भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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मंगलवार, 30 सितंबर 2014

भाकपा का सद्भावना सम्मेलन २ अक्टूबर को गाज़ियाबाद में. राष्ट्रीय महासचिव होंगे मुख्य अतिथि.

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी इस बात से बेहद चिंतित है कि देश और प्रदेश में सांप्रदायिक ताकतें बेहद सक्रिय हैं. वे लव जेहाद, गौ रक्षा के नाम पर तथा मुस्लिम मदरसों को निशाना बनाने जैसे कई मुद्दे खड़े कर सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने में जुटी हैं और तनाव पैदा कर दंगे- फसाद करा रही हैं. भाजपा और एनडीए के शासन के चार माह के कार्यकाल में छोटी- बढ़ी लगभग ८०० सांप्रदायिक वारदातें हो चुकी हैं, जिनमें मोदी का चुनाव क्षेत्र बदौदा भी शामिल है. ऊत्तर प्रदेश इन शक्तियों के खास निशाने पर है जहां कार्यरत प्रदेश सरकार कमजोर इच्छा शक्ति के चलते इन पर कारगर अंकुश नहीं लगा पा रही है. भाकपा की गत दिन यहां संपन्न राज्य काउन्सिल की बैठक में इस समस्या पर गहन चिन्तन हुआ और इस नतीजे पर पहुँचा गया कि केन्द्र में सत्तारूढ़ होने के बाद इन शक्तियों के हौसले बुलन्द हैं और संघ के अलग अलग आनुसांगिक संगठन अलग अलग तरह से विष वमन कर रहे हैं. इनकी मंशा लगातार तनाव बनाये रखने की है ताकि लोगों का ध्यान महंगाई, बेरोजगारी, सुशासन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार की विफलताओं से हठाया जासके. लेकिन एक हद तक जनता इन हथकंडों को समझ भी चुकी है और हाल में हुये उपचुनावों में उनको ठुकरा भी चुकी है. लेकिन सांप्रदायिक शक्तियां इतनी शातिर हैं कि नित नये हथकंडे खोज लेती हैं. अतएव भाकपा ने सांप्रदायिक सद्भाव के लिये निरंतर जमीनी स्तर पर काम करने का निश्चय किया है. ‘हम सदभाव के साथ साथ भूख, रोजगार और सुरक्षा के लिए भी अलख जगायेंगे’, भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा है. डा. गिरीश ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत सद्भाव शांति एवं भाईचारे के मसीहा महात्मा गांधी के जन्म दिन से की जारही है. २ अक्टूबर को गाज़ियाबाद में “सांप्रदायिक सदभाव के वास्ते और महंगाई एवं उत्पीड़न के खिलाफ” एक क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया जायेगा. गाज़ियाबाद के रेलवे रोड स्थिति गुरुद्वारे में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि भाकपा के राष्ट्रीय महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी होंगे. मुख्य वक्ता आल इण्डिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की सचिव अमरजीत कौर होंगी जब कि विशिष्ट वक्ता के रूप में स्वयं उन्हें आमंत्रित किया गया है. सम्मेलन के संयोजक जितेन्द्र शर्मा ने सद्भाव और भाईचारे के लिये समर्पित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महानुभावों से इस सम्मेलन में भाग लेने का अनुरोध किया है. डा. गिरीश.
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सोमवार, 29 सितंबर 2014

