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गुरुवार, 1 नवंबर 2018
at 5:20 pm | 0 comments |
CPI on Hashimpura
हाशिमपुरा पर न्यायपालिका का फैसला संवैधानिक मूल्यों
के प्रति उम्मीद जगाने वाला है
भाकपा ने फैसले का किया स्वागत
लखनऊ- 1 नवंबर 2018, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य
सचिव मंडल ने 31 वर्ष पुराने मेरठ के हाशिमपुरा जनसंहार के दोषी 16 पीएसी कर्मियों को आजीवन
कारावास की सजा के फैसले का स्वागत किया है। ऐसे समय में जब उत्तर प्रदेश और देश में
कई संगीन मामलों के पीड़ित न्याय की आस लगाये बैठे हैं, इस फैसले ने उनमें न्याय के लिये नई उम्मीद
जगाई है। भाकपा ने पीड़ितों की हानि की विकरालता को देखते हुये उन्हें पर्याप्त मुआबजे
की मांग भी की है।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰
गिरीश ने कहाकि अभी मोब लिंचिंग, सांप्रदायिक दंगों और नरसंहार, बम ब्लास्ट, फर्जी मुठभेड़ें और जेनयू के छात्र नजीब
के लापता होने के कई मामले जांच और न्यायिक प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। देर से ही मगर
दुरुस्त आये इस फैसले ने जहां पीड़ित वर्ग में न्याय की उम्मीद जागी है वहीं आस्था, धर्म, जातीय और सांप्रदायिक विद्वेष से लथपथ ताकतों
को म्यान में रहने का संदेश दिया है। यह प्रशासनिक मशीनरी और उन सुरक्षा बलों के लिये
भी एक सबक है जो घ्रणा और हिंसा की राजनीति करने वालों के हाथों की कठपुतली बन कर भक्षक
बन जाते हैं।
यह फैसला इसलिये भी महत्वपूर्ण है कि अल्पसंख्यकवाद
और तुष्टीकरण का हौवा खड़ा करने वाली भाजपा और आरएसएस जैसी ताकतों को भी यह कठघरे में
खड़ा करता है। ये ताक़तें अल्पसंख्यकों की रक्षा हेतु आवाज उठाने वाली ताकतों पर अल्पसंख्यकवाद
और तुष्टीकरण के मिथ्या आरोप मढ़ती रहती हैं और अपनी हिंसा, विद्वेष और सांप्रदायिक राजनीति को जायज ठहराने की कोशिशों में लिप्त रहती
हैं। इतना ही नहीं ये ताक़तें प्रशासनिक मशीनरी और सुरक्षाबलों में अपनी घुसपैठ और उनके
सांप्रदायीकरण का निरंतर प्रयास करती रहती हैं, खासकर तब जब वे
सत्ता में होती हैं।
अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि अल्पसंख्यक समुदाय
को निशाना बना कर हत्याएं की गई हैं। यह हिरासत में मौत का मामला है। इसमें मानवाधिकार
का हनन किया गया है और पीड़ितों को न्याय दिलाने में तीन दशक लग गए। इतने समय बाद न्याय
मिलना न्यायपालिका के उद्देश्य को पूरा नहीं करता है। इस मामले में निर्दोष और निहत्थे
लोगों की जानबूझ कर हत्या की गई है। यह किसी भी सुरक्षाबल और राज्य व्यवस्था के लिये
शर्मनाक है।
निश्चय ही हमारी न्यायपालिका का यह फैसला हमारे संविधान
में विहित धर्मनिरपेक्षता, लोकतन्त्र और न्यायिक समानता के मूल्यों
को परिपुष्ट करता है और दीर्घकालिक प्रभाव डालने वाला है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
इस फैसले का तहे दिल से स्वागत करती है।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
गुरुवार, 18 अक्टूबर 2018
at 5:50 pm | 0 comments |
श्री नारायण दत्त तिवारी के निधन पर भाकपा ने शोक जताया
लखनऊ- 18 अक्तूबर 2018, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने
स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केन्द्रीय मंत्री, पूर्व राज्यपाल, धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को समर्पित, उदार, सहज तथा लोकप्रिय नेता श्री नारायण दत्त तिवारी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त
किया है। पार्टी ने शोक संतप्त परिवार और उनके सगे- संबंधियों के प्रति सहानुभूति प्रकट
करते हुये उन्हें इस पीढ़ा को सहन कर पाने में समर्थ होने की कामना की है।
यहां जारी एक प्रैस बयान
में पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि श्री तिवारी आजीवन सांप्रदायिकता, जातिवाद और विभाजन की राजनीति का विरोध करते रहे।
सत्ता पक्ष में और सत्तासीन रहते हुये भी उन्होने सभी को सहज सम्मान दिया और विपक्ष
की बात को भी पूरा महत्व दिया। मौजूदा व्यवस्था में विकास की तमाम सीमाओं के बावजूद
उन्होने उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के विकास को हर संभव प्रयत्न किया। आम जनता के
लिए भी वे सहजता से उपलब्ध्द रहे। उनका जीवन आज के दंभी, मौकापरस्त और फूटपरस्त नेताओं के लिए एक गहरे सबक
की तरह है। उनके निधन से सादगी, मिलनसारिता और सबके प्रति मैत्री भाव के एक युग की सामाप्ति होगयी है, जिसको पुनर्जीवित करने के प्रयास किये जाने चाहिये।
उत्तर प्रदेश भाकपा उन्हें श्रध्दा सुमन अर्पित करती है।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
गुरुवार, 11 अक्टूबर 2018
at 1:21 pm | 0 comments |
Constitute JPC on Rafel Deal: CPI. CPI will organise protest on ground label.
