भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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मंगलवार, 29 सितंबर 2020

 


 

हाथरस की पीड़िता की मौत पर भाकपा गहरा दुख जताया

 

मुख्यमंत्री से महिलाओं की रक्षा न कर पाने की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुये त्यागपत्र की मांग की

 

लखनऊ- 29 सितंबर 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने हाथरस की पीड़िता की आज दिल्ली में हुयी मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। भाकपा ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में प्रदेश सरकार और हाथरस पुलिस प्रशासन की इस जघन्य वारदात के प्रति उदासीनता की निंदनीय करतूत ने समाज को हिला कर रख दिया है। सामाजिक और राजनीतिक संगठन निरंतर आवाज उठाते रहे मगर सिस्टम अपने ही ढर्रे पर रेंगता रहा।

यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा ने कहा कि भले ही अन्य घटनायें हाथरस की तरह देश और समाज की नजरों में न आ पायें पर उत्तर प्रदेश में यह हर रोज हो रहा है। कोविड काल में ही बलात्कार और हत्या की हुयी वारदातों को ही संकलित कर दिया जाये तो एक पुस्तक का रूप ले लेगी। हमेशा की तरह इस बार भी प्रदेश सरकार के मुखिया ने नैतिक ज़िम्मेदारी लेने के बजाय दुख प्रकट कर दिया। नियमानुसार धनराशि दिला कर कर्तव्य की इतिश्री कर दी।

भाकपा मांग करती है कि अवलाओं की रक्षा कर पाने में असमर्थ मुख्यमंत्री को त्यागपत्र दे देना चाहिये। हाथरस प्रकरण में हीला- हवाली के लिए प्रशासन में ज़िम्मेदारी तय होनी चाहिये और देश और समाज को आश्वस्त करना चाहिये। फास्ट ट्रेक कोर्ट गठित कर दिया गया है। सिस्टम की ओर से पैरवी में कोई चूक न हो इस बात की गारंटी की जानी चाहिये।

भाकपा मांग करती है कि नियमों से ऊपर उठ कर पीड़िता के परिवार को अतिरिक्त राशि प्रदान की जानी चाहिए। भाकपा और उसके सहयोगी संगठन उत्तर प्रदेश में महिलाओं की रक्षा के सवाल पर मुस्तैदी से आवाज उठाते रहे हैं और उठाते रहेंगे।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

 

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सोमवार, 28 सितंबर 2020

CPI Today


 

भाकपा ने आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी एवं लोकतान्त्रिक आंदोलनों को कुचलने की निन्दा की

 

लखनऊ- 28 सितंबर 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने राज्य सरकार पर तीखे आरोप लगाये कि वह महामारी का लाभ उठा कर जनवादी आंदोलनों को कुचल रही है, जबकि भाजपा और और संघ परिवार सहित तमाम संगठनों को हर तरह की गतिविधियों की छूट दी हुयी है। भाकपा ने इन कार्यवाहियों की कड़े शब्दों में निन्दा की।

आज ही सरकार ने विपक्षी ताकतों के तमाम कार्यक्रमों मे बाधा उत्पन्न की। निजीकरण के विरोध में मशाल जुलूस निकाल रहे बिजली कर्मचारी संघ एवं अन्य सभी संगठनों के नेताओं को अभी शाम गिरफ्तार कर लिया। बहराइच में आज शहीद भगत सिंह के जन्म दिवस पर रोजगार मार्च निकाल रहे भाकपा, नौजवान सभा एवं स्टूडेंट्स फेडरेशन के कार्यकर्ताओं को बलपूर्वक रोका गया जबकि कई दिनों पहले कार्यक्रम की अनुमति के लिये आवेदन कर दिया गया था। गत दिनों मऊ में क्रषि बिल की प्रतियाँ जला रहे भाकपा जिला सचिव और किसान सभा के नेताओं को संगीन दफाओं में बन्द कर दिया। 25 सितंबर को क्रषि बिल के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले वामदलों, भाकपा एवं अन्य दलों के प्रतिरोध प्रदर्शनो को ना केवल रोका गया अपितु मुकदमे तक दर्ज किये गये। आज भी प्रदेश भर में विपक्षी दलों और कर्मचारी नेताओं की जगह जगह गिरफ्तारियाँ की गईं।

