भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

दलित उत्पीड़न के खिलाफ आंदोलन करेगी भा क पा

लखनऊ 29 जुलाई। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश में दलितों के उत्पीड़न की वारदातों पर गहरा रोष जताया है। भाकपा ने इन घटनाओं की निंदा करते हुये राज्य सरकार से कठोर कदम उठाने की मांग की है। कल जनपद मैनपुरी में एक दलित दंपति की मात्र रु. 15 उधारी न चुका पाने के कारण कुल्हाड़ी से काट कर की गई हत्या, जनपद फतेहपुर में बेगार करने से मना करने पर दबंगों द्वारा खंभे से बांध कर की गई पिटाई जैसी प्रदेश भर से आ रही दलित उत्पीड़न की खबरों पर गंभीर चिन्ता जताते हुए भाकपा के राज्य सचिव मंडल ने राज्य सरकार से दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की मांग करते हुए मृतक आश्रितों को 10 लाख का मुआवजा देने और इस तरह की घटनाओं पर पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी तय करके उन्हें दंडित करने की भी मांग की है। भाकपा राज्य सचिव मंडल ने नोटिस लिया है कि प्रदेश में दलितों ही नहीं अल्पसंख्यकों, महिलाओं और अन्य कमजोर तबकों पर अत्याचारों की वारदातें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इन सवालों पर विचार कर आंदोलन की रणनीति बनाने को भाकपा की राज्य कार्यकारिणी और काउंसिल की बैठकें दिनांक 30 एवं 31 जुलाई को राज्य कार्यालय पर बुलाई गयीं हैं।
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मंगलवार, 26 जुलाई 2016

गौरक्षा के नाम पर पशु व्यापारियों को प्रताडित करने वालों के खिलाफ कडी कार्यवाही करे राज्य सरकार: भाकपा

लखनऊ- 26 जुलाई 20016, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश में गौरक्षा के नाम पर होरहे पशु व्यापारियों के भारी उत्पीडन और उनके आर्थिक शोषण की कडे से कडे शब्दों में निंदा की है. पार्टी ने राज्य सरकार से मांग की है कि वह पशु व्यापारियों की सुरक्षा करे और गौरक्षा के नाम पर लूट मचाने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कडी से कडी कार्यवाही करे. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा है कि समूचे उत्तर प्रदेश में ऐसे अनेक गिरोह काम कर रहे हैं जो स्थानीय पुलिस के साथ साठ- गांठ करके पशु व्यापारियों के पशु लदे वाहनों को जबरिया रोक लेते हैं और उन्हें मार पीट कर, डरा धमका कर, और पुलिस कार्यवाही का भय दिखा कर उनसे धन की उगाही करते हैं. व्यापारियों के द्वारा मना करने पर उनके पशु धन को छीनने से लेकर उन्हें मार-पीट कर जख्मी कर देने की वारदातें आये दिन की बात होगयी है. प्रदेश में यह सारा गोरखधंधा गोरक्षा के नाम पर चल रहा है. वाहनों मे कोई भी पशु ले जाया जारहा हो, भगवा ध्वजधारी और भगवा ब्रिगेड द्वारा संरक्षित ये गिरोह उन्हें वध के लिये लेजायी जारही गाय के नाम पर रोक लेते हैं और फिर उनसे मनमानी वसूली करते हैं. चूंकि ये व्यापारी अधिकतर अल्पसंख्यक समुदाय के होते हैं अत: इन कथित गौरक्षकों को स्थानीय जनता का समर्थन भी मिल जाता है. और व्यापारी क्योंकि परदेशी होते हैं, कम तादाद में होते हैं, अतएव स्थानीय गुंडों और पुलिस के दबाव में आजाते हैं. मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में डा. गिरीश ने बताया है कि कल ही जनपद मथुरा के कोसीकलां की पेंठ (स्थानीय पशु बाज़ार) से भेंस के पड्डे लेकर अलीगढ जारहे व्यापारियों को इन माफियाओं ने रोक लिया और पैसे न देने पर उनमें से कई को बुरी तरह जख्मी कर दिया. पुलिस तब पहुंची जब गुंडे अपना काम निपटा के चले गये. ऐसी घटनायें प्रदेश में हर रोज हर क्षेत्र में घटित होरही हैं लेकिन अपने गंतव्य तक पहुंचने की जल्दी में प्रताडित और भयभीत व्यापारी कोई कार्यवाही भी नहीं कर पाते. डा. गिरीश ने प्रश्न किये हैं कि अल्पसंख्यक व्यापारियों द्वारा ले जाया जारहा क्या हर पशु गाय है? उत्तर प्रदेश में गोवध पर पाबंदी है या गायों के लाने लेजाने पर? यदि गाय भी ले जायी जारही है तो कथित गोरक्षकों को उन्हें रोकने अथवा वसूली करने का कानूनी अधिकार किसने दिया है? अथवा पैसे वसूलने के बाद वही पशु लेजाने वाला वैध कैसे होजाता है? ये सवाल हैं जिसका जबाव सरकार को देना है. मुख्यमंत्री को लिखे गये पत्र में भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहा है कि यूं तो उत्तर प्रदेश में यह गोरखधंधा दशकों से चल रहा है लेकिन गुजरात में हुयी दलितों की पिटाई से पैदा हुये हालात के बाद यह बेहद जरूरी होगया है कि इस नाजायज कारगुजारी पर प्रदेश में फौरन रोक लगे. वरना यहां भी यह कृत्य कोई भी बडी वारदात का कारण बन सकता है. अतएव भाकपा आपसे मांग करती है कि इसकी जांच और शीघ्र समुचित कार्यवाही के लिये ग्रह मंत्रालय के अधीन एक विशेष जांच दल गठित करें और पशु व्यापारियों को न्याय दिलायें. यदि इससे भी कोई बडी कार्यवाही संभव हो तो भाकपा उसका स्वागत करेगी. डा. गिरीश
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गुरुवार, 21 जुलाई 2016

