भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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मंगलवार, 31 मार्च 2020

AN OPEN LETTER OF CPI, UP TO CM UP AND CM TAMILNADDU


भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल

22, कैसर बाग, लखनऊ- 226001

दिनांक- 31 मार्च 2020

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भाकपा राज्य काउंसिल का पत्र- 3
By- E- Mail

सेवामें
श्री योगी आदित्यनाथ जी,
मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
लखनऊ- 226001
  
विषय- जनपद महाराज गंज के 60 युवा मजदूरों और अन्य अनेक यूपी वासियों के तमिलनाड्डु में फंसे होने के संबंध में।
महोदय,
हमें भाकपा के प्रदेश भर में फैले कार्यकर्ताओं से और अन्य राज्यों में फंसे यूपी के पीड़ितों से उनकी कठिनाइयों के बारे में अनेक सूचनाएं प्राप्त हो रही हैं, लेकिन हम आपके संज्ञान में केवल उन्हीं चुनींदा को लाते हैं जहां लोग असहनीय स्थिति में पहुँच चुके हैं।
हमें यूपी के जनपद महाराजगंज के ग्राम व पोस्ट- जमुई पंडित के स्थाई निवासी श्री शैलेश चौधरी मो॰ नं॰ – 9566562130 से सूचना मिली है कि उनके साथ इस जनपद के 60 मजदूर तमिलनाड्डु के तिरुप्पुर- जनपद में फंसे हैं और अब वे भूख के कोरोना की गिरफ्त में आचुके हैं।
ये मजदूर  U Trenzed Kolipanye उद्योग में कार्यरत थे जो वर्तमान में Kolipane Annapurna Compound SF No. 105, Kolipanye Andivaalyam, Tiruppur- 641687 में स्थित है।
वहीं फंसे ये मजदूर केवल हिन्दी बोल पाते हैं, अतएव स्थानीय लोगों और प्रशासन से रूबरू होने में उन्हें बेहद कठिनाई होरही है।
किसी तरह प्रशासन की ओर से उन्हें कल प्रति व्यक्ति 1/ 2 किलोग्राम आटा मिला जो रात को ही खत्म होगया। फैक्टरी मालिक भी उनकी कोई मदद नहीं कर रहा। निश्चय ही उन्हें तत्काल मदद नहीं मिली तो वे कोरोना से भले ही बच जायेँ, मगर भूख का अजगर उन्हें निगल जाएगा।
यहां में प्रसंगवश आपके संज्ञान में लाना चाहूँगा कि हमें यूपी भर से भी ऐसी खबरें मिल रही हैं कि अति गरीब लोगों तक प्रति परिवार आधा किलो आटा, आधा किलो चावल, पाव भर आलू और पाव भर दाल संबंधित लोगों ने बांट कर पुण्य कमा लिया और वे भूखों मर रहे हैं। शायद पूंजीवादी व्यवस्था, पूंजीवादी शासन एवं पूंजीवादी मनोव्रत्ति सभी राज्यों में एक ही तरह से काम कर रही है।
पुनः तमिलनाड्डु में फंसे मजदूरों के संबंध में कहना चाहूँगा कि भाकपा, उत्तर प्रदेश के राज्य सहसचिव का॰ अरविन्दराज स्वरूप ने आज तिरुप्पुर के जिलाधिकारी के उपलब्ध नंबरों पर बात करना चाही, पर फोन उठे नहीं।
तदुपरान्त उन्होने उत्तर प्रदेश सरकार के तमिलनाड्डु के लिये नियुक्त नोडल अधिकारी श्री एम॰  देवराज, IAS तथा अपर पुलिस DGP- कार्मिक श्री एल॰ बी॰ एंटनी देव कुमार IPS को ई- मेल के जरिये सारी जानकारी भेजी, जिसकी प्रति मुझे भी प्राप्त हुयी है।
अतएव आपसे अनुरोध है कि उपर्युक्त मजदूरों को तत्काल भोजन एवं आवास मुहैया कराने तथा किसी भी तरह उन्हें महाराजगंज तक पहुँचाने की व्यवस्था ( जहां उन्हें एकांत में मेडिकल सुपरविजन में रखा जा सकता है ) के आदेश देने का कष्ट करें।
शीघ्र कार्यवाही की प्रतीक्षा में।
भवदीय
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा,  उत्तर प्रदेश