भाकपा ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार और केन्द्र सरकार की जन विरोधी नीतियों और दमनकारी कारगुजारियों से जनता त्राहि त्राहि कर उठी है। राजनीतिक दल और विभिन्न वर्गीय संगठन जनता का साथ दे रहे हैं और सड़क पर उतर रहे हैं। योगी सरकार पुलिस के बल पर इन आंदोलनों को कुचलने पर आमादा है। वे ये भी भूल गये हैं कि वे उसी लोकतान्त्रिक व्यवस्था के तहत सत्ता में आये हैं जिसको कि वे कुचलने का कुचक्र रच रहे हैं। ये लोकतन्त्र और लोकतान्त्रिक संस्थाओं की हत्या का प्रयास है जिसमें उन्हें मुंह की खानी पड़ेगी। न तो आंदोलनकारी पीछे हटेंगे न लोकतन्त्र को वे समाप्त कर पाएंगे।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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शुक्रवार, 25 सितंबर 2020

किसान विरोधी कानून पर हस्ताक्षर न करें राष्ट्रपति : वाम दल

 

किसानों के सफल प्रतिरोध के लिये वाम दलों ने उन्हें बधाई दी

 

विपक्ष पर किसानों को भड़काने का आरोप लगा कर किसानों का अपमान कर रहे हैं प्रधानमंत्री

 

लखनऊ- 25 सितंबर 2020, उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने कहा कि किसान विरोधी क़ानूनों के खिलाफ किसान संगठनों का संयुक्त प्रतिरोध आज उत्तर प्रदेश में व्यापक पैमाने पर संपन्न हुआ। किसानो और उनके समर्थक दलों और  संगठनों ने प्रदेश में बड़े पैमाने पर धरने दिये, प्रदर्शन किये, रास्ते जाम किये और सरकार के पुतले फूंके। अनेक जगह किसानों के समर्थन में बाजार भी बन्द हुये।

उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने इस अभूतपूर्व कार्यवाही के लिए उत्तर प्रदेश और देश के किसानों, मजदूरों, युवाओं एवं छात्रों को बधाई दी है। वामपंथी पार्टियों, उनके सहयोगी मजदूर, छात्र और नौजवान संगठनों ने भी इस कार्यवाही में बड़े पैमाने पर भाग लिया और सरकार को उसके कुक्रत्यों पर आईना दिखाया।

वामपंथी दलों का आरोप है कि किसान विरोधी इन काले क़ानूनों का हमला देश के 90 प्रतिशत किसान झेल नहीं पायेंगे। अपनी उपजों की कीमतों के लिए वे कारपोरेट घरानों के सामने घुटने टेकने और अंततः अपनी ज़मीनों को कार्पोरेट्स के आगे सरेंडर करने को मजबूर होंगे। ये विशाल किसान समुदाय को मजदूर बनाने की साजिश है। ये मंडी समितियों की खरबों रुपये की संपत्ति को कार्पोरेट्स के क्रषि माल्स के लिये सौंपने की तैयारी है। यह कथित राष्ट्रवादियों का विश्व व्यापार संगठन और बहुराष्ट्रीय निगमों के सामने शर्मनाक सरेंडर है।

वामपंथी दलों ने कहा कि प्रधानमंत्री विपक्षी दलों पर किसानों को भड़काने का आरोप लगा कर किसानों का अपमान कर रहे हैं। सरकार की नीतियों से खोखले बनने से क्षुब्ध किसान जब प्रतिरोध कर रहे हैं तो पीएम उनकी बुद्धिमत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। यह आपत्तिजनक भी है और निंदनीय भी। वामपंथी दलों ने किसान कार्यवाहियों को पुलिस बलों के बल पर बाधित करने का आरोप भी लगाया। उन्होने देश में कई जगह किसानों पर संघियों के संगठित गिरोहों के हमलों की भी निन्दा की।

वामपंथी दलों ने देश के राष्ट्रपति से मांग की कि वे किसान हित में काले क़ानूनों पर हस्ताक्षर न करें। अन्यथा यह प्रतिरोध शायद ही थमेगा।

उपर्युक्त बयान भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- माले के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव, फारबर्ड ब्लाक के राज्य संयोजक अभिनव कुशवाहा एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने जारी किया है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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बुधवार, 23 सितंबर 2020

ट्रेड यूनियनों का संयुक्त प्रदर्शन

 

पूंजीपतियों की धनलिप्सा की पूर्ति के लिये मजदूरों और किसानों को तवाह कर रही है भाजपा सरकार