दलित उत्पीडन के खिलाफ उत्तर प्रदेश में भाकपा उतरी सडकों पर

लखनऊ/ हाथरस- 21 जुलाई 2016— गुजरात और देश के अन्य भागों में दलितों के प्रति बढ रही हिंसा, शाब्दिक हिंसा और भाजपा के एक प्रादेशिक नेता द्वारा सुश्री मायावती के बारे में की गयी बेहद घिनौनी टिप्पणी के विरुध्द उत्तर प्रदेश में आज भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कई जनपदों में विरोध प्रदर्शन किये. हाथरस में भी आज भाकपा के कार्यकर्ताओं ने जलेसर बस अड्डे से जुलूस निकाला और चामड गेट चौराहे पर पहुंच कर प्रधान मंत्री श्री मोदी, गुजरात की मुख्यमंत्री और भाजपा नेताओं के पुतले फूंके. प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे- भाजपाइयो शर्म करो, दलितों का दमन बंद करो; दलितों महिलाओं का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान; दलितों की हिंसा और शाब्दिक हिंसा के दोषियों को जेल भेजो, भाजपा के वाचाल नेताओं को लगाम दो; दयाशंकर सिंह को गिरफ्तार करो तथा भाजपा मोदी होश में आओ दलित शक्ति से ना टकराओ आदि. चामड गेट चौराहे पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुये भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि केंद्र और कई राज्यों की सत्ता पर काबिज होने के बाद भाजपाइयों और संघियों का गुरूर सातवें आसमान पर है और गुजरात सहित समूचे देश में वे दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, आदिवासियों और समाज के अन्य कमजोर तबकों के विरुध्द हिंसा और घृणा का अभियान चलाये हुये हैं. भाजपा नेत्रत्व और प्रधानमंत्री से उन्हें शह मिली हुयी है. कल भाजपा के प्रांतीय उपाध्यक्ष द्वारा सुश्री मायावती के खिलाफ की गयी अभद्र टिप्पणी दलितों, महिलाओं और समाज के वंचित वर्गों के प्रति भाजपा/ आरएसएस की दूषित मानसिकता और कुत्सित नीति का प्रतीक है. वह वही सब कुछ कर रहे हैं जो कुछ उन्हें संघ की शाखाओं में सिखाया पढाया गया है. ऐसा कर वे दमन और लूट की पर्याय सामंतवादी और पूंजीवादी व्यवस्था को बनाये रखना चाहते हैं. भाकपा इस सब की कठोर शब्दों में भर्त्सना करती है. वह घृणित बयान देने वाले नेता की अविलंब गिरफ्तारी और देश भर में दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं और अन्य कमजोर तबकों के खिलाफ चल रही हिंसा की कार्यवाहियों को रोके जाने की मांग करती है. डा. गिरीश ने बताया कि भाकपा के ये विरोध प्रदर्शन लगातार जारी रहेंगे. जिन जिलों में आज प्रदर्शन नहीं होसके वे कल अथवा आगे प्रदर्शनों का आयोजन करेंगे. उन्होने सहयोगी संगठनों से भी इस अभियान को सहयोग की अपील की. भाकपा की राज्य कमेटी के आह्वान पर किये गये इस विरोध प्रदर्शन में जिला सचिव चरन सिंह बघेल, राज्य परिषद सदस्य बाबूसिंह थंबार, सह सचिव सत्यपाल रावल व आर.डी.आर्य के अलावा जगदीश आर्य,द्रुगपाल सिंह,संजय खान,पपेंद्र कुमार,गौरीशंकर बघेल,महेंद्रसिंह,ओमप्रकाश सविता, चोबसिंह,किशनस्वरुप सविता,विजयकुमार कुशवाहा,विपिन कुमार तथा ईश्वरी पहलवान आदि प्रमुख रुप से मौजूद थे. डा. गिरीश
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बुधवार, 20 जुलाई 2016

