भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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शुक्रवार, 4 जून 2010

जेनी के नाम

जेनी ! दिक करने को तुम पूछ सकती होसबोधित करता हूँ गीत क्यों जेनी कोजबकि तुम्हारी ही ख़ातिर होती मेरी धड़कन तेज़जबकि कलपते हैं बस तुम्हारे लिए मेरे गीतजबकि तुम, बस तुम्हीं, उन्हें उड़ान दे पाती होजनकि हर अक्षर से फूटता हो तुम्हारा नामजबकि स्वर-स्वर को देती हो माधुर्य तुम्हींजबकि साँस-साँस निछावर हो अपनी देवी पर !इसलिए कि अद्भुत्त मिठास से पगा...
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नायक के गीत

आह, तुम नहीं चाहतीं--डरी हुई हो तुमग़रीबी सेघिसे जूतों में तुम नहीं चाहतीं बाज़ार जानानहीं चाहतीं उसी पुरानी पोशाक में वापस लौटनामेरे प्यार, हमें पसन्द नहीं है,जिस हाल में धनकुबेर हमें देखना चाहते हैं,तंगहाली ।हम इसे उखाड़ फेंकेंगे दुष्ट दाँत की तरहजो अब तक इंसान के दिल को कुतरता आया हैलेकिन मैं तुम्हेंइससे भयभीत नहीं देखना चाहता ।अगर मेरी ग़लती सेयह तुम्हारे घर में दाखिल होती हैअगर ग़रीबीतुम्हारे सुनहरे जूते परे खींच ले जाती है,उसे...
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बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे

बोल कि लब आज़ाद हैं तेरेबोल ज़बाँ अब तक तेरी हैतेरा सुतवाँ जिस्म है तेराबोल कि जाँ अब तक् तेरी हैदेख के आहंगर की दुकाँ मेंतुंद हैं शोले सुर्ख़ है आहनखुलने लगे क़ुफ़्फ़लों के दहानेफैला हर एक ज़न्जीर का दामनबोल ये थोड़ा वक़्त बहोत हैजिस्म-ओ-ज़बाँ की मौत से पहलेबोल कि सच ज़िंदा है अब तकबोल जो कुछ कहने है कह ले - फैज़ अहमद ...
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ख़ून अपना हो या पराया हो

ख़ून अपना हो या पराया होनस्ले आदम का ख़ून है आख़िरजंग मग़रिब में हो कि मशरिक मेंअमने आलम का ख़ून है आख़िरबम घरों पर गिरें कि सरहद पररूहे- तामीर ज़ख़्म खाती हैखेत अपने जलें या औरों केज़ीस्त फ़ाक़ों से तिलमिलाती हैटैंक आगे बढें कि पीछे हटेंकोख धरती की बाँझ होती हैफ़तह का जश्न हो कि हार का सोगजिंदगी मय्यतों पे रोती हैइसलिए ऐ शरीफ इंसानोंजंग टलती रहे तो बेहतर हैआप और हम सभी के आँगन मेंशमा जलती रहे तो बेहतर है।- साहिर लुधिया...
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