भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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सोमवार, 11 मई 2020

Agitation Of Left Parties of U.P.




श्रमिकों पर टूट रहे सरकारों के कहर और कोरोना के नाम पर तानाशाही लादने के खिलाफ वामपंथी दलों ने विरोध का बिगुल फूंका

सैकड़ों स्थानों पर अनशन किया गया, धरने दिये गये और ज्ञापन सौंपे गये

लखनऊ- 11 मई 2020, कोरोना से निपटने में केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार की अदूरदर्शिता, लाक डाउन को मनमाने और बचकाने तरीकों से लागू करने से देश और उत्तर प्रदेश की जनता का बहुमत संकटों से घिर गया है। मजदूरों और प्रवासी मजदूरों की तो सरकारों ने दुर्गति बना कर रख दी है। आम जनता को इस संकट से उबारने के लिये संजीदा प्रयास करने के बजाय सरकारें संकट का भार आमजनों खास कर मजदूरों पर थोप रही हैं। अफसोस है कि इस संकट काल में भी भाजपा और उसकी सरकारें सांप्रदायिक कार्ड खेलने से बाज नहीं आरहीं। इससे संकट और भी गहरा होगया है। पुलिस का कहीं कहीं मानवीय चेहरा दिख जाता है परंतु शेष मामलों में वह दमन की पर्याय बन कर रह गयी है।

वामपंथी दल स्पष्टरूप से कहना चाहते हैं कि मजदूरों, किसानों, लघु उद्यमियों, व्यापारियों और आमजन को तत्काल कदम उठा कर संकट से निकाला न गया तो देश और उत्तर प्रदेश की जनता को अभूतपूर्व हानि उठानी पड़ सकती है। अतएव इसी परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- माले एवं आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक के हजारों कार्यकर्ताओं ने आज उपर्युक्त तबकों को राहत प्रदान करने की मांग को लेकर अपने कार्यालयों, घरों, तहसीलों एवं जिलाधिकारी कार्यालयों पर सैकड़ो स्थानों पर अनशन अथवा धरने आयोजित किये।
यद्यपि वामदलों ने कार्यालयों अथवा घरों पर ही धरने अथवा भूख हड़ताल का आह्वान किया था लेकिन कई जगह उत्साही साथियों ने कलक्ट्रेट, तहसील अथवा खंड विकास कार्यालयों पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपे। प्रदेश में वामदलों के आह्वान पर कई स्वतंत्र वामपंथियों, ट्रेड यूनियनों और महिला संगठनों ने भी मेहनतकश तबकों और देश हित में अपनी आवाज बुलंद की। एक एक जिले में कई कई जगह धरने/ अनशन किये गये। कई जगह अधिकारियों से मिल कर ज्ञापन दिये गये तो कई जगह ईमेल के जरिये ज्ञापन राष्ट्रपति और राज्यपाल को भेजे गये।

सभी 15 सूत्रीय ज्ञापनों में कहा गया है कि केन्द्र सरकार और उत्तर प्रदेश की सरकार ने पहले से महंगे चल रहे डीजल और पेट्रोल की कीमतों में भारी व्रद्धि कर दी है, जिसका उद्योग, व्यापार और खेती पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और महंगाई और भी बढ़ जायेगी। अतएव केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा की गयी व्रद्धियां तत्काल वापस ली जायें। कम से कम आधी की जायेँ।  

ज्ञापनों में कहा गया महामारी का सारा बोझ आम जनता पर डालना बन्द किया जाये और अमीरों पर अधिक टैक्स लगाया जाये।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा श्रम क़ानूनों को 3 साल के लिये रद्द करने और काम के घंटे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। यह लाक डाउन से लुटे-पिटे मजदूरों पर आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा हमला है। इन कदमों को अविलंब वापस लिया जाये।

न्यूनतम वेतन रु॰ 21 हजार किया जाये। सभी संगठित और असंगठित, सरकारी और गैर सरकारी विभागों/ उद्यमों में संविदा अथवा अन्य श्रमिकों के बकाया वेतनों का भुगतान सुनिश्चित किया जाये। समस्त प्रवासी मजदूरों की घर वापसी सरकारी खर्चे पर शीघ्र से शीघ्र सुनिश्चित की जाये। रास्ते में उनका उत्पीड़न रोका जाये। हर एक श्रमिक को रु॰ 7500 की एकमुश्त मदद तत्काल दी जाये।

राशनकार्ड अथवा गैर राशनकार्डधारी हर परिवार को 35 किलो खाद्यान्न हर माह निशुल्क देना सुनिश्चित किया जाये। हर व्यक्ति को पूर्ण रोजगार सुनिश्चित किया जाये। कोरोना वायरस से लड़ने के नाम पर जनता को भयाक्रांत और दंडित करना बन्द किया जाये।

कैंसर, टीवी, हार्ट, किडनी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की फौरन व्यवस्था की जाये। अस्पताल खोले जायें, सभी का इलाज सुनिश्चित किया जाये। गर्भवती महिलाओं के लिये घर पर कंसल्टेशन और प्रसूति की व्यवस्था की जाये।

मौसम की मार और लाक डाउन के प्रहार से व्यथित किसानों के उत्पाद- अनाज, सब्जी, फल, दूध सब्जी आदि को उचित कीमत पर खरीदना सुनिश्चित किया जाये। अभी तक उत्तर प्रदेश में गेहूं खरीद 25% भी नहीं हुयी। मौसम से प्रभावित गेहूं की भी खरीद की जाये। प्रत्येक खरीद का तत्काल भुगतान किया जाये। किसानों को रु॰ 12 हजार की एकमुश्त मदद की जाये। मंडी कानून में किसान विरोधी संशोधन वापस लिये जायें। आँधी- तूफान से प्रतिदिन होरही जन और धन हानि की आर्थिक भरपाई की जाये।

कुटीर, लघु, मध्यम उद्योगों और छोटे व्यापारियों के लिये राहत पैकेज की घोषणा की जाये। कोरोना की बीमारी के अलाबा लाक डाउन की विभिन्न कमजोरियों से अब तक लगभग 450 लोगों की जानें जा चुकी हैं। इन अवसाद, अभाव से पीड़ित आत्महत्या करने वालों, रास्ते में दम तोड़ने वालों और दुर्घटनाओं में म्रत श्रमिकों के परिवारों को रु॰ 50 लाख की आर्थिक सहायता दी जाये।

सभी की कोरोना जांच मुफ्त कराई जाये। मुफ्त चिकित्सा कराई जाये। कोरोंटाइन और आइसोलेशन केन्द्रों की स्थितियों में सुधार किया जाये। जांच और इलाज में प्रशासनिक ढील बंद की जाये।

दलितों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं का उत्पीड़न और उन पर हिंसा रोकी जाये। लाक डाउन के नाम पर नागरिकों को जेल भेजना, पीटना, वाहनों का चालान काटना और जुर्माना बसूलना बंद किया जाये।

कोरोना की इस महा विपत्ति के समय भी भाजपा, संघ और सरकार द्वारा सांप्रदायिकता और नफरत की राजनीति बन्द की जाये। कोरोना की आड़ में तानाशाही लादने को नए नये नये कानून थोपना बन्द किया जाये।

कोरोना से मुक़ाबले के लिये सभी दलों की बैठकें हर स्तर पर बुलाई जायेँ और संयुक्त समितियां बनायी जायें। राजनैतिक गतिविधियों पर थोपी हुयी पाबंदियां फौरन हटायी जायें।

भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश,  भाकपा- मार्क्सवादी के राज्य सचिव का॰ हीरा लाल यादव, भाकपा- माले के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव एवं फारबर्ड ब्लाक के राज्य संयोजक अभिनव कुशवाहा ने आज के महत्वपूर्ण आंदोलन को सफल बनाने वाले वामपंथी कार्कर्ताओं और समर्थकों को बधाई दी है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश


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शुक्रवार, 8 मई 2020

16 मजदूरों की मौत पर भाकपा ने जताया रोष




लखनऊ- 8 मई 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने आज औरंगाबाद में रेलवे ट्रैक पर मालगाड़ी से कुचल कर 16 मजदूरों की मौत पर गहरा अफसोस, पीड़ा और आक्रोश का इजहार किया है। पार्टी ने कल विशाखापत्तनम में एक फैक्टरी में गैस रिसाब से हुयी 12 श्रमिकों और नागरिकों की मौत पर भी गहरा दुख व्यक्त किया है। पार्टी ने रेल से कुचल कर म्रत मजदूरों के परिवार को 50 लाख रु॰ प्रति म्रतक राहत राशि देने की मांग की।

यहां जारी एक प्रेस बयान में पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि कोरोना संकट के शुरुआत से ही मजदूरों के प्रति सरकार का रवैया बहुत ही शत्रुतापूर्ण रहा है। पहले उन्हें लाक डाउन में भूखे प्यासे मरने को छोड़ दिया गया। और जब भूख और अर्थाभाव के चलते जान हथेली पर रख कर वे घरों की ओर चल दिये तो रास्तों में उन्हें पीटा गया, क्वारंटाइन किया गया और कई जगह सड़कों पर ही तड़पते छोड़ दिया गया। भूख, प्यास, बीमारी से कई दर्जन मजदूरों ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

वामपंथी दलों और विपक्ष के दबाव में सरकार ने बेमन से मजदूरों को घर पहुंचाने का निर्णय लिया मगर अब भी उनके रास्ते में अनेक किस्म के रोड़े अटकाए जारहे हैं। उनसे रेल किराया बसूला जारहा है, यदि वे अपना खर्च कर बस, ट्रक आदि से चल पड़े तो वाहन जब्त कर उन्हें खदेड़ दिया गया। और अब जो पैदल ही जा रहे हैं वे सड़क दुर्घटनाओं में मारे जारहे हैं। यदि सरकार ने सतर्कता बरतते हुये अपने दायित्व का निर्वाह किया होता तो ये 16 मजदूर भी मौत के झपट्टे से बच जाते। सच तो यह है कि कोरोना संकट से पूंजीवाद और पूंजीवादी सरकार का मजदूरों, गरीबों और आम जनता के प्रति घिनौना चरित्र उजागर होगया है।

भाकपा मांग करती है कि सरकार/ सरकारें अपना रवैया बदलें। एक एक मजदूर को रेल/ बसों से सुरक्षित घर पहुंचायें। मजदूरों के जीवन और अधिकार छिनने से बाज आयें सरकारें, भाकपा आगाह करना चाहती है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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गुरुवार, 7 मई 2020

जनता के हितों की रक्षा के लिये 11 मई को उत्तर प्रदेश में प्रतिरोध दर्ज करायेंगे वामपंथी दल : डा॰ गिरीश




लखनऊ- 7 मई 2020, उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी, भाकपा- माले एवं आल इंडिया फारवर्ड ब्लाक ने कहा कि केन्द्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और भाजपा की अन्य राज्य सरकारें कोरोना संकट की आड़ में मजदूरों, किसानों और आम जनता पर अपना एजेंडा थोप रहीं हैं। निरंतर जनता की परेशानियों में इजाफा करने वाले और तानाशाहीपूर्ण कदम उठा रही भाजपा विपक्षी दलों पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है। जबकि वह खुद पल पल सांप्रदायिक और विद्वेष की राजनीति कर रही है।

लाक डाउन की बन्दी के चलते बड़ी संख्या में लोगों की आर्थिक हालात बद से बदतर  हो चुकी है फिर भी केन्द्र सरकार ने पेट्रोल पर 10 रुपये और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क बड़ा दिया जो अब तक की सबसे बढ़ी बदोत्तरी है। ऊपर से उत्तर प्रदेश सरकार ने पेट्रोल पर 2 रु॰ तथा डीजल पर 1 रु॰ प्रति लीटर वैट बढ़ा कर रही- सही कसर पूरी कर दी। इस कदम से पेट्रोल डीजल पर 69 प्रतिशत टैक्स होगया है जो दुनियाँ में सबसे अधिक है। यह सब उस समय किया जारहा है जब अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें बेहद कम हैं। कीमतें बढ़ा कर सरकार ने जनता को कच्चे तेल की कमी के लाभ से वंचित कर दिया है।

पूँजीपतियों के कहने पर प्रवासी मजदूरों को अपने घरों को वापस आने से रोका जारहा है। कर्नाटक सरकार ने मजदूरों को लाने वाली रेल गाड़ियाँ रद्द करा दीं। गुजरात और अन्य कई भाजपा की राज्य सरकारें मजदूरों के घर लौटने में तरह तरह की बाधाएं खड़ी कर रही हैं। तमाम मजदूर महिलाओं बच्चों और बुजुर्गों को लेकर पैदल और साइकिलों से ही घर पहुँचने को मजबूर हैं। उनमें से अनेकों की भूख-प्यास, बीमारी और दुर्घटनाओं से रास्ते में ही मौत होगयी।

उत्तर प्रदेश सरकार ने तो एक कदम और आगे बढ़ा कर तीन साल के लिये श्रम क़ानूनों को ही रद्द कर दिया। काम के घंटे बड़ा दिये जबकि काम के घंटे घटाये जाने चाहिये ताकि सभी को रोजगार मिल सके। विशेष ट्रेनों में उनसे किराया भी वसूला जारहा है। कईयों को तो रास्ते में खाना- पानी तक नहीं मिला। परदेश में वे अभाव, भूख और गंदे शेल्टर होम्स में नारकीय जीवन बिता रहे थे, यहां जिन क्वारंटाइन केन्द्रों में उन्हें रखा गया है, उनकी स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। आज़ादी के बाद मजदूर वर्ग इतिहास की सबसे बड़ी विपत्ति का सामना कर रहा है, और यह विपत्ति सरकारों ने उनके ऊपर थोपी है।

इन तीन माहों में कोरोना से निपटने में सरकार ने अक्षम्य गलतियाँ की हैं और कोरोना के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। यह सरकार कोरोना के इलाज में लगे सवास्थ्यकर्मियों को अच्छी और पर्याप्त पीपीई किटें व अन्य जरूरी उपकरण समय पर नहीं दे पायी और उनमें से अनेक संक्रमित होरहे हैं। कई की तो जान चली गयी। लेकिन उनके सम्मान और सुरक्षा के नाम पर तमाम नाटक किए जारहे हैं। बीमारी छिपाने, यात्रा करने, थूकने और कोरोना योद्धाओं की रक्षा के नाम पर कड़ी सजाओं वाले कानून बना दिये गए हैं और उन क़ानूनों के दुरुपयोग को रोकने की कोई गारंटी नहीं की गयी है। आरोग्य सेतु को जबरिया लोगों पर थोपा जारहा है। गौतम बुध्द नगर जनपद में तो आरोग्य सेतु डाउन लोड न करने पर मुकदमा दर्ज करने का प्राविधान कर दिया गया है। यह सब कोरोना के बहाने जनता को अधिकाधिक भयभीत और दंडित करने वाली कार्यवाहियाँ हैं, जिनके परिणाम आमजन को बहुत दिनों तक भुगतने पड़ेंगे।

