भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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गुरुवार, 15 मार्च 2018

Three days State Conference of CPI, Uttar Pradesh from 16th to 18th march in Mau


भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का 23 वां राज्य सम्मेलन मऊ में


लखनऊ- 15 मार्च 2019, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश का 23 वां राज्य सम्मेलन 16, 17 एवं 18 मार्च, 2018 को मऊ में होने जारहा है. सम्मेलन में वर्तमान राष्ट्रीय परिद्रश्य में भाकपा और वामपंथ की भूमिका खासकर भाजपा सरकार को 2019 में सत्ता से हठाने की रणनीति पर विचार किया जायेगा. साथ ही केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार के जनविरोधी कृत्यों के खिलाफ सघन और व्यापक आन्दोलन की रणनीति तैयार की जायेगी.
सम्मेलन का शुभारंभ 16 मार्च को मऊ में रोडवेज बस अड्डे के निकट सोनीधापा मैदान में एक विशाल रैली से होगी. अपरान्ह 12 बजे से होने वाली इस रैली को भाकपा के केन्द्रीय सचिव द्वय कामरेड अतुल कुमार अनजान व कामरेड शमीम फैजी, भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश, सहसचिव द्वय का. अरविन्दराज स्वरूप तथा इम्तियाज अहमद ( पूर्व विधायक, मऊ ) आदि संबोधित करेंगे.
सम्मेलन का प्रतिनिधि सत्र सायं 4 बजे से नगरपालिका के कम्युनिटी हाल में होगा जिसका उद्घाटन का. शमीम फैजी करेंगे. तदुपरांत राज्य सचिव व सहसचिव द्वारा राजनैतिक और सांगठनिक रिपोर्टें प्रस्तुत की जायेंगी. रिपोर्टों पर प्रतिनिधि साथी अपने विचार रखेंगे.
17 मार्च को होने वाले प्रतिनिधि सत्र में सुबह 10 बजे अन्य वामपंथी दलों के नेता अपनी एकजुटता का इजहार करेंगे. सम्मेलन का समापन 18 मार्च को दोपहर में का. अतुल अनजान द्वारा किया जायेगा.


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गरीबों की लूट और पूंजीपतियों को छूट को जनता का जबाव हैं गोरखपुर और फूलपुर के चुनाव नतीजे : भाकपा




लखनऊ- 15 मार्च 2018, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर की बहुचर्चित लोकसभा सीटों पर हुये उपचुनावों में भाजपा को कड़ी शिकस्त देने और संयुक्त विपक्ष के सपा प्रत्याशी को भारी मतों से विजयी बनाने के लिये दोनों संसदीय क्षेत्रों की जनता को हार्दिक बधाई दी है.
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि पिछले चार वर्षों से केन्द्र में और गत एक वर्ष से उत्तर प्रदेश में अंबानियों, अदानियों, मोदियों और माल्याओं जैसे कारपोरेट लुटेरों को मालामाल करने वाली सरकारें चल रही हैं जिनकी लूट के शिकार समाज के व्यापक हिस्से- किसान, कामगार, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक, महिलायें, नौजवान और छात्र आदि सभी होरहे हैं. उनकी चहुँतरफा लूट और सामाजिक उत्पीडन पर पर्दा डालने को भाजपा और संघ परिवार धर्म की आड़ में सांप्रदायिक विद्वेष फैलाते रहे हैं. उत्तर प्रदेश और बिहार की जनता ने इसका माकूल जबाव देदिया है.
भाजपा की यह हार कोई सामान्य हार नहीं है. यह उस प्रदेश में हुयी है जिसे संघ, भाजपा और  प्रधानमंत्री मोदी ने हिदुत्व की प्रयोगशाला बनाने को चुना है. यह दोनों सीटें भाजपा के दो कर्णधारों- मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की सीटें हैं जिनके कन्धों पर भाजपा ने 2019 में अपनी नैया पार लगाने की जिम्मेदारी डाली है. उत्तर प्रदेश में वामपंथ सहित विपक्ष के व्यापकतम हिस्सों ने अभूतपूर्व एकता का प्रदर्शन कर आगामी लोकसभा चुनावों के लिए स्पष्ट सन्देश देदिया है और भाजपा के इस दर्प कि मोदी- योगी का कोई विकल्प नही, को चकनाचूर कर दिया है. लोकतंत्र में विकल्प जनता बनाती है, झूठ- फरेब पर आधारित कोई गिरोह लंबे समय तक लोगों की आँखों में धूल नहीं झोंक सकता; इन चुनाव परिणामों ने साबित कर दिया है.
भाकपा ने प्रदेश के सभी वामपंथी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को बधाई दी है जिन्होंने पूर्ण एकजुटता के साथ भाजपा को हराने के लिये काम किया. भाकपा ने समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के नेत्रत्व को भी बधाई दी जिन्होंने फासीवाद की चुनौती को समझा और एकजुट होकर उसका जबाव दिया.

डा. गिरीश

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