भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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बुधवार, 31 मार्च 2010

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के ब्लॉग की प्रिंट मीडिया में चर्चा शुरू

हमें भाई पाबला ने जमशेदपुर से सुचना दी है की हमारे ब्लॉग की चर्चा प्रिंट मीडिया में शुरू हो गयी है। उनकी क्लिप्पिंग को हमने ऊपर चस्पा की है। हम पाबला भाई के आभारी है। http://blogonprint.blogspot....
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बुधवार, 24 मार्च 2010

तू जिंदा है तो ज़िन्दगी की जीत में यकीन कर

तू जिंदा है तो ज़िन्दगी की जीत में यकीन करअगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर। तू जिंदा है ....ये ग़म के और चार दिन, सितम के और चार दिन,ये दिन भी जायेंगे गुज़र, गुज़र गए हज़ार दिन।कभी तो होगी इस चमन पे भी बहार की नज़र,अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर। तू जिंदा है...हमारे कारवां को मंजिलों का इंतज़ार है,ये आँधियों, ये बिजलियों की पीठ पर सवार है।तू आ कदम मिला के चल, चलेंगे एक साथ हम,अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर....
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NFIW ON PROPOSED FOOD SECURITY BILL

NFIW ON PROPOSED FOOD SECURITY BILLThe National Federation of Indian Women (NFIW) oppose the proposed Food Security. The Bill guarantees just 25 kg of wheat or rice for Rs 3/- per kg per month, that too for a limited number of BPL families and increases the prices of the food grains for the APL Families.At present the BPL families in most of the states get 35kg of food grains either for Rs. 1 or for Rs. 2 pre kg.. In this background...
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मंगलवार, 23 मार्च 2010

वीर भगत सिंह आज अगर, उस देश की तुम दुर्दशा देखते

शहीद दिवस के अवसर पर विशेषजिस पर अपना सर्वस्व लुटाया, जिसके खातिर प्राण दिए थे।वीर भगत सिंह आज अगर, उस देश की तुम दुर्दशा देखते॥आँख सजल तुम्हारी होती, प्राणों में कटु विष घुल जाता।पीड़ित जनता की दशा देखकर, ह्रदय विकल व्यथित हो जाता ॥जहाँ देश के कर्णधार ही, लाशों पर रोटियाँ सेकते।वीर भगत सिंह आज अगर........तुम जैसे वीर सपूतों ने, निज...
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मंगलवार, 16 मार्च 2010

लो क सं घ र्ष !: उक्रेन में राष्ट्रपति चुनावः अमरीकी साम्राज्यवाद के लिए एक झटका

1990-91 में विश्व में एकध्रुवीय हो जाने और अमरीका का इसका अगुआ बन जाने के बाद से ही उसने विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। लेकिन यूरोप और खासकर पूर्वी यूरोप पर उसका विशेष ध्यान है। इस अभियान में उसने सर्वप्रथम युगोस्वालिया को सभी अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और मान्यताओं की अवहेलना करते हुए कई भागों में विभक्त कर दिया। इसके साथ ही उसका दूसरा निशाना उन राष्ट्रों पर था, जो पहले समाजवादी खेमों के सदस्य थे। इस...
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रविवार, 14 मार्च 2010

भगत सिंह की याद में उनकी शहादत के 75 वर्ष पूरे होने पर

भगत सिंह की याद मेंउनकी शहादत के 75 वर्ष पूरे होने पर ब्रिटिश सरकार ने 23 मार्च 1931 को भगत सिंह को फाँसी दी तो वे केवल तेईस साल के थे। लेकिन आज तक वे हिन्दुस्‍तान के नौजवानों के आदर्श बने हुए हैं। इस छोटी सी उम्र में उन्होंने जितना काम किया और जितनी बहादुरी दिखायी, उसे केवल याद कर लेना काफी नहीं है। हम उन्हें श्रध्दांजलि देते हैं। 1926 में भगत सिंह ने नौजवान भारत सभा का गठन किया। नौजवानों का यह संगठन ब्रिटिश साम्राज्यवाद...
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