 

भाकपा ने मजदूर संगठनों के संयुक्त प्रतिरोध प्रदर्शन के लिये उन्हें बधाई दी

लखनऊ- 23 सितंबर 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने कल संसद में पारित मजदूर विरोधी काले कानून, निजीकरण, बेरोजगारी और श्रमिकों के ऊपर केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे तीखे हमलों के के विरूध्द संयुक्त ट्रेड यूनियनों के प्रतिरोध कार्यक्रम की सफलता पर उन्हें बधाई दी।

यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा ने कहा कि जैसे जैसे मजदूरों- किसानों युवाओं के साथ सरकार की धोखाधड़ी (चीटिंग) बढ़ती जा रही है उनका प्रतिरोध भी तेज होता जा रहा है। आज के प्रतिरोध कार्यक्रमों के आयोजनों में कई जगह सरकारी बाधाओं के बावजूद श्रमिकों ने जोरदार प्रदर्शन किये। अनेक जगहों पर उन्हें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं का सक्रिय समर्थन हासिल हुआ।

भाकपा ने कहा कि गत सप्ताहों के घटनाक्रमों साबित कर दिया है कि सरकार पूरी तरह बड़े पूँजीपतियों और कार्पोरेट्स के साथ खड़ी है। उनकी धन लिप्सा को पूरी करने को किसान- कामगारों को तवाह करने वाले कानून बनाती जा रही है। उत्तर प्रदेश की एक कथित दलित पार्टी का सरकार के इन क्रत्यों में सरकार के साथ खड़ा होना आश्चर्यजंक ही नहीं मजदूर विरोधी क्रत्य है जिसके लिए मेहनतकश उसे माफ नहीं करेंगे।

भाकपा ने टीवी चेनलों पर आरोप लगाया कि मजदूरों किसानों और नौजवानों पर जब अभूतपूर्व हमले होरहे हैं नामी- गिरामी टीवी चेनल देश का ध्यान भटकाने को बालीवुड और ड्रग्स आदि पर समय खराब कर रहे हैं। वे मजदूरों किसानों और युवाओं के सवालों को पूरी तरह नकार रहे हैं। समाज को इस पर बहस चलानी चाहिये। बालीवुड के गरिमामय लोगों को भी सरकार और मीडिया के इस खेल के खिलाफ सामने आना चाहिये।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा , उत्तर प्रदेश

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मंगलवार, 22 सितंबर 2020

उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों का आह्वान-

 

 

भारतीय संसद को विनष्ट करने के प्रयास के विरूध्द मजबूती से प्रतिरोध दर्ज कराओ!

क्रषि क़ानूनों के खिलाफ किसान संगठनों के 25 सितंबर के प्रतिरोध को संपूर्ण समर्थन प्रदान करो!!

 

लखनऊ- 22 सितंबर 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी, भाकपा, माले- लिबरेशन एवं आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक के राज्य नेत्रत्व की एक आन लाइन बैठक आज संपन्न हुयी।

बैठक में विचार विमर्श के उपरान्त पारित प्रस्ताव में कहा गया कि भाजपा सरकार द्वारा क़ानूनों को रौंद कर देश की खेती को गिरवी रखने के लिये सभी संसदीय प्रक्रियाओं और कायदे क़ानूनों को हवा में उड़ाने की कारगुजारियों की वामपंथी दल कड़े शब्दों में निन्दा करते हैं। संसदीय लोकतन्त्र के इस विनष्टीकरण से फासीवाद के पूर्वाभास का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

राज्य सभा में मत विभाजन और मतदान की मांग करने वाले विपक्ष के सांसदों को निलंबित कर यदि भाजपा सोचती है कि वह विपक्ष का मुंह बंद कर देगी, तो वह दिन में सपने देख रही है। देश की जनता ने अनेक संघर्षों से लोकतन्त्र को परवान चढ़ाया है और वे भाजपा की इस शातिराना कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगी। वामपंथी पार्टियां भी भारतीय संसद, भारत के संविधान और हमारे धर्मनिरपेक्ष लोकतान्त्रिक गणतन्त्र की रक्षा के संकल्प को दोहराती हैं। वामपंथी दल आम लोगों का आह्वान करते हैं कि वे हमारे संवैधानिक गणराज्य पर हो रहे संगीन हमलों के विरूध्द विरोध प्रकट करने को आगे आयें।

