भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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मंगलवार, 24 मई 2016

Aisf conference

ए.आई.एस.एफ. का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कार्यकर्ता सम्मेलन संपन्न सम्मेलन में झूठे देशभक्तों और पूंजीवादी ताकतों से लडने का लिया संकल्प: सबको एक समान शिक्षा, शैक्षिक कलेंडर लागू करने, छात्र संघों के चुनाव कराये जाने और सबको रोजगार दिये जाने की मांगों के लिये संघर्ष का किया आह्वान अलीगढ: आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक क्षेत्रीय सम्मेलन यहां उत्साह और गर्मजोशी के माहौल में संपन्न हुआ. बेहद गर्म मौसम के बावजूद सम्मेलन में आठ जिलों के 60 प्रतिनिधि शामिल हुये. सम्मेलन की अध्यक्षता ए.एम.यू. की एआईएसएफ की संयोजक कु. दूना मारिया भार्गवी भार्गवी ने की तथा संचालन एआईएसएफ अलीगढ के संयोजक अनीश कुमार ने किया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वलीउल्लाह खादरी ने शिक्षा पर बढते हमले, शिक्षा के बजट में की जारही कटौती, फीस में की जारही भारी वृध्दि, शिक्षा के निजीकरण और व्यापारीकरण तथा शिक्षा के भगवाकरण के प्रयासों पर सवाल खडे किये. उन्होने कहा कि केंद्र हो या राज्यों की सरकारें जन समुदाय को अपढ बना कर रखना चाहती हैं इसीलिये शिक्षा का बजट घटा रही हैं, विद्यार्थियों की फेलोशिप छीन रही है, जहां छात्र इसका विरोध कर रहे हैं उनको हर तरह से दबाया जारहा है. उन्होने सभी छात्रों से शिक्षा को बचाने और छात्रों के बुनियादी अधिकरों की रक्षा के लिये संघर्ष का आह्वान किया. कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और संगठन के महासचिव विश्वजीत कुमार ने कहा कि जिन्होने अब तक देश व देशवासियों के साथ गद्दारी की है, वे आज देशभक्त होने का प्रमाण बांट रहे हैं. देश व प्रदेश में शिक्षा की हालत बद से बदतर होती जारही है. एकतरफ जहां छात्रों को उपयुक्त शिक्षा व रोजगार नहीं मिल रहे हैं वहीं उनके अधिकारों को कुचला जारहा है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय, जे एन यू एवं रोहित वेमूला प्रकरण इसके उदाहरण हैं. इसलिये सभी को मुफ्त व समान शिक्षा , छात्रसंघों के चुनाव और रोजगार के लिये छात्रों का एकजुट संघर्ष ही छात्रों के भविष्य की रक्षा करेगा. एआईएसएफ इस संघर्ष के लिये सबसे उपयुक्त मंच है. सम्मेलन में प्रमुख वक्ता भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि यह गौरव केवल एक छात्र संगठन- 'एआईएसएफ' को ही हासिल है कि उसका जन्म आज़ादी के आंदोलन की कोख से हुआ और उसने आज़ादी की लडाई में हिस्सा लिया. उस दौर में यह आंदोलन की सभी प्रमुख धाराओं- कांग्रेस, सोशलिस्ट तथा कम्युनिस्ट विचारधारा के छात्रों का संयुक्त मंच था. छात्र आंदोलन के हितों और शिक्षा की उपादेयता को देखते हुये एआईएसएफ को छात्रों का संयुक्त मंच ही रहना चाहिये था लेकिन छात्रों को दलगत स्वार्थों की पूर्ति का मौहरा बनाने के लिये कांग्रेस ने एनएसयूआई तथा सोशलिस्टों ने समाजवादी युवजन सभा बनाली. आरएसएस जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी हुकूमत को बचाने के काम में लगा था, ने आज़ादी आने के बाद जनसंघ/ भाजपा बनाली तथा एबीवीपी नामक छात्र संगठन बना लिया. जिसका उद्देश्य छात्रों को केवल सांप्रदायिकता और जाति के नाम पर बांटना है. छात्रों और समाज के बुनियादी सवालों से उसका कोई लेना देना नहीं. केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद केंद्र सरकार ने छात्रों के खिलाफ युध्द छेड रखा है और विद्यार्थी परिषद उसके सह्योग में छात्रों के खिलाफ षडयंत्र कर रही है. जगह जगह वामपंथी और अंबेडकरवादी छात्र संगठनो पर हमले बोले जा रहे हैं. छात्रों को अपने शैक्षिक हितों के साथ साथ विद्यार्थी परिषद के छात्र विरोधी कुकृत्यों का भी जबाव देना होगा. भाकपा के राज्य सहसचिव का. अरविंदराज स्वरुप ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की शिक्षा और छात्रों को तबाह करने वाली नीतियों के खिलाफ जगह जगह जुझारू छात्र आंदोलन उग रहे हैं और अपने संघर्षो से कई जगह छात्रों ने सफलतायें हासिल की हैं. जेएनयू और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के संघर्ष इसका उदाहरण हैं. आने वाले दिनों में छात्रों, शिक्षा और उसके संस्थानो पर और तीव्र हमले होंगे और छात्रों को उसका जबाव भी मजबूती से देना होगा. छात्र आंदोलन को उचित दिशा देने का काम केवल एआईएसएफ कर सकता है अतएव उसे मजबूत बनाने की जरूरत है. भाकपा के जिला सचिव प्रोफेसर सुहेव शेरवानी ने कहा कि अलीगढ और उत्तर प्रदेश में एआईएसएफ तेजी से कदम बढा रही है. भाकपा हर तरह से उनका साथ देने को प्रतिबध्द है. उन्होने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह सभी को समान शिक्षा देने की व्यवस्था करे लेकिन राज्य सरकार ने इस ओर कोई कदम नहीं बढाया. हम सबको मिल कर सरकार पर दबाव बढाना चाहिये. प्रोफेसर शमीम अख्तर ने मोदी सरकार के फासिस्ट्वादी कदमों पर विस्तार से प्रकाश डाला. सम्मेलन को प्रदेश उपाध्यक्ष उत्कर्ष चतुर्वेदी, कु. फसलीन, यशपाल सिंह, देवेंद्र कुमार, गौरव सक्सेना, विनीत कुमार, पंकज सागर, अतुल, रवि शर्मा, अश्वनी कुमार, अभिषेक पचौरी, संतोष, यतेंद्र बघेल और हर्ष पालीवाल विवेक त्रिपाठी आदि ने भी संबोधित किया.
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ए.आई.एस.एफ. का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कार्यकर्ता सम्मेलन संपन्न सम्मेलन में झूठे देशभक्तों और पूंजीवादी ताकतों से लडने का लिया संकल्प: सबको एक समान शिक्षा, शैक्षिक कलेंडर लागू करने, छात्र संघों के चुनाव कराये जाने और सबको रोजगार दिये जाने की मांगों के लिये संघर्ष का किया आह्वान अलीगढ: आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक क्षेत्रीय सम्मेलन यहां उत्साह और गर्मजोशी के माहौल में संपन्न हुआ. बेहद गर्म मौसम के बावजूद सम्मेलन में आठ जिलों के 60 प्रतिनिधि शामिल हुये. सम्मेलन की अध्यक्षता ए.एम.यू. की एआईएसएफ की संयोजक कु. दूना मारिया भार्गवी भार्गवी ने की तथा संचालन एआईएसएफ अलीगढ के संयोजक अनीश कुमार ने किया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वलीउल्लाह खादरी ने शिक्षा पर बढते हमले, शिक्षा के बजट में की जारही कटौती, फीस में की जारही भारी वृध्दि, शिक्षा के निजीकरण और व्यापारीकरण तथा शिक्षा के भगवाकरण के प्रयासों पर सवाल खडे किये. उन्होने कहा कि केंद्र हो या राज्यों की सरकारें जन समुदाय को अपढ बना कर रखना चाहती हैं इसीलिये शिक्षा का बजट घटा रही हैं, विद्यार्थियों की फेलोशिप छीन रही है, जहां छात्र इसका विरोध कर रहे हैं उनको हर तरह से दबाया जारहा है. उन्होने सभी छात्रों से शिक्षा को बचाने और छात्रों के बुनियादी अधिकरों की रक्षा के लिये संघर्ष का आह्वान किया. कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और संगठन के महासचिव विश्वजीत कुमार ने कहा कि जिन्होने अब तक देश व देशवासियों के साथ गद्दारी की है, वे आज देशभक्त होने का प्रमाण बांट रहे हैं. देश व प्रदेश में शिक्षा की हालत बद से बदतर होती जारही है. एकतरफ जहां छात्रों को उपयुक्त शिक्षा व रोजगार नहीं मिल रहे हैं वहीं उनके अधिकारों को कुचला जारहा है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय, जे एन यू एवं रोहित वेमूला प्रकरण इसके उदाहरण हैं. इसलिये सभी को मुफ्त व समान शिक्षा , छात्रसंघों के चुनाव और रोजगार के लिये छात्रों का एकजुट संघर्ष ही छात्रों के भविष्य की रक्षा करेगा. एआईएसएफ इस संघर्ष के लिये सबसे उपयुक्त मंच है. सम्मेलन में प्रमुख वक्ता भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि यह गौरव केवल एक छात्र संगठन- 'एआईएसएफ' को ही हासिल है कि उसका जन्म आज़ादी के आंदोलन की कोख से हुआ और उसने आज़ादी की लडाई में हिस्सा लिया. उस दौर में यह आंदोलन की सभी प्रमुख धाराओं- कांग्रेस, सोशलिस्ट तथा कम्युनिस्ट विचारधारा के छात्रों का संयुक्त मंच था. छात्र आंदोलन के हितों और शिक्षा की उपादेयता को देखते हुये एआईएसएफ को छात्रों का संयुक्त मंच ही रहना चाहिये था लेकिन छात्रों को दलगत स्वार्थों की पूर्ति का मौहरा बनाने के लिये कांग्रेस ने एनएसयूआई तथा सोशलिस्टों ने समाजवादी युवजन सभा बनाली. आरएसएस जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी हुकूमत को बचाने के काम में लगा था, ने आज़ादी आने के बाद जनसंघ/ भाजपा बनाली तथा एबीवीपी नामक छात्र संगठन बना लिया. जिसका उद्देश्य छात्रों को केवल सांप्रदायिकता और जाति के नाम पर बांटना है. छात्रों और समाज के बुनियादी सवालों से उसका कोई लेना देना नहीं. केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद केंद्र सरकार ने छात्रों के खिलाफ युध्द छेड रखा है और विद्यार्थी परिषद उसके सह्योग में छात्रों के खिलाफ षडयंत्र कर रही है. जगह जगह वामपंथी और अंबेडकरवादी छात्र संगठनो पर हमले बोले जा रहे हैं. छात्रों को अपने शैक्षिक हितों के साथ साथ विद्यार्थी परिषद के छात्र विरोधी कुकृत्यों का भी जबाव देना होगा. भाकपा के राज्य सहसचिव का. अरविंदराज स्वरुप ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की शिक्षा और छात्रों को तबाह करने वाली नीतियों के खिलाफ जगह जगह जुझारू छात्र आंदोलन उग रहे हैं और अपने संघर्षो से कई जगह छात्रों ने सफलतायें हासिल की हैं. जेएनयू और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के संघर्ष इसका उदाहरण हैं. आने वाले दिनों में छात्रों, शिक्षा और उसके संस्थानो पर और तीव्र हमले होंगे और छात्रों को उसका जबाव भी मजबूती से देना होगा. छात्र आंदोलन को उचित दिशा देने का काम केवल एआईएसएफ कर सकता है अतएव उसे मजबूत बनाने की जरूरत है. भाकपा के जिला सचिव प्रोफेसर सुहेव शेरवानी ने कहा कि अलीगढ और उत्तर प्रदेश में एआईएसएफ तेजी से कदम बढा रही है. भाकपा हर तरह से उनका साथ देने को प्रतिबध्द है. उन्होने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह सभी को समान शिक्षा देने की व्यवस्था करे लेकिन राज्य सरकार ने इस ओर कोई कदम नहीं बढाया. हम सबको मिल कर सरकार पर दबाव बढाना चाहिये. प्रोफेसर शमीम अख्तर ने मोदी सरकार के फासिस्ट्वादी कदमों पर विस्तार से प्रकाश डाला. सम्मेलन को प्रदेश उपाध्यक्ष उत्कर्ष चतुर्वेदी, कु. फसलीन, यशपाल सिंह, देवेंद्र कुमार, गौरव सक्सेना, विनीत कुमार, पंकज सागर, अतुल, रवि शर्मा, अश्वनी कुमार, अभिषेक पचौरी, संतोष, यतेंद्र बघेल और हर्ष पालीवाल विवेक त्रिपाठी आदि ने भी संबोधित किया.
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ए.आई.एस.एफ. का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कार्यकर्ता सम्मेलन संपन्न सम्मेलन में झूठे देशभक्तों और पूंजीवादी ताकतों से लडने का लिया संकल्प: सबको एक समान शिक्षा, शैक्षिक कलेंडर लागू करने, छात्र संघों के चुनाव कराये जाने और सबको रोजगार दिये जाने की मांगों के लिये संघर्ष का किया आह्वान अलीगढ: आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक क्षेत्रीय सम्मेलन यहां उत्साह और गर्मजोशी के माहौल में संपन्न हुआ. बेहद गर्म मौसम के बावजूद सम्मेलन में आठ जिलों के 60 प्रतिनिधि शामिल हुये. सम्मेलन की अध्यक्षता ए.एम.यू. की एआईएसएफ की संयोजक कु. दूना मारिया भार्गवी भार्गवी ने की तथा संचालन एआईएसएफ अलीगढ के संयोजक अनीश कुमार ने किया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वलीउल्लाह खादरी ने शिक्षा पर बढते हमले, शिक्षा के बजट में की जारही कटौती, फीस में की जारही भारी वृध्दि, शिक्षा के निजीकरण और व्यापारीकरण तथा शिक्षा के भगवाकरण के प्रयासों पर सवाल खडे किये. उन्होने कहा कि केंद्र हो या राज्यों की सरकारें जन समुदाय को अपढ बना कर रखना चाहती हैं इसीलिये शिक्षा का बजट घटा रही हैं, विद्यार्थियों की फेलोशिप छीन रही है, जहां छात्र इसका विरोध कर रहे हैं उनको हर तरह से दबाया जारहा है. उन्होने सभी छात्रों से शिक्षा को बचाने और छात्रों के बुनियादी अधिकरों की रक्षा के लिये संघर्ष का आह्वान किया. कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और संगठन के महासचिव विश्वजीत कुमार ने कहा कि जिन्होने अब तक देश व देशवासियों के साथ गद्दारी की है, वे आज देशभक्त होने का प्रमाण बांट रहे हैं. देश व प्रदेश में शिक्षा की हालत बद से बदतर होती जारही है. एकतरफ जहां छात्रों को उपयुक्त शिक्षा व रोजगार नहीं मिल रहे हैं वहीं उनके अधिकारों को कुचला जारहा है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय, जे एन यू एवं रोहित वेमूला प्रकरण इसके उदाहरण हैं. इसलिये सभी को मुफ्त व समान शिक्षा , छात्रसंघों के चुनाव और रोजगार के लिये छात्रों का एकजुट संघर्ष ही छात्रों के भविष्य की रक्षा करेगा. एआईएसएफ इस संघर्ष के लिये सबसे उपयुक्त मंच है. सम्मेलन में प्रमुख वक्ता भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि यह गौरव केवल एक छात्र संगठन- 'एआईएसएफ' को ही हासिल है कि उसका जन्म आज़ादी के आंदोलन की कोख से हुआ और उसने आज़ादी की लडाई में हिस्सा लिया. उस दौर में यह आंदोलन की सभी प्रमुख धाराओं- कांग्रेस, सोशलिस्ट तथा कम्युनिस्ट विचारधारा के छात्रों का संयुक्त मंच था. छात्र आंदोलन के हितों और शिक्षा की उपादेयता को देखते हुये एआईएसएफ को छात्रों का संयुक्त मंच ही रहना चाहिये था लेकिन छात्रों को दलगत स्वार्थों की पूर्ति का मौहरा बनाने के लिये कांग्रेस ने एनएसयूआई तथा सोशलिस्टों ने समाजवादी युवजन सभा बनाली. आरएसएस जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी हुकूमत को बचाने के काम में लगा था, ने आज़ादी आने के बाद जनसंघ/ भाजपा बनाली तथा एबीवीपी नामक छात्र संगठन बना लिया. जिसका उद्देश्य छात्रों को केवल सांप्रदायिकता और जाति के नाम पर बांटना है. छात्रों और समाज के बुनियादी सवालों से उसका कोई लेना देना नहीं. केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद केंद्र सरकार ने छात्रों के खिलाफ युध्द छेड रखा है और विद्यार्थी परिषद उसके सह्योग में छात्रों के खिलाफ षडयंत्र कर रही है. जगह जगह वामपंथी और अंबेडकरवादी छात्र संगठनो पर हमले बोले जा रहे हैं. छात्रों को अपने शैक्षिक हितों के साथ साथ विद्यार्थी परिषद के छात्र विरोधी कुकृत्यों का भी जबाव देना होगा. भाकपा के राज्य सहसचिव का. अरविंदराज स्वरुप ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की शिक्षा और छात्रों को तबाह करने वाली नीतियों के खिलाफ जगह जगह जुझारू छात्र आंदोलन उग रहे हैं और अपने संघर्षो से कई जगह छात्रों ने सफलतायें हासिल की हैं. जेएनयू और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के संघर्ष इसका उदाहरण हैं. आने वाले दिनों में छात्रों, शिक्षा और उसके संस्थानो पर और तीव्र हमले होंगे और छात्रों को उसका जबाव भी मजबूती से देना होगा. छात्र आंदोलन को उचित दिशा देने का काम केवल एआईएसएफ कर सकता है अतएव उसे मजबूत बनाने की जरूरत है. भाकपा के जिला सचिव प्रोफेसर सुहेव शेरवानी ने कहा कि अलीगढ और उत्तर प्रदेश में एआईएसएफ तेजी से कदम बढा रही है. भाकपा हर तरह से उनका साथ देने को प्रतिबध्द है. उन्होने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह सभी को समान शिक्षा देने की व्यवस्था करे लेकिन राज्य सरकार ने इस ओर कोई कदम नहीं बढाया. हम सबको मिल कर सरकार पर दबाव बढाना चाहिये. प्रोफेसर शमीम अख्तर ने मोदी सरकार के फासिस्ट्वादी कदमों पर विस्तार से प्रकाश डाला. सम्मेलन को प्रदेश उपाध्यक्ष उत्कर्ष चतुर्वेदी, कु. फसलीन, यशपाल सिंह, देवेंद्र कुमार, गौरव सक्सेना, विनीत कुमार, पंकज सागर, अतुल, रवि शर्मा, अश्वनी कुमार, अभिषेक पचौरी, संतोष, यतेंद्र बघेल और हर्ष पालीवाल विवेक त्रिपाठी आदि ने भी संबोधित किया.