भाकपा का राज्य सम्मेलन इलाहाबाद में

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का २२वां राज्य सम्मेलन आगामी २८ फरबरी से २ मार्च तक इलाहाबाद में संपन्न होगा. यह निर्णय गत सायं सम्पन्न भाकपा की राज्य काउन्सिल की बैठक में लिया गया. भाकपा के राज्य सचिव डा.गिरीश ने बताया कि पार्टी की इलाहाबाद जिला कमेटी ने अपने यहाँ राज्य सम्मेलन आयोजित करने का अनुरोध किया था, जिसे राज्य काउन्सिल ने सर्व सम्मति से स्वीकार कर लिया. भाकपा के संविधान के अनुसार पार्टी हर तीन वर्षों के अन्तराल पर प्राथमिक शाखाओं से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सम्मेलन आयोजित करती है. राष्ट्रीय स्तर पर इसे महाधिवेशन कहा जाता है. २२वां महाधिवेशन २५ से २९ मार्च तक पुड्डुचेरी में आयोजित होना सुनिश्चित किया गया है. काउन्सिल बैठक में लिये गये निर्णयानुसार प्रदेश में सभी शाखाओं एवं मध्यवर्ती कमेटियों के सम्मेलन ३१ दिसंबर तक जबकि जिलों के सम्मेलन १५ फरबरी तक पूरे कर लिये जायेंगे. भाकपा के इन सम्मेलनों में नयी कमेटियों का चुनाव एवं ऊपर के सम्मेलनों के प्रतिनिधियों का चुनाव किया जाता है. इसके अतिरिक्त गत तीन वर्षों के क्रिया कलापों, मौजूदा राजनीति, रणनीति एवं संगठन संबंधी रिपोर्टों पर चर्चा कर उन्हें पारित किया जाता है. इलाहाबाद में राज्य सम्मेलन आयोजित करने के लिये हरी झंडी मिलने के बाद वहां की जिला काउन्सिल इसकी तैयारियों में जुट गयी है. डा. गिरीश
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रविवार, 28 सितंबर 2014

भाकपा का महंगाई के खिलाफ देशव्यापी आन्दोलन 16 अक्टूबर को

लखनऊ 28 सितम्बर। कमरतोड़ महंगाई तथा सूखा एवं बाढ़ की आपदा से आम जनता को राहत दिलाने के लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 16 अक्टूबर को प्रदेश एवं देश के सभी जिला मुख्यालयों पर व्यापक रूप से धरने एवं प्रदर्शन आयोजित करेगी। यहां राज्य मुख्यालय पर चल रही भाकपा की राज्य कौंसिल की बैठक में इस आशय का निर्णय लिया गया।
भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने बताया कि केन्द्र की मोदी सरकार के 4 माह के कार्यकाल में महंगाई ने भारी छलांग लगाई है जिसके बोझ तले आम जनता पिस कर रह गई है। कैसी विडम्बना है कि जो सरकार महंगाई और भ्रष्टाचार हटाने के नाम पर ही सत्ता में आई थी, वह और भी बेशर्मी से महंगाई बढ़ाने में जुटी है। इसका कारण यह है कि जिस आर्थिक नव उदारवाद की नीतियों को पूर्ववर्ती केन्द्र सरकार लागू कर रही थी, वर्तमान केन्द्र सरकार उन्हीं विनाशकारी नीतियों को और भी मजबूती से लागू कर रही है। स्पष्टतया दिखाई दे रहा है कि मोदी सरकार कारपोरेट घरानों के हितों में बहुत ही बेबाकी से कदम उठा रही है और आम जनता के ऊपर इसका भार लाद रही है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में दिल्ली में सम्पन्न भाकपा की तीन दिवसीय राष्ट्रीय परिषद की बैठक में महंगाई के विरूद्ध देशव्यापी आन्दोलन छेड़े जाने का निर्णय लिया था। पार्टी की राज्य कौंसिल ने उत्तर प्रदेश में सूखा एवं बाढ़ की भारी तबाही को देखते हुए इस आन्दोलन को महंगाई, बाढ़ और सुखाड़ से राहत दिवस के रूप में 16 अक्टूबर को आयोजित किया है। भाकपा राज्य कौंसिल ने सभी जिला इकाईयों को निर्देश दिया है कि वे पूरी मुस्तैदी से इस आन्दोलन को कामयाब बनाने में जुट जायें और आम जनता के बीच जाकर इस मुद्दे पर आन्दोलन की जरूरत को बताया जाये।



कार्यालय सचिव
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भाकपा का महंगाई के खिलाफ देशव्यापी आन्दोलन 16 अक्टूबर को