क्रषि कानूनों के संबंध में वाम दलों ने कहा कि सरकार द्वारा थोपे गये ये कानून देश की खेती और हमारे किसानों को बरवाद कर देंगे। सारे क्रषि क्षेत्र को क्रषि- विपणक कारपोरेट्स को हस्तांतरित करने से न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली पूरी तरह खत्म हो जायेगी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली संपूर्णतः विनष्ट हो जायेगी, बेशर्म काला बाजारियों और विशालकाय कारपोरेट्स को खाद्यान्नों और खाद्य पदार्थों की जमाखोरी की खुली छूट मिल जायेगी, जिससे वे खाद्य पदार्थों की क्रत्रिम किल्लत पैदा कर सकेंगे और कीमतों को मनमाने तरीके से बढ़ा सकेंगे। ये कानून भारत की खाद्य सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल देंगे। निश्चय ही यह विश्व व्यापार संगठनों के आदेशों और उरुग्वे वार्ताओं की प्रतिपूर्ति का संघी संस्करण है।

वामपंथी दलों ने कहा कि समय से पहले एमएसपी घोषित करने की सरकार की कवायद किसानों में उपजे आक्रोश को ठंडा करने की कोशिश और उन्हें भ्रम में डालने वाली है। अपने कुक्रत्यों से किसानों और युवाओं के बीच पूरी तरह बेनकाव मोदी सरकार अब विपक्ष पर उन्हें भड़काने का आरोप लगा रही है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार आंदोलित किसानों और नौजवानों पर जिस बहशियाना ढंग से हमलावर है वामदल उसकी कड़े शब्दों में निन्दा करते हैं।

वामपंथी पार्टियां उत्तर प्रदेश भर की अपनी समस्त इकाइयों से अपील करती हैं कि इन क़ानूनों को वापस लेने के लिये 'अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वयन समिति' द्वारा 25 सितंबर को प्रतिरोध के आह्वान के प्रति पूर्ण समर्थन और एकजुटता प्रदर्शित करें।

वामपंथी पार्टियां अपनी सभी जिला इकाइयों का आह्वान करती हैं कि अन्य राजनैतिक दलों से विचार विमर्श कर केन्द्र सरकार को इन क़ानूनों को वापस लेने को बाध्य करने को प्रतिरोध प्रदर्शन हेतु कार्यक्रमों का निर्धारण करें और किसानों का पूरी तरह साथ दें।

आभाषी बैठक में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश, माकपा राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा- माले के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव एवं आ॰ इ॰ फारबर्ड ब्लाक के राज्य संयोजक अनुभव कुशवाहा ने भाग लिया।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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गुरुवार, 17 सितंबर 2020

नौजवानों को रोजगार चाहिये लाठी नहीं

 

बेरोजगार दिवस पर बेरोजगारों पर लाठीचार्ज और गिरफ्तारी की भाकपा ने निन्दा की

 

लखनऊ- 17 सितंबर 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मण्डल ने राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस पर जबर्दस्त दस्तक देने के लिये उत्तर प्रदेश और देश के युवाओं और छात्रों को क्रांतिकारी अभिवादन पेश करते हुये उनके साथ संपूर्ण एकजुटता व्यक्त की है। भाकपा ने उत्तर प्रदेश और देश के अन्य कई राज्यों में भाजपा सरकारों की पुलिस द्वारा युवाओं पर जबर्दस्त लाठीचार्ज एवं उनकी गिरफ्तारियों की कड़े शब्दों में निन्दा की है।

भाकपा ने आंदोलन में उतरने के लिये अखिल भारतीय नौजवान सभा एवं आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी बधाई दी है।

यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा सचिव मण्डल ने कहा कि युवा समुदाय बेरोजगारी से तो पहले से ही त्रस्त था अब उन्हें संविदा पर काम पर रखे जाने की योगी सरकार की घोषणा से वह और भी हताश हो गया है। वह यह भी समझ रहा है कि सरकार ने विशेष सुरक्षा बल SSF का गठन भी जनवादी आंदोलनों को कुचलने को किया है। वह इसे बर्दाश्त करने को तैयार नहीं।

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि जो नौजवान 2 करोड़ युवाओं को रोजगार के वायदे पर भाजपा को सत्ता तक पहुंचाया था आज वह संघ प्रतिष्ठान की धोखाधड़ी को पूरी तरह समझ गया है, और मोदी मोदी की रट लगाने वाला वही नौजवान अब उनके जन्मदिवस पर ही आंदोलन कर रहा है।

