भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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रविवार, 21 मार्च 2021

कल्पना दत्तः चटगांव शस्त्रागार कांड की नायिका

 


गिरफ्तार हुईं कल्पना

 कल्पना दत्त (बाद में कल्पना जोशी )का जन्म 27 जुलाई 1913 को श्रीपुर, बोउल खाली उपजिला, चटगांव जिला, बंगाल प्रदेश ;अब बांग्लादेश में हुआ था। श्रीपुर मात्र 300 घरों का छोटा-सा गांव था। उनका परिवार पुरातनपंथी
परम्परावादी विचारों का बड़ा जमींदार परिवार था। कल्पना के पिता विनोद बिहारी दत्त थे और माता का नाम
शोभना देवी। परिवार शिक्षित था और इसके सदस्य बाद में स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़ गए।

शिक्षा और राजनैतिक सक्रियता

 कल्पना की आरंभिक शिक्षा घर पर हुई। उसके बाद उसे डॉ. खास्तगीर बालिका हाई स्कूल में दाखिल करा दिया गया। यह स्कूल परिवार के ही कुछ सदस्यों ने स्थापित किया था। कल्पना पढ़ाई में बड़ी तेज थी और हमेशा अव्वल आया करती। उसने सुप्रसिद्ध  बंगला पुस्तक ‘‘पथेर दाबी’ पढ़ ली, साथ ही कन्हाईलाल तथा कई क्रांतिकारियों की जीवनियां भी पढ़ीं। उसक दो चाचा गांधीजी के असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए। इसका
उस पर बड़ा असर पड़ा। कल्पना को विज्ञान का बड़ा शौक था। महान वैज्ञानिक आचार्य प्रफुल्लचंद्र राय को वह अपना आदर्श मानती थी। कल्पना संस्कृत और गणित में भी बहुत तेज थी।
समय के साथ उसके परिवार में राजनैतिक मतभेद पैदा हो गए। गांधी जी चटगांव आए और इस परिवार की
कपड़े की दुकान पर बंग लक्ष्मी मिल्स के स्वदेशी कपड़े रख गए। परिवार की कई स्त्रियां गांधी का ‘दर्शन’ करने
गईं, यहां तक अपने गहने तक उन्हें दान कर आईं।
कल्पना ने 1929 में चटगांव से मैट्रिक पास किया। उसी वर्ष वहां एक विद्यार्थी सम्मेलन आयोजित किया गया
जिसमें कल्पना ने अपने चाचा की सहायता से भाषण भी दिया। चटगांव के नौजवान क्रांतिकारी संगठनों में
संगठित होने लगे। उसके एक सदस्य पूर्णेन्दु दस्तीदार कल्पना के घर आने-जाने लगे। कल्पना धीरे-धीरे
प्रशिक्षित होने लगी।
कल्पना ने कलकत्ता के बेथ्यून कॉलेज में भर्ती ले ली। उसके विषय थे भौतिक शास्त्र, गणित और वनस्पति
शास्त्र। साथ ही उसने व्यायाम, बोटिंग, इ. भी सीखी। उसने हिन्दी और फ्रेंच का भी अध्ययन किया। जल्द ही उसका संपर्क सूर्यसेन, अनंत सिंह, गणेश घोष तथा अन्य प्रसिद्ध  क्रांतिकारियों से हुआ।
उसने लाठी, छुरा, इत्यादि चलाने में ट्रेनिंग पाई।
कल्पना ने अप्रैल 1930 में जवाहरलाल नेहरू की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए बेथ्यून कॉलेज मे हड़ताल संगठित की। कॉलेज की महिला प्रिंसिपल ने विद्यार्थियों से दुर्व्यवहार किया। बाद में प्रिंसिपल को माफी मांगनी पड़ी।
कल्पना दत्त ’छात्री संघ’ ;गर्ल स्टूडेंट ऐसोसिएशनमें शामिल हो गई। यह एक अति-क्रांतिकारी संगठन था
जिसमें बीना दास और प्रीतिलता व द्देदार जैसी क्रांतिकारी छात्राएं शामिल थीं।
चटगांव शस्त्रागार पर हमला
क्रांतिकारी युवाओं ने 18 अप्रैल 1931 को चटगांव के ब्रिटिश शस्त्रागार पर हमला कर दिया। इस खबर ने ब्रिटिश सरकार को हिलाकर रख दिया। खबर तेजी से फैल गई। कल्पना जल्द से जल्द चटगांव चली जाना चाहती थी लेकिन उसे कॉलेज से ट्रांसफर नहीं मिल रहा था। काफी समय बर्बाद हो गया जिसका उसकी पढ़ाई पर असर पड़ा। वह प्राइवेट छात्र के रूप में परीक्षा में बैठी। उसका सेंटर चटगांव में ही पड़ा। कल्पना ने चटगांव कॉलेज में बी.एस.सी. में एडमिशन ले लिया।
वह क्रांतिकारी गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए अधीर हो रही थी। उसने पिस्तौल तथा अन्य हथियारों की ट्रेनिंग लेना अधिक सक्रियता से लेना शुरू कर दिया। अपने मैट्रिक के दिनों मे कल्पना एक कम्युनिस्ट साथी के संपर्क में आ चुकी थी जिसका नाम था सुरभा दत्त। इससे उसके विचार बनने लगे थे। कल्पना ने अनन्त सिंह को, जो क्रांतिकारी दल के नेताओं में से एक थे, दल में शामिल होने पर मजबूर कर दिया। उसे रेलवे लाइन उड़ाने के
ग्रुप में शामिल कर लिया गया। इंडियन रिपब्लिकन आर्मी के सूर्य सेन ने कल्पना दत्त को कलकत्ते से एसिड, रसायन तथा अन्य सामग्री का इंतजाम करने के लिए कहा। कल्पना खुद यह सारा सामान ले आई। वह विस्फोटक तैयार करने की विशेषज्ञ बन गई। उसे ‘एक्शन स्क्वाड’ में शामिल कर लिया गया।
जेल को बम से उड़ने की पहली कोशिश असफल रही। जेल में दिनेश गुप्ता और रामकृष्ण बिस्वास को फांसी
दी जाने वाली थी। कल्पना को 17 दिसंबर 1932 को चटगांव के पहाड़ तली में स्थित योरपियन क्लब के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। वह पुरुष वेश में घूम रही थी। इसके एक सप्ताह बाद ही प्रीतिलता वद्देदार
के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने क्लब पर हमला कर दिया। यह हमला जलालाबाद के उस नरंसहार के बदले
में था जिसमें ब्रिटिश सैनिकों ने कई युवाओं की हत्या कर दी थी। प्रीतिलता गंभीर रूप से घायल हो गई और पकड़े
जाने से बचने के लिए उसने सायनाड खाकर आत्महत्या कर ली। प्रीतिलता कल्पना दत्त की सहपाठिनी और
क्रांतिकारी दल में सहयोगिनी थी। पुलिस ने कल्पना को उक्त कांड में फंसाने की कोशिश की लेकिन सबूतों
के अभाव में उसे जमानत पर छोड़ दिया गया। उसे अपने घर में बंदी बनाकर चारों ओर पुलिस का पहरा
बिठा दिया गया। उसे घर से बाहर जाने की इजाजत नहीं थी।
फिर भी कल्पना मौका पाते ही घर से भाग निकली। उनके पिता को काम से निकाल दिया गया और घर पर
छापा मारकर सारा सामान जब्त कर लिया गया।
कल्पना और सूर्यदा

