भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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मंगलवार, 25 फ़रवरी 2020

CPI apeal for peace in U.P.


प्रकाशनार्थ-
अलीगढ़ और उत्तर प्रदेश में शान्ति बनाये रखेँ: भाकपा
भाकपा ने भाजपा और संघ पर लगाया सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप

लखनऊ- 25 फरबरी 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने अलीगढ़ के घटनाक्रमों पर चिन्ता जताते हुये अलीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और समूचे प्रदेश की जनता से शान्ति और भाईचारा बनाये रखने की अपील की है। भाकपा ने दिल्ली की हिंसा में म्रतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।
राज्य सचिव मंडल की ओर से जारी एक प्रेस बयान में कहा गया है कि CAA, NPR और NRC विरोधी आंदोलन की व्यापकता, उसके अनुशासन, उसके अहिंसात्मक स्वरूप और उसको बड़े पैमाने पर लोकतान्त्रिक शक्तियों से मिल रहे समर्थन के चलते संघ भाजपा और उसकी सरकारें विचलित होगयी हैं और वे अब उसे बदनाम कर, हिंसा का आरोप लगा कर उसकी आड़ में सांप्रदायिक विभाजन पैदा करना चाहती हैं। इसके लिये वे अपने ट्रेण्ड काडर और पुलिस- प्रशासन का संयुक्त स्तेमाल कर रही हैं।
दिल्ली के दुखद घटनाक्रमों से प्रेरित होकर अलीगढ़ में भी शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे आंदोलन पर पहले संघ समर्थकों ने पथराव किया और पुलिस प्रशासन ने भी आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग कर आतंक और संशय पैदा करने का प्रयास किया। संघी जहां आंदोलन को सांप्रदायिक रूप देकर उसे बदनाम करना और अंततः नष्ट करना चाहते हैं, वहीं पुलिस प्रशासन सत्ताधारियों को तुष्ट करने को अविवेकपूर्ण तरीके से बल प्रयोग कर रहे हैं। निहित स्वार्थों के तहत दोनों ही भूल रहे हैं कि इसके दीर्घकालिक परिणाम देश और समाज के लिये अहितकर होंगे।
उल्लेखनीय है कि मानवाधिकार आयोग और न्यायपालिका ने गत माहों में पुलिस की अतिवादिता पर सवाल उठाए हैं।
भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहाकि लोकतन्त्र में किसी आंदोलन की सफलता उसके अहिंसात्मक स्वरूप से तय होती है। अतएव आंदोलनकारियों को भी इसे अहिसात्मक बनाये रखने के लिये और अधिक मशक्कत करनी होगी। खासकर तब जब शासक दल, सरकार और प्रशासन ने उन्हें उकसा कर हिंसा की ओर प्रव्रत्त करने के मंसूबे बना रखे हैं। अतएव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सभी आंदोलनकारियों से अपील करती है कि वे किसी भी तरह के उकसाबे में न आयें और आंदोलन को महात्मा गांधी की सीख पर चल कर संपूर्णतः अहिंसक बनाये रखें। उन्हें समर्थन के नाम पर राजनैतिक रोटियाँ सेक रहे लोगों से भी सावधान रहना होगा और मनमाने ढंग से दिये जारहे बन्द आदि के नारों का भी परीक्षण करना होगा।  
भाकपा ने दिल्ली की हिंसा में म्रत पुलिस जवान और नागरिकों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है और उन्हें न्याय दिलाने को न्यायिक जांच की मांग की है।
भाकपा आम लोगों से अपील करती है कि वे राजनीति प्रेरित शक्तियों के उकसावे में न आयें और शान्ति और भाईचारा बनाए रखें।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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सोमवार, 17 फ़रवरी 2020

Decissions of CPI State Council Meeting


प्रकाशनार्थ
बजट के जनविरोधी फैसलों, आर्थिक गिरावट, महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ
भाकपा और वामदलों का प्रदेशव्यापी आंदोलन कल से
लखनऊ- 17 फरबरी 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य काउंसिल की दो दिवसीय बैठक आज यहां संपन्न हुयी।  बैठक में आंदोलनो और संगठन संबंधी कई निर्णय लिए गए हैं। बैठक की अध्यक्षता भाकपा मैनपुरी के वरिष्ठ नेता का॰ रामधन ने की। केंद्रीय सचिव मण्डल के सदस्य कामरेड भालचंद कांगो ने राष्ट्रीय/ अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति पर प्रकाश डाला। राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने राजनैतिक और सहसचिव का॰ अरविन्दराज स्वरूप ने सांगठानिक रिपोर्ट प्रस्तुत की जिस पर 31 सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया।
बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुये भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने बताया कि बजट के जनविरोधी, प्राविधानों खासकर जरूरी सेवाओं के आबंटनों में कटौतियों, सभी सीमाएं लांघ चुकी महंगाई, सार्वजनिक क्षेत्र को बेलगाम तरीके से बेचा जाना, किसानों को कर्ज के जाल में में फांस कर उनकी आर्थिक स्थिति को जर्जर बना रही कुनीतियों तथा युवाओं को व्यथित कर रही बेरोजगारी आदि के खिलाफ कल 18 फरबरी को प्रदेश भर में वामदलों के साथ मिल कर आंदोलन करने का निश्चय किया गया है।
इसके अलाबा अङ्ग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ शाही नेवी के विद्रोह 22 फरवरी 1946 की यादगार दिवस से शुरू कर 23 मार्च शहीद भगत सिंह, सुखदेव एवं राजगुरु के बलिदान दिवस तक वैचारिक- राजनैतिक अभियान चलाया जायेगा। इस पूरे माह भाजपा, उसकी सरकार और संघ की सांप्रदायिक, फासिस्टी और विभाजनकारी कारगुजारियों तथा उनकी जनविरोधी, लोकतन्त्र विरोधी संविधानविरोधी कार्यवाहियों को उजागर करने को विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। व्यापक भागीदारी के साथ गोष्ठियाँ, सभाएं आदि आयोजित कर जनता को आगाह और लामबंद किया जायेगा।
इसी तरह कामरेड गोविन्द पनसारे, जिनकी कि अंधराष्ट्रवादियों ने निर्मम हत्या कर दी थी के शहादत दिवस को “तर्क और तार्किकता दिवस” के रूप में आयोजित किया जायेगा तथा 21 फरबरी 1848 को प्रकाशित हुये कम्युनिस्ट घोषणा पत्र को समर्पित- “ मार्क्सवाद लेनिनवाद की प्रासंगिकता दिवस’’ के रूप में आयोजित किया जायेगा।
20 मार्च को खेतिहर मजदूरों, दलितों और गरीब जनता के सवालों पर दिल्ली में आयोजित रैली को समर्थन प्रदान करने का निर्णय भी लिया गया।
1 मार्च को लखनऊ में आयोजित होने जारहे नौजवान सभा के राज्य स्तरीय कन्वेन्शन को सफल बनाने का आह्वान भी किया गया।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश   

