भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

गला घोंटा जा रहा है अरब वसंत का

कई प. एशिया और उत्तरी अफ्रीकी देशों में अरब वसंत की शुरूआत की पहली वर्षगांठ के साथ यह साफ है कि अमरीकी साम्राज्यवादी इस क्षेत्र पर अपना दबदबा बनाने के लिये ही नही बल्कि उत्तर एवं पश्चिमी अफ्रीका के बाकी देशों पर भी अपना प्रभुत्व कायम करने के लिये भी इस अरब संत का गला घोंटने पर उतारू हैं। इन क्षेत्रों के अधिकांश देशों में अशांति के लिये सीधे-सीधे अमरीकी जिम्मेदार हैं या फिर अपने गुर्गों को बचा रहे हैं या जनवादी आंदोलनों की सहायता करने की आड़ में अपने हाथ की नयी कठपुतलियों को वहाँ सत्ता में बिठा रहे हैं।
 25 जनवरी को सैकड़ों हजारों लोग मिस्र की राजधानी कैरो के तहरीर चौक पर तथा अलैक्जेंडरिया सहित अन्य शहरों की सड़कों पर जमा हो गये। वे होसनी मुबारक के आतंक के खिलाफ विद्रोह की पहली वर्षगांठ मना रहे थे। होसनी मुबारक को केवल 18 दिन के जन विद्रोह के बाद सत्ता च्युत कर दिया गया था और अब उनके विरूद्ध अत्याचारों के कई मामलों पर और तीन दशकों के कुशासन के लिये कई मुकद्दमें चलाये जा रहे हैं।
 तहरीर चौक पर जमा भीड़ मोटा-मोटी नागरिकों पर सेना के नियंत्रण की फौरी खात्मे की मांग करने वाले युवकों और संसद में व्यापक सफलता पाने वाले राजनीतिक रूपांतरण का जश्न मना रहे इस्लामवादियों के बीच विभाजित थी। मुस्लिम ब्रदरहुड (अखवानुल मुसलमीन) ने, जो लगभग पूरी 20वीं शताब्दी में गैरकानूनी करार रहे, फ्रीडम एंड जस्टिस पार्टी (एफजेपी) के नाम से एक नयी राजनीतिक पार्टी गठित की और हाल में हुए चुनावों में वह अकेली सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और अब वह इस्लाम के समर्थक एक अन्य धार्मिक संगठन सलाफिस्ट के साथ बहुमत में है। सलाफिस्ट इस्लाम ने भी उन लोगों का साथ देने की कोशिश की जो कहते हैं कि क्रांति अभी खत्म नहीं हुई हैं। लेकिन व्यापक जमावड़े के बहुमत  ने उन्हें अलग-थलग कर दिया। जिस समय मुख्य तहरीर चौक पर उन नौजवानों का कब्जा था जिन्हें लगता था कि इसका जश्न मनाने वाले लोगों से क्रांति के साथ धोखा दिया, उस समय एफजेपी के समर्थकों को तहरीर चौक के बाहर एक कोने में धकेल दिया गया। मुबारक के सत्ता से बाहर होने के बाद से देश पर शासन कर रही सर्वोच्च सेना परिषद (एससीएएफ) पर तानाशाह हुकूमत की नीतियों को चलाने का आरोप लगाया जा रहा है। नौजवानों ने ट्रैफिक केंद्रो पर कई शिविर भी लगाये हैं और वे कह रहे हैं कि जब तक सशस्त्र सेनाएं सत्ता को संक्रमणकालीन नागरिक सरकार को नहीं सौंपती उनका धरना जारी रहेगा।
 हालांकि एससीएएफ बार-बार यह आश्वासन देती है कि वह फरवरी के तीसरे हफ्ते में राष्ट्रपति के चुनाव संपन्न हो जाने पर सत्ता नागरिक सरकार के हाथों में सौंप देगी, लेकिन युवा पीढ़ी उन पर यकीन करने को तैयार नहीं। दरअसल, यह आम आशंका है कि अमरीकी विदेशी मंत्री हिलेरी क्लिंटन कठपुतली शासन को जारी रखने के लिये सेना और एफजेपी के बीच सौदा कराने में कामयाब हो गयी हैं।
 लोगों को आशंका है कि अखवानुल मुसलमीन को जहां सरकार का गठन करने दिया जायेगा, वहीं असली ताकत राष्ट्रपति के हाथों में बनी रहेगी जिसे सशस्त्र सेना मनोनीत करेगी। स्वाभाविक है कि इस बात से मुबारक के आतंकवादी शासन के खिलाफ लड़ने वाली युवा पीढ़ी हताश है। मीडिया के मुख्य समाचारों में लोगों की यह भावना प्रतिबंबित हो रही है। अधिकांश समाचार पत्रों ने सड़कों पर जनतांत्रिक परिवर्तनों की मांग करते हुए व्यापक जनगण के सड़कों पर उतरने के बाद क्रांति के पुनः उठ खड़े होने की प्रशंसा की। दैनिक अल-शोरोक ने मुख्य शीर्षक ‘क्रांति जारी है’ के अंतर्गत कहा कि लाखों मिस्रवासी ‘‘सैन्य शासन का अंत’’ देखना चाहते हैं और सरकारी दैनिक अल-अहराम तक ने घोषणा की कि ‘‘लोग चाहते हैं कि क्रांति जारी रहे’’। तहरीर चौक पर व्यापक जमा होती भीड़ के एक बड़े चित्र के साथ उसने यह शीर्षक छापा।
 तहरीर चौक के एक कोने में धकेल दिये गये इस्लामीवाद जहां जनवाद की प्रशंसा में नारे लगा रहे थे वहीं, मुख्य भीड़ एससीएएफ के खिलाफ नारे बुलंद कर रही थी और उस पर प्रति क्रांति को चलाने का आरोप लगा रही थी। दोनों ओर ही जनवादी अधिकारों की गूंज थी, वहीं नौजवान रोटी, रोजगार और आर्थिक न्याय की मांग पर ज्यादा जोर दे रहे थे। स्वाभाविक रूप से, दृष्टिकोण में इस अंतर का परिणाम दोनों पक्षों के बीच झड़प था। अगले दिन शुक्रवार (27 जनवरी) को यही देखा गया और वहां उनके बीच झड़प हो गयी।
 शुक्रवार की नमाज के बाद विभिन्न मस्जिदों से हजारों लोग तहरीर चौक की ओर चल पड़े ताकि 25 जनवरी से वहां धरने पर बैठे लोगों के साथ शामिल हो सकें। नमाज के दौरान उनके मुल्लाओ ने अपनी तकरीर में कहा था कि ‘‘क्रांति ने अपने सभी लक्ष्य हासिल नहीं किये हैं’’ और सशस्त्र बल अरब वसंत का गला घोंट रहे हैं। जुम्मे की नमाज के बाद आने वालों में हजारों महिलाएं भी शामिल हो गयीं और वे चाहती थीं कि इस्लामवादी तहरीर चौक के आस-पास की जगह खाली कर दें जिससे टकराव भड़क उठा। यह कुछ हद तक तब शांत हुआ जब एफजेपी वालंटियरों ने अपने अनुयायियों से पीछे हट जाने को कहा क्योंकि लाखों प्रदर्शनकारी आम तौर पर सशस्त्र सेनाओं के खिलाफ थे और एफजेपी को उसी थैली का चट्टा-बट्टा माना जाता है।