राफेल डील की JPC से जांच की मांग को लेकर भाकपा का राष्ट्रीय अभियान 24 अक्तूबर को
लखनऊ- 11 अक्तूबर 2018, भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी राफेल डील घोटाले के खुलासे और इसके लिये संयुक्त संसदीय कमेटी ( JPC )
के गठन की मांग को लेकर आगामी 24 अक्तूबर को जिलों जिलों में आन्दोलन करेगी। आन्दोलन
के तहत प्रदर्शन,
धरने,
आम सभाएं और गोष्ठियां आयोजित की जायेंगी।
उपर्युक्त जानकारी यहां भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल के सचिव डा॰ गिरीश
ने यहां जारी एक प्रेस बयान में दी। उन्होने यह भी बताया कि 24 अक्तूबर को ही वामपंथी
दलों द्वारा नई दिल्ली के मावलंकर हाल के कान्स्टीट्यूशन क्लब में राफेल डील की संयुक्त
संसदीय समिति द्वारा जांच कराये जाने की मांग को लेकर संयुक्त कन्वेन्शन का आयोजन किया
जारहा है।
डा॰ गिरीश ने कहाकि राफेल डील का मामला जो पहले
ही काफी गंभीर मामला बन चुका था,
अब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा केन्द्र सरकार से डील की सारी प्रक्रिया बन्द लिफाफे में
मांग लेने से और भी गंभीर बन गया है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन के अचानक फ्रान्स
जाने से इस पर शंकाओं और रहस्य के बादल और भी गहरा गए हैं। विपक्ष के विरूध्द निरंतर
दहाड़ने वाले प्रधानमंत्री भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर सवाल पर निरंतर चुप्पी
साधे हुये हैं। उनकी यह चुप्पी देश में बेचैनी पैदा कर रही है।
कारण स्पष्ट है कि इस बात के पहले से ही काफी
प्रमाण हैं कि इस घोटाले में भारत सरकार,
प्रधानमंत्री तथा प्रधानमंत्री कार्यालय पूरी तरह से संलिप्त हैं।
भारत सरकार लगातार कह रही है कि यह डील गोपनीय
समझौते के तहत आता है। लेकिन अब फ्रान्स के राष्ट्रपति कह रहे हैं कि कीमतों की खुली
घोषणा की जासकती है और इस पर उन्हें कोई एतराज नहीं है। फ्रेंच कंपनी के अनुसार मौजूदा
डील की कीमतें पहले से तीन गुना अधिक हैं।
इस डील का सबसे अधिक आपत्तिजनक पहलू यह है कि
भारत में इसके असेंबलिंग का काम विमान निर्माण में दक्षता प्राप्त भारत के सार्वजनिक
क्षेत्र के उपक्रम ‘हिंदुस्तान
ऐरोनौटिक्स लिमिटेड’
( HAL )
को न देकर श्री अनिल अंबानी की नयी नवेली कंपनी को दे दिया गया। फ्रान्स के पूर्व राष्ट्रपति
हौलांडे ने खुलासा किया है कि अनिल अंबानी की कंपनी के नाम का प्रस्ताव किसी अन्य ने
नहीं खुद भारत सरकार ने किया था।
भारत सरकार इसका खंडन करती रही है। लेकिन क्या
सरकार बतायेगी कि क्यों डील पर हस्ताक्षर के वक्त प्रधानमंत्री मोदी एचएएल के प्रतिनिधियों
के बजाय अनिल अंबानी को साथ लेगये। फ्रान्स के अधिकारियों के अनुसार भारत सरकार ने
अनिल अंबानी को रुपये 30 हजार करोड़ का सीधा लाभ पहुंचाया है। यह क्रौनी कैपिटलिज्म
को बढ़ाने वाला नहीं है क्या?
क्या इससे एचएएल को बन्दी और बेरोजगारी के गर्त में नहीं धकेल दिया गया है? सवाल यह भी उठता
है कि इतने महत्वपूर्ण और संवेदनशील समझौते के वक्त प्रधानमंत्री जी रक्षामंत्री और
विदेशमंत्री को साथ क्यों नहीं लेगये?
भाकपा राज्य सचिव ने कहाकि देश की सुरक्षा और
भारी भ्रष्टाचार से जुड़े इस सवाल की अनदेखी नहीं की जासकती। अतएव भाकपा ने 24 अक्तूबर
को देशव्यापी आन्दोलन का निश्चय किया है। उत्तर प्रदेश में हर स्तर पर अन्य वामदलों
का सहयोग प्राप्त करने का प्रयास भी किया जायेगा। भाकपा ने अपनी समस्त जिला इकाइयों
का आह्वान किया है कि वे इस अभियान से अधिकाधिक जनता को जोड़ें।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा , उत्तर
प्रदेश
बुधवार, 10 अक्टूबर 2018
at 6:49 pm | 0 comments |
CPI, U.P. Condemned Rail exedent in Raibareli
भाकपा ने उत्तर
प्रदेश में हुये रेल हादसों पर गहरी चिंता जताई
मृतक परिवारों और
घायलों को पर्याप्त आर्थिक मदद की मांग की
लखनऊ- 10 अक्टूबर 2018,
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने आज उत्तर प्रदेश के रायबरेली में
हुये रेल हादसे पर गहरी चिन्ता और पीड़ा जतायी है. अभी अभी झांसी के निकट मालगाड़ी
के इंजन के पटरी से उतरने की खबर ने और भी चिंता पैदा करती है.
यहां जारी एक प्रेस बयान
में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि आज फिर एक बढ़ा रेल हादसा होगया जिसमें
कई लोगों की जानें चलीं गयीं और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं. दुर्घटना के कई
घंटे बाद भी घटनास्थल पर अफरा तफरी मची है, यहाँ तक कि दुर्घटना में अनाथ हुये
अबोध बच्चे तक वहीं भटक रहे हैं. यह केन्द्र और राज्य सरकार की संवेदनहीनता को
उजागर कर देता है.
उन्होंने कहाकि श्री मोदीजी
के शपथ ग्रहण के दिन से शुरू हुआ भीषण रेल दुर्घटनाओं का सिलसिला आज उनके शासन के
साढ़े चार साल बाद भी अबाध तरीके से जारी है. इससे रेल यात्रियों में भारी असुरक्षा
व्याप्त है. जो सक्षम हैं और जहां उपलब्धता है लोग ट्रेन के बजाय हवाई जहाज से
यात्रा कर रहे हैं. जो मजबूर हैं वे यमराज की पर्याय बनी रेल से यात्रा करने को
मजबूर हैं.
सुरक्षा के नाम पर किये
जारहे उपायों के नाम पर हर रोज तमाम ट्रेनें घंटों लेट की जारहीं हैं और यात्री
हलकान होरहे हैं. झांसी के पास मालगाड़ी के रेल इंजन के पटरी से उतरने की एक खबर भी
अभी अभी आयी है. इससे समस्या की जटिलता और स्थिति की भयावहता को आसानी से समझा
जासकता है.
भाकपा ने मांग की सरकार रेल
हादसे रोकने के लिये पर्याप्त कारगर कदम उठाये, प्रति मृतक के परिवार को रु. बीस
लाख मुआबजा दे, घायलों का इलाज सक्षम सरकारी अस्पतालों में कराया जाए और गंभीर रूप
से घायलों को दो व कम घायलों को एक लाख रु. का मुआबजा दिया जाए. जो बच्चे अनाथ हुए
हैं उनके लालन पालन और शिक्षा की जिम्मेदारी केन्द्र सरकार बहन करे.
डा. गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा , उत्तर प्रदेश
सोमवार, 8 अक्टूबर 2018
at 6:05 pm | 0 comments |
CPI condemned Attack on U.P.and Bihar people in Gujaraat
भाकपा ने गुजरात में उत्तरा प्रदेश और बिहार के लोगों पर हमलों की कड़े
शब्दों में निन्दा की
मोदी- योगी से हमलों की नैतिक जिम्मेदारी लेने और उत्तर प्रदेशवासियों
से क्षमा मांगने की
की मांग
लखनऊ- 8 अक्तूबर 2018, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने
गुजरात में उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले लोगों
पर होरहे शारीरिक हमलों की कड़े शब्दों में निन्दा की है। पार्टी ने इन हमलों के लिए
मोदी और योगी से नैतिक जिम्मेदारी लेने की मांग की है।
यहां जारी एक प्रेस बयान में पार्टी के राज्य
सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि महाराष्ट्र के बाद अब गुजरात में भी बिहार और उत्तर प्रदेशवासियों
पर गंभीर शारीरिक हमले होरहे हैं। इन हमलों के विरूध्द गुजरात के मुख्यमंत्री को कड़ी
चेतावनी देने के बजाय योगी आदित्यनाथ उनसे वार्ता का नाटक कर रहे हैं और हर मामले की
तरह इन घटनाओं की जिम्मेदारी गुजरात के कथित विकास से ईर्ष्या रखने वालों पर डाल रहे
हैं। पल पल मन की बात करने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने तो इन खतरनाक घटनाओं पर मुह तक
नहीं खोला।
भाकपा ने मोदीजी से सवाल किया कि क्या आपका यही
गुजरात माडल है?
