भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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सोमवार, 14 जनवरी 2019

CPI will work for unity of left, democratic and secular forces to defeat BJP in next parliament election of U.P.



भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य कार्यकारिणी ने आगामी लोकसभा चुनावों में आरएसएस एवं उसके द्वारा नियंत्रित भाजपा को हराने को वामपंथी, लोकतान्त्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष शक्तियों की एकता स्थापित करने पर बल दिया है.

यहाँ दो दिनों तक चली पार्टी की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में इस तथ्य को शिद्दत से रेखांकित किया कि गत साढ़े चार सालों में किसानों, कामगारों, नौजवानों, छात्रों, महिलाओं और अन्य कमजोर तबकों के ज्वलंत सवालों पर वामपंथी दलों ने ही सडकों पर उतर कर संघर्ष किया है. देश के कई भागों और राजधानी दिल्ली में किसानों के बडे बड़े जमावडों और 8 एवं 9 जनवरी की श्रमिक वर्ग की देशव्यापी हड़तालों में भी लाल झंडों की रहनुमाई को सारे देश ने खुली आँखों से देखा है.
उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य भागों में कई और मोर्चों पर भी संघर्ष हुए हैं. जहाँ भी भाजपा और संघ ने अपनी फासीवादी हिन्दुत्ववादी राजनीति का हमला बोला है, उसका वैचारिक जबाव भी भाकपा और वामपंथ ने दिया है. भाजपा अध्यक्ष द्वारा दीगयी वैचारिक युध्द की चुनौती का जबाव भी वामपंथ ही दे सकता है. भाकपा राज्य कार्यकारिणी का यह स्पष्ट मत है कि कोई सुस्पष्ट विचारधारा से रहित गठजोड़ संघ और भाजपा को चुनौती नहीं देसकता. अतएव किसी ऐसे गठजोड़ जिसमें कि भाकपा और वामपंथ की मौजूदगी न हो से भाजपा और संघ को हराने की कल्पना भी नहीं की जासकती.
भाकपा राज्य कार्यकारिणी का यह भी मत है कि भाजपा के खिलाफ जमीनी स्तर पर लोग लामबंद होरहे हैं. वे भाजपा को हराना चाहते हैं. पर वे एक समूचे विपक्ष की एकता देखना चाहते हैं. दुर्भाग्य है कि कुछ लोगों की वजह से ऐसा नहीं होसका. उत्तर प्रदेश में भाजपा/ आरएसएस के विरुध्द संघर्ष राष्ट्रीय संघर्ष का हिस्सा है जिसे वामपंथी लोकतान्त्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष शक्तियों के गठजोड़ से ही आगे बढ़ाया जा सकता है. अतएव भाकपा ऐसी सभी ताकतों को एकजुट करने का प्रयास करेगी.
भाकपा राज्य कार्यकारिणी ने आवारा पशुओं से किसानों की फसल की बरवादी और जनहानि, महिलाओं के साथ बदसलूकी की बढ़ती घटनाओं एवं यूपी की चरमराई कानून व्यवस्था, गन्ना/ आलू उत्पादक किसानों की बदहाली, कर्जमाफी, महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार आदि सभी सवालों पर आगामी 5 फरबरी को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने का निर्णय भी लिया है. इसके अलाबा कई क्षेत्रीय रैलियां/ सभाएं भी आयोजित की जायेंगीं.
बैठक में भाकपा के केन्द्रीय सचिव का. अतुल अंजान ने भी विचार रखे. राज्य सचिव डा. गिरीश ने राजनैतिक रिपोर्ट पेश की. अध्यक्षता का. कल्पनाथ गुप्ता ने की. का. अर्विन्दराज स्वरूप, अशोक मिश्र, सदरुद्दीन राना, सुधीर अवस्थी, गफ्फार अब्बास, रामचंद ' सरस', रामरक्षा, नसीम अंसारी, दीनानाथ सिंह, शिरोमन राजपूत, शरीफ अहमद, अजय सिंह, हामिद अली, राजेन्द्र यादव, राजेश तिवारी, फूलचंद यादव एवं मोतीलाल ने विचार व्यक्त किये.
डा. गिरीश

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