भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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शुक्रवार, 17 जून 2011

न्यायपालिका में पसरा भ्रष्टाचार

यह बात अब जन सामान्य में ही नहीं वरन् न्याय के सर्वोच्च मन्दिर में भी गूंज रही है कि न्यायपालिका में भ्रष्ट, पतित, बेईमान और रिश्वतखोर न्यायाधीशों की संख्या में निरन्तर बढ़ोत्तरी हो रही है। अप्रैल 2011 में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस.एच. कपाडिया ने एम.सी. सीतलवाड स्मृति व्याख्यान माला में भाषण देते हुए कहा कि “बेईमान और भ्रष्ट न्यायधीशों को राजनीतिक संरक्षण नहीं प्रदान किया जाना चाहिए। यदि न्यायपालिका...
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सरकार का पीछा कर रहे हैं भ्रष्टाचार और काले धन के मुद्दे

भ्रष्टाचार का मुद्दा कांग्रेस नीत यूपीए-दो सरकार का पीछा नहीं छोड़ रहा है। इसका कारण स्पष्ट हैं इस सरकार के पहले दो साल के अरसे में सरकार की ऊंची जगहों पर भ्रष्टाचार के इतने मामले बेनकाब हुए हैं जैसे पहले कभी नहीं हुए। इन घोटालों में शामिल रकम इतनी बड़ी हैं कि दिमाग चकरा जाता है। देश की जनता ने मनमोहन सिंह की सरकार को भ्रष्टाचार का पर्यायवाची...
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