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ए.आई.एस.एफ. का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कार्यकर्ता सम्मेलन संपन्न सम्मेलन में झूठे देशभक्तों और पूंजीवादी ताकतों से लडने का लिया संकल्प: सबको एक समान शिक्षा, शैक्षिक कलेंडर लागू करने, छात्र संघों के चुनाव कराये जाने और सबको रोजगार दिये जाने की मांगों के लिये संघर्ष का किया आह्वान अलीगढ: आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक क्षेत्रीय सम्मेलन यहां उत्साह और गर्मजोशी के माहौल में संपन्न हुआ. बेहद गर्म मौसम के बावजूद सम्मेलन में आठ जिलों के 60 प्रतिनिधि शामिल हुये. सम्मेलन की अध्यक्षता ए.एम.यू. की एआईएसएफ की संयोजक कु. दूना मारिया भार्गवी भार्गवी ने की तथा संचालन एआईएसएफ अलीगढ के संयोजक अनीश कुमार ने किया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वलीउल्लाह खादरी ने शिक्षा पर बढते हमले, शिक्षा के बजट में की जारही कटौती, फीस में की जारही भारी वृध्दि, शिक्षा के निजीकरण और व्यापारीकरण तथा शिक्षा के भगवाकरण के प्रयासों पर सवाल खडे किये. उन्होने कहा कि केंद्र हो या राज्यों की सरकारें जन समुदाय को अपढ बना कर रखना चाहती हैं इसीलिये शिक्षा का बजट घटा रही हैं, विद्यार्थियों की फेलोशिप छीन रही है, जहां छात्र इसका विरोध कर रहे हैं उनको हर तरह से दबाया जारहा है. उन्होने सभी छात्रों से शिक्षा को बचाने और छात्रों के बुनियादी अधिकरों की रक्षा के लिये संघर्ष का आह्वान किया. कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और संगठन के महासचिव विश्वजीत कुमार ने कहा कि जिन्होने अब तक देश व देशवासियों के साथ गद्दारी की है, वे आज देशभक्त होने का प्रमाण बांट रहे हैं. देश व प्रदेश में शिक्षा की हालत बद से बदतर होती जारही है. एकतरफ जहां छात्रों को उपयुक्त शिक्षा व रोजगार नहीं मिल रहे हैं वहीं उनके अधिकारों को कुचला जारहा है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय, जे एन यू एवं रोहित वेमूला प्रकरण इसके उदाहरण हैं. इसलिये सभी को मुफ्त व समान शिक्षा , छात्रसंघों के चुनाव और रोजगार के लिये छात्रों का एकजुट संघर्ष ही छात्रों के भविष्य की रक्षा करेगा. एआईएसएफ इस संघर्ष के लिये सबसे उपयुक्त मंच है. सम्मेलन में प्रमुख वक्ता भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि यह गौरव केवल एक छात्र संगठन- 'एआईएसएफ' को ही हासिल है कि उसका जन्म आज़ादी के आंदोलन की कोख से हुआ और उसने आज़ादी की लडाई में हिस्सा लिया. उस दौर में यह आंदोलन की सभी प्रमुख धाराओं- कांग्रेस, सोशलिस्ट तथा कम्युनिस्ट विचारधारा के छात्रों का संयुक्त मंच था. छात्र आंदोलन के हितों और शिक्षा की उपादेयता को देखते हुये एआईएसएफ को छात्रों का संयुक्त मंच ही रहना चाहिये था लेकिन छात्रों को दलगत स्वार्थों की पूर्ति का मौहरा बनाने के लिये कांग्रेस ने एनएसयूआई तथा सोशलिस्टों ने समाजवादी युवजन सभा बनाली. आरएसएस जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी हुकूमत को बचाने के काम में लगा था, ने आज़ादी आने के बाद जनसंघ/ भाजपा बनाली तथा एबीवीपी नामक छात्र संगठन बना लिया. जिसका उद्देश्य छात्रों को केवल सांप्रदायिकता और जाति के नाम पर बांटना है. छात्रों और समाज के बुनियादी सवालों से उसका कोई लेना देना नहीं. केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद केंद्र सरकार ने छात्रों के खिलाफ युध्द छेड रखा है और विद्यार्थी परिषद उसके सह्योग में छात्रों के खिलाफ षडयंत्र कर रही है. जगह जगह वामपंथी और अंबेडकरवादी छात्र संगठनो पर हमले बोले जा रहे हैं. छात्रों को अपने शैक्षिक हितों के साथ साथ विद्यार्थी परिषद के छात्र विरोधी कुकृत्यों का भी जबाव देना होगा. भाकपा के राज्य सहसचिव का. अरविंदराज स्वरुप ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की शिक्षा और छात्रों को तबाह करने वाली नीतियों के खिलाफ जगह जगह जुझारू छात्र आंदोलन उग रहे हैं और अपने संघर्षो से कई जगह छात्रों ने सफलतायें हासिल की हैं. जेएनयू और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के संघर्ष इसका उदाहरण हैं. आने वाले दिनों में छात्रों, शिक्षा और उसके संस्थानो पर और तीव्र हमले होंगे और छात्रों को उसका जबाव भी मजबूती से देना होगा. छात्र आंदोलन को उचित दिशा देने का काम केवल एआईएसएफ कर सकता है अतएव उसे मजबूत बनाने की जरूरत है. भाकपा के जिला सचिव प्रोफेसर सुहेव शेरवानी ने कहा कि अलीगढ और उत्तर प्रदेश में एआईएसएफ तेजी से कदम बढा रही है. भाकपा हर तरह से उनका साथ देने को प्रतिबध्द है. उन्होने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह सभी को समान शिक्षा देने की व्यवस्था करे लेकिन राज्य सरकार ने इस ओर कोई कदम नहीं बढाया. हम सबको मिल कर सरकार पर दबाव बढाना चाहिये. प्रोफेसर शमीम अख्तर ने मोदी सरकार के फासिस्ट्वादी कदमों पर विस्तार से प्रकाश डाला. सम्मेलन को प्रदेश उपाध्यक्ष उत्कर्ष चतुर्वेदी, कु. फसलीन, यशपाल सिंह, देवेंद्र कुमार, गौरव सक्सेना, विनीत कुमार, पंकज सागर, अतुल, रवि शर्मा, अश्वनी कुमार, अभिषेक पचौरी, संतोष, यतेंद्र बघेल और हर्ष पालीवाल विवेक त्रिपाठी आदि ने भी संबोधित किया.
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ए.आई.एस.एफ. का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कार्यकर्ता सम्मेलन संपन्न सम्मेलन में झूठे देशभक्तों और पूंजीवादी ताकतों से लडने का लिया संकल्प: सबको एक समान शिक्षा, शैक्षिक कलेंडर लागू करने, छात्र संघों के चुनाव कराये जाने और सबको रोजगार दिये जाने की मांगों के लिये संघर्ष का किया आह्वान अलीगढ: आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक क्षेत्रीय सम्मेलन यहां उत्साह और गर्मजोशी के माहौल में संपन्न हुआ. बेहद गर्म मौसम के बावजूद सम्मेलन में आठ जिलों के 60 प्रतिनिधि शामिल हुये. सम्मेलन की अध्यक्षता ए.एम.यू. की एआईएसएफ की संयोजक कु. दूना मारिया भार्गवी भार्गवी ने की तथा संचालन एआईएसएफ अलीगढ के संयोजक अनीश कुमार ने किया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वलीउल्लाह खादरी ने शिक्षा पर बढते हमले, शिक्षा के बजट में की जारही कटौती, फीस में की जारही भारी वृध्दि, शिक्षा के निजीकरण और व्यापारीकरण तथा शिक्षा के भगवाकरण के प्रयासों पर सवाल खडे किये. उन्होने कहा कि केंद्र हो या राज्यों की सरकारें जन समुदाय को अपढ बना कर रखना चाहती हैं इसीलिये शिक्षा का बजट घटा रही हैं, विद्यार्थियों की फेलोशिप छीन रही है, जहां छात्र इसका विरोध कर रहे हैं उनको हर तरह से दबाया जारहा है. उन्होने सभी छात्रों से शिक्षा को बचाने और छात्रों के बुनियादी अधिकरों की रक्षा के लिये संघर्ष का आह्वान किया. कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और संगठन के महासचिव विश्वजीत कुमार ने कहा कि जिन्होने अब तक देश व देशवासियों के साथ गद्दारी की है, वे आज देशभक्त होने का प्रमाण बांट रहे हैं. देश व प्रदेश में शिक्षा की हालत बद से बदतर होती जारही है. एकतरफ जहां छात्रों को उपयुक्त शिक्षा व रोजगार नहीं मिल रहे हैं वहीं उनके अधिकारों को कुचला जारहा है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय, जे एन यू एवं रोहित वेमूला प्रकरण इसके उदाहरण हैं. इसलिये सभी को मुफ्त व समान शिक्षा , छात्रसंघों के चुनाव और रोजगार के लिये छात्रों का एकजुट संघर्ष ही छात्रों के भविष्य की रक्षा करेगा. एआईएसएफ इस संघर्ष के लिये सबसे उपयुक्त मंच है. सम्मेलन में प्रमुख वक्ता भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि यह गौरव केवल एक छात्र संगठन- 'एआईएसएफ' को ही हासिल है कि उसका जन्म आज़ादी के आंदोलन की कोख से हुआ और उसने आज़ादी की लडाई में हिस्सा लिया. उस दौर में यह आंदोलन की सभी प्रमुख धाराओं- कांग्रेस, सोशलिस्ट तथा कम्युनिस्ट विचारधारा के छात्रों का संयुक्त मंच था. छात्र आंदोलन के हितों और शिक्षा की उपादेयता को देखते हुये एआईएसएफ को छात्रों का संयुक्त मंच ही रहना चाहिये था लेकिन छात्रों को दलगत स्वार्थों की पूर्ति का मौहरा बनाने के लिये कांग्रेस ने एनएसयूआई तथा सोशलिस्टों ने समाजवादी युवजन सभा बनाली. आरएसएस जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी हुकूमत को बचाने के काम में लगा था, ने आज़ादी आने के बाद जनसंघ/ भाजपा बनाली तथा एबीवीपी नामक छात्र संगठन बना लिया. जिसका उद्देश्य छात्रों को केवल सांप्रदायिकता और जाति के नाम पर बांटना है. छात्रों और समाज के बुनियादी सवालों से उसका कोई लेना देना नहीं. केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद केंद्र सरकार ने छात्रों के खिलाफ युध्द छेड रखा है और विद्यार्थी परिषद उसके सह्योग में छात्रों के खिलाफ षडयंत्र कर रही है. जगह जगह वामपंथी और अंबेडकरवादी छात्र संगठनो पर हमले बोले जा रहे हैं. छात्रों को अपने शैक्षिक हितों के साथ साथ विद्यार्थी परिषद के छात्र विरोधी कुकृत्यों का भी जबाव देना होगा. भाकपा के राज्य सहसचिव का. अरविंदराज स्वरुप ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की शिक्षा और छात्रों को तबाह करने वाली नीतियों के खिलाफ जगह जगह जुझारू छात्र आंदोलन उग रहे हैं और अपने संघर्षो से कई जगह छात्रों ने सफलतायें हासिल की हैं. जेएनयू और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के संघर्ष इसका उदाहरण हैं. आने वाले दिनों में छात्रों, शिक्षा और उसके संस्थानो पर और तीव्र हमले होंगे और छात्रों को उसका जबाव भी मजबूती से देना होगा. छात्र आंदोलन को उचित दिशा देने का काम केवल एआईएसएफ कर सकता है अतएव उसे मजबूत बनाने की जरूरत है. भाकपा के जिला सचिव प्रोफेसर सुहेव शेरवानी ने कहा कि अलीगढ और उत्तर प्रदेश में एआईएसएफ तेजी से कदम बढा रही है. भाकपा हर तरह से उनका साथ देने को प्रतिबध्द है. उन्होने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह सभी को समान शिक्षा देने की व्यवस्था करे लेकिन राज्य सरकार ने इस ओर कोई कदम नहीं बढाया. हम सबको मिल कर सरकार पर दबाव बढाना चाहिये. प्रोफेसर शमीम अख्तर ने मोदी सरकार के फासिस्ट्वादी कदमों पर विस्तार से प्रकाश डाला. सम्मेलन को प्रदेश उपाध्यक्ष उत्कर्ष चतुर्वेदी, कु. फसलीन, यशपाल सिंह, देवेंद्र कुमार, गौरव सक्सेना, विनीत कुमार, पंकज सागर, अतुल, रवि शर्मा, अश्वनी कुमार, अभिषेक पचौरी, संतोष, यतेंद्र बघेल और हर्ष पालीवाल विवेक त्रिपाठी आदि ने भी संबोधित किया.
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ए.आई.एस.एफ. का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कार्यकर्ता सम्मेलन संपन्न सम्मेलन में झूठे देशभक्तों और पूंजीवादी ताकतों से लडने का लिया संकल्प: सबको एक समान शिक्षा, शैक्षिक कलेंडर लागू करने, छात्र संघों के चुनाव कराये जाने और सबको रोजगार दिये जाने की मांगों के लिये संघर्ष का किया आह्वान अलीगढ: आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक क्षेत्रीय सम्मेलन यहां उत्साह और गर्मजोशी के माहौल में संपन्न हुआ. बेहद गर्म मौसम के बावजूद सम्मेलन में आठ जिलों के 60 प्रतिनिधि शामिल हुये. सम्मेलन की अध्यक्षता ए.एम.यू. की एआईएसएफ की संयोजक कु. दूना मारिया भार्गवी भार्गवी ने की तथा संचालन एआईएसएफ अलीगढ के संयोजक अनीश कुमार ने किया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वलीउल्लाह खादरी ने शिक्षा पर बढते हमले, शिक्षा के बजट में की जारही कटौती, फीस में की जारही भारी वृध्दि, शिक्षा के निजीकरण और व्यापारीकरण तथा शिक्षा के भगवाकरण के प्रयासों पर सवाल खडे किये. उन्होने कहा कि केंद्र हो या राज्यों की सरकारें जन समुदाय को अपढ बना कर रखना चाहती हैं इसीलिये शिक्षा का बजट घटा रही हैं, विद्यार्थियों की फेलोशिप छीन रही है, जहां छात्र इसका विरोध कर रहे हैं उनको हर तरह से दबाया जारहा है. उन्होने सभी छात्रों से शिक्षा को बचाने और छात्रों के बुनियादी अधिकरों की रक्षा के लिये संघर्ष का आह्वान किया. कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और संगठन के महासचिव विश्वजीत कुमार ने कहा कि जिन्होने अब तक देश व देशवासियों के साथ गद्दारी की है, वे आज देशभक्त होने का प्रमाण बांट रहे हैं. देश व प्रदेश में शिक्षा की हालत बद से बदतर होती जारही है. एकतरफ जहां छात्रों को उपयुक्त शिक्षा व रोजगार नहीं मिल रहे हैं वहीं उनके अधिकारों को कुचला जारहा है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय, जे एन यू एवं रोहित वेमूला प्रकरण इसके उदाहरण हैं. इसलिये सभी को मुफ्त व समान शिक्षा , छात्रसंघों के चुनाव और रोजगार के लिये छात्रों का एकजुट संघर्ष ही छात्रों के भविष्य की रक्षा करेगा. एआईएसएफ इस संघर्ष के लिये सबसे उपयुक्त मंच है. सम्मेलन में प्रमुख वक्ता भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि यह गौरव केवल एक छात्र संगठन- 'एआईएसएफ' को ही हासिल है कि उसका जन्म आज़ादी के आंदोलन की कोख से हुआ और उसने आज़ादी की लडाई में हिस्सा लिया. उस दौर में यह आंदोलन की सभी प्रमुख धाराओं- कांग्रेस, सोशलिस्ट तथा कम्युनिस्ट विचारधारा के छात्रों का संयुक्त मंच था. छात्र आंदोलन के हितों और शिक्षा की उपादेयता को देखते हुये एआईएसएफ को छात्रों का संयुक्त मंच ही रहना चाहिये था लेकिन छात्रों को दलगत स्वार्थों की पूर्ति का मौहरा बनाने के लिये कांग्रेस ने एनएसयूआई तथा सोशलिस्टों ने समाजवादी युवजन सभा बनाली. आरएसएस जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी हुकूमत को बचाने के काम में लगा था, ने आज़ादी आने के बाद जनसंघ/ भाजपा बनाली तथा एबीवीपी नामक छात्र संगठन बना लिया. जिसका उद्देश्य छात्रों को केवल सांप्रदायिकता और जाति के नाम पर बांटना है. छात्रों और समाज के बुनियादी सवालों से उसका कोई लेना देना नहीं. केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद केंद्र सरकार ने छात्रों के खिलाफ युध्द छेड रखा है और विद्यार्थी परिषद उसके सह्योग में छात्रों के खिलाफ षडयंत्र कर रही है. जगह जगह वामपंथी और अंबेडकरवादी छात्र संगठनो पर हमले बोले जा रहे हैं. छात्रों को अपने शैक्षिक हितों के साथ साथ विद्यार्थी परिषद के छात्र विरोधी कुकृत्यों का भी जबाव देना होगा. भाकपा के राज्य सहसचिव का. अरविंदराज स्वरुप ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की शिक्षा और छात्रों को तबाह करने वाली नीतियों के खिलाफ जगह जगह जुझारू छात्र आंदोलन उग रहे हैं और अपने संघर्षो से कई जगह छात्रों ने सफलतायें हासिल की हैं. जेएनयू और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के संघर्ष इसका उदाहरण हैं. आने वाले दिनों में छात्रों, शिक्षा और उसके संस्थानो पर और तीव्र हमले होंगे और छात्रों को उसका जबाव भी मजबूती से देना होगा. छात्र आंदोलन को उचित दिशा देने का काम केवल एआईएसएफ कर सकता है अतएव उसे मजबूत बनाने की जरूरत है. भाकपा के जिला सचिव प्रोफेसर सुहेव शेरवानी ने कहा कि अलीगढ और उत्तर प्रदेश में एआईएसएफ तेजी से कदम बढा रही है. भाकपा हर तरह से उनका साथ देने को प्रतिबध्द है. उन्होने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह सभी को समान शिक्षा देने की व्यवस्था करे लेकिन राज्य सरकार ने इस ओर कोई कदम नहीं बढाया. हम सबको मिल कर सरकार पर दबाव बढाना चाहिये. प्रोफेसर शमीम अख्तर ने मोदी सरकार के फासिस्ट्वादी कदमों पर विस्तार से प्रकाश डाला. सम्मेलन को प्रदेश उपाध्यक्ष उत्कर्ष चतुर्वेदी, कु. फसलीन, यशपाल सिंह, देवेंद्र कुमार, गौरव सक्सेना, विनीत कुमार, पंकज सागर, अतुल, रवि शर्मा, अश्वनी कुमार, अभिषेक पचौरी, संतोष, यतेंद्र बघेल और हर्ष पालीवाल विवेक त्रिपाठी आदि ने भी संबोधित किया.
