भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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रविवार, 21 जुलाई 2013

बिजली का निजीकरण पूरी तरह जनविरोधी - भाकपा करेगी तीखा विरोध

लखनऊ- २१ जुलाई, २०१३. निजी क्षेत्र कितना निर्दयी, लुटेरा और झूठा होता है,यह जानना हो तो आगरा में बिजली कंपनी टोरंट पावर के क्रिया-कलापों से आसानी से समझा जा सकता है. इस कंपनी ने आगरा में उपभोक्ताओं को जिस तरह तबाह कर रखा है उससे वहां जनता में भारी आक्रोश है और वहां आये दिन इस कंपनी के क्रिया-कलापों के खिलाफ लोग सडकों पर उतर रहे हैं. फिर भी अपने को समाजवादी कहने वाली उत्तर प्रदेश की सरकार मेरठ, गाजियाबाद, कानपुर तथा वाराणसी की बिजली सप्लाई को निजी कंपनियों के हाथों सौंपने का दुस्साहस करने जा रही है. उनके इस सपने को साकार नहीं होने दिया जायेगा तथा कर्मचारियों, आमजनता तथा अन्य दलों के साथ मिल कर निर्णायक संघर्ष किया जायेगा. उपर्युक्त चेतावनी यहाँ एक प्रेस बयान में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डॉ. गिरीश ने दी. भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि आगरा में जब से बिजली सप्लाई टोरंट पावर को सौंपी गयी है वहां के उपभोक्ता और विद्युत् कर्मी इस कंपनी के क्रिया कलापों, मनमानी और ठगी से आजिज आगये हैं. बिजली की सप्लाई तो कम है ही फाल्ट होने पर जल्दी ही बिजली ठीक नहीं कराई जाती. विरोध करने पर कंपनी के गुर्गे मारपीट पर उतारू हो जाते हैं. मनमाने बिल भेज दिए जाते हैं और बार-बार फरियाद करने पर भी उन्हें सही नहीं किया जाता और दबाब बना कर उपभोक्ताओं से बढ़े हुए बिल बसूले जाते हैं. विद्युत् कर्मचारी ठेके पर रखे जा रहे हैं जहाँ उन्हें न तो पूरा वेतन मिलता है और न ही उनको ड्यूटी के दौरान कोई सुरक्षा ही दी जाती है. आये दिन होने वाली दुर्घटनाओं के चलते कई कर्मचारी मर चुके हैं अथवा घायल होते रहते हैं, लेकिन न तो उन्हें मुआबजा दिया जाता है और नही उनका इलाज ही कराया जाता है. इस स्थिति के चलते आगरा में आये दिन जाम एवं उग्र प्रदर्शन होते रहते हैं और टोरंट का कार्य व्यवहार वहां कानून एवं व्यवस्था की समस्या खड़ी किये हुए है. डॉ.गिरीश ने कहा कि हमारे नीति निर्माताओं ने बहुत सोच समझ कर ऊर्जा जैसे बुनियादी क्षेत्र को सार्वजनिक क्षेत्र के अंतर्गत रखा था लेकिन आज भूमंडलीकरण, उदारीकरण और निजीकरण को समर्पित केंद्र और कई राज्यों की सरकारें ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण पर आमादा हैं. इनमें उत्तर प्रदेश की सरकार भी है जो दाबा तो समाजवादी होने का करती है, पर पूँजीवाद को आगे बढाने का कोई मौका नहीं छोडती. भाकपा की दृढ़ राय है कि ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण जनता की संपत्तियों को पूंजीपतियों को सौंपे जाने का उपक्रम मात्र है, जन हित से इसका कोई लेना देना नहीं. यह जनता की समस्या है, खाली विद्युत् कर्मियों की नहीं. इसलिए इसका विरोध भी जनता को संगठित करके ही किया जायेगा, जिसमें कर्मचारी और मजदूरों को भी शामिल किया जायेगा. डॉ.गिरीश, राज्य सचिव, भाकपा-उत्तर प्रदेश
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