भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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बुधवार, 23 मई 2012

मंदी..., मंदी .... और मंदी ....

जागरण में अंशुमान तिवारी ने एक लेख में लिखा है कि ”स्पेनी डुएंडे ने अमरीकी ब्लै कबियर्ड घोस्ट (दोनों मिथकीय प्रेत) से कहा ... अब करो दोहरी ड्यूटी। यह दुनिया वाले चार साल में एक मंदी खत्म नहीं कर सके और दूसरी आने वाली है।... यह प्रेत वार्ता जिस निवेशक के सपने में आई वह शेयर बाजार की बुरी दशा से ऊबकर हॉरर (डरावनी) फिल्में देखने लगा था। चौंक कर जागा तो सामने टीवी चीख रहा था कि 37 सालों में पहली बार ब्रिटेन में डबल डिप (विकास में लगातार गिरावट) हुआ है। स्पेन यूरोजोन की नई विपत्ति है। यूरोप की विकास दर और नीचे जा रही है। अमरीका में ग्रोथ गायब है।“
देखते-देखते चार साल बीत गए। सारी तकनीक, पूंजी और सूझ झोंक देने के बाद भी दुनिया एक मंदी से निकल नहीं सकी और दूसरी दस्तक दे रही है। 2008 में पूंजीवादी अर्थशास्त्रियों और राजनीतिज्ञों में मंदी के कारण कार्ल मार्क्स की अमर कृति ‘पूंजी’ में इंटरेस्ट पैदा हो गया था। इन सबने ‘पूंजी’ को खूब पढ़ा। मार्क्स ने पूंजीवाद के संकटों में इस मंदी का न केवल जिक्र किया बल्कि उसके कारणों पर भी प्रकाश डाला है। लेकिन उन्होंने इन संकटों से निकलने का एकमात्र जो रास्ता बताया है, वह पूंजीवाद को रास कैसे आ सकता है। मार्क्स ने इन संकटों के जो कारण बताये, उन कारणों को समाप्त करना भी पूंजीवाद को रास नहीं आ सकता। परिणाम सामने है। पूरा विश्व डबल डिप के भंवर में फंसने की ओर अग्रसर है।
स्पेन की हकीकत सबको मालूम थी। यूरोजोन की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था स्पेन भी दरक रही है। वहां रियर स्टेल का बुलबुला फूट गया है। कर्ज देने वाले बैंक डूब रहे हैं। तमाम बड़े शहर स्पेन सरकार कर बोझा बन गये हैं। इन शहरों का खर्चा चलाने तक का पैसा सरकार के पास नहीं है। नए हवाई अड्डे, शापिंग काम्पलेक्स और बीस लाख के करीब मकान खाली पड़े हैं। यूरोपीय केन्द्रीय बैंक से स्पेन के बैंकों को जो आर्थिक मदद मिली थी, वह भी गले में फांस बन गई है। अगर स्पेन अपने बैंकों को उबारने का प्रयास करता है तो खुद डूब जाएगा क्योंकि देश पर 807 अरब यूरो का कर्जा है, जो उसके जीडीपी का 74 प्रतिशत है। युवाओं में 52 प्रतिशत की बेरोजगारी दर वाला स्पेन बीते सप्ताह मंदी में चला गया है।
जी-20 की कोशिशें, नेताओं की कवायद, बैंकों का सस्ता कर्ज कुछ भी काम नहीं आया। यूरोप में डबल डिप यानी दोहरी मंदी के प्रमाण चीखने लगे हैं। एक मंदी ने चार साल में जितना मारा है, उसका दुबारा आना कितना मारक होगा? ब्रिटेन 1975 के बाद पहली बार दोहरी मंदी में गया है। स्पेन की ग्रोथ में लगातार दूसरी गिरावट हुई है। ग्रीस की ग्रोथ करीब 4.4 प्रतिशत घटेगी। जर्मनी और फ्रांस में भी गिरावट तय है। यूरोपीय आयोग ने दो टूक कहा कि संप्रभु कर्ज, कमजोर वित्तीय बाजार और उत्पादन में कमी का दुष्चक्र टूट नहीं पा रहा है। मंदी लगातार जटिल और लंबी होती चली जा रही है। वर्ष 2008 की शुरूआत में सरकारों ने बाजार में पैसा झोंका, ताकि मांग पैदा हो सके। लेकिन अब यह भी मुमकिन नहीं है।
इस मंदी का इस बार भारत पर कितना प्रभाव होगा, कहा नहीं जा सकता परन्तु इतना निश्चित है कि भारत का भी इस बार बचना लगभग असंभव सा दिख रहा है। ऐसी परिस्थितियों में हमें अपने वैचारिक संघर्ष को बड़ी तेजी से धार देनी होगी। वैचारिक संघर्ष के लिए श्रम के साथ-साथ पैसा भी चाहिए और इसकी व्यवस्था भी हमें खुद ही करनी होगी।
- प्रदीप तिवारी
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पेट्रोल कीमतों के खिलाफ भाकपा का देशव्यापी विरोध कल

