भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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सोमवार, 23 दिसंबर 2013

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भाकपा राज्य काउन्सिल बैठक में विद्युत् दरों में प्रस्तावित वृध्दि और देवयानी प्रकरण पर पारित प्रस्ताव

बिजली दरों में प्रस्तावित वृध्दि पर भाकपा राज्य काउन्सिल द्वारा पारित प्रस्ताव. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य काउन्सिल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बिजली की दरों में वृध्दि करने के प्रयास की निंदा की है. पार्टी ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह अपने इस इरादे को तत्काल बदल ले. उ. प्र. पावर कारपोरेशन प्रबन्धन ने मौजूदा बिजली की दरों में औसतन १० प्रतिशत की वृध्दि प्रस्तावित की है. शहरी घरेलू उपभोक्ताओं यानि साधारण आदमी के ऊपर १५% की वृध्दि का प्रस्ताव किया गया है. समाजवाद के नाम पर नव-उदारवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने वाली उ.प्र.सरकार ने एक नायाब समाजवादी सुझाव रखा है कि जहाँ घरेलू उपभोक्ताओं से १५% अधिक बसूला जायेगा वहीं वाणिज्यिक उपभोक्तों से ६%, उद्योगों से ५-६% तथा रईसों के फार्म हाउसों से ५% अधिक ही बसूला जायेगा. उत्तर प्रदेश के शहरियों को याद है कि सरकार ने विगत जून में ही बिजली के दामों में औसतन १०.२९% की वृध्दि करके आम लोगों की जेबों पर भारी बोझ डाला था. पावर कारपोरेशन के मौजूदा प्रस्ताव में ४३,३९३ करोड़ रु. की वार्षिक राजस्व आवश्यकता का प्रस्ताव रखा गया है. जिसमें ३५,३९२ करोड़ रु. बिजली खरीदने के लिए रखे गये हैं. उल्लेखनीय है कि कार्पोरेट घरानों, बजाज हिंदुस्तान तथा रिलायंस से खरीदी जाने वाली बिजली का मूल्य प्रति यूनिट ६.०६ रु. से ७.७५ रु. तक होगा. जहाँ एक तरफ कार्पोरेट घरानों को भारी लाभ पहुँचाया जा रहा है वहीं आम शहरी उपभोक्ताओं की जेबों को हल्का कर उनको महंगाई के मकड़जाल में और अधिक फंसाया जा रहा है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य काउन्सिल सरकार से मांग करती है कि इस वृध्दि के प्रस्ताव को तत्काल वापस लिया जाये और विद्युत् दरें प्रति यूनिट इस प्रकार से निर्धारित की जायें कि साधारण उपभोक्ता राहत महसूस करें और उन्हें महंगाई से कुछ राहत मिलती दिखाई दे. भाकपा अपनी जिला इकाइयों का आह्वान करती है कि वो इस वृध्दि का हर स्तर पर विरोध करें और १ जनवरी से सभायें नुक्कड़ सभायें एवं अन्य कार्यक्रम आयोजित करना प्रारंभ कर दें. देवयानी प्रकरण पर प्रस्ताव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य काउन्सिल भारतीय विदेश सेवा की अम्रेरिका में तैनात राजनयिक अधिकारी श्रीमती देवयानी खोबरागाड़े को अमरीकी प्रशासन द्वारा हथकडी पहनाने, जघन्य अपराधियों के साथ लाकअप बंद करने तथा निर्वस्त्र कर आपत्तिजनक तलाशी लेने की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा करती है.साम्राज्यवादी अमरीका के समक्ष मानवीय सरोकारों, मानवीय अधिकारों अथवा स्त्री अस्मिता का कोई मूल्य नहीं है. अमरीकी प्रशासन पूर्व में भी अनेकों भारतीय हस्तियों के साथ इस प्रकार का अवान्च्छ्नीय व्यवहार कर चुकी है. यहाँ तक कि तीन वर्ष पहले एक एक हवाई अड्डे पर तत्कालीन भारतीय राजदूत प्रमिला शंकर की भी इसी तरह तलाशी ली जा चुकी है. भाकपा अपनी सभी जिला इकाइयों का आह्वान करती है कि पार्टी के स्थापना दिवस २६ दिसम्बर को साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के रूप में मनायें. विचार गोष्ठियां आयोजित करें और देवयानी प्रकरण के मद्दे नजर अमेरिकी साम्राज्यवाद के पुतले जलाएं.
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भाकपा की राज्य काउंसिल बैठक सम्पन्न - आन्दोलन एवं संगठन संबंधी कई निर्णय लिये गये

