भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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गुरुवार, 10 जून 2010

नगर निकायों के निर्वाचन में तानाशाहीपूर्ण परिवर्तनों के खिलाफ मुख्यमंत्री को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का पत्र

10 जून २०१०माननीय मुख्यमंत्रीउत्तर प्रदेश सरकारलखनऊविषय: प्रदेश के नगर निगमों, निकायों के सभासदों और नगर प्रमुखों के चुनाव की नई नियमावली के सम्बंध में।महोदया, आज प्रातः के समाचार-पत्रों से ज्ञात हुआ कि राज्य सरकार ने प्रदेश के नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों के सभासदों और नगर प्रमुखों के चुनाव के सम्बंध में किसी नई नियमावली को अधिसूचित किया है और उक्त अधिसूचना में राजनीतिक दलों से 11 जून 2010 तक आपत्तियां आमंत्रित...
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न्यायिक फैसला - वर्कमेंस कंपनसेशन एक्ट में अधिकतम वेतन की सीमा अनुचित

“न्यनतम मासिक वेतन निर्धारित किया जा सकता है, किंतु अधिकतम मासिक वेतन की पाबंदी नहीं हो सकती। अधिक मासिक वेतन की पाबंदी लगाना मजदूर वर्ग के हितों के विपरीत है और निश्चय ही ऐसा करना मूलभूत अधिकारों को प्रभावित करता है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 19 (1) जी (पेशा करने का अधिकार) और 21 (जीने का अधिकार) के अंतर्गत सुरक्षित किया गया है। वर्कमेंस कंपनसेंशन एटक 1923 की धारा 4 (1) और इसके प्रावधानों के मातहत 4000/- रुपये अधिकतम मासिक वेतन...
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गाजीपुर किसान सभा द्वारा बिजली विभाग के खिलाफ जन-पंचायत

उत्तर प्रदेश किसान सभा गाजीपुर इकाई सतत् संघर्षों के माध्यम, आन्दोलनों की निरन्तरता बनाये रखने एवम् संगठन को बुलन्दियों तक पहुंचाने में लगातार अग्रसर है। 25 फरवरी को का. सरजू पाण्डे पार्क में हुई पंचायत में लिये गये निर्णयों के अनुसार कि किसान समस्याओं के हर बिन्दु पर पंचायत करके सम्बन्धित विभाग के अधिकारियों से जवाब तलब किया जायेंगा। दिनांक 17 मई को लाल दरवाजा, विद्युत वितरण खण्ड प्रथम पर विशाल धरना/पंचायत का आयोजन किया गया,...
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केरल की राजनीति में नया मोड़

जब केरल कांग्रेस (जे) ने केरल कांग्रेस (एम) के साथ विलय करने का फैसला किया तो कांग्रेस ने यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) में शामिल अपने ही घटकों के खिलाफ छींटाकशी करनी शुरू कर दी है। विलय के फैसले से कंाग्रेस में हताशा की स्थिति पैदा हो गयी और प्रतिक्रिया स्वरूप अपने ही घटकों के खिलाफ आरोप लगाना शुरू कर दिया है। केरल कांग्रेस (एम) ने करेल (जे) को अपने साथ विलय करने देने के फैसले को यह कहकर उचित ठहराया कि यह उनका पारिवारिक...
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हम किस दिन के इंतजार में है

कथा सम्राट मुंषी प्रेमचंद ने ग्रामीण भारत और किसानों की दुर्दषा पर लगभग आधी सदी पहले लिखा था ‘‘जिधर देखिऐ उधर पूंजीपतियों की घुड़दौड़ मची हुई थी। किसानों की खेती उजड़ जाये उनकी बला से’’। आज भी स्थिति बदली नहीं है। किसान, खेत मजदूर एवं असंगठित मजदूर यातना झेल रहे हैं। संघर्ष कर रहे है और अपनी आंखों में स्वप्न पाल रहे हैं। वो उस दिन के इंतजार में है जब उनकी जीवन में कुछ तो चमक आएगी। लेकिन सच्चाई तो ये है कि उदारीकरण की इस आंधी में...
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बगुलहिया फार्म की जमीन भूमिहीनों में बांटने के लिए आन्दोलन