क्या भाजपा और संघ का यही राष्ट्रवाद है?
जिस उत्तर प्रदेश के लोगों ने मोदीजी को भारी बहुमत से वाराणसी से जिताया, भाजपा को उत्तर प्रदेश
से 71 लोकसभा सीटें दीं और उसे प्रदेश में पूर्ण बहुमत देकर भाजपा की सरकार बनायी उस
प्रदेश के निवासियों के साथ मोदी के अपने प्रदेश में ऐसा घिनौना वरताव असहनीय है। समय
आने पर उत्तर प्रदेशवासी इसका जरूर माकूल जबाव देंगे।
भाकपा राज्य सचिव ने गुजरात में रह रहे और अपने
परिश्रम से गुजरात को धनवान बनाने में अतुलनीय योगदान कर रहे हिंदीवासियों को कड़ी सुरक्षा
देने,
उनके इलाज की समुचित व्यवस्था करने तथा उन पर हमले करने वालों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही
करने की मांग की है। उन्होने कहाकि मोदीजी और योगीजी को इन घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी
लेते हुये उत्तर प्रदेशवासियों से माफी मांगनी चाहिये।
डा॰ गिरीश
शनिवार, 29 सितंबर 2018
at 2:59 pm | 0 comments |
CPI condemned encountar of Vivek in Lucknow: Demanded resignation of CM Yogii
विवेक तिवारी हत्याकांड की भाकपा ने की कड़े शब्दों में निन्दा
मुख्यमंत्री से की त्यागपत्र की मांग
लखनऊ- 29 सितंबर 2018, भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने गत रात राजधानी लखनऊ में एपल कंपनी के एरिया मैनेजर श्री
विवेक तिवारी की पुलिस द्वारा हत्या की कड़े शब्दों में निन्दा की है। भाकपा ने आरोप
लगाया कि अब तक प्रदेश में कमजोर तबकों के एंकाउंटर किए जारहे थे और योगी सरकार अपनी
पीठ थपथपा रही थी तथा पुलिसजनों को महिमामंडित कर रही थी। इससे बड़े मनोबल वाली पुलिस
ने अब राजधानी में यह जघन्य हत्याकांड कर डाला।
भाकपा राज्य सचिव
डा॰ गिरीश ने कहा कि लोकतन्त्र में ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी जनता द्वारा चुने शासकों
की बनती है। अतएव मुख्यमंत्री के ‘एक्टिविज्म’ मात्र से काम चलने
वाला नहीं। मुख्यमंत्री को इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिये और अपने पद से तत्काल
इस्तीफा दे देना चाहिये। उन्होने कहाकि श्री तिवारी के परिवार की मांग पर सीबीआई से
जांच कराया जाना जरूरी है,
पर योगी के सत्ता में रहते निरपेक्ष जांच असंभव है।
भाकपा राज्य सचिव
ने मांग की कि पीड़ित परिवार को रुपये 50 लाख का मुआबजा दिया जाये, म्रतक की पत्नी को
सरकारी नौकरी दी जाये तथा श्री तिवारी की सहकर्मी सना को केस समाप्त होने तक सुरक्षा
दी जाये। डा॰ गिरीश ने कहाकि अब वक्त आगया है कि योगीराज में हुये फर्जी एंकाउंटर्स
और मोब लिंचिंग की घटनाओं की जांच के लिये एक न्यायिक आयोग बैठाया जाये ताकि जिम्मेदारियाँ
निर्धारित की जासकें और दोषियों को जेल के सींखचों के पीछे भेजा जासके।
भाकपा राज्य सचिव
मंडल ने अपनी जिला कमेटियों का आह्वान किया कि वे लखनऊ, अलीगढ़ और प्रदेश
के अन्य हिस्सों में होरहे एंकाउंटर्स,
मोब लिंचिंग की घटनाओं और भाजपा तथा उसकी पुलिस की हिंसा के खिलाफ कल से ही विरोध जताएं
और राज्यपाल के नाम ज्ञापन जिलाधिकारियों को सौंपें।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
गुरुवार, 27 सितंबर 2018
at 5:27 pm | 0 comments |
CPI, U.P. supported Bandh of Traders
भाकपा ने व्यापारिक संगठनों के बन्द को समर्थन प्रदान किया
लखनऊ- 27 सितंबर 2018, भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और इसमें आई॰
टी॰ सी॰,
वालमार्ट जैसी कंपनियों का प्रवेश,
जी॰ एस॰ टी॰ की जटिलताओं,
पेट्रोल- डीजल की कीमतों में असहनीय व्रध्दी,
नोटबंदी से हुयी व्यापार की तवाही तथा आन लाइन ट्रेडिंग जैसी समस्याओं के खिलाफ कल
( 28 ) सितंबर को व्यापारिक संगठनों द्वारा आहूत उत्तर प्रदेश बन्द का समर्थन किया
है।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव
डा॰ गिरीश ने कहाकि भूमंडलीकरण के दौर में स्वदेशी उद्योग, लघु उद्योग व्यापार
और क्रषी की रक्षा करने के बजाय केन्द्र और राज्यों की सरकारें विदेशी कंपनियों और
कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने में जुटे हैं। परिणामस्वरूप देश की पूंजी का 71 प्रतिशत
भाग चंद पूंजी घरानों के हाथ में सिमट कर रह गया है और शेष जनता 29 प्रतिशत पूंजी पर
गुजारा कर रही है। कालेधन के रूप में तमाम पूंजी विदेशों को जारही है। रुपये की कीमतों
में अभूतपूर्व गिरावट का यह एक प्रमुख कारण है।
कारपोरेट और वित्तीय पूंजी लघु उद्यमी, व्यापारी और किसानों-
कामगारों को तवाह कर रही है। अंबानी सरीखे लोग प्रति घंटे 12: 50 करोड़
कमा रहे हैं वहीं आम आदमी की आमदनी घट कर बेहद नीचे पहुँच गयी है। इससे व्यापारी, किसान, लघु उद्यमी, दस्तकार और कामगार
सभी नाराज हैं और वे संघर्षरत हैं। कल का बन्द इसी कड़ी का हिस्सा है जिसे सफल बनाया
जाना चाहिये।
भाकपा राज्य सचिव मंडल ने अपनी तमाम कतारों का
आह्वान किया कि वे व्यापारिक संगठनों के इस बन्द को नैतिक और भौतिक समर्थन प्रदान करें।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा,
उत्तर प्रदेश।
मंगलवार, 25 सितंबर 2018
at 2:13 pm | 0 comments |
अलीगढ़ में हुये फर्जी एंकाउंटर की भाकपा ने निन्दा की। न्यायिक जांच की आवाज उठाई।
लखनऊ- 25 सितंबर 2018, भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने गत दिनों अलीगढ़ में पुलिस द्वारा की गयी दो मुस्लिम नौजवानों
की सुनियोजित हत्या की निन्दा की है। पार्टी ने इस घटना की जांच किसी कार्यकारी न्यायाधीश
से कराने की मांग की है।