लखनऊ 28 सितम्बर। कमरतोड़ महंगाई तथा सूखा एवं बाढ़ की आपदा से आम जनता को राहत दिलाने के लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 16 अक्टूबर को प्रदेश एवं देश के सभी जिला मुख्यालयों पर व्यापक रूप से धरने एवं प्रदर्शन आयोजित करेगी। यहां राज्य मुख्यालय पर चल रही भाकपा की राज्य कौंसिल की बैठक में इस आशय का निर्णय लिया गया।
भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने बताया कि केन्द्र की मोदी सरकार के 4 माह के कार्यकाल में महंगाई ने भारी छलांग लगाई है जिसके बोझ तले आम जनता पिस कर रह गई है। कैसी विडम्बना है कि जो सरकार महंगाई और भ्रष्टाचार हटाने के नाम पर ही सत्ता में आई थी, वह और भी बेशर्मी से महंगाई बढ़ाने में जुटी है। इसका कारण यह है कि जिस आर्थिक नव उदारवाद की नीतियों को पूर्ववर्ती केन्द्र सरकार लागू कर रही थी, वर्तमान केन्द्र सरकार उन्हीं विनाशकारी नीतियों को और भी मजबूती से लागू कर रही है। स्पष्टतया दिखाई दे रहा है कि मोदी सरकार कारपोरेट घरानों के हितों में बहुत ही बेबाकी से कदम उठा रही है और आम जनता के ऊपर इसका भार लाद रही है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में दिल्ली में सम्पन्न भाकपा की तीन दिवसीय राष्ट्रीय परिषद की बैठक में महंगाई के विरूद्ध देशव्यापी आन्दोलन छेड़े जाने का निर्णय लिया था। पार्टी की राज्य कौंसिल ने उत्तर प्रदेश में सूखा एवं बाढ़ की भारी तबाही को देखते हुए इस आन्दोलन को महंगाई, बाढ़ और सुखाड़ से राहत दिवस के रूप में 16 अक्टूबर को आयोजित किया है। भाकपा राज्य कौंसिल ने सभी जिला इकाईयों को निर्देश दिया है कि वे पूरी मुस्तैदी से इस आन्दोलन को कामयाब बनाने में जुट जायें और आम जनता के बीच जाकर इस मुद्दे पर आन्दोलन की जरूरत को बताया जाये।



कार्यालय सचिव
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मंगलवार, 23 सितंबर 2014

शकील सिद्दीकी को अवध रत्न सम्मान

लखनऊ 16 सितम्बर। संगम सामाजिक संस्था की ओर से स्थानीय जयशंकर प्रसाद सभागार में आयोजित एक समारोह में उर्दू साहित्यकार मलिकजादा मंजूर अहमद को इम्तेयाज अहमद अशरफी अवध रत्न सम्मान, हिन्दी साहित्य लेखन, अनुवाद, सम्पादन एवं आलोचना के लिए शकील अहमद मलिक मोहम्मद जायसी अवध रत्न सम्मान व सामाजिक सेवा के लिए सिराज मेंहदी को सईद नईम अशरफ अवध रत्न सम्मान से सम्मानित किया। सम्मान के तौर पर सभी को एक प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह तथा शाल प्रदान किया गया। समारोह की अध्यक्षता विख्यात इस्लामिक शिक्षा केन्द्र नदवा के प्रधान मौलाना सईदुर्रहमान आजमी नदवी ने की। इस मौके पर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. खान मसूद अहमद भी मौजूद रहे।
समारोह का संचालन प्रो. अशरफी ने किया। सम्मानित किये जाने के पूर्व प्रो. मलिक जादा मंजूर अहमद तथा शकील सिद्दीकी के साहित्यिक योगदान की चर्चा कई विद्वानों ने करते हुए अवध की गंगा जमुनी तहजीब को आगे बढ़ाने में उनके योगदान की प्रशंसा की। शकील सिद्दीकी के साहित्य और कार्यों पर चर्चा के दौरान शोषण के खिलाफ सड़कों पर उनके संघर्ष को भी याद किया गया।
कार्यक्रम में प्रो. रूपरेखा वर्मा, राकेश, जुगुल किशोर, नईम सिद्दीकी, नदीम अशरफ जायसी, डा. अनवर जलालपुरी, हिमायत जायसी, शमीम अशरफ व जुल्फिकार अली शामिल रहे।