बहराइचः भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बहराइच की एक आम सभा सेन्ट्रल सरकारी फार्म गिरजापुरी के बगुलहिया फार्म पर दि. 23 मई को का. ईश्वर दयाल सिंह की अध्यक्षता में हुयी जिसमें लगभग 5000 की जनता उपस्थित थी। यह फार्म लगातार घाटे के कारण टूट रहा है जिसे भारत सरकार बेचना चाहती है। कुछ अधिकारियों का कथन है वन विभाग को दिया जायेगा। समाजवादी पार्टी के कुछ क्षेत्रीय नेता फार्म को बचाने के लिए आन्दोलन चला रहे हैं। जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी...
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पोस्को के लठैत

इसमें हैरानी की कोई बात नहीं कि उड़ीसा के मुख्यमंत्री पोस्को के लठैत बने हुए हैं। आखिर उन्होंने पोस्को का नमक खाया है तो नमक तो अदा करंेगे ही। जब सरकार ने दक्षिण कोरिया की इस महाकय बहुराष्ट्रीय निगम को यहां इस्पात कारखाना खोलने के लिए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर दस्तखत किये थे तो उन्होंने असल में पोस्को को राज्य की जमीन, खनिज सम्पदा और पानी को लूटने की इजाजत देने का ही वायदा तो किया था। इसके अलावा उस मेमोरेंडम में रखा...
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वियतनाम को लाल सलाम

960 और 1970 के दशक के आरंभ में हमारे छात्र जीवन के दौरान ”तेरा नाम वियतनाम, मेरा नाम वियतनाम“ नारा लगता था। वियतनाम का नाम लेने से ही लाखों युवाओं एवं लोगों में प्रेरणा का भाव पैदा हो जाता था। शक्तिशाली अमरीकी साम्राज्यवाद का वीरतापूर्ण सामना करने का यह एक प्रतीक था। वियतनाम ने आखिरकर अमरीकी साम्राज्यवाद को हराया लेकिन उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी, इस लम्बी लड़ाई में तीस लाख लोगों को अपनी जानें गंवानी पड़ी। 30 मई, 1975 को सैगोन...
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माओवाद - ताबूत की आखिरी कील

यह परीक्षा की घड़ी है, हमारे लिए। हमने इस विशाल देश में मेहनतकशों की विचाधारा (मार्क्सवाद) को यथोचित सम्मान दिलाने की कसमें खाई थीं, हमने गरीब के आंगन में खुशी बिछाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देने की ठानी थी, हमने अपनी जिन्दगी इसी उम्मीद में बीता दी, कि कभी रूस और चीन जैसा इस देश के आकाश में भी लाल सितारा उगेगा। सबसे अधिक हमारे लिए परीक्षा की घड़ी आज आ चुकी है, जो हमारे दरवाजे पर दस्तक दे रही है। आज एक ही प्रश्न सबसे बड़ा बनकर...
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विमर्श - दलित आंदोलन और वर्ग-संघर्ष

दलित आंदोलन की दशा-दिशा के बारे में आजकल जोरो से चर्चा चल रही है। इस चर्चा में भाग लेने वाले लोग प्रायः अपने पक्ष को सही और दूसरे पक्ष को गलत सिद्ध करने का प्रयास करते रहते हैं। ऐसी चर्चाओं में प्रायः वर्तमान सामाजिक स्थितियों के आधार पर दलित को परिभाषित करने और उसकी सामाजिक हैसियत को आंकने का प्रयत्न किया जा रहा है। दलित-जीवन के ऐतिहासिक परिवेश को प्रायः अनदेखा छोड़ दिया जाता है। यदि इतिहास का सहारा लिया जाता है, तो भी अपनी सुविधानुसार...
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पोस्को को लेकर उड़ीसा में बवाल - भाकपा ने पोस्को-विरोधी आंदोलन को तेज किया