यहां जारी एक प्रेस बयान में पार्टी के राज्य
सचिव डा॰ गिरीश ने आरोप लगाया कि अतरौली क्षेत्र में होरही ताबड़तोड़ हत्याओं से दबाव
में आई अलीगढ़ पुलिस ने फर्जी एंकाउंटर का प्लाट तैयार कर दो मुस्लिम नौजवानों की हत्या
कर दी। अब पुलिस की मदद से स्थानीय सांप्रदायिक तत्व घटना को कम्यूनली कैश करने में
जुटे हैं। हालात यह हैं कि नामनिहाद संस्थाएं पुलिस के आला अफसरों का अभिनंदन कर रहीं
हैं और बड़ी ही बेशर्मी से पुलिस अफ़सरान उनके हाथों मालायें पहन रहे हैं और अपने सेवा
संबंधी कोड का मज़ाक उड़ा रहे हैं।
डा॰ गिरीश ने कहाकि यदि इस हत्याकांड की न्यायिक
जांच करा दी जाये तो इस सारे षडयंत्र का पर्दाफाश होजायेगा और हत्यारे जेल के सींखचों
के भीतर होंगे। उन्होने म्रतक परिवारों को रुपये 20 लाख प्रति परिवार मुआबजा देने की
मांग की।
भाकपा राज्य सचिव मंडल ने अपनी जिला इकाई को
निर्देश दिया कि वह घटनास्थल पर पहुंच कर जांच पड़ताल करे, पीड़ित परिवारों से
मिले और इस अन्याय पर स्थानीय तौर पर प्रतिरोध दर्ज कराये। साथ ही व्यापक रिपोर्ट तैयार
कर राज्य कार्यालय को भी प्रेषित की जाये।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा,
उत्तर प्रदेश
मंगलवार, 11 सितंबर 2018
at 6:09 pm | 0 comments |
मूल्यव्रध्दी एवं जनता के अन्य सवालों पर सरकार को घेरेगी भाकपा: पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल की बैठक में कई निर्णय लिये गये
लखनऊ- 11 सितंबर 2018, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य काउंसिल की दो दिवसीय बैठक यहां संपन्न
हुयी। बैठक की अध्यक्षता राजेन्द्र यादव पूर्व विधायक ने की। बैठक में भाकपा के केन्द्रीय
सचिव कामरेड भालचंद कांगो ने अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय परिद्रश्य पर विस्तार से
जानकारी दी। राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने प्रदेश के बिगड़ते हालातों की समीक्षा करते हुये
क्रत कार्यों और भविष्य की गतिविधियों की रूपरेखा संबंधी रिपोर्ट रखी जिसे व्यापक चर्चा
के बाद पारित कर दिया गया।
राज्य काउंसिल बैठक में आगामी लोकसभा चुनाव की उत्तर
प्रदेश में पार्टी की रणनीति पर भी गहनता से विचार विमर्श हुआ। पार्टी ने प्रदेश में
भाजपा को हराने और अपना खाता खोलने की जरूरत को महसूस करते हुये चुनींदा सीटों पर चुनाव
लड़ने का निश्चय किया है। पार्टी इसके लिये तैयारियों में जुट गयी है।
पेट्रोल डीजल और रसोई गैस की कीमतों में भारी व्रद्धि, महंगाई और रुपये के अधः पतन को लेकर 10 सितंबर के वामदलों व अन्य के राष्ट्रव्यापी
अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन और महंगाई से लहूलुहान जनता के हितों को ध्यान में रखते हुये
राज्य काउंसिल ने केन्द्र सरकार से मांग की कि वह तत्काल पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें
पर्याप्त कम करे तथा रुपये के क्षरण को रोकने को तत्काल आवश्यक कदम उठाये।
पार्टी ने उत्तर प्रदेश सरकार से भी मांग की कि वो अन्य
राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश में भी पेट्रोल डीजल पर वैट कम करके उसकी कीमतें घटाये।
पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि कीमतें शीघ्र कम नहीं की गईं तो जनता की जेब से निकाले
जारहे जनता के धन की वापसी के लिये भाकपा आंदोलन तेज करेगी।
राज्य काउंसिल बैठक में केरल में बाढ़ की विभीषिका से
हुयी तबाही और अब वहाँ फैल रही महामारियों से निपटने तथा पुनर्निर्माण और पुनर्वास
में केरल की जनता की मदद करने को “केरल की जनता के साथ
एकजुटता सप्ताह” आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत 17
से 24 सितंबर के बीच समूचे प्रदेश में नुक्कड़ सभाएं एवं जन चौपाल लगा कर भाकपा कार्यकर्ता
केरल की जनता की सहायता के लिये जनता से फंड मांगेंगे। उत्तर प्रदेश से भाकपा और उसके
सहयोगी संगठन दो लाख के लगभग धनराशि पहले ही भेज चुके हैं।
पेट्रोल डीजल की कीमतों, महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, समूह हत्याएं, लोकतन्त्र और आजादी पर हमले उत्तर प्रदेश
के किसान कामगारों के सवालों पर केन्द्र और राज्य सरकार को घेरने के लिये भाकपा ने
मंडलीय रेलियाँ आयोजित करने का निर्णय भी लिया है। जिन लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा जाना
है वहाँ विधान सभा स्तर पर रेलियाँ क्षेत्रीय रेलियों के बाद की जायेंगी।
पार्टी बैठक में रेखांकित किया गया कि जनता के ज्वलंत
सवालों पर भाकपा जमीनी स्तर पर संघर्षरत और सक्रिय है और उसके जनाधार और संगठन का विस्तार
होरहा है।
भाकपा ने आज सुल्तानपुर में 2005 में शहीद हुये नौजवानों
को उनकी वरसी पर श्रध्दांजली देने सुल्तानपुर जारहे भाकपा राज्य सचिव का॰ हीरालाल यादव, पॉलिट ब्यूरो सदस्य का॰ सुभाषिणी अली और अन्य नेताओं की गिरफ्तारी की निन्दा
की है। भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने आरोप लगाया कि अपना जनाधार खिसकता देख योगी सरकार
बौखला गयी है और अब वह शांतिपूर्ण सभाओं तक को रोक रही है। कल भी सरकार ने जनपद सोनभद्र
में 108 वामपंथी कार्यकर्ताओं को और हरदोई में 3 भाकपा कार्यकर्ताओं को सड़कों पर उतरने
से पहले ही गिरफ्तार कर लिया था॰ भाकपा ने माकपा कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग
की है।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
सोमवार, 10 सितंबर 2018
at 7:54 pm | 0 comments |
Left protest against price rise.
