भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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सोमवार, 23 दिसंबर 2013

वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाकपा प्रत्याशी डा. पी. एस. पाण्डेय को वोट देकर विजयी बनायें!


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भाकपा राज्य काउन्सिल बैठक में विद्युत् दरों में प्रस्तावित वृध्दि और देवयानी प्रकरण पर पारित प्रस्ताव

बिजली दरों में प्रस्तावित वृध्दि पर भाकपा राज्य काउन्सिल द्वारा पारित प्रस्ताव. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य काउन्सिल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बिजली की दरों में वृध्दि करने के प्रयास की निंदा की है. पार्टी ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह अपने इस इरादे को तत्काल बदल ले. उ. प्र. पावर कारपोरेशन प्रबन्धन ने मौजूदा बिजली की दरों में औसतन १० प्रतिशत की वृध्दि प्रस्तावित की है. शहरी घरेलू उपभोक्ताओं यानि साधारण आदमी के ऊपर १५% की वृध्दि का प्रस्ताव किया गया है. समाजवाद के नाम पर नव-उदारवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने वाली उ.प्र.सरकार ने एक नायाब समाजवादी सुझाव रखा है कि जहाँ घरेलू उपभोक्ताओं से १५% अधिक बसूला जायेगा वहीं वाणिज्यिक उपभोक्तों से ६%, उद्योगों से ५-६% तथा रईसों के फार्म हाउसों से ५% अधिक ही बसूला जायेगा. उत्तर प्रदेश के शहरियों को याद है कि सरकार ने विगत जून में ही बिजली के दामों में औसतन १०.२९% की वृध्दि करके आम लोगों की जेबों पर भारी बोझ डाला था. पावर कारपोरेशन के मौजूदा प्रस्ताव में ४३,३९३ करोड़ रु. की वार्षिक राजस्व आवश्यकता का प्रस्ताव रखा गया है. जिसमें ३५,३९२ करोड़ रु. बिजली खरीदने के लिए रखे गये हैं. उल्लेखनीय है कि कार्पोरेट घरानों, बजाज हिंदुस्तान तथा रिलायंस से खरीदी जाने वाली बिजली का मूल्य प्रति यूनिट ६.०६ रु. से ७.७५ रु. तक होगा. जहाँ एक तरफ कार्पोरेट घरानों को भारी लाभ पहुँचाया जा रहा है वहीं आम शहरी उपभोक्ताओं की जेबों को हल्का कर उनको महंगाई के मकड़जाल में और अधिक फंसाया जा रहा है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य काउन्सिल सरकार से मांग करती है कि इस वृध्दि के प्रस्ताव को तत्काल वापस लिया जाये और विद्युत् दरें प्रति यूनिट इस प्रकार से निर्धारित की जायें कि साधारण उपभोक्ता राहत महसूस करें और उन्हें महंगाई से कुछ राहत मिलती दिखाई दे. भाकपा अपनी जिला इकाइयों का आह्वान करती है कि वो इस वृध्दि का हर स्तर पर विरोध करें और १ जनवरी से सभायें नुक्कड़ सभायें एवं अन्य कार्यक्रम आयोजित करना प्रारंभ कर दें. देवयानी प्रकरण पर प्रस्ताव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य काउन्सिल भारतीय विदेश सेवा की अम्रेरिका में तैनात राजनयिक अधिकारी श्रीमती देवयानी खोबरागाड़े को अमरीकी प्रशासन द्वारा हथकडी पहनाने, जघन्य अपराधियों के साथ लाकअप बंद करने तथा निर्वस्त्र कर आपत्तिजनक तलाशी लेने की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा करती है.साम्राज्यवादी अमरीका के समक्ष मानवीय सरोकारों, मानवीय अधिकारों अथवा स्त्री अस्मिता का कोई मूल्य नहीं है. अमरीकी प्रशासन पूर्व में भी अनेकों भारतीय हस्तियों के साथ इस प्रकार का अवान्च्छ्नीय व्यवहार कर चुकी है. यहाँ तक कि तीन वर्ष पहले एक एक हवाई अड्डे पर तत्कालीन भारतीय राजदूत प्रमिला शंकर की भी इसी तरह तलाशी ली जा चुकी है. भाकपा अपनी सभी जिला इकाइयों का आह्वान करती है कि पार्टी के स्थापना दिवस २६ दिसम्बर को साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के रूप में मनायें. विचार गोष्ठियां आयोजित करें और देवयानी प्रकरण के मद्दे नजर अमेरिकी साम्राज्यवाद के पुतले जलाएं.
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भाकपा की राज्य काउंसिल बैठक सम्पन्न - आन्दोलन एवं संगठन संबंधी कई निर्णय लिये गये