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ए.आई.एस.एफ. का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कार्यकर्ता सम्मेलन संपन्न सम्मेलन में झूठे देशभक्तों और पूंजीवादी ताकतों से लडने का लिया संकल्प: सबको एक समान शिक्षा, शैक्षिक कलेंडर लागू करने, छात्र संघों के चुनाव कराये जाने और सबको रोजगार दिये जाने की मांगों के लिये संघर्ष का किया आह्वान अलीगढ: आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक क्षेत्रीय सम्मेलन यहां उत्साह और गर्मजोशी के माहौल में संपन्न हुआ. बेहद गर्म मौसम के बावजूद सम्मेलन में आठ जिलों के 60 प्रतिनिधि शामिल हुये. सम्मेलन की अध्यक्षता ए.एम.यू. की एआईएसएफ की संयोजक कु. दूना मारिया भार्गवी भार्गवी ने की तथा संचालन एआईएसएफ अलीगढ के संयोजक अनीश कुमार ने किया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वलीउल्लाह खादरी ने शिक्षा पर बढते हमले, शिक्षा के बजट में की जारही कटौती, फीस में की जारही भारी वृध्दि, शिक्षा के निजीकरण और व्यापारीकरण तथा शिक्षा के भगवाकरण के प्रयासों पर सवाल खडे किये. उन्होने कहा कि केंद्र हो या राज्यों की सरकारें जन समुदाय को अपढ बना कर रखना चाहती हैं इसीलिये शिक्षा का बजट घटा रही हैं, विद्यार्थियों की फेलोशिप छीन रही है, जहां छात्र इसका विरोध कर रहे हैं उनको हर तरह से दबाया जारहा है. उन्होने सभी छात्रों से शिक्षा को बचाने और छात्रों के बुनियादी अधिकरों की रक्षा के लिये संघर्ष का आह्वान किया. कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और संगठन के महासचिव विश्वजीत कुमार ने कहा कि जिन्होने अब तक देश व देशवासियों के साथ गद्दारी की है, वे आज देशभक्त होने का प्रमाण बांट रहे हैं. देश व प्रदेश में शिक्षा की हालत बद से बदतर होती जारही है. एकतरफ जहां छात्रों को उपयुक्त शिक्षा व रोजगार नहीं मिल रहे हैं वहीं उनके अधिकारों को कुचला जारहा है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय, जे एन यू एवं रोहित वेमूला प्रकरण इसके उदाहरण हैं. इसलिये सभी को मुफ्त व समान शिक्षा , छात्रसंघों के चुनाव और रोजगार के लिये छात्रों का एकजुट संघर्ष ही छात्रों के भविष्य की रक्षा करेगा. एआईएसएफ इस संघर्ष के लिये सबसे उपयुक्त मंच है. सम्मेलन में प्रमुख वक्ता भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि यह गौरव केवल एक छात्र संगठन- 'एआईएसएफ' को ही हासिल है कि उसका जन्म आज़ादी के आंदोलन की कोख से हुआ और उसने आज़ादी की लडाई में हिस्सा लिया. उस दौर में यह आंदोलन की सभी प्रमुख धाराओं- कांग्रेस, सोशलिस्ट तथा कम्युनिस्ट विचारधारा के छात्रों का संयुक्त मंच था. छात्र आंदोलन के हितों और शिक्षा की उपादेयता को देखते हुये एआईएसएफ को छात्रों का संयुक्त मंच ही रहना चाहिये था लेकिन छात्रों को दलगत स्वार्थों की पूर्ति का मौहरा बनाने के लिये कांग्रेस ने एनएसयूआई तथा सोशलिस्टों ने समाजवादी युवजन सभा बनाली. आरएसएस जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी हुकूमत को बचाने के काम में लगा था, ने आज़ादी आने के बाद जनसंघ/ भाजपा बनाली तथा एबीवीपी नामक छात्र संगठन बना लिया. जिसका उद्देश्य छात्रों को केवल सांप्रदायिकता और जाति के नाम पर बांटना है. छात्रों और समाज के बुनियादी सवालों से उसका कोई लेना देना नहीं. केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद केंद्र सरकार ने छात्रों के खिलाफ युध्द छेड रखा है और विद्यार्थी परिषद उसके सह्योग में छात्रों के खिलाफ षडयंत्र कर रही है. जगह जगह वामपंथी और अंबेडकरवादी छात्र संगठनो पर हमले बोले जा रहे हैं. छात्रों को अपने शैक्षिक हितों के साथ साथ विद्यार्थी परिषद के छात्र विरोधी कुकृत्यों का भी जबाव देना होगा. भाकपा के राज्य सहसचिव का. अरविंदराज स्वरुप ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की शिक्षा और छात्रों को तबाह करने वाली नीतियों के खिलाफ जगह जगह जुझारू छात्र आंदोलन उग रहे हैं और अपने संघर्षो से कई जगह छात्रों ने सफलतायें हासिल की हैं. जेएनयू और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के संघर्ष इसका उदाहरण हैं. आने वाले दिनों में छात्रों, शिक्षा और उसके संस्थानो पर और तीव्र हमले होंगे और छात्रों को उसका जबाव भी मजबूती से देना होगा. छात्र आंदोलन को उचित दिशा देने का काम केवल एआईएसएफ कर सकता है अतएव उसे मजबूत बनाने की जरूरत है. भाकपा के जिला सचिव प्रोफेसर सुहेव शेरवानी ने कहा कि अलीगढ और उत्तर प्रदेश में एआईएसएफ तेजी से कदम बढा रही है. भाकपा हर तरह से उनका साथ देने को प्रतिबध्द है. उन्होने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह सभी को समान शिक्षा देने की व्यवस्था करे लेकिन राज्य सरकार ने इस ओर कोई कदम नहीं बढाया. हम सबको मिल कर सरकार पर दबाव बढाना चाहिये. प्रोफेसर शमीम अख्तर ने मोदी सरकार के फासिस्ट्वादी कदमों पर विस्तार से प्रकाश डाला. सम्मेलन को प्रदेश उपाध्यक्ष उत्कर्ष चतुर्वेदी, कु. फसलीन, यशपाल सिंह, देवेंद्र कुमार, गौरव सक्सेना, विनीत कुमार, पंकज सागर, अतुल, रवि शर्मा, अश्वनी कुमार, अभिषेक पचौरी, संतोष, यतेंद्र बघेल और हर्ष पालीवाल विवेक त्रिपाठी आदि ने भी संबोधित किया.
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ए.आई.एस.एफ. का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कार्यकर्ता सम्मेलन संपन्न सम्मेलन में झूठे देशभक्तों और पूंजीवादी ताकतों से लडने का लिया संकल्प: सबको एक समान शिक्षा, शैक्षिक कलेंडर लागू करने, छात्र संघों के चुनाव कराये जाने और सबको रोजगार दिये जाने की मांगों के लिये संघर्ष का किया आह्वान अलीगढ: आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक क्षेत्रीय सम्मेलन यहां उत्साह और गर्मजोशी के माहौल में संपन्न हुआ. बेहद गर्म मौसम के बावजूद सम्मेलन में आठ जिलों के 60 प्रतिनिधि शामिल हुये. सम्मेलन की अध्यक्षता ए.एम.यू. की एआईएसएफ की संयोजक कु. दूना मारिया भार्गवी भार्गवी ने की तथा संचालन एआईएसएफ अलीगढ के संयोजक अनीश कुमार ने किया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वलीउल्लाह खादरी ने शिक्षा पर बढते हमले, शिक्षा के बजट में की जारही कटौती, फीस में की जारही भारी वृध्दि, शिक्षा के निजीकरण और व्यापारीकरण तथा शिक्षा के भगवाकरण के प्रयासों पर सवाल खडे किये. उन्होने कहा कि केंद्र हो या राज्यों की सरकारें जन समुदाय को अपढ बना कर रखना चाहती हैं इसीलिये शिक्षा का बजट घटा रही हैं, विद्यार्थियों की फेलोशिप छीन रही है, जहां छात्र इसका विरोध कर रहे हैं उनको हर तरह से दबाया जारहा है. उन्होने सभी छात्रों से शिक्षा को बचाने और छात्रों के बुनियादी अधिकरों की रक्षा के लिये संघर्ष का आह्वान किया. कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और संगठन के महासचिव विश्वजीत कुमार ने कहा कि जिन्होने अब तक देश व देशवासियों के साथ गद्दारी की है, वे आज देशभक्त होने का प्रमाण बांट रहे हैं. देश व प्रदेश में शिक्षा की हालत बद से बदतर होती जारही है. एकतरफ जहां छात्रों को उपयुक्त शिक्षा व रोजगार नहीं मिल रहे हैं वहीं उनके अधिकारों को कुचला जारहा है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय, जे एन यू एवं रोहित वेमूला प्रकरण इसके उदाहरण हैं. इसलिये सभी को मुफ्त व समान शिक्षा , छात्रसंघों के चुनाव और रोजगार के लिये छात्रों का एकजुट संघर्ष ही छात्रों के भविष्य की रक्षा करेगा. एआईएसएफ इस संघर्ष के लिये सबसे उपयुक्त मंच है. सम्मेलन में प्रमुख वक्ता भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि यह गौरव केवल एक छात्र संगठन- 'एआईएसएफ' को ही हासिल है कि उसका जन्म आज़ादी के आंदोलन की कोख से हुआ और उसने आज़ादी की लडाई में हिस्सा लिया. उस दौर में यह आंदोलन की सभी प्रमुख धाराओं- कांग्रेस, सोशलिस्ट तथा कम्युनिस्ट विचारधारा के छात्रों का संयुक्त मंच था. छात्र आंदोलन के हितों और शिक्षा की उपादेयता को देखते हुये एआईएसएफ को छात्रों का संयुक्त मंच ही रहना चाहिये था लेकिन छात्रों को दलगत स्वार्थों की पूर्ति का मौहरा बनाने के लिये कांग्रेस ने एनएसयूआई तथा सोशलिस्टों ने समाजवादी युवजन सभा बनाली. आरएसएस जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी हुकूमत को बचाने के काम में लगा था, ने आज़ादी आने के बाद जनसंघ/ भाजपा बनाली तथा एबीवीपी नामक छात्र संगठन बना लिया. जिसका उद्देश्य छात्रों को केवल सांप्रदायिकता और जाति के नाम पर बांटना है. छात्रों और समाज के बुनियादी सवालों से उसका कोई लेना देना नहीं. केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद केंद्र सरकार ने छात्रों के खिलाफ युध्द छेड रखा है और विद्यार्थी परिषद उसके सह्योग में छात्रों के खिलाफ षडयंत्र कर रही है. जगह जगह वामपंथी और अंबेडकरवादी छात्र संगठनो पर हमले बोले जा रहे हैं. छात्रों को अपने शैक्षिक हितों के साथ साथ विद्यार्थी परिषद के छात्र विरोधी कुकृत्यों का भी जबाव देना होगा. भाकपा के राज्य सहसचिव का. अरविंदराज स्वरुप ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की शिक्षा और छात्रों को तबाह करने वाली नीतियों के खिलाफ जगह जगह जुझारू छात्र आंदोलन उग रहे हैं और अपने संघर्षो से कई जगह छात्रों ने सफलतायें हासिल की हैं. जेएनयू और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के संघर्ष इसका उदाहरण हैं. आने वाले दिनों में छात्रों, शिक्षा और उसके संस्थानो पर और तीव्र हमले होंगे और छात्रों को उसका जबाव भी मजबूती से देना होगा. छात्र आंदोलन को उचित दिशा देने का काम केवल एआईएसएफ कर सकता है अतएव उसे मजबूत बनाने की जरूरत है. भाकपा के जिला सचिव प्रोफेसर सुहेव शेरवानी ने कहा कि अलीगढ और उत्तर प्रदेश में एआईएसएफ तेजी से कदम बढा रही है. भाकपा हर तरह से उनका साथ देने को प्रतिबध्द है. उन्होने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह सभी को समान शिक्षा देने की व्यवस्था करे लेकिन राज्य सरकार ने इस ओर कोई कदम नहीं बढाया. हम सबको मिल कर सरकार पर दबाव बढाना चाहिये. प्रोफेसर शमीम अख्तर ने मोदी सरकार के फासिस्ट्वादी कदमों पर विस्तार से प्रकाश डाला. सम्मेलन को प्रदेश उपाध्यक्ष उत्कर्ष चतुर्वेदी, कु. फसलीन, यशपाल सिंह, देवेंद्र कुमार, गौरव सक्सेना, विनीत कुमार, पंकज सागर, अतुल, रवि शर्मा, अश्वनी कुमार, अभिषेक पचौरी, संतोष, यतेंद्र बघेल और हर्ष पालीवाल विवेक त्रिपाठी आदि ने भी संबोधित किया.
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ए.आई.एस.एफ. का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कार्यकर्ता सम्मेलन संपन्न सम्मेलन में झूठे देशभक्तों और पूंजीवादी ताकतों से लडने का लिया संकल्प: सबको एक समान शिक्षा, शैक्षिक कलेंडर लागू करने, छात्र संघों के चुनाव कराये जाने और सबको रोजगार दिये जाने की मांगों के लिये संघर्ष का किया आह्वान अलीगढ: आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक क्षेत्रीय सम्मेलन यहां उत्साह और गर्मजोशी के माहौल में संपन्न हुआ. बेहद गर्म मौसम के बावजूद सम्मेलन में आठ जिलों के 60 प्रतिनिधि शामिल हुये. सम्मेलन की अध्यक्षता ए.एम.यू. की एआईएसएफ की संयोजक कु. दूना मारिया भार्गवी भार्गवी ने की तथा संचालन एआईएसएफ अलीगढ के संयोजक अनीश कुमार ने किया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वलीउल्लाह खादरी ने शिक्षा पर बढते हमले, शिक्षा के बजट में की जारही कटौती, फीस में की जारही भारी वृध्दि, शिक्षा के निजीकरण और व्यापारीकरण तथा शिक्षा के भगवाकरण के प्रयासों पर सवाल खडे किये. उन्होने कहा कि केंद्र हो या राज्यों की सरकारें जन समुदाय को अपढ बना कर रखना चाहती हैं इसीलिये शिक्षा का बजट घटा रही हैं, विद्यार्थियों की फेलोशिप छीन रही है, जहां छात्र इसका विरोध कर रहे हैं उनको हर तरह से दबाया जारहा है. उन्होने सभी छात्रों से शिक्षा को बचाने और छात्रों के बुनियादी अधिकरों की रक्षा के लिये संघर्ष का आह्वान किया. कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और संगठन के महासचिव विश्वजीत कुमार ने कहा कि जिन्होने अब तक देश व देशवासियों के साथ गद्दारी की है, वे आज देशभक्त होने का प्रमाण बांट रहे हैं. देश व प्रदेश में शिक्षा की हालत बद से बदतर होती जारही है. एकतरफ जहां छात्रों को उपयुक्त शिक्षा व रोजगार नहीं मिल रहे हैं वहीं उनके अधिकारों को कुचला जारहा है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय, जे एन यू एवं रोहित वेमूला प्रकरण इसके उदाहरण हैं. इसलिये सभी को मुफ्त व समान शिक्षा , छात्रसंघों के चुनाव और रोजगार के लिये छात्रों का एकजुट संघर्ष ही छात्रों के भविष्य की रक्षा करेगा. एआईएसएफ इस संघर्ष के लिये सबसे उपयुक्त मंच है. सम्मेलन में प्रमुख वक्ता भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि यह गौरव केवल एक छात्र संगठन- 'एआईएसएफ' को ही हासिल है कि उसका जन्म आज़ादी के आंदोलन की कोख से हुआ और उसने आज़ादी की लडाई में हिस्सा लिया. उस दौर में यह आंदोलन की सभी प्रमुख धाराओं- कांग्रेस, सोशलिस्ट तथा कम्युनिस्ट विचारधारा के छात्रों का संयुक्त मंच था. छात्र आंदोलन के हितों और शिक्षा की उपादेयता को देखते हुये एआईएसएफ को छात्रों का संयुक्त मंच ही रहना चाहिये था लेकिन छात्रों को दलगत स्वार्थों की पूर्ति का मौहरा बनाने के लिये कांग्रेस ने एनएसयूआई तथा सोशलिस्टों ने समाजवादी युवजन सभा बनाली. आरएसएस जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजी हुकूमत को बचाने के काम में लगा था, ने आज़ादी आने के बाद जनसंघ/ भाजपा बनाली तथा एबीवीपी नामक छात्र संगठन बना लिया. जिसका उद्देश्य छात्रों को केवल सांप्रदायिकता और जाति के नाम पर बांटना है. छात्रों और समाज के बुनियादी सवालों से उसका कोई लेना देना नहीं. केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद केंद्र सरकार ने छात्रों के खिलाफ युध्द छेड रखा है और विद्यार्थी परिषद उसके सह्योग में छात्रों के खिलाफ षडयंत्र कर रही है. जगह जगह वामपंथी और अंबेडकरवादी छात्र संगठनो पर हमले बोले जा रहे हैं. छात्रों को अपने शैक्षिक हितों के साथ साथ विद्यार्थी परिषद के छात्र विरोधी कुकृत्यों का भी जबाव देना होगा. भाकपा के राज्य सहसचिव का. अरविंदराज स्वरुप ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की शिक्षा और छात्रों को तबाह करने वाली नीतियों के खिलाफ जगह जगह जुझारू छात्र आंदोलन उग रहे हैं और अपने संघर्षो से कई जगह छात्रों ने सफलतायें हासिल की हैं. जेएनयू और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के संघर्ष इसका उदाहरण हैं. आने वाले दिनों में छात्रों, शिक्षा और उसके संस्थानो पर और तीव्र हमले होंगे और छात्रों को उसका जबाव भी मजबूती से देना होगा. छात्र आंदोलन को उचित दिशा देने का काम केवल एआईएसएफ कर सकता है अतएव उसे मजबूत बनाने की जरूरत है. भाकपा के जिला सचिव प्रोफेसर सुहेव शेरवानी ने कहा कि अलीगढ और उत्तर प्रदेश में एआईएसएफ तेजी से कदम बढा रही है. भाकपा हर तरह से उनका साथ देने को प्रतिबध्द है. उन्होने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह सभी को समान शिक्षा देने की व्यवस्था करे लेकिन राज्य सरकार ने इस ओर कोई कदम नहीं बढाया. हम सबको मिल कर सरकार पर दबाव बढाना चाहिये. प्रोफेसर शमीम अख्तर ने मोदी सरकार के फासिस्ट्वादी कदमों पर विस्तार से प्रकाश डाला. सम्मेलन को प्रदेश उपाध्यक्ष उत्कर्ष चतुर्वेदी, कु. फसलीन, यशपाल सिंह, देवेंद्र कुमार, गौरव सक्सेना, विनीत कुमार, पंकज सागर, अतुल, रवि शर्मा, अश्वनी कुमार, अभिषेक पचौरी, संतोष, यतेंद्र बघेल और हर्ष पालीवाल विवेक त्रिपाठी आदि ने भी संबोधित किया.
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मंगलवार, 17 मई 2016

आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कार्यकर्ता सम्मेलन 23 मई को अलीगढ में

अलीगढ- आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का क्षेत्रीय सम्मेलन 23मई, सोमवार को अलीगढ में संपन्न होने जारहा है. इस सम्मेलन में छात्रों और शिक्षा से जुडी बुनियादी समस्याओं पर गहनता से चर्चा होगी. इन समस्याओं से कैसे निपटा जाये और आम छात्रों को सस्ती, अच्छी और रोजगारपरक शिक्षा दिलाने को क्या कदम उठाये जायें इस पर भी विस्तार से चर्चा होगी. देश की आज़ादी की लडाई के दौरान पैदा हुये और देश के छात्रों का सबसे पहला संगठन होने का गौरव प्राप्त इस संगठन के आज की चुनौतियों से निपटने योग्य ढांचे के निर्माण पर भी चर्चा होगी. सम्मेलन की तैयारियों आदि के संबंध में जानकारी देते हुये एआईएसएफ अलीगढ के संयोजक अनीश कुमार तथा इसकी एएमयू इकाई की संयोजक कु. दूना मारिया भार्गवी ने बताया कि यह सम्मेलन 23 मई को सुबह 10:30 बजे से एआईएसएफ के पान दरीबा (निकट रेलवे स्टेशन) स्थित कार्यालय पर संपन्न होगा. सम्मेलन की सारी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. स्वागत समिति का अध्यक्ष एआईएसएफ के पूर्व कार्यकर्ता और वर्तमान में भाकपा के जिला सचिव का. सुहेव शेरवानी को बनाया गया है. नेताद्वय ने बताया कि इस सम्मेलन के मुख्य वक्ता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सय्यद वली उल्लाह खादरी एवं राष्ट्रीय महासचिव विश्वजीत कुमार होंगे. मुख्य अतिथि एआईएसएफ के पूर्व प्रांतीय सचिव और वर्तमान में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश और भाकपा के राज्य सहसचिव अरविंद राज स्वरुप होंगे. कई राज्य स्तरीय नेताओं के भी इस सम्मेलन में आने की संभावना है. जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार के अलीगढ आगमन को लेकर आये दिन प्रकाशित होरहे समाचारों को बेबुनियाद बताते हुये दोनों छात्र नेताओं ने कहा कि अलीगढ एआईएसएफ अपना ध्यान पूरी तरह से छात्र हितों पर केंद्रित किये हुये है. कन्हैया कुमार के यहां आगमन का फिलहाल कोई कार्यक्रम नहीं है. अनीश कुमार और दूना मारिया भार्गवी ने एआईएसएफ के सभी कार्यकर्ताओं से समय पर पहुंच कर सम्मेलन में भाग लेने की अपील की है. अनीश कुमार, अलीगढ संयोजक दूना मारिया भार्गवी, एएमयू संयोजक
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शुक्रवार, 13 मई 2016

इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र आंदोलन और भाकपा/ ए.आई.एस.एफ,

अपनी एकजुटता और संघर्ष के बल पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने एक बढी जंग जीत ली है. करीब हफ्ते भर तक चले इस आंदोलन के द्वारा छात्र अपनी मांगों को मनबाने में पूरी तरह कामयाब रहे हैं. उन्होने मानव संसाधन मंत्रालय को अपने तानाशाहीपूर्ण कदमों को वापस लेने को बाध्य किया है. मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी के शिक्षण संस्थाओं में हस्तक्षेप न करने के दाबों की इस आंदोलन ने कलई खोल कर रख दी है. संदेश साफ है कि छात्र भगवा ब्रिगेड के शिक्षा विरोधी और छात्र विरोधी कामों को सहेंगे नहीं. वे लडेंगे भी और जीतेंगे भी. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और एआईएसएफ छात्रों- नौजवानों के हर बुनियादी संघर्षों में उनके साथ खडे हुये हैं और साथ खडे रहने को संकल्पबध्द हैं. वे मन वाणी और कर्म से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र- छात्राओं के साथ खडे रहे. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और एआईएसएफ के एक राज्य स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने गत 8 मई को इलाहाबाद पहुंच कर वहां अपनी समस्याओं के लिये छात्र संघ भवन में अनशन कर रहे छात्र- छात्राओं से भेंट की और उनके संघर्ष के प्रति एकजुटता का इजहार किया. भाकपा उत्तर प्रदेश के सचिव डा. गिरीश के नेत्रत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के राज्य सहसचिव का. अरविंदराज स्वरुप एवं एआईएसएफ उत्तर प्रदेश के संयुक्त सचिव मयंक चक्रवर्ती भी शामिल थे. इलाहाबाद में पार्टी के जिला सह सचिव का. नसीम अंसारी, वरिष्ठ नेता का. गिरिधर गोपाल त्रिपाठी एडवोकेट, एटक लीडर का. मुस्तकीम एवं एआईएसएफ के अमितांशु गौर भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल होगये. केंद्रीय एवं राज्य की प्रशासनिक सेवाओं के लिये मानव संसाधन मुहैया कराने के लिये प्रसिध्द इस विश्वविद्यालय का छात्रसंघ भी उतना ही प्रसिध्द रहा है और इसके पदों पर चुने गये तमाम लोग राजनीतिक, सामाजिक और अन्य कई क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा चुके हैं. लेकिन कई दशकों से पूंजीवादी दलों द्वारा पोषित राजनीति में आई गिरावट का ग्रहण शिक्षण संस्थाओं को भी लगा और इलाहाबाद विश्वविद्यालय का शैक्षिक स्तर और उसका छात्रसंघ भी उससे प्रभावित हुआ. लेकिन इस बार वहाँ के छात्र- छात्राओं ने पहली बार एक छात्रा ऋचा सिंह को विश्वविद्यालय छात्रसंघ का अध्यक्ष चुना जो वहां चुने गये पदाधिकारियों में एक मात्र गैर भाजपा पदाधिकारी थीं. उन्हें इस बात का श्रेय जाता है कि तमाम दबावों और घेराबंदियों के बावजूद उन्होने भयंकर सांप्रदायिक एवं हिंदू कट्टरपंथी गोरखपुर के भाजपा सांसद श्री आदित्यनाथ को विश्वविद्यालय परिसर में आने से रोक दिया था. उसके बाद से ही वह संघ परिवार के निशाने पर थीं और केंद्र सरकार और स्थानीय भाजपाइयों के इशारे पर विश्वविद्यालय प्रशासन उन्हें तरह तरह से परेशान कर रहा था. भाकपा और एआईएसएफ ने इस समूची जद्दोजहद में हमेशा उनका मनोबल बढाया. पिछले दिनों विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्र संगठनों ने ऋचा सिंह के नेत्रत्व में कुलपति श्री रतनलाल हाँगलू को एक सात सूत्रीय ज्ञापन संयुक्त रुप से सौंपा था जिसमें उन्होने कहा था कि विश्वविद्यालय के ग्रामीण अंचल के छात्रों की बहुलता को देखते हुये परास्नातक सहित सभी प्रवेश परीक्षाओं में 'आफ लाइन' का विकल्प भी दिया जाये, पिछले दिनों जिन 17 छात्रों का निलंबन किया गया है उसे वापस लिया जाये, आनलाइन आवेदनों में वेवसाइट की गडबडी के कारण छात्रों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड रहा है, उसे तत्काल सुधारा जाये. प्रवेश परीक्षाओं का बढा हुआ शुल्क जो कि पिछले से लगभग दोगुना है वापस किया जाये, डबल एम.ए. करने हेतु 80 प्रतिशत अंक की अपरिहार्यता और अव्यवहारिकता को वापस लिया जाये, प्रवेश हेतु जमा होने वाला चालान एस. बी.आई. के माध्यम से भी जमा करने का विकल्प हो. ज्ञापन में यह भी कहा गया कि प्रवेश परीक्षाओं का टेंडर पारदर्शी तरीके से न होना प्रवेश प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खडे करता है. मात्र टी.सी.एस के आवेदन के बाद उसका टेंडर देना अनुचित है. आंदोलनकारी छात्र- छात्रायें जब इन मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में पुलिस को बुलबा भेजा. तमाम छात्रो को पीटा गया और वे लहू लुहान होगये, उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तार किया गया. पर रिहाई के बाद वे यूनियन हाल में अध्यक्ष ऋचा सिंह के नेत्रत्व में आमरण अनशन पर बैठ गये. वे कुलपति कार्यालय के समक्ष अनशन करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने बल प्रयोग कर उन्हें वहां बैठने से रोक दिया. भाकपा और एआईएसएफ ने अलग अलग बयान जारी कर इस पुलिसिया कार्यवाही की निंदा की और छात्रों की मांगों का समर्थन किया. आंदोलन का नेत्रत्व कर रही ऋचा सिंह को फोन कर छात्रों का मनोबल भी बढाया गया. छात्र छात्राओं पड रहे चहुंतरफा दबाव और उनके स्वास्थ्य में आरही गिरावट के समाचार भाकपा और एआईएसएफ के राज्य केंद्र को मिल रहे थे अतएव पार्टी नेत्रत्व ने वहाँ पहुंच कर छात्रों के इस आंदोलन को सक्रिय समर्थन प्रदान करने का फैसला लिया. प्रतिनिधिमंडल जिस दिन वहां पहुंचा, आमरण अनशन का छठवां दिन था. चूंकि वहां पहुंचने का समाचार समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ था तो सभी आंदोलनकारी छात्र इस प्रतिनिधिमंडल का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे. प्रतिनिधिमंडल ने ऋचा सिंह से बात की और उनका साहस बढाया. वहीं पता लगा कि पूर्व की रात को पुलिस ने अनशनकारियों को गिरफ्तार करने की कोशिश की थी लेकिन छात्रों ने अपने को यूनियन हाल में बंद कर लिया. यू.पी. सरकार के पुलिस और प्रशासन का यह रवैया समझ से परे था. ऋचा सिंह ने छात्रो के बीच ले जाकर प्रतिनिधिमंडल से विचार व्यक्त करने का आग्रह किया. उपस्थित छात्र समुदाय को संबोधित करते हुये भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि आफलाइन विकल्प के अभाव में ग्रामीण और गरीब तबके के छात्र शिक्षा से वंचित रह जायेंगे इसलिये आम छात्रों के हित में आफलाइन का विकल्प भी खुला रहना चाहिये. उन्होने छात्रों की न्यायोचित मांगों के प्रति केंद्र सरकार व विश्वविद्यालय प्रशासन की हठवादिता और छात्रों पर पुलिस/प्रशासन द्वारा किये जारहे बल प्रयोग की कडे शब्दों में निंदा की और छात्रों के इस न्याययुध्द में हर संभव मदद का भरोसा उन्हें दिलाया. उन्होने घोषणा की कि लखनऊ लौटने पर भाकपा महामहिम राज्यपाल से भेंट कर छात्रों को न्याय दिलाने की मांग करेगी. छात्रों ने बढी ही गर्मजोशी से प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और उनके प्रति आभार व्यक्त किया. यद्यपि वहां अन्य कई प्रतिनिधिमंडल भी आये हुये थे पर भाकपा और एआईएसएफ के प्रतिनिधिमंडल के वहां पहुंचने से भाजपा और सपा के खीमों में काफी हलचल दिखाई दी. अगले दिन मीडिया ने भी प्रतिनिधिमंडल की खबरों को प्रमुखता से छापा. सत्ताधारियो का सिंहासन हिला और 48 घंटे के भीतर ही छात्रों की प्रमुख मांगों को मान लिया गया और अनशन समाप्त करा दिया गया. समझौते के अनुसार अब विश्वविद्यालय में प्रवेश में आफ लाइन का विकल्प खोला गया है, डबल एम.ए. के प्रवेश में अब 80 के बजाय 60 प्रतिशत अंक ही आवश्यक होंगे तथा छात्रों के निलंबन की कार्यवाही पर पुनर्विचार किया जायेगा. इस सफलता के बाद ऋचा सिंह और कई छात्रों ने भाकपा नेत्रत्व को न केवल इसकी सूचना दी अपितु उनके प्रति कृतज्ञता भी ज्ञापित की. भाकपा नेत्रत्व ने भी उन्हे बधाई दी. एआईएसएफ इलाहाबाद के एक प्रतिनिधिमंडल ने सन्योजक अजीत सिंह के नेत्रत्व में ऋचा सिंह एवं अन्य आंदोलनकारी छात्रों से छात्रसंघ भवन में जाकर इस सफलता के लिये उन्हें पुरजोर तरीके से बधाई दी. प्रतिनिधिमंडल में अमितांशु गौर, मो.खालिद, सर्वेश मिश्रा, गौरीशंकर, विमर्श एवं संकर्ष भी शामिल थे. ऋचा सिंह ने सहयोग और समर्थन के लिये धन्यवाद दिया और कृतज्ञता ज्ञापित की. यह छात्रों के संघर्षों का ही नतीजा है कि मानव संसाधन मंत्रालय को घुटने टेकने पडे हैं. केंद्र सरकार के पलटी मारने से कल तक उसके यस मैन बने कुलपति हाँगलू आहत महसूस कर रहे हैं. उन्होने स्मृति ईरानी और भाजपा पर विश्वविद्यालय में हस्तक्षेप का आरोप जडा है. यह तो जग जाहिर ही था, पर पहली बार किसी कुलपति ने भी इस सच पर से पर्दा उठाया है. यह भी उल्लेखनीय है कि जो विद्यार्थी परिषद ऋचा सिंह के खून का प्यासा बना हुआ था, छात्रों के दबाव में और अपने अस्तित्व की रक्षा के लिये उसे भी सबके साथ अनशन पर बैठना पडा. डा. गिरीश
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय का छात्र आंदोलन एवं भाकपा तथा आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन का योगदान