भाकपा ने कहा कि वह नौजवानों के इस संघर्ष में पूरी तरह साथ है। भाकपा नौजवानों से अपेक्षा रखती है कि वे इस संघर्ष को सरकार बदलने तक सीमित न रख, व्यवस्था में बदलाव के संघर्ष का रूप देंगे।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा , उत्तर प्रदेश   

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मंगलवार, 15 सितंबर 2020

विशेष सुरक्षा बल SSF अध्यादेश लोकतन्त्र विरोधी , तत्काल रद्द करे राज्य सरकार


 

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मण्डल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विशेष सुरक्षा बल SSF के गठन को जनतंत्र को कुचलने और जनतान्त्रिक अधिकारों को हड़पने का एक और तुगलकी कदम बताया और इस अध्यादेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

भाकपा ने इस बल के गठन को औचित्यहीन बताते हुये कहा कि एक असीमित अधिकारों वाला बल लोकतन्त्र के लिए बेहद घातक है। विशेष सुरक्षा बल किसी को भी बिना आधार अथवा वारंट के गिरफ्तार कर जेल भेज सकता है, इसके लिये उसे मजिस्ट्रेट की अनुमति की भी जरूरत नहीं होगी। किसी भी निर्दोष को गिरफ्तार करने के अपराध में बिना सरकार की इजाजत के कोई अदालत इसका संज्ञान नहीं ले सकती। निश्चय ही सरकार इसका दुरुपयोग अपने विपक्षियों को प्रताड़ित करने के लिये करेगी। इस बल को निजी तौर पर एंगेज कर इसका दुरुपयोग किया जा सकता है।

भाकपा ने कहा कि अपराधों को नियंत्रित करने के लिये देश/ प्रदेश में पहले से ही अनेक सक्षम कानून हैं। लेकिन उनका सदिच्छा से प्रयोग करने के बजाय जनविरोधी सरकार एक के बाद एक निरंकुश कानून बनाती जा रही है। लोकतान्त्रिक शक्तियां इन तानाशाही कदमों को कदापि बर्दाश्त नहीं करेंगीं।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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सोमवार, 14 सितंबर 2020

CPI Protests on Economy and Unemployment


रोजगार देने और अर्थवयवस्था को सुधारे जाने को लेकर भाकपा ने धरने- प्रदर्शन आयोजित किये

 

लखनऊ- 14 सितंबर 2020, अर्थव्यवस्था की तवाही और उसके जनता पर पड़ रहे दुष्प्रभावों एवं लोकतन्त्र को खतरे में डालने की सरकारों की कारगुजारियों के विरूध्द एवं कोरोना काल में रोजगार, भोजन, चिकित्सा, शिक्षा व जीवन की सुरक्षा की गारंटी के लिये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा देशव्यापी आंदोलन के आह्वान पर आज समूचे ऊतर प्रदेश में जिलों में धरने- प्रदर्शन किये गये एवं ज्ञापन सौंपे गये।

भाकपा राज्य मुख्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि केन्द्र सरकार द्वारा भारत की अर्थव्यवस्था को खंडहर में तब्दील कर देने और केन्द्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लोकतन्त्र को गहरे संकट में फंसा देने के विरोध में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने आज सारे देश और उत्तर प्रदेश में प्रतिरोध दर्ज कराया है। आप सबको ज्ञात ही है कि आज ही संसद का सत्र शुरू हो रहा है। इस प्रतिरोध के माध्यम से देश की जनता के ऊपर थोपे गए मुसीबतों के पहाड़ के बारे में हम सरकार और संसद का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। साथ ही माननीय राज्यपाल, उत्तर प्रदेश और उनकी सरकार को भी संबोधित करना चाहते हैं।  

विज्ञप्ति में कहा गया है कि देश की अर्थव्यवस्था का पतन नोटबंदी से शुरू होगया था और जीएसटी के लगाने से पतन को और भी गति मिली। रही सही कमी मूर्खतापूर्ण तरीके से किये गये लाकडाउन ने पूरी कर दी। परिणामस्वरूप अच्छी- भली संभावनाओं वाली जीडीपी  – 23. 9 प्रतिशत तक गिर गयी। सरकार की यही रीति- नीति जारी रही तो अभी इसमें और गिरावट आ सकती है और आर्थिक संकट और भी गहराने की तमाम संभावनायें मौजूद हैं।