सूर्यसेन किसी तरह रात और दिन में छिपते तथा भागते रहे और पुलिस के जाल से बचते रहे। इसी दौरान वह पुलिस फायरिंग में घायल हो गई। वह और मणिन्द्र दत्त पूरे दो घंटे एक तालाब के पानी में छिपे रहें। फिर भी वह भागती गई। आखिरकार उसे चटगांव के पास समुद्री किनारे एक छोटे-से कस्बे से गिरफ्तार कर लिया गया।
कल्पना और कई अन्य साथियों को पकड़कर पुलिस ले गई। एक पुलिस अफसर ने उसे थप्पड़ मारा। इस पर
वहां उपस्थित फौजी कमांडर ने थप्पड़ मारने वाले को डांटते हुए कहाः ‘‘उसे उचित सम्मान दो।’’ कल्पना पुलिस
और फौजी अधिकारियों के बीच बड़ी लोकप्रिय हो गई।
सूर्यसेन और तारकेश्वर दस्तीदार को फांसी की सजा सुनाई गई जबकि कल्पना दत्त को आजन्म कारावास की
सजा मिली। विशेष ट्रिब्यूनल जज ने कहा कि वह सिर्फ 18 वर्ष की थी। उसे अंडमान में काला पानी की सजा
के लिए भेजा जाने वाला था लेकिन महाकवि रविन्द्रनाथ टैगोर ने हस्तक्षेप कर रुकवा दिया। उसे पहले तो हिजली
और राजशाही जेलों में भेजा गया, फिर सितंबर 1934 से अक्टूबर1935 तक मेदिनीपुर जेल में रखा गया। फिर
दिनाजपुर जेल और उसके बाद मेदिनीपुर जेल में वापस लाया गया।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
कल्पना दत्त और अन्य कैदियों की रिहाई के लिए आंदोलन जोर पकड़ता गया तथा सरकार पर दबाव बढ़ता
गया। 1938-39 में कैदियों की रिहाई का आंदोलन तेज हो गया। इसके अलावा गांधीजी और टैगोर ने भी दबाव
बनाया। फलस्वरूप कल्पना दत्त तथा कई अन्य को 1 मई 1939 को रिहा कर दिया गया।
रिहाई के बाद कल्पना को रविन्द्रनाथ टैगोर की ओर से पत्र मिला। इसमें उन्होंने कल्पना को उसके भविष्य के कर्तव्यों का ध्यान दिलाते हुए उसे आशीर्वाद दिया।
कल्पना के अधिकतर साथी कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हो चुके थे। अभी कल्पना पशोपेश में थी। वह वेदान्त
और गीता के आध्यात्मिक प्रभाव में भी थी। साथ ही उसे कम्युनिस्टों के विचार जरा ज्यादा ही सिधान्तिक लगते थे। उसे महसूस हो रहा था कि ‘जनता के बीच’ काम होना चाहिए। कोई भी कॉलेज कल्पना दत्त को एडमिशन देने
को तैयार नहीं था। आखिरकार उसने 1940 में बी.ए. पास किया ओर एम. ए.;गणित में एडमिशन लिया।
1940-41 में उसे फिर ‘गृह-बंदी’ में रखा गया वापस कलकत्ता लौटकर उसने ‘अध्ययनमंडली’ का गठन किया। साथ ही हस्तलिखित पत्रिका ‘पथेय’ निकालना शुरू किया। उसने लगभग सौ सदस्यों वाली एक नारी समिति भी गठित की।
उसने ‘रात-दिन’ स्कूल स्थापित किए। उसने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान चटगांव पर जापानियों द्वारा बमबारी के दौरान रक्षा-उपायों संबंधी काम किया। इस संदर्भ में उसने महिला आत्मरक्षा समिति’ के गठन में भाग लिया। इस बीच वह दो बार टाइफायड से गंभीर रूप से बीमार हुई।
कल्पना को अब जनता के बीच काम करने के कई अवसर मिले। उसने संथाल मजदूरों, आदिवासियों, सफाई
श्रमिकों, धोबियों, इ. तबकों के बीच, उनकी झुग्गियों में जाकर बहुत सक्रियतासे काम किया। इसके अलावा उसने
1943 के बंगाल में पड़े महा-अकाल में बड़ा काम किया। उसे किसान सभा में भी काम करने का मौका मिला।
कलकत्ता में उसने ट्रामवे तथा अन्य मजदूरों के बीच सक्रिय काम किया।
वह ट्रामवे वर्कर्स यूनियन के ऑफिस में होलटाइमर बन गईं।
इन कार्योंं के दौरान कल्पना दत्त कम्युनिस्ट पार्टी के काफी नजदीक आ गईं। उन्हें 1942 में, जब वे
टाइफायड से बीमार थीं, सूचना दीगई कि उन्हें भा.क.पा. का सदस्य बना लिया गया है।
दिसंबर 1942 में कल्पना पार्टी स्कूल में भर्ती होने बंबई गईं। वहां उनकी मुलाकात पार्टी के महासचिव पी.सी. जोशी से हुई। उन्हें प्रादेशिक स्तर पर पार्टी संगठनकर्ता बनाया गया।
उनकी चार बहनें भी पार्टी की सदस्य बन गईं। अगस्त 1943 में पी.सीजोशी और कल्पना दत्त की शादी हो गई।
कल्पना जोशी ने कई जनसंघर्षोंं का नेतृत्व किया और कई अन्य में भाग लिया। इनमें से एक था जनवरी 1946 में चटगांव के पाटिया में हड़तालें और प्रदर्शन। यह ब्रिटिश सिपाहियों द्वारा किए गए अत्याचारों के विरोध में था। कल्पना और उसके साथियों ने इनका नेतृत्व किया।
1946 में कल्पना जोशी ने भाक. पा. उम्मीदवार के रूप में बंगाल विधान सभा के लिए चुनाव लड़ा। लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

कल्पना जोशी 1948 में अंडरग्राउंड चली गईं। 1951 में जब पार्टी पर से पाबंदी हटाई गई तो उन्हें वित्तीय एवं राजनैतिक कारणों से नौकरी करनी पड़ गई। उन्हें प्रो. पी.सीमहालनोबिस के तहत इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीच्यूट में काम मिल गया। उन्होंने मुख्यतः नेशनल सैम्पल सर्वे ;एन.एस.एस. में काम किया। वे इंस्टीच्यूट ऑफ स्टडीज इन रश्शियन लैंग्वेज की संस्थापक-डाइरेक्टर भी थीं। उन्होंने ‘चिटगांग आर्मरीरेडर्सःरेमिनिसेन्सेज’ ;चटगांव शस्त्रगार कांड के साथियों के संस्मरण नाम से आत्म-कथात्मक पुस्तक भी लिखी। इसे अंग्रेजी में पी.सी. जोशी और निखिल चक्रवर्ती ने अनूदित किया। जोशी ने इसकी भूमिका भी लिखी। कल्पना ने लिखाः ‘‘हमें अपने स्कूली दिनों में अपने भविष्य का कोई खाका स्पष्ट नहीं था। और तब झांसीं की रानी की कहानी ने हमें प्रेरित कर दिया।’’ कल्पना दत्त जोशी की मृत्यु 5 फरवरी 1995 को हो गई।

-अनिल राजिमवाले

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मंगलवार, 9 मार्च 2021

CPI in UP will support peasants and workers movement on March 15, 2021


उत्तर प्रदेश में जमीन बचाने, सार्वजनिक क्षेत्र बचाने, गरीबों के आवास बचाने, संविधान बचाने और महंगायी को पर्याप्त मात्र में नीचे लाने को 15 मार्च को सड़कों पर उतरेगी भाकपा

 

लखनऊ- 9 मार्च 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के सचिव मंडल ने कहाकि आज किसानों की ज़मीनें बचाने, कारपोरेट खेती पर रोक लगाने एवं देशाहित में आवश्यक वस्तु अधिनियम को समाप्त करने से बचाने तथा बिजली बिल संशोधन अधिमियम को खारिज कराना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही फसलों की कीमतों के न्यूनतम मूल्य दिलाने की गारंटी करने वाला कानून बनाया जाना भी समय की जरूरत है। न्यूनतम समर्थन मूल्य भी स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले के आधार पर होना चाहिये, न कि सरकार की मनमर्जी के अनुसार। ऐसे समय में जब डीजल, पेट्रोल, खाद और कीटनाशकों की कीमतों ने सारे रिकार्ड तोड़ रखे हैं, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस साल का गेहूं खरीद मूल्य 1975 निर्धारित करना किसानो को और भी देवालिया बनायेगा, भाकपा ने कहा है।

दूसरी ओर समस्त सार्वजनिक क्षेत्र को बेच कर कार्पोरेट्स/ पूँजीपतियों के हवाले करने से देश के प्राक्रतिक संसाधनों की लूट बड़ेगी और संप्रभुता को खतरा उत्पन्न होने जा रहा है। श्रम क़ानूनों को नष्ट कर बनाये 4 लेबर कोड्स के जरिये मजदूरों से यूनियन बनाने- चलाने का अधिकार छीन लिया गया है, मजदूरों को उनके दमन और शोषण से बचाव के सभी रास्ते बंद होगये हैं और मजदूरों को मौजूदा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और कार्यस्थल पर सुरक्षा संबंधी प्रविधानों से वंचित कर दिया गया है।

राष्ट्रीय संपदा और किसानों मजदूरों को कार्पोरेट्स के हाथों लुटवाने के जघन्य पाप को प्रधानमंत्री ने वैचारिक जामा पहनाने की पुनः कोशिश की है। वे निर्लज्जता से कह रहे हैं कि सरकार का काम उद्योग व्यापार चलाना नहीं। यदि सरकार अपने नागरिकों के हितरक्षा से मुकर रही है और मेहनतकशों द्वारा खड़ी की गयी संपदाओं को बेचने पर उतारू है तो देश के मतदाताओं को भी उसे हटा देने का नैतिक अधिकार है, और वे जरूर इस अधिकार का प्रयोग करेंगे, भाकपा ने कहा है।

इस बीच सरकार ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है और सभी जरूरी चीजों की महंगाई बढ़ने से आम और खास सभी लोग त्राहि त्राहि कर उठे हैं। केन्द्र से बढ़ने वाली कीमतों में राज्य का टैक्स भी जुड़ जाता है और महंगाई का उच्चतम स्तर असहनीय हो जाता है।

