भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

सफल हड़ताल पर बैंक कर्मियों को भाकपा की बधाई

लखनऊ 10 फरवरी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने वेतन पुनरीक्षण की मांग कर रहे बैंक कर्मियों की आज से शुरू हुई दो दिवसीय अखिल भारतीय हड़ताल पर बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी संगठनों को सफल हड़ताल आयोजित करने के लिए बधाई दी है।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा है कि बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों की वेतन पुनरीक्षण की मांगें जायज हैं और केन्द्र सरकार एवं भारतीय बैंक संघ पांच प्रतिशत, साढ़े चार प्रतिशत और आधा प्रतिशत वेतन वृद्धि की बात कर यह साबित कर रहा है कि वह इस मुद्दे को गंभीरता के साथ हल करना नहीं चाहते। बैंकों का आपरेटिंग मुनाफा लगातार बढ़ रहा है और नेट मुनाफे के कम बढ़ने का कारण बैंक के अधिकारी-कर्मचारी नहीं हैं बल्कि इंफ्रा सेक्टर के लिए जबरदस्ती दिलाये गये ऋण हैं जो सरकारी नीतियों के कारण एनपीए में तब्दील हो गये हैं। डा. गिरीश ने विश्वास जाहिर किया है कि वेतन कटवा कर हड़ताल करने वाली बैंक कर्मियों की क्रान्तिकारी जमात को इस बार भी सफलता मिलेगी।
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लेखानुदान नहीं पूर्ण बजट पास कराये राज्य सरकार - भाकपा

लखनऊ 10 फरवरी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल की एक बैठक डा. गिरीश, राज्य सचिव की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य सरकार से मांग की गई कि वह 19 फरवरी से प्रारम्भ हो रहे विधान मंडल के सत्र में पूर्ण बजट लाकर के उसे पास कराये। लेखानुदान लाने की कोई भी कोशिश न तो प्रदेश की जनता के हित में है और न ही स्वयं राज्य सरकार के हित में।
बैठक के बाद यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि ऐसी चर्चा है कि उत्तर प्रदेश सरकार विधान मंडल के आगामी सत्र में लेखानुदान लाने की कोशिश में है। चुनावों के पूर्व लेखानुदान पारित कराने की केन्द्र सरकार की तो मजबूरी होती है लेकिन राज्य सरकार के सामने ऐसी कोई मजबूरी नहीं है। पूर्ण बजट पाना जनता का अधिकार है और राज्य सरकार को जनता के इस हक को नहीं छीनना चाहिए।
भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि इसका यह अर्थ लगाया जा रहा है कि राज्य सरकार लोकसभा चुनावों के पहले जनता के समक्ष अपनी नीतियों को घोषित करने से कतरा रही है और लेखानुदान पारित कराके अपनी जिम्मेदारियों से बचना चाह रही है। जनता को भय है कि लोक सभा चुनाव के बाद सरकार निर्मम तरीके से जनविरोधी बजट लाने को स्वतंत्र होगी और जनता के ऊपर भारी भार थोपा जायेगा। विधान मंडल के वर्तमान सत्र के दौरान सरकार के पास बजट पेश करने और पास कराने के लिए पर्याप्त समय है, अतएव समयाभाव बता कर भी सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती है।
सचिव मंडल की बैठक में लोक सभा चुनावों की तैयारियों पर गम्भीरता से विचार हुआ और निर्णय लिया गया कि भाकपा इन चुनावों में वामपंथी दलों को एकजुट करने की कोशिश करेगी। अपनी चुनावी तैयारियों को गति देते हुए भाकपा ने जनता के ज्वलंत मुद्दों पर क्षेत्रीय रैलियों का आयोजन करने का निर्णय लिया है। अब तक गन्ना किसानों की समस्याओं और फिरकापरस्ती के खिलाफ 2 रैलियां आयोजित करने का निर्णय लिया जा चुका है। 15 फरवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक रैली मेरठ के नौचंदी ग्राउन्ड पर आयोजित की जा रही है जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी भी भाग लेने के लिए आ रहे हैं। दूसरी रैली पूर्वांचल की 20 फरवरी को पड़रौना में आयोजित की जा रही है जिसमें राज्य सचिव एवं सहायक सचिव आदि नेतागण भाग लेंगे।


राज्य सचिव
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