भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

About The Author

Communist Party of India, U.P. State Council

Get The Latest News

Sign up to receive latest news

समर्थक

शुक्रवार, 25 जून 2010

नये मनुष्य, नये समाज के निर्माण की कार्यशाला: क्यूबा -2

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद हालात और खराब हुए। बटिस्टा ने क्यूबा कोअमेरिका से निकाले गए अपराधियों की पनाहगाह बना दिया। बदले में अमेरिकीमाफिया ने बटिस्टा को अपने मुनाफों में हिस्सेदारी और भरपूर ऐय्याशियाँमुहैया कराईं। उस दौर में क्यूबा का नाम वेश्यावृत्ति, कत्ले आम, औरनशीली दवाओं के कारोबार के लिए इतना कुख्यात हो चुका था कि 22 दिसंबर1946 को हवाना के होटल में कुख्यात हवाना कांफ्रेंस हुई जिसमें अमेरिकाके अंडर वल्र्ड के सभी सरगनाओं ने भागीदारी की। यह सिलसिला बेरोक-टोकचलता रहा।1955 में बटिस्टा ने ऐलान किया कि क्यूबा किसी को भी जुआघर खोलने कीइजाजत दे सकता है बशर्ते कि वह व्यक्ति या कंपनी क्यूबा में होटल उद्योगमें 10 लाख अमेरिकी डालर का या नाइट क्लब में 20 लाख डाॅलर का निवेश करे।इससे अमेरिका में कैसिनो के धंधे में नियम कानूनों से परेशान कैसिनोमालिकों ने क्यूबा का रुख किया। जुए के साथ तमाम नये किस्म के अपराध औरअपराधी क्यूबा में दाखिल हुए। अमेरिका के प्रति चापलूस रहने में बटिस्टाका फायदा यह था कि अपनी निरंकुश सत्ता कायम रखने के लिए उसे अमेरिका सेहथियारों की अबाध आपूर्ति होती थी। यहाँ तक कि अमेरिकी राष्ट्रपतिआइजनहाॅवर के जमाने में क्यूबा को दी जाने वाली पूरी अमेरिकी सहायताहथियारों के ही रूप में होती थी। एक तरह से ये दो अपराधियों का साझा सौदाथा।आइजनहाॅवर की नीतियों का विरोध खुद अमेरिका के भीतर भी काफी हो रहा था।आइजनहाॅवर के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और उनके बाद अमेरिका के राष्ट्रपतिबने जाॅन एफ0 कैनेडी ने आइजनहाॅवर की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा थाः’सारी दुनिया में जिन देशों पर भी उपनिवेशवाद हावी है, उनमें क्यूबाजितनी भीषण आर्थिक लूट, शोषण और अपमान किसी अन्य देश का नहीं हुआ है, औरइसकी कुछ जिम्मेदारी बटिस्टा सरकार के दौरान अपनाई गई हमारे देश कीनीतियों पर भी है।’ इसके भी आगे जाकर आइजनहाॅवर की नीतियों की आलोचनाकरते हुए कैनेडी ने क्यूबा की क्रान्ति का व फिदेल और उनके क्रान्तिकारीसाथियों का समर्थन भी किया।लेकिन यह समर्थन वहीं खत्म भी हो
गया जब उन्हें समझ आया कि क्यूबा की क्रांति सिर्फ एक देश के शासकों काउलटफेर नहीं, बल्कि वह एक नये समाज की तैयारी है और पूँजीवाद के बुनियादीतर्क शोषण के ही खिलाफ है, और इसीलिए उस क्रान्ति को समाजवाद के भीतर हीअपनी जगह मिलनी थी।बटिस्टा सरकार के दौरान जो हालात क्यूबा में थे, उनके प्रति एक ज़बर्दस्तगुस्सा क्यूबा की जनता के भीतर उबल रहा था। फिदेल कास्त्रो के पहले भीबटिस्टा के तख्तापलट की कुछ नाकाम कोशिशें हो चुकी थीं। विद्रोही शहीदहुए थे और बटिस्टा और भी ज्यादा निरंकुश। खुद अमेरिका द्वारा माने गयेआँकड़े के मुताबिक बटिस्टा ने महज सात वर्षों के दौरान 20 हजार से ज्यादाक्यूबाई लोगों का कत्लेआम करवाया था। इन सबके खिलाफ फिदेल के भीतर भीगहरी तड़प थी। जब फिदेल ने 26 जुलाई 1953 को मोंकाडा बैरक पर हमला बोल करबटिस्टा के खिलाफ विद्रोह की पहली कोशिश की थी तो उसके पीछे यही तड़प थी।अगस्त 1953 में फिदेल की गिरफ्तारी हुई और उसी वर्ष उन्होंने वह तकरीर कीजो दुनिया भर में ’इतिहास मुझे सही साबित करेगा’ के शीर्षक से जानी जातीहै। उन्हें 15 वर्ष की सजा सुनायी गई थी लेकिन दुनिया भर में उनके प्रतिउमड़े समर्थन की वजह से उन्हें 1955 में ही छोड़ना पड़ा। 1955 में ही फिदेलको क्यूबा में कानूनी लड़ाई के सारे रास्ते बन्द दिखने पर क्यूबा छोड़मैक्सिको जाना पड़ा जहाँ फिदेल पहली दफा चे ग्वेवारा से मिले। जुलाई 1955से 1 जनवरी 1959 तक क्यूबा की कामयाब क्रान्ति के दौरान फिदेल ने राउलकास्त्रो, चे और बाकी साथियों के साथ अनेक छापामार लड़ाइयाँ लड़ीं, अनेकसाथियों को गँवाया लेकिन क्यूबा की जनता और जमीन को शोषण से आजाद करानेका ख्वाब एक पल भी नजरों से ओझल नहीं होने दिया।
-विनीत तिवारीमोबाइल : 09893192740
(क्रमश:)

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

लोकप्रिय पोस्ट

कुल पेज दृश्य