प्रधानमंत्री के वक्तव्य से उत्साहित उत्तर प्रदेश की सरकार ने बेहद महंगे सरकारी पर्यटक आवासों को लीज पर देने का फैसला ले डाला। राज्य सरकार हर जनविरोधी करतूत पर उतारू है। पहले माफियाओं के मकान ढहा कर वाहवाही लूटने में मशगूल उत्तर प्रदेश सरकार ने अब गरीबों और आम नागरिकों- खासकर दलितों, अल्पसंख्यकों के आवासों को ढहाना शुरू कर दिया है। हाथरस में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित बाल्मीकि परिवारों के मकानों को बिना किसी कारण के बिना नोटिस दिये ढहा दिया। इलाहाबाद में कल प्रोफेसर फातमी एवं उनकी बेटी के मकान को ढहा दिया गया। सामंती तत्वों और भूमाफियाओं को कब्जा दिलाने को प्रदेश भर में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के उन मकानों को ढहाने का अभियान बड़े पैमाने पर जारी है, जिनमें वे कई पीढ़ियों से रह रहे हैं।  

एक ओर लोगों के मकान ढहाए जारहे हैं वहीं जगह जगह लेबर कालोनियों के मकानों पर दबंगों ने आधिपत्य जमा लिया है। योगी सरकार कानून संविधान और उसकी प्रस्थापनाओं पर खुले हमले कर रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने धर्मनिरपेक्षता को संस्क्रति के विकास में बाधा बता कर संविधान पर बड़ा हमला बोला है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी इस सब पर कडा ऐतराज जताती है। भाकपा ने किसानों की जमीन की रक्षा, सार्वजनिक क्षेत्र को बचाने, महंगाई को उल्लेखनीय तादाद में नीचे लाने, लोगों को बेघर बनाने से रोके जाने और संविधान पर हमलों का प्रतिकार करने को 15 मार्च के किसानों- कामगारों के आंदोलन को जमीनी समर्थन करने का निर्णय लिया है। साथ ही भाकपा बैंकों, बीमा और जनरल इंश्योरेंस के कर्मियों के आंदोलनों का पुरजोर समर्थन करेगी। तदनुसार भाकपा की जिला इकाइयों को निर्देश जारी किया गया है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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बुधवार, 3 मार्च 2021

Press Note of CPI UP


 

भाकपा के प्रतिनिधिमंडल ने अलीगढ़ के गांव किवलाश पहुंच दलित बिटिया की हत्या के संबंध में गांववासियों से भेंट की, घटनास्थल का निरीक्षण किया

पुलिस द्वारा गढ़ी गयी कहानी को संदेहास्पद बताते हुये घटना की सीबीआई से जांच की मांग की

लखनऊ/ अलीगढ़- 3 मार्च 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव डा॰ गिरीश के नेत्रत्व में भाकपा का एक प्रतिनिधि मंडल आज अलीगढ़ जनपद के थाना- अकराबाद अंतर्गत किवलाश गांव पहुंचा। प्रतिनिधि मंडल में राज्य काउंसिल सदस्य एवं जिला सचिव अलीगढ़ का॰ सुहेव शेरवानी, सहसचिव का॰ इरफान अंसारी, का॰ हरीश लोदी, भाकपा हाथरस के कार्यकारी सचिव का॰ संजय खान, सहसचिव का॰ सत्यपाल रावल, मोहम्मद मुकीम एवं आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन ( एआईएसएफ़ ) हाथरस के जिला सचिव हितेश अंबेडकर आदि शामिल थे।

प्रतिनिधि मंडल ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। घटना के संबंध में गांववासी स्त्री- पुरुषों से जानकारी ली। पीड़िता के परिवार को पुलिस ने थाना- अकराबाद बुला लिया था, प्रतिनिधि मंडल जब उनसे मिलने थाना पहुंचा तो वे वहाँ से जा चुके थे। अतएव उनसे भेंट न हो सकी। गांव में स्थित डा॰ भीमराव अंबेडकर प्रतिमा के समक्ष उपस्थित गांववासियों को डा॰ गिरीश ने संबोधित किया। प्रतिनिधि मंडल ने अकराबाद थाने के समीप मौजूद पत्रकारों के साथ वार्ता की, और घटना के संबंध में भाकपा का पक्ष रखा।

किवलाश गांव में गांववासियों और अकराबाद में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुये भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि नाबालिग और वह भी कम विकसित ज्ञानेन्द्रियों वाली बालिका के साथ दुष्कर्म करने की कोशिश और असफल रहने पर बहशी तरीके से की गई हत्या रोंगटे खड़े करने वाली है। घटनास्थल के निरीक्षण से पता लगता है कि जहां हत्या की गयी वहां से लाश को घसीट कर कई मीटर दूर ला कर पटक दिया गया। इतनी जघन्य वारदात को शातिरों का कोई ग्रुप ही अंजाम दे सकता है। लेकिन पुलिस ने पड़ोसी गांव के एक अवयस्क युवक पर आरोप निरूपित कर मामले से पल्ला झाड लिया है। पुलिस द्वारा गड़ी गयी कहानी में कई झोल हैं और उस पर सहज विश्वास नहीं किया जा सकता। गत दिनों उन्नाव में तीन बहिनों की जहरखुरानी, जिसमें दो की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी थी के बारे में भी पुलिस ने ऐसी ही कहानी गड़ी थी।

सुहेव शेरवानी ने पत्रकारों को बताया कि पुलिस की इस कहानी पर न तो गांववासियों को विश्वास हो रहा है और थाने के बाहर मौजूद जनसमुदाय भी इस कहानी को नकार रहा है। अतएव घटना की सचाई सामने आनी चाहिए।

डा॰ गिरीश ने कहाकि पीड़िता के परिवार को न्याय मिलना चाहिये, और सचाई को उजागर करने को घटना की जांच सीबीआई को सौंपनी चाहिये। उन्होने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में बालिकायेँ, महिलाएं और आम नागरिक कोई भी सुरक्षित नहीं हैं। अपराधी बेखौफ हो वारदातों को अंजाम देरहे हैं और मुख्यमंत्री विपक्ष को प्रताड़ित करने में जुटे हैं। गत दिनों विधान सभा में उनके द्वारा विपक्ष को अशिष्ट भाषा में धमकी दी गयी जो कि लोकतन्त्र के लिये खतरा है। मुख्यमंत्री को बंगाल की नहीं यूपी की फिक्र करनी चाहिये- जो कि जंगलराज बन चुका है।

भाकपा ने किवलाश की दलित बिटिया को न्याय दिलाने और शातिर अपराधियों को जेल के सींखचों के पीछे पहुंचाने के लिये घटना की सीबीआई जांच करने की मांग की।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा,  उत्तर प्रदेश   

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मंगलवार, 2 मार्च 2021

उत्तर प्रदेश में जंगलराज

 

अलीगढ़ बालिका की संदिग्ध परिस्थितियो में हत्या की भाकपा ने निन्दा की

भाकपा का प्रतिनिधिमंडल डा॰ गिरीश के नेत्रत्व में कल अलीगढ़ पहुंचेगा

लखनऊ-2 मार्च 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के सचिव मण्डल ने जनपद- अलीगढ़ के अकराबाद के अंतर्गत एक गाँव में बहरी- गूंगी दलित बालिका की संदिग्ध परिस्थितियों में बेहद खौफनाक तरीके से की गयी हत्या पर गहरा दुख और आक्रोश प्रकट किया है। भाकपा ने पीढ़ित परिवार को न्याय दिलाने, उचित मुआबजा  देने और आरोपियों  को शीघ्र जेल के सींखचों के पीछे पहुंचाने की मांग की है।

यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा ने आरोप लगाया कि योगीराज में अपराधों खासकर महिलाओं और बालिकाओं के साथ दरिंदगी की वारदातें थम नहीं पा रही हैं। जिस दिन अलीगढ़ की बालिका को मौत के घाट उतारा  गया उसी दिन पीलीभीत में दुस्साहसी शोहदे एक दलित के घर में घुस गए और परिवार की 19 वर्षीय बेटी से दरिंदगी का प्रयास किया। बचाने को आयी उसकी छोटी बहिन पर भी हमला बोला। हाथरस में पुत्री से छेड़खानी की शिकायत करने वाले पिता को कल गोली से उड़ा दिया गया। जनपद कानपुर देहात में एक सभासद के दो बच्चों और शिक्षक बीबी को जिन्दा जला दिया गया जिसमें दोनों मासूम बच्चों की मौत होगयी।

इससे पूर्व हाथरस, बलरामपुर, उन्नाव, शाहजहाँपुर जैसी तमाम घटनाओं ने प्रदेश की बेटियों और उनके अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है। अपराधिक तत्वों पर काबू पाने में असमर्थ मुख्यमंत्री विपक्ष को विधान सभा के भीतर गुंडों की भांति धमकियाँ देते हैं। यह निंदनीय तो है ही, लोकतन्त्र के लिए भी खतरा है, भाकपा ने कहा है।  