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सोमवार, 22 सितंबर 2014

34 करोड़ का उपभोक्ता बाजार

तमाम देश भारत के साथ कारोबार बढ़ाना चाहते हैं। अमरीका भले आतंकवाद की समाप्ति के लिए करोड़ों डालर पाकिस्तान की सेना को देकर भारत में आतंकवादी घटनायें अंजाम दिलाता रहे परन्तु उसे भारत के इस उपभोक्ता बाजार में अपने सरमायेदारों का हित नजर आता है। इजरायल भी यही चाहता है। जापान भी यही चाहता है। तमाम विकसित यूरोपीय देश भी यही चाहते हैं और चीन भी यही चाहता है। इसीलिए ये सभी भारत के साथ कूटनीतिक रिश्ते बनाये रखना चाहते हैं। केन्द्र में नई सरकार भी इन सभी से अपने रिश्तों को मजबूत करना चाहती है और उसके परिणामों की उसे कतई चिन्ता नहीं है।
पिछले 40-50 सालों में भारत में मध्यम वर्ग का उभार हुआ है और पिछले 23-24 सालों में बाजारवाद ने इस वर्ग के दिलो-दिमाग पर कब्जा कर लिया है। यह वर्ग तमाम उपभोक्ता वस्तुओं - कार, फ्रिज, टीवी, फ्लैट, मोबाईल, कम्प्यूटर को खरीदने के लिए व्याकुल है, भले उसकी आमदनी से इन्हें न खरीदा जा सकता हो। इस वर्ग की पूरी खरीददारी ईएमआई आश्रित है। पिछले दो दशकों से भारत के बैंकिंग क्षेत्र को इस बात की चिन्ता नहीं है कि किसानों, छोटे कारोबारियों, दस्तकारों और छोटे एवं मध्यम उद्योगों को वह कर्जा मुहैया करवा रहा है कि नहीं परन्तु उसे इस बात की बहुत चिन्ता है कि बड़े व्यापारियों और सरमायेदारों को अनाप-शनाप पैसा मुहैया हो पा रहा है कि नहीं। तो फिर मात्र 31 करोड़ की आबादी वाले अमरीका, 13 करोड़ की आबादी वाले जापान, 8 करोड़ की आबादी वाले जर्मनी, 82 लाख की आबादी वाले इजरायल के साथ-साथ तमाम अन्य विकसित पश्चिमी देशों को इतना बड़ा उपभोक्ता बाजार और कहां मिलेगा?
इसीलिए एक बड़ी भूखी, निरक्षर, कुपोषण और रक्ताल्पता का शिकार आबादी वाले देश भारत से तमाम देश अपने सरमायेदारों के हितों को साधने के लिए व्यापारिक सम्बंध बनाने को तत्पर हैं। नए प्रधानमंत्री जापान हो आये हैं और चीन के राष्ट्रपति बरास्ते गुजरात भारत दर्शन को आ चुके हैं। प्रधानमंत्री की कई देशों की यात्रा की तैयारियां चल रहीं हैं तो कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों में भारत आने की होड़ मच गयी है।
हमारे पास उनको बेचने को क्या है? अमरीका और चीन जैसे देशों के पास भी लौह अयस्क का अपार भंडार है। परन्तु वे अपने खनिज श्रोतों का उपभोग करने के बजाय यहां से लौह अयस्क और कोयला आदि खरीदते हैं। क्यों? क्योंकि इनके भंडार सीमित हैं। जब पूरी दुनिया के खनिज भंडार समाप्त हो जायेंगे, तब वे इसका उपभोग करेंगे। दूसरी ओर हमारी सरकारें कच्चा माल बेचने के लिए व्याकुल हैं। लौह अयस्क 46 रूपये टन, फाईन 3160 रूपये टन और कोयला 500 से 700 रूपये टन बेचते हैं और उसके बाद परिष्कृत इस्पात को 34 हजार रूपये टन के हिसाब से खरीदते हैं। नई सरकार की नीतियां क्या हैं - सार्वजनिक क्षेत्र में चलने वाले खाद कारखानों का भट्ठा बैठा दो, सेल की कब्र खोद दो और विदेशी पूंजी को यही माल बनाने के लिए पलक पांवड़े बिछा दो। 