 हालांकि अभी तक ऐसी कोई भी संगठित राजनीतिक शक्ति नहीं उभरी है जो जनवादी शक्तियों के साथ असली वर्ग संघर्ष का नेतृत्व करने में सक्षम हों, फिर भी नौजवान ऐसी क्रांति करने पर आमादा लगते हैं जिसके मुख्य नारे रोजगार एवं भोजन जैसे आर्थिक मुद्दों से ज्यादा जुड़ते जा रहे हैं।
 दूसरे देशों में भी स्थिति ऐसी ही लगती है। लीबिया में, जहां नाटों के क्रूर हमले के जरिये तानाशाह मोआमर गद्दाफी की सत्ता को पश्चिमी ताकतों ने उखाड़ फेंका था, पर त्रिपोली में सत्ता में बैठायी गई कठपुतली सरकार अब भी पूरे देश पर नियंत्रण की स्थिति में नहीं है। उसकी सत्ता राष्ट्रीय राजधानी और कुछ ऐसे स्थानों तक सीमित हैं जहां तेल के कुएं हैं। सबसे ज्यादा आबादी वाला खलीद शहर अब भी गद्दाफी के वफादारों के नियंत्रण में है।
 लेकिन अरब जगत के संबंध में सबसे ज्यादा चिढ़ पैदा करने वाला मुद्दा यह है कि सत्ताच्युत और निर्मम तरीके से मार डाले गये तानाशाह के कथित समर्थक स्त्री-पुरूषों को यातनाएं देना जारी है। यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र संघ के मानव-अधिकार से जुडे़ अधिकारियों ने भी नागरिकों के विरूद्ध बढ़ती हिंसा पर चिंता व्यक्त की है। वहां 60 नजरबंदी केंद्र हैं जिनमें 8000 से अधिक नागरिकों को लगातार यातनाएं दी जा रही हैं। संयुक्त राष्ट्र के मानव अधिकार उच्च आयुक्त नयी पिलये ने कहा है कि गद्दाफी शासन से लड़ने के लिये यूरोप के विभिन्न देशों से मंगाये गये अलग-अलग भूतपूर्व विद्रोही ग्रुपों ने देश भर के सैकड़ों से अधिक नजरबंद कैंपो में हजारों नागरिकों को कैद कर रखा है। उन्होंने प्रेस को बताया कि वहां यातनाएं जारी हैं, अदालतों के फैसलों के बिना ही लोग फांसी पर लटकाये जा रहे हैं, स्त्री-पुरूष दोनों से बलात्कार हो रहा है।’’ पिलये ने कहा कि उन्हें उप-सहारा अफ्रीकी कैदियों की विशेष चिंता है जिन्हें ब्रिगेड अपने आप ही भूतपूर्व तानाशाह गद्दाफी के लिये लड़ने वाला मान लेते हैं।
 अरब टाइम्स के अनुसार, ऐड गु्रप डाक्टर्स विदाउट बोर्डर्स ने लीबिया की मिस्रेट सिटी की जेल में 26 जनवरी को अपना काम बंद कर दिया क्योंकि उन्होने कहा कि वहां इतनी अधिक यंत्रणाएं दी जाती हैं कि कुछ कैदियों को इलाज के लिये केवल इसलिय लाया जाता है ताकि उन्हें आगे की पूछताछ के लायक बनाया जा सकें।  लीबिया में फौजी अराजकता का एक और नतीजा है नाइजीरिया व चाड जैसे उन अन्य अफ्रीकी देशो में हथियारों की तस्करी जहाँ अल-कायदा से जुडे़ धार्मिक कट्टरपंथी मौजूदा शासकों को सत्ता से हटाने में लगे हैं। संयोगवश, यह अमरीका और उसके नाटो सहयोगियों के लिये किसी चिंता का कारण नहीं है क्योंकि उनकी दिलचस्पी तो केवल समूचे क्षेत्र में अपने लिये तेल संसाधनों को बचाने में है।
 एक और ज्वलत बिंदु है यमन जहां का तानाशाह अली अब्दुल्ला सालेह अपने परिवार के साथ न्यू-यार्क भाग गया है। लेकिन देश में आज भी उथल-पुथल मची है। हालांकि आधिकारिक रूप से, यह दावा किया जाता है कि सालेह इलाज के लिये बाहर गया है, लेकिन यह निश्चित है कि वह सऊदी अरब की अगुवाई वाले खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) में नहीं लौटेगा। लेकिन उनके हाथ की दूसरी कठपुतली, सालेह का डिप्टी आवेद राब्वो मंसूर हदी का 24 फरवरी को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के नाटक में सरकार का मुखिया बनना तय है। लेकिन सत्तारूढ़ गुट की सत्ता राजधानी सेना तक सीमित है। सेना के अधिकांश कर्मी और कबीलाई मुखिया उन विद्रोही बलों का हिस्सा बन गये हैं जिनका दक्षिण के ज्यादातर क्षेत्रों पर नियंत्रण है। निश्चय ही सऊदी अरब वालों के लिये यही मुख्य चिंता का विषय होगा क्योंकि इसकी सीमा उनके तेल वाले समृद्ध इलाकों पर पड़ती है। प्रसंगवश, सऊदी अरब का यह तेल समृद्ध इलाका भी पिछले दस महीनों से विरोध प्रदर्शनों का केंद्र रहा है। सऊदी अरब के शासक इस विरोध के लिये ईरान को दोषी ठहराते हैं क्योंकि इस इलाके में शिया मुसलमान बसते हैं।
 दरअसल, जीसीसी के अधिकांश कठपुतली शासनों के लिये ईरान की सच्चाई इतनी खतरनाक है कि वे अपनी आम जनता की साम्प्रदायिक सम्बद्धता के परे कुछ भी देखने को तैयार नहीं। बहरीन जीसीसी देशों में से एक ऐसा देश है जहां ट्यूनीशिया और मिस्र के जनवादी उभार के साथ व्यापक विद्रोह देखने को मिला। आबादी का व्यापक बहुमत शिया है और शासक अल-खलीफा, सुन्नी सम्प्रदाय से हैं। वहां की जनता विद्रोह में उठ खड़ी हुई और दो से अधिक सप्ताह तक पूरे देश को ठप्प कर दिया। जन-उभार का समर्थन करने की बजाय, अमरीका की सरपरस्ती में जीसीसी ने जन-विद्रोह को कुचलने के लिये सशस्त्र सेना भेज दी। सशस्त्र हस्तक्षेप की इस दलील को उचित ठहराया गया कि जन-विद्रोह ईरान का खेल था। कतर और यू ए ई में भी यही चाल अपनायी गयी। वहां भी जनता ने विद्रोह कर दिया था। जीसीसी का सैनिक हस्तक्षेप बहरीन में भी जारी है और वहां लोगों को फांसी पर लटकाया जा रहा है और उन्हें उत्पीड़ित किया जा रहा है। 25 जनवरी को भी 18 वर्षीय एक युवक को विद्रोह में शामिल होने के कारण फांसी पर लटका दिया गया।
