भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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गुरुवार, 29 दिसंबर 2016

CPI will expose Demonitization

लखनऊ- कुटिल राजनैतिक उद्देश्यों से, जल्दबाजी में और बिना पूरी तैयारी के तथा अपनों को पहले ही लीक कर दिये गये नोटबंदी को पचास दिन पूरे हो जाने के बाद भी वह जनता के लिये भारी संकट बना हुआ है और मोदी सरकार संकट के समाप्त होने और जनता के नोट्बंदी के कथित तौर पर पक्ष में होने के लगातार दाबे कर रही है. मोदी सरकार के इस ढकोसले को उजागर करने और आम जनता को नोटबंदी की पीडादायक मार से बचाने के लिये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी पूरे देश में जन अभियान चलायेगी. भाकपा उत्तर प्रदेश के सचिव और पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डा. गिरीश ने यहाँ जारी एक बयान में बताया कि हैदराबाद में गत दिन संपन्न भाकपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में लिये गये निर्णय के अनुसार यह अभियान 3 जनवरी से 10 जनवरी 2017 तक चलाया जायेगा. उत्तर प्रदेश में इस पूरे सप्ताह पदयात्रायें, सभायें और नुक्कड सभायें आयोजित की जायेंगी और 10 जनवरी को जिला व तहसील केंद्रों पर प्रदर्शन किये जायेंगे. काले धन को समाप्त करने, नकली नोटों को प्रचलन से बाहर करने, भ्रष्टाचार को रोके जाने तथा आतंकवाद और माओवाद की कमर तोडने के नाम पर मोदी सरकार के इस बचकाने कदम ने अभूतपूर्व आर्थिक संकट खडा कर दिया है जिसके परिणामस्वरुप आमजनों का जीना दूभर हो गया है. रु. 500 और 1,000 के नोटों को समस्या की जड बता कर बंद किया गया मगर उससे भी बडे रु. 2,000 के नोट ने तो अफरा- तफरी ही पैदा कर दी है. रोजमर्रा के जीवन में कठिनाइयां पैदा करने के अलावा तमाम आर्थिक गतिविधियां बाधित होने से, उद्योगबंदी, व्यापारबंदी, बेरोजगारी और पलायन जैसी समस्याये पैदा होगयी हैं. कृषि और कुटीर उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुये हैं, इन सबका अर्थव्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव पडेगा. आजादी के बाद देश ने इतने बडे संकट का सामना नहीं किया. यह आम चर्चा और आरोप हैं कि मोदी- शाह की जोट ने भाजपा और उसके समर्थक उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने को यह विनाशकारी कदम उठाया. भाजपा शासित राज्यों और निजी क्षेत्र की बैंकों को अधिक मात्रा में नई करेंसी आबंटित की गयी. छापों में बडी तादाद में मिल रहे 2,000 के नोटों के जखीरे इस बात के स्पष्ट प्रमाण हैं. मोदी सरकार द्वारा बदहवाशी में उठाये गये लगभग पांच दर्जन कदमों के बावजूद आमजनता को वह सब झेलना पडा है जो आवश्यक नहीं था, लगभग डेढ सौ लोग मौत के मुहं में समा गये तथा करोडों बीमारियों से जूझ रहे हैं. अब जनता के आक्रोश को शांत करने को मोदी सरकार पांच राज्यों के चुनावों से पहले कई लोक लुभावन घोषणायें करने की योजना बना रही है. भाकपा के इस अभियान में इसका पर्दाफाश किया जायेगा और पीडित जनता को बताया जायेगा कि जिस उद्देश्य से प्रधानमंत्री ने विमुद्रीकरण योजना की घोषणा की उससे न तो भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा, न जाली नोट चलन से बाहर हुये, न काले धन पर प्रभाव पडा और न आतंकवाद पर रोक लगी. बल्कि इससे नई समस्याये खडी होगयी हैं और देश का व्यापारी किसान मजदूर नौजवान सभी परेशान हैं. नकदी संकट से जूझ रही सरकार अब कैश लेस लेन देन को थोप रही है और चाइना सहित अन्य देशों की कंपनियों को लाभ पहुंचा रही है. भाकपा जनता को इस सबसे उबारने को दबाव बनायेगी. डा. गिरीश

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