प्रतिलिपि आवशक कार्यवाही हेतु- मुख्यमंत्री, तमिलनाड्डु


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सोमवार, 30 मार्च 2020

CPI, UP LETTER TO CM UP AND CM TELANGANA


भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल

22, कैसर बाग, लखनऊ- 226001
दिनांक- 30 मार्च 2020

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भाकपा राज्य काउंसिल का पत्र- 2

सेवामें
श्री योगी आदित्यनाथ जी,
मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
लखनऊ- 226001

विषय- जनपद- सोनभद्र के 6 गरीब युवाओं और अन्य अनेक के तेलांगाना में फंसे होने के संबंध में।
महोदय,
आपके संज्ञान में लाना चाहता हूं कि अन्य अनेक की तरह उत्तर प्रदेश के जनपद- सोनभद्र के चोपन थाना अंतर्गत ग्राम पटवध के चार गरीब नौजवान मजदूरी करने को हैदराबाद गये थे। वे जिस दिन वहाँ पहुंचे उसी दिन कर्फ़्यू लागू होगया और कंपनी बन्द होगयी। भोले- भाले इन युवकों को यदि पहले से चेतावनी होती तो कर्फ़्यू की घोषणा के मात्र दो दिन पहले वे अपनी यात्रा शुरू न करते।
इस समय ये चारों मजदूर वामन टेक्स्ट प्रिंट प्रायवेट लिमिटेड, जो जनपद- हैदराबाद के थाना एवं पोस्ट- घटकेसर के ग्राम-  पीला पाली में है, फंसे हैं। इन मजदूरों के खाने- पीने की कोई व्यवस्था नहीं होपारही है। जो अल्प रकम वे घर से लेकर गये थे वह भी खर्च होचुकी है। वे एकदम भूखों मरने के कगार पर हैं।
इन मजदूरों के नाम और मो॰ नं- निम्न हैं-
1-  संजय, पुत्र- अमरनाथ, 9621065158
2-  संदीप, पुत्र- बंसीलाल, 7030928893 व 8106337408
3-  विनोद कुमार, पुत्र- सुकालू एवं
4-  शुभम, पुत्र- चन्दन
इस संबंध में निवेदन करना चाहता हूं कि भाकपा के राज्य सह सचिव कामरेड अरविन्दराज स्वरूप ने उपर्युक्त के संबंध में गत आधी रात के बाद आपके द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी श्री टी॰ वेंकटेश एवं अपर पुलिस महानिदेशक- रेलवे, श्री संजीव मित्तल को ई मेल भेज कर मदद दिये जाने का आग्रह किया था।
इस पर श्री मित्तल का जबाव मिला है कि 14 अप्रेल तक कुछ भी संभव नहीं है और स्थानीय प्रशासन को सूचना दे दी गयी है। उन्होने स्थानीय प्रशासन के नंबर- 100, 040- 23434343, 9490616780 संपर्क करने हेतु और खाने की व्यवस्था के लिये 040- 21111111 नंबर भेजा है परंतु न तो वहां अभी तक कोई सहायता पहुंची न पीड़ितों का उनसे संपर्क हो पारहा है।
कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपकी ओर से सभी यूपी वासियों की मदद के दाबे दर दाबे किये जारहे हैं, वहीं सारा मामला असहाय पीड़ितों पर ही छोड़ पल्लू झाड़ने की चेष्टा की जारही है।
विपत्ति में फंसे इनके अभिभावकों और हम सबकी प्रबल ख्वाहिश है कि उनके वहां खान पान और सुरक्षा की तत्काल व्यवस्था कराई जाये।
साथ ही तेलांगाना में फंसे इन युवको एवं अन्य यूपी वासी मजदूरों, नागरिकों को शीघ्र से शीघ्र उनके घरों तक पहुंचाया जाये। घर पहुँचने पर जांच के बाद वे एकांतवास में रखे जा सकते हैं।
वे सभी एक ऐसी यातना झेल रहे हैं जिसके लिये वे कतई जिम्मेदार नहीं हैं।
आशा ही नहीं पूरा विश्वास है कि आप इस ज्वलंत समस्या के निदान हेतु शीघ्र ठोस कार्यवाही अवश्य करेंगे। साभिवादन
भवदीय
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