भाकपा राज्य सचिव मंडल अलीगढ़ के घटनास्थल का जायजा लेने और पीढ़िता के परिवार से मिल कर संवेदना व्यक्त करने को कल अपना उच्चस्तरीय प्रतिनिधि मंडल अलीगढ़ भेज रहा है। 3 मार्च को राज्य सचिव डा॰ गिरीश के नेत्रत्व में यह प्रतिनिधि मंडल अलीगढ़ पहुंचेगा।


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शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2021

उन्नाव कांड पर भाकपा की प्रतिक्रिया

उन्नाव कांड की भाकपा ने तीव्र भर्त्सना की। पीढ़ित परिवार के प्रति संवेदना जतायी

घटना की सीबीआई से जांच और तीसरी बिटिया को एम्स भेजने की मांग की 

राज्य सरकार से जघन्य वारदातों की नैतिक ज़िम्मेदारी लेने की मांग दोहराई

 लखनऊ- 19 फरबरी 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने उन्नाव की घटना, जिसमें कि दो बालिकाओं की मौत हो गयी और तीसरी गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती है, की कठोर शब्दों में निन्दा की और पीढ़ित परिवार के प्रति गहरी सहानुभूति जताई है।

यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहाकि उत्तर प्रदेश में महिलाओं एवं बालिकाओं के साथ घट रही असंख्य वारदातों में से ये एक विशिष्ट वारदात है। यह हाथरस कांड की पुनराव्रत्ति है। गज़ब की बात यह है कि राजधानी लखनऊ से सटा जिला- उन्नाव महिलाओं के लिये दुर्दांत स्थल बन गया है जहां एक से बढ़ कर एक लोमहर्षक घटनायें लगातार होरही हैं।

भाकपा ने कहाकि ये वारदातें जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से टीवी चेनलों पर लगातार चल रहे उस विज्ञापन को मुंह चिढ़ा रही हैं जिसमें अलापा जारहा है कि यूपी की तो अब बात ही अलग है। हां यूपी की बात वाकई अलग है क्योंकि यह अपराध और अत्याचार प्रदेश बन गया है; भाकपा ने कहा है।  

भाकपा ने मांग की कि इससे पहले कि घटना और घटनास्थल के सबूत धूमिल हों, घटना की जांच सीबीआई को सौंप देनी चाहिये, और उसे कम से कम समय में जांच पूरी करने के निर्देश दिये जाने चाहिये। पीढ़ित परिवार भी शुरू से सीबीआई जांच की ही मांग कर रहा है। दूसरे- चिकित्साधीन बिटिया को एयर- एंबुलेंस से एम्स, दिल्ली तत्काल भेजा जाना चाहिये, ताकि उसके जीवन को बचाया जासके। उसका बचाया जाना अपराधियों को अंजाम तक पहुंचाने के लिये भी जरूरी है।

इससे पहले कि विपक्ष सरकार से त्यागपत्र की मांग करे, राज्य सरकार को इन वारदातों की नैतिक ज़िम्मेदारी तो लेनी ही चाहिए; भाकपा ने स्पष्ट कहा है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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गुरुवार, 18 फ़रवरी 2021

किसान आंदोलन के समर्थन में उत्तर प्रदेश में भाकपा मैदान में

 

लखनऊ- दिनांक- 18- 2-2021, संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा देश भर में रेल रोकने के आह्वान के समर्थन में उत्तर प्रदेश में आज भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी भी सड़कों पर उतरी। तीनों क्रषी क़ानूनों को तत्काल रद्द करने, एमएसपी को लागू कराने को कानून बनाने, विद्युत बिल 2020 को रद्द करने, पेट्रोल डीजल रसोई गैस की कीमतें आधी करने, महंगाई पर कारगर रोक लगाने, गन्ने का खरीद मूल्य घोषित करने तथा उन्नाव की बालिकाओं के साथ हुयी हैवानियत की जांच सीबीआई से कराने आदि सवाल भाकपा के आन्दोलन के केन्द्र में रहे।

राज्य सरकार की तमाम दमनात्मक कार्यवाहियों के बावजूद भाकपा और विपक्षी दलों के संयुक्त मोर्चे ने किसानों के समर्थन में उरई में का॰ कैलाश पाठक के नेत्रत्व में रेल रोकी। बाद में सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। फ़ैज़ाबाद में भाकपा जिला सचिव का॰ रामतीरथ पाठक के नेत्रत्व में रेल रोकने के प्रयास में दर्जनों कार्यकताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। कानपुर में भी भाकपा, माकपा और किसान यूनियन के दर्जनों कार्यकर्ता गिरफ्तार कर लिए गये। जौनपुर में जिला सचिव कल्पनाथ गुप्ता एवं सालिगराम पटेल आदि को सुभ से ही घर में नजरबंद कर लिया गया। बाराबंकी में भी किसान सभा के पदाधिकारियों को घर पर ही पुलिस ने पाबंद कर दिया।

राज्य सरकार की तमाम पाबन्दियों के बावजूद भाकपा ने जगह जगह स्वतंत्र और संयुक्त रूप से धरने प्रदर्शन आयोजित किये और महामहिम राष्ट्रपति और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन दिये। इन ज्ञापनों के माध्यम से मांग की गयी है कि क्रषी और किसान विरोधी तीनों काले क़ानूनों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाये। एमएसपी को लागू कराने के लिये कानून बनाया जाये। दिल्ली के आसपास जुटे किसानों के धरनों के इर्द गिर्द खड़े किये गये अवांच्छित और अमानुषिक अवरोध तत्काल हठाये जायेँ। तीन साल से रोके गये गन्ने का समर्थन मूल्य तत्काल घोषित किया जाये। गन्ना किसानों के चीनी मिलों पर बकाये का भुगतान मय ब्याज के कराया जाये। श्रम क़ानूनों मेँ किये गये प्रतिगामी परिवर्तनों को तत्काल रोका जाये। विद्युत अधिनियम 2020 को रद्द किया जाये।

पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें आधी की जायें। अथवा उन्हें जीएसटी के अंतर्गत लाया जाये। पूर्ववर्ती मूल्य नियंत्रण प्रणाली लागू की जाये। महंगाई पर कारगर रोक लगायी जाये। कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने को गरीब और आम आदमी के ऊपर आर्थिक बोझ लादना रोका जाये। सार्वजनिक क्षेत्र को बेचना तत्काल बन्द किया जाये।

युवाओं को रोजगार उपलब्ध्ध कराया जाये। काम के पूरे दाम दिये जायें। उत्तर प्रदेश मेँ आंदोलनों और आंदोलनकारियों पर दमन रोका जाये। कुशासन और भ्रष्टाचार की स्थिति मेँ सुधार किया जाये। उन्नाव में तीन दलित बालिकाओं के साथ हुयी हैवानियत की जांच सीबीआई से कराई जाये।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मण्डल ने देश और प्रदेश में शांतिपूर्ण तरीके से रेल रोकने और आंदोलन करने के लिए किसानों, भाकपा कार्यकर्ताओं और अन्य दलों के कार्यकर्ताओं को क्रान्तिकारी बधाई प्रेषित की है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा उत्तर प्रदेश

 

 

 

 

 

 

 

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शनिवार, 6 फ़रवरी 2021

किसान आंदोलन पर हठधर्मिता त्यागे केन्द्र सरकार


सफल रास्ताजाम एवं व्यापक विरोध प्रदर्शन के लिये भाकपा ने किसानों और कार्यकर्ताओं को दी बधाई

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा खड़े किए गये तमाम अवरोधों के बावजूद सफल रहा आंदोलन: भाकपा ने दमन की निन्दा की

किसान आंदोलन की आड़ में घोर जनविरोधी और लोकतंतर्विरोधी एजेंडे पर काम कर रही हैं भाजपा सरकारें: डा॰ गिरीश

गन्ना मूल्य घोषित करने और चीनी मिलों पर गन्ने के बकाए को किसानों को दिलाने की मांग भी की गयी

लखनऊ- 6 फरबरी 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल ने आज देश भर में सफलतम चक्का जाम के लिये देश के किसानों- कामगारों को क्रांतिकारी बधाई दी। भाकपा ने उत्तर प्रदेश के भाकपा, अखिल भारतीय किसान सभा, खेत मजदूर यूनियन एवं वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं को विशिष्ट बधाई दी जिन्होने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा खड़े किए गए तमाम अवरोधों के बावजूद उत्तर प्रदेश के जिलों जिलों में धरने, प्रदर्शन एवं विरोध सभाएं आयोजित कीं और ज्ञापन सौंपे।

गत रात्रि कुछ किसान नेताओं द्वारा अचानक उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड एवं दिल्ली में हाईवे जाम न करने की घोषणा से असमंजस की स्थिति पैदा होगयी थी, लेकिन भाकपा और सहयोगी संगठनों ने पहले से ही धरने/ प्रदर्शन एवं सभा आदि करने का फैसला ले रखा था। अतएव बदली परिस्थिति में भी उसे बरकरार रखा गया।

उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर जिलों के प्रशासन ने जगह जगह इस आंदोलन की राह में रोड़े अटकाये। तमाम नेताओं को अर्दब में लेने की कोशिश की। भाकपा जौनपुर के सचिव का॰ कल्पनाथ गुप्ता को हाउस अरेस्ट करने के बावजूद वहाँ सभा कर ज्ञापन दिये गये। रास्ता जाम स्थगन की दिल्ली से घोषणा के बावजूद उरई में का॰ कैलाश पाठक के नेत्रत्व में सर्वदलीय किसान समर्थक मोर्चे के सैकड़ों कार्यकर्ता हाइवे पर पहुँच गये। वहाँ सभा कर ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा गया। वाराणसी में किसानों के समर्थन में अधिवक्ता, पत्रकार और आम नागरिक उतर आए तो कई जिलों में आदिवासियों ने मोर्चा संभाला। अन्य अनेक जिलों में किसानों के समर्थन में महिलाएं, खेत मजदूर, मजदूर, छात्र एवं नौजवान सड़कों पर उतरे।

राष्ट्रपति को सौंपे गये ज्ञापनों में तीनों क्रषी क़ानूनों को वापस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने को कानून बनाने, शहीद किसानों के परिवारों को रु॰ 25- 25 लाख का मुआबजा  दिये जाने, आंदोलनकारियों पर लगे मुकदमे वापस लिये जाने, गिरफ्तार किसान नेताओं को रिहा किए जाने तथा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों और विपक्ष के आंदोलनकारियों के विरूध्द की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाही रोके जाने की मांग की गयी।

भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि देश भर के लोगों का ध्यान किसान आंदोलन पर टिका है और भाजपा सरकारें उसकी आड़ में निरंतर जनता को लूटने के एजेंडे पर काम कर रही है। पेट्रोल, डीजल एवं रसोई की कीमतों में भारी बदोत्तरी कर दी गयी है। वेशकीमती सरकारी संपत्तियों को पूँजीपतियों के हाथों बेचा जा रहा है। गन्ने का 2021 का समर्थन मूल्य घोषित किया नहीं गया और गन्ना सप्लाई पर्चियों पर कीमत के खाने में शून्य लिख कर दिया जा रहा है। पिछले सत्र का किसानों का करोड़ों रुपया चीनी मिलों पर बकाया पड़ा है। सरकार न किसानों की सुन रही है न आमजनों की। आज के ज्ञापनों में इन सवालों को भी उठाया गया।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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बुधवार, 13 जनवरी 2021

किसान आंदोलन का स्वर्णिम 50वां दिन


उत्तर प्रदेश के कोने कोने में फूंकी गयीं काले क्रषी क़ानूनों की प्रतियां

आपातकाल सरीखे हालातों के बावजूद प्रदेश में निरंतर बढ़ रहा है किसान आंदोलन को समर्थन

छलावे से बाज आये, काले क़ानूनों को तत्काल रद्द करे केन्द्र सरकार: वामदल

लखनऊ- 13 जनवरी 2021, उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने दावा किया कि आपातकाल जैसी पाबंदियों के बावजूद उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन का समर्थन निरंतर बढ़ रहा है और आज आंदोलन के 50वें दिन प्रदेश के कोने कोने में तीनों काले क्रषी क़ानूनों की प्रतियाँ सैकड़ों स्थानों पर जलायी गईं।

ज्ञातव्य हो कि लोढ़ी/ मकर संक्रांति के अवसर पर एआईकेएससीसी ने आज क्रषी क़ानूनों की प्रतियां जलाये जाने का आह्वान किया था और वामपंथी दलों ने इसे समर्थन प्रदान किया था। अनेक जगह अन्य जनवादी दलों और सामाजिक संगठनों ने संयुक्त मोर्चे गठित कर आंदोलन के साथ खड़ा होने का निश्चय किया था।

तदनुसार आज जगह जगह से सुबह से ही काले क़ानूनों की प्रतियां जलाने की खबरें वामपंथी दलों के मुख्यालयों को प्राप्त होने लगीं। सोशल मीडिया पर फोटो एवं वीडियोज़ उपस्थित होने लगे। गोदी मीडिया भले अपने प्रसारण में इन कार्यवाहियों को स्थान न दे, सोशल मीडिया पर आज उत्तर प्रदेश और देश भर की प्रतियां दहन की कार्यवाहियाँ छायी हुयी हैं।

काले क़ानूनों की प्रतियां जलाये जाने से पहले अनेक जगह जुलूस निकाले गये, सभाएं की गयीं और कई जगह धरने दिये गये। सायंकाल सहयोगी संगठनों द्वारा केंडिल मार्च निकालने का सिलसिला प्रारंभ हो गया है। इसके अतिरिक्त यूपी के वामपंथी दलों के सहयोगी संगठन किसान आंदोलन के समर्थन में लगातार दिल्ली के विभिन्न वार्डरों खासकर गाजीपुर वार्डर पर पहुंच रहे हैं।

वामदलों ने केन्द्र सरकार की कठोर शब्दों में निंदा की कि वो काले क्रषी क़ानूनों को रद्द करने के बजाय छलावेपूर्ण कार्यवाहियों में मशगूल है। वह इस स्तर तक गिर चुकी है कि किसान आंदोलन में आतंकवादियों के प्रवेश की कुत्सित और मनगढ़न्त कहानियाँ गढ़ रही है। इसके दूरगामी परिणाम होंगे और किसानों का गुस्सा और भी बढ़ेगा, वामदलों ने चेताया है। क्यौंकि किसानों ने लाखों की तादाद में 50 दिनों तक शांतिपूर्ण आंदोलन करके इतिहास निर्मित कर दिया है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा, माले लिबरेशन के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव एवं आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक के राज्य संयोजक अभिनव कुशवाहा ने आज की ऐतिहासिक कार्यवाहियों के लिये सभी आंदोलनकारियों को बधाई दी है।

उन्होने 18 जनवरी को महिला किसान दिवस एवं 23 जनवरी को सुभाष जयंती पर किसान दिवस को और भी व्यापक तरीके से आयोजित करने का आह्वान किया है।

डा॰ गिरीश

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मंगलवार, 12 जनवरी 2021

आंदोलनकारी किसानों को फिर से मिला वामदलों का साथ


 

किसान आंदोलन के अगले चरण का वामदलों ने किया पुरजोर समर्थन

कल 13 जनवरी को काले क्रषी क़ानूनों की होली जलायी जायेगी

18 को महिला किसान दिवस तथा 23 जनवरी को किसान दिवस का आयोजन होगा

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी का संज्ञान ले राज्य सरकार: दमनात्मक कार्यवाहियों से आए बाज- वाम दल

लखनऊ- 12 जनबरी 2021, उत्तर प्रदेश के चारों वामपंथी दलों ने आल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति ( एआईकेएससीसी ) द्वारा जारी आंदोलन के कार्यक्रम को समर्थन प्रदान करते हुये वामदलों के कार्यकर्ताओं का आह्वान किया है कि वे किसानों के साथ मिल कर इन कार्यक्रमों को पूरी शिद्दत से सफल बनायें। वामदलों ने शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीकों से आंदोलन कर किसान कामगार और अन्य शोषित पीडितों की आवाज उठाने वाले वांमपंथी एवं लोकतांत्रिक दलों के कार्यकर्ताओं/ नेताओं की राज्य सरकार द्वारा उत्पीड़नात्मक कार्यवाही को जनता के समक्ष बेनकाव करने का आह्वान भी किया है।

यहाँ जारी एक संयुक्त प्रेस बयान में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी, भाकपा, माले- लिबरेशन एवं आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक के प्रादेशिक नेताओं ने आरोप लगाया कि केन्द्र की सरकार अपने कार्पोरेट्स आकाओं के हिट साधने के लिये किसानों और खेती को बरवाद करने वाले तीन काले क़ानूनों को जबरिया किसानों पर थोप रही है। वह किसानों को उनकी उपजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की कानूनी गारंटी लेने तक को तैयार नहीं है।

किसानों के समक्ष लड़ो या मरो की स्थिति आ गयी है और वे पिछले डेढ़ माह से अधिक से  हाड़कंपाने वाली ठंड और वरसात में दिल्ली के चारों ओर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। घोर जनविरोधी एवं लोकतन्त्र विरोधी सरकार हठधर्मिता बरत रही है और आंदोलन को शिथिल करने को अनेकों मायावी हथकंडे अपना रही है। मजबूरन किसानों ने धरने के अतिरिक्त देश भर में गणतन्त्र दिवस तक कई कार्यक्रमों के आयोजन का आह्वान किया है।

लोढ़ी/ मकर संक्रान्ति के अवसर पर 13 जनवरी को देश भर में किसानो की बरवादी के प्रतीक तीनों काले क्रषी क़ानूनों की होली जलाई जायेगी। 18 जनवरी को महिला किसान दिवसों का आयोजन किया जायेगा तथा 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का 125 वां जनम दिवस किसान दिवस के रूप में मनाया जायेगा। यदि फिर भी काले क़ानूनों को रद्द नही  किया गया तो गणतन्त्र दिवस पर किसान परेड की योजना है। वामदल इन सभी कार्यक्रमों का समर्थन करते हैं।