उड़ीस में दक्षिण कोरिया की इस्पात कंपनी पोस्को द्वारा संयत्र लगाने के खिलाफ जनभावना उग्र होती जा रही है। पुलिस द्वारा पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति के सदस्यों पर जो लोकतांत्रिक ढंग से संघर्ष चला रहे हैं, बर्बर अत्याचार किये जाने के बाद जनभावना और उग्र हो गयी है। केन्द्र एवं राज्य सरकार पुलिस बल का इस्तेमाल करके इस आंदोलन को दबाना चाहती हैं जिससे यह आंदोलन हिंसक हो गया है।उड़ीसा सरकार ने पोस्को संयंत्र स्थल के पास बड़ी संख्या में...
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साढ़े तीन करोड़ लोग दरिद्रता में धकेले गये

राष्ट्रसंघ के आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के न्यूयार्क स्थित कार्यालय में भारत सरकार के ही प्रकाशित आंकड़ों के आधार पर बताया है कि विश्वमंदी के बाद भारत में 33.7 मिलियन (3.37 करोड़) लोगों को दरिद्रता के हालात में धकेल दिया गया है। ऐसा मजदूरों की छंटनी, रोजगार के नुकसान, लोगों की आय में भारी गिरावट के कारण हुआ है।इसी तरह अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने “ग्लोबल इम्प्लायमेंट टेªड 2010” नाम से एक प्रतिवेदन प्रकाशित कर बताया है कि...
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ऐतिहासिक विरासत की जन्मशती

सन् 1911 हमारे आधुनिक इतिहास में कई दृष्टियों से बहुत महत्वपूर्ण है। सन् 1905 में साम्प्रदायिक आधार पर बंगाल का बंटवारा अंग्रेजी सरकार ने किया था। इस फैसले के खिलाफ देश भर में आंदोलन छिड़ गया। ऐसा आंदोलन हुआ कि 1911 में सरकार ने बंग-भंग योजना वापस कर ली। यह हमारे राष्ट्रीय स्वाधीनता-संग्राम की पहली बड़ी विजय थी। लेकिन उसी समय बिहार को बंगाल से अलग राज्य बनाने का आंदोलन वल रहा था। 1911 में यह आंदोलन उफान पर था। फलतः 1912 में बिहार-उड़ीसा...
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मौन आहों में बुझी तलवार

1मौन आहों में बुझी तलवारतैरती है बादलों के पार।चूमकर ऊषाभ आशा अधरगले लगते हैं किसी के प्राण।गह न पाएगा तुम्हें मध्याह्नछोड़ दो न ज्योति का परिधान!2यह कसकता, यह उभरता द्वंद्वतुम्हें पाने मधुरतम उर में,तोड़ देने धैर्य-वलयित हृदय उठा।परम अंतर्मिलन के उपरांतप्राप्त कर आनंद मन एकांतखिला मृदु मधु शांत।- शमशेर बहादुर सिंह(19...
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शमशेर बहादुर सिंह की कविता का रवि कुमार द्वारा कविता पोस्टर

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संस्मरण जन्म शताब्दी वर्ष में विशेष - मिलने आना शमशेर का एक कामरेड से

हिन्दी कविता के विविधतापूर्ण उत्तेजक इतिहास में अपनी तरह के अकेले कवि शमशेर बहादुर सिंह अब कविताएं नहीं लिखते, कवि उन्हें अवश्य लिख रही है, उनकी छवियां उभार रही हैं, उनकी संवेदना को स्वर दे रही है। अब वह कहीं आते-जाते भी नहीं, कहीं कविताएं भी नहीं सुनाते, बेलाग टिप्पणियां भी नहीं करते, किसी पीठ के आचार्य अध्यक्ष भी नहीं। वह तो सुनाई पड़ते हैं, उनकी आवाज कहीं सुनाई नहीं पड़ती। कहीं गहरे से आती हुई, भावों से भरी हुई आवाज। विनम्रता...
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