भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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बुधवार, 14 अप्रैल 2010

क्रांतियां, कम्यून, कम्यूनिस्ट समाज के नाना कला विज्ञान और दर्शन के जीवंत वैभव से समन्वित व्यक्ति मैं

काल,तुझसे होड़ है मेरी : अपराजित तू-तुझमें अपराजित मैं वास करूं ।इसीलिए तेरे हृदय में समा रहा हूंसीधा तीर-सा, जो रुका हुआ लगता हो -कि जैसा ध्रुव नक्षत्र भी न लगे,एक एकनिष्ठ, स्थिर, कालोपरिभाव, भावोपरिसुख, आनंदोपरिसत्य, सत्यासत्योपरिमैं- तेरे भी, ओ‘ ‘काल’ ऊपर!सौंदर्य यही तो है, जो तू नहीं है, ओ काल !जो मैं हूं-मैं कि जिसमें सब कुछ है...क्रांतियां, कम्यून,कम्यूनिस्ट समाज केनाना कला विज्ञान और दर्शन केजीवंत वैभव से समन्वितव्यक्ति...
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आज सर्वहारा तू ही है

घर-आंगन में आग लग रही ।सुलग रहे वन -उपवन,दर दीवारें चटख रही हैंजलते छप्पर- छाजन ।तन जलता है , मन जलता हैजलता जन-धन-जीवन,एक नहीं जलते सदियों सेजकड़े गर्हित बंधन ।दूर बैठकर ताप रहा है,आग लगानेवाला,मेरा देश जल रहा,कोई नहीं बुझानेवाला।भाई की गर्दन परभाई का तन गया दुधारासब झगड़े की जड़ हैपुरखों के घर का बँटवाराएक अकड़कर कहताअपने मन का हक ले लेंगें,और दूसरा कहता तिलभर भूमि न बँटने देंगें ।पंच बना बैठा है घर में,फूट डालनेवाला,मेरा देश जल...
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मां है रेशम के कारखाने में बाप मसरूफ सूती मिल में है

मां है रेशम के कारखाने मेंबाप मसरूफ सूती मिल में हैकोख से मां की जब से निकला हैबच्चा खोली के काले दिल में हैजब यहाँ से निकल के जाएगाकारखानों के काम आयेगाअपने मजबूर पेट की खातिरभूक सरमाये की बढ़ाएगाहाथ सोने के फूल उगलेंगेजिस्म चांदी का धन लुटाएगाखिड़कियाँ होंगी बैंक की रोशनखून इसका दिए जलायेगायह जो नन्हा है भोला भाला हैखूनीं सरमाये का निवाला हैपूछती है यह इसकी खामोशीकोई मुझको बचाने वाला है! - अली सरदार जा...
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