अर्थव्यवस्था के इस पैदा किये हुये संकट ने बड़े पैमाने पर बेरोजगारी पैदा कर दी है। छंटनी उद्योग बन्दी, निष्कासन, जबरिया रिटायरमेंट आदि के जरिये इसे और बढ़ाया जा रहा है। बेरोजगारी और गरीबी के अवसाद से पीडित तमाम लोग आत्महत्यायें कर रहे हैं। जनता की आर्थिक मजबूती से ही देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, पर सारे आंकड़े बताते हैं कि सरकार जनता को आर्थिक रूप से कमजोर कर पूँजीपतियों/ कार्पोरेट्स को मालामाल कर रही है, अतएव हमारी अर्थव्यवस्था नीचे जा रही है।

केन्द्रीय वित्त मंत्री देश की अर्थव्यवस्था के बारे में लगातार झूठे दाबे कर रही हैं और झूठ पर झूठ बोल रही हैं। आर्थिक पैकेज के बारे में निरा झूठ बोला गया। अब उस सबकी कलई खुल गयी है। लगातार झूठ बोलने वाली वित्त मंत्री को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, अतएव उन्हें तत्काल पद से हठाया जाना चाहिये। हिन्दुत्व के नाम पर कुछ भी चलेगा’, इसे देश अब बर्दाश्त करने वाला नहीं है।

केन्द्र और राज्य सरकार कोरोना से लोगों को बचाने और इलाज तीमारदारी और दवा उपलब्ध कराने में असमर्थ रही हैं। गरीब लोग बीमारियों से बेमौत मर रहे हैं। तमाम लोग निजी अस्पतालों की लूट के शिकार बन रहे हैं। बेरोजगारी और महंगाई ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है।

आर्थिक मोर्चे, सीमाओं की रक्षा और सुशासन देने में पूरी तरह विफल सरकार अब आक्रोशित लोगों के लोकतान्त्रिक अधिकारों को कुचल रही है। वह संविधान की हत्या से बाज नहीं आ रही। कार्पोरेट्स नियंत्रित टीवी चैनल्स के जरिये क्रत्रिम मुद्दे उछाल कर जनता को गुमराह करने में लगी है।   

उत्तर प्रदेश में अपराधों की भरमार है- सरकार लाचार है, ऊपर से नीचे तक फैला भ्रष्टाचार बेकाबू हो रहा है और शासकीय गुंडागर्दी चरम पर है। सरकार लोकतन्त्र की हत्या कर रही है। असफल मुख्यमंत्री सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार खो बैठे हैं।

राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि भाकपा “जीवनयापन के साधनों की उपलब्धता, समानता और न्याय के लिये- भारत और भारत के संविधान की रक्षा के लिये सदा प्रतिबध्द रही है और रहेगी।“ इसी संकल्प के साथ आज राष्ट्रपति और राज्यपाल को संबोधित 10 सूत्रीय मांग पत्र सौंपे गये हैं, जो निम्न प्रकार हैं-

1-  जर्जर अर्थव्यवस्था में सुधार के लिये हर संभव कदम उठाये जायें। बड़े पैमाने पर रोजगार दिये जायें, रोजगार छीनना बन्द किया जाये। रोजगार देने में सक्षम सार्वजनिक क्षेत्र को बेचना तत्काल बन्द किया जाये। मध्यम, लघु और कुटीर उद्योगों को डूबने से बचाने को हर संभव सहायता दी जाये।

2-  लोगों की क्रय शक्ति बढ़ने से ही उत्पादन का चक्र बढ़ता है। अतएव सबके खाते में छह माह तक रु॰ 10 हजार प्रति माह डाले जायें। मनरेगा का दायरा बढ़ाया जाये और शहरी मनरेगा भी शुरू की जाये।

3-  कोरोना काल में क्रषी ने अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा दिया है मगर किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। उसे सुधारने के हर संभव प्रयास किये जायें। किसान विरोधी 3 अध्यादेशों को वापस लिया जाये।

4-  लाक डाउन में श्रमिकों के पलायन से अर्थव्यवस्था की रीढ़ टूट गयी और श्रम तथा श्रमिकों की अपरिहार्यता सिध्द हो गयी। अतएव श्रमिक विरोधी कानून और कदम वापस लिये जायें।