लखनऊ 23 दिसम्बर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य कौंसिल ने देवयानी खोबरागढ़े प्रकरण को लेकर 26 दिसम्बर को प्रदेश में साम्राज्यवाद विरोधी दिवस मनाने, बिजली के दामों में संभावित बढ़ोतरी के विरोध में 1 जनवरी से जागरूकता अभियान चलाने, किसानों-गन्ना किसानों की समस्याओं एवं समाज में फूट डालने की साजिशों के खिलाफ क्षेत्रीय स्तर पर रैलियां आयोजित करने, लोकसभा चुनावों की तैयारियां शुरू करने और प्रदेश भर में चुनाव फंड एकत्रित करने का अभियान चलाने के महत्वपूर्ण निर्णय लिये हैं।
उपर्युक्त निर्णय यहां सम्पन्न भाकपा की दो दिवसीय राज्य कौंसिल की बैठक में लिये गये। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता लोकपाल सिंह, कान्ती मिश्रा एवं हामिद अली के संयुक्त अध्यक्ष मंडल ने की।
बैठक को सम्बोधित करते हुए भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा फैलाये गये भ्रष्टाचार एवं आसमान तोड़ महगाई से परेशानहाल जनता कांग्रेस को सबक सिखाने पर उतारू है लेकिन वह भाजपा को भी उसकी फूट डालने वाली और कांग्रेस के समान आर्थिक नीतियों के कारण पसन्द नहीं करती। जहां उसे एक नीतिगत मुद्दों पर काम करने वाला साफ-सुथरा विकल्प मिलेगा वह उसको विजयी बनाने को उत्सुक है। दिल्ली के चुनाव परिणामों से यह साबित हो गया है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार जिस तरह से किसानों-कामगारों के उत्पीड़न में लगी है, दंगे रोकने में अपनी ढिलाई को सिद्ध कर चुकी है, कानून-व्यवस्था समेत सभी मोर्चों पर पूरी तरह पिट चुकी है तथा जनता की नजरों में गिर चुकी है। अब शासक दल साम्प्रदायिकता रोकने के नाम पर और अपने जनाधार के खिसक जाने की वजह से गुण्डे, बाहुबली, माफियाओं एवं संदिग्ध चरित्र वाले धनबलियों को चुनाव मैदान में उतार रहा है। उत्तर प्रदेश की जनता सारे खेल को समझ रही है।
डा. गिरीश ने कहा कि आम जनता भाकपा को एक साफ सुथरी, पूर्णतः धर्मनिरपेक्ष एवं जनता के हितों के लिए संघर्षशील पार्टी मानती है। हम उत्तर प्रदेश में अन्य वाम दलों, कुछ छोटे मगर साफ सुथरे दलों को साथ लेकर लोक सभा चुनावों में जाने की कोशिश करेंगे। नये और बदले वातावरण में उत्तर प्रदेश में वामपंथ को अपनी शक्ति बढ़ानी है। उन्होंने कहा कि भाकपा सीमित सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
भाकपा राज्य कौंसिल बैठक में निर्णय लिया गया कि देवयानी खोबरागढ़े के साथ अमरीका में किये गये दुर्व्यवहार के खिलाफ एवं साम्राज्यवादी अमरीका की काली करतूतों को उजागर करने को 26 दिसम्बर को समूचे उत्तर प्रदेश में साम्राज्यवाद विरोधी दिवस मनाया जायेगा और अमरीकी साम्राज्यवाद के पुतले फूंके जायेंगे। यह दिन भाकपा का स्थापना दिवस भी है, अतएव सभायें, गोष्ठियां भी आयोजित की जायेंगी।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बिजली की दरों में बढ़ोतरी की कोशिशों के खिलाफ 1 जनवरी 2014 से लगातार सभायें, नुक्कड़ सभायें एवं जागरूकता अभियान चलाया जायेगा।
एक अन्य निर्णय के अनुसार समाज में फूट डालने की साम्प्रदायिक शक्तियों की साजिशों को उजागर करने तथा किसानों एवं गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किये जायेंगे। पश्चिम का सम्मेलन मेरठ एवं पूर्वांचल का कुशीनगर में फरवरी के पूर्वार्द्ध में आयोजित किये जायेंगे।
भाकपा ने उत्तर प्रदेश में चुनाव फण्ड एकत्रित करने के लिये अभियान चलाने का निर्णय भी लिया है। 2 से 9 फरवरी के बीच भाकपा कार्यकर्ता जनता के बीच चुनाव फण्ड मांगने को निकलेंगे। इसके अलावा पार्टी सदस्यता भर्ती एवं नवीनीकरण अभियान को गति प्रदान करने का निर्णय भी लिया गया।
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रविवार, 22 दिसंबर 2013