भाजपा नेता की मायावती के खिलाफ टिप्पणी और दलितों कमजोरों के प्रति हिंसा और शाब्दिक हिंसा का मुखर विरोध करेगी भाकप: डा. गिरीश

दलितों के प्रति हिंसा और शाब्दिक हिंसा का मुखर विरोध करेगी भाकपा लखनऊ/अलीगढ- 20 जुलाई, 2016, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह द्वारा बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती के विषय में की गयी घृणित टिप्पणी की कडे से कडे शब्दों में निंदा की है. भाकपा ने राज्य सरकार से मांग की है कि वह इन महानुभाव के खिलाफ माकूल दफाओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल के सींखचों के पीछे पहुंचाये. भाकपा के राज्य सचिव मंडल की ओर से जारी बयान में राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि अपनी स्थापना के समय से ही संघ परिवार अपने कार्यकर्ताओं में ‘बौध्दिक’ के नाम पर दलितों, अल्पसंख्यकों, पिछडों, आदिवासियों एवं महिलाओं आदि समाज के सभी कमजोर तबकों के विरुध्द नफरत का जहर घोलता रहा है. आज केंद्र की सत्ता पर एकाधिकार होजाने के बाद उनके मन मस्तिष्क में भरा यह जहर अंगडाई ले रहा है और देश भर में तमाम संघी इन तबकों के विरुध्द हिंसा और शाब्दिक हिंसा का अभियान चलाये हुये हैं. मोदी के गुजरात में पशुओं की खाल उतारने वाले दलितों पर कातिलाना हमला बोला गया. बंबई में डा. भीमराव अंबेडकर प्रतिष्ठान की इमारत को ढहा दिया गय, संघ द्वारा निर्मित घृणा के वातावरण के चलते देश भर में दलितों अल्पसंख्यकों और अन्य कमजोर तबकों के खिलाफ हिंसा और शाब्दिक हिंसा की कारगुजारियां बढी हैं. राज्य की मशीनरी हर जगह उत्पीडकों की हिमायत में खडी हैं. ताजा मामला सुश्री मायावती के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग का है जो संघ परिवार की घृणित सोच और उसकी नस्लवादी थीसिस का पर्दाफाश कर देता है. भाकपा और वामपंथ इन सभी कार्यवाहियों का पुरजोर विरोध कर रहे हैं. अंबेडकर भवन तोडे जाने के विरुध्द कल बंबई में हुयी विशाल रैली में भाकपा और वामपंथ ने ना केवल भारी भीड जुटाई थी बल्कि रैली को कन्हैया कुमार और का. सीताराम येचुरी ने भी संबोधित किया. संसद में भी कल यह मामला सबसे पहले वामपंथी सदस्यों ने ही उठाया था. हम गुजरात के दलितों के आंदोलन के साथ हैं और कश्मीर के पीडितों की पीडा को साझा करते हैं. एटा के शराब कांड से लेकर उत्पीडन की हर घटना में हम कमजोर तबकों के साथ खडे हैं. डा. गिरीश ने भाकपा की सभी जिला इकाइयों का आह्वान किया कि वे भाजपा नेता के खिलाफ कडी कार्यवाही की मांग को लेकर और दलित कमजोरों और अल्पसंख्यकों पर होरहे हमलों के खिलाफ स्वयं आवाज उठायें या इस तरह की आवाज उठाने वालों का साथ दें. उन्होने यह भी बताया कि 24 जुलाई को फैज़ाबाद में होने जारहे वामदलों के क्षेत्रीय सन्युक्त सम्मेलन में भी मामले पर गौर किया जायेगा और 30 व 31 जुलाई को लखनऊ में होने जारही भाकपा की राज्य काउंसिल की बैठक में भी इस मामले पर गंभीरता से विचार किया जायेगा. डा.गिरीश
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मंगलवार, 19 जुलाई 2016

