को फैक्स भेजकर भा.क.पा. राज्य सचिव डॉ. गिरीश ने प्रदेश के नगर निकायों के सभासदों के चुनाव की उस नई नियमावली...
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निजीकरण के खिलाफ बिहार के विद्युतकर्मी सड़क पर उतरे

पटना। बिहार सरकार एवं बिहार राज्य विद्युत बोर्ड के प्रबन्धक द्वारा राज्य की राजधानी, पटना, मुजफ्फरपुर में विद्युत आपूर्ति का जिम्मा (फ्रेन्चाइजी) सी.ई.एस.सी. कोलकाता को सौंपने सम्बन्धी प्रस्ताव के विरोध में बिहार राज्य विद्युत बोर्ड के कामगारों, अभियंताओं, पदाधिकारियों का एक बड़ा प्रदर्शन 25 मई को राज्य विद्युत बोर्ड मुख्यालय विद्युत भवन (पटना) पर हुआ और हजारों की संख्या में राज्य भर से आये विद्युत कर्मियों, अभियंताओं तथा अधिकारियों...
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भाकपा ने जुलूस निकाल कर एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

मंडी धनौरा: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी कार्यकर्ताओं ने तहसील मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन कर उपजिलाधिकारी को आठ सूत्री मांग पत्र सौंपा।भाकपा कार्यकर्ताओं ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तहसील मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि चार वर्ष पूर्व डेढ़ करोड़ की लागत से बनाई गयी पानी की टंकी आज तक नहीं चली। इससे नगरवासियों को पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ा रहा है। नगर में घटिया पाइप लगाने के कारण पाइप आए दिन फट जाते हैं...
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बंद्योपाध्याय आयोग की सिफारिशें लागू कराने हेतु आर-पार की लड़ाई

9 मई 2010 को पटना में वर्ग संघर्ष का एक नया नजारा देखने को मिला। गांधी मैदान में राज्य के बड़े भूस्वामियों के नेतागण “किसान महापंचायत” बुलाकर ऐलान कर रहे थे कि डी. बंद्योपाध्याय भूमि सुधार आयोग की सिफारिशें लागू हुईं तो बिहार में “गृहयुद्ध” होगा। ठीक उसी समय पटना जंक्शन गोलंबर पर किसानों और खेतमजदूरों के नेता ऐलान कर रहे थे कि बंद्योपाध्याय भूमि सुधार आयोग की सिफारिशें लागू करा के रहेंगे और इसके लिए आर-पार की लड़ाई होगी।शासक पार्टी...
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पुस्तक समीक्षा - समय ने जिसे मुहाजिर बना दिया

मैं मुहाजिर नहीं हूं (उपन्यास)बादशाह हुसैन रिजवीप्रकाशक- सुनील साहित्य सदन, नई दिल्ली।तेज होते औद्योगिकरण ने बाजार को विस्तार दिया है। फैलता हुआ बाजार उद्योगों के लिए संजीवनी साबित हो रहा है। बाजार के साथ टेक्नालॉजी के विसमयकारी विकास ने जीवन में बहुत कुछ बदल दिया है। हमारे आस-पास की दुनिया में बहुत सारी चीजें गायब हो रही हैं कई नई चीजों का प्रवेश हो रहा है। गतिशील भूमंडलीकरण के कारण यह परिवर्तन इतनी तेजी से घटित हो रहा है कि...
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माओवादियों के वकील, कुछ तो बोलें

हमें उनकी “वाणी” का इंतजार है। माओवादियों के छोटे-बड़े वकील, विभिन्न दलों में या दलों के बाहर जो घोसला बना रखे हैं, मौका मिलते ही जिनकी श्रृंगालध्वनि से दिगंत गूंजने लगता है, जो माओवादियों को दलित-पीड़ित जनता के प्रतिनिधि मानते हैं, उन्हें जनता के गुस्से का मूर्तरूप मानते हैं, वही। उनसे हम सुनना चाहते है, खुद कुछ बोलना नहीं चाहते।हमारे बोलने के लिए बचा भी क्या है? कुछ नहीं। यह एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है। इसकी लोकतांत्रिकता सिर्फ...
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दादरी के किसानों द्वारा मुआवजा वापस करने की अवधि बढ़ाने की भाकपा द्वारा मांग

