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गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

मोदी का ढोंग बेनकाब: सार्वजनिक जीवन में बने रहने का खोया नैतिक अधिकार. चुनाव लड़ने पर रोक लगाये आयोग.

लखनऊ- १० अप्रेल २०१४. अपने नामांकन पत्र में यशोदा बेन को पत्नी स्वीकार करने के बाद मोदी, उनके आका संघ परिवार एवं भाजपा का ढोंग पूरी तरह बेनकाब हो गया है. शुचिता, पवित्रता एवं भारतीय संस्कृति के अलमबरदार होने के दाबे करने वाले भाजपाई तो अब मुहं दिखाने के काबिल नहीं रहे. यशोदा बेन के जीवन को बरबाद करने वाले और इतनी बड़ी घटना को अब तक छिपा कर रखने वाले श्री मोदी को तो अब सार्वजनिक जीवन में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. भाकपा मोदी से सभी पदों से स्तीफा देने और उनके आका आर.एस.एस. से देश और देश की महिलाओं से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगने की मांग करती है. यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डॉ. गिरीश ने कहाकि देश के सर्वोच्च पद पर आँख गड़ाए बैठे श्री मोदी दो दिन पहले तक अपने आपको अकेला बताते रहे और दूसरों पर आपत्तिजनक और बेहद भद्दी टिप्पड़ियां करते रहे. लेकिन कल निर्वाचन आयोग के भय से उन्हें अपने नामांकन पत्र में अपनी पत्नी का नाम भरना पड़ा और उनके जीवन का बेहद कलुषित पन्ना उघड़ कर सामने आगया. इसके बाद तो उन्हें सार्वजनिक जीवन में रहने का कोई अधिकार नहीं है. इससे भी बढ़ी बात यह है कि श्री मोदी ने अब तक लड़े सभी चुनावों में इस तथ्य को छिपाया और कानून का उल्लंघन किया. निर्वाचन आयोग को उनका गुजरात विधान सभा का चुनाव तत्काल रद्द करना चाहिये तथा उनके कल भरे नामांकन को निरस्त कर उनके छह वर्ष तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा देनी चाहिये. डॉ. गिरीश.

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