भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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बुधवार, 16 जून 2010

CPI will fight for land, food, employment: Bardhan

Hyderabad Tuesday, Jun 15 2010 IST Communist Party of India (CPI) General Secretary A B Bardhan today said his party would fight for land to landless, food, employment and protection of democratic values in the country whoever be in the power at the Centre in future.
Addressing a press conference here after conclusion of the three-day National Council and National Executive meetings yesterday, Mr Bardhan said the party had discussed various issues confronting the people and the country during its three-day meeting.
He said the main fight for the party in future was for lands to landless, land reforms, the replacement of the age-old Land Acquisition Act of 1894.
Alleging rampant corruption in the UPA Government at the Centre, Mr Bardhan said Prime Minister Manmohan Singh had no control on his Cabinet ministers, who indulged in corrupt practices. He cited example of telecom scam and corruption in Medical Council of India (MCI).
He alleged that the neo-liberal policies of the Government had sabotaged the process of land reforms by most state governments in the country. He alleged the government was acquiring valuable and fertile agricultural lands in the name of industrialisation, creating SEZs and alienating them to the multinational companies.
He alleged that the Centre and State Governments had no control on mining mafia gangs in the country.
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CPI demands law on industrial accidents

Hindu published the following story today :
HYDERABAD: The Communist Party of India on Tuesday urged the Union government to bring in legislation to cover industrial accidents such as the Bhopal gas leak to enable fixing of liability on the part of operators and enforcing the “perpetrator pays principle.” Party general secretary A.B. Bardhan said the government circulated a draft of the nuclear liability bill, but it did not clearly define liability and its extent, and did not spell out who should be made liable in case of a disaster. “There has to be a bill covering all industrial accidents,” he told reporters here.
Mr. Bardhan said a Group of Ministers constituted by the UPA-1 recommended that a commission be set up to deal with such accidents, but this did not happen. Prime Minister Manmohan Singh had now constituted a Group of Ministers, giving it 10 days to submit a report.
“The Bill should cover liability, compensation and rehabilitation, and the GoM should fix the responsibility of cleaning up toxic wastes in water and land on the Dow Chemicals,” he said. The Prime Minister had given 10 days to the GoM, but “we will give the government time till the next session of Parliament.” Mr. Bardhan alleged that Congress leaders were trying to cover up those responsible for the Bhopal disaster. The then Chief Minister, Arjun Singh, could have scripted the then Union Carbide chief, Warren Anderson's exit from Bhopal on the pretext of law and order. The chief of a multinational corporation could not have gone out of the country without the consent of the then Prime Minister, Rajiv Gandhi.
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गैस पीडितों के साथ अन्याय के लिए कांग्रेस जिम्मेदार : वर्धन

२४ दुनिया डोट कॉम ने आज यह छापा है :

हैदराबाद। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के महासचिव ए.बी. वर्धन ने शुक्रवार को भोपाल गैस त्रासदी पीडितों के साथ अन्याय के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है।उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि यूनियन कार्बाइड कंपनी के तत्कालीन अध्यक्ष वारेन एंडरसन सहित इस औद्योगिक त्रासदी के लिए जिम्मेदार सभी लोगों को फांसी दी जानी चाहिए। सीपीआई नेता चाहते हैं कि एंडरसन को भारत लाया जाए और उस पर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा, ""दुर्भाग्य से सरकार के लिए त्रासदी में हुई 20,000 लोगों की मौत से अधिक महत्वपूर्ण है अमेरिका से रिश्ता।"" उन्होंने कहा कि कांग्रेस को एंडरसन सहित अन्य दोषियों को उचित सजा नहीं दिला पाने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। दोषियों को हल्की सजा मिलने को पीडितों के साथ भारी अन्याय बताते हुए सीपीआई नेता ने मांग की कि ऎसी औद्योगिक त्रासदी से बचाव के लिए अध्यादेश जारी कर नया कानून बनाया जाए और ऎसे मामलों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रमुखों को जिम्मेदार भी बनाया जाए। वर्धन ने स्वीकार किया कि पश्चिम बंगाल सरकार की कुछ नीतियों को लोगों ने अपने पक्ष में नहीं पाया, नतीजतन राज्य में हुए हालिया नगरपालिका चुनावों में वाममोर्चा को हार का सामना करना प़डा। खाद्य सुरक्षा विधेयक मामले पर उन्होंने कहा कि विधेयक का मौजूदा स्वरूप उपयोग के लायक नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्व जनवितरण प्रणाली का ध्यान किए बिना गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को पौष्टिक खाद्य पदार्थ हर कीमत पर मुहैया कराया जाना चाहिए।

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अर्जुन सिंह को घेरने की पूरी तैयारी