 जबकि यमन और बहरीन पर अरब लीग, बल्कि सही कहें तो जीसीसी की नजर है-वहीं सऊदी शासक अब अमरीका और नाटो ताकतों को बुलाने को तैयार है। ताकि असद हुकूमत के खिलाफ उपयुक्त विद्रोह खड़ा करने के अपने सभी प्रयासों के तहत सीरिया में सीधे हस्तक्षेप कर सकें। हालांकि बढ़ते विद्रोह और नागरिकों पर अत्याचारों की खबरें मीडिया में लगातार दी जा रही है, तथ्य यह है कि असद हुकूमत ने अपने राजनीतिक विरोधियों के साथ मसलों को कमोवेश सुलझा लिया है। इससे अरब लीग इतना कुढ़ गया है कि उसने एक महीने के भीतर 165 संसदीय आब्जर्वर मिशन को वापस बुलाने की घोषण कर दी है। सऊदी शासकों ने सीरियाई राष्ट्रीय परिषद, जो विद्रोहियों का संगठन है, को मान्यता देने की अपनी मंशा की घोषणा कर दी है हालांकि यह संगठन ज्यादातर कागजों पर ही है। कारण यह है कि सीरिया के वास्तविक प्रतिनिधि हस्तक्षेप के लिये संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के पास पहुंच गये हैं। यह स्मरण किया जा सकता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव द्वारा अमरीका और नाटो को लीबिया में हस्तक्षेप की इजाजत दी गयी थी ‘ताकि नागरिकों की रक्षा की जा सके’। इसकी आड़ में लीबिया पर पूर्ण हमला बोल दिया गया। हजारों लोग मारे गये। सीरिया पर भी ऐसे हमले की योजना बनायी जा रही हैं। सऊदी अरब को डर हैं कि असद हुकूमत अरब शासकों की बजाय ईरान के ज्यादा करीब हैं। (शमीम फ़ैज़ी द्वारा मध्य पूर्व से)
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से प्रदीप तिवारी का चुनाव प्रसारण

मतदाता भाइयों और बहिनों,
पिछले बीस-पच्चीस सालों में आपने बारी-बारी से बसपा, सपा, कांग्रेस और भाजपा को जिता कर उन्हें प्रदेश में सरकार बनाने का मौका दिया तो केन्द्र में भी सरकार बनाने के अवसर मुहैया कराये। आपने इन पर विश्वास किया परन्तु बार-बार धोखा खाया। सरकार बनाने के बाद इन सभी दलों ने विनाशकारी नई आर्थिक नीतियों को ही लागू किया, जिसमें आम जनता की कोई जगह नहीं है। सरमायेदारों का मुनाफा बढ़ा, उनकी सम्पत्तियों में हजारों गुना की बढ़ोतरी हुई, अपराध बढ़े, भ्रष्टाचार बढ़ा, इन दलों के लखपति नेता करोड़पति हो गये।
आपको क्या मिला? महंगाई बढ़ी। तेल, दाल और चीनी की कीमतों में इन बीस-पच्चीस सालों में कितनी बढ़ोतरी हुई, यह बताने की जरूरत नहीं है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में महीने में दो बार वृद्धि की जाने लगी। महंगाई को संसद में जब-जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने मुद्दा बनाकर उठाना चाहा, महंगाई का समर्थन करने के लिए कांग्रेस, बसपा, सपा और भाजपा सब एक ओर खड़े हो गये।
बसपा, सपा, कांग्रेस और भाजपा ने स्कूलों को दुकान बना दिया। बच्चों को पढ़ाने के लिए जमीन और जेवर बेचने या फिर कर्जा लेने की नौबत आने लगी।
बसपा, सपा, कांग्रेस और भाजपा ने सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र में खाली पड़े पदों पर नियुक्तियों पर रोक लगा दी। नौजवान बेरोजगारों की फौज तैयार हो गयी।
कानपुर की सूती मिलों की बंदी से शुरू हुआ कारखाना बंदी का सिलसिला पूरे सूबे में अभी भी जारी है। सार्वजनिक तथा सहकारी क्षेत्र की तमाम चीनी मिलों को बंद कर दिया गया। लाखों मजदूर बेरोजगार हो गये। समाजवादी पार्टी तथा बसपा की सरकारों ने यू.पी. हैण्डलूम कारपोरेशन और कताई मिलों को बंद कर बुनकरों को तबाह कर दिया।
बसपा, सपा, कांग्रेस और भाजपा सभी ने अपने-अपने पसंदीदा सरमायेदारों को सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की बहुमूल्य संपत्तियों तथा किसानों की उपजाऊ जमीनों को सौंप दिया।
अस्पतालों में डाक्टर नहीं हैं, नर्से नहीं हैं, दवायें नहीं हैं। हिन्दुस्तान के दिल उत्तर प्रदेश को बसपा, सपा, कांग्रेस और भाजपा ने मिल कर बीमार बना दिया है। बिजली आती नहीं है। मनरेगा में मिलने वाली पूरी मजदूरी मिलती नहीं है। बिना लिये दिये कोई काम होता नहीं है। किसानों को खाद, बीज, बिजली, पानी सब महंगा मिलता है। उनकी फसलों के वाजिब दाम उन्हें मिलते नहीं। गाहे-बगाहे किसानों की आत्महत्या के समाचार मिलते हैं।
भ्रष्टाचार का आलम यह है कि केन्द्र के कई मंत्री जेल में हैं तो कुछ जेल जाने वाले हैं। बसपा सरकार के कई मंत्रियों को भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारण इस्तीफा देना पड़ा। भाजपा ने इनमें से कुछ दागी नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया। सपा और बसपा दोनों सरकारों के मुख्यमंत्रियों पर कमाई से ज्यादा सम्पत्ति होने के आरोप हैं। कांग्रेस जांच नामक रिमोट के जरिये सपा और बसपा दोनों को कंट्रोल करती है।