अमरीका के बौद्धिक कामों के लिए अपने बुद्धिजीवियों (बुद्धिजीवियों से यहां आशय अपनी बुद्धि बेचकर भेट भरने वालों से है) को भेजने वाले तथा विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में शामिल हमारे देश को अपने एक पुरातन शहर वाराणसी को स्मार्ट बनाने के लिए दूसरों का मुंह ताकते हुए शर्म क्यों नहीं आती। मोदी जी दावा कर रहे हैं कि उन्होंने विदेशी सरमाये के लिए हिन्दुस्तान में रेड टेप हटा कर रेड कारपेट बिछा दी है। उनके कहने का मतलब पर गौर करना जरूरी है। उन्होंने हिन्दुस्तान के नियम, कायदे, कानून, विस्थापन, पर्यावरण तथा अपने देश की बहुसंख्यक आबादी के हितों - सभी को विदेशी सरमाये पर कुर्बान कर देने की तैयारी कर ली है।
हमें इस बात पर गौर करना होगा कि आज की तारीख में जब कोई विदेशी सरमायेदार उद्योग लगाता है तो विस्थापन और बेरोजगारी का शिकार कितने होते हैं, ठेका मजदूरी के नाम पर कितने मजदूरों का लहू पीने का हम अवसर मुहैया करा रहे हैं और उस उद्योग में कितने लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। सोवियत संघ की मदद से सार्वजनिक क्षेत्र में 4 मिलियन टन का इस्पात कारखाना जब बोकारों में लगा था तो 52000 लोगों को रोजगार मिला था। लेकिन यही उद्योग अगर विदेशी पूंजी लगाती है तो 3000 लोगों को भी रोजगार मुहैया हो जाये तो बहुत होगा। और इसमें अधिसंख्यक रोजगार असंगठित क्षेत्र में मिलेगा या फिर ठेका मजदूरी के जरिये।
पूरी मजदूरी मांगने का खामियाजा मारूति उद्योग के मजदूरों को क्या मिला था, यह हमें याद रखना चाहिए। सरकार तो सरमायेदारों का लठैत बनने के लिए व्याकुल है।
‘ट्रिकल डाउन’ सिद्धान्त (जिसने यह समझाने का प्रयास किया था कि जब पूंजीपति पर्याप्त मुनाफा कमा लेंगे तो पैसा टपक-टपक कर मजदूरों की जेबों में आने लगेगा) हमें आज भी याद होना चाहिए। आज तक तो ऐसा हो नहीं सका। सरमायेदारों का सरमाया तो हजारों गुना बढ़ चुका है लेकिन उनके पास से पैसा मजदूरों की जेब में गिरना तो आज तक शुरू नहीं हो सका।
कमजोर वामपंथ के दौर में यह सब होना ही है। अपनी बर्बादी की राह पर देश चल चुका है। जनता को सरकार के हर कदम और उसके हर संदेश के निहितार्थ लगातार समझते रहना होगा।
- प्रदीप तिवारी
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मंगलवार, 16 सितंबर 2014