प्रतिलिपि आवश्यक कार्यवाही हेतु- मुख्यमंत्री, तेलांगाना प्रदेश हैदराबाद।



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शनिवार, 28 मार्च 2020

CPI UP LETTER TO CM UP


भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल

22, क़ैसर बाग, लखनऊ- 226001

दिनांक- 28 मार्च 2020


मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के नाम पत्र ( 1 )

सेवामें
श्री आदित्य नाथ जी,
मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
विषय- मुंबई में फंसे उत्तर प्रदेश और उत्तर भारतीय वासियों को वापस घर पहुंचाने के संदर्भ में
महोदय,
संचार माध्यमों से ज्ञात हुआ कि आपने कोरोना से निपटने के प्रयासों के तहत शासन स्तर पर कई कमेटियां गठित कर दी हैं। विश्वास जगा कि अब प्रदेश की जनता का हित होगा।
यह भी ज्ञात हुआ कि मुंबई सहित महाराष्ट्र में फंसे यूपी के लोगों की मदद हेतु भी एक कमेटी और नोडल अधिकारी तय कर दिये गये हैं। इसके लिये नवी मुंबई स्थित यूपी भवन के फोन और मोवायल नंबर – 022-17811861, 9137452239, 9702901598, एवं 9821058315 पर मदद हेतु संपर्क करने की बात भी कही गयी है।
क्योंकि यूपी के महाराष्ट्र और मुंबई में फंसे हुये लोगों की दिक्कतों के बारे में मुझे लगातार सूचनायें मिल रहीं थीं अतएव जनहित मैंने इन नंबरों को फेस बुक और तमाम वाट्सएप ग्रुपों में प्रसारित कर दिया। अनेक संवेदनशील लोगों ने इसे शेयर कर दिया। फलस्वरूप यह सूचना तमाम पीड़ितों और प्रभावितों तक पहुंच सकी।
परिणामस्वरूप तमाम लोगों ने आज उपर्युक्त नंबरों पर मदद हेतु संपर्क किया, पर पूरे दिन फोन नहीं उठे। उदाहरण के लिये मुंबई- बांद्रा ईस्ट बेहराम नगर में तकरीबन 50- 60 व्यक्ति अलीगढ़ जनपद के पहासू व मिर्ज़ा चांदपुर एवं हाथरस के फंसे हुये हैं। उनमें से एक हाथरस निवासी श्री संजय खान भी हैं जिनका मोबायल नंबर- 9536642121 है।
ये सब गरीब मजदूर और दस्तकार वहाँ पाई पाई को मुंहताज हैं। कर्फ़्यू की अचानक घोषणा और उससे पहले ही ट्रेन आदि के बंद होने के कारण वे घर भी नहीं आसके। मुंबई में कोरोना की भयावहता और ऊपर से भोजन और चिकित्सा सेवाओं की कमी ने इन्हें व्यग्र कर दिया है और वे घर आना चाहते हैं।
संजय खान के अनुसार यूपी, बिहार और उत्तरी राज्यों के लाखों- लाख लोग इसी विपत्ति में फंसे हैं और उन्हें वहां तत्काल निकाल कर घर पहुंचाने की जरूरत है।
इन्हें बसों और ट्रेन कंपार्टमेंट्स को मजबूत पोलीथिन से पार्टीशंड करके लाया जा सकता है।
अतएव आपसे अनुरोध है कि अचानक महा विपत्ति में फंसे इन लोगों को शीघ्र अतिशीघ्र अपने घरों को पहुंचाने को ठोस कदम उठायेँ। इस महायज्ञ में केन्द्र सरकार की मदद लेना भी अपरिहार्य होगा। सधन्यवाद।
भवदीय