चुनावों के दौर में बसपा, सपा, कांग्रेस और भाजपा सभी के नेता हेलीकाप्टरों से उड़-उड़ कर आपके लिए आसमान से तारे तोड़ कर लाने के वायदे कर रहे हैं क्योंकि चुनावों में इन्हें आपके मतों की जरूरत है। इन्होंने इसके पहले के चुनावों में भी इसी तरह के वायदे आपसे किये थे लेकिन सरकार बनाने के बाद आपके लिए कुछ नहीं किया। ये सभी आपके गुनाहगार हैं।
आपको याद होगा कि जब केन्द्र में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थन से सरकार बनी थी तो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के दवाब में ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून, सूचना का अधिकार कानून और वनवासियों के अधिकारों का कानून जैसे कानून बने थे। महंगाई नियंत्रण में रही थी।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ तथा जनता के तमाम तबकों की मांगों को लेकर लड़ाई लड़ती रही है। जगह-जगह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के ईमानदार उम्मीदवार खड़े हैं, जिन्हें विजयी बनाकर आप प्रदेश की राजनीति की दिशा और दशा को बदल सकते हैं।
मतदाता भाइयों और बहनों,
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी आपका आह्वान करती है कि -
हंसिया-बाली वाले बटन को दबा कर 16वीं विधान सभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराओ;
साम्प्रदायिक, जातिवादी और वंशवादी ताकतों को परास्त करो;
भ्रष्ट, अपराधी तथा माफिया सरगनाओं को विधान सभा में पहुंचने से रोको; तथा
किसान, मजदूर और आम आदमी की बर्बादी की जिम्मेदार आर्थिक नवउदारवाद की नीतियों को पीछे धकेलो।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी भ्रष्टाचार, महंगाई और अपराधों के खिलाफ तथा प्रदेश एवं उसकी जनता के चौतरफा विकास के लिए आपका मत चाहती है। हम एक बार आपसे अपील करते हैं कि इस बार आप हंसिया-बाली वाले बटन को दबा कर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को मौका दें।
जय हिन्द!
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से अशोक मिश्रा का चुनाव प्रसारण

मतदाता भाइयों और बहिनों,
विधान सभा चुनाव अपने पूरे शवाब पर हैं। आकाश पूंजीवादी नेताओं के उड़न खटोलों से गूंज रहा है।
इस चुनावी संग्राम में एक ओर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी प्रदेश के किसानों, मजदूरों, महिलाओं, दलितों, छात्रों-नौजवानों, अल्पसंख्यकों तथा शोषित-पीड़ित आम जनों की ताकत के भरोसे के साथ सिद्धान्तों और जन-संघर्षों की अपार पूंजी के साथ चुनाव मैदान में है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, जिसका चुनाव निशान ‘हंसिया-बाली’ है, सत्ता से ज्यादा जनता के मुद्दों और सिद्धान्तों की दावेदार है।
दूसरी ओर सिद्धान्तहीन, मुद्दाविहीन पूंजीवादी राजनैतिक दल ‘स्वर्ग तक सीढ़ी लगा देने’ के मिथ्या वादों और नारों के साथ जातिवादी, साम्प्रदायवादी पहियों पर कारपोरेट घरानों, भ्रष्ट नव धनाढ्यों के काले धन से तैयार किये गये, चमकते-दमकते रथों पर बाहुबलियों, माफिया सरगनाओं, बलात्कारियों, भ्रष्टाचारियों, दलबदलुओं की फौज सजाये, सत्ता के दावेदार है, जिन्होंने कई बार सत्ता की बागडोर अपने हाथों में लेकर विकास के घोड़ों को पूंजीपतियों के महलों की ओर दौड़ाया है।
पूंजीवादी, जातिवादी, साम्प्रदायिक दलों ने अपने घोर जन विरोधी, पूंजीपति परस्त राष्ट्रीय आर्थिक नीतियों और घृणित कृत्यों से भारतीय लोकतंत्र को गम्भीर रूप से बीमार कर दिया है। विकास के सभी सूचकांकों पर सबसे निचले पायदान पर फिसल कर उत्तर प्रदेश को बीमारू प्रदेशों में लाइलाज मान लिया गया है।
आपको लोकतंत्र तथा बीमार उत्तर प्रदेश का इलाज अपने मतदान से करने के लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी तथा उसके उम्मीदवारों को हंसिया और बाली के चुनाव निशान वाले बटन को दबाकर मतदान करने का हम आपसे अनुरोध करते हैं।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का नारा है - भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को ध्वस्त करो, जातिवाद और जातिवादी राजनीति को पस्त करो, साम्प्रदायवाद-परिवारवाद का नाश करो, गुण्डो, बाहुबलियों तथा अपराधीकरण की राजनीति को शिकस्त दो, लोकतंत्र तथा जनता को मजबूत करो। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के हाथों में सत्ता का संतुलन दो।