भाकपा ने किया ओबामा का पुतला दहन

लखनऊ 22 दिसम्बर. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने अमेरिका में तैनात भारतीय राजनयिक श्रीमती देवयानी खोब्रागढ़े को अमेरिकी प्रशासन द्वारा हथकड़ी पहनाने, जघन्य अपराधियों के साथ लाक-अप में बंद करने तथा निर्वस्त्र कर अवांछित तलाशी लेने के विरोध में आज प्रदर्शनकारी जुलूस निकाला और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का पुतला दहन किया।
सैकड़ों की तादाद में भाकपा कार्यकर्ता आज अमेरिकी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद, बराक ओबामा मुर्दाबाद, देवयानी का अपमान नहीं सहेंगे, नारी का अपमान नहीं सहेंगे, ओबामा माफ़ी मांगो, देवयानी का यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान तथा अमेरिकी साम्राज्यवाद की कब्र बनेगी भारत के मैदानों में आदि नारे लगाते हुए पार्टी के कैसर बाग स्थित कार्यालय से जुलूस बना कर कैसर बाग चौराहा पहुंचे और वहां अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा के पुतले को दहन कर दिया।
इस अवसर पर संपन्न सभा को संबोधित करते हुए भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि साम्राज्यवादी अमेरिका के समक्ष मानवीय मूल्यों, सरोकारों और अधिकारों तथा स्त्री की अस्मिता का कोई मूल्य नहीं है। पूर्व में भी अमेरिकी प्रशासन भारतीय हस्तिओं के साथ इस प्रकार का दुर्व्यवहार कर चुका है। यहाँ तक की तीन वर्ष पहले एक हवाई अड्डे पर तत्कालीन भारतीय राजदूत प्रमिला शंकर की भी इसी तरह से जामा तलाशी ली गयी थी. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी इस घटना को बेहद गंभीरता से लेती है और 26 दिसम्बर, जोकि भाकपा का स्थापना दिवस भी है, को साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाएगी और गोष्ठियों, सभाओं का आयोजन कर देवयानी प्रकरण के विरोध में धरने प्रदर्शन आयोजित करेगी तथा अमेरिकी साम्राज्यवाद के पुतले दहन करेगी।
इस प्रदर्शन में राज्य सहसचिव अरविन्द राज स्वरुप, जिला सचिव मो. खालिक, नौजवान सभा के मो. अकरम, ओ. पी. अवस्थी, सुरेन्द्र राम, फूल चन्द यादव, आनंद तिवारी, डा. पी. एस. पाण्डेय आदि अनेक अग्रणी नेता मौजूद थे।

कार्यालय सचिव
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मंगलवार, 10 दिसंबर 2013

आर्थिक सामाजिक एजेंडा सेट करेगा श्रमिकों का संसद मार्च.

लखनऊ—१० दिसम्बर २०१३- जानलेवा महंगाई, केंद्र और राज्य सरकार द्वारा आमजनता के साथ की गई धोखाधड़ी, राष्ट्रीय संसाधनों एवं जनता के धन की बेशर्मी से लूट, रूडिवादी फूटपरस्त विघटनकारी शक्तियों की कारगुजारियों आदि के विरुध्द एवं केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा निर्धारित १० सूत्रीय मांगों की पूर्ति हेतु देश के सभी ११ केन्द्रीय श्रमिक संगठनों द्वारा १२ दिसम्बर को संसद पर विशाल प्रदर्शन किया जा रहा है. जुलूस प्रातः १० बजे दिल्ली के रामलीला मैदान से शुरू होगा. देश के सबसे प्रथम ट्रेड यूनियन संगठन- आल इण्डिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस(एटक) ने उत्तर प्रदेश में इस प्रदर्शन को भारी सफल बनाने के लिये पूरी तरह कमर कस ली है. प्रदेश के विभिन्न भागों में लगभग दो दर्जन सभाएं, कन्वेंशन एवं रैलियां आयोजित की जा चुकी हैं. कई जगह कार्यकर्ता बैठकें भी आयोजित की गईं हैं. इन कार्यक्रमों में एटक की सचिव का. अमरजीत कौर एवं एटक के राज्य अध्यक्ष का. अरविन्द राज स्वरुप स्वरूप ने भाग लिया. क्योंकि भाकपा इस आन्दोलन को सक्रिय समर्थन प्रदान कर रही है अतएव भाकपा के राज्य सचिव डॉ.गिरीश ने भी कई सभाओं को संबोधित किया और तमाम जिलों का व्यापक भ्रमण किया. एटक सूत्रों के मुताबिक देश के दूर दराज क्षेत्रों से श्रमिकों और कर्मचारियों के जत्थे रवाना होचुके हैं. शेष भागों के जत्थे कल रवाना होंगे.बैंक कर्मी अपनी मांगों को लेकर कल वहां धरना देंगे और १२ दिसम्बर के प्रदर्शन में भी भागीदारी करेंगे. रैली के आयोजकों का दाबा है कि भले ही सांप्रदायिकता को आगे बड़ा कर महंगाई और भ्रष्टाचार तथा इसकी जनक पूंजीवादी व्यवस्था के कारनामों को प्रष्ठभूमि में धकेलने की कोशिश की जा रही हो और वर्तमान चुनाव परिणामों की आढ़ में नव-उदारवाद की नीतियों से पल्ला झाड़ने की साजिश रची जारही हो, यह रैली गरीबों किसानों मजदूरों की रोटी कपड़ा मकान इलाज और पढाई की लड़ाई को मुद्दा बनाने की दिशा में एक ठोस कार्यवाही साबित होगी. कार्यलय सचिव,एटक उत्तर प्रदेश
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सोमवार, 9 दिसंबर 2013

कांग्रेस को दण्डित करना चाहती थी जनता. भाकपा.