वामदलों ने कहा कि योगी सरकार निरंतर जनवादी आंदोलनों को दमानात्मक तरीकों से कुचलती रही है। वाराणसी में वामदलों के नेताओं के विरूध्द गैगस्टर एक्ट में एफआईआर दर्ज की गयीं हैं तथा भारत बंद में भाग लेने पर अलीगढ़ में भी संगीन दफाओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। किसानों को दिल्ली जाने से बलपूर्वक रोका जा रहा है, धरने प्रदर्शन और अन्य आंदोलनकारी कार्यवाहियों को बाधित किया जा रहा है तथा लोगों को थानों में ले जा कर प्रताड़ित किया जा रहा है। यह लोकतान्त्रिक आंदोलनों को कुचलने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

वामदलों ने कहा कि राज्य सरकार को कल सर्वोच्च न्यायालय की दो टूक टिप्पणी कि “हम नागरिकों के प्रदर्शनों को रोकने के लिये कोई आदेश नहीं देंगे” का संज्ञान लेना चाहिए और अपनी तानाशाहीपूर्ण कारगुजारियों पर विराम देना चाहिए। उन्होने कहाकि न्यायिक प्रतिष्ठान को भी इसका संज्ञान लेना चाहिए।

भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश, माकपा राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा माले के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव एवं आ॰ इ॰ फारबर्ड ब्लाक के संयोजक अभिनव कुशवाहा ने उपर्युक्त कार्यक्रमों को सफल बनाने की अपील की है।

डा॰ गिरीश

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बुधवार, 6 जनवरी 2021

Badaayun Episode: Shame on Yogi Govt.

 

बदायूं में मन्दिर में हुये सामूहिक बलात्कार और हत्या की घटना के लिये ज़िम्मेदारी वहन करे राज्य सरकार

 

भाकपा ने कड़े शब्दों में निन्दा की। कहा यूपी में कोई भी कहीं भी सुरक्षित नहीं।

 

लखनऊ- 6 जनबरी 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने जनपद-  बदायूं में  पति के स्वास्थ्य के लिये मन्नत मांगने गयी 50 वर्षीय महिला के साथ सामूहिक बलात्कार और उसकी जघन्य हत्या की कड़े शब्दों में निन्दा की। हद तो तब हो गयी जब पुलिस ने पहले मुकदमा तक दर्ज करने से मना कर दिया। भाकपा ने इस सबके लिये योगी सरकार की कार्यप्रणाली को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।

भाजपा और संघ का ये कैसा रामराज्य है जिसमें मंदिरों तक में महिलाओं से दरिंदगी हो रही है? हाथरस, बलरामपुर और बलात्कार के अन्य दर्जनों मामलों की यादें जहन को अब भी झकझोर रहीं थीं कि मन्दिर में हुये इस राक्षसी क्रत्य ने लोगों की आस्था पर चोट की है। धर्म की दुहाई देकर वोट बटोरने वाली पार्टी का घिनौना और क्रूर चेहरा सामने आ गया है।

भाकपा ने कहा कि यदि यही घटना अन्य किसी धर्म के स्थल में हुयी होती तो भाजपाइयों ने उसकी एक एक ईंट उखाड़ दी होती। लेकिन मन्दिर में हुये इस कुक्रत्य पर भाजपा मुंह खोलने को तैयार नहीं। मुद्दों पर दोगलेपन की ये इंतिहाँ है।

भाकपा का आरोप है कि उत्तर प्रदेश के जंगलराज में कोई भी सुरक्षित नहीं। महिलाएं न घर में सुरक्षित हैं न मंदिरों में। किसान खेतों में सुरक्षित नहीं और उन्हें आवारा पशु मार रहे हैं। आंदोलनो में जाने पर उन्हें पुलिस पीट रही है। अन्त्येष्टि करने जाने वालों की लाशें शमशान घाट से घरों को पहुँच रही हैं। रोटी रोजगार मांगने वाले और कर्ज में डूबे किसान आत्महत्या कर रहे हैं अथवा पुलिस प्रशासन द्वारा दबोचे जा रहे हैं। ढेरों यात्री राजमार्गों पर दुर्घटनाओं में मारे जा रहे हैं। लूटपाट और हर अपराध की बढ़ोत्तरियों ने आम नागरिकों का जीना मुश्किल कर दिया है।

हर मामले में राज्य सरकार कुछ अफसरों- कर्मचारियों पर कार्यवाही कर अपनी वाहवाही लूट लेती है। जबकि इस सबके लिये सरकार की असफलता सबसे बड़ा कारण है। सरकार को इनकी ज़िम्मेदारी कबूल करनी चाहिए।

भाकपा ने पीड़िता के परिवार के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुये उसे न्याय दिलाने और सरकार द्वारा ज़िम्मेदारी वहन करने की मांग की।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020

Press Note of Left Parties of UP


 

किसानों की अमूल्य शहादत को क्रांतिकारी नमन पेश करेंगे वामदल

 

20 दिसंबर को गाँव गाँव शहादत दिवस मनाने के एआईकेएससीसी के आह्वान का किया समर्थन

 

लखनऊ- 18 दिसंबर 2020, उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने देश और दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन का नेत्रत्व कर रही सर्वोच्च कमांड एआईकेएससीसी द्वारा 20 दिसंबर को देश भर में शहीद दिवस आयोजित करने की अपील को समर्थन प्रदान किया है। वामदलों ने अपनी समस्त कतारों से अनुरोध किया है कि वे किसानहित, जनहित एवं देशहित में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले किसानों की शहादत को गाँव- गाँव पुरजोर नमन करें।

ज्ञातव्य हो कि भीषण शीतलहरी में दिल्ली में संकल्पबध्द डेरा जमाये बैठे लाखों किसानों में से अब तक 38 किसान शहीद हो चुके हैं। बावजूद इसके निष्ठुर, धूर्त और षडयंत्रकारी सरकार किसानों की मांगों पर संजीदगी से विचार करने के बजाय उसमें फूट डालने, किसानों को लांच्छित करने और उनके आंदोलन का जबरिया जिम्मा विपक्षी दलों पर डालने की साज़िशों में जुटी है। वह अपने देश के किसानों से शत्रु देश के नागरिकों जैसा वर्ताव कर रही है।

कभी उन्हें खालिस्तानी, नक्सलवादी और देशद्रोही बताया जाता है तो अब यूपी के मुख्यमंत्री ने इसे मंदिर निर्माण के खिलाफ ताकतों द्वारा समर्थित आंदोलन बता कर सांप्रदायिक कार्ड खेलने की कुचेष्टा की है। आंदोलन के पहले ही दिन से भाजपा, संघ परिवार और उसका गोबवेल्सी प्रचारतंत्र आंदोलन में जातीय, धार्मिक और क्षेत्रीय तत्व ढूँढने की असफल कोशिश में लगा है।

किसान आंदोलन को कुचलने के लिए वाचिक एवं भौतिक हिंसा का सहारा लेने वाला सत्तापक्ष अहिंसक और गांधीवादी तरीकों से किए जा रहे आंदोलन को हिंसक साबित करके उसे जबरिया समाप्त कराने के षडयंत्र रच रहा है। जबकि माननीय उच्चतम न्यायालय ने आंदोलन को वैध, संविधान सम्मत और तर्कसम्मत करार दिया है।

अंबानी अदानी जैसे कार्पोरेट्स को लाभ पहुंचाने और किसानों को कंगाल बनाने की गरज से बनाये गये तीनों काले क़ानूनों को रद्द कराने और विद्युत बिल 2020 को रद्द करने की मांगों को लेकर चल रहे इस आंदोलन के प्रति भाजपा और संघ परिवार का रवैया बेहद आपत्तिजनक है। वे क़ानूनों को जायज ठहराने को स्वयं तो 7,0000 रैलियाँ कर रहे हैं और किसानों और उनके समर्थन में विपक्ष की संवैधानिक कार्यवाहियों को बाधित कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में किसानों का चीनी मिलों पर भारी धन बकाया पड़ा है। कर्ज में डूबे किसानों का सरकारी तंत्र उत्पीड़न कर रहा है और वे आत्महत्याएं कर रहे हैं। कल ही हाथरस जनपद में कर्ज में डूबे एक किसान ने उत्पीड़न से आजिज़ आकर आत्महत्या कर ली। उनकी धान आदि फसलों की कीमत समर्थन मूल्य से आधी मिल पारही है। आवारा पशुओं से किसान की फसलें तवाह हो रही हैं। उन्हें सम्मान निधि की राशि मिल नहीं पा रही। महंगे डीजल, खाद, क्रषी उपकरणों और कीटनाशकों ने लागतमूल्य बढ़ा दिया है। किसानों पर आश्रित खेत मजदूर और उन दोनों की युवा सन्तानें बेरोजगारी का दंश झेल रही हैं। और यूपी सरकार जबरिया उनकी आवाज दबा रही है। किसानों को आंदोलन करने पर गिरफ्तार किया जा रहा है, धमकाया जा रहा है और उन्हें दिल्ली कूच से रोका जा रहा है।