लखनऊ 21 जून, 2010। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश ने मांग की है कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पर दादरी विद्युत परियोजना के लिये अधिगृहीत जमीन को मुआवजे की राशि वापस कर वापस पाने की अवधि को आगे बढ़ाया जाये तथा वहां के आन्दोलकारी किसानों पर लगाये गये मुकदमें तत्काल वापस लिये जायें।यहां जारी एक प्रेस बयान में डा. गिरीश ने बताया कि उन्होंने इससम्बन्ध में प्रदेश सरकार की मुखिया को एक पत्र लिखा है जिसमें इस बात का...
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हमारे सैकड़ों भोपाल

भोपाल का हादसा हमारे हिंदुस्तान का सच्चा आइना है। भोपाल ने बता दिया है कि हम लोग कैसे हैं, हमारे नेता कैसे हैं, हमारी सरकारें और अदालतें कैसी हैं। कुछ भी नहीं बदला है। ढाई सौ साल पहले हम जैसे थे, आज भी वैसे ही हैं। गुलाम, ढुलमुल और लापरवाह! अब से 264 साल पहले पांडिचेरी के फ्रांसीसी गवर्नर के चंद सिपाहियों ने कर्नाटक-नवाब की 10 हजार जवानों की फौज को रौंद डाला। यूरोप के मुकाबले भारत की प्रथम पराजय का यह दौर अब भी जारी है। यूनियन...
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प्रधानमंत्री के दस दिन

भोपाल गैस कांड एक ऐसी कहानी है जिसमें हम एक पतनशील समाज की सारी कुरूपताएं एक साथ देख सकते हैं। इसमें एक व्यापारिक कंपनी की अमानवीयता और गोरी चमड़ी की अहंमन्यता, चालबाज राजनीतिकों की बेशर्म कारगुजारियां, अमेरिकी घुड़की से सहमे भारतीय सत्ता-वर्ग की चरित्र, न्याय की तरफ से आंखे मूंदे, लकीर की फकीर बनी हमारी न्याय व्यवस्था और सामाजिक स्तर पर हमारी पतनशीलता के अविश्वसनीय नमूने मिलेंगे। इसमें सामान्य लोगों की असहायता और उनके असामान्य...
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दफन हो गया इंसाफ: सर्वोच्च न्यायालय सर्वांगीण परख करे

दिसंबर 1984 भोपाल गैस त्रासदी का वह काला दिन था, जिस दिन 15 हजार से ज्यादा लोग मौत के मुंह में दफन हो गये और लाखों पीढ़ी दर पीढ़ी संतृप्त रहने के लिये अभिशप्त हो गये और उसी तरह 7 जून 2010 इंसाफ के मंदिर में न्यायिक त्रासदी का वह काला दिन साबित हुआ, जिस दिन औद्योगिक इतिहास के इस भयंकरतम नरसंहार के अपराधी यूनियन कर्बाइड कंपनी के मुख कार्यकारी पदाधिकारी वारेन एंडरसन को सजा दिये बगैर अन्य छुटभैये आरोपियों को आम सड़क दुर्घटना के प्रावधानों...
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दफन हो गया इंसाफ: सर्वोच्च न्यायालय सर्वांगीण परख करे

दिसंबर 1984 भोपाल गैस त्रासदी का वह काला दिन था, जिस दिन 15 हजार से ज्यादा लोग मौत के मुंह में दफन हो गये और लाखों पीढ़ी दर पीढ़ी संतृप्त रहने के लिये अभिशप्त हो गये और उसी तरह 7 जून 2010 इंसाफ के मंदिर में न्यायिक त्रासदी का वह काला दिन साबित हुआ, जिस दिन औद्योगिक इतिहास के इस भयंकरतम नरसंहार के अपराधी यूनियन कर्बाइड कंपनी के मुख कार्यकारी पदाधिकारी वारेन एंडरसन को सजा दिये बगैर अन्य छुटभैये आरोपियों को आम सड़क दुर्घटना के प्रावधानों...
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अमरीका के दोहरे मापदंड