लखनऊ 9 दिसम्बर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार आज भाकपा के हजारों-हजार कार्यकर्ताओं ने गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर विभिन्न जिला केन्द्रों पर धरना एवं प्रदर्शनों का आयोजन किया। कई स्थानों पर किसानों ने गुस्से में गन्ने के बण्डल जलाये और सभी जगहों पर आम सभायें कीं। गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर आम सभायें भी कीं गईं जिनको पार्टी के जिले के नेताओं ने सम्बोधित किया। हाथरस में नगर पालिका के प्रांगड़ में आयोजित धरने को सम्बोधित करते हुए भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि सत्तासीन पार्टियों द्वारा चीनी मिले मालिकों के प्रति सदाशयता और किसानों के हितों के प्रति उदासीनता के चलते आज गन्ना किसानों का भारी शोषण हो रहा है। उनका चीनी मिलों पर 2400 करोड़ रूपये का बकाया है जिसका भुगतान अभी तक नहीं कराया गया। सरकार के दावों के बावजूद अभी तक अधिकांश चीनी मिलों ने पेराई करना शुरू नहीं किया है। किसानों को 350 रूपये प्रति क्विंटल दिये जाने की मांग के विपरीत उन्हें 280 रूपये प्रति क्विंटल कीमत देने का वायदा किया गया है और वह भी दो किश्तों में। किसान अपनी दयनीय दशा पर आंसू बहा रहा है लेकिन सारी पार्टियां उनकी इस दशा पर घड़ियाली आसूं बहा रहीं हैं। कल विधान सभा चुनावों के परिणामों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार बढ़ाने जैसी नीतियों से लोग बेहद नाराज हैं। वे आर्थिक नवउदारवाद की नीतियों को समझ रहे हैं। वे यह भी जानते हैं कि भाजपा भी इन्हीं नीतियों की पोषक है और ऊपर से वह समाज को बांटने की कोशिश में लगी हैं। लेकिन जनता किसी भी कीमत पर कांग्रेस को दण्डित करना चाहती थी। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में अन्य कोई विकल्प सामने न होने के कारण उसने भाजपा को वोट दिया। दिल्ली में एक नया विकल्प उसके सामने था अतएव वहां जनता ने भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं दिया जबकि भाजपा ने वहां पूरी ताकत झोंक दी थी। जिलों-जिलों में दिये गये ज्ञापनों में मांग की गई है कि गन्ने का मूल्य रू. 350/- प्रति क्विंटल तत्काल घोषित किया जाये, मिलों पर गन्ने के बकाये का मय ब्याज के भुगतान कराया जाये, समस्त चीनी मिलों को तत्काल चलवाया जाये और उनसे पूरा गन्ना पेराई की गारंटी ली जाये तथा न चलने वाली मिलों का अधिग्रहण किया जाये। गन्ने का समस्त भुगतान एक मुश्त दो सप्ताह के भीतर कराया जाये।
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पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव - क्या सबक ले वामपंथ?

