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रविवार, 4 अप्रैल 2010

अंतर्राष्ट्रीय कम्युनिस्ट एवं वर्कर्स पार्टियों के सम्मेलन के कार्यकारी दल की बैठक

पुर्तगाल की कम्युनिस्ट पार्टी और दक्षिण अफ्रीका की कम्युनिस्ट पार्टी के निमंत्रण पर अंतर्राष्ट्रीय कम्युनिस्ट एवं वर्कर्स पार्टियों के सम्मेलन के कार्यकारी दल की बैठक लिस्बन (पुर्तगाल) में 13 और 14 मार्च को हुई।पहले ही तरह ही यह बैठक उन सभी पार्टियों के लिए खुली थी जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लिया था। बैठक में वर्किंग ग्रुप के सभी सदस्यों सहित 13 पार्टियों - दक्षिण अफ्रीकी कम्युनिस्ट पार्टी, बेल्जियम की वर्कर्स पार्टी, ब्राजील की कम्युनिस्ट पार्टी, बोहमिया और मोराविया की कम्युनिस्ट पार्टी, साइप्रस की कम्युनिस्ट पार्टी, क्यूबा की कम्युनिस्ट पार्टी, स्पेन की कम्युनिस्ट पार्टी, ग्रीस की कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भाकपा (मा), लेबनान की कम्युनिस्ट पार्टी, पुर्तगाल की कम्युनिस्ट पार्टी तथा रूसी संघ की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।बैठक का उद्देश्य था कम्युनिस्ट एवं वर्कर्स पार्टियों के 12वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारी करना जो दक्षिण अफ्रीका में होगा और दक्षिण अफ्रीका की कम्युनिस्ट पार्टी उसकी मेजबानी करेगी। बैठक में फैसला किया गया कि अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन जोहान्सबर्ग में इस साल 3, 4 और 5 दिसम्बर को होगा। सम्मेलन का विषय होगा, ”पूंजीवाद का गहरा होता संकट, सार्वभौमिकता की रक्षा, सामाजिक गठबंधनों को गहरा करने तथा शांति, प्रगति एवं समाजवाद के लिए संघर्ष में साम्राज्यवाद विरोधी मोर्चा को मजबूत बनाने में कम्युनिस्टों का कर्तव्य“।बैठक में ताजा अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं, पूंजीवाद के गहराते संकट और पूंजीवाद की बौखलाहट तथा मजदूरों एवं लोगों द्वारा उसका डटकर मुकाबला करने के बारे में सार्थक विचार-विमर्श हुआ। बैठक में समाजवादी क्यूबा के साथ एकजुटता प्रकट की गयी तथा इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया गया।बैठक में भाग लेने वाली पार्टियों ने भी साइप्रस की जनता के संघर्ष के साथ एकजुटता प्रकट की जो तुर्की के कब्जे के खिलाफ तथा दोनों देशों के एकीकरण के लिए संघर्ष कर रही है।बैठक में भाग लेने वालों ने नवम्बर 2009 में दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में पारित प्रस्ताव के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी। इस संदर्भ में नाजी-फासिस्टवाद पर विजय की 65वीं वर्षगांठ मनाने का फैसला किया गया तथा इस बारे में एक संयुक्त बयान जारी किया गया जिसमें 9 मई 2010 को विभिन्न देशों में प्रदर्शन आयोजित करने का आह्वान किया गया। ”शांति के लिए नोटो के खिलाफ“ शीर्षक से एक घोषणा जारी की गयी जिसमें विश्व भर में मजदूरों एवं सामाजिक संगठनों का आह्वान किया गया कि वे शांति के लिए तथा युद्ध तथा नाटो के खिलाफ संघर्ष में व्यापक भागीदारी करें।सम्मेलन में भाकपा की ओर से उसके अंतर्राष्ट्रीय विभाग के सचिव पल्लब सेनगुप्ता ने भाग लिया।

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