वामदलों के नेताओं- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा माले के राज्य सचिव सुधाकर यादव एवं आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक के संयोजक अभिनव कुशवाहा ने कहा कि वामदल शुरू से ही किसानों के हर जायज संघर्ष में उनके कंधे से कंधा मिला कर चलते रहे हैं और 20 दिसंबर के उनके आह्वान का पुरजोर समर्थन करेंगे।

 

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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सोमवार, 14 दिसंबर 2020

सफल रहीं आज की किसान कार्यवाहियाँ

 

अहिंसक आंदोलन के खिलाफ हिंसा पर उतारू है उत्तर प्रदेश सरकार

 

भाकपा ने सभी आंदोलनकारियों को सफल और शांतिपूर्ण कार्यवाहियों के लिये बधाई दी

 

सरकारी दमन की निंदा की, गिरफ्तार साथियों की तत्काल रिहाई की मांग की

लखनऊ- 14 दिसंबर 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने तमाम दमन और सरकारी आतंक के बीच तीन काले क़ानूनों और विद्युत बिल 2020 वापसी के लिये किसानों और विपक्ष द्वारा की गयी व्यापक कार्यवाही के लिये उत्तर प्रदेश और देश के किसानों का क्रांतिकारी अभिनंदन किया है। भाकपा ने वामपंथी दलों सहित तमाम विपक्षी दलों को भी किसानों के समर्थन में व्यापक रूप से सड़कों पर उतरने के लिये बधाई दी है।

एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने आरोप लगाया कि आज के आंदोलन को कुचलने के लिये सरकार ने बेहद दमनकारी रवैया अपनाया हुआ था। रात से ही भाकपा, किसान सभा, नौजवान सभा, स्टूडेंट्स फेडरेशन एवं अन्य वामपंथी दलों/ संगठनों  के नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया था।

कई को हाउज़ अरेस्ट कर लिया गया, अनेकों को उस समय हिरासत में ले लिया गया जब वे आंदोलन में भाग लेने को गंतव्य की ओर जा रहे थे तो अन्य कई को प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार कर लिया। हिरासत में न इन्हें खाना- पीना दिया गया न ही ठंड से बचाने के इंतजामात किए गये। योगी सरकार आंदोलन के प्रति भयावह क्रूरता पर उतर आयी है। भाकपा इस दमनचक्र की निंदा करती है और सभी गिरफ्तार लोगों की तत्काल रिहाई की मांग करती है।

भाकपा ने सवाल उठाये हैं कि जब आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और लोकतान्त्रिक मर्यादाओं के भीतर हो रहा है तो भाजपा सरकार उसे क्यों कुचलने पर आमादा है? क्यों किसानों वामदलों को दमन का निशाना बनाया जा रहा है? क्या अहिंसक आंदोलन पर ये हिंसा नहीं है? क्या यह हक की लड़ाई के खिलाफ यूध्द नहीं है? क्या यह आलोकतांत्रिक और अन्यायपरक नहीं है? क्या सबसे बड़ी अदालत को इस अन्याय का नोटिस नहीं लेना चाहिए?

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा , उत्तर प्रदेश

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मंगलवार, 8 दिसंबर 2020

Left came on roads in UP

 

किसानों के भारतबंद के समर्थन में उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों की अभूतपूर्व कार्यवाहियाँ

 

रास्ते जाम किए, पुतले जलाये, प्रदर्शनों से रहीं सड़कें लाल

गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग उठाई

वाम नेताओं ने सभी आंदोलनकारियों को लाल सलाम पेश किया

 

लखनऊ- 8 दिसंबर 2020, योगी सरकार के भारी आतंक और दमन के बावजूद किसानों के भारत बंद के समर्थन में उत्तर प्रदेश में वामपंथी दलों एवं जनसंगठनों ने अभूतपूर्व एकजुटता का इजहार किया। यद्यपि गत रात से ही अनेक जिलों में वामपंथी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं की ताबड़तोड़ गिरफ्तारियाँ शुरू कर दी थीं, फिर भी वामपंथी दलों ने हर जिले में संयुक्त रूप से अनेक जुझारू कार्यवाहियों को अंजाम दिया।

प्रदेश में हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने रास्ते जाम किये, मोदी, योगी और कार्पोरेट्स के पुतले जलाये, जुलूस निकाले, धरने दिये और किसानों नौजवानों की मांगों से संबंधित ज्ञापन दिये। इन कार्यवाहियों में चारों वामपंथी दलों- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी, भाकपा, माले- लिबरेशन एवं फारबर्ड ब्लाक तो थे ही, संबंधित किसान सभाएं, ट्रेड यूनियनें, नौजवान और छात्र फेडरेशनें, महिला संगठन, इप्टा जलेस जसम आदि सान्स्क्रतिक संगठन, खेत मजदूर यूनियनें आदि भी सड़कों पर उतरे।

ट्रांसपोर्टर्स, अधिवक्ता, बिजली कर्मी आशा, आंगनबाड़ी, आदि भी कार्यवाहियों में शामिल हुये। मंडियाँ और अनेक जगह बाजार भी बन्द रहे। आज समूचा उत्तर प्रदेश लाल नजर आ रहा था। कई विपक्षी दलों के नेता/ कार्यकर्ताओं ने भी सड़कों पर उतर कर किसानों के प्रति समर्थन का इजहार किया। वामपंथी दलों ने किसानों के समर्थन में उतरने वाले सभी को क्रांतिकारी अभिनंदन पेश किया है। संघर्षों में उपजी वाम एकता और जनवादी एकता को आगे भी बनाये रखने पर ज़ोर दिया।

वामदलों ने कहाकि यह किसानों का भारत बन्द था, व्यापारियों का नहीं। बाजार बन्द होने न होने से इसका मूल्यांकन नहीं किया जाना चाहिए। खुदरा व्यापार में कार्पोरेट्स के आधिपत्य के विरोध में यदि व्यापारी भी विरोध में शामिल रहते तो उचित ही रहता। जो बन्द से अनभिज्ञ रहे वह उनकी बड़ी चूक है।

भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश, माकपा राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा माले सचिव का॰ सुधाकर यादव एवं फारबर्ड ब्लाक के संयोजक अभिनव कुशवाहा ने सभी आंदोलनकारियों की बिना शर्त तत्काल रिहाई की मांग की है।

जारी द्वारा-

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश    

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शनिवार, 5 दिसंबर 2020

उत्तर प्रदेश- किसान संगठनों के 8 दिसंबर के भारत बंद को उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने समर्थन प्रदान किया

लखनऊ- 5 दिसंबर 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी      (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, माले- लिबरेशन एवं आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक की उत्तर प्रदेश राज्य इकाइयों ने किसान संगठनों के 8 सितंबर के भारत बन्द को समर्थन दिया है।

यहां जारी एक संयुक्त बयान में वामपंथी दलों ने कहा है कि वे नये क्रषी क़ानूनों के विरूध्द देश भर के किसान संगठनों द्वारा चलाये जा रहे व्यापक एवं जुझारू आंदोलन के प्रति पूर्ण एकजुटता व्यक्त करते हैं और उनके द्वारा 8 दिसंबर को भारत बन्द कराने के आह्वान का समर्थन करते हैं।

वामपंथी दलों ने भारत की खेती को बचाने और देश की खाद्य सुरक्षा के लिए किए जा रहे अन्नदाताओं के संघर्ष के विरूध्द भाजपा/ आरएसएस द्वारा चलाये जा रहे झूठे और घ्रणित प्रचार अभियान की कड़े से कड़े शब्दों में निन्दा की।

वामपंथी दल तीनों नये क्रषी क़ानूनों और विद्युत संशोधन बिल 2020 को समाप्त करने की किसानों मांगों का शुरू से ही समर्थन कर रहे हैं और उनके सहयोगी संगठन इसके लिए निरंतर आवाज उठा रहे हैं। वामपंथी दल अन्य राजनैतिक दलों और शक्तियों से अपील करते हैं कि वे किसानों की मांगों के समर्थन में आगे आयें।

भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश, माकपा राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा, माले लिबरेशन के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादवएवं फारबर्ड ब्लाक के राज्य संयोजक अभिनव कुशवाहा ने अपनी जिला इकाइयों से अनुरोध किया कि वे संयुक्त रूप से भारत बन्द के समर्थन में हर संभव प्रयास करें। अन्य लोकतान्त्रिक दलों, संगठनों और शक्तियों को भी साथ में लायें।

जारी द्वारा

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020

Youth and students in support of farmers in UP


आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में उत्तर प्रदेश के छात्र- नौजवान सड़कों पर