पांच राज्यों - दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं मिजोरम के चुनाव परिणाम हमारे सामने हैं। जहां तक मिजोरम का सवाल है वहां मुख्य मुकाबला कांग्रेस और मिजो नेशनल फ्रंट के बीच था। वहां के परिणाम पूरी तरह से शाम तक साफ हो सकेंगे। हालांकि शुरूआती रूझानों से ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस के सामने मुकाबले में वहां कोई था ही नहीं। 
राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी। भाजपा को वहां भाजपा को 162 सीटों (पिछले चुनावों से 84 सीटें अधिक) पर, कांग्रेस को केवल 21 सीटों पर, नेशनल पीपुल्स पार्टी को 4 सीटों पर, बसपा को 3 सीटों पर, नेशनल यूनियनिस्ट जमींदारा पार्टी को 2 सीटों पर विजय मिली है जबकि 7 सीटों पर निर्दलीय विजयी रहे हैं। मत प्रतिशत की ओर ध्यान दिया जाये तो भाजपा को इस बार 45.1 प्रतिशत वोट मिले हैं जबकि 2008 में उसे केवल 34.3 प्रतिशत वोट ही मिले थे। भाजपा को सबसे बड़ी विजय इसी राज्य से मिली है। कांग्रेस के वोट प्रतिशत में कोई विशेष गिरावट दर्ज नहीं की गई है। उसे 2008 के मुकाबले केवल 3.8 प्रतिशत मत कम यानी 33 प्रतिशत वोट मिले हैं। बसपा के वोटों में भी गिरावट दर्ज की गई है। 2008 में उसे 7.6 प्रतिशत वोट मिले थे जो इस बार घट कर 3.4 प्रतिशत रह गये हैं।
छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार थी। वहां भाजपा को 49 सीटों पर, कांग्रेस को 39 सीटों पर तथा बसपा को 1 सीट पर सफलता मिली है और 1 सीट पर निर्दलीय जीता है। इस राज्य में भाजपा के वोट प्रतिशत में केवल 0.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और उसे 41 प्रतिशत वोट मिले हैं। कांग्रेस के मतों में 1.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है और उसे 40.3 प्रतिशत वोट मिले हैं यानी भाजपा से केवल 0.7 प्रतिशत कम वोट ही मिले हैं। बसपा के मतों में 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और उसे केवल 4.3 प्रतिशत वोट ही मिले हैं।
मध्य प्रदेश में भी भाजपा की सरकार थी। भाजपा को यहां पिछली बार की तुलना में 22 सीटें अधिक यानी 165 सीटों पर विजय प्राप्त हुई है। कांग्रेस को पिछले चुनावों के मुकाबले में 13 सीटें कम यानी केवल 58 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। बसपा की सीटें घटकर केवल 4 रह गयीं हैं जबकि निर्दलीय 3 सीटों पर जीते हैं। अगर वोट प्रतिशत की ओर ध्यान दिया जाये तो भाजपा के वोट प्रतिशत में 7.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और उसे कुल 44.9 प्रतिशत मत मिले हैं। कांग्रेस के वोटों की तादाद में 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और उसे 36.4 प्रतिशत वोट मिले हैं जबकि बसपा के वोटों में 2.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और उसे केवल 6.3 प्रतिशत वोट ही प्राप्त हुए हैं।
दिल्ली में बहुत बड़ा उल्ट-फेर सामने आया है। यहां 15 सालों से कांग्रेस की सरकार थी और यहां अन्ना आन्दोलन के गर्भ से उपजी आम आदमी पार्टी - ”आप“ को बहुत बड़ी सफलता मिली है और त्रिशंकु विधान सभा का गठन होगा। दिल्ली में भाजपा को 31 सीटों पर सफलता मिली है, कांग्रेस को 8 सीटों पर, जनता दल (यूनाईटेड) को 1 सीट पर, शिरोमणि अकाली दल को 1 सीट पर, निर्दलीय को 1 सीट पर सफलता मिली है जबकि ”आप“ ने अप्रत्याशित रूप से 28 सीटों पर कब्जा कर लिया है। वोट प्रतिशत पर ध्यान दिया जाये तो कांग्रेस के वोटों पर 15.3 प्रतिशत की जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई और उसे केवल 25 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए हैं। भाजपा के वोटों में भी 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और उसे केवल 34 प्रतिशत मत प्राप्त हुए हैं जबकि अन्य के वोटों में 14 प्रतिशत की गिरावट आई है। ”आप“ को भाजपा से केवल 2 प्रतिशत कम वोट यानी 32 प्रतिशत वोट मिले हैं।
पांचों राज्यों में भाकपा और वामपंथ को कोई सफलता नहीं मिली है और उन्हें प्राप्त मतों की संख्या कुछ दिनों के बाद ही पता लग सकेगी। परन्तु निश्चित ही वह संख्या नगण्य ही होगी।
मीडिया एक बार फिर चीख-चीख कर तीन-तीन राज्यों में भाजपा के सत्तासीन हो जाने के पीछे ”नमो“ (नरेन्द्र मोदी के लिए मीडिया में प्रचलित शब्द) फैक्टर का बखान कर रहा है परन्तु मत प्रतिशत और सीटों की संख्या से हमें बहुत गंभीरता से इन चुनाव परिणामों की मीमांसा करनी चाहिए और विशेषकर हमारा ध्यान इस ओर होना चाहिए कि इन चुनावों में हम - यानी भाकपा और वामपंथ कहाँ खड़े थे और हमारा हस्र क्या हुआ।
दिल्ली चुनावों में ”आप“ की सफलता ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि जनता का बहुसंख्यक तबका न कांग्रेस को सत्ता में लाना चाहता है और न ही भाजपा को परन्तु एक गुंजायमान विकल्प की अनुपस्थिति उसे लगातार खल रही है और जहां भी उसे जिस तरह का भी विकल्प दिखाई देगा वह उसके पीछे चल देगा। ”आप“ ने केवल दिल्ली की सभी सीटों पर प्रत्याशी उतार कर एक विकल्प देने का हल्का प्रयास किया जिसके नतीजे हमारे सामने हैं। अपने बारे में सोचते, विचारते और कुछ आगे की योजना बनाते समय हमें इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि चुनावों में जनता सरकार बनाने और सरकार हटाने के लिए वोट देने के लिए घरों से निकलती है न कि चार ईमानदारों सांसदों या विधायकों को जिताने के लिए।
”आप“ या इस जैसा कोई अन्य संगठन या पार्टी पूंजीवादी राजनीति का विकल्प कभी साबित नहीं हो पायेंगे। बिना वैचारिक विकल्प के आम आदमी की आज की समस्याओं का हल नहीं खोजा जा सकता। एक विकल्प देने के लिए हमें 542 सीटों पर विकल्प देने की रणनीति के साथ उतरना पड़ेगा।
एक मजबूत कार्यक्रम आधारित वामपंथी विकल्प की योजना बनाते समय हमें इस तथ्य का ध्यान रखना चाहिए। हमें अपने कवच से बाहर निकल कर सैद्धान्तिक प्रतिबद्धता के साथ चुनावी रणनीति के सवाल को भी हल करना ही होगा। वर्तमान राजनीति में कायम रहने के लिए हमें वर्तमान दौर के उन तौर-तरीकों को खोज निकालना होगा जो कहीं भी सैद्धान्तिक विचलन न पैदा करें।
- प्रदीप तिवारी
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भाकपा के नेतृत्व में गन्ना किसानों ने किया पूरे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन

