भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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शनिवार, 30 जनवरी 2010

अलगाववादी नारों से सावधान

कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग-2 सरकार ने जिस जल्दबाजी में अर्द्धरात्रि को अपनी अदृश्य एवं स्तुतियोग्य उच्च कमान का हवाला देते हुए पृथक तेलंगाना राज्य बनाने की घोषणा की उसकी देश भर में जो प्रतिक्रिया होनी थी, वही हुई। देश के लगभग हर प्रांत में अलग राज्य के जो अविकसित भ्रूण गर्भ में पड़े थे, उन्हें हवा पानी देकर जीवित करने की कोशिशें तेज हो गईं तो आंध्र प्रदेश में विभाजन के विरोध में ऐसा आन्दोलन खड़ा हुआ कि सारा देश दांतों तले उंगली...
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और भी ग़म हैं ज़माने में.........

आज लेखकों के हजारों संगठन हैं। गली-गली चैराहे-चैराहे में। राजनीतिक दलों की छाया में और उनसे बाहर भी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा संचालित भी। अलग-अलग भाषाओं में सत्ता पोषित और अपोषित। उत्सवधर्मी। अपने-अपने नायकों को याद करने के लिए। गहोई समाज याद करेगा- मैथिलीशरण गुप्त को। कान्यकुब्जों के लिए नायक होंगे- निराला। कबीर जयन्ती या वाल्मीकी जयन्ती के अपने-अपने समाज हैं। समाज को विखण्डित करने के लिए इनका इस्तेमाल होता है। मनुष्य...
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मंगलवार, 26 जनवरी 2010

राजनीतिक रिपोर्ट

आठ माह पूर्व सम्पन्न हुये लोकसभा चुनावों में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन एवं उसकी धुरी कांग्रेस ने पूर्व से अधिक सीटें हासिल कर पुनः सत्तारूढ़ होने के बाद अति उत्साह के साथ जिस सौ दिन के एजेण्डे की बढ़-चढ़ कर घोषणा की थी वह आज 250 दिन बीत जाने के बाद भी कहीं पूरा होते नहीं दिख रहा। उलटे इन 250 दिनों में जनता की समस्यायें कई गुना बढ़ी हैं।देश में राजनीतिक और आर्थिक संकट तेजी से गहरा रहा है लेकिन दक्षिणपंथी और वामपंथ विरोधी शक्तियों...
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शुक्रवार, 22 जनवरी 2010

राजनीतिक-संठनात्मक रिपोर्ट

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद ने जिसकी बैठक बंगलौर में 27-28 दिसम्बर 2009 को आयोजित हुई जिसने निम्नलिखित राजनीतिक-संगठनात्मक रिपोर्ट स्वीकृत की:पिछली राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद गुजरे छः महीने में देश में आर्थिक तथा राजनीतिक संकट और अधिक गहरा हुआ है। उसके साथ ही दक्षिणपंथी और वाम-विरोधी ताकतों का हमला बढ़ा है एवं कम्युनिस्ट तथा अन्य वामपंथी पार्टियां कमजोर हुई हैं, जो बचाव में आ गयी हैं। कुल स्थिति जिसका हम आज...
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सीआरएफ ओल्डएज होम की 10वीं जयंती

कामरेड सीआर को एक श्रद्वांजलिमहान अक्टूबर समाजवादी क्रांति से विश्व भर में अनेक लोगों को यह प्रेरणा मिली कि एक ऐसे नये समाज के निर्माण के लिए संघर्ष किया जाये जो एक वर्ग द्वारा दूसरे वर्ग को या एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति के शोषण से विहीन हो। उससे प्रेरणा पाकर लोगों ने एक ऐसा समाज बनाने की कोशिश की जिसमें गरीबी, बेरोजगारी और असमानता न हो, ऐसे लोगों में एक नाम है का. चन्द्र राजेश्वर राव का। उन्हें लोग प्यार से का. सी.आर. कहा...
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आदमी का बच्चा

जिन्दगी सुधारने नागपुर गया था। राज्यों की राजधानियां शायद वे जगहें हैं, जहां टूटी हुई जिन्दगियां सुधारी जाती हैं। सुना है, सैक्रैटेरियेट और विष्वविद्यालयों में जिन्दगीसाज रहते हैं, जो एक कदम से टूटी-फूटी और कबाड़खाने में रखी जिन्दगी को अच्छी से अच्छी दूकान के शो-केस में रख देते हैं। लोगों ने कहा - बी.ए. किये चार-पांच साल हो गये। एम.ए. कर डालो, तो जिन्दगी सुधर जायगी, वरना यहीं पड़े-पड़े सड़ जाओगे। सोचा, बदबू आने के पहले नागपुर जाकर...
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प्रजातंत्र के कुत्ते

व्यंग्यरोज की तरह सुबह सैर करने को निकला तो मुझे देखकर नुक्कड़ वाली नीम के नीचे सोया मरियल कुत्ता पंजे झाड़ कर उठ खड़ा हुआ। इससे पहले शायद ही मैंने उसे अपने पांव पर खड़े देखा हो। किसी ने रोटी डाल दी तो उसी प्रकार लेटे-लेटे खा ली नहीं तो हरि इच्छा। नजदीक आने पर वह मेरे पांव के पास आकर कुंऽकुंऽऽ करने लगा। मैंने भरपूर नजर से उसे देखा, उसने भरपूर नजर से मुझे देखा, सहानुभूति अंकुरित तो होनी ही थी। फिर अचानक वह जोर-जोर से भौंकने लगा।...
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रोजगार का आउटसोर्सिंग-एक बड़ा खतरा

1. प्रस्तावना1. बैंकों के नियमित एवं स्थायी काम का आउटसोर्सिंग टेक्नालाजी से ज्यादा खतरनाक है। यह उस प्रक्रिया का अंग है जिसके तहत किसी संस्थान का काम बाहरी एजेंसियों को दिया जाता है जो ये काम मजदूरों से कराती हैं। यह तरीका विश्व भर में मालिकों द्वारा अपनाया गया ताकि कर्मचारियों पर खर्च को कम किया जा सके तथा अधिक से अधिक मुनाफा कमाया जा सके, साथ ही यूनियन न बनने दिया जाये और यदि यूनियन है तो उसे काम करने नहीं दिया जाय। आउटसोर्सिंग...
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