AISF एवं AIYF के कार्यकर्ताओं ने जिलों में किये धरने, प्रदर्शन और पुतले दहन

लखनऊ- 4 दिसंबर 2020, आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन ( AISF ) एवं अखिल भारतीय नौजवान सभा ( AIYF ) की उत्तर प्रदेश राज्य इकाइयों के आह्वान पर आज दिल्ली और देश भर में संघर्षरत/ आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में सैकड़ों की संख्या में छात्रों और नौजवानों ने आज  सड़कों पर उतर कर किसानों के साथ एकजुटता का इजहार किया तथा किसानों, छात्रों और नौजवानों की ज्वलंत मांगों को स्थानीय प्रशासन के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति तक पहुंचाया।

एआईएसएफ़ एवं एआईवाईएफ़ के जाबांज कार्यकर्ताओं ने आज समूचे उत्तर प्रदेश के जिला अथवा तहसील मुख्यालयों पर जुझारू तेवरों के साथ धरने दिये, प्रदर्शन किये एवं कई जगह मगरूर, हठी, किसान, मजदूर, छात्र- नौजवान विरोधी और अंबानी अदानी जैसे कार्पोरेटों की दलाल सरकार के पुतले भी फूंके।

ज्ञापनों के माध्यम से छात्र नौजवानों ने मांग की कि किसान विरोधी तीनों कानून वापस लिए जायें और इसके लिये संसद का विशेष सत्र बुलाया जाये। उन्होने नूनतम समर्थन मूल्य दिलाने की गारंटी करने वाला कानून बनाने की मांग की। बिजली अधिनियम 2020 वापस लिया जाने और श्रम क़ानूनों में किये गए मजदूर विरोधी बदलावों को रद्दी की टोकरी में डालने की मांग पर बल दिया।

उन्होने मांग की कि गरीब विरोधी, जनविरोधी और धनवानपरस्त नई शिक्षा नीति 2020 तत्काल वापस ली जाये, भगतसिंह रोजगार गारंटी एक्ट बनाया जाये और सबको समान शिक्षा, रोजगार और मुफ्त स्वास्थ्य सेवायें  उपलब्ध करायी जायें।

अपने 5 सूत्रीय माँगपत्र में छात्र युवाओं ने आंदोलनकारी किसानों, मजदूरों, छात्रों एवं नौजवानों के ऊपर हो रहे अत्याचारों को तत्काल रोके जाने की मांग की। चेतावनी दी कि सरकार शीघ्र नहीं सुधरी तो छात्र- नौजवान और भी बड़ी कार्यवाहियों के लिये बाध्य होंगे।

एआईएसएफ़ एवं एआईवाईएफ़ के राज्य कार्यालयों को समाचार प्रेषित किये जाने तक कई दर्जन जनपदों से कार्यक्रमों के सफलतापूर्वक संपन्न होने की खबरें मिल चुकी हैं। उनमें से प्रमुख हैं- मथुरा, हाथरस, गाजियाबाद, शामली, बदायूं, बरेली, शाहजहाँपुर, कानपुर देहात, चित्रकूट, झांसी, ललितपुर, खागा ( फ़तेहपुर ), बाराबंकी, फैजाबाद- बीकापुर, मछलीशहर-जौनपुर, सुल्तानपुर, मऊ, बहराइच, कुशीनगर, निचलौल ( महाराजगंज ), प्रतापगढ़, गोंडा, बुलंदशहर, बांदा, मौदहा- हमीरपुर आदि।

AISF एवं AIYF के प्रांतीय पदाधिकारियों ने आज किसानों के समर्थन में सड़कों पर उतरने वाले छात्र- नौजवानों को क्रांतिकारी बधाई दी और अपेक्षा की कि वे अपनी जंगजू कार्यवाहियाँ लगातार जारी रखेंगे।


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बुधवार, 25 नवंबर 2020

CPI support Dr. Haripraksh Yadav for MLC from Lucknow- jhansi graduate constituency


भाकपा ने लखनऊ- झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी हेतु डा॰ हरिप्रकाश यादव को समर्थन दिया

 

लखनऊ- 25 नवंबर 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने इलाहाबाद- झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी ( MLC) पद के सुशिक्षित एवं संघर्षशील प्रत्याशी डा॰ हरिप्रकाश यादव को समर्थन प्रदान करने का निश्चय किया है। भाकपा ने अपनी प्रयागराज, कौशांबी, फ़तेहपुर, हमीरपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट, जालौन, झांसी और ललितपुर जनपद इकाइयों से अनुरोध किया है कि वे डा॰ हरिप्रकाश यादव को सक्रिय समर्थन प्रदान करें।

श्री यादव अटेवा के जुझारू सिपाही हैं और बेरोजगारों, पेंशनविहीनों और अन्य कमजोर तबकों की लड़ाई लड़ते रहे हैं। रोजगार और पेंशन समेत किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, महिलाओं, दलितों, अल्पसंख्यकों और अन्य कमजोर वर्गों के लिये सतत संघर्ष करती रही है। संघर्ष के उद्देश्यों की समानता के आधार पर ही उन्हें समर्थन प्रदान किया गया है।

भाकपा लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पहले ही पूर्व के जुझारू छात्र एवं मेहनतकशों के नेता श्री एजाज अहमद नक़वी को समर्थन प्रदान कर चुकी है।

भाकपा ने अन्य वामपंथी जनवादी शक्तियों से अपील की कि वे संघर्ष के मुद्दों की समानता के आधार पर भाकपा समर्थित उक्त प्रत्याशियों को समर्थन प्रदान करें।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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बुधवार, 18 नवंबर 2020

UP Govt. must quit


 

बालिकाओं के साथ दरिंदगी और यौन अपराधों की बढ़ती वारदातों पर भाकपा ने गहरा क्षोभ और रोष जताया

 

जघन्य वारदातों की नैतिक ज़िम्मेदारी ले सरकार, नहीं तो गद्दी छोड़े: भाकपा

 

लखनऊ- 18 नवंबर 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने उत्तर प्रदेश में अबोध बालिकाओं, महिलाओं के साथ दरिंदगी और उनकी जघन्य हत्याओं और बच्चों के यौन शोषण की घटनाओं पर गहरा क्षोभ और रोष व्यक्त किया और इसके लिए राज्य सरकार की संगीन अपराधों के प्रति मुजरिमाना उपेक्षा को जिम्मेदार ठहराया है।

यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा ने कहा कि योगीराज भोगीराज बन चुका है। एक के बाद एक हो रही वीभत्स वारदातों से दिल कांप उठता है। दीवाली की रात प्रदेश के मुख्यमंत्री अयोध्या में जब 6 लखिया दीपालिका मना रहे थे, जनपद- कानपुर महानगर के घाटमपुर में उसी रात एक 6 वर्षीय बालिका के साथ बलात्कार के बाद हत्या, उसका दिल, किडनी खा जाने और आँखें फोड़ने की वारदात से पूरा प्रदेश हिल कर रह गया।

गत दिन जब प्रदेश के मुख्यमंत्री बद्रीनाथ- केदारनाथ में घूम घूम कर पुण्य कमा रहे थे, बुलंदशहर जनपद में बलात्कार पीड़िता दलित किशोरी को पेट्रोल छिड़क कर जला दिया जिसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। चित्रकूट में एक JE वर्षों से बच्चों- बच्चियों के साथ दुष्कर्म कर वीडियो बना लाखों कमाता रहा और योगी सरकार अपने विभाजनकारी एजेंडे में मस्त रही। सच तो यह है कि गत साल में बच्चों के साथ यौन शोषण की वारदातों में 22 फीसदी की बदोत्तरी हुयी है। यह प्रदेश में हर माह घट रही ऐसी हजारों वारदातों के चंद उदाहरण हैं।

चोरी, छिनेती, लूट एवं हत्या आदि की वारदातों में भी भारी इजाफा हुआ है। दीवाली के दिनों में ही नकली शराब के सेवन, पटाखा गोदामों में लगी आग और धनाढ्यों द्वारा मनहूस तरीके से की गयी पटाखेबाजी के प्रदूषण से सैकड़ों की जानें चली गयीं और भाजपा और उसकी सरकार जश्न में डूबी रही। सहिष्णुता की स्वस्थ भारतीय संस्क्रति को जहर में बुझा कर संघ परिवार ने उसे हिन्दू संस्क्रति में बदल दिया है जो हमारे समाज और उसके ताने बाने को तहस नहस कर रहे हैं। ये सरकार लोगों को तिल तिल कर मरने को मजबूर कर रही है।

अफसोस तो इस बात का है कि अंधे युग की इन जघन्यतम वारदातों की नैतिक ज़िम्मेदारी लेने के बजाय राज्य सरकार अपने कुशासन को जायज ठहरा रही है और अपने इस रावणराज को रामराज्य साबित करने की असफल कोशिश कर रही है।

भाकपा सरकार से मांग करती है कि या तो जनता द्वारा सौंपी ज़िम्मेदारी का निर्वाह करो नहीं तो त्यागपत्र दो।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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