पिछले दिनों की दो घटनाओं से एक बार फिर उजागर हुआ है कि किस तरह अमरीका दोहरे मापदंड अपनाता है।26 मार्च को दक्षिण कोरिया का एक जहाज डूब गया था जिसमें 46 सेलर (नाविक) भी मारे गये। दक्षिण कोरिया ने तुरन्त ही उत्तरी कोरिया पर आरोप मढ़ दिया कि उसने उस जहाज को डुबा दिया है और युद्ध की भाषा बोलना शुरू कर दिया। आव देखा न ताव, अमरीका ने अपनी फौजों को भी वहां भेज दिया। युद्ध के बादल घिरने लगे और लगने लगा कि उत्तरी कोरिया के विरूद्ध युद्ध...
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साम्राज्य एवं युद्व

दो दिन पहले मैंने संक्षेप में बताया था कि साम्राज्यवाद नशीली वस्तुओं के सेवन की अत्यंत गंभीर समस्या को हल करने में असमर्थ है जो विश्व भर में लोगों के लिए अनिष्टकारी साबित हो रहा है। आज में एक अन्य विषय पर चर्चा करना चाहता हूं जिसे मैं काफी महत्वपूर्ण समझता हूं।हाल में उत्तर कोरिया की जल सीमा में घटी घटना के बाद उस पर अमरीका द्वारा हमला करने का खतरा पैदा हो गया है। यदि चीनी गणराज्य के राष्ट्रपति संयुक्त सुरक्षा परिषद में इस बारे...
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दूसरे देशों में अमरीका की बढ़ती दखलंदाजी

वाशिंगटनः आतंकी संगठन अलकायदा के खिलाफ लड़ाई के नाम पर अमरीका दुनिया में अपनी दखलंदाजी बढ़ाता जा रहा है। इस संबंध में एक रिपोर्ट के अनुसार अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अलकायदा और अन्य आतंकी संगठनों के खिलाफ छेड़ी खुफिया जंग के मद्देनजर दुनिया के 75 देशों में अमरीकी विशेष बलों की तैनाती को गोपनीय तौर पर मंजूरी दे दी है।एक अमरीकी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ओबामा के अमरीकी राष्ट्रपति का पद संभालने के पहले दुनिया के 60 देशों...
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देश की जरूरत है एक कृषि - आधारित वैकल्पिक आर्थिक नीति

वैश्वीकरण के फलाफल पर आयोजित 2006 के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में शरीक होने के सिलसिले में मुझे चीन के दो बड़े शहर बीजींग और शंघाई में एक सप्ताह बिताने का मौका मिला था। चीन जैसे विशाल देश को समझने के लिये एक सप्ताह का समय कुछ भी नहीं है फिर भी जो बात हमें एक से ज्यादा मर्तबा जोर देकर बतायी गयी, वह यह कि चीन के समक्ष ऊंचा जीडीपी हासिल करने का लक्ष्य नहीं है, प्रत्युत इसके विपरीत चीन अपना वित्तीय स्रोत्र कृषि और देहात के विकास की ओर...
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यूनानी संकट का संदेश

यूनान से उपजे आर्थिक संकट ने एक बार फिर इस तथ्य को रेखांकित किया है कि विश्व जल्द राहत की सांस ले संवृद्धि पथ पर आगे बढ़ने वाला नहीं है। पहले अमरीका और अब यूनान में आर्थिक संकट का जो ज्वालामुखी फटा है उसकी चपेट में सारा विश्व है और सतही तौर पर तथा परंपरागत नुस्खों से उससे निजात मिलना कठिन है। यह मानना है प्रो. दानी रोद्रिक का, जिनकी गिनती संसार के स्पष्टवादी, ईमानदार अर्थशाóियों में होती है।रोद्रिक लेबनानी मूल के हैं। वे हारवर्ड...
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