भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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मंगलवार, 30 मई 2017

CPI on BABARI Issue

बाबरी विध्वंस मामला- भाकपा ने किया अदालत के फैसले का स्वागत: उमा को हठाया जाये लखनऊ- माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद दोबारा शुरु हुये बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में श्री लालकृष्ण आड्वाणी, श्री मुरली मनोहर जोशी, सुश्री उमा भारती सहित 12 के खिलाफ सीबीआई अदालत द्वारा आज अभियोग आरोपित करने की घटना एक ऐतिहासिक घटना है और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल इसका तहेदिल से स्वागत करती है. एक ऐसे दौर में जब सताधारी गिरोह ने तमाम संवैधानिक संस्थाओं को रौंदने का काम शुरु कर दिया है अदालत का यह फैसला न्याय और लोकतंत्र के प्रति हमारे विश्वास को मजबूत करता है. यह भाईचारे और एकदूसरे पर विश्वास की भावना जो कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिये बेहद आवश्यक है को मजबूत करता है. संरक्षित ढांचे को ध्वस्त करने, राष्ट्रीय एकता को क्षति पहुंचाने और सांप्रदायिक दंगे भड़्काने आदि आरोपों को अदालत द्वारा स्वीकार करने के बाद कई सवाल खड़े होगये हैं. पहला- क्या दिन रात कथित रुप से रामकाज में जुटी होने का दावा करने वाली सुश्री उमा भारती नैतिकता का परिचय देते हुये केंद्रीय मंत्रिमंडल से स्तीफा देंगी? दूसरा- यदि नहीं तो शुचिता, नैतिकता और औरों से अलग पार्टी होने का प्रपोगंडा करने वाली भाजपा और उसके प्रधानमंत्री उनसे स्तीफा लेंगे और तीसरा- अपने प्रभाव और षडयंत्रों के बल पर संविधान के साथ धोखाधड़ी कर मंत्रिमंडलों में शामिल रहने वाले श्री आडवानी, श्री जोशी, सुश्री उमा भारती आदि के बारे में सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान लेते हुये एक और अदालती कार्यवाही का निर्देश देगा? भाकपा की राय है कि यह मामला सामान्य नहीं है, बेहद विशिष्ट है. क्योंकि इसमें शामिल लोग अति विशिष्ट हैं और उनसे ज्यादा जिम्मेदाराना व्यवहार की अपेक्षा की जाती है. अतएव उन्हें सामान्य व्यक्तियों की तरह लाभ नहीं दिया जाना चाहिये. भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि आज भी भाजपा के नेता और प्रवक्ता बयान दे रहे हैं कि उन्होने सीबीआई को औरों की तरह बंधक नहीं बनाया है. यदि इसमें तनिक भी सच्चाई होती तो मामले में 25 साल की देरी न होती. लेकिन सच तो यह है कि यह कार्यवाही सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद होरही है. अब मामले में सीबीआई को सबूत दाखिल करने हैं और आने वाले दिनों में यह साबित हो जायेगा कि सीबीआई अपनी जिम्मेदारी निष्पक्षता से निभाती है अथवा केंद्र सरकार के प्रभाव में आजाती है. भाकपा ने सुश्री उमा भारती को मंत्रिमंडल से तत्काल हठाये जाने की मांग करते हुये सभी न्यायप्रिय संस्थाओं और व्यक्तियों से उपर्युक्त तीन बिंदुओं पर आवाज उठाने की जरुरत पर बल दिया है. डा.गिरीश
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