डेट लाइन इंडिया ने आज यह छापा है :
नई दिल्ली, 15 जून- अर्जुन सिंह को घेरने की अब पूरी तैयारियां हो चुकी हैं। वारेन एंडरसन को भोपाल से बाइज्जत भगाने और जमानत दिलवाने के अलावा राज्य सरकार के जहाज में दिल्ली पहुंचाने को ले कर अर्जुन सिंह, तत्कालीन कलेक्टर मोती सिंह और तत्कालीन एसपी स्वराज पुरी के खिलाफ मामले दर्ज कर लिए गए हैं। इस इकतरफा कानूनी कार्रवाई में तत्कालीन गृह मंत्री पी वी नरसिंह राव और भारत के राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह से अभियुक्त एंडरसन की मुलाकात का कहीं कोई हवाला नहीं दिया गया। राजीव गांधी सरकार में सबसे ताकतवर मंत्री रहे और राजीव गांधी के निजी दोस्त तथा रिश्तेदार अरुण नेहरू ने तो अब खुल कर मांग कर डाली है कि पी वी नरसिंह राव और एंडरसन के बीच क्या बातचीत हुई थी उसे तुरंत सार्वजनिक किया जाना चाहिए। अरुण नेहरू ने कहा है कि एंडरसन के भागने की घटना के दो हिस्से थे। अर्जुन सिंह कहते हैं कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए उसे दिल्ली भेजा गया था मगर दिल्ली आ कर वह राष्ट्रपति और गृह मंत्री से मिला तो किसी को तो सफाई देनी पड़ेगी। प्रणब मुखर्जी को भी बताना चाहिए कि एंडरसन जब दिल्ली आया था तो क्या हुआ था? नेहरू का सवाल है कि एंडरसन इतना महत्वपूर्ण क्यों था कि उससे तत्काल गृह मंत्री और भारत के राष्ट्रपति मिलने के लिए तैयार हो गए? जब नेहरू को यह याद दिलाया गया कि उस समय विदेश मंत्रालय भी राजीव गांधी ही देख रहे थे तो नेहरू राजीव गांधी के बचाव में दिखार्इ्र पड़े और उन्होंने कहा कि जब अर्जुन सिंह ने एंडरसन को छोड़ ही दिया था तो इसके बाद राजीव गांधी के पास कौन सा विकल्प बचा था? यह बात हजम होने वाली नहीं है। नेहरू ने कहा कि मैं मंत्रिमंडल की राजनैतिक मामलाें की कमेटी का भी सदस्य था और मैं जानता हूं कि कमेटी कैसे काम करती है? नेहरू का सवाल है कि अगर एंडरसन दिल्ली आ भी गया था तो गृह मंत्री से मिलने की उसे क्या जरूरत थी? और इस मुलाकात का इंतजाम किसने किया था? भोपाल के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आरजी सिंह की अदालत में यूनियन कार्बाइड के तत्कालीन अध्यक्ष वारेन एंडरसन को गैस कांड के बाद भोपाल से बाहर भेजे जाने के संबंध में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह, कलेक्टर मोती सिंह तथा पुलिस अधीक्षक स्वराज पुरी के खिलाफ अलग अलग दो मामले प्रस्तुत किए गए। अधिवक्ता फुरखान खान ने अदालत में एक निजी इस्तगासा पेश करते हुए एंडरसन को गलत तरीके से भोपाल से बाहर भेजे जाने के लिए अर्जुन सिंह को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण कायम किए जाने की मांग की। इस मामले की सुनवाई के लिए आगामी 29 जून की तिथी निर्धारित की गई है। इसी प्रकार गैस पीडित महिला उद्योग संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार ने इसी अदालत में पेश अपने आवेदन में एंडरसन को बाहर भेजने को तत्कालीन कलेक्टर मोती सिंह और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक स्वराज पुरी की मिलीभगत बताते हुए उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराए जाने की मांग की। इस मामले की सुनवाई के लिए 24 जून की तिथि निर्धारित की गई है। उक्त दोनों तिथियों को यह निर्धारण होगा कि मामला सुनवाई के लिए लिया जा सकेगा अथवा नहीं। दूसरी तरफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव शैलेन्द्र कुमार शैली ने भी थाना प्रभारी हनुमानगंज को पेश एक शिकायत में एंडरसन की असंवैधानिक रिहाई के लिए अर्जुन सिंह, मोती सिंह और स्वराज पुरी को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रकरण दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा ने भोपाल गैस कांड के दोषी वारेन एंडरसन को भोपाल से बाहर भेजे जाने को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए आज यहां कहा कि सिंह को जनता को बताना चाहिए कि एंडरसन को छोड़ने के लिए दिल्ली से किसका फोन आया था। पटवा ने आज यहां संवाददाताओं से चर्चा करते हुए बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि एंडरसन को छोड़ने के लिए सिंह को दिल्ली से फोन आया था इसलिए सिंह को इस बात का खुलासा करना चाहिए कि यह फोन क्या तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने किया था अथवा केन्द्रीय मंत्री अरुण सिंह या किसी अन्य ने किया था। पटवा ने कहा कि गैस कांड के दौरान यह आशंका भी व्यक्त की गई थी कि यह मात्र एक दुर्घटना नहीं, बल्कि परीक्षण के लिए एक सोझी समझी साजिश के तहत किया गया गैस रिसाव था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस मामले में गठित मंत्रियों के समूह से दस दिन में रिपोर्ट मांगी है तथा मंत्रियों को इस बात की भी जांच करनी चाहिए कि क्या यह एक सोची समझी साजिश थी। एक प्रश्न के उत्तार में पटवा ने कहा कि एंडरसन को छोडने के मामले में अर्जुन सिंह पूर्ण रूप से दोषी हैं और उनको फोन करने वाला उनसे भी बड़ा दोषी है। दो तीन दिसम्बर 1984 को यूनियन कार्बाइड के सयंत्र से गैस रिसाव के दो साल पहले भी तत्कालीन अर्जुन सिंह सरकार ने यूनियन कार्बाइड का बचाव किया था। अर्जुन सिंह सरकार में श्रम मत्री रहे तारासिंह वियोगी ने वर्ष 1982 में राज्य विधान सभा में उठाए गए एक मामले में स्पष्ट कहा था कि यूनियन कार्बाइड सयंत्र में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। वियोगी ने 21 दिसंबर 1982 को विधानसभा में तत्कालीन भाजपा विधायक निर्भय सिंह पटेल द्वारा कार्बाइड कारखाने में दिसंबर 1981 से अक्तूबर 1982 तक हुई दुर्घटनाओं के संबंध में पूछे गए प्रश्न के उत्तार में कहा था कि श्श्यूनियन कार्बाइड कारखाने द्वारा सुरक्षा उपायों की व्यवस्था की गई है और कारखाना अधिनियम के तहत कारखाने को समुचित उपाय करने की हिदायत दी गई है।वियोगी ने विधानसभा को बताया था कि कार्बाइड सयंत्र में वर्ष 1981 में एक दुर्घटना हुई थी लेकिन जनवरी 82 से अक्तूबर 82 के बीच कोई दुर्घटना नहीं हुई। उन्होंने बताया कि एक कर्मचारी सईद खान नहीं बल्कि साबू खान के हाथ में दुर्घटनावश चोट आई, लेकिन दुर्घटना में उसने हाथ नहीं खोया था। वियोगी ने इस बात से इंकार किया था कि सयंत्र में हुई एक बड़ी दुर्घटना में साबू खान ने अपना हाथ खो दिया था। निर्भय सिंह पटेल ने कार्बाइड सयंत्र में वर्ष 1981 से अक्तूबर 1982 तक हुई दुर्घटनाओं के अलावा यह जानना चाहा था कि क्या 14 अक्टूबर 1982 को हुई बड़ी दुर्घटना में सईद खान को अपना हाथ गंवाना पड़ा था। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के पुत्र और कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने कहा है कि वे अपने पिता अर्जुन सिंह की भोपाल गैस त्रासदी को लेकर चुप्पी पर कुछ नहीं कह सकते, क्योंकि वह उनके अधिकृत प्रवक्ता नहीं है। अजय सिंह ने कहा कि यह मेरे पिता को तय करना है कि उनको कहां और क्या कहना है और मेरा इससे कुछ लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि एक पुत्र के नाते यह उनका दायित्व बनता है कि वह इस कठिन समय में अपने पिता के साथ खड़े रहें और वह पूरी जिम्मेदारी से यह काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे अर्जुन सिंह के पुत्र है और इस नाते वे उनका बहुत सम्मान करते हैं। अजय ने कहा कि इस बारे में मेरे पिता को फैसला करना है कि वे कब और कहां कुछ कहेंगे और इस बात से उन का कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि हालांकि वे भोपाल में पैदा नहीं हुए थे उनके दिल में त्रासदी से मरने वाले के लिए उतना ही दुख है जितना किसी आम भोपालवासी को होगा। कांग्रसी नेता ने कहा कि भोपाल से उन्हें बहुत कुछ मिला है और यहां बिताए गए स्कूल के दिनों की मीठी यादें आज भी उनके दिल में ताला हैं। उन्होंने कहा कि 1983 में यूनियन कार्बाइड ने उनके द्वारा चलाई जा रही चुरहट चिल्ड्रन वेल्फेयर सोसाइटी को डेढ़ लाख रुपए दान में दिए थे पर ऐसा तीन या चार अन्य कंपनियों ने भी किया था। अजय ने बताया कि हादसे के वक्त वे विधायक नहीं थे और उस वक्त उन की हैसियत एक मामूली कांग्रेसी कार्यकर्ता की ही थी।
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