सरकार ने तमाम अस्पतालों और निजी अस्पतालों को बन्द कर दिया है। इससे कैंसर, ह्रदय, लिवर, टीवी एवं किडनी आदि गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को मौत के मुंह में जाने को छोड़ दिया है। जबकि कई निजी चिकित्सालय छिप कर इलाज कर रहे हैं और मरीजों से कई गुना धन वसूल रहे हैं। गरीब लोग इतना महंगा इलाज करा नहीं पारहे। इलाज के अभाव में लोग मर रहे हैं और मोतौं की खबर को छिपाया जा रहा है। अवसाद और अभाव के चलते कई लोग एकाकी तो कई ने परिवार सहित आत्महत्याएं की हैं।

आए दिन बिगड़ने वाले मौसम से किसानों की फसलें बरवाद हुयी हैं और लाक डाउन के चलते सब्जियों और फलों की कीमत गिरी है। किसान सब्जी की फसलों को खेतों में ही नष्ट करने को मजबूर हुये हैं। गेहूं खरीद केन्द्रों पर भीगा गेहूं बता कर अथवा वारदाने का अभाव बता कर किसानों को वापस किया जारहा है और वे निजी व्यवसायियों को कम कीमत पर गेहूं बेचने को मजबूर हैं। खरीदे माल का तत्काल भुगतान भी नहीं किया जा रहा।

इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की हालत में भारी गिरावट आयी है। महिला हिंसा, दलितों- अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न आदि अपराधों में तेजी से व्रद्धि हुयी है। लाक डाउन में छोटी छोटी गलतियाँ करने पर लोगों को सीधे जेल भेजा जारहा है, लाठीयों से धुना जा रहा है और बड़े पैमाने पर वाहनों के चालान काटे जारहे हैं। लोग जरूरी सामान तक नहीं खरीद पारहे। छोटे व्यवसायी कारोबार कर नहीं पा रहे। गरीबों को धन और खाद्य पदार्थों के अभाव से जूझना पढ़ रहा है। सरकार की मदद पर्याप्त नहीं है।

उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने सरकार की इन जन विरोधी और जनतंत्र विरोधी कार्यवाहियों पर अपना प्रतिरोध दर्ज करने का निश्चय किया है। आगामी 11 मई को वामपंथी दलों के कार्यकर्ता लाक डाउन की मर्यादाओं का पालन करते हुये अपने आवासों पर अथवा कार्यालयों पर भूख हड़ताल/ धरना आदि करेंगे और जहां जैसे संभव होगा अधिकारियों को ज्ञापन देंगे।



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बुधवार, 6 मई 2020

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में व्रद्धि अनुचित : वापस ले उत्तर प्रदेश सरकार-- भाकपा




लखनऊ- 6 मई 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में की गयी व्रद्धि की आलोचना की और उसे वापस लेने की मांग की है।
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि यह कोरोना से प्रभावित अर्थव्यवस्था और आम आदमी के ऊपर बड़ा बोझ लाद दिया गया है। राजस्व बढ़ाने के लिये उद्योग, व्यापार और आम आदमी के जीवन को संकट में डाल दिया है।
और यह उस समय किया गया है जबकि अंतर्राष्ट्रीय तेल बाज़ार में कच्चे तेल- जिससे कि पेट्रोल और डीजल बनते हैं, की कीमतें बेहद कम हैं। सस्ते तेल का लाभ जनता और अर्थव्यवस्था को मिल सकता था, लेकिन केन्द्र सरकार उन पर लगातार ऊंचे टैक्स थोप कर पेट्रोल एवं डीजल की कीमतें ऊंची बनाये हुये है। अब राज्य सरकार ने पेट्रोल, डीजल की कीमतों में व्रद्धि करके लाक डाउन से खोखली हो चुकी आम जनता और मंदी से जूझ रही अर्थव्यवस्था के सामने गहरा संकट खड़ा कर दिया है।
अतएव भाकपा जनहित में इन जबरिया थोपी हुयी व्रद्धियों को तत्काल वापस लेने की मांग करती है।


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सोमवार, 4 मई 2020

कार्ल मार्क्स की 202 वीं जयंती: कोरोना काल और मार्क्सवाद की प्रासंगिकता-- डा॰ गिरीश