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शनिवार, 8 फ़रवरी 2020

Left Parties Protest Against Anti people Budget


प्रकाशनार्थ-
बजट के जनविरोधी प्राविधानों के खिलाफ 12 से 18 फरबरी तक  अभियान चलायेंगे वामपंथी दल
लखनऊ- 8 फरबरी 2020, उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- माले, लिबरेशन और फारबर्ड ब्लाक के पदाधिकारियों की एक बैठक आज यहाँ संपन्न हुयी।
बैठक में वामदलों द्वारा देश भर में जनविरोधी केंद्रीय बजट जिससे कि जनता की समस्याएं और बढ़ेंगी के खिलाफ अभियान को उत्तर प्रदेश में चलाने की रणनीति पर चर्चा हुयी।
बैठक में कहा गया कि मोदी सरकार ने लोगों पर अवांच्छित भारी बोझ लाद कर अर्थव्यवस्था को भारी क्षति पहुंचाई है। साथ ही यह सरकार धनवानों और कारपोरेटों को अधिकाधिक छूटें देती जारही है जिससे कि लोगों की आर्थिक असमानता की खाई पहले से कहीं अधिक चौड़ी हुयी है। अभाव व गरीबी से त्रस्त लोग खुद और समूचे परिवार के साथ आत्महत्याएं कर रहे हैं।
अतएव वामपंथी दलों के अभियान में निम्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा-
राष्ट्र के आर्थिक आधार- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण पूरी तरह रोका जाये। लोगों की जीवन भर की कमाई एवं बचतों का संग्रह एलआईसी का विनिवेशीकरण फौरन रोका जाये। यह जनता के धन को छीन कर कारपोरेट्स को सौंपना है।
उद्योगों की बंदी और उनको सीमित करने, छंटनी  तथा खाली जगहों को भरे न जाने से बड़ी संख्या में बेरोजगारी बड़ी है। रोजगार दिये जायें, बेरोजगारी भत्ता दिया जाये और रु॰ 21, 000 न्यूनतम वेतनमान दिया जाये।
सरकार की नीतियों से खेती और किसानों का संकट असहनीय स्थिति में पहुँच गया है। अतएव एकमुश्त कर्जमाफ़ी तथा फसलों की समुचित कीमत दी जाये।
अति आवश्यक क्षेत्रों में सरकार द्वारा भारी कटौतियाँ की गयीं हैं। जैसे खाद्य सब्सिडी में रु॰ 75,532 करोड़, क्रषी, मछलीपालन और अन्य संबंधित मामलों में रु॰ 30,683 करोड़, MNREGA में रु॰ 9,500 करोड़, सामाजिक कल्याण पर रु॰ 2,640 करोड़, शहरी विकास पर रु॰ 5,765 करोड़ तथा स्वास्थ्य पर रु॰ 1,169 करोड़ तथा अन्य कटौतियाँ की गयीं हैं। इससे करोड़ों भारतीय गरीबी के गर्त में धकेल दिये जायेंगे। अतएव इन कटौतियों को रद्द कर कम से कम पिछले स्तर पर आबंटन किये जायें।
लोगों के जीवनयापन पर यह असहनीय हमले उस समय किये जारहे हैं जबकि मोदी सरकार संविधान पर आक्रमण कर रही है, सीएए, एनपीआर और एनआरसी को लागू कर लोगों को बांटने, उनके बीच घ्रणा और हिंसा को भड़काने की कोशिश कर रही है। उत्तर प्रदेश की सरकार दमन, अत्याचार और लोकतन्त्र को कुचलने पर आमादा है।
बैठक में निर्णय लिया गया और आह्वान किया गया कि 12 से 18 फरबरी तक प्रदेश भर में संयुक्त रूप से अभियान चलाया जाये।  नुक्कड़ सभाएं, सभाएं, गोष्ठियाँ, तथा पदयात्राएं आयोजित की जायें। सप्ताह भर के अभियान का समापन 18 फरबरी को बड़े आयोजन के साथ किया जाये।
बैठक में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश, माकपा के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा- माले के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव एवं फारबर्ड ब्लाक के राज्य सचिव एस॰ एन॰ सिंह चौहान ने भाग लिया।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश


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