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ”सबको शिक्षा, सबको काम“, ”समान काम का समान दाम“, ”महंगाई पर लगे लगाम“, ”रोटी कपड़ा और मकान - मांग रहा है हिन्दुस्तान“ के सैद्धान्तिक नारे और संघर्ष के साथ मैदान में है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी पिछली सरकार और वर्तमान सरकार के भ्रष्टाचार, घपलों-घोटालों, चाहे वह 50 हजार करोड़ का खाद्यान्न घोटाला हो, चाहे स्वास्थ्य घोटाला हो, के विरूद्ध और बुन्देलखंड एवं पूर्वान्चल में कई कजार किसानों द्वारा आत्महत्या किये जाने, किसानों की बर्बादी, जनता की तबाही के मुद्दों को लेकर संघर्ष की अगुआ पार्टी रही है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत करने, लघु ग्रामीण तथा हथकरघा उद्योगों को संरक्षण देने, कृषि को उद्योग का दर्जा देकर, कृषि नीति बनाकर, किसानों और ग्रामीण जनों को संवारने के लिए संघर्षरत है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, जिसका चुनाव निशान हंसिया और बाली है, शिक्षा मित्रों, मध्यान्ह भोजन रसोइयों, आशा बहुओं तथा आंगन बाड़ी में कार्यरत वर्कर्स की सेवाओं का स्थायीकरण एवं उचित वेतन की मांग को लेकर संघर्ष कर रही है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का आपसे विनम्र अनुरोध है कि उत्तर प्रदेश तथा देश को लूट कर कंगाल और समाज को खोखला करने वाले पूंजीवादी दलों, उनके सूरमाओं को इस चुनाव में शिकस्त दें। चुनाव में विजय श्री दिलाने के नियंता बन गये फोर सी - कम्युनल, कास्ट, क्रिमिनल, कैश अर्थात साम्प्रदायिक, जातिवादी, अपराधीकरण की घिनौनी राजनीति तथा काले धन के सहारे सत्ता पाने के नापाक मंसूबों को अपने वोट की ताकत से मटियामेट कर दें।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी देश के उन बीस फीसदी लोगों, जिन्होंने सत्ता संरक्षण में काली कमाई से काले धन के पहाड़ खड़े कर लिए हैं, उन पर करारी चोट करने तथा देश की अस्सी फीसदी जनता जो बेहाल है, तंगी, गरीबी, मुफलिसी में जी रही है, के हितों की रक्षा के पक्ष में मतदान करने की अपील करती है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी आपका आवाहन करती है कि भ्रष्टाचार, अन्याय, अत्याचार, शोषणकारी व्यवस्था की चूल हिला दें। जातिवादी, साम्प्रदायिक दलों तथा अल्पसंख्यकों को लगातार झांसा देकर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने की जुगत में लगे दलों के नापाक मंसूबों को खाक में मिला दें। प्रदेश की तकदीर और तस्वीर बदलने के लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को वोट दें। हंसिया बाली के निशान पर मतदान करें।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एकमात्र ऐसी पार्टी है, जिसका चुनाव निशान आज तक नहीं बदला। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का चुनाव निशान हंसिया और बाली है। हमारा आपसे विनम्र अनुरोध है कि हंसिया और बाली चुनाव निशान पर आप अपना मतदान करें। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवारों को विजयी बनायें।
धन्यवाद।
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से सदरूद्दीन राना का चुनाव प्रसारण

उत्तर प्रदेश के मतदाता भाइयों और बहिनों,
16वीं विधान सभा के चुनाव का घमासान मचा हुआ है। प्रदेश और देश में भ्रष्टाचार व्याप्त है। सभी राजनैतिक पार्टियां एक दूसरे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को छोड़कर सभी पार्टियां भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाला जैसे न जाने कितने घोटाले यदि कांग्रेस के नाम हैं तो स्पेक्ट्रम घोटाले की शुरूआत भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने ‘पहले आओ-पहले पाओ’ की नीति अपना कर की थी। इस नीति को सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस में सरकारों में से किसने अधिक भ्रष्टाचार किया, ये बता पाना कठिन कार्य है।
आपको याद होगा कि वर्ष 2007 में समाजवादी पार्टी के गुण्डा राज और भ्रष्टाचार से प्रदेश की जनता निजात चाहती थी और जब चुनाव की घोषणा हुई तो बहुजन समाज पार्टी ने नारा दिया था कि ”चढ़ गुण्ड़ों की छाती पर, मुहर लगाओ हाथी पर“। सपा के भ्रष्टाचार, गुण्डाराज और परिवारवाद से तंग आकर प्रदेश के मतदाताओं ने बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनवाई। सरकार बनते ही नारा बदल गया। बसपा का अघोषित नारा हो गया ”चढ़ दलितों की छाती पर, गुण्डा बैठा हाथी पर“। बसपा सरकार भी सपा सरकार की राह पर चलती रही। आय से अधिक सम्पत्ति का मुकदमा यदि मुलायत सिंह पर चल रहा है तो मायावती पर भी यही मुकदमा चल रहा है। भ्रष्टाचार में ये दोनों एक दूसरे को पछाड़ने में लगे हैं। सपा-बसपा सरकारें बारी-बारी प्रदेश की जनता को लूटती रहीं। अब देश और प्रदेश में भ्रष्टाचार नहीं हो रहा है बल्कि सरकारी धन की लूट मची हुई है। प्रदेश और देश से भ्रष्टाचार को मिटा दिया जाये तथा कुछ नीतियों में परिवर्तन कर दिया जाये तो प्रदेश में खुशहाली आम जनता को मिल जाये। आम जनता की चिन्ता बसपा, सपा, कांग्रेस और भाजपा किसी को नहीं है। भाजपा को ‘फील गुड’, ‘शाइनिंग इंडिया’ एक दशक पहले से दिख रहा है। दूसरी तरफ कांग्रेस को गरीबी दिख ही नहीं रही है। गरीबी का मजाक उड़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाले योजना आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि गांव में रहने वाले प्रति व्यक्ति की प्रतिदिन की आय 26 रूपया तथा शहर में रहने वाले प्रति व्यक्ति की प्रतिदिन की आय 32 रूपया है तो वह गरीबी की रेखा से ऊपर है। देश की इस हालत पर प्रदेश की जनता बस यही कह रही है:
”अपने चेहरे की लकीरों को छुपाऊं कैसे?