कोरोना काल में समूचे विश्व और भारत में मेहनतकशों पर बरपी मुसीबतों ने उन्हें सारी दुनियां के ध्यान के केन्द्र में ला दिया है। इसके साथ ही उनकी किस्मत के कायापलट के उद्देश्य से रचे गए सिध्दांत और उसके स्रजेता – कार्ल मार्क्स को भी विमर्श के सघन केन्द्र में ला दिया है। यद्यपि वे बौध्दिक और व्यावहारिक विमर्श से कभी बाहर नहीं हुये थे।
5 मई 1818 को जन्मे कार्ल हेनरिक मार्क्स का नाम इतिहास के सर्वाधिक अनुयायित महापुरुषों में विशिष्ट स्थान रखता है। उन्होने अपने मित्र और सहयोगी फ़्रेडरिक एंगेल्स के साथ मिल कर साम्यवाद की विजय के लिये, सर्वहारा के वर्ग- संघर्ष के सिध्दांत की विजय के लिये सर्वहारा वर्ग- संघर्ष के सिध्दांत तथा कार्यनीति की रचना की थी। यह दोनों ही व्यक्ति इतिहास में विश्व के मेहनतकश वर्ग के विलक्षण शिक्षकों, उनके हितों के महान पक्षधरों, मजदूर वर्ग के क्रांतिकारी आंदोलन के सिध्दांतकारों और संगठनकर्ताओं के रूप में सदैव अमर रहेंगे।
मार्क्स ने विश्व को सही ढंग से समझने तथा उसे बदलने के लिये मानव जाति और उसके सबसे ज्यादा क्रांतिकारी वर्ग, सर्वहारा वर्ग को एक महान अस्त्र का काम करने वाले अत्यंत विकसित एवं वैज्ञानिक द्रष्टिकोण से लैस किया था, जिसका नामकरण बाद में उन्हीं के नाम पर- मार्क्सवाद किया गया। उसके बाद महान लेनिन ने उसे अपनी सामयिक परिस्थितियों के अनुकूल व्याख्यायित और विकसित कर सर्वहारा के स्वप्नों को अमलीभूत करने वाले राज्य – सोवियत संघ की स्थापना कर डाली। तदुपरान्त यह सिध्दांत मार्क्सवाद- लेनिनवाद कहलाया।
महर्षि मार्क्स ने ही समाजवाद को काल्पनिकता के स्थान पर वैज्ञानिक रूप प्रदान किया तथा पूंजीवाद के अवश्यंभावी पतन व साम्यवाद की विजय के लिये एक विशद एवं सर्वांगीण सैध्दांतिक विश्लेषण प्रस्तुत किया।
उन्होने ही अंतर्राष्ट्रीय कम्युनिस्ट आंदोलन तथा मजदूर वर्ग की प्रारंभिक क्रांतिकारी पार्टियों का गठन किया था। इन पार्टियों ने वैज्ञानिक समाजवाद की विचारधारा को स्वीकार किया।
उन्होने ही पूंजीवाद को नेस्तनाबूद करने और समाजवादी ढंग पर समाज के क्रांतिकारी रूपान्तरण के लिये पूंजीवादी उत्पीड़न के विरूध्द उठाने वाले मजदूरों के स्वतःस्फूर्त आंदोलनों को सचेत वर्ग- संघर्ष का रूप प्रदान किया।
मार्क्स प्रथम व्यक्ति थे जिनहोने सामाजिक विकास का नियंत्रण करने वाले नियमों की खोज के बल पर मानव कल्याण और प्रत्येक व्यक्ति को शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति के सर्वांगीण विकास तथा सामाजिक उत्पीड़न को समाप्त करके सम्मानजनक जीवन- पध्दति के अनुरूप आवश्यक परिस्थितियों का निर्माण करने के लिये मेहनतकशों को सही रास्ता और उपाय समझाया था।
मार्क्स के पहले के सामाजिक सिध्दांत नियमतः धनिक वर्ग का पक्ष- पोषण करते थे। उनसे गरीबों की बेहतरी की कोई आशा नहीं की जा सकती थी। वर्गीय समाज के संपूर्ण इतिहास में शासक और शोषक वर्ग शिक्षा, वैज्ञानिक उपलब्धियों, कलाओं और राजनीति पर एकाधिकार जमाये हुये थे जबकि मेहनतकश लोगों को अपने मालिकों के फायदे के लिये मेहनत करते हुये अपना पसीना बहाना पड़ता था। यद्यपि समय समय पर दलितों के प्रवक्ताओं ने अपने सामाजिक विचारों को परिभाषित किया था, पर वे विचार अवैज्ञानिक थे। उनमें अधिक से अधिक चमक मात्र थी, पर समग्र रूप से ऐतिहासिक विकास के नियमों की समझदारी का उनमें अभाव था। वे स्वाभाविक विरोध और स्वतःस्फूर्त आंदोलन की एक अभिव्यक्ति ही कहे जा सकते थे।
इसी दौर में आगे बढ़ रहे मुक्ति आंदोलनों को वैज्ञानिक विचारधारा की नितांत आवश्यकता थी, जिसकी भौतिक और सैद्धांतिक पूर्व शर्तें कालक्रम से परिपक्व हो चुकी थीं।
औद्योगिक क्रान्ति के दौरान उत्पादक शक्तियों के तीव्र गति से होने वाले विकास ने मनुष्य द्वारा मनुष्य के शोषण की समाप्ति और मजदूर वर्ग की मुक्ति  के ऐतिहासिक कार्य के प्रतिपादन के लिये वास्तविक आधार तैयार कर दिया था। पूंजीवाद के विकास के साथ ही एक ऐसी सक्षम सामाजिक शक्ति का उदय होगया था जो इस कार्य को पूरा कर सकती थी। उस शक्ति का नाम था- मजदूर वर्ग।
मजदूर वर्ग के हितों की वैज्ञानिक अभिव्यक्ति के रूप में मार्क्सवाद सर्वहारा के वर्ग संघर्ष के साथ निखरा और विकसित हुआ। पूंजीवाद के आंतरिक अंतर्विरोधों के प्रकाश में आने से यह निष्कर्ष सामने आया कि पूंजीवादी समाज का विध्वंस अवश्यंभावी है। साथ ही मजदूर वर्ग के आंदोलन के विकास से यह निष्कर्ष उजागर हुआ कि सर्वहारा ही आगे चल कर पूंजीवादी पध्दति की कब्र खोदेगा तथा नए समाजवादी समाज का निर्माण करेगा।
इस संबन्ध में लेनिन ने एक बहुत ही सुस्पष्ट व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होने लिखा, “ एकमात्र, मार्क्स के दार्शनिक भौतिकवाद ने ही सर्वहारा को ऐसी आध्यात्मिक गुलामी से निकालने का रास्ता सुझाया जिसमें संपूर्ण दलित वर्ग अभी तक पीसे जा रहे थे। एकमात्र, मार्क्स के आर्थिक सिध्दांत ने ही पूंजीवादी व्यवस्था के दौरान सर्वहारा वर्ग की सही नीति की व्याख्या की थी।“
सामाजिक संबंधों के विकास संबंधी विशद विश्लेषण से मार्क्स और एंगेल्स की यह समझदारी पक्की हुयी कि इन संबंधों में क्रान्तिकारी परिवर्तन करने, मनुष्य द्वारा मनुष्य के शोषण को समाप्त करने और समाजवादी समाज के निर्माण के लिये एक सक्षम शक्ति के रूप में सर्वहारा को महान ऐतिहासिक भूमिका निभानी होगी। सर्वहारा वर्ग की वर्तमान स्थिति से ही उसकी युग परिवर्तनकारी भूमिका निःस्रत होगी। पूंजीवादी शोषण के जुए से समस्त मेहनतकशों को मुक्त कराये बिना वह खुद भी मुक्त नहीं हो सकता। मार्क्स ने इस काम को सर्वहारा के वर्ग- संघर्ष का उच्च मानवीय उद्देश्य माना था, जिसका लक्ष्य मेहनतकश इंसान को पूंजीवादी समाज की अमानवीय स्थिति से मुक्ति दिलाना था।
मार्क्सवाद हमें यह भी सिखाता है कि विशुध्द वैज्ञानिक क्रान्तिकारी सिध्दांत और क्रांतिकारी व्यवहार की एकता कम्युनिज़्म की मुख्यधारा है।  क्रान्तिकारी व्यवहार के बिना, और मार्क्सवादी विचारधारा को जीवन में अपनाए वगैर, यह सिद्धान्त महज ऊपरी लफ्फाजी तथा सुधारवाद व अवसरवाद के लिये एक आवरण मात्र बन कर रह जाता है। विज्ञान और सामाजिक विकास के बारे में वैज्ञानिक द्रष्टिकोण के बिना क्रान्तिकारी कार्यवाही का पतन दुस्साहसवाद के रूप में हो जाता है जो अराजकता की ओर लेजाता है।
मजदूरवर्ग के हितों का वाहक कौन बनेगा इस पर भी मार्क्स का सुस्पष्ट द्रष्टिकोण है-
अंतर्राष्ट्रीय मजदूर वर्ग के आंदोलनों के संपूर्ण इतिहास, विश्व की क्रांतिकारी प्रक्रिया तथा विभिन्न देशों में होने वाले क्रान्तिकारी संघर्षों के उतार- चढ़ाव ने अकाट्य रूप से यह साबित कर दिया है कि केवल मार्क्सवाद- लेनिनवाद के क्रान्तिकारी सिध्दांतों से निर्देशित पार्टी ही एक लड़ाकू अगुवा दस्ते का काम कर सकती है।
लेनिन ने रूस के मजदूर वर्ग के आंदोलन के शुरू में ही मार्क्स के सिध्दांतों का क्रान्तिकारी निचोड़ प्रस्तुत करते हुये लिखा था, “इस सिध्दांत का, जिसको समस्त देशों के समाजवादियों ने अपनाया है, अपरिहार्य आकर्षण इस तथ्य में निहित है कि इससे सही अर्थों में, सर्वोपरि रूप से वैज्ञानिकता और क्रान्तिकारिता का अपूर्व सामंजस्य है। इसमें उन गुणों का आकस्मिक सामंजस्य केवल इसलिए नहीं है कि उस सिध्दांत के प्रणेता के व्यक्तित्व में एक वैज्ञानिक और क्रान्तिकारी के गुणों का समावेश है, अपितु उनमें एक स्वाभाविक और अटूट समंजस्य है।“
आज कोविड- 19 के आक्रमण ने विश्व पूंजीवादी व्यवस्था की निरीहता की कलई खोल के रख दी है। यह व्यवस्था अपने नागरिकों और समाज को बीमारी के प्रकोप से बचाने के बजाय विधवा प्रलाप कर रही है। पूंजीवाद ने बड़ी ध्रष्टता से संकट का भार सर्वहारा के कंधों पर लाद दिया है। दौलत पैदा करने वालों को कोरोना और भूख के हाथों मरने को छोड़ दिया है। आज अपने ही वतन में वे बेघर और बेगाने नजर आरहे हैं। शारीरिक, मानसिक और आर्थिक आघात झेल रहे हैं। उनके अनुभवों ने सिध्द कर दिया है कि मौजूदा व्यवस्था में उनका वाजिब स्थान नहीं है। उन्हें इस व्यवस्था से मुक्ति हासिल करनी ही होगी। उनके मुक्तियुध्द में मार्क्सवाद ही पथ- प्रदर्शक की भूमिका निभा सकता है। यह भूमिका यह पहले भी निभाता आया है। अब यह संगठित- असंगठित मार्क्सवादियों का दायित्व है कि वे सर्वहाराओं की मुक्ति के काम को आगे बढ़ाएं। मार्ग कठिन भी है और मौजूदा दौर में खतरनाक भी। घबराइए नहीं, मार्क्स यहाँ भी आपका मार्गदर्शन करते नजर आते हैं। वे कहते हैं-
“यदि हमने अपने जीवन में वह रास्ता अख़्तियार किया है जिसमें हम मानव जाति के लिये अधिकाधिक कार्य कर सकते हैं तो कोई भी ताकत हमें झुका नहीं सकती”