लखनऊ 23 दिसम्बर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य कौंसिल ने देवयानी खोबरागढ़े प्रकरण को लेकर 26 दिसम्बर को प्रदेश में साम्राज्यवाद विरोधी दिवस मनाने, बिजली के दामों में संभावित बढ़ोतरी के विरोध में 1 जनवरी से जागरूकता अभियान चलाने, किसानों-गन्ना किसानों की समस्याओं एवं समाज में फूट डालने की साजिशों के खिलाफ क्षेत्रीय स्तर पर रैलियां आयोजित करने, लोकसभा चुनावों की तैयारियां शुरू करने और प्रदेश भर में चुनाव फंड एकत्रित करने का अभियान चलाने के महत्वपूर्ण निर्णय लिये हैं।
उपर्युक्त निर्णय यहां सम्पन्न भाकपा की दो दिवसीय राज्य कौंसिल की बैठक में लिये गये। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता लोकपाल सिंह, कान्ती मिश्रा एवं हामिद अली के संयुक्त अध्यक्ष मंडल ने की।
बैठक को सम्बोधित करते हुए भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा फैलाये गये भ्रष्टाचार एवं आसमान तोड़ महगाई से परेशानहाल जनता कांग्रेस को सबक सिखाने पर उतारू है लेकिन वह भाजपा को भी उसकी फूट डालने वाली और कांग्रेस के समान आर्थिक नीतियों के कारण पसन्द नहीं करती। जहां उसे एक नीतिगत मुद्दों पर काम करने वाला साफ-सुथरा विकल्प मिलेगा वह उसको विजयी बनाने को उत्सुक है। दिल्ली के चुनाव परिणामों से यह साबित हो गया है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार जिस तरह से किसानों-कामगारों के उत्पीड़न में लगी है, दंगे रोकने में अपनी ढिलाई को सिद्ध कर चुकी है, कानून-व्यवस्था समेत सभी मोर्चों पर पूरी तरह पिट चुकी है तथा जनता की नजरों में गिर चुकी है। अब शासक दल साम्प्रदायिकता रोकने के नाम पर और अपने जनाधार के खिसक जाने की वजह से गुण्डे, बाहुबली, माफियाओं एवं संदिग्ध चरित्र वाले धनबलियों को चुनाव मैदान में उतार रहा है। उत्तर प्रदेश की जनता सारे खेल को समझ रही है।
डा. गिरीश ने कहा कि आम जनता भाकपा को एक साफ सुथरी, पूर्णतः धर्मनिरपेक्ष एवं जनता के हितों के लिए संघर्षशील पार्टी मानती है। हम उत्तर प्रदेश में अन्य वाम दलों, कुछ छोटे मगर साफ सुथरे दलों को साथ लेकर लोक सभा चुनावों में जाने की कोशिश करेंगे। नये और बदले वातावरण में उत्तर प्रदेश में वामपंथ को अपनी शक्ति बढ़ानी है। उन्होंने कहा कि भाकपा सीमित सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
भाकपा राज्य कौंसिल बैठक में निर्णय लिया गया कि देवयानी खोबरागढ़े के साथ अमरीका में किये गये दुर्व्यवहार के खिलाफ एवं साम्राज्यवादी अमरीका की काली करतूतों को उजागर करने को 26 दिसम्बर को समूचे उत्तर प्रदेश में साम्राज्यवाद विरोधी दिवस मनाया जायेगा और अमरीकी साम्राज्यवाद के पुतले फूंके जायेंगे। यह दिन भाकपा का स्थापना दिवस भी है, अतएव सभायें, गोष्ठियां भी आयोजित की जायेंगी।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बिजली की दरों में बढ़ोतरी की कोशिशों के खिलाफ 1 जनवरी 2014 से लगातार सभायें, नुक्कड़ सभायें एवं जागरूकता अभियान चलाया जायेगा।
एक अन्य निर्णय के अनुसार समाज में फूट डालने की साम्प्रदायिक शक्तियों की साजिशों को उजागर करने तथा किसानों एवं गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किये जायेंगे। पश्चिम का सम्मेलन मेरठ एवं पूर्वांचल का कुशीनगर में फरवरी के पूर्वार्द्ध में आयोजित किये जायेंगे।
भाकपा ने उत्तर प्रदेश में चुनाव फण्ड एकत्रित करने के लिये अभियान चलाने का निर्णय भी लिया है। 2 से 9 फरवरी के बीच भाकपा कार्यकर्ता जनता के बीच चुनाव फण्ड मांगने को निकलेंगे। इसके अलावा पार्टी सदस्यता भर्ती एवं नवीनीकरण अभियान को गति प्रदान करने का निर्णय भी लिया गया।
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