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा,  उत्तर प्रदेश

प्रतिलिपि- सभी संचार माध्यमों को।



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शुक्रवार, 27 मार्च 2020


प्रकाशनार्थ-

उत्तर प्रदेश से बाहर फंसे यूपी वालों के हालात बेहद संगीन

तत्काल और ठोस कदम उठाये राज्य सरकार: भाकपा

लखनऊ- 27 मार्च 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि वे देश के विभिन्न राज्यों में फंसे उत्तर प्रदेश के श्रमिकों और अन्य नागरिकों को अपने घर वापस लाने अथवा उनको वहीं हर तरह की सुरक्षा दिलाने को तत्काल ठोस कदम उठाये।
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि उन्हें उत्तर प्रदेश के जिलों जिलों से अपने पार्टी साथियों से रिपोर्टें मिल रही हैं कि उनके जनपदों के तमाम लोग पूर्व घोषणा के बिना अचानक हुये लाक डाउन के चलते दिल्ली, बंबई, कलकत्ता तथा तथा देश के अन्य राज्यों में फंसे हैं और वे भुखमरी के कगार पर पहुँच चुके हैं। कुछ लोगों ने उनसे संपर्क भी किया है और मीडिया भी खौफनाक तस्वीरें बयां कर रहा है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रीजी ने यूपी में फंसे अन्य राज्यों के लोगों को उनके घर पहुंचाने और अन्य राज्यों से ऐसी ही अपेक्षा की थी और आज उन्होने अधिकारियों की नोडल कमेटी भी बना दी है। लेकिन बाहर फंसे लोगों के हालात इतने संगीन हैं कि तनिक भी ढिलाई भारी हानि पहुंचा सकती है।
समस्या की गंभीरता को देखते हुये शासन से वार्ता करने के प्रयास भी किये लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के फोन उठे नहीं। भाकपा पुनः मांग करती है कि यूपी के लोगों की रक्षा करे यूपी सरकार।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा,  उत्तर प्रदेश

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शनिवार, 14 मार्च 2020


प्रकाशनार्थ-

जुर्माना बसूल अध्यादेश को तत्काल वापस ले यूपी सरकार: भाकपा

लखनऊ- 14 मार्च, 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने कल योगी सरकार द्वारा जारी किए गये यूपी रिकवरी फार डेमेज टू पब्लिक एंड प्रायवेट प्रापर्टी अध्यादेश को प्रदेश की जनता और न्यायव्यवस्था के लिये आघात बताया है और इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है।
भाकपा राज्य सचिव मण्डल ने आरोप लगाया कि भाजपा और उसकी सरकारें सदैव से संविधान और न्याय की व्यवस्था की धज्जियां बिखेरती रही हैं। जो न्यायिक फैसला उनके हित में होता है उसे मानती हैं और जो उनके लक्ष्यों के विपरीत होता है उसे ठुकरा देती हैं। बावरी मस्जिद ध्वंस प्रकरण में भी उन्होने राष्ट्रीय एकता परिषद और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की धज्जियां बिखेर कर रख दी थीं।
अब सप्ताह भर पहले उत्तर प्रदेश के उच्च न्यायालय द्वारा पोस्टर हटाने के आदेश को इस सरकार ने न केवल ढीढ्ता से ठुकरा दिया अपितु उसके विरूध्द सर्वोच्च न्यायालय में जा पहुंचे। और जब वहाँ से भी इनके कुक्रत्य को हरी झंडी नहीं मिली तो सरकार अध्यादेश लेकर आगयी।
इस सरकार को जनता के हितों की कतई कहीं फिक्र नहीं। ओला, वारिश और तूफान से हुयी जन- धन हानि की इसे फिक्र नहीं, बेरोजगारों की कोई चिन्ता नहीं, अपराध और अपराधियों पर इसका कोई अंकुश नहीं, महंगाई की तरफ इसका कोई ध्यान नहीं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवायें इसने पंगु कर रखी हैं, विकास योजनाओं में कमीशनखोरी धड़ल्ले से चल रही है, इसके चहेते अफसर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, कई पर आपराधिक मुकदमे कायम होरहे हैं, दफा 144 लगा कर पुलिस- प्रशासन को राजनैतिक हथियार बना कर यह जनता, जनांदोलन और विपक्ष को कुचल रही है धर्म का लबादा ओढ़ कर अधार्मिक आचरण कर रही है।
लोगों को कोरोना से उतना खतरा नहीं जितना इस सरकार से खतरा है।
भाकपा इस अध्यादेश का कड़ा विरोध करती है और इसको तत्काल वापस लेने की मांग करती है।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश  