दिनांक- 4॰ 5॰ 2020

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शनिवार, 2 मई 2020

CPI onattack on Press



घटिया पीपीई किट की सप्लाई और भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने को मीडिया का गला घोंटना चाहती है सरकार
भाकपा ने की कड़े शब्दों में निन्दा
लखनऊ- 2 मई 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने घटिया क्वालिटी की पीपीई किट सप्लाई के संबंध में न्यूज प्रसारित करने वाले एक टीवी चेनल के डिप्टी एडिटर श्री मनीष पाण्डेय से यूपी पुलिस की एसटीएफ द्वारा 2 घंटे तक पूछ ताछ की कार्यवाही को प्रेस की आज़ादी पर हमला और कोरोना योध्दाओं के साथ मुजरिमाना विश्वासघात बताया है।
यह सर्वविदित है कि कोरोना से युध्द लड़ रहे चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के उपयोग में आने वाली पीपीई किट के घटिया क्वालिटी के होने के बारे में सार्वजनिक तौर पर आरोप लगे थे। लेकिन इस संवेदनशील मसले की जांच करा दोषियों को दंडित करने के बजाय सरकार उसका खुलासा करने वाले पत्रकार का ही मुंह बंद करने पर उतारू है। भाकपा एसटीएफ की इस कारगुजारी की कड़े शब्दों में निन्दा करती है।
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि पीपीई किट का घपला ही क्यों क्वारंटाइन, आइसोलेशन केन्द्रों और कोविड-19 अस्पतालों में मरीजों की दुर्दशा की तमाम खबरें आरही हैं। वहाँ असहनीय किस्म कि अव्यवस्थाएं हैं और सरकार कुछ कर नहीं पारही है। क्या इन खबरों के दबाने के प्रयास में ही मीडियाकर्मियों में दहशत पैदा की जारही है। यदि ऐसा है तो सभी जनवादी शक्तियां इसका मुक़ाबला करेंगीं।
यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि कोरोना के विरूध्द संयुक्त संघर्ष को सांप्रदायिक रूप से बांटने वाले और भाजपा/ संघ के नफरती एजेंडे को आगे बढ़ाने वाले कुछ चेनलों और उनके नामनिहाद वाचाल एंकरों की यह सरकार पीठ थपथपाती है वहीं कोरोना- संघर्ष में  भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले मीडियाकर्मियों को प्रताड़ित करने पर उतारू है। सरकार को ऐसी कार्यवाहियों से बाज आना चाहिए।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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गुरुवार, 30 अप्रैल 2020

