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शुक्रवार, 25 जून 2010

निजीकरण के खिलाफ बिहार के विद्युतकर्मी सड़क पर उतरे

पटना। बिहार सरकार एवं बिहार राज्य विद्युत बोर्ड के प्रबन्धक द्वारा राज्य की राजधानी, पटना, मुजफ्फरपुर में विद्युत आपूर्ति का जिम्मा (फ्रेन्चाइजी) सी.ई.एस.सी. कोलकाता को सौंपने सम्बन्धी प्रस्ताव के विरोध में बिहार राज्य विद्युत बोर्ड के कामगारों, अभियंताओं, पदाधिकारियों का एक बड़ा प्रदर्शन 25 मई को राज्य विद्युत बोर्ड मुख्यालय विद्युत भवन (पटना) पर हुआ और हजारों की संख्या में राज्य भर से आये विद्युत कर्मियों, अभियंताओं तथा अधिकारियों ने नारे बुलन्द किये। उनके प्रमुख नारों में विद्युत बेार्ड से फ्रेन्चाइचीज व्यवस्था को समाप्त करो। पटना तथा मुजफ्फरपुर को विद्युत आपूर्ति के लिये सी.ई.एस.सी. को मत बेचो। चुनाव फंड के लिये विद्युत उद्योग से खिलवाड़ बन्द करो। निजी कम्पनियों को बोर्ड के राजस्व की लूट की छूट देना बन्द करो, आदि आदि। प्रदर्शन के बाद प्रदर्शनकारियों की एक महती रैली हुई।बिहार स्टेट इलेक्ट्रिसीटी बोर्ड कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसीटी इम्पलाइज एण्ड इंजिनीयर्स के तत्वावधान में यह आयोजन हुआ जिसमें बिहार राज्य विद्युत बोर्ड के पदाधिकारियों, अधिकारियों एवं कामगारों की टेªड यूनियनें शामिल हैं। ज्ञातव्य है कि इसी कमेटी के अन्दर एकजुट होकर विद्युत कर्मियों ने विद्युत बोर्ड के विखंडन विरोधी लड़ाई लड़ी है। 27.02.2007 की हड़ताल में, मुकम्मिल हड़ताल में, बिहार बंद में, विद्युत आपूर्ति पूरी तरह बन्द हो गई थी और बिहार में भीषण संकट पैदा हुआ था।सरकार और प्रबंधन ने विद्युत कर्मियों की हड़ताल के अधिकार पर बंदिश लगाने की मांग माननीय पटना उच्च न्यायालय से की थी। परन्तु न्यायालय में जब विद्युत कर्मियों की बातें आईं तो फैसला विद्युतकर्मियों के पक्ष में आया। उनकी हड़ताल पर न तो बंदिश, न उनकी सेवा शर्तों, वेतन एवं पेंशन आदि सेवा निवृति लाभों में किसी तरह की तब्दील किसी भी हालत में बाते मानी गयी।लेकिन उसके बाद भी उस दिशा में कोई कार्रवाई सरकार ने अब तक नहीं की और राज्य की राजधानी पटना तथा राज्य का दूसरा बड़ा शहर मुजफ्फरपुर को सी.ई.एस.सी. कोलकाता को फ्रेन्चाइचीज पर देने का प्रस्ताव बनाकर 25 मई 2010 को मंत्रीमंडल की बैठक में स्वीकृति देने का फैसला लिया।इस संबंध में विद्युत बोर्ड के अध्यक्ष को विद्युत कर्मियों का ज्ञापन समर्पित किया गया। फिर एक शिष्टमंडल भी बोर्ड के अध्यक्ष से मिलकर सारी तथ्यात्मक बातों से उन्हें अवगत कराया लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।महाराष्ट्र के शहर भिवन्डी की राह पर पटना एवं मुजफ्फरपुर को भी सी.ई.एस.सी. कोलकत्ता को सौंपने का प्रस्ताव बनाया गया। जबकि पटना, मुजफ्फरपुर भिवन्डी के बीच कोई समानता है ही नहीं। एक ज्ञापन में सारी बातें अध्यक्ष के सामने रखी गई जो इस प्रकार हैंः-1. भिवन्डी शहर में डिस्ट्रीब्युसन कंपनी द्वारा 1.45 रुपये प्रति यूनिट की औसत दर से राजस्व वसूली जाती थी जबकि वितरण फ्रेन्चाइजी को प्रथम वर्ष में 1.08 रुपये प्रति यूनिट की औसत दर पर सौंपा गया जिससे डिस्ट्रब्युसन कंपनी को भिवन्डी शहर सौंपने के पहले ही दिन 35 पैसे प्रति यूनिट का लाभ होना शुरू हो गया तथा एक वर्ष में लगभग 84 करोड़ रुपये का लाभ हुआ। जबकि बिहार राज्य विद्युत बोर्ड की वर्तमान में वसूली की दर 2.20 रुपये के स्थान पर 1.78 रुपये की दर पर पटना शहर (पेसू) को फ्रेन्चाइचीज को सौंपने पर लगभग 7.22 करोड़ रुपये का मासिक घाटा तथा 86.64 करोड़ रुपये का प्रथम वर्ष में ही घाटा होगा जो आने वाले वर्षों में बढ़ता ही चला जाएगा।