अपनी एकजुटता और संघर्ष के बल पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने एक बढी जंग जीत ली है. करीब हफ्ते भर तक चले इस आंदोलन के द्वारा छात्र अपनी मांगों को मनबाने में पूरी तरह कामयाब रहे हैं. उन्होने मानव संसाधन मंत्रालय को अपने तानाशाहीपूर्ण कदमों को वापस लेने को बाध्य किया है. मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी के शिक्षण संस्थाओं में हस्तक्षेप न करने के दाबों की इस आंदोलन ने कलई खोल कर रख दी है. संदेश साफ है कि छात्र भगवा ब्रिगेड के शिक्षा विरोधी और छात्र विरोधी कामों को सहेंगे नहीं. वे लडेंगे भी और जीतेंगे भी. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और एआईएसएफ छात्रों- नौजवानों के हर बुनियादी संघर्षों में उनके साथ खडे हुये हैं और साथ खडे रहने को संकल्पबध्द हैं. वे मन वाणी और कर्म से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र- छात्राओं के साथ खडे रहे. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और एआईएसएफ के एक राज्य स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने गत 8 मई को इलाहाबाद पहुंच कर वहां अपनी समस्याओं के लिये छात्र संघ भवन में अनशन कर रहे छात्र- छात्राओं से भेंट की और उनके संघर्ष के प्रति एकजुटता का इजहार किया. भाकपा उत्तर प्रदेश के सचिव डा. गिरीश के नेत्रत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के राज्य सहसचिव का. अरविंदराज स्वरुप एवं एआईएसएफ उत्तर प्रदेश के संयुक्त सचिव मयंक चक्रवर्ती भी शामिल थे. इलाहाबाद में पार्टी के जिला सह सचिव का. नसीम अंसारी, वरिष्ठ नेता का. गिरिधर गोपाल त्रिपाठी एडवोकेट, एटक लीडर का. मुस्तकीम एवं एआईएसएफ के अमितांशु गौर भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल होगये. केंद्रीय एवं राज्य की प्रशासनिक सेवाओं के लिये मानव संसाधन मुहैया कराने के लिये प्रसिध्द इस विश्वविद्यालय का छात्रसंघ भी उतना ही प्रसिध्द रहा है और इसके पदों पर चुने गये तमाम लोग राजनीतिक, सामाजिक और अन्य कई क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा चुके हैं. लेकिन कई दशकों से पूंजीवादी दलों द्वारा पोषित राजनीति में आई गिरावट का ग्रहण शिक्षण संस्थाओं को भी लगा और इलाहाबाद विश्वविद्यालय का शैक्षिक स्तर और उसका छात्रसंघ भी उससे प्रभावित हुआ. लेकिन इस बार वहाँ के छात्र- छात्राओं ने पहली बार एक छात्रा ऋचा सिंह को विश्वविद्यालय छात्रसंघ का अध्यक्ष चुना जो वहां चुने गये पदाधिकारियों में एक मात्र गैर भाजपा पदाधिकारी थीं. उन्हें इस बात का श्रेय जाता है कि तमाम दबावों और घेराबंदियों के बावजूद उन्होने भयंकर सांप्रदायिक एवं हिंदू कट्टरपंथी गोरखपुर के भाजपा सांसद श्री आदित्यनाथ को विश्वविद्यालय परिसर में आने से रोक दिया था. उसके बाद से ही वह संघ परिवार के निशाने पर थीं और केंद्र सरकार और स्थानीय भाजपाइयों के इशारे पर विश्वविद्यालय प्रशासन उन्हें तरह तरह से परेशान कर रहा था. भाकपा और एआईएसएफ ने इस समूची जद्दोजहद में हमेशा उनका मनोबल बढाया. पिछले दिनों विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्र संगठनों ने ऋचा सिंह के नेत्रत्व में कुलपति श्री रतनलाल हाँगलू को एक सात सूत्रीय ज्ञापन संयुक्त रुप से सौंपा था जिसमें उन्होने कहा था कि विश्वविद्यालय के ग्रामीण अंचल के छात्रों की बहुलता को देखते हुये परास्नातक सहित सभी प्रवेश परीक्षाओं में 'आफ लाइन' का विकल्प भी दिया जाये, पिछले दिनों जिन 17 छात्रों का निलंबन किया गया है उसे वापस लिया जाये, आनलाइन आवेदनों में वेवसाइट की गडबडी के कारण छात्रों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड रहा है, उसे तत्काल सुधारा जाये. प्रवेश परीक्षाओं का बढा हुआ शुल्क जो कि पिछले से लगभग दोगुना है वापस किया जाये, डबल एम.ए. करने हेतु 80 प्रतिशत अंक की अपरिहार्यता और अव्यवहारिकता को वापस लिया जाये, प्रवेश हेतु जमा होने वाला चालान एस. बी.आई. के माध्यम से भी जमा करने का विकल्प हो. ज्ञापन में यह भी कहा गया कि प्रवेश परीक्षाओं का टेंडर पारदर्शी तरीके से न होना प्रवेश प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खडे करता है. मात्र टी.सी.एस के आवेदन के बाद उसका टेंडर देना अनुचित है. आंदोलनकारी छात्र- छात्रायें जब इन मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में पुलिस को बुलबा भेजा. तमाम छात्रो को पीटा गया और वे लहू लुहान होगये, उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तार किया गया. पर रिहाई के बाद वे यूनियन हाल में अध्यक्ष ऋचा सिंह के नेत्रत्व में आमरण अनशन पर बैठ गये. वे कुलपति कार्यालय के समक्ष अनशन करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने बल प्रयोग कर उन्हें वहां बैठने से रोक दिया. भाकपा और एआईएसएफ ने अलग अलग बयान जारी कर इस पुलिसिया कार्यवाही की निंदा की और छात्रों की मांगों का समर्थन किया. आंदोलन का नेत्रत्व कर रही ऋचा सिंह को फोन कर छात्रों का मनोबल भी बढाया गया. छात्र छात्राओं पड रहे चहुंतरफा दबाव और उनके स्वास्थ्य में आरही गिरावट के समाचार भाकपा और एआईएसएफ के राज्य केंद्र को मिल रहे थे अतएव पार्टी नेत्रत्व ने वहाँ पहुंच कर छात्रों के इस आंदोलन को सक्रिय समर्थन प्रदान करने का फैसला लिया. प्रतिनिधिमंडल जिस दिन वहां पहुंचा, आमरण अनशन का छठवां दिन था. चूंकि वहां पहुंचने का समाचार समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ था तो सभी आंदोलनकारी छात्र इस प्रतिनिधिमंडल का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे. प्रतिनिधिमंडल ने ऋचा सिंह से बात की और उनका साहस बढाया. वहीं पता लगा कि पूर्व की रात को पुलिस ने अनशनकारियों को गिरफ्तार करने की कोशिश की थी लेकिन छात्रों ने अपने को यूनियन हाल में बंद कर लिया. यू.पी. सरकार के पुलिस और प्रशासन का यह रवैया समझ से परे था. ऋचा सिंह ने छात्रो के बीच ले जाकर प्रतिनिधिमंडल से विचार व्यक्त करने का आग्रह किया. उपस्थित छात्र समुदाय को संबोधित करते हुये भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि आफलाइन विकल्प के अभाव में ग्रामीण और गरीब तबके के छात्र शिक्षा से वंचित रह जायेंगे इसलिये आम छात्रों के हित में आफलाइन का विकल्प भी खुला रहना चाहिये. उन्होने छात्रों की न्यायोचित मांगों के प्रति केंद्र सरकार व विश्वविद्यालय प्रशासन की हठवादिता और छात्रों पर पुलिस/प्रशासन द्वारा किये जारहे बल प्रयोग की कडे शब्दों में निंदा की और छात्रों के इस न्याययुध्द में हर संभव मदद का भरोसा उन्हें दिलाया. उन्होने घोषणा की कि लखनऊ लौटने पर भाकपा महामहिम राज्यपाल से भेंट कर छात्रों को न्याय दिलाने की मांग करेगी. छात्रों ने बढी ही गर्मजोशी से प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और उनके प्रति आभार व्यक्त किया. यद्यपि वहां अन्य कई प्रतिनिधिमंडल भी आये हुये थे पर भाकपा और एआईएसएफ के प्रतिनिधिमंडल के वहां पहुंचने से भाजपा और सपा के खीमों में काफी हलचल दिखाई दी. अगले दिन मीडिया ने भी प्रतिनिधिमंडल की खबरों को प्रमुखता से छापा. सत्ताधारियो का सिंहासन हिला और 48 घंटे के भीतर ही छात्रों की प्रमुख मांगों को मान लिया गया और अनशन समाप्त करा दिया गया. समझौते के अनुसार अब विश्वविद्यालय में प्रवेश में आफ लाइन का विकल्प खोला गया है, डबल एम.ए. के प्रवेश में अब 80 के बजाय 60 प्रतिशत अंक ही आवश्यक होंगे तथा छात्रों के निलंबन की कार्यवाही पर पुनर्विचार किया जायेगा. इस सफलता के बाद ऋचा सिंह और कई छात्रों ने भाकपा नेत्रत्व को न केवल इसकी सूचना दी अपितु उनके प्रति कृतज्ञता भी ज्ञापित की. भाकपा नेत्रत्व ने भी उन्हे बधाई दी. एआईएसएफ इलाहाबाद के एक प्रतिनिधिमंडल ने सन्योजक अजीत सिंह के नेत्रत्व में ऋचा सिंह एवं अन्य आंदोलनकारी छात्रों से छात्रसंघ भवन में जाकर इस सफलता के लिये उन्हें पुरजोर तरीके से बधाई दी. प्रतिनिधिमंडल में अमितांशु गौर, मो.खालिद, सर्वेश मिश्रा, गौरीशंकर, विमर्श एवं संकर्ष भी शामिल थे. ऋचा सिंह ने सहयोग और समर्थन के लिये धन्यवाद दिया और कृतज्ञता ज्ञापित की. यह छात्रों के संघर्षों का ही नतीजा है कि मानव संसाधन मंत्रालय को घुटने टेकने पडे हैं. केंद्र सरकार के पलटी मारने से कल तक उसके यस मैन बने कुलपति हाँगलू आहत महसूस कर रहे हैं. उन्होने स्मृति ईरानी और भाजपा पर विश्वविद्यालय में हस्तक्षेप का आरोप जडा है. यह तो जग जाहिर ही था, पर पहली बार किसी कुलपति ने भी इस सच पर से पर्दा उठाया है. यह भी उल्लेखनीय है कि जो विद्यार्थी परिषद ऋचा सिंह के खून का प्यासा बना हुआ था, छात्रों के दबाव में और अपने अस्तित्व की रक्षा के लिये उसे भी सबके साथ अनशन पर बैठना पडा. डा. गिरीश
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शनिवार, 7 मई 2016

अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय में एआईएसएफ की विचार गोष्ठी संपन्न : भगवाकरण और फासीवाद को छात्रों ने दी खुली चुनौती

अलीगढ- मजदूर दिवस के अवसर पर एक मई को अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एम्पलाईज यूनियन कार्यालय परिसर में ए.आई.एस.एफ. की ओर से एक सफल सेमिनार का आयोजन किया गया. गोष्ठी का विषय था " लोकतंत्र स्वंत्रता और संस्कृति को खतरा और छात्रों का संघर्ष". गोष्ठी का उद्घाटन करते हुये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि देश की स्वतंत्रता लोकतंत्र और संस्कृति पर समय समय पर अलग अलग शक्तियों द्वारा हमले होते रहे हैं और देश की जनता उसका जबाव भी देती रही है. लेकिन पिछले दो साल में यह हमले तीव्र से तीव्रतर होगये हैं. केंद्र में सत्तारूढ मोदी सरकार ने जनता से किया एक भी वायदा पूरा नहीं किया अतएव जनता में इस सरकार के प्रति भारी असंतोष उमड रहा है. अपनी असफलताओं पर पर्दा डालने, आक्रोश को दिग्भ्रमित करने और जनता के विरोध को मूर्त रूप देने वाली ताकतों को आतंकित करने के उद्देश्य से सरकार और सरकार समर्थक संगठनों ने उन पर बडे हमले बोल दिये हैं. हर विपन्न तबके को निशाना बनाया जारहा है. लेकिन ज्ञान के उद्गम स्थल शिक्षण संस्थानों और उसके छात्रों को खास निशाना बनाया जारहा है ताकि जहालत फैला कर जुल्म सितम का चक्का चलाया जाता रहे. डा. गिरीश ने कहाकि यह पहली ऐसी सरकार है जो सीमा के पार वाले दुश्मनों के समक्ष तो घुटने टेके हुये है मगर अपने ही देश के छात्र नौजवानों के खिलाफ इसने युध्द छेड दिया है. फिल्म इंस्टीट्यूट, आईआईटी, हैदराबाद यूनिवर्सिटी, एएमयू, इलाहाबाद और सबसे ज्यादा जेएनयू के छात्रों को निशाना बनाया गया और उन्हें जान गंवाने को बाध्य किया गया या देशद्रोही बता कर जेलों में ठूंसा गया. लेकिन हर जगह छात्र आंदोलन के जरिये जबाव दे रहे हैं. कन्हैया कुमार इस आंदोलन का प्रतीक बन चुके हैं. यह आंदोलन आने वाले दिनों में और गति पकडेगा और यही व्यवस्था परिवर्तन की जंग का आधार बनेगा. भाकपा छात्र नौजवानों के इस संघर्ष के हर कदम पर उनके साथ है. एआईएसएफ के अध्यक्ष वली उल्लाह खादरी ने कहा कि मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी एक्टिंग अच्छी कर लेती हैं, लेकिन शिक्षा के बारे में उन्हें जानकारी नहीं. शिक्षा के बजट में कटौती और छात्रों के हक को दबाने के सवाल पर उन्होंने प्रधानमंत्री पर भी जम कर निशाना साधा. उन्होने कहा कि देश भर में दहशत फैलाने का काम नागपुर से चल रहा है. तमाम महत्वपूर्ण संस्थाओं के साथ साथ फासीवादी ताकतों की नजर अल्पसंख्यक स्वरूप वाले एएमयू और जामिया मिलिया पर भी है. छात्र इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे. जेएनयू एआईएसएफ की अध्यक्ष राहिला परवीन ने कहा कि यह देश गांधी के राम का है. आरएसएस के जय श्रीराम का नहीं. हम आरएसएस के जय श्री राम को नहीं आने देंगे. देशवासियों को राम और जय श्रीराम के अंतर को समझना होगा. उन्होने कन्हैया को आज़ादी की दूसरी लडाई का योध्दा बताया और कहा कि रोहित वेमुला प्रकरण को दबाने के लिये फासीवादी ताकतों ने जेएनयू प्रकरण को उछाल दिया. इसमें विद्यार्थी परिषद के साथ तथाकथित राष्ट्रवादी चेनल भी साथ थे. रोहित वेमुला का उदाहरण देते हुये उन्होने कहा कि हम उस मां की जय बोलेंगे जिसने जन्म देकर अपने लाल को अन्याय के खिलाफ लडने भेजा. शेर पर सवार हाथ में त्रिशूल और भगवा झंडा वाली आरएसएस की ब्रांडेड मां की जय हम नहीं बोलेंगे. उन्होने कहा कि सीमा पर लडने वाले फौजी के किसान पिता आत्महत्या कर रहे हैं. इसकी चिंता सरकार को नहीं. उन्होने कहा कि आज़ादी के आंदोलन के दौरान सेनानी भारत माता की जय नहीं, वंदे मातरम और जय हिंद बोलते थे. लेकिन फासीवादी ताकतें हर चीज को मजहब में बांट कर अपनी कुर्सी बचाने में लगी हैं. प्रसिध्द इतिहासकार प्रो. इरफान हबीव ने एआईएसएफ के गौरवशाली इतिहास की स्मृतियों को ताजा करते हुये कहा कि यही संगठन था जो आज़ादी की लडाई में असंख्य छात्र युवाओं को खींच लाया. उन्होने इस संगठन में बिताये अपने जीवन के अनुभवों को उपस्थित छात्र युवाओं के साथ साझा किया. उन्होने कहाकि भाजपा जिन सरदार पटेल की प्रतिमा का निर्माण करा रही है उन्होने आरएसएस के गोलवलकर को खत लिखा था कि संघ द्वारा फैलाये गये सांप्रदायिक जहर के कारण ही गांधी जी की हत्या हुयी. गांधी की हत्या पर संघ ने मिठाई बांटी थी और आरएसएस पर प्रतिबंध भी लगाया गया था. वह तभी हठा जब उनके गुरु ने लिख कर दे दिया कि संघ तो सांस्कृतिक संग्ठन है. पर हर कोई जानता है कि वह खुल कर राजनीति करता है, वह भी समाज को बांतने की. प्रो. इरफान हबीब ने एएमयू में छात्राओं के साथ होने वाले भेद्भाव की चर्चा की और उसे खत्म किये जाने की आवश्यकता पर बल दिया. गोष्ठी को भाकपा जिला सचिव सुहेव शेरवानी, एआईएसएफ अलीगद के सन्योजक अनीश कुमार तथा ऐम्पलाईज यूनियन के अध्यक्ष वसी हैदर ने भी संबोधित किया. अध्यक्षता कु. फनस ने की. संचालन एआईएसएफ की एएमयू की सन्योजक कु. दूना मारिया भार्गवी ने किया. ऐम्पलायीज यूनियन के सैक्रेटरी शमीम अख्तर ने सभी को धन्यवाद दिया. कु. दूना एवं अनीश ने बताया कि आगामी 23 मई को एआईएसएफ के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ताओं का सम्मेलन और एवं विचारगोष्ठी अलीगढ में होगी. हर जिले से कम से कम 5 छात्र साथियों को सुबह 10 बजे तक अलीगढ पहुंचना है.
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के आंदोलनरत छात्रों के प्रति एकजुटता प्रकट करने को जायेगा भाकपा का प्रतिनिधिमंडल