घर वापसी के आईने में- सरकार और उसके निर्णय : डा॰ गिरीश




आखिर प्रवासी मजदूरों, छात्रों और जहां तहां फंसे तीर्थ यात्रियों की घर वापसी का फैसला सरकार द्वारा ले लिया गया जिसका बेसब्री से इंतज़ार किया जा रहा था। दिग्भ्रमित शासन ने जो कदम अब उठाया है वह 40 दिन पहले उठाया जाना चाहिये था। पर यह सरकार आपरेशन पहले करती है एनेस्थिया बाद में देती है। इससे मरीज का जो हाल होना है, आसानी से समझा जा सकता है। नोटबंदी सहित सरकार के इसी तरह के कई फैसले अवाम के लिये बेहद पीड़ा दायक रहे हैं, ये आज सभी जानते हैं।
ऐसा नहीं है कि यह बात आज पहली बार कही जारही है। ऐसे लोगों की कमी न थी जो पहले ही दिन से बिना तैयारी के किये गये लाक डाउन की आलोचना कर रहे थे। खासतौर से इसलिये कि अचानक और पूर्व तैयारी के लिये गये इस तुगलकी निर्णय ने करोड़ों- करोड़ मेहनतकशों, उनके परिवार और रिशतेदारों, लाखों प्रवासी छात्रों और असंख्य पर्यटकों/ श्रध्दालुओं को पलक झपकते ही जीवन के सबसे बड़े संकट में डाल दिया था।
कोई शायद ही भूला हो कि चीन के बुहान से उद्भूत कोविड- 19 ने जनवरी के अंत तक यूरोप अमेरिका और अन्य अनेक देशों में दस्तक दे दी थी। भारत में भी यह फरबरी के शुरू में ही प्रकट हो चुका था। लेकिन यह भी कोई शायद ही भूला हो कि जिस वक्त कोरोना भारत में अपने कदम बड़ा रहा था, भारत के मगरूर शासक श्री ट्रंप की मेहमाननवाजी में जुटे थे जो खुद अपने देश की जनता को कोरोना के हाथों मरता छोड़ भारत में घूम रहे थे। कोरोना से निपटने की तैयारी करने के वक्त हमारे शासक मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार  को अपदस्थ करने में जुटे थे। अल्पसंख्यकों से सीएए- एनपीआर- एनआरसी विरोधी आंदोलन का बदला चुकाने को दिल्ली के दंगों में हाथ आज़मा रहे थे।
यह तब भी मालूम था और आज भी कि कोविड- 2019 का आयात हवा- पानी से नहीं अपितु विदेशों से लौट रहे कुलीन वर्ग के माध्यम से हो रहा है। लेकिन तब यह सरकार क्यों नहीं चेती और क्यों विदेशों से लौट रहे संप्रभुओं को क्वारंटाइन नहीं किया, यह आज कोई अबूझ पहेली नहीं है। लोग व्योम मार्ग से आते रहे, लाये जाते रहे है और मामूली खाना- पूरी करके घरों को भेजे जाते रहे। इनमें से अधिकतर उद्योगपति, व्यापारी, डाक्टर्स, इंजीनियर्स और अधिकारी थे। अगले ही दिन से ही ये महानुभाव अपने कार्यस्थलों पर सक्रिय होगये और बड़े पैमाने पर वायरस को इन्हीं ने फैलाया। याद करिये कि लाक डाउन लागू होने के प्रारंभ के तीन दिनों तक तबलीगी जमात कोई मुद्दा नहीं था। सोची समझी रणनीति के तहत यह मुद्दा तब उछाला गया जब खुली जेलों में बंद प्रवासी मजदूर सड़कों पर उतर आए।
फरवरी के प्रारंभ में जिस तरह से विदेशों में फंसे कुलीनों को घर पहुंचाने की तत्परता दिखाई गयी, ऐसी ही तत्परता इस मामले में भी दिखाई गयी होती तो मजदूरों कर्मचारियों, छात्रों, पर्यटकों और जहां तहां फंसे अन्य लोगों की यह दर्दनाक दशा न होती। स्पेशल ट्रेन चला कर बसों के द्वारा अथवा अन्य साधनों से उन्हें फरबरी के मध्य तक घरों को भेजा जा सकता था। हम बार बार कहते आए हैं कि उन्हें उनके घर पहुंचने पर क्वारंटाइन किया जा सकता था। इससे प्रवास में फंसे करोड़ों प्रवासी अंडमान जेल जैसे काले पानी की सजा से बच जाते। उनके परिवारी भी उस यातना से बच जाते जो उन्होने संकट की इस घड़ी में अपनों के बिना और अर्थभाव में झेली है।
बंबई, हैदराबाद, सूरत, चेन्नई, दिल्ली, नोएडा, बनारस, हरिद्वार और देश के कोने कोने में फंसे प्रवासीजन भूख, भय, उपेक्षा, यातना और कैद की जिन्दगी जीने को अभिशप्त थे। जब भी वे यातनाओं की जंजीरों को तोड़ कर सड़कों पर उतरे उन्हें लाठियों से पीटा गया, खदेड़ा गया और जेलों में डाल दिया गया। उसके बावजूद उनमें से अनेक- स्त्री, बच्चे, बुजुर्ग पैदल, साइकिल, रिक्शों से हजारों किलो मीटर की दूरी पार कर घरों को निकल लिये। उनमें से अनेक ने भूख, प्यास और बीमारी के चलते घर पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। असंख्य थे जिन्हें राज्यों की सीमाओं पर रोक दिया गया। अथवा जहां पुलिस के हत्थे चड़े, बीच मार्ग में क्वारंटाइन कर दिया गया। लग ही नहीं रहा था कि वे इसी देश के वही मजदूर हैं जो इस देश के लिये दौलत पैदा करते हैं और उनकी दुर्गति बनाने वाली सरकार वही है जिसे बनाने को उन्होने भी मतदान किया है।
इस बीच हरिद्वार से गुजराती पर्यटकों, वाराणसी से दक्षिण भारतीय पर्यटकों और कोटा से छात्रों को घर पहुंचाने की खबरें गरीब और साधारण प्रवासियों को उनकी बेबसी की याद दिलाती रहीं। अनेक थे जो अलग अलग कारणो से प्रवास में फंसे थे। झारखंड से आयी एक बारात पूरे एक माह तक अलीगढ़ जनपद के एक गाँव में फंसी रही। कोई नहीं समझ पारहा था कि जिस तालाबंदी की घोषणा 22 फरबरी को की गयी, उसकी पूर्व सूचना एक माह पूर्व क्यों नहीं दे दी गयी।
यदि लोगों को सप्ताह भर पहले आगाह किया गया होता और अतिरिक्त रेल गाडियाँ चला दी गईं होतीं तो निश्चय ही लोग सकुशल घरों तक पहुँच गये होते। हमें मालूम है कि बंगला देश और कई अन्य देशों ने ऐसा ही किया था। अगर ऐसा हुआ होता तो पहले ही घर पहुँच कर ग्रामीण मजदूर फसल कटाई करके जीवनयापन हेतु कुछ कमाई तो कर ही सकते थे बार बार बदल रहे मौसम से फसलों की हानि को उसकी कटाई कम कर सकते थे। आज वे जब घर पहुंचेंगे उन्हें लंबे समय तक बेरोजगारी और भूख के दंश को झेलना पड़ेगा।
बेहद देर से लिया गया यह फैसला प्रवासियों के उस आक्रोश का परिणाम है जो अनेक रूपों में प्रकट होरहा था। उन्हें वापस लाने के लिये तमाम सांसदों, विधायकों और अन्य जन प्रतिनिधियों पर उनके क्षेत्र की जनता का दबाव लगातार बढ़ रहा था। थाली, ताली और आतिशबाजियों के माध्यम से रचा कुहासा जीवन की बढ़ती कठिनाइयों से छंटने लगा था। कोरोना फैलाने की जमातियों के ऊपर मढ़ी गयी तोहमत भी कालक्रम से धूमिल होने लगी थी।
इतना ही नहीं बड़े पैमाने पर प्रवासी मजदूर और छात्र सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने लगे थे। विपक्षी दल खास कर वामपंथी दल प्रवासियों को उनके घरों को पहुंचाने के लिये लगातार मुखरित होरहे थे। अतएव जनाक्रोश से बचने को कई मुख्यमंत्री अपने यहाँ के प्रवासियों को वापस लाने की योजना बनाने में जुट गये थे। सतह के नीचे ही सही शासक दल में दो फाड़ नजर आने लगे थे।
अब इन्हें घरों तक पहुंचाने/ लाने की कठिन चुनौती दरपेश है। उन्हें मानवीय हालातों में क्वारंटाइन में रखे जाने की चुनौती है। उनके इलाज और उनके परिवारों के भरण- पोषण की चुनौती है। उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की चुनौती है। कोविड 2019 का वायरस आया है और चला जायेगा, पर भूख, अभाव और बेकारी का यह वायरस लंबे समय तक हमें चुनौती देता रहेगा। हम देख रहे हैं कि शासन और शासक वर्ग की नीतियाँ और कारगुजारियाँ लगातार बेनकाव होरही हैं। अतएव हमें एक न्यायसंगत सामाजिक- आर्थिक प्रणाली के निर्माण पर ज़ोर देना होगा। अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस- मई दिवस पर हमें एक विश्वसनीय और सर्वग्राही आर्थिक- सामाजिक प्रणाली को विकसित करने के संकल्प को द्रढ़ करना होगा।
दिनांक- 30- 4 2020


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बुधवार, 29 अप्रैल 2020

भाकपा राज्य सचिव ने मुख्यमंत्री जी एवं डीजीपी को लिखा पत्र तो दर्ज हुयी एफ़आईआर


पांच दिन पूर्व जनपद- कुशीनगर में यह शर्मनाक कांड हुआ था। स्थानीय सत्तासीनों के प्रभाव के चलते रिपोर्ट दर्ज नहीं की गयी थी। फलतः आज पूर्वान्ह यह पत्र लिखा गया था और ईमेल द्वारा भेजा गया था। भाकपा जनपद कुशीनगर के सचिव का॰ मोहन गौड ने अभी सायंकाल सूचना दी कि आज अपरान्ह एफ़आईआर दर्ज कर ली गयी। उन्होने एफ़आईआर की कापी भी वाट्स एप पर भेजी है।
मुख्यमंत्री जी एवं डीजीपी महोदय को बहुत बहुत धन्यवाद इस विश्वास के साथ कि शीघ्र ही नामजदों की गिरफ्तारी होगी और पीड़ितों को न्याय मिलेगा।

 भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल
22, केसर बाग, लखनऊ- 226001

दिनांक- 29 अप्रेल 2020

सेवामें
मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
लखनऊ- 226001

विषय- जनपद- कुशीनगर के पटहेरवा थानान्तर्गत बाडू चौराहे स्थित जोया एंटरप्राइजेज़ ग्राहक सेवा केन्द्र पर हमले, तोडफोड, मारपीट और लूटपाट के संबंध में।
( By- email )