महंगाई के खिलाफ वामपंथी दलों का उत्तर प्रदेश भर में
जबरदस्त प्रतिरोध प्रदर्शन
लखनऊ- 10 सितंबर 2018, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दामों में बेतहासा व्रध्दी, डालर
के मुक़ाबले रुपये की कीमत में असहनीय गिरावट और हाड़तोड़ महंगाई के खिलाफ वामपंथी दलों
ने हर जिले में जबरदस्त प्रतिरोध प्रदर्शन प्रदर्शन किया।
आज पूर्वान्ह से ही हर जगह वामपंथी दलों के जत्थे प्रतिरोध
प्रदर्शन हेतु सड़कों पर उतर गये। कई जगह प्रदर्शन किये गये, जाम लगाये गये और अनेक जगह केन्द्र और राज्य सरकार के पुतले फूंके गये। कई
जिलों में वामपंथी दलों के सैकड़ों कार्यकर्ता गिरफ्तार किये गये।
डा॰ गिरीश ने कहाकि अनेक जगह व्यापारिक प्रतिष्ठानों
ने स्वतः बन्दी रखी। ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी व्यापारी संगठन ने विपक्ष के इस आंदोलन
का कोई विरोध नहीं किया। किसानों, कामगारों, युवाओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों, अधिवक्ताओं आदि समाज के विभिन्न तबकों ने विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया।
राजधानी लखनऊ में वामपंथी दलों के सैकड़ों कार्यकर्ता
भाकपा के केसरबाग स्थित कार्यालय पर एकत्रित हुये और आक्रोशपूर्ण नारे लगाते हुये जीपीओ
स्थित गांधी प्रतिमा पर पहुंचे, जहां आमसभा की गई। प्रदर्शन का
नेत्रत्व भाकपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य एवं राज्य सचिव डा॰ गिरीश, सहसचिव
अरविंदराज स्वरूप, इम्तियाज़ अहमद पूर्व विधायक, का॰ आशा मिश्रा, सीपीएम की पूर्व सांसद और पोलिटब्यूरो
सदस्य सुभासिनी अली, सचिव मण्डल सदस्य प्रेमनाथ राय, मधु गर्ग, आर॰ एस॰ बाजपेयी, माले
के नेता रमेश सिंह सेंगर आदि ने किया।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने प्रतिरोध अभियान को कामयाब
बनाने को सभी वामपंथी कार्यकर्ताओं और अन्य सहयोगियों को बधाई दी है।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उतर प्रदेश
बुधवार, 29 अगस्त 2018
at 7:16 pm | 0 comments |
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की निन्दा और उनकी फौरन रिहाई की मांग की
लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मण्डल ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं
और बुध्दिजीवियों सुधा भारद्वाज, वरनन गोन्साल्वस, गौतम नवलखा, वरवारा राव एवं अरुण
फ़रेरा जो दलितों, आदिवासियों और समाज के अन्य कमजोर तबकों के लिये
संघर्ष करते रहे हैं के घरों पर देश भर में की गयी छापेमारी और उनकी गिरफ्तारी की कड़े
शब्दों में निन्दा की है।
सरकार ने उनके ऊपर शहरी नक्सलवादी होने का काल्पनिक
आरोप लगाया है। यह कितना आश्चर्यजनक है कि एक ओर सरकार अपनी पीठ थपथपाने के लिये नक्सलवाद
के खत्म होने के दाबे करती है वहीं दूसरी तरफ प्रतिरोध की आवाज को दबाने को हर घ्रणित
हथकंडा अपना रही है।
भीमा कोरेगांव में दलितों के खिलाफ हिंसक वारदातों के
बाद भाजपा की केन्द्र और महाराष्ट्र सरकार इन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के ऊपर फर्जी
आरोप लगाने और उनको माओवादियों से जोड़ने के लिये विभिन्न जांच एजेंसियों का स्तेमाल
करती रही हैं।
भाकपा की यह द्रढ़ राय है कि यह सब कार्यवाही सनातन संस्था
द्वारा ईद और गणेश चतुर्थी पर सीरियल ब्लास्ट करने की योजना और गौरी लंकेश, दाभोलकर, गोविंद पनसारे और दूसरे पोंगापंथ विरोधियों
की हत्या में इनकी संलिप्तता से ध्यान हटाने के उद्देश्य से कीगयी है।
यह दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों तथा समाज के अन्य कमजोर तबकों के ऊपर होने वाले अन्याय और अत्याचारों
के खिलाफ आवाज उठाने वालों को धमका कर उनकी आवाज बन्द करने की साजिश है। सर्वोच्च न्यायालय
ने भी इस पर गंभीर टिप्पणी की है कि असहमति की आवाज लोकतन्त्र के लिये सेफ्टी बाल्व
है।
इन कारगुजारियों से एक बार फिर वर्तमान सरकार का फासीवादी
चेहरा सामने आगया है। यह घटनाक्रम एक बार फिर भारतीयों के संवैधानिक अधिकारों और लोकतन्त्र
की रक्षा के लिये सभी धर्मनिरपेक्ष, लोकतान्त्रिक एवं
वामपंथी ताकतों की एकता और कार्यवाही की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
भाकपा सभी गिरफ्तार शख़्सियतों की तत्काल रिहाई और उन
पर लगाये गए सभी झूठे और मनगढ़ंत आरोपों की वापसी की मांग करती है।
डा॰ गिरीश
सोमवार, 27 अगस्त 2018
at 8:18 pm | 0 comments |
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश ने केरल आपदा राहत हेतु एक लाख रुपयों का चैक भाकपा महासचिव को सौंपा।
लखनऊ/ नई दिल्ली 27 अगस्त 2018- भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल के सचिव डा॰ गिरीश एवं अन्य साथियों ने केरल
की आपदा राहत हेतु रुपये एक लाख का चेक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव
कामरेड एस॰ सुधाकर रेड्डी एवं सचिव का॰ शमीम फ़ेजी को पार्टी के केन्द्रीय मुख्यालय, नई दिल्ली पहुँच कर सौंपा।
इस अवसर पर भाकपा की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य
का॰ गफ्फार अब्बास, का॰ जितेन्द्र शर्मा, का॰ शरीफ अहमद, बीकेएमयू के नेता विजेन्द्र निर्मल, प्रोफेसर सदासिव, मुक्ति संघर्ष के सह संपादक महेश
राठी, सगीर अहमद एवं मोहम्मद शाहिद आदि प्रमुख रूप से मौजूद
थे।
इस अवसर पर डा॰ गिरीश ने कहाकि भाकपा की उत्तर
प्रदेश राज्य इकाई केरल के पुनर्निर्माण में हर संभव योगदान करेगी। महासचिव एस॰ सुधाकर
रेड्डी ने कहाकि उत्तर प्रदेश की भाकपा ने इस मानवीय कार्य को जिस संजीदगी से लिया
है उसके लिए उसके नेता और कार्यकर्ता बधाई और प्रशंसा के पात्र हैं। उन्होने
उम्मीद जताई कि भाकपा उत्तर प्रदेश राहत राशि इकट्ठा करना जारी रखेगी और केन्द्रीय