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बुधवार, 11 मार्च 2020


दिल्ली के दंगा पीड़ितों की मदद हेतु धन एकत्रित करें
शीघ्र से शीघ्र भेजे जाने की भाकपा की अपील

दिनांक- 11 मार्च 2020,

प्रिय साथी,
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद ने सभी राज्य कमेटियों से आग्रह किया है कि वे दिल्ली के दंगा पीड़ितों की मदद के लिये आम जनता से धन एकत्रित कर शीघ्र भेजें। आप जानते ही हैं कि राज्य प्रायोजित दिल्ली के भीषण दंगों में 55 से अधिक लोग मारे गये हैं, सैकड़ों गंभीर रूप से घायल हुये हैं, तमाम घर उजड़ चुके हैं और अरबों- खरबों की संपत्ति का नुकसान हुआ है। इन्हें हम सबकी सहायता की जरूरत है।
यूपी में भी विगत दिनों सरकार की दरिंदगी के चलते लगभग दो दर्जन लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा है, सैकड़ों घायल हुये हैं और लोगों की संपत्तियों की बरवादी हुयी है।
अतएव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी अपनी सभी जिला इकाइयों से अपील करती है कि वे संवेदनशील नागरिकों और आम जनता से धन एकत्रित कर शीघ्र से शीघ्र राज्य कार्यालय को भेजें।
हम सभी संवेदनशील नागरिकों से अपील करते हैं कि दंगा पीड़ितों को राहत और पुनर्वास के लिये अपना योगदान अवश्य प्रदान करें।
ये धनराशि निम्नांकित खाते में डालें या नकद राज्य कार्यालय पर जमा करें।

CPI, U.P. A/C-
Communist Party of India, U. P. State Council
A/C No. –
353302010017252
353302010017253
IFS Code UBIN 0535338
Union Bank of India, Awadh Clarks Branch, Lucknow
आशा ही नहीं पूरा विश्वास है आप शीघ्र धनराशि एकत्रित कर जमा करेंगे।
सधन्यवाद
आपका साथी

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा,  उत्तर प्रदेश

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सोमवार, 9 मार्च 2020

CPI welcomes High Courts Deccission on Posters in Lucknow


प्रकाशनार्थ-

उच्च न्यायालय ने दिया वसूली पोस्टर हठाने का फैसला
भाकपा ने सरकार से जनता से माफी मांगने की मांग की

