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रविवार, 7 जुलाई 2013

30 सितम्बर को भाकपा करेगी बड़ा जमावड़ा

लखनऊ 7 जुलाई। महंगाई, भ्रष्टाचार, खाद्य सुरक्षा के नाम पर धोखाधड़ी, साम्प्रदायिकता, भूमि अधिग्रहण, बदतर कानून-व्यवस्था तथा महंगी बिजली के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी लखनऊ में 30 सितम्बर को एक विशाल रैली का आयोजन करेगी। इस रैली में पार्टी के केन्द्रीय नेतागण भी भाग लेंगे।
उपर्युक्त निर्णय आज यहां सम्पन्न भाकपा की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता का. राम धन ने की।
बैठक को सम्बोधित करते हुए भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि लगातार बढ़ रही महंगाई से जनता बेहद परेशान है। पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार बढ़ाये जा रहे हैं और इसके चलते हर वस्तु के दाम आसमान छू रहे हैं। महंगाई से निजात दिलाने को भाकपा और वाम दल एक व्यापक खाद्य सुरक्षा विधेयक संसद में लाने की मांग कर रहे थे ताकि हर परिवार को हर माह पैंतीस किलो अनाज 2 रूपये प्रति किलो की दर से मिल सके। लेकिन आगामी लोकसभा चुनावों में वोटों पर नजर गड़ाये बैठी केन्द्र सरकार ने एक आधा अधूरा खाद्य सुरक्षा कानून अध्यादेश के जरिये बना डाला जिसके जरिये जनता को भूख से बचाना और खाद्यान्नों की सुरक्षा सम्भव नहीं है। अतएव वाम दल एक व्यापक खाद्य सुरक्षा कानून की लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे।
भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि महंगाई और भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी केन्द्र सरकार से लोगों का मोहभंग हो रहा है जिसके चलते छिन्न-भिन्न हो चुके राजग तथा भाजपा के मन में सत्ता पर आरूढ़ होने का गुबार चढ़ा हुआ है। लेकिन इसके लिए वह कोई जनपरक कार्यक्रम लाने में असमर्थ है और फिर से घनघोर साम्प्रदायिक एजेण्डे पर आगे बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश की जनता भाजपा के इस सपने को चुनावों में धूल धूसरित कर देगी।
भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सरकार अपने चुनावी वायदे पूरे करने से या तो मुकर रही है और जिन वायदों को पूरा करने का उपक्रम किया जा रहा है, उस पर बड़े पैमाने पर सरकारी धन व्यय किया जा रहा है। लैपटॉॅप का वितरण इसका उदाहरण है, जिसे प्रशासन के जरिये बिना किसी खर्चे के जरिये बाटा जा सकता था। यह सरकार बिजली के दाम बढ़ा चुकी है, पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करने को तैयार नहीं है, कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है और शासन-प्रशासन पंगुता की स्थिति में है। प्रदेश का शासक दल हो या मुख्य विपक्षी दल बसपा दोनों अपने जातीय समीकरण के बल पर ही लोकसभा चुनावों में जाना चाहते हैं, जनता के हितों से जुड़े मुद्दों की उन्हें कोई परवाह नहीं है।
इसलिए उत्तर प्रदेश में वामपंथी दल एक नीतिगत और कार्यक्रम आधारित विकल्प बनाने की दिशा में गम्भीरता से विचार कर रहे हैं। भाकपा राज्य कार्यकारिणी ने इस बात पर जोर दिया कि सूबे के चारों वामपंथी दलों को वह साथ लेकर हाल ही में 1 जुलाई को हुए वाम दलों के केन्द्रीय कन्वेंशन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश में अभियान चलाया जाये। इसके लिए भाकपा, माकपा, आरएसपी और फारवर्ड ब्लाक के राज्य नेतृत्व की एक बैठक 8 जुलाई को 11 बजे भाकपा राज्य कार्यालय पर बुलाई गई है।



(शमशेर बहादुर सिंह)
कार्यालय सचिव
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