उनके मर्ज़ी के मुताबिक नज़र आऊं कैसे?
घर सजाने का तसव्वुर तो बहुत बाद का है,
पहले यह तय हो कि इस घर को बचाऊं कैसे?“
आप सभी महंगाई से परेशानहाल है। खाने-पीने के सामान का दाम पिछले दो-तीन सालों में कई गुना बढ़ चुका है। डीजल और पेट्रोल के दामों को तो सरकार ही महीने में दो-बार बढ़ा देती है। सरकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र में रिक्त पड़ी जगहों पर नियुक्ति पर सरकारों ने पाबंदी लगा रखी है। स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण प्रदेश की राजधानी में तीन-तीन चिकित्साधिकारियों की हत्यायें हो चुकी हैं।
प्रदेश को बचाने के लिए आम जनता को राहत देने के लिए, गरीबों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए आवश्यकता है कि प्रदेश के मतदाता जाति-पांति और धर्म की राजनीति से ऊपर उठकर ईमानदार प्रत्याशियों को वोट करें। जब प्रदेश के मतदाता भ्रष्टाचार की आंधी में ईमानदार प्रत्याशी को वोट देने का निर्णय लेंगे तो उन्हें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी ही दिखाई देंगे। इस विधान सभा चुनाव में यदि मतदाता ईमानदार प्रत्याशी को वोट देने का निर्णय ले लें तो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सभी उम्मीदवार विजयी हो जायेंगे। जब तक मतदाता ईमानदार प्रत्याशियों को वोट देने का संकल्प नहीं लेंगे तब तक प्रदेश और देश की सूरत नहीं बदल सकती।
मतदाता भाईयों और बहनों,
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के किसी भी एम.एल.ए. एम.पी., कैबिनेट मंत्री या मुख्यमंत्री पर आज तक भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा। इस तथ्य पर मतदाताओं को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी प्रदेश के मतदाताओं से भ्रष्टाचार और महंगाई के खिलाफ तथा प्रदेश के चौमुखी विकास के लिए वोट देने की अपील करती है। भ्रष्टाचार रहित समाज, शोषित जनता की खुशहाली, प्रदेश के विकास और बेरोजगारों को रोजगार दिलाने और उचित मजदूरी के संघर्ष के लिए हंसिया और बाली वाले बटन को दबाकर कर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवारों को अधिक से अधिक संख्या में विजयी बनायें।
मेहनतकश जनता - जिन्दाबाद!
समाजवाद-जिन्दाबाद!
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से आशा मिश्रा का चुनाव प्रसारण

उत्तर प्रदेश के मतदाता भाइयों और बहिनों,
उत्तर प्रदेश की 16वीं विधान सभा के गठन के लिए चुनावी महासंग्राम हो रहा है। यह चुनाव प्रदेश के भविष्य के लिए अति महत्वपूर्ण है। चुनाव ही तय करेगा कि क्या प्रदेश भ्रष्टाचार, जातिवाद, सम्प्रदायवाद तथा गुण्डों, माफियाओं के आतंक, पुलिस के जुल्मों-सितम, सरकारों की तानाशाही, मंत्रियों, नौकरशाहों की बेशुमार लूट से मुक्त होकर, आम जनों के दुःख-दर्दों को दूर करने वाली, प्रदेश के समग्र विकास के लिए समर्पित सरकार का गठन हो सकेगा?
क्या प्रदेश के किसान, मजदूर, बुनकर, बेरोजगार नौजवान, गरीबी भुखमरी से तंग हजारों लोग आत्महत्या करने पर मजबूत होते रहेंगे? क्या अरबों-खरबों रूपये के सरकारी-सहकारी कारखाने मिट्टी के भाव देशी-विदेशी धन्नासेठों को बेचकर राजनेता और नौकरशाह करोड़ों का कमीशन खाते रहेंगे? क्या बेरोजगारों की लम्बी कतार और लम्बी होगी? क्या शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और शिक्षा पाने के अधिकार से छात्र-छात्राओं को वंचित रहना पड़ेगा?
क्या करोड़ो गरीब यूं ही नारकीय जीवन जीते रहेंगे? क्या गांवों, कस्बों, शहरों के लोग शुद्ध पेय जल के लिए तड़पते रहेंगे? क्या सभी को बिजली और किसान को फसल का लाभकारी मूल्य नसीब होगा? क्या महिलाओं के शोषण-बलात्कार की शर्मनाक घटनायें थमेंगी? क्या बहन-बेटियां दहेज के कारण यूं ही जिन्दा जलायी जाती रहेंगी? क्या विधान मंडलों में उन्हें 33 फीसदी आरक्षण मिलेगा? इन सभी प्रश्नों का उत्तर आपको अपने वोट के द्वारा तय करना है।
साथियों! वर्तमान और पिछली सरकारों का रवैया सामंती युग के निकृष्टतम रवैये सरीखा रहा है। महिलाओं के विरूद्ध अपराध, हत्या, बलात्कार, अपहरण, छेड़छाड़, दहेज उत्पीड़न, दहेज हत्याओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। युवतियों के चेहरों पर तेजाब फेंक कर जला देने जैसे काण्डों से सरकार का स्याह चेहरा और भी दागदार हुआ है।
बलात्कार और हत्या के मामलों में उत्तर प्रदेश का देश में पहला स्थान है जो किसी भी सभ्य नागरिक, सभ्य समाज और सरकार के लिए अत्यंत शर्मनाक है। पर सरकार ने इस दुखद एवं शर्मनाक घटनाओं पर रंचमात्र भी रंजोगम का इजहार न करते हुये इन्हें रोकने की दिशा में कोई निरोधात्मक उपाय नहीं किये।
देश के स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान करने वाली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी देश के लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को कायम रखने तथा सामाजिक सद्भाव की रक्षा के लिये अनवरत-अनथक संघर्षों में आगे रही है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी प्रदेश के अर्थतंत्र को मजबूत बनाने के लिए, सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत बनाने, लघु, ग्रामीण तथा हथकरघा उद्योगों को संरक्षण देने, कृषि को उद्योग का दर्जा देकर, राष्ट्रीय कृषि नीति बनाकर, किसानों और ग्रामीण जनों को संवारने के लिए संघर्षरत है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, अन्याय-अत्याचार, दमन और गुण्डा राज के खिलाफ लड़ाई लड़ने में सदा आगे रही है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी शिक्षा मित्रों, मध्यान्ह भोजन रसोइया, आशा बहुओं, आंगनबाड़ी के कार्यरत वर्कर्स की सेवाओं का नियमितीकरण एवं उचित वेतन निर्धारण की मांग को लेकर संघर्षरत है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी वृद्धावस्था, विकलांग और विधवा पेंशन की धनराशि में वृद्धि करने और सभी पात्र जनों को मुहैया कराने