भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

गन्ने पर सस्ती राजनीति कर रहे हैं मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश . भाकपा

लखनऊ—भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डॉ. गिरीश ने मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव द्वारा कल कुशीनगर में दिये गये बयान को किसानों के जले पर नमक छिडकने वाला और पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया है जिसमें उन्होंने दाबा किया है कि किसानों को गन्ने का मूल्य ४० रु. प्रति कुंतल बढ़ा कर दिलाया जारहा है. इस बयान में श्री यादव ने गन्ना किसानों की दुर्दशा के लिये केंद्र सरकार को जिम्मेदार बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है. मुख्यमंत्री के दाबों पर आश्चर्य व्यक्त करते हुये भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि जब गन्ने का राज्य समर्थित मूल्य पिछले वर्ष की दर पर -२८० रु. कुंतल ही दिया जारहा है तो मुख्यमन्त्री ऐसा दाबा क्यों कर रहे है? हाँ यह सच है कि किसानों की दुर्दशा के लिये केंद्र सरकार भी जिम्मेदार है, पर क्या मुख्यमंत्री जी बतायेंगे कि सपा के समर्थन पर टिकी केंद्र सरकार से उन्होंने किसानों की समस्यायों के समाधान के लिए कोई प्रयास क्यों नहीं किया? डॉ. गिरीश ने खेद के साथ कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों से लुटे-पिटे किसानों का धैर्य टूट रहा है और वे आत्महत्यायें कर रहे हैं. कल भी जब मुख्यमंत्री अपना निहित स्वार्थपूर्ण बयान दे रहे थे लखीमपुर का एक और गन्ना-पीड़ित किसान आत्महत्या कर चुका था. क्या कोई उसकी इस दर्दनाक तबाही की जिम्मेदारी लेगा? उन्होंने आरोप लगाया कि जिस बुंदेलखंड में मुख्यमंत्री अपना दौरा कर के आये हैं वहां आज भी कर्ज में डूबे किसानों की जमीन-जायदाद कुर्क किये जारहे हैं और उन्हें हवालातों में ठूंसा जा रहा है. हाथरस का भी एक कर्ज में डूबा किसान राहत के लिये दर-दर की ठोकरें खा रहा है. इन सभी का कसूर यही है कि इन्होंने कर्जमाफी के सपा के बायदे पर यकीन किया. डॉ. गिरीश ने कहाकि रेलवे डेडिकेटेड फ्रेट कारीडोर, नेशनल हाईवे तथा अन्य निर्माण योजनाओं के लिये किसानों की अधिगृहीत जमीनों की एवज में उन्हें कानूनविहित लाभ तक नहीं दिए जारहे. बिजली सप्लाई दी नहीं जा रही, बिजली की कीमतें बढ़ा दी गई हैं और विद्युत् बिल जमा कर देने के बाबजूद उन पर बकाया बता कर उनके कनेक्शन काटे जारहे हैं. गन्ने की लागत बढ गयी है और उसकी कीमत ३५० रु. दिया जाना जरूरी है, लेकिन उन्हें २८० रु. कुंतल वह भी दो किश्तों में दिये जाने का वायदा किया गया है. गत वर्ष का गन्ने का बकाया २४०० करोड़ अभी तक उन्हें दिलाया नहीं गया है. अनेक मिलों ने अभी तक पेराई शुरू नहीं की है. किसानों के इन्हीं सारे सवालों पर भाकपा लगातार आंदोलनरत है और अब ९ दिसम्बर को जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किये जायेंगे. डॉ. गिरीश, राज्य सचिव
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