भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2021

उन्नाव कांड पर भाकपा की प्रतिक्रिया

उन्नाव कांड की भाकपा ने तीव्र भर्त्सना की। पीढ़ित परिवार के प्रति संवेदना जतायी

घटना की सीबीआई से जांच और तीसरी बिटिया को एम्स भेजने की मांग की 

राज्य सरकार से जघन्य वारदातों की नैतिक ज़िम्मेदारी लेने की मांग दोहराई

 लखनऊ- 19 फरबरी 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने उन्नाव की घटना, जिसमें कि दो बालिकाओं की मौत हो गयी और तीसरी गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती है, की कठोर शब्दों में निन्दा की और पीढ़ित परिवार के प्रति गहरी सहानुभूति जताई है।

यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहाकि उत्तर प्रदेश में महिलाओं एवं बालिकाओं के साथ घट रही असंख्य वारदातों में से ये एक विशिष्ट वारदात है। यह हाथरस कांड की पुनराव्रत्ति है। गज़ब की बात यह है कि राजधानी लखनऊ से सटा जिला- उन्नाव महिलाओं के लिये दुर्दांत स्थल बन गया है जहां एक से बढ़ कर एक लोमहर्षक घटनायें लगातार होरही हैं।

भाकपा ने कहाकि ये वारदातें जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से टीवी चेनलों पर लगातार चल रहे उस विज्ञापन को मुंह चिढ़ा रही हैं जिसमें अलापा जारहा है कि यूपी की तो अब बात ही अलग है। हां यूपी की बात वाकई अलग है क्योंकि यह अपराध और अत्याचार प्रदेश बन गया है; भाकपा ने कहा है।  

भाकपा ने मांग की कि इससे पहले कि घटना और घटनास्थल के सबूत धूमिल हों, घटना की जांच सीबीआई को सौंप देनी चाहिये, और उसे कम से कम समय में जांच पूरी करने के निर्देश दिये जाने चाहिये। पीढ़ित परिवार भी शुरू से सीबीआई जांच की ही मांग कर रहा है। दूसरे- चिकित्साधीन बिटिया को एयर- एंबुलेंस से एम्स, दिल्ली तत्काल भेजा जाना चाहिये, ताकि उसके जीवन को बचाया जासके। उसका बचाया जाना अपराधियों को अंजाम तक पहुंचाने के लिये भी जरूरी है।

इससे पहले कि विपक्ष सरकार से त्यागपत्र की मांग करे, राज्य सरकार को इन वारदातों की नैतिक ज़िम्मेदारी तो लेनी ही चाहिए; भाकपा ने स्पष्ट कहा है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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गुरुवार, 18 फ़रवरी 2021

किसान आंदोलन के समर्थन में उत्तर प्रदेश में भाकपा मैदान में

 

लखनऊ- दिनांक- 18- 2-2021, संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा देश भर में रेल रोकने के आह्वान के समर्थन में उत्तर प्रदेश में आज भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी भी सड़कों पर उतरी। तीनों क्रषी क़ानूनों को तत्काल रद्द करने, एमएसपी को लागू कराने को कानून बनाने, विद्युत बिल 2020 को रद्द करने, पेट्रोल डीजल रसोई गैस की कीमतें आधी करने, महंगाई पर कारगर रोक लगाने, गन्ने का खरीद मूल्य घोषित करने तथा उन्नाव की बालिकाओं के साथ हुयी हैवानियत की जांच सीबीआई से कराने आदि सवाल भाकपा के आन्दोलन के केन्द्र में रहे।

राज्य सरकार की तमाम दमनात्मक कार्यवाहियों के बावजूद भाकपा और विपक्षी दलों के संयुक्त मोर्चे ने किसानों के समर्थन में उरई में का॰ कैलाश पाठक के नेत्रत्व में रेल रोकी। बाद में सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। फ़ैज़ाबाद में भाकपा जिला सचिव का॰ रामतीरथ पाठक के नेत्रत्व में रेल रोकने के प्रयास में दर्जनों कार्यकताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। कानपुर में भी भाकपा, माकपा और किसान यूनियन के दर्जनों कार्यकर्ता गिरफ्तार कर लिए गये। जौनपुर में जिला सचिव कल्पनाथ गुप्ता एवं सालिगराम पटेल आदि को सुभ से ही घर में नजरबंद कर लिया गया। बाराबंकी में भी किसान सभा के पदाधिकारियों को घर पर ही पुलिस ने पाबंद कर दिया।

राज्य सरकार की तमाम पाबन्दियों के बावजूद भाकपा ने जगह जगह स्वतंत्र और संयुक्त रूप से धरने प्रदर्शन आयोजित किये और महामहिम राष्ट्रपति और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन दिये। इन ज्ञापनों के माध्यम से मांग की गयी है कि क्रषी और किसान विरोधी तीनों काले क़ानूनों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाये। एमएसपी को लागू कराने के लिये कानून बनाया जाये। दिल्ली के आसपास जुटे किसानों के धरनों के इर्द गिर्द खड़े किये गये अवांच्छित और अमानुषिक अवरोध तत्काल हठाये जायेँ। तीन साल से रोके गये गन्ने का समर्थन मूल्य तत्काल घोषित किया जाये। गन्ना किसानों के चीनी मिलों पर बकाये का भुगतान मय ब्याज के कराया जाये। श्रम क़ानूनों मेँ किये गये प्रतिगामी परिवर्तनों को तत्काल रोका जाये। विद्युत अधिनियम 2020 को रद्द किया जाये।

पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें आधी की जायें। अथवा उन्हें जीएसटी के अंतर्गत लाया जाये। पूर्ववर्ती मूल्य नियंत्रण प्रणाली लागू की जाये। महंगाई पर कारगर रोक लगायी जाये। कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने को गरीब और आम आदमी के ऊपर आर्थिक बोझ लादना रोका जाये। सार्वजनिक क्षेत्र को बेचना तत्काल बन्द किया जाये।

युवाओं को रोजगार उपलब्ध्ध कराया जाये। काम के पूरे दाम दिये जायें। उत्तर प्रदेश मेँ आंदोलनों और आंदोलनकारियों पर दमन रोका जाये। कुशासन और भ्रष्टाचार की स्थिति मेँ सुधार किया जाये। उन्नाव में तीन दलित बालिकाओं के साथ हुयी हैवानियत की जांच सीबीआई से कराई जाये।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मण्डल ने देश और प्रदेश में शांतिपूर्ण तरीके से रेल रोकने और आंदोलन करने के लिए किसानों, भाकपा कार्यकर्ताओं और अन्य दलों के कार्यकर्ताओं को क्रान्तिकारी बधाई प्रेषित की है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा उत्तर प्रदेश

 

 

 

 

 

 

 

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शनिवार, 6 फ़रवरी 2021

किसान आंदोलन पर हठधर्मिता त्यागे केन्द्र सरकार


सफल रास्ताजाम एवं व्यापक विरोध प्रदर्शन के लिये भाकपा ने किसानों और कार्यकर्ताओं को दी बधाई

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा खड़े किए गये तमाम अवरोधों के बावजूद सफल रहा आंदोलन: भाकपा ने दमन की निन्दा की

किसान आंदोलन की आड़ में घोर जनविरोधी और लोकतंतर्विरोधी एजेंडे पर काम कर रही हैं भाजपा सरकारें: डा॰ गिरीश

गन्ना मूल्य घोषित करने और चीनी मिलों पर गन्ने के बकाए को किसानों को दिलाने की मांग भी की गयी

लखनऊ- 6 फरबरी 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल ने आज देश भर में सफलतम चक्का जाम के लिये देश के किसानों- कामगारों को क्रांतिकारी बधाई दी। भाकपा ने उत्तर प्रदेश के भाकपा, अखिल भारतीय किसान सभा, खेत मजदूर यूनियन एवं वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं को विशिष्ट बधाई दी जिन्होने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा खड़े किए गए तमाम अवरोधों के बावजूद उत्तर प्रदेश के जिलों जिलों में धरने, प्रदर्शन एवं विरोध सभाएं आयोजित कीं और ज्ञापन सौंपे।

गत रात्रि कुछ किसान नेताओं द्वारा अचानक उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड एवं दिल्ली में हाईवे जाम न करने की घोषणा से असमंजस की स्थिति पैदा होगयी थी, लेकिन भाकपा और सहयोगी संगठनों ने पहले से ही धरने/ प्रदर्शन एवं सभा आदि करने का फैसला ले रखा था। अतएव बदली परिस्थिति में भी उसे बरकरार रखा गया।

उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर जिलों के प्रशासन ने जगह जगह इस आंदोलन की राह में रोड़े अटकाये। तमाम नेताओं को अर्दब में लेने की कोशिश की। भाकपा जौनपुर के सचिव का॰ कल्पनाथ गुप्ता को हाउस अरेस्ट करने के बावजूद वहाँ सभा कर ज्ञापन दिये गये। रास्ता जाम स्थगन की दिल्ली से घोषणा के बावजूद उरई में का॰ कैलाश पाठक के नेत्रत्व में सर्वदलीय किसान समर्थक मोर्चे के सैकड़ों कार्यकर्ता हाइवे पर पहुँच गये। वहाँ सभा कर ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा गया। वाराणसी में किसानों के समर्थन में अधिवक्ता, पत्रकार और आम नागरिक उतर आए तो कई जिलों में आदिवासियों ने मोर्चा संभाला। अन्य अनेक जिलों में किसानों के समर्थन में महिलाएं, खेत मजदूर, मजदूर, छात्र एवं नौजवान सड़कों पर उतरे।

राष्ट्रपति को सौंपे गये ज्ञापनों में तीनों क्रषी क़ानूनों को वापस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने को कानून बनाने, शहीद किसानों के परिवारों को रु॰ 25- 25 लाख का मुआबजा  दिये जाने, आंदोलनकारियों पर लगे मुकदमे वापस लिये जाने, गिरफ्तार किसान नेताओं को रिहा किए जाने तथा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों और विपक्ष के आंदोलनकारियों के विरूध्द की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाही रोके जाने की मांग की गयी।

भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि देश भर के लोगों का ध्यान किसान आंदोलन पर टिका है और भाजपा सरकारें उसकी आड़ में निरंतर जनता को लूटने के एजेंडे पर काम कर रही है। पेट्रोल, डीजल एवं रसोई की कीमतों में भारी बदोत्तरी कर दी गयी है। वेशकीमती सरकारी संपत्तियों को पूँजीपतियों के हाथों बेचा जा रहा है। गन्ने का 2021 का समर्थन मूल्य घोषित किया नहीं गया और गन्ना सप्लाई पर्चियों पर कीमत के खाने में शून्य लिख कर दिया जा रहा है। पिछले सत्र का किसानों का करोड़ों रुपया चीनी मिलों पर बकाया पड़ा है। सरकार न किसानों की सुन रही है न आमजनों की। आज के ज्ञापनों में इन सवालों को भी उठाया गया।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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