लखनऊ- 7 मई 2016, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल कल इलाहाबाद पहुंचेगा. प्रतिनिधिमंडल वहाँ आफलाइन विकल्प के लिये संघर्षरत और अनशन कर रहे छात्र नेताओं और छात्रों से मिल कर उनके संघर्ष के प्रति एकजुटता का इजहार करेगा. ज्ञात हो कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पदाधिकारी और अन्य छात्र दाखिले की प्रक्रिया में आनलाइन के साथ आफलाइन विकल्प की मांग को लेकर पिछले एक सप्ताह से आंदोलन कर रहे हैं. गत दिनों विश्वविद्यालय प्रशासन की पहल पर पुलिस ने छात्रों पर भारी लाठीचार्ज किया था, उन पर कई धाराओं में केस दर्ज किये गये थे और उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. भाकपा ने तभी छात्रों पर हुये इस दमन की कडे शब्दों में निंदा की थी. रिहाई के बाद से ही ये छात्र अपनी मांगों को लेकर अनशन कर रहे हैं. भाकपा राज्य सचिव मंडल की ओर से जारी बयान में मांग की गयी है कि छात्रों की इस न्यायोचित मांग को अबिलंब पूरा किया जाये और उन पर दमनचक्र चलाने के लिये जिम्मेदार लोगों को चिन्हित कर दंडित किया जाये. बयान में बताया गया है कि इन आंदोलनकारी छात्रों के संघर्ष के प्रति एक्जुटता प्रकट करने को भाकपा का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल राज्य सचिव डा.गिरीश के नेत्रत्व में कल इलाहाबाद जायेगा. राज्य सहसचिव का. अरविन्दराज स्वरुप एवं आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के नेतागण भी उनके साथ होंगे. डा.गिरीश
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शुक्रवार, 6 मई 2016

आरक्षित रेल टिकिट को रद्द कराने की प्रक्रिया को यदि बदला गया तो जनता को होगी भारी परेशानी: भाकपा

लखनऊ- 6 मई 2016, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने आरक्षण खिडकी से कराये गये रेलवे के आरक्षित टिकट को रद्द कराने की मौजूदा प्रक्रिया में प्रस्तावित बदलाव को जनता के लिये बहुत ही कष्टकारक और आर्थिक रुप से हानि पहुंचाने वाला बताया है. भाकपा ने आरक्षित टिकट की मौजूदा प्रणाली को ही बनाये रखने की मांग की है. ज्ञात हो कि मौजूदा व्यवस्था के अनुसार यात्री कहीं से खरीदे टिकट को देश में किसी भी स्टेशन से रद्द करा सकते हैं. लेकिन अब रेलवे इस मौजूदा प्रक्रिया में बदलाव कर यह व्यवस्था करने जारही है कि जो टिकट जहां से खरीदी गयी है उसको उसी स्टेशन से रद्द कराया जा सकेगा. रेल मंत्री को भेजे गये पत्र में भाकपा के राज्य सचिव डा.गिरीश ने इस पर कडी आपत्ति दर्ज कराई है. अपने इस पत्र में भाकपा राज्य सचिव ने कहा है कि इस प्रस्तावित नई प्रक्रिया से मुसाफिरों को भारी कठिनाई का सामना करना पडेगा और आर्थिक हानि भी उठानी पडेगी. इस संबंध में उदाहरण देते हुये डा.गिरीश ने कहा कि जब में लखनऊ से अपने घर हाथरस जाता हूं तो वहाँ से लौटने का टिकट भी यहीं से बनवा कर ले जाता हूँ ताकि प्रतीक्षा सूची में लटकने से बचा जा सके. पर यदि किसी कारण से मुझे अपनी यात्रा की तिथि आगे बढानी पड जाये तो मेरा लखनऊ से कटाया गया यह टिकिट हाथरस में रद्द नही हो सकेगा. इस तरह मेरा यह पैसा डूब जायेगा. ज्यादा यात्रा करने वालों और टूरिस्टों को तो इससे बहुत अधिक कठिनाई होगी. डा. गिरीश ने आरोप लगाया है कि गत दो वर्षों में रेलवे ने यात्री किराये और माल भाडे में बडी वृध्दि तो की ही है अन्य अनेक भार भी यात्रियों पर लाद दिये हैं. सफाई के नाम पर एक अलग कर लगाया गया है, बच्चों की आधी टिकट समाप्त कर उसे पूरा कर दिया गया है, टिकिट रद्द कराने में ज्यादा पैसे की कटौती कर दी गयी है और टिकिट रद्द कराने की अवधि भी कम कर दी गयी है. मजे की बात है कि यात्रियों पर यह सारी चोट यात्री सुविधा बढाने के नाम पर की जारही है. भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि “ प्रभुजी! ये सब बंद करो वरना ये जनता तुम्हारी सरकार की राजनैतिक रेल को रोक देगी.” डा. गिरीश,
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शुक्रवार, 29 अप्रैल 2016

सैमिनार

ALL INDIA STUDENTS FEDERETION ( A.I.S.F.) A.M.U. Unit, Aligarh आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन ( एआईएसएफ) ए.एम.यू. ब्रांच, अलीगढ दिनांक- 29 अप्रेल 2016 एआईएसएफ द्वारा विचार गोष्ठी का आयोजन दि. - 1 मई रविवार को अलीगढ- आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन ( एआईएसएफ) की अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय इकाई द्वारा एक विचार गोष्ठी का आयोजन मजदूर वर्ग के अंतर्राष्ट्रीय पर्व 'मई दिवस' पर दिनांक- 1 मई, रविवार को पूर्वान्ह 11 बजे से ए.एम.यू. एम्पलाईज यूनियन के कार्यालय (हबीब हाल के सामने) पर किया जा रहा है. गोष्ठी का विषय होगा - "लोकतंत्र स्वतंत्रता संस्कृति पर हमला और छात्रों का संघर्ष." ( Threat to Democracy Freedom and Culture and Struggle of Students). गोष्ठी में एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद वलीउल्लाह खादरी एवं जेएनयू एआईएसएफ की अध्यक्ष कु. राहिला परवीन मुख्य वक्ता होंगे. इसके अलावा कई अन्य वक्ता भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करेंगे. एआईएसएफ ने सभी छात्रों और अन्य सहयोगियों से गोष्ठी में शामिल होने की अपील की है. दूना मारिया भार्गवी संयोजक, ए.आई.एस.एफ. ए.एम.यू. अलीगढ
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बुधवार, 6 अप्रैल 2016