लखनऊ 9 दिसम्बर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार आज भाकपा के हजारों-हजार कार्यकर्ताओं ने गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर विभिन्न जिला केन्द्रों पर धरना एवं प्रदर्शनों का आयोजन किया। कई स्थानों पर किसानों ने गुस्से में गन्ने के बण्डल जलाये और सभी जगहों पर आम सभायें कीं। गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर आम सभायें भी कीं गईं जिनको पार्टी के जिले के नेताओं ने सम्बोधित किया।
हाथरस में नगर पालिका के प्रांगड़ में आयोजित धरने को सम्बोधित करते हुए भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि सत्तासीन पार्टियों द्वारा चीनी मिले मालिकों के प्रति सदाशयता और किसानों के हितों के प्रति उदासीनता के चलते आज गन्ना किसानों का भारी शोषण हो रहा है। उनका चीनी मिलों पर 2400 करोड़ रूपये का बकाया है जिसका भुगतान अभी तक नहीं कराया गया। सरकार के दावों के बावजूद अभी तक अधिकांश चीनी मिलों ने पेराई करना शुरू नहीं किया है। किसानों को 350 रूपये प्रति क्विंटल दिये जाने की मांग के विपरीत उन्हें 280 रूपये प्रति क्विंटल कीमत देने का वायदा किया गया है और वह भी दो किश्तों में।
किसान अपनी दयनीय दशा पर आंसू बहा रहा है लेकिन सारी पार्टियां उनकी इस दशा पर घड़ियाली आसूं बहा रहीं हैं।
कल विधान सभा चुनावों के परिणामों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार बढ़ाने जैसी नीतियों से लोग बेहद नाराज हैं। वे आर्थिक नवउदारवाद की नीतियों को समझ रहे हैं। वे यह भी जानते हैं कि भाजपा भी इन्हीं नीतियों की पोषक है और ऊपर से वह समाज को बांटने की कोशिश में लगी हैं। लेकिन जनता किसी भी कीमत पर कांग्रेस को दण्डित करना चाहती थी। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में अन्य कोई विकल्प सामने न होने के कारण उसने भाजपा को वोट दिया। दिल्ली में एक नया विकल्प उसके सामने था अतएव वहां जनता ने भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं दिया जबकि भाजपा ने वहां पूरी ताकत झोंक दी थी।

जिलों-जिलों में दिये गये ज्ञापनों में मांग की गई है कि गन्ने का मूल्य रू. 350/- प्रति क्विंटल तत्काल घोषित किया जाये, मिलों पर गन्ने के बकाये का मय ब्याज के भुगतान कराया जाये, समस्त चीनी मिलों को तत्काल चलवाया जाये और उनसे पूरा गन्ना पेराई की गारंटी ली जाये तथा न चलने वाली मिलों का अधिग्रहण किया जाये। गन्ने का समस्त भुगतान एक मुश्त दो सप्ताह के भीतर कराया जाये।
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रविवार, 8 दिसंबर 2013

गन्ना किसानों के हित में भाकपा जंग जारी रखेगी.

गन्ना किसानों की मांगों को लेकर भाकपा का धरना/प्रदर्शन जिला मुख्यालयों पर ९ दिसंबर को. लखनऊ—८ दिसंबर – भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डॉ. गिरीश ने बताया कि गन्ना किसानों की समस्यायों के समाधान की मांग को लेकर भाकपा कल प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर धरने/प्रदर्शन आयोजित करेगी. प्रदेश भर में इन प्रदर्शनों की व्यापक तैय्यारियों की खबर भाकपा मुख्यालय को प्राप्त हो रही हैं. धरने/प्रदर्शन के बाद महामहिम राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारियों को सौंपे जायेंगे. इन ज्ञापनों में गन्ने की कीमत रु. ३५० प्रति कुंतल किये जाने, चीनी मिलों पर किसानों के बकाया रु.२४०० करोड़ का तत्काल भुगतान कराये जाने, अभी तक नहीं चलाई गयी मिलों को फौरन चालू कराने, जो मिलें आज भी उत्पादन करने में टालमटोल कर रही हैं उनका अधिग्रहण किये जाने, समस्त गन्ने की पेराई तक मिलें चालू रखे जाने तथा मौजूदा सत्र के गन्ने के समूचे मूल्य का भुगतान दो सप्ताह के भीतर किये जाने की मांगें की जायेंगी. डॉ. गिरीश ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने चीनी मिल मालिकों के सामने घुटने टेक रखे हैं और आज भी गन्ना किसान असहाय महसूस कर रहा है. प्रदेश में दो किसान आत्म हत्याएं कर चुके हैं जबकि कई अन्य आत्मदाह का प्रयास कर चुके हैं. उन्होंने कांग्रेस, भाजपा एवं बसपा पर गन्ना किसानों की समस्यायों पर राजनीतिक रोटियां सेंकने का आरोप भी जड़ा है. उन्होंने कहाकि किसी न किसी रूप में ये पार्टियाँ गन्ना किसानों की मौजूदा हालत के लिये जिम्मेदार रही हैं. और आज जब गन्ना किसान एक मुद्दा बन गया है, ये पार्टियाँ भी उनके हित में लड़ने का नाटक रच रही हैं. भाकपा के धरने में इन दलों की कारगुजारियों का पर्दाफाश भी किया जायेगा. डॉ.गिरीश, राज्य सचिव
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शुक्रवार, 6 दिसंबर 2013

बैंकों में 18 दिसम्बर को रहेगी हड़ताल - विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी

लखनऊ 6 दिसम्बर। बैंक कर्मचारियों की सबसे बड़ी यूनियन - एआईबीईए के आह्वान पर यू.पी. बैंक इम्पलाइज यूनियन की स्थानीय इकाई ने यूनियन बैंक आफ इंडिया की हजरतगंज शाखा के समक्ष दोपहर में विशाल प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन बैंकों से बड़े धन्ना सेठों, औद्योगिक एवं व्यापारिक घरानों द्वारा अरबों-खरबों के ऋण लेकर डकार जाने की प्रवृत्ति के खिलाफ किया गया। इस मुद्दे पर देश के सभी बैंकों में 18 दिसम्बर को आम हड़ताल का आह्वान बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों की यूनियनों ने किया है।
प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए यूपीबीईयू के उपमहासचिव वी. के. सिंह ने कहा कि जहां मार्च 2008 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में खराब ऋण की राशि 39,090 करोड़ रूपये थी वहीं यह राशि पांच साल के अन्दर बढ़कर 1,64,000 करोड़ रूपये पहुंच चुकी है, जिसके कारण बैंकों को अपनी-अपनी बैलेंस शीट में प्रावधान करना पड़ता है जो 2012-13 में 2008-09 के मुकाबले 11,121 करोड़ से बढ़कर 43,102 करोड़ पहुंच चुका है, जिसका असर बैंको के मुनाफे पर पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप बैंकों ने पिछले पांच वर्ष में कुल 3,58,893 करोड़ रूपये के सकल लाभ कमाने के पश्चात रूपये 1,40,266 करोड़ का प्रावधान खराब ऋणों के लिए किया जिसके कारण शुद्ध मुनाफा घट कर केवल 2,18,627 करोड़ रूपये रह गया। उन्होंने बताया कि 1 करोड़ से ऊपर के 7295 ऋण खातों में 68,292 करोड़ रूपये फंसा हुआ है जबकि अकेले 4 सबसे बड़े ऋण खातों में बैंकों का 22,666 करोड़ रूपये फंसा हुआ है।
यूपीबीईयू के सहायक महामंत्री एस. के. संगतानी ने प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जून 2013 में खराब ऋणों का 35 प्रतिशत अर्थात 63,671.00 करोड़ रूपये 30 सबसे बड़े औद्योगिक घरानां के ऋण खातों में बकाया था जिसके कारण वित्तमंत्री को कहना पड़ा कि ”एक अमीर मालिक की कम्पनी बीमार हो, ऐसा नहीं हो सकता, मालिक को कम्पनी में पैसा लगाना ही होगा। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि इस ऋण वसूली के लिए सरकार एवं बैंक सख्त कदम उठायें।
यूपीबीईयू के प्रांतीय उपाध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव ने प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि बैंकों में खराब ऋणों की राशि को तमाम तरीकों से छुपाया जाता रहा है जिसकी वजह से 3,25,000 करोड़ रूपये के ऋणों को अच्छे ऋणों में परिवर्तित किया गया जिसमें रू. 2,70,000 करोड़ रूपये के ऋण औद्योगिक घरानों के थे।
यूपीबीईयू के सहायक महामंत्री दीपू बाजपेई ने प्रदर्शनकारियों को बताया कि रिजर्व बैंक गवर्नर ने खराब ऋणों को अच्छे ऋणों में प्रदर्शित करने की मानसिकता की आलोचना करते हुए एक बार कहा था कि ”एक सूअर को लिपिस्टिक लगा देने से वह राजकुमारी नहीं बन जाता।“
प्रदर्शनकारियों को बैंक कर्मचारियों के प्रमुख नेता सुभाष बाजपेई, परमानन्द, अजीत सक्सेना, वी.के.सक्सेना, जे.एस.भाटिया, डी.के. रावत, ए.के. बाजपेई, ओम प्रकाश, वी.के. श्रीवास्तव, शकील अहमद, ए.के. सिंह गांधी, के.के. मिश्र, रतन लाल आदि शामिल थे।
यूपीबीईयू के अध्यक्ष आर. के. अग्रवाल ने बैंकों में बढ़ते हुए खराब ऋण की प्रवृत्ति को दीमक और घुन लगने जैसा बताया जो पूरी बैंकिंग व्यवस्था को अन्दर ही अन्दर खोखला करता जा रहा है। उन्होंने अफसोस व्यक्त किया कि किंशफिशर एअर लाईन्स पर लगभग 2,780 करोड़ रूपये का बैंकों का बकाया होने के बावजूद उसके मालिक विजय माल्या छुट्टा घूम रहे हैं और उन पर काई कार्यवाही इन ऋणों को वसूलने के लिए नहीं हो रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन ऋणों की वसूली के लिए इन औद्योगिक एवं व्यापारिक घरानों के खिलाफ कड़े कदम उठाये जायें एवं आवश्यकता पड़ने पर इनके मालिकों को जेल में डाला जाये।
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गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

गन्ने पर सस्ती राजनीति कर रहे हैं मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश . भाकपा

