भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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शुक्रवार, 20 मई 2011

रिश्वत को वैध बनाने की बेहूदगी को रोको - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी


भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उपमहासचिव एवं पूर्व संसद सदस्य एस0 सुधाकर रेड्डी ने केंद्रीय वित मंत्रालय के पोर्टल पर ”एक किस्म की रिश्वतों के मामले में रिश्वत देने के काम को वैध क्यों न मान लिया जाये“ शीर्षक पेपर के होने के संबंध में केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी को एक पत्र लिखकर आपत्ति व्यक्त की है। इस पेपर के लेखक वित्तमंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु हैं। उन्होंने लिखा है:



21 अप्रैल 2011 के ”हिंदु“ दैनिक में पी0 साईनाथ द्वारा लिखे एक लेख ”रिश्वतः एक छोटा पर रेडिकल विचार“ पढ़कर आश्चर्यचकित हो गया हूँ। साईनाथ ने अपने इस लेख में वित्तमंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु द्वारा लिखित पेपर- ”व्हाई, फॉर ए क्लास ऑफ ब्राइब्स, दि एक्ट ऑफ गिविंग ब्राइब शुड बी ट्रीटिड एज लीगल“ (एक किस्म की रिश्वतों के मामले में रिश्वत देने के काम को वैध क्यों न मान लिया जाये) को विस्तार से उद्घृत किया है। बसु के इस पेपर को वित्तमंत्रालय के पोर्टल पर भी डाल दिया गया है।



मेरी समझ नहीं आता कि एक संविधान विरोधी और जन-



विरोधी विचार और वह भी एक ऐसे सरकारी अधिकारी द्वारा जो राष्ट्र और भारत सरकार की अपनी तमाम सेवाओं में भारत के संविधान की शपथ लेता है, प्रचार के लिए भारत सरकार के पोर्टल का इस्तेमाल क्योंकर किया जा सकता है। यदि यह उनका निजी सुझाव है तो इसके लिए उन्हें अपने निजी वेबसाईट पर, सरकार से इतर अन्य किसी साईट का इस्तेमाल करना चाहिये था। मैं पक्के तौर पर विश्वास करता हूॅ कि प्रणव दा और पूर्व वित्तमंत्री एवं वर्तमान प्रधानमंत्री इस तरह के भड़काने वाले, राष्ट्रविरोधी और भ्रष्टाचार को प्रोत्साहन देने वाले विचारों का समर्थन नहीं करेंगे।



मुझे पक्का विश्वास है कि आप भ्रष्टाचार को वैध बनाने के बसु के विचारों से सहमत नहीं होंगे। बहरहाल, कौशिक बसु के लेख ने वित्तमंत्रालय के पोर्टल को काफी नुकसान पहुंचा दिया है। मेरा आपसे अनुरोध है कि इन विचारों को पूरी तरह से खारिज कर दें और कौशिक बसु के पेपर को सरकारी पोर्टल से तत्काल हटा दिया जाये। उपरोक्त तथ्यों के प्रकाश में, मैं आपसे अनुरोध करता हूॅ कि आप अपने आपको इसकी अंतवस्तु से अलग करें और सरकारी पोर्टल के इस तरह के दुरूपयोग के पीछे के असली इरादे की विस्तृत जांच करें।



आपको इस तरह की बातों की भर्त्सना करनी चाहिये क्योंकि ऐसी बातें लोकतांत्रिक व्यवस्था को बरबाद करने में ही मदद कर सकती है। इस तरह के असंवैधानिक कामों को लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दी जानी चाहिये। मुझे पक्का विश्वास है कि आप हमारी चिंता से सहमत होंगे और कन्फयूजन को आगे बढ़ने से रोकने के लिए तुरंत कदम उठायेंगे।

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भाकपा द्वारा एएमयू कम्यूनिटी के आन्दोलन का समर्थन


अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति को तुरन्त हटाने की मांग

लखनऊ, 19 मई। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने केन्द्र सरकार से मांग की है कि वह आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति को तुरन्त बर्खास्त करे ताकि उनके भ्रष्टाचार के खिलाफ घोषित सीबीआई जांच निष्पक्ष और अबाध रूप से पूरी की जा सके। भाकपा ने कुलपति को हटाने की मांग को लेकर एएमयू में चल रहे आन्दोलन को पुरजोर समर्थन भी प्रदान किया है।

यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने आरोप लगाया कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं और केन्द्र सरकार द्वारा एक कमेटी से कराई गयी जांच में वे दोषी पाये गये हैं लेकिन सरकार न तो उनके विरूद्ध कोई कार्रवाई कर रही है औरन न ही जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया है। इससे अमुवि के छात्रों, शिक्षकों, शिक्षणेतर कर्मचारियों एवं एमएमयू ओल्ड ब्याज में भी भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है।

इस गहरे आक्रोश के चलते समूची एएमयू कम्यूनिटी आन्दोलन की राह पर है। एएमयू एंटी करप्शन फोरम के संयोजक प्रो.मदीउर्रहमान ‘सुहेब’ शेरवानी (जोकि भाकपा राज्य कार्यकारिणी के भी सदस्य हैं।) एवं प्रो. ए.ए. उस्मानी 16 मई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। एएमयू स्टाफ एसोसिएशन के बैनर तले क्रमिक भूख हड़ताल जारी है। एएमयू स्टूडेन्ट्स यूनियन भी भूख हड़ताल पर है और छात्रों का एक स्वतंत्र ग्रुप अलग से भूख हड़ताल पर बैठा है। सच कहा जाये तो एएमयू कुलपति आवास के सामने वाला मार्ग जंतर-मंतर बन चुका है।

डा. गिरीश ने इस बात पर गहरा रोष जताया कि इन व्यापक जनान्दोलनों के बावजूद केन्द्र सरकार के कान पर जूं नहीं रेंगी। केन्द्रसरकार ने सीबीआई जांच की घोषणा तो की है मगर उसका नोटीफिकेशन अभी तक नहीं किया। फिर सीबीआई जांच के पहले कुलपति को हटाने की बेहद जायज मांग को भी अभी तक नहीं माना। यह भ्रष्ट आचरण की परवरिश करने की साजिश है। भाकपा राज्य सचिव ने चेतावनी दी कि यदि केन्द्र सरकार एएमयू कम्यूनिटी की जायज मांगों पर अमल नहीं करेगी तो भाकपा को भी अपरिहार्य कदम उठाने को बाध्य होना पड़ेगा।
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