उत्तर प्रदेश में एआईएसएफ ने फूंका आंदोलन का बिगुल

लखनऊ- आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (A.I.S.F.) के तत्वावधान में जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार एवं एआईएसएफ के नेताओं को जान से मारने की धमकियों, देश भर में छात्रों खासकर कमजोर वर्ग के छात्रों के उत्पीडन के खिलाफ एवं छात्रों और शिक्षा से जुडे सवालों को लेकर आज समूचे उत्तर प्रदेश में धरने और प्रदर्शनों के आयोजन किये गये तथा महामहिम राष्ट्रपति एवं राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन के अधिकारियों को सौंपे गये. पूरे प्रदेश में लगभग एक ही विषयवस्तु वाले ज्ञापन सौंपे गये. इन ज्ञापनों में कहा गया है कि जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार और छात्र संगठन- एआईएसएफ जो कि देश भर में छात्रों के ऊपर होरहे अत्याचारों और शिक्षा प्रणाली तथा शिक्षण संस्थाओं पर सरकार की ओर से हो रहे हमलों के विरोध में समूचे देश में चल रहे छात्र आंदोलनों की आशा की किरण साबित होरहे हैं, फासीवादी, सांप्रदायिक और जनतंत्र विरोधी ताकतों की आंखों की किरकिरी बन गये हैं. उत्तर प्रदेश में ऐसे ही तत्वों द्वारा कन्हैया कुमार तथा एआईएसएफ के दूसरे नेताओं को तमाम तरह की धमकियां दी जारही हैं. मेरठ के किसी अमित जानी नामक शख्स जिसने 2012 में लखनऊ में पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती की प्रतिमायें तोडी थीं और उससे पहले श्री राहुल गांधी की सभा में व्यवधान उत्पन्न किया था, पहले अपने फेसबुक एकाउंट पर पोस्ट डाल कर धमकी दी थी कि यदि कन्हैया कुमार और उमर खालिद ने 31 मार्च तक जेएनयू परिसर को नहीं छोडा तो वह और उसका संगठन जेएनयू में घुस कर दोनों को गोली से उडा देंगे. उसने फेसबुक पर दोबारा धमकी दी है कि उसके लोग मय हथियारों के जेएनयू में पहुंच गये हैं, और वे कभी भी दोनों की हत्या कर देंगे. कुछ तत्वों ने एआईएसएफ के केंद्रीय पदाधिकारियों और कन्हैया कुमार को ट्विटर पर धमकी दी है कि यदि उन्होने उत्तर प्रदेश में प्रवेश किया तो उनका गला रेत दिया जायेगा. इससे पूर्व बदायूं के एक कुलदीप वार्ष्णेय नामक व्यक्ति ने खुले तौर पर धमकी दी थी कि कन्हैया की जीभ काटने वाले को पांच लाख रु. दिये जायेंगे. 18 फरवरी को एआईएसएफ व अन्य वामपंथी छात्र संगठनों के लोग जब बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय के समीप कन्हैया कुमार की बिना शर्त रिहाई की मांग और कन्हैया कुमार व पत्रकारों पर पटियाला हाउस कोर्ट में भाजपा विधायक और उसके समर्थक वकीलों द्वारा किये गये शर्मनाक हमले के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे तो विद्यार्थी परिषद से जुडे लोगों ने आपत्तिजनक नारे लगाते हुये उन पर हमला बोल दिया. स्थानीय पुलिस ने हमलावरों को निकल जाने में मदद की और एआईएसएफ तथा अन्य वाम छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया. अब अलीगढ में कन्हैया कुमार के आगमन की चर्चा मात्र से बौखलाये विद्यार्थी परिषद के लोगों ने मीडिया के माध्यम से भडकावे और उकसाबेपूर्ण बयानबाजियां की हैं और वे खुले तौर पर कन्हैया कुमार और एआईएसएफ के नेताओं को देश द्रोही अथवा राष्ट्रद्रोही बतला रहे हैं जो कानूनन जुर्म है. विद्यार्थी परिषद को भय है कि कन्हैया कुमार और एआईएसएफ नेताओं के दौरों से छात्र समुदाय में उनके अधिकारों और समस्याओं के प्रति चेतना जाग्रत होगी और सरकारों की छात्र विरोधी एवं शिक्षा विरोधी कारगुजारियों का पर्दाफाश होगा. पूरे उत्तर प्रदेश में भाजपा समर्थक संगठन विद्यार्थी परिषद ने छात्र विरोधी अभियान छेड रखा है. वे अपनी दादागीरी से छात्रों के हित में संघर्ष करने वालों को प्रताडित कर रहे हैं तो राज्य सरकार उनकी अराजक कार्यवाहियों को रोकने से कतरा रही है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ की अध्यक्ष कु. ऋचा सिंह को इसलिये हठाने की कोशिश की जा रही है कि उन्होंने कुख्यात सांप्रदायिक भाजपा सांसद आदियनाथ को इलाहाबाद विश्व विद्यालय में प्रवेश नहीं करने दिया था. वाराणसी में भी कई विपक्षी छात्रों को विद्यार्थी परिषद के दबाव में उनकी संस्थाओं से निष्कासित कर दिया गया है. जगह जगह ग्रामीण पृष्ठभूमि से आये, दलितों, पिछडों, अल्पसंख्यकों, अन्य कमजोरों और पढाई- लिखाई से मतलब रखने वाले छात्रों को निशाना बनाया जारहा है. अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय और कई अन्य जगह रोहित वेमुला की जबरिया आत्महत्या का विरोध करने वाले छात्रों को डराया- धमकाया गया है. अब्दुल कलाम टैक्निकल यूनिवर्सिटी (AKTU) के छात्रों की बाजिव मांगों को पूरा करने के स्थान पर उन पर दमन चक्र चलाया जा रहा है. विद्यालयों और विश्वविद्यालय परिसरों में विद्यार्थी परिषद द्वारा छात्रों को धमका कर सदस्य बनाया जारहा है और उन्हें आरएसएस की शाखाओं में भाग लेने को बाध्य किया जारहा है. विद्यार्थी परिषद कभी भी छात्र हित की राजनीति नहीं करता अपितु वह छात्रों के बीच आर.एस.एस. की कुत्सित विचारधारा के आधार पर घृणित कार्यवाहियों को अंजाम देने का औजार मात्र है. ज्ञापन में कश्मीर के श्री नगर में एनआईटी छात्रों पर भाजपा/ पीडीपी गठबंधन की सरकार द्वारा किये गये लाठीचार्ज जिसमें कई छात्र बुरी तरह घायल हुये हैं, की कडे शब्दों में निंदा की गयी है. ये छात्र अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन मीडिया के कतिपय हिस्सों में इसे सांप्रदायिक घटना करार दिया जारहा है. सच तो यह है कि केंद्र और उसके प्रभाव वाली राज्य सरकारें छात्रों की समस्याओं का निदान करने से मुहं चुरा रही हैं और एक के बाद एक कैम्पस छात्र आंदोलन का गवाह बनता जा रहा है. खेद की बात है कि इन संगीन मामलों में न तो केंद्र सरकार ने कोई कदम उठाया है और न ही उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार ने. शिक्षा के बजट में भारी कटौती की जा रही है. अकेले विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यू.जी.सी.) के बजट में ही 55 प्रतिशत की कटौती कर दी गयी है और इसे रु. 10,000 करोड से घटा कर लगभग रु. 45,00 करोड के आस पास पहुंचा दिया गया है. निजी संस्थाओं में तो भारी फीस देनी ही थी अब आई. आई. टी. जैसी सरकारी संस्थाओं की फीस को बढा कर समूचे कोर्स के लिये रु. 24 लाख कर दिया गया है. केंद्र सरकार पाठ्यक्रमों में सांप्रादायिक, तथ्यों से कोसों दूर और पाखंड्पूर्ण सामग्री को ठूंस रही है. उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा सभी को समान शिक्षा दिये जाने का आदेश पारित करने के बावजूद राज्य सरकार ने इस दिशा में अभी तक कोई पहलकदमी नहीं की है. शिक्षा हर स्तर पर साधारण और निम्न वर्ग के छात्रों की पहुंच से तो बाहर जा ही रही है, मध्यम वर्ग भी इस महंगी शिक्षा के बोझ तले कराह उठा है. मध्यकाल की तर्ज पर लाई जा रही यह शिक्षा पध्दति भविष्य में अल्पज्ञता, समाज के प्रति उदासीनता और मानव संसाधन की भारी समस्या उत्पन्न करेगी और छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश छात्र असंतोष को और अधिक बढायेगी ज्ञापन में कहा गया है. अतएव आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन दोनों महामहिमों से मांग करता है कि जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष एवं एआईएसएफ के अन्य नेताओं को जान से मारने की धमकी देने वालों और उनका चरित्र हनन करने वालों के विरुध्द अभियोग पंजीकृत कर कडी से कडी कार्यवाही की जाये. शिक्षण संस्थाओं में कमजोर तबकों के छात्रों का उत्पीडन रोकने को रोहित वेमुला एक्ट बनाया जाये ताकि किसी भी होनहार छात्र की जान और सम्मान को आंच ना आये. अब्दुल कलाम टैक्नीकल यूनिवर्सिटी के छात्रों की न्याय संगत मांगों को पूरा किया जाये और उनका उत्पीडन बंद किया जाये. उत्तर प्रदेश में छात्रों के उत्पीडन की कार्यवाहियों को रोका जाये. उत्पीडन करने वालों के विरुध्द कडी से कडी कार्यवाही की जाये. विद्यालय और विश्व विद्यालय परिसरों में विद्यार्थी परिषद जैसे विद्यार्थी विरोधी संगठन की अवांच्छित कार्यवाहियों पर रोक लगायी जाये. छात्रों के बुनियादी अधिकारों की रक्षा के लिये छात्रसंघों के चुनाव कराये जायें, और चुनाव प्रणाली में इस तरह के सुधार किये जायें कि असामाजिक और अवांच्छित तत्व चुन कर न जायें.विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा की जाये. शिक्षा का हर स्तर पर बजट बढाया जाये. शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह सरकारी बनाया जाये. शिक्षा की फीस बढाने और उसे अन्य तरह से महंगा बनाने को रोका जाये. शिक्षा के पाठ्यक्रमों में प्रतिगामी बदलाव करना रोका जाये. शिक्षा उच्च उदात्त विचारों, वैज्ञानिक सोच के विकास, सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्ष व जनवादी मूल्यों की वाहक बने, असहिष्णुता और विभाजन का औजार नहीं. उच्च न्यायालय इलाहाबाद के निर्णय को अमलीजामा पहनाने को उत्तर प्रदेश में अगले सत्र से सभी को निशुल्क शिक्षा, समान शिक्षा एवं अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था की जाये. उत्तर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, माध्यमिक विद्यालयों, जूनियर और बेसिक स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पडे सभी पदों पर योग्यतम शिक्षकों की नियुक्ति की जाये. समाचार बुलेटिन जारी किये जाने तक प्रदेश के तमाम जिलों से सफल धरना प्रदर्शन की खबर राज्य मुख्यालय को प्राप्त हुयी है. उरई(जालौन) से प्राप्त खबर के अनुसार यहां सैकडों छात्र- छात्राओं ने स्थानीय बस अड्डे के समीप मजदूर भवन से कलक्ट्रेट तक जुलूस निकाला. छात्र नारे लगा रहे थे- कितने कन्हैया पकडोगे, हर घर से कन्हैया निकलेगा, वेमूला के हत्यारों को फांसी दो, मोदी- अखिलेश होश में आओ, छात्रशक्ति की आवाज सुनो आदि. प्रदर्शन का नेत्रत्व पूर्णिमा चौरसिया संयोजक एवं नवीन प्रजापति ने किया. कलेक्ट्रेट परिसर में हुयी सभा को नौजवान सभा के प्रदेश अध्यक्ष विनय पाठक, एआईएसएफ के पूर्व नेता कैलाश पाठक एवं सुधीर अवस्थी आदि ने संबोधित किया. ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा गया. अलीगढ से प्राप्त समाचार के अनुसार पान दरीबा कार्यालय से छात्रों का एक जुलूस नगर संयोजक अनीस कुमार के नेत्रत्व में महंगी शिक्षा दोहरी शिक्षा नहीं चलेगी, छात्रों को देशद्रोही बताना बंद करो, छात्रों में जाति धर्म के नाम पर फूट डालना बंद करो, आदि नारे लगाता हुआ कलक्ट्रेट पहुंच. वहीं अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय यूनिट की संयोजक कु. दूना मारिया भार्गवी के नेत्रत्व में कुछ छात्र विश्व विद्यालयों की स्वयत्तता पर हमले बन्द करो, छात्रों की छात्रवृत्ति बहाल रखो, शिक्षा का बजट बढाओ घटाओ नही आदि नारे लगाते हुये वहां पहुंचे. वहाँ एक सभा का आयोजन किया गया जिसे एसएफ के पूर्व नेता सुहेब शेरवानी, शमीम अख्तर, रामबाबू तथा इकबाल मंद ने संबोधित किया. ज्ञापन भी दिया गया. प्रदर्शन में विनीत कुमार, यशपाल सिंह, प्रवेश कुमार, हर्ष पालीवाल, यतेंद्र बघेल, गौरव सक्सेना, बबलू सक्सेना, अजय कुमार भारत गुप्ता, कु. ससीम्न, इरफान, अनस, ज़िम्नीश, अकरम हुसैन एवं अंसारी आदि ने भी भाग लिया. बदायूं में जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह एवं सचिव कामेश के नेत्रत्व में जिला कार्यालय से एक जुलूस निकाला गया जो शहर के मुख्य भागों से होता हुआ जिला मुख्यालय पहुंच कर सभा में तब्दील होगया. वे नारे लगा रहे थे कि एआईएसएफ नेताओं को धमकियां देना बंद करो, धमकियां देने वालों को जेल भेजो, छात्रों पर लगाये फर्जी मुकदमे वापस लो आदि. प्रदर्शन में सर्वेश कुमार, अवनीश शर्मा, सतीश कश्यप एवं शुभम की अहम भूमिका रही. पूर्व नेता रघुराज सिंह आदि ने संबोधित किया. आज़मगढ में अध्यक्ष दलीप कुमार मौर्य और सचिव मुजम्मिल आज़मी के नेत्रत्व में एडीएम प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया. मुहम्मद साजिद, रंजीत मौर्य, मुहम्मद हामिद, सूरज मिश्रा, रामनरेश यादव, आमिर अली आदि छात्र तथा पूर्व छात्र नेता जितेंद्रहरि पान्डे आदि मौजूद थे. बांदा में कार्यकर्ताओं ने जिला कार्यालय से संयोजक कु. पूनम रहकवार के नेत्रत्व में जुलूस निकाला और सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा. वे नारे लगा रहे थे कि सभी को समान शिक्षा दो, बुंदेलखंड को अकालग्रस्त घोषित करो, रोजगार दो और भुखमरी से बचाओ आदि. सभा को पंकज यादव हफीज खान और रामजी यादव आदि ने संबोधित किया. लखनऊ में भी शिवानी मौर्य, प्रवीन त्रिवेदी, अमित कुशवाहा और श्यामबाबू मौर्य के नेत्रत्व में एडीएम को ज्ञापन सौंपा गया. इस अवसर अशोक सेठ एवं बाल गोविंद आदि ने छात्रों का सहयोग किया. कानपुर में एआईएसएफ के अध्यक्ष अक्षय इमेनुअल सिंह और सचिव मयंक चक्रवर्ती के नेत्रत्व में नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा गया. हाथरस में बलवीर सिंह अध्यक्ष, चांद खां सचिव के नेत्रत्व में जितेंद्र कुमार, दिनेश कुमार, राज आदि कार्यकर्ताओं ने अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा. इस अवसर पर चरनसिंह बघेल, सत्यपाल रावल एवं द्रुगपाल सिंह आदि भी मौजूद रहे. फैजाबाद में राज्य अध्यक्ष ओंकारनाथ पांडे एवं संयोजक अतुल सिंह, आशीष कुमार पान्डे, राजकुमार के नेत्रत्व में नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा गया. इस अवसर पर अशोक तिवारी एवं पवित्र साहनी आदि भी मौजूद रहे. जौनपुर में अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार पटेल, सचिव अरविन्द कुमार पटेल, राजकुमार सिंह, दिनेश कुमार पाल संदीप कुमार आदि ने नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा. इस अवसर पर सुभाष पटेल, सुबाश गौतम, मुनीम पटेल और जयलाल सरोज भी मौजूद रहे. मथुरा में उत्कर्ष चतुर्वेदी सचिव एवं अतुल कुमार के नेत्रत्व में उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया. सोनभद्र में संयोजक रवि प्रकाश शर्मा के नेत्रत्व में एडीएम को ज्ञापन सौंपा गया. अन्य मांगों के अतिरिक्त वहां कैमूर विश्वविद्यालय खोलने तथा रेनुकूट तथा राबर्ट्सगंज से ओबरा पी.जी. कालेज तक बस चलवाने की मांग छात्र हित में की गयी. इस अवसर पर विवेक तिवारी, राजेश चौधरी, आलोक गौतम, अरुण कुमार, करमवीर, राहुल विश्वकर्मा, सुगम पाठक, रजनीश कुमार, रोशन खां एवं राहुल शर्मा आदि भी उपस्थित रहे. अभी अभी गौंडा, बरेली, मेरठ, चित्रकूट एवं आगरा से भी ज्ञापन दिये जाने की खबरें मिली हैं. प्रेषक- कार्यालय सचिव एआईएसएफ, उत्तर प्रदेश
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मंगलवार, 5 अप्रैल 2016

उत्तर प्रदेश में ए.आइ.एस.एफ आन्दोलन की राह पर

लखनऊ—5 अप्रेल 20016. जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार एवं एआईएसएफ के अन्य नेताओं को मिल रही धमकियों के खिलाफ तथा विभिन्न संस्थाओं में शिक्षण शुल्क बढाये जाने, शिक्षा के लिये बजट में भारी कटौती किये जाने, शिक्षा के बाजारीकरण और उसके आम छात्रों की पकड से बाहर चले जाने, शिक्षा प्रणाली के सांप्रदायीकरण, कमजोर तबकों के छात्रों के खिलाफ होरहे अत्याचारों के खिलाफ तथा एकेटीयू छात्रों की मांगें मानने में की जारही हीला हवाली, सभी को समान शिक्षा, निशुल्क शिक्षा, अनिवार्य शिक्षा और रोहित वेमूला एक्ट बनाये जाने आदि मुद्दों को लेकर आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन उत्तर प्रदेश में 6 अप्रेल को जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन करेगा. उपर्युक्त जानकारी यहाँ एक प्रेस वक्तव्य में एआईएसएफ के राज्य अध्यक्ष ओंकारनाथ पांडे ने दी है. उन्होने बताया कि एआईएसएफ के कार्यकर्ता महामहिम राष्ट्रपति एवं राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन संबंधित जनपद के जिलाधिकारी को सौंपेंगे. जिलों से मिल रही रिपोर्ट के अनुसार अधिकतर जिलों में कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गयीं हैं. उन्होने दाबा किया कि पिछले कई वर्षों में उत्तर प्रदेश में एआईएसएफ की यह एक बडी कार्यवाही होगी. उन्होने सभी छात्रों से अपील की कि इस कार्यवाही में बढ चढ कर भाग लें. जारी द्वारा ओंकार नाथ पांडे, अध्यक्ष आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, उत्तर प्रदेश
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गुरुवार, 31 मार्च 2016

कन्हैया कुमार तथा एआईएसएफ के अन्य नेताओं को धमकी देने वालों को गिरफ्तार करे उत्तर प्रदेश सरकार: भाकपा ने मांग की.

लखनऊ- 31 मार्च 2016- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार एवं आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के अन्य नेताओं को जान से मारने की धमकी दिये जाने, उनकी जीभ काटने और गर्दन रेतने की धमकी दिये जाने, कन्हैया कुमार को अलीगढ अथवा यू. पी. में घुसने पर परिणाम भुगतने की धमकी दिये जाने तथा मीडिया के कतिपय हिस्सों में छप रहे बयानों और समाचारों में कन्हैया कुमार को बार बार देशद्रोही कहे जाने की कार्यवाहियों की कडे से कडे शब्दों में निंदा की है. भाकपा ने कल अलीगढ नगर निगम बोर्ड की बैठक में भाजपा के सभासदों द्वारा राष्ट्रगान और संविधान का अपमान किये जाने की भी भर्त्सना की है. भाकपा ने राज्य सरकार से मांग की है कि वे इन कुकृत्यों में लिप्त अपराधिक तत्वों और कथित देशभक्तों के खिलाफ माकूल दफाओं में अभियोग दर्ज कर इन्हें जेल के सींखचों के पीछे पहुंचाये. भाकपा के राज्य सचिव मंडल की ओर से यहाँ जारी एक बयान में पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि अभी मेरठ के अमित जानी नामक शख्स ने जिसने विगत वर्ष सुश्री मायावती की प्रतिमाओं को क्षति पहुंचाई थी, कन्हैया कुमार और उमर खालिद को जान से मारने की धमकी दी है. भाकपा ने इसका संज्ञान लेते हुये राज्य सरकार से लिखित शिकायत कर उसे गिरफ्तार करने की मांग की है. कुछ लोगों ने ट्विटर के जरिये कन्हैया कुमार एवं एआईएसएफ के अध्यक्ष वलीउल्लाह खादरी को धमकी दी है कि यदि उन्होने उत्तर प्रदेश में प्रवेश किया तो उनकी गर्दन काट दी जायेगी. अलीगढ के कुछ भगवा संगठन भी कन्हैया कुमार के अलीगढ आगमन को लेकर आपत्तिजनक और अशांति पैदा करने वाली बयानवाजी कर रहे हैं. बदायूं के एक कुलदीप वार्ष्णेय नामक तत्व जिसने कन्हैया कुमार की जीभ काटने वाले को पांच लाख का इनाम देने की घोषणा की थी, वह भी जगह जगह जाति की सभाओं में पहुंच कर विष वमन कर रहा है. डा. गिरीश ने उत्तर प्रदेश में छप रहे और वितरित होरहे कुछ समाचार पत्रों पर आरोप लगाया कि वे भाकपा, एआईएसएफ और कन्हैया कुमार की छवि धूमिल करने को जान बूझ कर लगातार कन्हैया कुमार को देश द्रोही लिख रहे हैं. ऐसे समाचार पत्रों पर प्रेस काउंसिल और सरकार को कानून सम्मत कार्यवाही करनी चाहिये. कल अलीगढ नगर निगम की बैठक में भाजपा के सभासदों द्वारा राष्ट्रगान की गरिमा तार तार करने पर गहरा अफसोस जताते हुये भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि भगवा गिरोह खुद नित रोज राष्ट्रगान, तिरंगा ध्वज और राष्ट्रीय मर्यादाओं को तहस नहस कर रहा है. किसी भी नागरिक के लिये बर्दाश्त के बाहर है. दूसरों पर झूठे देशद्रोह के आरोप लगाने वाले संघ परिवार की कथनी और करनी साफ जाहिर होगयी है. राज्य सरकार को इस संविधान विरोधी कृत्य के खिलाफ शीघ्र कडी कार्यवाही करनी चाहिये. भाकपा राज्य सचिव ने आशा जताई है कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था, शांति व्यवस्था और जनतांत्रिक गतिविधियों को बनाये और बचाये रखने को वह स्वत: संज्ञान लेते हुये राज्य सरकार कडी से कडी कार्यवाही करे. डा. गिरीश,
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मंगलवार, 29 मार्च 2016

उत्तराखंड सरकार की बर्खास्तगी की विपक्षी दलों ने निंदा की

हाथरस: 29 मार्च, जनपद के कई राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों की एक बैठक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश की अध्यक्षता में उन्हीं के आवास पर संपन्न हुयी. बैठक में केंद्र सरकार द्वारा उत्तराखंड की निर्वाचित सरकार को बर्खास्त कर वहाँ राष्ट्रपति शासन लगाये जाने की कडे से कडे शब्दों में निंदा की गयी और भाजपा सरकार के इस कदम को संविधान विरोधी और लोकतंत्र पर बडा हमला बताया गया. बैठक को संबोधित करते हुये भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि बहुमत साबित करने की तिथि से एक दिन पूर्व षड्यंत्र के तहत उत्तराखंड की सरकार को बर्खास्त किया जाना कहीं से भी उचित नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि एस.आर. बोम्मई प्रकरण में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि बहुमत साबित करने की जगह सदन/ विधान सभा है ना कि राष्ट्रपति भवन अथवा राजभवन. लेकिन सत्ता की भूख में भाजपा सारी लोकतांत्रिक परंपराओं और मर्यादाओं का हनन करने पर आमादा है. डा. गिरीश ने कहाकि केंद्र सरकार अपने जनविरोधी कार्यों और वायदा खिलाफी के चलते जनता और मतदाताओं का पूरी तरह विश्वास खो बैठी है और दिल्ली तथा बिहार विधान सभा के चुनावों में उसे करारी पराजय का सामना करना पडा था. आगामी पांच राज्यों के विधान सभा चुनावों में भी उसकी करारी हार के लक्षण साफ नजर आने लगे हैं. वोट के जरिये सत्ता हासिल न कर पाने में विफल भाजपा अब सत्ता हरण के लिये तमाम अनैतिक हथकंडे अपना रही है. पहले उसने अरुणांचल में सत्ता हरण का घृणित खेल खेला और अब वही खेल उत्तराखंड में खेला जा रहा है. अगर इसका माकूल जबाव नहीं दिया गया तो विपक्ष की एक एक राज्य सरकार को हडपने की कोशिश की जायेगी. बैठक में सहमति बनी कि जल्दी ही दोबारा बैठक कर आगे की रणनीति तैयार की जायेगी. " लोक तंत्र बचाओ, संविधान बचाओ," "संविधान बचाओ, देश बचाओ" के उद्घोष के साथ अभियान चलाया जायेगा. बैठक में राष्ट्रीय लोक दल के जिलाध्यक्ष चौधरी रमेश ठैनुआं व मनोज चौधरी, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष करुणेश मोहन दीक्षित व नगर अध्यक्ष चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य, समाजवादी पार्टी के जिला सचिव गौरीशंकर बघेल व अभयपाल सिंह तथा भाकपा के जिला सचिव का. चरनसिंह बघेल व सहसचिव सत्यपाल रावल आदि ने भी विचार व्यक्त किये. डा. गिरीश
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बुधवार, 16 मार्च 2016

