भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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सोमवार, 2 दिसंबर 2019

CPI on Price rise and atrocity on women


प्रकाशनार्थ-
मोबायल नेटवर्क, रसोई गैस और आम महंगाई तथा महिला हिंसा
के खिलाफ प्रदेश भर में प्रतिरोध जतायेगी भाकपा
लखनऊ- 2 दिसंबर 2019, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने मोबायल नेटवर्क कंपनियों द्वारा मोबायल फोन का बिल 42 प्रतिशत तक महंगा करने, गैर सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेन्डर की कीमतों में रुपये 13. 50 की व्रद्धि और वाराणसी सहित 6 एयरपोर्ट के निजीकरण के फैसलों की कड़े शब्दों में निन्दा की है।
भाकपा ने हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक के साथ बर्बरता और हत्या की भी कठोरतम शब्दों में निन्दा की। महिला हिंसा की वारदातों में अचानक बढ़ोत्तरी पर भी भाकपा ने गहरी चिन्ता जताई है।  
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि टेलीकॉम कंपनियों पर बकाया करों को अदा करने का निर्देश सर्वोच्च न्यायालय ने कंपनियों को दिया था। सरकार ने उनके असमर्थता प्रकट करने पर उन्हें राहत प्रदान करने का आश्वासन दिया था। लेकिन दोनों ने मिल कर सारा भार उपभोक्ताओं पर लाद दिया है।
प्याज की आसमान छूती कीमतों, अन्य चीजों की महंगाई और आर्थिक मंदी की मार से जनता पहले ही लहूलुहान है। इस पर गैस और मोबायल नेटवर्क की महंगाई से जनता की तकलीफ़ें और बढ़ जाएंगी। आज मोबायल गरीब लोगों की अहम जरूरत बन गया है। इसी तरह निजीकरण की मार भी जनता पर पढ़ रही है। निजी बैंकों और कंपनियों को लाभ पहुँचाने को वाहन स्वामियों पर फास्ट टेग लागू किया जारहा है और एयरपोर्ट्स को लेने वाली निजी कंपनियाँ जनता पर भार शिफ्ट कर रही हैं।
भाकपा इस सब पर कड़ा विरोध जताती रही है। भाकपा ने उत्तर प्रदेश में अपनी जिला इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे प्याज और दूसरी वस्तुओं की महंगाई, आये दिन  पेट्रोल डीजल की कीमतों में होने वाली व्रद्धि, मोबायल नेटवर्क और गैस की कीमतों में व्रद्धि, निजीकरण, महिला हिंसा और बिगड़ती कानून व्यवस्था और वाहन चालकों पर फास्ट टेग थोपने तथा अन्य ज्वलंत सवालों पर एक साथ अथवा अलग अलग दिन प्रतिरोध जताएं और ज्ञापन दें।
भाकपा की स्पष्ट राय है कि इन सवालों पर तत्काल और निरंतर आंदोलन की जरूरत है तभी विभाजनकारी और जनविरोधी सरकारों के पैरों में बेड़ियाँ डाली जा सकती हैं।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश


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