अलीगंज शराब हत्याकांड: भाकपा ने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन को कठघरे में खडा किया

लखनऊ- 19 जुलाई 2016, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने एटा जनपद के अलीगंज में जहरीली शराब काण्ड में मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है तथा अस्वस्थ बने हुये लोगों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है. सचिव मंडल ने घटना में मृतकों के आश्रितों को रु. 10.00 लाख मुआबजा तथा इलाज करा रहे बीमारों को कम से कम रु. 2.00 लाख की आर्थिक सहायता दिये जाने की मांग की है. यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि अलीगंज में 15 जुलाई को हुयी इस घटना जिसमें कि अब तक अलीगंज और फरुखाबाद जनपद के कायमगंज के 40 लोगों की मौत होचुकी है और एक सौ से भी अधिक लोग गंभीर हालत के चलते सैफई, आगरा और अलीगढ में इलाज करा रहे हैं, राज्य सरकार, प्रशासन और राजनेताओं के सरंक्षण में इस क्षेत्र में दशकों से निर्वाध रुप से चल रहे अवैध शराब के धंधे का परिणाम है. मथुरा के जवाहरबाग कांड से भी अधिक जिन्दगियां निगलने वाला यह कांड उत्तर प्रदेश की सरकार के माथे पर कलंक है और उसे इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिये. भाकपा राज्य सचिव ने बताया कि अवैध शराब का यह धंधा एटा, मैनपुरी, फरुखाबाद, हाथरस, कासगंज और फिरोजाबाद जनपद के विभिन्न हिस्सों में दशकों से चल रहा है. सरकार भले ही भाजपा की रही हो, बसपा की अथवा सपा की शराब माफिया का जादू हरेक के सिर पर चढ कर बोलता रहा है. आज जबकि प्रदेश में सपा की सरकार है गरीबों के घर उजाडने वाला यह धंधा उसके स्थानीय नेताओं के सरंक्षण में फलफूल रहा है. डा. गिरीश ने कहा कि यह क्षेत्र उद्योगविहीन क्षेत्र है और नकली शराब और अवैध हथियारों का निर्माण तथा अपहरण और फिरौती उद्योग यहाँ माफिया, राजनेताओं और पुलिस प्रशासन की अवैध आय के स्रोत बने हुये हैं. किसी भी दल की सरकार ने यहाँ विकास और औद्योगीकरण पर ध्यान नहीं दिया. उन्होने कहा कि जिस तरह प्रशासन ने इन दो दिनों में कार्यवाही कर बडे पैमाने पर अवैध शराब और उसे बनाने में प्रयुक्त होने वाला लेहन पकडा है, यदि ऐसी ही कठोर कार्यवाही पहले की जाती तो इन दर्जनों लोगों की जानें न जाती और सैकडों बच्चे और परिवार अनाथ न होते. लेकिन पहले या तो कार्यवाही हुयी नहीं और यदि हुयी भी तो अवैध शराब माफिया को नेताओं ने छुडवा दिया और अलीगंज, आजमगढ, लखनऊ और उन्नाव जैसी बडी घटनायें होने पर आबकारी विभाग और पुलिस के कुछ ओहदेदारों को कुछ समय के लिये सस्पेंड करा दिया. एटा क्यूंकि प्रदेश के वर्तमान में सत्ताधारी परिवार का निजी क्षेत्र है अतएव इस दौरान वहाँ के चार चार जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को बदला गया. भाकपा की स्पष्ट राय है कि यह मामला सामान्य कानून व्यवस्था का मामला नहीं, राज्य सरकार और उसकी मशीनरी का गरीबों की जान की कीमत पर अपनी तिजौरियां भरने का मामला है. यदि इस कांड और उत्तर प्रदेश में चल रहे अवैध शराब के कारोबार की दो दशकों की जांच होगयी तो शासक दल और विपक्षी दलों से जुडे तमाम राजनेता और अधिकारी जेल के सींखचों के पीछे होंगे. अतएव गरीबों के हित में भाकपा इस प्रकरण और उत्तर प्रदेश में चल रहे अवैध शराब के कारोबार की सीबीआई से जांच कराये जाने की मांग करती है. डा. गिरीश
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