भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

About The Author

Communist Party of India, U.P. State Council

Get The Latest News

Sign up to receive latest news

समर्थक

शुक्रवार, 2 जून 2017

Left in U.P. decided to Protest on !2th June on Law and Order

वामपंथी दलों ने सहारनपुर में प्रवेश पर रोक की निंदा की 5 जून को महामहिम राज्यपाल से मिलने का निश्चय 12 जून को जिला मुख्यालयों पर संयुक्त प्रदर्शनों का निर्णय लखनऊ- 2 जून 2017, प्रदेश के वामपंथी दलों ने राज्य सरकार और सहारनपुर जिला प्रशासन द्वारा जनपद सहारनपुर में विपक्षी दलों के प्रवेश पर लगायी पाबंदी पर घोर आपत्ति जताई है. इस तरह की कार्यवाहियों को घोर तानाशाहीपूर्ण और अलोकतांत्रिक बताते हुये इसे तत्काल बंद करने की मांग की है. सहारनपुर हिंसा और प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर वाम दलों ने महामहिम राज्यपाल जी से मिलने और ज्ञापन देने हेतु 5 जून का समय मांगा है और 12 जून को जिला मुख्यालयों संयुक्त प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है. यहाँ संपन्न वामपंथी दलों की बैठक में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश था कि सहारनपुर में हुयी हिंसा का जायजा लेने को वहाँ आज पहुंचने वाली वामपंथी दलों के नेताओं की टीम के सहारनपुर प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गयी. इतना ही नहीं स्थानीय कार्यकर्ताओं को धमकाया गया कि न तो किसी को सहारनपुर में घुसने दिया जायेगा, न किसी से मिलने दिया जायेगा और न प्रेस वार्ता होने दी जायेगी. वामदलों ने इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है. बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि भाजपा के 75 दिन के शासन में उत्तर प्रदेश सुलग रहा है. दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं और अन्य कमजोर वर्गों पर अत्याचार की सारी हदें पार होगयीं हैं. सांप्रदायिक, सामंती और सरकार संरक्षित तत्व दंगे- फसाद करा रहे हैं, महिलाओं के साथ बदसलूकी और उनकी हत्यायें हो रही हैं. व्यापारियों को लूटा जा रहा है, कत्ल, राहजनी और आगजनी की वारदतों ने पिछले सारे रिकार्ड तोड़ दिये हैं. सहारनपुर की आग अभी शांत नहीं हुयी थी कि जेवर में चार महिलाओं के साथ हथियारों की नोंक पर सामूहिक बलात्कार, उसी परिवार के एक व्यक्ति की हत्या और लूट ने हर नागरिक को अंदर तक हिला दिया है. दंगे और कमजोरों पर हमले भाजपा और उसके संगठनों की अगुवाई में होरहे हैं. यहाँ तक कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों तक पर हमले किये जारहे हैं और उन्हें दबाव में लेकर अपनी करतूतों पर पर्दा डालने और अन्य पर अनुचित कार्यवाही करने को मजबूर किया जारहा है. कानून के राज की जगह गुंडाराज ने ले ली है और कानून- व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है. बड़े पैमाने पर पुलिस- प्रशासन के अधिकारियों के तबादलों के बावजूद स्थिति में कोई फर्क नहीं पड़ा है. आये दिन मुख्यमंत्री जी द्वारा दी जारही चेतावनियों का कोई असर नहीं होरहा क्योंकि कानून की धज्जियां बिखेरने वाले अधिकांश तत्व भाजपा के हैं अथवा उन्हें भाजपा का सरंक्षण हासिल है. सरकार अपराधों पर रोक लगाने से ज्यादा अपने परंपरागत विभाजनकारी कदमों को आगे बढ़ाने और विपक्ष पर हमला बोलने में व्यस्त है. जनता की उसे कोई परवाह नहीं है. नोटबंदी, मीटबंदी, खननबंदी और भर्तियों और भर्ती परीक्षा के परिणामों पर रोक ने बेरोजगारी का बड़ा पहाड़ खड़ा कर दिया है. किसानों के कर्जमाफी की घोषणा के क्रियान्वित न होने के कारण किसानों की आत्म हत्यायों का सिलसिला थम के नहीं देरहा. आलू प्याज आदि जैसी चीजों के मूल्यों में गिरावट ने उन्हें तवाह करके रख दिया है. इधर भाजपा की केंद्र सरकार द्वारा पशुओं की खरीद- फरोक्त पर रोक लगाने वाली अधिसूचना ने किसानों, मीट के छोटे कारोबारियों और गैर शाकाहारी लोगों पर बड़ा प्रहार किया है. केंद्र सरकार क्या खाया जाय, क्या पढा जाये और क्या खरीदा बेचा जाये जैसे तानाशाहीपूर्ण फैसले जनता पर थोप रही है और चुनावों में किये गये वायदों से दूर भाग रही है. तीन महीने भी अभी सरकार ने पूरे नहीं किये हैं और आम जनता में हा हाकार मचा हुआ है. अतएव वामपंथी दलों ने महामहिम राज्यपाल महोदय से मिल कर स्थिति से उन्हें अवगत कराने का निश्चय किया है. इसके अलावा सहारनपुर की घटनाओं की न्यायिक जांच कराने, दलितों अल्पसंख्यकों महिलाओं और अन्य कमजोर वर्गों पर अत्याचार रोके जाने, सांप्रदायिक जातिवादी और अपराधिक तत्वों को जेल के सींखचों के पीछे पहुंचाने, दंगाराज नहीं, कानून का राज स्थापित किये जाने, जनतांत्रिक कार्यवहियों को सीमित करने की कोशिशों को रोके जाने, किसानों को बदहाली से उबारे जाने तथा पशुओं की खरीद- फरोक्त संबंधी केंद्र सरकार की अधिसूचना को रद्द किये जाने आदि सवालों पर 12 जून को जिला मुख्यालयों पर संयुक्त रुप से धरने अथवा प्रदर्शन किये जाने का निर्णय भी बैठक में लिया गया है. बैठक में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी( मा.) के सचिव का. हीरा लाल यादव, सीपीआई- एमएल के राज्य सचिव का. सुधाकर यादव, फारबर्ड ब्लाक के राज्य सचिव एसएन सिन्ह चौहान तथा एसयूसीआई-सी के सचिव जगन्नाथ वर्मा व अन्य शामिल थे. डा. गिरीश

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

लोकप्रिय पोस्ट

कुल पेज दृश्य