लखनऊ- 9 मार्च 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के सचिव मण्डल ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस निर्णय का स्वागत किया जिसके तहत सीएए विरोधी आंदोलनकारियों के लखनऊ में फोटो होर्डिंग लगाने को अवैध ठहराया गया है और उन्हें फौरन हटाने के निर्देश दिये हैं।
उच्च न्यायालय का यह निर्णय ढीठ, तनाशाह और लोकतन्त्र विरोधी सरकार के मुंह पर करारा तमाचा है। सरकार को इस कुक्रत्य के लिये आम जनता से क्षमा मांगनी चाहिये। लेकिन सरकार को अभी भी अक्ल नहीं आयी और वह खीझ मिटाने को उच्च न्यायालय के निर्णय के विरूध्द सर्वोच्च न्यायालय पहुँचने का इरादा जता रही है।
भाकपा सचिव मण्डल ने कहाकि राज्य सरकार के रवैय्ये से लग रहा है कि वह जनता से डरी हुयी है और भयवश वह जनता और उसकी आवाज उठाने वालों के संघर्ष को कुचलना चाहती है। इसका कारण है कि भाजपा और उसकी सरकार लगातार जनता की जेब के धन को पूँजीपतियों की झोली में डाल रही है।
संविधान, लोकतन्त्र, मानवाधिकार और निजता का हनन करने वाली सरकार से उत्तर प्रदेश में लोग, लोकतान्त्रिक शक्तियाँ और लोकतान्त्रिक संस्थाएं निरंतर संघर्षरत हैं और आज का उच्च न्यायालय का निर्णय भी उसी संघर्ष का परिणाम है। निश्चय ही तानाशाहों को सर्वोच्च न्यायालय में भी हार का सामना करना पड़ेगा।
और धीरे धीरे वह समय भी करीब आरहा है जब उत्तर प्रदेश की जनता इस तानाशाह सरकार को इतिहास के कूड़ेदान तक पहुंचा देगी।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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शनिवार, 7 मार्च 2020