लखनऊ 23 मई। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने पेट्रोल की कीमतों में साढ़े सात रूपये प्रतिलीटर की मूल्य वृद्धि की घोर निन्दा करते हुए कहा है कि सरकार का यह कृत्य महंगाई बढ़ाने वाला तथा जनविरोधी है। इतिहास में यह सबसे बड़ी मूल्यवृद्धि है, जिससे आम जनता पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा। भाकपा ने मूल्यवृद्धि को तुरन्त वापस लेने की मांग की है।
भाकपा के वरिष्ठ नेता अशोक मिश्र ने यहां बताया कि वामपंथी दलों ने राष्ट्रीय स्तर पर पूरे देश में कल विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का आह्वान किया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के भाकपा कार्यकर्ताओं का आह्वान किया है कि राष्ट्रीय आह्वान पर वे इस मूल्यवृद्धि के खिलाफ वामपंथी दलों के साथ मिलकर पूरे प्रदेश में गांव-गांव और कस्बों-शहरों में विरोध प्रदर्शन आयोजित करें।
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भाकपा ने की करेली बमविस्फोट के मृतकों को मुआवजा देने की मांग

लखनऊ 23 मई। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने आज इलाहाबाद में करेली क्षेत्र के अंतर्गत गरीबों की झुग्गी-झोपड़ियों में हुए बम विस्फोट की घटना की, जिसमें 4 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है तथा अन्य दर्जनों घायल हैं, को उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया है। भाकपा ने पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) के इस बयान पर गहरी आपत्ति प्रकट की है जिसमें उन्होंने इलाहाबाद में आये दिन बम विस्फोट की बात कही है और बिना गम्भीर जांच किये ही इसे कबाड़ में हुई बम विस्फोट की घटना बताया है।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक के बाद एक संगीन घटनायें प्रदेश की कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं। आज की इलाहाबाद की यह घटना दिल दहलाने वाली है जिसकी गम्भीरता से जांच होनी चाहिए और इस पर सतही बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। यदि यह घटना किसी पॉश इलाके में होती तो शायद सरकार इसे आतंकवादी घटना बताकर रूदन कर रही होती, लेकिन चूंकि यह घटना गरीबों की आबादी में घटी है और मरने वाले तथा घायल गरीब लोग हैं, इसलिए इसे एक सामान्य घटना बताकर टरकाया जा रहा है। भाकपा इस पर कड़ी आपत्ति प्रकट करती है।
भाकपा राज्य सचिव मंडल ने राज्य सरकार से मांग की है कि मृतकों के परिवारों को पांच लाख का मुआवजा दिया जाये, घायलों के समूचे इलाज की व्यवस्था राज्य सरकार करे और घटना के बारे में आपत्तिजनक बयान देने वाली पुलिस महानिरीक्षक के खिलाफ सरकार कड़ी कार्रवाई करे। साथ ही साथ सरकार यह भी स्पष्ट करे कि यदि इलाहाबाद में ऐसी घटनायें आम बात हैं तो सरकार ने उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाये हैं।
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