लखनऊ—भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डॉ. गिरीश ने मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव द्वारा कल कुशीनगर में दिये गये बयान को किसानों के जले पर नमक छिडकने वाला और पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया है जिसमें उन्होंने दाबा किया है कि किसानों को गन्ने का मूल्य ४० रु. प्रति कुंतल बढ़ा कर दिलाया जारहा है. इस बयान में श्री यादव ने गन्ना किसानों की दुर्दशा के लिये केंद्र सरकार को जिम्मेदार बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है. मुख्यमंत्री के दाबों पर आश्चर्य व्यक्त करते हुये भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि जब गन्ने का राज्य समर्थित मूल्य पिछले वर्ष की दर पर -२८० रु. कुंतल ही दिया जारहा है तो मुख्यमन्त्री ऐसा दाबा क्यों कर रहे है? हाँ यह सच है कि किसानों की दुर्दशा के लिये केंद्र सरकार भी जिम्मेदार है, पर क्या मुख्यमंत्री जी बतायेंगे कि सपा के समर्थन पर टिकी केंद्र सरकार से उन्होंने किसानों की समस्यायों के समाधान के लिए कोई प्रयास क्यों नहीं किया? डॉ. गिरीश ने खेद के साथ कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों से लुटे-पिटे किसानों का धैर्य टूट रहा है और वे आत्महत्यायें कर रहे हैं. कल भी जब मुख्यमंत्री अपना निहित स्वार्थपूर्ण बयान दे रहे थे लखीमपुर का एक और गन्ना-पीड़ित किसान आत्महत्या कर चुका था. क्या कोई उसकी इस दर्दनाक तबाही की जिम्मेदारी लेगा? उन्होंने आरोप लगाया कि जिस बुंदेलखंड में मुख्यमंत्री अपना दौरा कर के आये हैं वहां आज भी कर्ज में डूबे किसानों की जमीन-जायदाद कुर्क किये जारहे हैं और उन्हें हवालातों में ठूंसा जा रहा है. हाथरस का भी एक कर्ज में डूबा किसान राहत के लिये दर-दर की ठोकरें खा रहा है. इन सभी का कसूर यही है कि इन्होंने कर्जमाफी के सपा के बायदे पर यकीन किया. डॉ. गिरीश ने कहाकि रेलवे डेडिकेटेड फ्रेट कारीडोर, नेशनल हाईवे तथा अन्य निर्माण योजनाओं के लिये किसानों की अधिगृहीत जमीनों की एवज में उन्हें कानूनविहित लाभ तक नहीं दिए जारहे. बिजली सप्लाई दी नहीं जा रही, बिजली की कीमतें बढ़ा दी गई हैं और विद्युत् बिल जमा कर देने के बाबजूद उन पर बकाया बता कर उनके कनेक्शन काटे जारहे हैं. गन्ने की लागत बढ गयी है और उसकी कीमत ३५० रु. दिया जाना जरूरी है, लेकिन उन्हें २८० रु. कुंतल वह भी दो किश्तों में दिये जाने का वायदा किया गया है. गत वर्ष का गन्ने का बकाया २४०० करोड़ अभी तक उन्हें दिलाया नहीं गया है. अनेक मिलों ने अभी तक पेराई शुरू नहीं की है. किसानों के इन्हीं सारे सवालों पर भाकपा लगातार आंदोलनरत है और अब ९ दिसम्बर को जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किये जायेंगे. डॉ. गिरीश, राज्य सचिव
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सोमवार, 2 दिसंबर 2013

लखनऊ—भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने कहा है कि कल चीनी मिल मालिकों एवं राज्य सरकारों के मध्य हुआ समझौता आधा-अधूरा है. यह मिल मालिकों के हितों का पोषक और किसान हितों पर कुठाराघात है. समझौते में केवल चीनी मिलें चलाने की बात की गई है, वह भी कागजी जान पड़ती है. पुराने अनुभव बताते हैं कि मिल मालिक दिखावे के लिए मिलें चलाते रहेंगे और किसानों को ठेंगा दिखाते रहेंगे. भाकपा को यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है और वह किसानों के हित में अपना आन्दोलन जारी रखेगी. अतएव ९दिसम्बर को जिला मुख्यालयों पर भाकपा पूरी ताकत से धरने-प्रदर्शन आयोजित करेगी. यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डॉ. गिरीश ने कहा कि गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर लगभग रु.२४०० करोड़ बकाया पड़ा है जिसके भुगतान की कोई बात इस कथित समजौते में नहीं है. साथ ही गन्ने का लागत मूल्य भी बढ़ गया है. खुद राज्य सरकार ने स्वीकार किया है कि रु.२३ प्रति कुंतल लागत बढ़ी है. इसीलिए भाकपा रु.३५० प्रति कुंतल गन्ना मूल्य दिए जाने की मांग कर रही है. भाकपा चाहती है कि मिलों पर समस्त बकायों के भुगतान, गन्ना मूल्य रु.३५० प्रति कुंतल करने, नयी गन्ना सप्लाई का समस्त भुगतान एक साथ करने और मिलों की पूर्ण क्षमता के अनुसार उत्पादन करने जो किसानों के सारे गन्ने की पिलाई तक जारी रहे, की एकमुश्त घोषणा राज्य सरकार करे. डॉ. गिरीश ने दाबा किया कि राजनैतिक दलों एवं किसान संगठनों के दबाव के चलते ही कल का लंगड़ा-लूला समझौता सरकार एवं मिल मालिकों के बीच हुआ है. अतएव किसान हितेषी संपूर्ण समझौता होने तक भाकपा का आन्दोलन जारी रहेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की वादा खिलाफी के कारण बुंदेलखंड के किसानों के ट्रेक्टर और जमीनें नीलाम होरहे है. ९दिस्म्बर के आन्दोलन में यह मुद्दा भी उठाया जायेगा. डॉ. गिरीश,राज्य सचिव.
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