उपचुनावों के नतीजे- मतदाताओं ने सांप्रदायिकता को पूरी तरह नकारा -भाकपा

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने देश और उत्तर प्रदेश में हुये लोकसभा उपचुनावों के परिणामों पर संतोष व्यक्त किया है. यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा.गिरीश ने कहा कि हाल में हुए लोकसभा चुनावों में सांप्रदायिकता के ऊपर विकास का चोगा पहना कर भाजपा ने भारी बहुमत हासिल कर लिया था. लेकिन सत्ता में आने के बाद भाजपा अपने असली रूप में सामने आगयी और सांप्रदायिकता के नंगे नाच में लिप्त होगयी. जनता ने भाजपा की सांप्रदायिक नीतियों को पूरी तरह नकार दिया है. भाकपा जनता के इस फैसले को बेहद सकारात्मक मानती है और उसे बधाई देती है. डा. गिरीश ने कहा कि भाकपा ने भी चार विधानसभा सीटों पर उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ा था लेकिन ध्रुवीकरण, धनाभाव एवं सांगठनिक कमजोरियों के चलते उसे अपेक्षित मत नहीं मिल सके. भाकपा महसूस करती है कि चुनावी सफलता के लिये उसे नये सिरे से प्रयास करने होंगे और चुनाव प्रणाली में सुधार खासकर चुनाव की समानुपातिक प्रणाली के पक्ष में अभियान चलाना होगा. आगामी दिनों में भाकपा इन मुद्दों पर गहन चर्चा करेगी. जिन मतदाताओं ने भाकपा के पक्ष में मतदान किया अथवा चुनाव अभियान के दौर में उसके प्रति सहानुभूति जताई, भाकपा उन्हें हार्दिक धन्यवाद देती है. डा.गिरीश
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शुक्रवार, 12 सितंबर 2014

पी.पी.एच. के लखनऊ पुस्तक बिक्री केंद्र का शुभारम्भ.

लखनऊ- वैज्ञानिक समाजवाद, इतिहास, संस्कृति, विज्ञान एवं बालोपयोगी अनूठी पुस्तकों के बिक्री केन्द्र का शुभारम्भ आज यहां २२,कैसरबाग स्थित परिसर में होगया. प्युपिल्स पब्लिशिंग हाउस, नई दिल्ली के सौजन्य से प्रारंभ पुस्तक केन्द्र का उद्घाटन प्रख्यात लेखक-समालोचक एवं प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष श्री वीरेंद्र यादव ने किया. अपने उद्बोधन में श्री यादव ने कहा कि चेतना बुक डिपो के बंद होने के बाद से इस तरह की पुस्तकों के केन्द्र की कमी बेहद अखर रही थी. अब ज्ञान के पिपासु और सामाजिक चेतना के वाहकों को प्रगतिशील साहित्य की खरीद के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. उन्होंने पुस्तक केन्द्र खोलने के लिये पी.पी.एच. एवं स्थानीय संचालकों को बधाई दी. वरिष्ठ रंग कर्मी और भारतीय जन नाट्य संघ के प्रदेश महासचिव राकेश ने कहाकि २२, केसरबाग परिसर विविध साहित्यिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनैतिक गतिविधियों का केन्द्र रहा है. अब सामाजिक आर्थिक बदलाव की चेतना जाग्रत करने वाला साहित्य भी यहाँ मिल सकेगा, यह पाठकों के लिए ख़ुशी की बात है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव डा.गिरीश ने कहा कि ज्ञान की ताकत हर ताकत से बढ़ी होती है, लेकिन सवाल यह है कि ज्ञान का आधार वैज्ञानिक है या पुरातनपंथी. वह सामाजिक परिवर्तन- व्यवस्था परिवर्तन के लिए स्तेमाल होरहा है अथवा लूट और दमन के चक्र को बनाये रखने के लिये. यहां उपलब्ध पुस्तकों से शोषण से मुक्त व्यवस्था निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है. इस अवसर पर भाकपा के राज्य सहसचिव अरविन्दराज स्वरूप, उत्तर प्रदेश ट्रेड यूनियन कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सदरुद्दीन राना, उत्तर प्रदेश महिला फेडरेशन की महासचिव आशा मिश्रा, उत्तर प्रदेश किसान सभा के महासचिव रामप्रताप त्रिपाठी, उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन के महासचिव फूलचंद यादव, भाकपा के जिला सचिव मो. खालिक आदि अनेक गणमान्य अतिथि मौजूद थे जिन्होंने अपनी शुभकामनायें व्यक्त कीं. कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ भाकपा नेता अशोक मिश्रा ने की. पुस्तक केन्द्र के संचालक रामगोपाल शर्मा ने बताया कि केन्द्र प्रतिदिन प्रातः १० बजे से सायं ७ब्जे तक खुला रहेगा. डा. गिरीश
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मंगलवार, 9 सितंबर 2014

का.सुरेन्द्र राम दिवंगत : भाकपा ने शोक जताया.