मुख्यालय को भेजती रहेगी।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा उत्तर प्रदेश
रविवार, 26 अगस्त 2018
at 6:54 pm | 0 comments |
अस्थियों पर वोट की राजनीति कर रहे हैं संघ और भाजपा: डा॰ गिरीश
प्रक्रति के प्रकोप के चलते कई वर्षों से गुमनामी
के अंधेरे में खोये रहे पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी अंततः इस
दुनियां को अलविदा कह गये। उनकी मौत पर हर कोई दुखी था और दलीय तथा विचारधाराओं की
सीमायें लांघ कर लगभग सभी दलों ने उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन
कम्युनिस्ट पार्टियों ने भी जो वैचारिक रूप से संघ और भाजपा की सांप्रदायिक, विभाजनकारी, फासीवादी और जनविरोधी नीतियों की मुखर
आलोचक रही हैं।
इसका कारण यह था कि हम एक बहुदलीय लोकतन्त्र में
जीरहे हैं जिसमें राजनैतिक विरोध स्वाभाविक है, व्यक्तिग्त विरोध
का कोई स्थान नहीं। हालांकि राजनैतिक दलों की संकीर्णता और निहित स्वार्थों के
चलते समय समय पर व्यक्तिगत विरोध भी छलकता रहता है। दूसरे हमारी ऐतिहासिक परंपरा है
कि म्रत्यु के बाद मतभेद अथवा वैमनस्य खत्म होजाता है।
लेकिन भारतीय जनता पार्टी और संघ परिवार ने श्री
अटल बिहारी बाजपेयी जो कि कई वर्षों से संघ परिवार में पूरी तरह उपेक्षित थे और
यदि वे स्वस्थ होते तो श्री आडवाणी जी की तरह ही घनघोर उपेक्षा के शिकार होते, की मौत को 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले वोट बटोरने के एक नायाब मौके के
रूप में देखा और पूरा संघ परिवार उनकी मौत को भुनाने में जुट गया। अन्त्येष्टि से
लेकर अस्थि कलश विसर्जन तक सबकुछ सुनियोजित तरीके से किया गया और आगे भी हमें ऐसे कई
हथकंडे देखने को मिलेंगे।
2014 के लोकसभा चुनावों में वोट बटोरने के लिये
उछाले गये जुमले जब बुरी तरह बेनकाब होकर निष्प्रभावी होगये तो 2019 के चुनाव की
पूर्व वेला में श्री अटल बिहारी के दिवंगत होने की प्राक्रतिक घटना को संघ ने
भुनाने की ठान ली। दिवंगत अटल बिहारी भाजपा के लिये अब ‘वोट बिहारी’ बन कर रह गये हैं। उनकी अस्थियाँ आज ‘वोटस्थियाँ’ और अस्थि कलश आज ‘वोट
कलश’ बन कर रह गये हैं। यही वजह है कि श्री अटल के असली परिवारीजन
और विपक्षी पार्टियां भाजपा पर आज हड्डियों पर राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं।
अब अस्थियों पर राजनीति करने की भाजपा और संघ की
कोशिश कितनी सफल होगी यह तो भविष्य ही तय करेगा। पर ये वो आसुरी शक्तियां हैं जो
अस्थियों पर राजनीति करने के लिये सुविख्यात हैं। राजनैतिक स्वार्थों के लिये ये
अपनों की मौत को कई दिनों तक छिपाये रह सकते हैं। मौत की अधिक्रत घोषणा से पहले
श्रध्दांजलि अर्पित कर सकते हैं। वोटों की खातिर सूखी आंखों को पोंछ कर गम का
क्रत्रिम इजहार कर सकते हैं।
1989 में अयोध्या में कथित कार सेवकों जिन्होने
इनके उकसाबे पर संविधान, राष्ट्रीय एकता परिषद और सर्वोच्च
न्यायालय के निर्देशों की धज्जियां उड़ायीं थीं, की कथित हड्डियों
को गांव गांव गली गली घुमाकर इन्होने समाज विशेष की कोमल भावनाओं को सांप्रदायिक
ज्वार में बदला और फिर उनके नाम पर वोट बटोर कर उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में
सत्तायें हथियायीं। उसी सरकार की छतरी तले वे सारे कायदे कानूनों और आदेशों
निर्देशों को ठेंगा दिखा कर बाबरी ढांचे को ध्वस्त कर चुके हैं। इससे उपजे
सांप्रदायिक विभाजन पर ये आज तक वोटों की फसलें उगा रहे हैं।
अपने सुपरिचित हथकंडों को अपनाते हुये आज वे पुनः
श्री अटल बिहारी बाजपेयी की अस्थियों पर वोट की फसल उगाने की कोशिश में जुटे हैं। हिन्दू
धर्म और परंपराओं के रक्षक होने का दाबा करने वाले ये लालची धर्म और परंपराओं को भी
भूल गये। शास्त्रों के अनुसार अस्थियों का विसर्जन किसी मान्य तीर्थस्थल पर
निकटस्थ परिजनों द्वारा एकल रूप से किया जाना चाहिये ताकि दिवंगत आत्मा को
चिरस्थायी शान्ति प्राप्त होसके। लेकिन इन्होने उन्हे 4000 भागों में बांट दिया।
अब मुश्किल से 70- 75 ग्राम आस्थियाँ चार हजार कलशों में क्यों और कैसे विभाजित की
गईं यह तो भाजपा ही बता सकती है।
अटलजी उस संघ के कार्यकर्ता थे जिसके पास तिल को ताड़
बनाने की ताकत है। वह संघ जो अपने झूठे प्रचार और मैसमेरिज्म के जरिये करोड़ों लोगों
को भ्रमित कर गणेश प्रतिमाओं को दूध पिलाने को मंदिरों के बाहर कतारों में खड़ा कर सकता
है। उसी संघ की छतरी तले अटल जी का अधिकांश जीवन विपक्ष में ही बीता। उनकी वाकपटुता
को संघ ने खूब भुनाया। वे कई बार चुनाव हारे तो संघ ने उसे एक योग्य नेता का अपमान
प्रचारित किया। पहली बार वे जोड़तोड़ से प्रधानमंत्री बने और विश्वास हासिल नहीं कर पाये।
संघ ने प्रचारित किया कि यह एक योग्य व्यक्ति को सत्ता से दूर रखने की साजिश है। अंततः
वे फिर जोड़तोड़ से प्रधानमंत्री बने। संघ ने जनता को फर्जी ‘फील गुड’ का अहसास कराया और ‘इंडिया
इज शाइनिंग’ का जुमला उछाला। लेकिन 2004 में जनता ने उन्हें बाहर
का रास्ता दिखा दिया। उसके बाद वे गुमनामी में किसी और ने नहीं उसी संघ और भाजपा ने
धकेल दिये जिनके कि वे सदैव संकटमोचक बने।
‘जिन्दा हाथी लाख का मरा डेढ़ लाख का’ की तर्ज पर भाजपा आज उनकी सीमित लोकप्रियता को बढ़ा चड़ा कर पेश कर रही है।
वह आज उन्हें आजादी के बाद का सबसे महान नेता जताने का प्रयास कर रही है। संघ उस ऐतिहासिक
तथ्य को भी ढांपना चाहता है कि वह आजादी के आंदोलन से बाहर था और उसके द्वारा क्रत्रिम
तौर पर गड़े और खड़े किये गये क्रत्रिम नायक या तो अंग्रेजों से माफी मांग रहे थे या
फिर आजादी के लिये जूझने वालों के खिलाफ गवाहियाँ डेराहे थे। वीर सावरकर और अटल बिहारी
संघ द्वारा गड़े गये नायकों में सबसे आगे की कतार में खड़े हैं।
उनके पास आज आज सत्ता है, सत्ता के कारण भीड़ है, पर्याप्त संख्या में संघ का काडर