तथा इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने की लड़ाई लड़ रही है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी शोषणविहीन, समता-समानता पर आधारित समाज एवं राज्य कायम करने के लिए संघर्षरत है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी समान शिक्षा, सबको चिकित्सा, शुद्ध पेयजल, सभी को रोजगार, खेत को पानी, निर्बाध बिजली सुनिश्चित कराने के लिए संकल्पबद्ध है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी देश की एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसका चुनाव निशान हंसिया और बाली आज तक बदला नहीं है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने जन संघर्षों में तपे-तपाये, कर्मठ, विद्वान, जनता के प्रति समर्पित कम्युनिस्ट नेताओं को विधान सभा चुनाव में अपना उम्मीदवार बना कर आपकी अदालत में पेश किया है।
हम आपसे पुरजोर, विनम्र अनुरोध करते हैं कि आप अपना फैसला भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पक्ष में दें। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का चुनाव निशान हंसिया और बाली है। आप हंसिया बाली के चुनाव निशान पर अपना मतदान करें। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवारों को विजयी बनायें।
धन्यवाद!
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से अशोक मिश्र का चुनाव प्रसारण

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से अशोक मिश्र का चुनाव प्रसारण
उत्तर प्रदेश के मतदाता भाइयों और बहिनों,
उत्तर प्रदेश की 16वीं विधान सभा के लिए चुनावी महासंग्राम हो रहा है।
इस महासंग्राम में एक ओर सिद्धान्तहीन, मुद्दाविहीन नारों के साथ जातिवादी, साम्प्रदायवादी पहियों पर कारपोरेट घरानों, भ्रष्ट नवधनाढ्यों के कालेधन से चमकते-दमकते रथों पर बाहुबलियों, माफियाओं, हत्यारों, बलात्कारियों, भ्रष्टाचारियों, दलबदलुओं की फौज सजाये सत्ता के दावेदार है, जिन्होंने कई बार सत्ता की बागडोर अपने हाथों में लेकर विकास के घोड़ों को पूंजीपतियों के महलों की ओर दौड़ाया है।
दूसरी ओर किसानों, मजदूरों, महिलाओं, खेत मजदूरों, छात्रों-नौजवानों, दलितों, अल्पसंख्यचकों और प्रदेश के शोषित-पीड़ित आम जनों के भरोसे के साथ रथहीन, साधनविहीन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सिद्धान्तों और जन संघर्षों की अपार पूंजी के साथ चुनाव मैदान में है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता से ज्यादा मुद्दों और सिद्धांतों की दावेदार है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का इस चुनाव में नारा है - भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को ध्वस्त करो, जातिवाद और जातिवादी राजनीति को पस्त करो, गुण्डों, बाहुबलियों तथा अपराधीकरण की राजनीति को शिकस्त दो, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी तथा वाम दलों के हाथों में सत्ता का संतुलन दो।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का आपसे विनम्र अनुरोध है कि प्रदेश को कंगाल और स्वयं को मालामाल, समाज को खोखला करने वाली ताकतों को शिकस्त दें। चुनाव में विजय श्री दिलाने में नियंता बन गये फोर सी - कम्युनल, कास्ट, क्रिमिनल, कैश अर्थात साम्प्रदायिक, जातिवादी, अपराधीकरण की घिनौनी राजनीति तथा कालेधन के सहारे सत्ता सिंहासन पर पहुंचने में लगे राजनैतिक दलों, उनके दलबदलू भ्रष्ट उम्मीवारों के नापाक मंसूबों को अपने वोट की ताकत से मटियामेट कर दें।
जन-आन्दोलनों, जन-संघर्षों में तपे तपाये, अन्याय, अत्याचार, शोषण के विरूद्ध अनवरत मैदान में रहने वाले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कर्मठ उम्मीदवारों को हंसिया और बाली के चुनाव निशान पर मत देकर विजयी बनायें।
साथियों, वर्तमान और पिछली सरकारों का रवैया सामन्ती युग के निःकृष्टतम रवैये सरीखा रहा है, महिलाओं के विरूद्ध अपराध, हत्या, बलात्कार, अपहरण, छेड़-छाड़, दहेज उत्पीड़न, दहेज हत्या, युवतियों के चेहरे पर तेजाब फेंक कर जला देने, सरे आम उन्हें निर्वस्त्र कर घुमाने जैसे काण्डों से सरकार का दागदार चेहरा और भी काला हुआ है।
दहेज हत्या और बलात्कार के मामले में उत्तर प्रदेश का देश में पहला स्थान रहा है, जो किसी भी सभ्य नागरिक, सभ्य समाज और सरकार के लिए अत्यंत शर्मनाक है, किन्तु वर्तमान और पिछली सरकार ने इस दर्दनाक और शर्मनाक स्थिति पर रंचमात्र भी रंजोगम का इजहार न करते हुये, कोई भी निरोधात्मक उपाय नहीं किये।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी समता, समानता मूलक राज्य व्यवस्था और महिलाओं के समान अधिकार तथा विधान मंडलों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण की प्रबल पक्षधर है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ‘सबको शिक्षा, सबको काम’, ‘समान काम का समान दाम’, ‘महंगाई पर लगे लगाम, भ्रष्टाचार का हो काम तमाम’, ‘रोटी-कपड़ा और मकान, मांग रहा है हिन्दुस्तान’ के सैद्धान्तिक नारे और संघर्ष के साथ मैदान में है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी पिछली सरकार और वर्तमान सरकार के घपलों-घोटालों चाहे वह 50 हजार करोड़ का खाद्यान्न घोटाला हो, के विरूद्ध और बुन्देलखण्ड और पूर्वान्चल में कई हजार किसानों द्वारा आत्महत्या किये जाने, किसानों की बर्बादी, आम जनों की तबाही के मुद्दों को लेकर संघर्ष की अगुआ पार्टी रही है।
मित्रों, क्या प्रदेश के किसान, मजदूर, बुनकर, खेत मजदूर, गरीबी-गुरबत से तंग हो हजारों की संख्या में आत्महत्या करने पर मजबूर होते रहेंगे? क्या जनता के करो की कमाई से बने अरबों-खरबों रूपये के सरकारी कारखाने तथा किसानों की कृषि योग्य हजारों-हजार एकड़ भूमि विभिन्न प्रकार के सरकारी बहानों से मिट्टी के भाव से भी सस्ती दर पर देशी-विदेशी धन कुबेरों को बेंच कर करोड़ों का कमीशन खाते रहेंगे? क्या अरबों-खरबों के घोटाले यूं ही होने देंगें?