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य, उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन के अध्यक्ष एवं भारतीय खेत मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय सचिव का.सुरेन्द्र राम का आज निधन होगया. वे ५७ वर्ष के थे गाजीपुर जनपद के ग्राम- लहुरापुर के एक गरीब दलित परिवार में जन्मे का.सुरेन्द्र राम छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय थे. उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से एम.ए.तथा एल.एल.बी. की डिग्रियां हासिल कीं. अपनी शिक्षा के दौरान वहीं वे आल इण्डिया स्टूडेंट्स फेडरेशन में शामिल होगये और उसके अगुआ नेताओं में रहे. उसी दरम्यान वे भाकपा में सक्रिय हुये और उसकी गाजीपुर जनपद काउन्सिल के लगभग दस वर्षों तक सचिव रहे. वे गाजीपुर जिला पंचायत के सदस्य भी निर्वाचित हुये. पिछले २० वर्ष से वे खेतिहर मजदूरों को संगठित करने में जुटे थे. वे निरंतर मार्क्सवाद, लेनिनवाद एवं डा. अम्बेडकर के सिध्दान्तों का अध्ययन करते रहे और उनसे प्रेरणा ग्रहण कर दलितों शोषितों एवं वंचितों के हित में संघर्ष करते रहे. अभी हाल में उन्हें गम्भीर मस्तिष्क एवं ह्रदय आघात लगा और पहले मऊ, वाराणसी और अब लखनऊ के पी.जी.आई में उन्हें भरती कराया गया. लेकिन उनकी हालात में सुधार नहीं हुआ और चिकित्सको की सलाह पर उन्हें गत रात ही उनके पैतृक निवास ले जाया गया जहां आज सुबह ही उन्होंने अंतिम श्वांस ली. उनका अंतिम संस्कार आज गाजीपुर में गंगा के तट पर किया गया जहां बड़ी संख्या में राजनैतिक एवं सामाजिक हस्तियां मौजूद थीं. संकट की इस घड़ी में भाकपा एवं खेत मजदूर यूनियन का नेतृत्व हर स्तर पर उनके साथ खड़ा रहा. आज जैसे ही उनके निधन का समाचार भाकपा के राज्य कार्यालय पर मिला, वहां शोक का माहौल पैदा होगया. उनके सम्मान में पार्टी का झंडा झुका दिया गया. राज्य कार्यालय पर एक शोक सभा का आयोजन किया गया. भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने का. सुरेन्द्र के निधन को शोषित-पीड़ितों के आन्दोलन एवं भाकपा तथा खेत मजदूर यूनियन की अपूरणीय क्षति बताते हुये उन्हें इंकलाबी श्रध्दांजली अर्पित की. उन्होंने शोक-संतप्त परिवार को पार्टी की गहन संवेदनायें प्रेषित कीं. अंत में मौन रख कर उनके कार्यकलापों को याद किया गया. शोकसभा की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश किसान सभा के सचिव का.रामप्रताप त्रिपाठी ने की. भाकपा राज्य सह सचिव अरविन्दराज स्वरूप, उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन के सचिव फूलचंद यादव, भाकपा जालौन के जिला सचिव सुधीर अवस्थी, रामगोपाल शर्मा शमशेर बहादुर सिंह एवं राममूर्ति मिश्रा आदि ने भी श्रध्दा सुमन अर्पित किये. डा.गिरीश, राज्य सचिव
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सोमवार, 8 सितंबर 2014

गन्ना किसानों के पक्ष में भाकपा की मांग.