है, दौलत है और सबसे ऊपर हवाबाज़ मीडिया है। इस सबके बल पर वे
अटलजी का क्रत्रिम महिमा क्षेत्र तैयार कर रहे हैं। भूख, गरीबी, दमन, अत्याचार से दमित जनता का ध्यान बंटाने की कोशिश
कर रहे हैं। हर चुनाव क्षेत्र तक लाव लश्कर के साथ पहुँचने के लिये गंदी संदी नालेनुमा
नदियों तक में अस्थि विसर्जन का ढोंग रचा जारहा है। आयोजनों पर अनाप शनाप जनता की गाड़े
पसीने की कमाई को बहाया जारहा है। आपदाग्रस्त केरल को मात्र रु॰ 600 करोड़ देकर हाथ
झाड लिये गये मगर वोट कलश विसर्जन पर अथाह धन व्यय किया जारहा है। देश के कोने कोने
में बाड़ आयी हुयी है। आम जनता पर अनेक मुसीबतों का पहाड़ टूटा पड़ा है, पर मान्य मंत्रीगण कंधों पर कलश लिये घूम रहे हैं। वोट बटोरने की इस म्रग
मरीचिका में वे अपने निर्धारित दायित्वों से भाग रहे हैं।
अब यह तो वक्त ही बताएगा कि 2004 में खुद सिंहासन पर
आरूढ़ प्रधानमंत्री श्री बाजपेयी तत्कालीन एनडीए को बहुमत नहीं दिला पाये तो क्या आज
के एनडीए की डूबती नाव को पार लगा पायेंगे। पर संघ और भाजपा 2019 के लोकसभा चुनावों
की पूर्ववेला में हुयी श्री अटल की मौत को राजनैतिक रूप से भुनाने में कोई कसर नहीं
छोड़ना चाहते।
डा॰ गिरीश
सोमवार, 20 अगस्त 2018
at 7:19 pm | 0 comments |
Implement Prportinal representative system
समानुपातिक चुनाव प्रणाली और बुनियादी चुनाव
सुधार लागू कराने को वामपंथी लोकतान्त्रिक दल अभियान तेज करेंगे। वाम कन्वेन्शन संपन्न
लखनऊ- 20 अगस्त 2018,
समानुपातिक चुनाव प्रणाली लागू कराने एवं चुनाव प्रणाली में आवश्यक सुधार किये
जाने के सवाल को जनता के बीच लेजाने के महान संकल्प के साथ वामदलों का संयुक्त
सम्मेलन आज यहाँ व्यापक और गंभीर चर्चा के साथ संपन्न होगया।
सम्मेलन का आयोजन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी ) भाकपा- माले और फारबर्ड ब्लाक
की राज्य कमेटियों ने संयुक्त रूप से किया था। कई धर्मनिरपेक्ष और लोकतान्त्रिक
दलों के नेताओं ने सम्मेलन में पहुँच कर वामपंथी दलों की इस पहल के साथ एकजुटता का
इजहार किया। इससे इस कन्वेन्शन का संदेश और व्यापक हुआ है।
कन्वेन्शन में भाकपा ( मा॰ ) की पोलिट ब्यूरो के
सदस्य और पूर्व सांसद नीलोत्पल बसु ने कहाकि इस सरकार ने संसद में बिना चर्चा
कराये अपने संख्या बल पर संविधान में संशोधन कर पूँजीपतियों से चुनाव बाण्ड्स के जरिये
असीमित चंदा लेने का रास्ता खोल दिया है। इससे चुनावों में पहले से चली आरही धन की
भूमिका खतरनाक हद तक बढ़ जायेगी। मुट्ठी भर कारपोरेट घराने और पूंजीपति अपने धन के
बल पर सत्ताधारी दल और उन दलों को जो उनके हितों को पूरा कराने को जनता के हितों
को कुचलते हैं, पर अपना नियंत्रण और मजबूत करेंगे।
उन्होने
कहाकि इस नियम को बदलवाने के लिये वामपंथी दलों और अन्य दलों को जनता के बीच जाकर
अभियान चलाना होगा और इस कानून को पलटवाना होगा नहीं तो 2019 के चुनाव की तस्वीर
बहुत ही भयावह होगी। समानुपातिक चुनाव प्रणाली की वकालत करते हुये उन्होने कहाकि
हमें इसी पर नहीं रुक जाना चाहिये अपितु ऐसी चुनाव प्रणाली के लिये काम करना
चाहिये जो सर्वाधिक लोकतान्त्रिक हो। उन्होने उत्तर प्रदेश के वामदलों की प्रशंसा
की कि उन्होने एक अति सामयिक मुद्दे को उठाने की पहलकदमी की है।
कन्वेन्शन के प्रारंभ में चर्चा हेतु आधार पत्र
प्रस्तुत करते हुये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य
एवं राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि हमारे देश की मौजूदा चुनाव प्रणाली उस ब्रिटिश
उपनिवेशवाद की देन है जो ब्रिटेन में एक उदार लोकतन्त्र और अपने औपनिवेशिक देशों
में कठोरतम लोकतन्त्र चलाना चाहता था। इस प्रणाली में अल्पमत बहुमत पर शासन चलाता
है। गत लोकसभा चुनाव में मात्र 31 प्रतिशत मत लेकर भाजपा 282 सीटें हथिया लेगयी
जबकि उसके विपक्ष में पड़े 69 प्रतिशत वोटो का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। आज यह
प्रणाली धनबली बाहुबली, जातिवादी और सांप्रदायिक तत्वों को
सत्ता हथियाने का साधन बन गयी है। समाज के वंचित तबके सत्ता में भागीदारी से वंचित
होते जारहे हैं।
उन्होने कहाकि समानुपातिक निर्वाचन प्रणाली में
पार्टियों को प्राप्त मतों के समकक्ष प्रतिनिधित्व मिलता है। महिलाओं, अल्पसंख्यकों, दलितों,
आदिवासियों और अन्य तबके भी सत्ता में भागीदार बनते हैं। पार्टियों की नीतियों पर
वोट मिलता है और पार्टियों में आंतरिक लोकतन्त्र स्थापित करना पड़ता है। इस प्रणाली
के जरिये गरीबों का शासन स्थापित किया जासकता है और समतमूलक समाज की स्थापना के
काम को आगे बढ़ाया जासकता है। आज दुनियाँ के 92 देश इस प्रणाली को अपना चुके हैं।
हाल ही में नेपाल में भी अर्ध समानुपातिक प्रणाली से चुनाव हुये और धर्मान्ध
ताकतों को मुह की खानी पड़ी। डा॰ गिरीश ने कहाकि यदि यह प्रणाली लागू होजायेगी तो
भाजपा कभी भी सत्ता का मुह नहीं देख पायेगी। उन्होने जनता के दूसरे सवालों के साथ
जोड़ कर इस सवाल पर आंदोलन खड़ा करने पर ज़ोर दिया।
भाकपा- माले के पोलिट ब्यूरो के सदस्य का॰ रामजी
राय ने कहाकि यह लड़ाई उस उत्तर प्रदेश से शुरू हुयी है जिसने 1857 में अँग्रेजी
हुकूमत को ललकारा था। वामपंथ को चाहिये कि वह जनता के ज्वलंत मुद्दों पर चल रहे
आंदोलनों को और तेज करे।
कन्वेन्शन को आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक के नेता उदय
भान सिंह, सीपीएम के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा-
माले के राज्य सचिव सुधाकर यादव, भाकपा के राज्य सह सचिव
अरविंदराज स्वरूप, राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय सचिव शिव
बरन सिंह, पूर्व विधायक, राष्ट्रवादी
कांग्रेस के नेता अरुण यादव, अपना दल ( क्रष्णा पटेल ) के