निश्चय ही आपका उत्तर इसके विरूद्ध होगा। यही हमारा-आपका राष्ट्र धर्म है। चुनाव में इसी धर्म को अंगीकार करते हुये आप अपना मतदान करेंगे तथा प्रदेश की डूबती नैया को कुशल मांझी की तरह किनारे लगाने के लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवारों को हंसिया और बाली के चुनाव निशान पर मत देंगे।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी केन्द्र तथा प्रदेश सरकार की अन्यायपूर्ण, घोर जन विरोधी अर्थनीति के विरूद्ध लगातार संघर्ष कर रही है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सार्वजनिक वितरण प्रणाली को व्यापक और मजबूत बनाने, काम के अधिकार तथा आवास को मौलिक अधिकार का दर्जा दिये जाने के लिए सुसंगत संघर्ष कर रही है।
प्रदेश के अर्थतंत्र को मजबूत बनाने के लिए, सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत करने, लघु ग्रामीण तथा हथकरघा उद्योगों को संरक्षण देने, कृषि को उद्योग का दर्जा देकर, राष्ट्रीय कृषि नीति बनाकर किसानों और ग्रामीण जनों को संवारने के लिये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी संघर्षरत है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी शिक्षा मित्रों, मध्यान्ह भोजन रसोइयों, आशा बहुओं तथा आंगनबाड़ी में कार्यरत वर्कर्स की सेवाओं का नियमितीकरण एवं उचित वेतन निर्धारण की मांग को लेकर संघर्षरत है।
पार्टी वृद्धावस्था, विकलांग और विधवा पेंशन की धनराशि में वृद्धि करने, सभी पात्र जनों को मुहैया कराने तथा इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने की लड़ाई लड़ रही है।
मित्रों, भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में यह घोर मौका परस्ती, दलबदल और व्यक्तिवादी राजनीति का दौर है। आदर्शों, मान्य स्थापनाओं, सिद्धान्तों, वैचारिक विमर्षों, सामान्य व्यवहारिक नैतिकता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों, मर्यादाओं का मखौल जितना आज के राजनैतिक दौर में उड़ाया जा रहा है, वैसा इसके पहले कभी नहीं हुआ। इस दुखद राष्ट्रघाती कृत्यों में पहला स्थान केन्द्र में सत्तासीन कांग्रेस और विपक्ष में बैठी भाजपा तथा प्रदेश की जातिवादी पार्टियों का है।
भ्रष्ट राजनेताओं, भ्रष्ट नौकरशाहों, महत्वाकांक्षी उद्योगपतियों, कारपोरेट घरानों, चालाक वित्त व्यवस्थापकों और तस्करों, माफिया सरगनाओं के बीच गहरे सम्बंधों के कारण, प्रदेश की आम जनता के हितों की रक्षा के बजाय, कुछ लाख व्यक्तियों, समूहों, गुटों के हितों की रक्षा की जा रही है, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और अन्य वामदल अपनी भरपूर ताकत से इनके और इनके राष्ट्रघाती कृत्यों के विरूद्ध टकरा रहे हैं। हम चाहते हैं आप हमारे साथ आयें, इस चुनाव में हम-आप मिलकर इनका मटियामेट कर दें।
देश के स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान करने वाली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, देश के लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को कायम रखने तथा उसे मजबूत बनाने में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी अनवरत-अनथक संघर्ष में आगे रही है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी देश के उन बीस फीसदी लोगों, जिन्होंने सत्ता संरक्षण में काली कमाई के काले धन के पहाड़ खड़े कर लिए हैं, उन पर करारी चोट करने तथा देश के अस्सी फीसदी आवाम के हितों की रक्षा के पक्ष में मतदान करने की अपील करती है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के चुनाव निशान हंसिया बाली पर मतदान करें। जन संघर्षों में तपे-तपाये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कर्मठ, योग्य, ईमानदार प्रत्याशियों को विजयी बनायें। उत्तर प्रदेश में वामपंथ के प्रभाव में चलने वाली सरकार बनायें।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी आपका आवाहन करती है कि अन्याय, अत्याचार, शोषणकारी व्यवस्था की चूल हिला दें। लूट-भ्रष्टाचार का राज मिटा दें। जातिवादी, साम्प्रदायिक दलों और उनके मौसेरे भाइयों तथा अल्पसंख्यकों को झांसा देकर सरकार के गठन में इस्तेमाल करने का मंसूबा बनाने वाले राजनैतिक दलों के नापाक मंसूबों को खाक में मिला दें। प्रदेश की तकदीर-तस्वीर बदलने के लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को वोट दें। हंसिया-बाली के चुनाव निशान पर मतदान करें।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एकमात्र ऐसी पार्टी है, जिसका चुनाव निशान आज तक नहीं बदला। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का चुनाव निशान हंसिया और बाली है। मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि हंसिया ओर बाली चुनाव निशान पर आप अपना मतदान करें। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवारों को विजयी बनायें। जहां भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार नहीं हैं, वहां वाम मोर्चा के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करें।
धन्यवाद।
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