2. भिवन्डी शहर को फ्रेन्चाइचीज पर सौंपने के समय 33 के.भी., 11 के.भी. तथा एल.टी. का आधारभूत संरचना जर्जर स्थिति में था तथा इसको सुधारने के लिए फ्रेन्चाइचीज को प्रथम दस महीनों में ही 122 करोड़ रुपये का निवेश करना पड़ा। जबकि पेसू की 33 के.भी. एवं 11 के.भी. का आधारभूत संरचना पर पूर्व में ही ए.पी.डी.आर.पी. तथा अन्य योजनाओं के तहत काफी कार्य हो चुका है जिसके कारण यह काफी हद तक सुदृढ़ स्थिति में है। अतः मूलतः एल.टी. लाइन, डिस्ट्रीब्युसन ट्रांसफार्मर, एल.टी. सिंगल फेज मीटरिंग तथा रख-रखाव हेतु लगभग 25 करोड़ रुपये के लागत से ही पूर्ण वितरण प्रणाली को सुदृढ़ किया जा सकता है।3. भिवन्डी शहर को फ्रेन्चाइचीज पर सौंपने के समय मीटरिंग की स्थिति जर्जर अवस्था में थी तथा केवल 23ः उपभेाक्ताओं के यहां सही मीटरिंग की व्यवस्था थी, जबकि पेसू के लगभग सभी उच्च विभव तथा निम्न विभव के उपभोक्ताओं के यहां हाइटेक स्टैटिक मीटर स्थापित है। सिंगल फेज के लगभग 50ः उपभोक्ताओं के यहां भी इलेक्ट्रोमेकेनिकल मीटर स्थापित है।4. भिवन्डी शहर को फ्रेन्चाइचीज पर सौंपने के समय डिस्ट्रब्युसन ट्रांसफार्मर के जलने की दर लगभग 40ः था, जबकि पेसू में वर्तमान में यह दर लगभग 15ः प्रति वर्ष है।5. भिवन्डी शहर को फ्रेन्चाइचीज पर सौंपने के समय कलेक्सन इफिसियेंसी लगभग 67ः प्रति माह था जबकि पेसू में यह दर लगभग 92.54ः प्रति माह है।6. भिवन्डी शहर को फ्रेन्चाइचीज पर सौंपने के समय तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानि 58ः प्रति माह था जबकि पेसू में यह दर 37ः प्रति माह है।7. मुजफ्फरपुर शहरी क्षेत्र की भी स्थिति पेसू से ही मिलती जुलती है।इसके बाद भी पता नहीं क्यों सरकार अड़ी है कि वह बिहार में पटना, मुजफ्फरपुर से प्रारम्भ कर पूरे राज्य में विद्युत आपूर्ति का जिम्मा निजी कम्पनियों को सौंपेगी। नये विद्युत अधिनियम में यह व्यवस्था नहीं है कि किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं, कुटीर ज्योति स्कीम के उपभोक्ताओं को रियायती दर पर या उनकी आर्थिक स्थिति के आधार पर विद्युत दर तय की जाय।एक तरफ विकास का नारा दूसरी ओर विद्युत आपूर्ति जैसे लोकोपयोगी सेवाओं को ठेकेदारों को सौंपना दोनों में कोई मेल नहीं है। अब तक 19 राज्य विद्युत बोर्ड़ो के विखंडन के बाद भी विद्युत आपूर्ति का जिम्मा 17 राज्यों में सरकार ही सम्भाले हुए हैं। उड़ीसा और दिल्ली जहां विद्युत आपूर्ति का जिम्मा बड़ी-बड़ी कम्पनियों को दिया गया है एक के बाद एक घोटाला सामने आ रहा है। जनता तथा उपभोक्ता तबाह हैं।रैली की अध्यक्षता श्री सी.एल. प्रकाश, पेसा अध्यक्ष ने की। रैली को संबोधित करने वालों में सभी श्रमिक संघों के पदाधिकारी श्री अरविन्द प्रसाद, सचिव पेसा, श्री भोला नाथ सिंह, महांमंत्री पेसा, चक्रधर प्रसाद सिंह, महासचिव, श्री डी.पी. यादव, उपमहासचिव, कपिलदेव यादव, अवर महासचिव, बिहार स्टेट इलेक्ट्रिक सप्लाई वर्कर्स यूनियन, श्री अमरेन्द्र प्रसाद मिश्र, महासचिव फिल्ड कामगार यूनियन, एस.एस.पी. यादव, कार्यकारी अध्यक्ष बिहार बिजली मजदूर यूनियन, महेश प्रसाद सिन्हा, महासचिव, बिहार पावर वर्कर्स यूनियन, नवल किशोर सिंह, महासचिव, बिहार राज्य विद्युत मजदूर यूनियन, उपेन्द्र चौधरी, तकनीकी कामगार यूनियन, अशोक कुमार महासचिव, प्रशासनिक पदाधिकारी संघ आदि ने अपने विचार व्यक्त करते हुए सरकार तथा बोर्ड प्रबंधन को चेतावनी दी कि यदि सरकार एवं प्रबंधन अपनी जिद पर कायम रहा तो पूरे बिहार में किसी भी समय से मुकम्मिल हड़ताल होगी जो 27.02.2007 की हड़ताल से भी गंभीर होगी।इसके बाद गगनभेदी नारों के साथ रैली की समाप्ति की घोषणा हुई।

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