अध्यक्ष आर॰ बी॰ सिंह पटेल तथा लोकतान्त्रिक जनता दल के अध्यक्ष जुबेर अहमद ने भी
संबोधित किया। अध्यक्षता इम्तियाज़ अहमद पूर्व विधायक,
दीनानाथ यादव पूर्व विधायक, सुधाकर यादव तथा हरीशंकर गुप्ता
ने की।
कन्वेन्शन में पारित प्रस्ताव में मांग की गयी है
कि निर्वाचन आयोग चुनाव सुधार पर विभिन्न आयोगों, कमेटियों
और न्यायिक फैसलों के आधार पर एकमुश्त ड्राफ्ट तैयार करे जिसमें समानुपातिक चुनाव
प्रणाली की सिफ़ारिश भी शामिल हो। इस पर चर्चा के लिये सभी राजनेतिक दलों की बैठक
बुलाई जाये।
ईवीएम के सवाल पर कन्वेन्शन की राय है कि सारा
मतदान वीवीपेट युक्त मशीनों से हो। इन मशीनों की विश्वसनीयता की गारंटी करना
निर्वाचन आयोग और सरकार की ज़िम्मेदारी है।
साथ ही पूँजीपतियों द्वारा राजनैतिक दलों को चंदा
देने पर रोक लगाने, और यह चंदा चुनाव आयोग को दिये
जाने, चुनाव प्रचार के लिये स्टेट फंडिंग किये जाने, चुनावी विज्ञापन और धन के बल पर होने वाले मीडिया मैनेजमेंट को
प्रतिबंधित किये जाने, प्रत्याशी के चुनाव खर्च में दल का
खर्च भी जोड़े जाने, अपराधियों के चुनाव लड़ने से रोकने की
कारगर प्रणाली तैयार करने तथा चुने प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार जनता को
दिये जाने की मांग भी की गयी है।
कन्वेन्शन ने सभी लोकतान्त्रिक दलों, शख़्सियतों, बुद्धिजीवियों,
दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, आदिवासियों और इन सभी के शुभचिंतकों से अपील की है कि वे समानुपातिक
चुनाव प्रणाली और चुनाव सुधार लागू कराने की मुहिम में वामपंथी दलों का साथ दें।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
शुक्रवार, 17 अगस्त 2018
at 8:13 pm | 0 comments |
An Apeal of CPI, U.P. for Kerala Flood Relief Fund
केरल में बाढ़ की
विभीषिका से पीड़ितों की जीजान से मदद करें
सभी संवेदनशील
नागरिकों, पार्टी इकाइयों और पार्टी साथियों से भाकपा उत्तर प्रदेश की पुरजोर अपील
भाइयो बहिनों और साथियो,
केरल में बाढ़ और जल प्लावन से
हुयी भीषण तबाही से आप सभी भली भांति परिचित हैं. इस प्राकृतिक आपदा में सौ से
अधिक लोगों की जान जाचुकी है. चल अचल संपत्ति को हुये नुकसान का तो अभी अनुमान
लगाना बेहद कठिन है. तबाही अभी भी जारी है.
केरल एक ऐसा राज्य है जो
देश के किसी भी भाग में आयी विपत्ति में दिलोजान से मदद करता रहा है. कुदरत की मार
के चलते आज उसे सारे देशवासियों की मदद की जरुरत है.
जहां तक भाकपा की उत्तर प्रदेश
राज्य काउंसिल की बात है वह देश के किसी भी कोने में आयी विपत्ति में सबके साथ खड़ी
रही है. अपने संवेदनशील कार्यकर्ताओं की मदद से हमने जनता से धन एकत्रित कर
विपदाग्रस्त इलाकों के लिये भेजा है. कई बार तो हमने पीड़ित स्थल पर जाकर राहत
सामग्री का वितरण किया है.
अतएव केरल की जनता पर आयी
हुयी इस महाविपदा में भी हम पूरी तरह उनके साथ हैं. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के
केन्द्रीय सचिव मंडल ने भी केरल की जनता के लिये राहत राशि इकठ्ठा कर शीघ्र भेजने
की अपील की है. अतएव भाकपा की उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल आप सभी से अपील करती है
कि आप जनता से धन इकठ्ठा करके अथवा निजी तौर पर अपना आर्थिक योगदान शीघ्र से शीघ्र
भाकपा राज्य काउंसिल, उत्तर प्रदेश को प्रेषित करें ताकि पहली किश्त जल्द से जल्द
सहायतार्थ भेजी जासके.
सहयोगी जन संगठनों से भी
अपील है कि वे पार्टी राज्य केन्द्र की इस काम में मदद करें.
आप अपनी सहयोग राशि भाकपा
राज्य कार्यालय ( 22, कैसरबाग, लखनऊ ) में नकद जमा कर रसीद कटा सकते हैं, चेक अथवा
ड्राफ्ट से भेज सकते हैं अथवा राज्य काउंसिल के खाते में भी धन स्थानांतरित कर
सकते हैं. खाते का विवरण निम्न प्रकार है-
बैंक का नाम- यूनियन बैंक
आफ इण्डिया, शाखा क्लार्क अवध लखनऊ
खातेदार का नाम- कम्युनिस्ट
पार्टी आफ इंडिया, यू.पी. स्टेट काउंसिल
खाता संख्या-
353302010017252
आई एफ एस कोड- UBIN 0535338
आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास
है कि आप अपना योगदान अबिलंब प्रेषित करेंगे.
सधन्यवाद!
आपके साथी
डा. गिरीश, राज्य
सचिव – 9412173664
कामरेड अरविन्दराज
स्वरूप एवं कामरेड इम्तेयाज़ अहमद, सहसचिव
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी,
उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल
22, कैसरबाग, लखनऊ-
226001
गुरुवार, 16 अगस्त 2018
at 6:55 pm | 0 comments |
CPI, U.P. Pays Tribute to Shree A.B. Bajapeyii
भाकपा उत्तर प्रदेश ने
श्री अटल बिहारी बाजपेयी के निधन पर गहरा दुःख जताया
लखनऊ- 16 अगस्त 2018,
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य काउंसिल ने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी
बाजपेयी के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है. उनके शोक संतप्त परिवार को शान्ति
की कामना करते हुये भाकपा ने उन्हें भावपूर्ण श्रध्दांजलि अर्पित की है.
यहाँ जारी भाकपा राज्य
समिति की विज्ञप्ति में कहा गया है कि श्री बाजपेयी का निधन भारत की लोकतांत्रिक
राजनीति के लिये एक झटका है. विभाजन, असहिष्णुता और हिंसा की राजनीति करने वाले
अपनों को भी उन्होंने राजधर्म का पाठ पढ़ाया था. आज भी वोट की खातिर हिंसा और
विभाजन की राजनीति करने वालों को उनकी इस सीख पर गौर करना होगा. संभवतः यही उनके
प्रति सच्ची श्रध्दांजलि होगी. भाकपा पुनः उन्हें श्रध्दांजलि अर्पित करती है.
डा. गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
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अभी हाल में एक छात्रा के साथ दिल्ली में घटी हृदयविदारक घटना से उपजे गुस्से से दिल्ली की सड़कों पर एक आन्दोलन ने जन्म लिया था, जो केवल एक ...