महोदय,
आपके संज्ञान में लाना चाहता हूँ कि कोरोना काल असामाजिक तत्वों के लिये अपराधों को अंजाम देने का अवसर बन गया है। उनमें से कई हैं जो शासक दल अथवा उससे जुड़े किसी संगठन की आड़ में अपराधों में लिप्त हैं और सत्ता दल के प्रभाव से आवश्यक कानूनी कार्यवाहियों से बचे हुये हैं।
संप्रति मामला जनपद- कुशीनगर के पटहेरवा थाने के अंतर्गत बाड़ू चौराहे का है। यहाँ उत्तर प्रदेश किसान सभा के जिला मंत्री और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की जिला काउंसिल के सदस्य कामरेड समसुद्दीन अंसारी जोया इंटरप्राइजेज़ नाम से ग्राहक सेवा केंद्र चलाते हैं। अपने कम्युनिस्ट विचारों और नैतिक आचरण के चलते वे हमेशा स्थानीय भगवाधारियों के निशाने पर रहते हैं।
गत 24 अप्रेल को 30- 35 की संख्या में नामजद स्थानीय भगवधारियों ने जो अपने को हिन्दू युवा वाहिनी के पदाधिकारी बताते हैं, ने जोया इंटरप्राइजेज़ पर हमला बोल दिया। उन्होने सेवा केन्द्र में घुसकर तोडफोड की, कंप्यूटर आदि उपकरण तोड़ डाले, वहां रखी धनराशि हड़प ली और कामरेड समसुद्दीन और उनके बेटे इस्तखार अंसारी पर जानलेवा हमला किया जिसमें वे घायल होगये।
इस संबंध में समसुद्दीन अंसारी ने तत्काल पुलिस को सूचना दी और थाना- पटहेरवा जाकर लिखित शिकायत की। लेकिन उनकी रिपोर्ट नहीं लिखी गयी। उसके बाद समसुद्दीन ने पुलिस अधीक्षक, कुशीनगर सहित तमाम उच्चाधिकारियों से फोन पर वार्ता कर और वाट्स एप मेसेज भेज कर कार्यवाही की मांग की लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही तो दूर उनकी रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की गयी है। उलटे उन पर दबाव बनाया जारहा है कि वे तहरीर से नामजद लोगों के नाम हटा दें और घटना का विवरण बदल दें।
कोरोना संकट के समय जब सेवा केन्द्र गरीब और आम जनता की वाकई सेवा कर रहे हैं ऐसे में उन पर हमला देशद्रोह की श्रेणी में आता है। लेकिन घटना को अंजाम देने वालों पर कार्यवाही से स्थानीय पुलिस इसलिए बच रही है कि नामजद लोग सत्तासीन समूह से संबंधित हैं। इससे न्याय के सिध्दांत का गला तो दब ही रहा है सत्ता प्रतिष्ठान की निरपेक्षता भी कठघरे में खड़ी होरही है।
अतएव आपसे अनुरोध है कि उपर्युक्त के संबंध में शीघ्र समुचित कार्यवाही के आदेश पारित करें।
शीघ्र कार्यवाही की अपेक्षा के साथ।

भवदीय

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा , उत्तर प्रदेश
प्रतिलिपि-

1-  महानिदेशक, उत्तर प्रदेश पुलिस, लखनऊ।
2-  वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जनपद- कुशीनगर।


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सोमवार, 27 अप्रैल 2020

मौसम की मार से पीड़ित किसानो को तत्काल राहत दे सरकार: भाकपा




लखनऊ- 27 अप्रेल 2020, उत्तर प्रदेश के अधिकतम भागों में कल और उससे पहले कई बार हुयी बारिश, आंधी, ओलों और बिजली गिरने से हुयी फसल और जनहानि पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मण्डल ने राज्य सरकार से त्वरित समुचित कदम उठाने की मांग की है।
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव मण्डल ने कहा कि प्राक्रतिक प्रकोपों से गेहूं व जायद की फसलों और आम आदि फलों का भारी नुकसान हुआ है। बिजली गिरने से कई जानें गयी हैं और अन्य अनेक घायल हुये हैं। बिजली के खंभे गिर जाने से विद्युत सप्लाई बाधित होने से फसल की मड़ाई का काम बाधित हुआ है।
भाकपा मुख्यमंत्री के संज्ञान में यह भी लाना चाहती है कि किसानों से खरीद केन्द्रों पर बारिश से भीगा गेहूं नहीं खरीदा जारहा है। फलतः किसानों को कम दामों पर बाज़ार में गेहूं बेचना पड़ रहा है। खरीद केन्द्रों से साथ के साथ भुगतान भी बहुत कम किसानों को मिल पारहा है। खरीद केन्द्र पर गेहूं लाने के लिये प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ती है। लाकड़ाउन की कठिनाइयाँ झेल रहे किसान को ऊपर से ये सारी कठिनाइयाँ झेलनी पड़ रही हैं।
भाकपा सरकार से मांग करती है कि फसल हानि की ‘जहां जितनी हानि, वहीं उतना भुगतान’ के आधार पर भरपाई की जाये, भीग चुके गेहूं की अलग खरीद के आदेश दिये जायें तथा खरीद का हाथ के हाथ भुगतान की व्यवस्था की जाये ताकि किसान प्रायवेट क्रेताओं के हाथों लुटने से बच सकें। साथ ही किसान- कर्ज 1 प्रतिशत की दर पर करने, पूर्व से चल रहे बकायों को स्थगित रखने और किसान अनुग्रह राशि रु॰ 12,000 सालाना करने की जरूरत है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था सक्रिय होगी।
बिजली गिरने से म्रतकों और घायलों को आर्थिक सहायता और बिजली के सभी जीर्ण शीर्ण खंभों को बदले जाने की मांग भी भाकपा ने की है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश


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मंगलवार, 21 अप्रैल 2020

Help to Labour in Mainpuri


भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल
22, कैसर बाग, लखनऊ- 226001
दिनांक- 21 अप्रेल 2020  
विषय- जनपद- मैनपुरी में लाकडाउन में फंसे झारखंड के 6 मजदूरों को तत्काल सहायता पहुंचाये जाने के संबन्ध में।
By- e-mail
सेवामें
मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
लखनऊ- 226001
आपके संज्ञान में लाना चाहता हूं कि मैनपुरी में सैंट थॉमस स्कूल, सिविल लाइन के सामने रह रहे राजेन्द्र चिक बराइक आदि 6 मजदूर लगभग एक माह से लाकडाउन में फंसे हैं। लाकडाउन की इस लंबी अवधि में अब उनके पास जीवनयापन का कोई साधन नहीं बचा और वे भूखे मरने के कगार पर हैं।
इनमें से एक श्री राजेन्द्र चिक बराइक का मो॰ नंबर- 9027504736 है।
इन सभी को अविलंब राहत सामग्री आदि पहुंचाने की आवश्यकता है
आपसे अनुरोध है कि तत्काल राहत प्रदान कराने का कष्ट करें।
सधन्यवाद।
भवदीय
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
प्रतिलिपि-
जिलाधिकारी, जनपद- मैनपुरी।
जिला सचिव, भाकपा, जनपद मैनपुरी।

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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल
22, कैसर बाग, लखनऊ- 226001
दिनांक- 21 अप्रेल 2020  
विषय- जनपद- मैनपुरी में लाकडाउन में फंसे झारखंड के 6 मजदूरों को तत्काल सहायता पहुंचाये जाने के संबन्ध में।
By- e-mail
सेवामें
मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
लखनऊ- 226001
आपके संज्ञान में लाना चाहता हूं कि मैनपुरी में सैंट थॉमस स्कूल, सिविल लाइन के सामने रह रहे राजेन्द्र चिक बराइक आदि 6 मजदूर लगभग एक माह से लाकडाउन में फंसे हैं। लाकडाउन की इस लंबी अवधि में अब उनके पास जीवनयापन का कोई साधन नहीं बचा और वे भूखे मरने के कगार पर हैं।
इनमें से एक श्री राजेन्द्र चिक बराइक का मो॰ नंबर- 9027504736 है।
इन सभी को अविलंब राहत सामग्री आदि पहुंचाने की आवश्यकता है
आपसे अनुरोध है कि तत्काल राहत प्रदान कराने का कष्ट करें।
सधन्यवाद।
भवदीय
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
प्रतिलिपि-
जिलाधिकारी, जनपद- मैनपुरी।
जिला सचिव, भाकपा, जनपद मैनपुरी।

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सोमवार, 20 अप्रैल 2020

Help to Labours in Gautam Budhd Nagar U.P.


भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल
22, क़ैसर बाग, लखनऊ- 226001
दिनांक- 20 अप्रेल 2020  
विषय- जनपद- गौतम बुध्द नगर में फंसे झारखंड के मजदूरों को भोजन आदि उपलब्ध कराने के संबन्ध में।
Urgent- By- email
सेवामें,
मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
लखनऊ- 226001
महोदय,
झारखंड राज्य के 6 मजदूर नोएडा सेक्टर-8 के अंतर्गत- जामा मस्जिद निकट टीपटाप होटल, में फंसे हैं। लगभग एक माह के इस लाक डाउन में उनके पास की धनराशि पूरी तरह खत्म होगयी है और वे भुखमरी के कगार पर हैं। किसी अधिकारी अथवा सामाजिक संगठन से उनका संपर्क नहीं हो पारहा है।
उनमें से एक श्री इकराम का मो॰ नंबर- 8377085772 है।
आपसे अनुरोध है कि उपर्युक्त मजदूरों तक भोजन सामग्री और अन्य सहायता तत्काल पहुंचाने की व्यवस्था की जाये।
सधन्यवाद।
भवदीय
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश।
प्रतिलिपि- जिलाधिकारी, गौतम बुध्द नगर ( उत्तर प्रदेश )

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शनिवार, 18 अप्रैल 2020

Press Note of Left Parties



कोरोना से पैदा हुये हालातों पर उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों का बयान

 लखनऊ- 18 अप्रेल 2020, कोरोना वायरस की महामारी को पराजित करने के लिये लाकडाउन से भी ज्यादा जरूरी है कि बड़े पैमाने पर जांच कराई जाये, संक्रमित पाये गये  लोगों का समुचित इलाज कराया जाये और उन्हे दरम्याने इलाज शेष जनमानस से अलग थलग रखा जाये। परन्तु खेद की बात है कि उत्तर प्रदेश में इस प्रक्रिया को ठीक से अंजाम नहीं दिया जारहा। यहाँ तक कि कोरोना से जूझ रहे योद्धाओं- डाक्टर, नर्स, पेरामेडिकल स्टाफ आदि के पास जरूरी उपकरण- पीपीई किट आदि उपलब्ध नहीं हैं।
इस महामारी को पराजित करने को हम सब अपने स्तर से जीजान से जुटे हैं, पर उत्तर प्रदेश सरकार इस लड़ाई को साझा लड़ाई बनाने को तैयार नहीं है। इस नाजुक दौर में भी सांप्रदायिक नफरत की मुहिम चलाई जारही है। लोकतान्त्रिक तौर तरीकों पर कुठाराघात करते हुये आलोचना और असहमति को तानाशाही तरीकों से कुचलने की कोशिश की जारही है। सामाजिक एकता, जनता का सहयोग और विश्वास हासिल करने की जगह उत्तर प्रदेश सरकार केवल जनता को भयभीत कर, दंडित कर और धमकियाँ देकर इस लड़ाई को लड़ना चाहती है। शासन- प्रशासन के जरिये भाजपा और संघ परिवार की गतिविधियों को जारी रखते हुये विपक्ष की गतिविधियों को पंगु बनाए रखना चाहती है।
अतएव वामदल मांग करते हैं कि जनता की आजीविका और जीवनयापन के उपादानों की भरपाई प्राथमिकता के आधार पर की जाये-
सभी को बीमा संरक्षण की व्यवस्था की जाये।
सभी को कम से कम 35 किलो राशन और अन्य जरूरी चीजें निशुल्क तत्काल उपलब्ध कराया जाये। जिनके पास राशंकार्ड नहीं हैं उन्हें भी राशन दिया जाये। ऐसे गरीबों की कुछ क्षेत्रों में सूचियाँ बनाई गयी हैं किन्तु उन्हें राशन अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया। तुरंत कराया जाये।
सभी गरीबों, पंजीक्रत, अपंजीक्रत दिहाड़ी मजदूरों, खेत मजदूरों, मनरेगा मजदूरों आदि के खाते में कम से कम 5,000 रुपये तत्काल ट्रांसफर किए जायें। मनरेगा का भुगतान कराया जाये और काम को चालू कराया जाये।
संगठित- असंगठित सभी क्षेत्र के मजदूरों की नौकरियों और वेतन की सुरक्षा कीजिये।
गेहूं की सरकारी खरीद देर से शुरू किए जाने के कारण बहुत से किसानों को समर्थन मूल्य से कम कीमतें मिली हैं। अभी भी सरकारी क्रय केन्द्र समुचित रूप से काम नहीं कर रहे हैं। लाकडाउन में अवाम की क्रय क्षमता के घटने के कारण किसानों को फल- सब्जियाँ सस्ती बेचनी पड़ रही हैं। किसानों के सभी उत्पादों को समुचित मूल्यों पर खरीदे जाने की व्यवस्था करें।
प्राक्रतिक और कोरोना की आपदाओं को देखते हुये किसान सम्मान निधि रु॰ 12 हजार वार्षिक की जाये, किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट बड़ाई जाये, ब्याज दर 1 प्रतिशत की जाये  और किसानों के सभी प्रकार के कर्जों की वसूली 1 साल के लिये स्थगित की जाये।
छोटे व्यापारियों, लघु उद्यमियों और फुटकर व्यापार करने वालों का जीवन बचाने को राहत की घोषणा कीजिये।
दूसरे प्रदेशों व जनपदों में फंसे उत्तर प्रदेश के मजदूरों और उत्तर प्रदेश में फंसे अन्य प्रदेशों के मजदूरों को सरकारी खर्चे पर उनके घरों को जल्द से जल्द पहुंचाया जाये। वहां उन्हें कोरोंटाइन में रखा जा सकता है।
वरिष्ठ नागरिकों की देखरेख के लिये विशेष रक्षा दल  गठित कीजिये।
बिजली , फोन, गृह कर और जल कर के बिल फिलहाल स्थगित रखे जायें।
सभी राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों के साथ परामर्श हेतु राज्य स्तरीय बैठक बुलाई जाये।
जिलों के स्तर पर राजनैतिक दलों के नुमाइंदों के साथ प्रशासन के अधिकारी समन्वय बनायेँ।
सरकार, प्रशासन, भाजपा और मीडिया द्वारा कोरोना को मुस्लिमों से जोड़ कर चलाई जारही मुहिम फौरन बन्द की जाये। मुहिम चलाने वालों के विरूध्द कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाये। या फिर किसको कहाँ से संक्रमण लगा, इसकी  व्यापक जानकारी सार्वजनिक की जाये।
डा॰ गिरीश, सचिव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश।  
हीरालाल यादव, सचिव, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी), उत्तर प्रदेश।
सुधाकर यादव, सचिव, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी-माले- लिबरेशन, उत्तर प्रदेश।  
अभिनव कुशवाहा, महासचिव, फारबर्ड ब्लाक, उत्तर प्रदेश ।

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