मन की बात


जब सरकार न दे साथ
तो पीड़ितों का संबल बन सकता है आपका हाथ
डा॰गिरीश
उत्तर प्रदेश में इन तीन दिनों में प्रक्रति के थपेड़ों ने आम जनजीवन को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान और उसकी फसलों को चौपट कर दिया है। बरवादी की इस दास्तान के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की निष्ठुरता भी सामने आगयी है। आपदा के इस कठिन दौर में भी वह अपने हिन्दुत्व के एजेंडे को ही परवान चढ़ाने में जुटी है।
हानि बहुतरफा है। ओलों, वर्षा और तूफानी हवाओं ने गेहूं व जौ की फसल को जमीन पर लिटा दिया है। खेतों में भरे पानी के कारण वे उठ कर सीधे हो नहीं सकते और वांच्छित अनाज और भूसा दे नहीं सकते। जब तक पानी सूखेगा, आलू जमीन में सड़ कर मलबे में तब्दील हो जायेंगे। काटी जाचुकी तिलहन की फसल की गहाई- ओसाई हो नहीं सकती और जो खेतों में खड़ी है वह काटे जाने से पहले बरवाद हो जायेगी। बुंदेलखंड और दक्षिणाञ्चल के जिलों में होने वाली चना, मसूर और मौंठ जैसी फसलों की रिकवरी असंभव है। टमाटर अब खेतों में ही सड़ेंगे।
जायद की फसल उग रही थी, उसके नन्हें पौधे जमीन में विलीन होगये। आम, नीबू और मौसम के दूसरे फलों के बौर और फूल झड़ गये। आम के बौर को तो चमक भी मार गयी।
ईंट भट्टों पर बनी कच्ची ईंटें मिट्टी के मलबे में तब्दील होगयीं। ग्रामीण और शहरी पशुपालक होली के लिये गोबर की गुलेरियाँ बना कर बेचते हैं और खुद स्तेमाल करते हैं। वे भी पूरी तरह नष्ट होगयीं।
बिजली पत्तन से प्रदेश में लगभग दर्जन भर मौतें  होचुकी हैं। कच्चे मकान और झौंपड़ी नष्ट होचुकी हैं।
बरवादी की चपेट में समूचा उत्तर प्रदेश है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, ब्रज क्षेत्र, मध्य, तराई, बुंदेलखंड, पूर्वोत्तर और दक्षिणपूर्व आफत ने सभी को चपेट में लिया है। लोग हतप्रभ हैं, किसान बेचैन हैं पर प्रदेश सरकार अन्यमनस्क बनी हुयी है। उसका पूरा ज़ोर सीएए विरोधी आंदोलनकारियों से बदला लेने पर केन्द्रित है।  
उत्तर प्रदेश सरकार की प्राक्रतिक आपदाओं की उपेक्षा से इन इन तीन सालों में किसान की आर्थिक स्थिति पंगु बन कर रह गयी है। आए दिन प्रदेश के किसी न किसी हिस्से से किसानों की आत्महत्याओं की खबरें मिलती रहतीं हैं। कई जगह तो पूरे के पूरे किसान परिवार ने मौत को गले लगा लिया।
धार्मिक चोगे में अपना जनविरोधी और किसान विरोधी चेहरा छिपाए बैठी उत्तर प्रदेश सरकार ने आँखें मूँद लीं और फसल बीमा कंपनियों ने घोटालों से तिजौरियाँ भर लीं। नोएडा, जौनपुर एवं प्रदेश के कई अन्य भागों में भूमियों की उचित कीमतें मांगने पर किसान लाठियों से धुने गए तो अयोध्या में श्री राम की मूर्ति लगाने के लिए किसानों से जबरिया भूमि छीनी जारही है।
उत्तर प्रदेश के किसान दोहरी आपदा झेल रहे हैं। एक ओर उन्हें कुदरत के कहर का सामना करना पड़ रहा है तो दूसरी ओर उसे सरकार के डंडे की मार सहन करनी पड़ रही है।
वक्त है कि आम जन और किसान को निदान खोजना ही होगा। संगठित आवाज उठा कर सरकार को बाध्य करना होगा कि वह फसल हानि का सप्ताह के भीतर आंकलन कराये और उन्हें शत प्रतिशत मुआबजा दिलाये। आंकलन कमेटियों में ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, इन चुनावों में हारे हुये प्रत्याशी और किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल किए जाने चाहिये। तैयार रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले ग्राम पंचायत कार्यालय पर चस्पा करना चाहिए ताकि किसान दाबा कर सकें और रिपोर्ट में सुधार किया जा सके। पट्टेदारों और बटाईदारों को सीधे भुगतान किया जाना चाहिए। सभी भुगतान चौपाल लगा कर राष्ट्रीयक्रत बैंकों के चेकों के जरिये किये जाने चाहिए।
इस प्राक्रतिक आपदा से किसानों का होली का त्यौहार फीका पड़ गया। मोदीजी का तो कोरोना वायरस से फीका पड़ चुका है। आम शहरियों का दिल्ली की सरकार प्रायोजित हिंसा और सीएए, एनपीआर और एनआरसी के आंदोलनकारियों के शर्मनाक उत्पीड़न से पड़ चुका है। दर्द उन्होने दिया है मरहम हमें तलाशना होगा।
किसान सभा और वामपंथी कार्यकर्ताओं को तत्काल किसानों और गांवों की तरफ रुख करना चाहिये। मौके पर जाकर अपने स्तर से फसलहानि का ब्यौरा तैयार कर सामूहिक रूप से प्रशासन के समक्ष पेश करना चाहिये।
हम संकल्प करें कि होली का त्यौहार पूरी तरह सादगी से मनायेंगे। आस्था की उन्मत्तता में ईंधन नहीं जलायेंगे। होली पर अनाज के दाने जला कर नष्ट नहीं करेंगे। रंग गुलाल नहीं खेलेंगे। हाथ नहीं मिलाएंगे, गले नहीं मिलेंगे। धूल मिट्टी कीचड़ को हाथ नहीं लगाएंगे। परंपरागत अभिवादन से प्रेम और भाईचारे का इजहार करेंगे।
प्राक्रतिक आपदा, दंगों की तवाही और कोरोना की दहशत के बीच हमारी सामूहिक कार्यवाहियाँ पीड़ितों क
और इससे जो भी आर्थिक बचत हो उसे बरवाद किसानों, दंगों में म्रतकों और विनष्ट संपत्तियों वाले परिवारों तक पहुंचाएंगे। प्राक्रतिक आपदा, दंगों की तवाही और कोरोना की दहशत के बीच हमारे ये सामूहिक प्रयास ही पीड़ितों के लिए मरहम साबित होंगे। संकल्प लें कि हम अपने इन संकल्पों से संवेदन शून्य शासकों को जगायेंगे- नया और सहिष्णु समाज बनाएँगे।



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