5-  केन्द्र सरकार निरंतर लोकतन्त्र और संविधान विरोधी कार्यों में लिप्त है, उन पर लगाम लगाई जाये।

6-  उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था बेहद खराब है। सरकार पुलिस- प्रशासन को अपने राजनैतिक औज़ार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। जनता की लोकतान्त्रिक और राजनीतिक गतिविधियों को बाधित किया जा रहा है। अघोषित तानाशाही दमन का पर्याय बनी हुयी है। इस सब पर रोक लगा कर लोकतान्त्रिक बदलाव लाये जायें।

7-  कोरोना से निपटने में केन्द्र और राज्य सरकारें आवश्यक भूमिका निभाने में फेल रही हैं। लोगों का जीवन और स्वास्थ्य नष्ट हो रहा है। अन्य बीमारियों ने भी पैर पसारना शुरू कर दिया है। बाढ़ ने भी तवाही मचा रखी है। लोगों के जीवन और स्वास्थ्य को बचाने को गंभीर और ठोस प्रयास किये जायें।

8-  समय की मांग है कि सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत किया जाये।

9-  कोरोना काल की फीस माफ की जाये। गरीब बच्चों की पढ़ाई का इंतजाम किया जाये।

10- पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में पर्याप्त कमी की जाये। महंगाई को भी नीचे लाया जाये।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

 

 

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रविवार, 13 सितंबर 2020

खोखले हैं सरकार के आर्थिक मदद के दावे


 

रोजगार दो! लघु उद्योगों और खेती को सीधे आर्थिक पैकेज दो!!

 

ध्वस्त अर्थव्यवस्था को उबारने की मांग को लेकर भाकपा कल देश भर में आंदोलन करेगी।

 

लखनऊ- 13 सितंबर 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने आरोप लगाया है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाइयों (एमएसएमई) को बचाने अथवा उनके उच्चीकरण के बारे में केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार के सारे दावे खोखले हैं। यदि सरकारें सचमुच इन इकाइयों को प्रमोट करना चाहती हैं तो उन्हें सीधे आर्थिक मदद के लिये पैकेज की घोषणा करनी होगी। उन्हें आर्थिक मदद की ज़िम्मेदारी बैंकों पर डाल देने से न तो बेरोजगारों को काम मिलेगा, न -23. 9 प्रतिशत तक गिर चुकी जीडीपी ऊपर आयेगी और न भारत आत्मनिर्भर बन सकेगा।

एक प्रेस बयान में  भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में राज्य और जिले का उद्योग विभाग एमएसएमई के निर्माण अथवा  उच्चीकरण के लिये अभ्यर्थियों से प्रस्ताव लेकर कर्ज के लिये क्षेत्र की बैंकों के पास भेज देते हैं। लेकिन बैंकें उन्हें रद्दी की टोकरी में डाल देती हैं। सरकारी योजनाओं में दिये कर्जों के फंसने से बैंकें फूंक फूंक कर कदम उठा रही हैं और कर्ज देने से हिचकिचा रही हैं। अतएव यदि सरकार लघु उद्यमियों की मदद करना चाहती है तो उनकी इकाइयों को सीधे धनराशि उपलब्ध कराये।

सरकार की मौजूदा नीति के चलते समूचे उत्तर प्रदेश में लघु-  मध्यम  उद्यम लगाने या उन्हें उच्चीक्रत करने को उत्सुक लाखों लाख लघु उद्यमी दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। इस संदर्भ में सबसे सटीक उदाहरण जनपद- सहारनपुर की तहसील देवबंद के ग्राम- तैय्यबपुर बड़ा निवासी श्री चन्द्रपाल का है।

शिक्षित और उत्साही चंद्रपाल अपने बल पर छोटे पैमाने पर मशरूम उगाने और फूड प्रोसेसिंग के काम में दशकों से जुटे हैं। अनेक पुरुस्कार और प्रशस्ति पत्र पा चुके हैं। बैंकों से जब भी छोटा मोटा कर्ज लिया समय पर चुकता करने के सर्टिफिकेट्स हासिल किये बैठे हैं। अनुसूचित जाति के युवा श्री चंद्रपाल की उद्यमशीलता से जनपद के उच्चाधिकारी और संबंधित विभाग सुपरिचित हैं। उनके बारे में यदि सबकुछ लिखा जाये तो एक महाग्रंथ बन जायेगा।