जेएनयू प्रकरण और वामपंथ पर किये जा रहे हमलों को जनता के बीच ले जायेगी भाकपा

लखनऊ 16 मार्च। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य कौंसिल की दो दिवसीय बैठक आज यहां सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता सेवानिवृत्त अपर जिलाधिकारी का. बी. राम ने की।
बैठक में जेएनयू प्रकरण और उसके बाद के हालात, मुजफ्फरनगर दंगों की रिपोर्ट, आरक्षण आन्दोलन, रेल तथा आम बजट आदि राष्ट्रीय सवालों और उत्तर प्रदेश के हालातों पर विस्तार से चर्चा हुई।
चर्चा के बाद भाकपा ने अपने आगे के कामों का निरूपण भी किया। संघ परिवार द्वारा लादी जा रही तानाशाही और साम्प्रदायिकता का पूरी शिद्दत से जवाब देने के लिए शहीदे आजम भगत सिंह के बलिदान दिवस (23 मार्च) और डा. भीम राव अम्बेडकर के जन्म दिवस (14 अप्रैल) को समर्पित कार्यक्रम 20 मार्च से 20 अप्रैल तक सघन तरीके से चलाने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर ”संविधान की प्रस्तावना लागू करो“ और ”वर्गविहीन और जातिविहीन समाज का निर्माण और डा. अम्बेडकर“ विषय पर विचारगोष्ठियां आयोजित की जायेंगी। पूरे माह सभायें, नुक्कड़ सभायें, पर्चा वितरण करके कम्युनिस्टों और वामपंथी दलों को बदनाम करने की संघ परिवार की साजिश को बेनकाब किया जायेगा और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमलों का जवाब दिया जायेगा। जिला कमेटियों से अनुरोध किया गया है कि वे इन आयोजनों में वामपंथी दलों के अतिरिक्त अन्य जनवादी ताकतों को जोड़ने का भी प्रयास करें।
रेल बजट, आम बजट और सरकार की नीतियों को पूरी तरह से कारपोरेट घरानों के अनुकूल और देश के बहुमत किसानों, मजदूरों, दलितों और अल्पसंख्यकों के प्रतिकूल बताते हुए पार्टी ने इस बात पर आश्चर्य प्रकट किया है कि विजय माल्या जैसे जनता के धन को लूटने वाले लोग देश छोड़ कर भाग जाते हैं और सरकार कुछ भी नहीं कर पाती है। भाकपा ने विजय माल्या को जल्दी से जल्दी देश में वापस लाने, उनकी समस्त परिसम्पत्तियों को जब्त करने और उन पर अभियोग चलाने की मांग की है तथा चेतावनी दी है कि धनिक वर्ग को लाभ पहुंचाने के लिए गरीबों के हितों पर कुल्हाड़ा चलाने से सरकार बाज आये। भाकपा इस दिशा में शीघ्र ही एक बड़े आन्दोलन की रूपरेखा बनाने जा रही है।
भाकपा की राज्य कौंसिल बैठक में भावी विधान सभा चुनावों की तैयारियों पर भी चर्चा की गयी और जिलों को निर्देश दिया गया कि वे लड़ने योग्य सीटों को तय करके सूची राज्य केन्द्र को शीघ्र से शीघ्र प्रेषित करें।
बैठक में 1 मई से 10 मई तक जनता से धन संग्रह अभियान चलाने का निर्णय भी लिया गया।
बैठक में राजनैतिक और कार्यों सम्बंधी रिपोर्ट राज्य सचिव डा. गिरीश ने प्रस्तुत की जिस पर 35 साथियों ने चर्चा में भाग लिया।
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गुरुवार, 25 फ़रवरी 2016

जोर पकड़ रहा है वामदलों का लोकतंत्र बचाओ अभियान.

वामदलों के लोकतंत्र बचाओ अभियान को व्यापक समर्थन उत्तर प्रदेश में ज्यादातर जिलों में बड़ी संख्या में सडकों पर उतरे वामपंथी कार्यकर्ता इलाहाबाद में आन्दोलनकारी वाम नेताओं पर किया गया कातिलाना हमला दोषी हमलावरों को गिरफ्तार करने की मांग लखनऊ 25 फरवरी: वामपंथी दलों के राष्ट्रीय आह्वान पर उत्तर प्रदेश में आयोजित लोकतंत्र बचाओ अभियान को जनता का व्यापक समर्थन मिला है. प्रदेश के ज्यादातर जिलों में मार्च निकाले गए अथवा धरने प्रदर्शन आयोजित किये गए. वाम दलों ने इस सफलता के लिए प्रदेश की जनता को बधाई दी है. ज्ञातव्य हो कि छः वामदलों ने 23 से 25 फरवरी तक पूरे देश में लोकतांत्रिक अधिकारों पर किये जारहे हमलों के खिलाफ, रोहित वेमुला को न्याय दिलाने, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के कन्हैया कुमार को रिहा करने तथा उन पर एवं कई निर्दोष छात्रों पर लगे फर्जी मुकदमे वापस लेने आदि मांगों को लेकर तीन दिवसीय अभियान चलाने का निर्णय लिया था. अभियान के दौरान आज वामदलों के शान्तिपूर्ण तरीके से आन्दोलन कर रहे कार्यकर्ताओं पर कचहरी के अन्दर कातिलाना हमला किया गया. हमले में दर्जनों कार्यकर्ता हताहत हुए हैं. हमला करने वालों में भाजपा कार्यकर्ता तथा उनके पिट्ठू वकील थे. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश एवं भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) के राज्य सचिव मंडल सदस्य प्रेमनाथ राय ने यहाँ जारी एक संयुक्त प्रेस बयान में इलाहाबाद की घटना की घोर निंदा करते हुए दोषियों को गिरफ्तार करने की मांग की है. डा. गिरीश
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शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016

कन्हैया कुमार को तत्काल रिहा करो: भाकपा

लखनऊ-12, फरवरी—भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी( JNU) छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी की कडे शब्दों में निंदा की है. भाकपा ने कन्हैया की तत्काल बिना शर्त रिहाई तथा जे.एन.यू. कैम्पस से पुलिस हठाने की मांग की है. भाकपा ने लखनऊ में एसएफआई कार्यालय पर एबीवीपी कार्यकर्ताओं द्वारा किये गये हमले और तोड फोड की भी निंदा की है तथा इस घटना के दोषियों को गिरफ्तार करने की मांग की है. यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि गत दिन जेएनयू में हुये कार्यक्रम के दौरान कुछ तत्वों ने अवांछित नारे लगाये थे जिनकी पहचान कर उनके खिलाफ कार्यवाही की जाने की जरूरत थी. कन्हैया ने कल रात ही टी. वी. चैनल्स पर साफ कर दिया था कि इस तरह के नारे लगाने वालों से उनका कोई संबंध नहीं और उन्होने ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्यवाही की मांग भी की थी. कन्हैया कुमार वामपंथी छात्र संगठन आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन से संबधित हैं जिसकी आज़ादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका रही है और सदैव ही यह संगठन छात्र एवं शैक्षिक हितों के लिये काम करता रहा है. गत दिनों इस संगठन ने अन्य छात्र संगठनों के साथ मिल कर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग पर तथा हैदराबाद के दलित छात्र रोहित वेमुला की हत्या के खिलाफ व्यापक आंदोलन चलाया है, जिससे केंद्र सरकार बौखलाई हुयी है. केंद्र सरकार और उसका जनक संघ परिवार वामपंथी, दलित, अल्पसंख्यक और अन्य मेहनतकश तबकों को तवाह कर कार्पोरेट्स के हितों को साधने में लगे है और उसके लिये वे प्रतिरोध की आवाज को दबाना चाहते हैं. इसीलिये पहले दाभोलकर, पंसारे और कालबुर्गी की हत्यायें की गयीं और अब जेऐनयू, ए.एम.यू., लखनऊ, हैदराबाद और इलाहाबाद जैसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्त्तताको निशाना बनाया जारहा है. जो सरकार आतंकवाद से निपटने में पूरी तरह विफल रही है वह ऐसे लोगों को देशद्रोही करार देने पर उतारु है जो आतंकवाद और सांप्रदायिकता से जूझते रहे हैं. वामपंथ पर यह हमला इस बात का संकेत दे रहा है कि फासीवाद पैर पसारने को मचल रहा है. भाकपा सभी जनवादी ताकतों से अपील करती है कि वे केंद्र सरकार के इन तानाशाहीपूर्ण कदमों के खिलाफ कडा प्रतिवाद दर्ज करायें. डा. गिरीश, राज्य सचिव
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रविवार, 7 फ़रवरी 2016

केन्द्र और राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ 11 फरबरी को उत्तर प्रदेश में आन्दोलन करेगी भाकपा

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने अपनी समस्त जिला इकाइयों को निर्देशित किया है कि वे केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार के जन विरोधी कार्यों से जनता को राहत दिलाने को 11 फरबरी को जिला स्तर पर आन्दोलन करें. यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि केन्द्र की मोदी सरकार बेशर्मी के साथ आर्थिक नव उदारवाद के एजेंडे पर चल रही है, इसके चलते जनता की समस्यायें लगातार बढ़ रही हैं. अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दामों में भारी गिरावट के बावजूद पेट्रोल डीजल के दाम काफी ऊँचे स्तर पर हैं, राशन खाद गैस आदि सभी पर सब्सिडी ख़त्म कर दी गयी है, महंगाई सातवें आसमान पर है, रेल आदि सभी सरकारी उपक्रमों में जनता को मिली सुविधायें छीनी जारही हैं तथा सामाजिक और आर्थिक उत्पीड़न का एजेंडा लगातार जारी है. उत्तर प्रदेश सरकार के विकास के दावों का खोखलापन तो इसीसे जाहिर होजाता है कि मौसम की मार से पीड़ित किसानों को कोई राहत नहीं मिल पा रही और बुंदेलखंड सहित प्रदेश के तमाम हिस्सों में किसान आत्महत्यायें कर रहे हैं. गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर रु. ६५० करोड़ बकाया है, लागतों में भारी वृध्दि के बावजूद तीन वर्षों से गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाया नहीं गया, किसान रु.350/- प्रति कुंतल की मांग कर रहे हैं, बिजली विभाग बसूली के नाम पर उपभोक्ताओं का उत्पीड़न कर रहा है- बिजली के कनेक्शन काटे जारहे हैं, बकायेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जारहीं हैं और रिश्वतें ली जारही हैं, बिजली मिल नहीं पारही, गरीबी की सीमा के नीचे वालों के राशन में कटौती कर दीगयी है, आये दिन महिलाओं और कमजोरों के उत्पीडन की बारदातें होरही हैं, क़ानून- व्यवस्था पंचर होगयी है, दलितों की जमीनों को हडपने का रास्ता खोल दिया गया है. आतंकवाद के नाम पर पूर्व में गिरफ्तार लोगों को अदालतें रिहा कर रही हैं, मगर अब तमाम लोगों को आतंकी बता कर गिरफ्तार किया जारहा है. उन्हें अदालतों द्वारा दोषी ठहराने से पहले ही आतंकवादी के रूप में प्रचारित किया जा रहा है. इन्हीं तमाम जनता से जुड़े सवालों पर भाकपा ने 11 फरबरी को जिलों में धरने, प्रदर्शन अथवा आम सभायें आयोजित करने का निश्चय किया है. जनता की इन समस्याओं के निराकरण के लिए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के लिए ज्ञापन जिलाधिकारियों के माध्यम से भेजे जायेंगे. डा.गिरीश
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सोमवार, 25 जनवरी 2016

संघ का कार्य- व्यवहार लोकतंत्र के लिये घातक

हाल ही में लखनऊ की दो घटनायें काबिले गौर हैं- प्रथम- अपनी लखनऊ यात्रा के दौरान श्री मोदी जब हजरतगंज से गुजर रहे थे तो हैदराबाद के दलित छात्र रोहित वेमुला की बलात आत्महत्या के विरोध में एक वामपंथी छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने उन्हें काले झंडे दिखाये. यह देखते ही वहां मौजूद भगवा ब्रिगेड के लोग बौखला गये और जनतांत्रिक तरीके से विरोध जता रहे छात्रों पर हमला बोलने को दौड़ पड़े. समाचार पत्रों के मुताबिक यदि पुलिस ने विरोध जताने वाले छात्रों को खदेड़ न दिया होता तो भगवा ब्रिगेड उनको सबक सिखा देती. दूसरी- एक बारबर के बेटे को आतंकवादियों से कथित संबंध बता कर जब गिरफ्तार किया गया तो भीड़ ने उसके पिता की दुकान पर हमला बोल दिया और उसमें तोड़-फोड़ की. तोड़-फोड़ करने वालों को खदेड़ने के लिये पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. ( बंबई में भी रोहित की मौत का विरोध कर रहे दलित छात्रों को संघ की शाखा वालों ने लाठी-डंडों से पीट पीट कर घायल कर दिया). ये दोनों घटनायें कई सवाल खड़े करती हैं- क्या लोकतंत्र में काले झंडे दिखाने वालों से अब सत्तापक्ष कानून हाथ में लेकर खुद ही निपटेगा? इससे जो अराजकता और तानाशाही का बीजारोपण होगा वह हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली को ही ले डूबेगा. लंबे समय तक विपक्ष में रहने वाला संघ गिरोह आये दिन काले झंडे दिखाने का काम करता रहा तब उस पर तो किसी दल के कार्यकर्ताओं ने हमले नहीं किये. इससे साबित होता है कि लोकतांत्रिक तरीकों से सत्ता में आया संघ गिरोह सत्ता में आते ही लोकतांत्रिक परंपराओं को ही तहस- नहस करने पर आमादा है. अब जरा दूसरी घटना पर गौर करें. किसी को किसी आरोप में गिरफ्तार करने का मतलब यह तो नहीं कि वह अपराधी सिध्द होगया. यह तो न्याय के घोषित सिध्दांतों के विरुध्द होगा. यह भी जग जाहिर कि राज सत्तायें अपने राजनैतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिये तमाम निर्दोष लोगों को झूठे आरोप लगा कर गिरफ्तार करती रहीं हैं और बाद में अदालतों ने उन्हें निर्दोष करार दिया है. बीस माह के शासनकाल में हर मोर्चे पर विफल रही भगवा सरकार भी इस तरह की गिरफ्तारियां करके समस्याओं से ध्यान हठाने की कोशिश कर रही है, तमाम राजनीतिविदों ने ऐसी आशंका जताई हैं. फिर किसी को भी भीड़ इकट्ठी कर तोड़ फोड़ करने और कानून हाथ में लेने का अधिकार किसने दे दिया? यहां यह भी उल्लेखनीय कि देश में आये दिन आतंकी हमले होते रहते हैं लेकिन कहीं भी कभी भी ऐसा देखने को नहीं मिला कि भीड़ आतंकवादियों से मोर्चा लेने निकल पड़ी हो. नहीं कभी संघ शाखा के लठैत आतंकवादियों से दो दो हाथ करने निकले. ये अपने देश के दलितों, अल्पसंख्यकों अथवा उनके पक्ष में आवाज उठाने वालों पर ही शूरमागीरी दिखाते रहते हैं. क्या यह इसलिये नहीं कि संघ गिरोह ने समाज में सांप्रदायिकता का जहर घोल रखा है. असहिष्णुता का मुद्दा उठाने वालों को दिन रात कोसने वाला संघ गिरोह बताने का कष्ट करेगा क्या कि सहिष्णुता के वातावरण में किसी की गिरफ्तारी मात्र पर उसके घर या प्रतिष्ठान पर हमला कौन करेगा? जब तक कि भीड़ को उकसाया न जाये. और इस उकसावे का काम संघ गिरोह के अलाबा कौन कर सकता है? बंबई में तो संघियों ने खुले आम हमला बोला. लखनऊ और बंबई की घटनायें इस ओर इशारा करती हैं कि दलितों कमजोरों के पक्ष में आवाज उठाने वालों पर हमले और किसी पर आरोप लगते ही भीड़ को उकसा कर तोड़ फोड़ कराने की वारदातें हमारे लोकतंत्र के लिये गंभीर खतरा हैं. 67 वें गणतंत्र दिवस पर जागो भारतवासियो! डा. गिरीश
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