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने गन्ने का राज्य समर्थित मूल्य रु.३५०.०० प्रति कुंतल निर्धारित किये जाने तथा चीनी मिलों पर गन्ने के बकाये का भुगतान तत्काल कराने की मांग की है. भाकपा ने निजी चीनी मिलों द्वारा चीनी मिलें न चलाने की धमकी को आपत्तिजनक करार देते हुए उन पर कड़ी कार्यवाही किये जाने की मांग की है. यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि कृषि की लागत बढ जाने और सूखे के चलते किसानों को गन्ने की कीमत कम से कम रु.३५० प्रति कुंतल मिलना ही चाहिये. राज्य सरकार को जल्द से जल्द इसकी घोषणा करनी चाहिये. साथ ही चीनी मिलों पर गन्ने के बकायों का तत्काल भुगतान कराने को ठोस कदम उठाये जाने चाहिये. यदि निजी चीनी मिलें मिल न चलाने की धमकियाँ देती हैं तो राज्य सरकार को इनका अधिग्रहण कर स्वयं चलाना चाहिये और केंद्र सरकार को इस मद में राज्य को आर्थिक सहायता मुहय्या करानी चाहिये. भाकपा ने चेतावनी दी है कि यदि उपर्युक्त मामले में शीघ्र समुचित कार्यवाही न की गयी तो भाकपा आंदोलनात्मक कदम भी उठा सकती है. डा. गिरीश
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रविवार, 7 सितंबर 2014

अमितशाह और आदित्यनाथ को जेल भेजो- भाकपा

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मंडल ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि शाह के बयान से स्पष्टतः साबित होगया है कि विकास का भाजपा का नारा ढकोसला मात्र है, और सत्ता हथियाने को वह सांप्रदायिकता को ही कारगर और सबसे अब्बल औजार समझती है. श्री शाह के बयान कि “यदि उत्तर प्रदेश में तनाव बना रहा तभी भाजपा की सरकार बनेगी” की कड़े से कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हुये भाकपा, उ. प्र. के सचिव डा.गिरीश ने कहा कि भाजपा एक साम्राज्यवादपरस्त और पूंजीवादपरस्त पार्टी है और इन्हीं तबकों के हितसाधन में जुटी रहती है. इन्ही वर्गों के हितों को पूरा करने को वह सत्ता हासिल करना चाहती है. सत्ता हासिल करने को भले ही वह विकास का राग अलापे उसका मुख्य औजार सांप्रदायिक विभाजन है. इसी उद्देश्य से उसने उत्तर प्रदेश में होरहे उपचुनावों में एक घनघोर सांप्रदायिक चेहरे- योगी आदित्यनाथ को आगे बढ़ाया. अब अमितशाह के बयान से उसके कुत्सित इरादे पूरी तरह सामने आगये हैं. डा. गिरीश ने इस बात पर गहरा आश्चर्य जताया कि इस तरह की बयानबाजियों अथवा कारगुजारियों का न तो निर्वाचन आयोग संज्ञान लेरहा है न राज्य सरकार. भाकपा की स्पष्ट राय है कि उत्तर प्रदेश सरकार को योगी और शाह के खिलाफ माकूल धाराओं में केस दर्ज कर उन्हें जेल के सींखचों के पीछे भेजना चाहिये. सर्वोच्च न्यायालय ने भी सांप्रदायिकता भडकाने के प्रयासों पर तीखी टिप्पणी करते हुये सांप्रदायिकता को संविधान की मूल आत्मा के विरुध्द बताते हुए इसे फ़ैलाने बढ़ाने वालों को कड़ी फटकार लगाई है. निर्वाचन आयोग को भी इसका संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्यवाही करनी चाहिये. डा.गिरीश
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मंगलवार, 2 सितंबर 2014

सूखा राहत के लिए शीघ्र ठोस कदम उठाये राज्य सरकार.

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने राज्य सरकार से मांग कि है कि वह सूखाग्रस्त इलाकों में राहत के कदम फ़ौरन उठायें. भाकपा ने ललितपुर जनपद को भी सूखाग्रस्त जनपद घोषित किये जाने कि मांग कि है. यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि राज्य सरकार ने सूखे से प्रभावित जिलों को चिन्हित करने में पहले ही देरी कर दी है. ललितपुर जिला भी सूखे से पूरी तरह प्रभावित है मगर उसे सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है. भाकपा मांग करती है कि राज्य सरकार इस मामले में फौरन ठोस कदम उठाये ताकि राज्य कि खेती किसानी को और अधिक बर्बाद होने से बचाया जासके. डा.गिरीश.
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