किसी व्यक्ति विशेष के बारे में यह सब लिखने का तात्पर्य सरकार को सच्चाई से अवगत कराना है, न कि उसकी प्रशंसा करना।

इन्हीं चन्द्रपाल ने सरकार के परिपत्रों का संज्ञान लेते हुये अपनी रजिस्टर्ड और क्रियाशील इकाई “पोराला फूड्स प्रोसेसिंग केन्द्र” के उच्चीकरण के लिये खाद्य एवं प्रसंस्करण विभाग, सहारनपुर को नियमानुसार प्रस्ताव दिया। विभाग ने प्रस्ताव स्वीक्रत कर सेंट्रल बैंक आफ इंडिया शाखा- मंझौल को भेज दिया। बैंक मैनेजर ने यह कह कर कि सरकार ने प्रस्ताव भेजा है तो पैसे भी सरकार से ले लो, प्रस्ताव खारिज कर दिया। इस पूरे प्रकरण में भागदौड़ और आवश्यक कागजात तैयार करने में धन और समय की हानि हुयी सो अलग।

यह कहानी अकेले चंद्रपाल की नहीं है। अपने पैरों पर खड़े होने को उत्सुक उत्तर प्रदेश के तमाम होनहार युवा और लघु उद्यमी इसी तरह सरकार की झांसेबाजी का शिकार होरहे हैं और सरकारी विभागों और बैंकों की चौखट पर एड़ियाँ रगड़ रहे हैं। सरकार नित-नयी हवाई घोषणायेँ और खोखले जुमले गड़ती चली जा रही है। कोरोना और लाक डाउन से तवाह हुयी अर्थव्यवस्था के सुधार के लिये कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।

भाकपा ने मांग की कि सरकार यदि संजीदा है तो खुद बैंकों से लोन ले और अपने स्तर से लघु उद्यमियों को आर्थिक सहायता प्रदान करे। वरना बेरोजगारी को दूर करने, ध्वस्त अर्थव्यवस्था को सुधारने और आत्मनिर्भर भारत बनाने के उसके दावे धरे के धरे रह जायेंगे। अतएव उसे माडल के तौर पर चन्द्रपाल के प्रोजेक्ट को भी सहायता देनी चाहिए और चंद्रपाल जैसे लाखों लाख अन्य लघु उद्यमियों को भी।

डा॰ गिरीश ने कहा कि अर्थव्यवस्था, रोजगार और किसान, कामगार और नौजवानोंके अन्य ज्वलंत सवालों पर भाकपा कल 14 सितंबर को सारे देश में आंदोलन करेगी।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा,  उत्तर प्रदेश 

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बुधवार, 9 सितंबर 2020

अर्थव्यवस्था की बरवादी और लोकतन्त्र पर खतरों के विरूध्द भाकपा का देशव्यापी प्रतिरोध दिवस 14 सितंबर को


 

लखनऊ- भारत की अर्थव्यवस्था को खंडहर में तब्दील कर देने और लोकतन्त्र को गहरे संकट में फंसा देने के विरोध में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 14 सितंबर को सारे देश में प्रतिरोध दर्ज करायेगी। ज्ञातव्य हो कि इसी दिन संसद का सत्र शुरू होने जा रहा है।

यह निर्णय गत दिन जूम एप के माध्यम से संपन्न पार्टी के केन्द्रीय सचिव मण्डल की बैठक में लिया गया है।

बड़े पैमाने पर बेरोजगारी पैदा करने वाली, गरीबी बढ़ाने वाली एवं जीवनयापन के साधनों को तहस नहस करने वाली मोदी सरकार की विनाशकारी आर्थिक नीतियों के विरूध्द जनता को संगठित किया जायेगा।

देश की अर्थव्यवस्था के बारे में लगातार झूठे दाबे करने और झूठ बोलने वाली वित्त मंत्री को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, अतएव उनसे पद छोड़ने की मांग की जायेगी।

भाकपा “जीवनयापन, समानता और न्याय के लिये- भारत और भारत के संविधान की रक्षा के लिये सदा प्रतिबध्द रही है और रहेगी”, इस संकल्प के साथ आंदोलन किया जाएगा।

भाकपा के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अपराधों की भरमार, भ्रष्टाचार और शासकीय गुंडागर्दी सहित उन सभी सवालों को उठाया जायेगा जिन्हें भाकपा विगत कई माहों से लगातार उठाती रही है।

डा॰ गिरीश

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