भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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शनिवार, 31 जुलाई 2010

सोये हुए लोगों के बीच जागना पड़ रहा है मुझे

सोये हुए लोगों के बीच जागना पड़ रहा है मुझेपरछाइयों से नीद में लड़ते हुए लोगजीवन से अपरिचित अपने से भागेअपने जूतों की कीलें चमका कर संतुष्टसंतुष्ट अपने झूठ की मार सेअपने सच से मुँह फेर कर पड़ेरोशनी को देखकर मूँद लेते हैं आँखेंसोते हुए लोगों के बीच जागना पड़ रहा है मुझेऋतुओं से डरते हैं, ये डरते हैं ताज़ा हवा के झोंकों सेबारिश का संगीत इन पर कोई असर नहीं डालतापहाड़ों की ऊँचाई से बेख़बरसमन्दरों की गहराई से नावाकिफ़रोटियों पर लिखे अपने...
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थम नहीं रहा है थाईलैंड का संकट

थाईलैंड गंभीर उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। हालांकि सेना ने राजधानी बैंकाक को सरकार विरोधी रेडशर्ट पर कड़ प्रहार करके तत्काल प्रदर्शनकारियों से मुक्त कर दिया है लेकिन राजनीतिक असंतोष, बेचैनी तथा संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। पिछले कुछ समय से बैंकाक तथा आसपास के इलाके हिंसा की गिरफ्त में थे। सेना की कार्रवाई से स्थिति भले ही नियंत्रण में मालूम पड़े लेकिन असंतोष उबल रहा है। 45 दिनों से चला आ रहा उग्र प्रदर्शन अभिसित बेज्जजीवा के...
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अन्तर्राष्ट्रीय आन्दोलन की अनिवार्यता

विश्व के 20 देशों के प्रधानों की जो बैठक अभी कनाडा के टोरेण्टो शहर में हुई उससे उम्मीद की जाती थी कि 2008 से विश्व में जो भारी आर्थिक संक्ट (रिसेशन) आया और जिसमें करोड़ो लोग बेरोजगार हो गये, उनके घर बिक गये, पेन्सन के मूल्य में कटौतियां हुईं, भारी संख्या में आबादी दरिद्र हो गयी जिसमें अकेले चीन में 230 मिलियन और भारत में 3.37 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे चले आये और यूरोप अभी भारी संकट से गुजर रहा है तथा अमरीका में भारी संख्या में...
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शुक्रवार, 30 जुलाई 2010

पीथमपुर ही क्यों!

पीथमपुर मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है, जहां प्रदेश की सरकार यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा नष्ट करने जा रही है। प्रदेश सरकार का यह फैसला किसी एक स्थान पर किसी कारखाने के कचरे को नष्ट करने मात्र का नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण और मानव जीवन पर एक गंभीर आघात है। लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के कल्याणकारी स्वर पर प्रश्न चिह्न है यह। भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार यूनियन कार्बाइड के परिसर में पिछले 25 सालों से जहरीला कचरा...
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उत्तर प्रदेश में नई ताकत बन कर उभरे किसान

लखनऊ, 21 जुलाई। उत्तर प्रदेश में किसानों की बढ़ती ताकत के आगे मायावती सरकार लगातार पीछे हट रही है। दो दिन पहले दादरी कि किसानों के लिए जमीन का मुआवजा देने की मियाद बढ़ा दी गई। इससे पहले लखनऊ में दशहरी आम के ढाई सौ साल पुराने पेड़ के साथ कई बगीचे बचाने का फैसला किया गया। चंदौली में किसानों की दस हजार हेक्टेयर जमीन जो रेलवे कॉरिडोर के लिए ली जानी थी, वह फैसला रद्द कर दिया गया।इससे राज्य के विभिन्न इलाकों में खेती की जमीन के अधिग्रहण...
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गुरुवार, 29 जुलाई 2010

मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ

मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ, पर तुम्हें भूला नहीं हूँ ।चल रहा हूँ, क्योंकि चलने से थकावट दूर होती,जल रहा हूँ क्योंकि जलने से तमिस्त्रा चूर होती,गल रहा हूँ क्योंकि हल्का बोझ हो जाता हृदय का,ढल रहा हूँ क्योंकि ढलकर साथ पा जाता समय का ।चाहता तो था कि रुक लूँ पार्श्व में क्षण-भर तुम्हारेकिन्तु अगणित स्वर बुलाते हैं मुझे बाँहे पसारे,अनसुनी करना उन्हें भारी प्रवंचन कापुरुषतामुँह दिखाने योग्य रक्खेगी ना मुझको स्वार्थपरता ।इसलिए ही आज युग...
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“नए बिहार के निर्माण” के नारे के साथ विधान सभा चुनावों में उतरेगी भाकपा

पटना, 9 जुलाई, 2010: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, कृषि और औद्योगिक पिछड़ापन, बाढ़-सुखाड़, महंगाई, खाद्य सुरक्षा, प्रशासनिक भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, पानी और बिजली संकट आदि समस्याओं का समाधान तथा भूमिहीनों को कम से कम एक एकड़ जमीन, भूमिहीन बेघरों को कम से कम 10 डिसमिल आवासीय भूमि तथा मकान, जनवितरण प्रणाली के माध्यम से सभी परिवारों को निर्धारित उचित मूल्य पर आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की आपूर्ति तथा सभी नागरिको को भर पेट भोजन की व्यवस्था करने...
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1960 की केन्द्रीय कर्मचारी हड़ताल

संगठन, संस्था, समाज और देश के इतिहास में कुछ जाज्वल्यमान कालखण्ड होते हैं, जिन पर उन्हें नाज होता है। उनकी गौरव गाथाएं होती हैं। समस्त केन्द्रीय कर्मचारी जब अपने संयुक्त संघर्षशील आंदोलन का सिंहावलोकन करते हैं तो देखते हैं, कि 1944 की हड़ताल से पहला वेतन आयोग जन्मा और 1957 के हड़ताल के नोटिस के कारण दूसरे वेतन आयोग का गठन हुआ। उसी आयोग की कर्मचारीविरोधी अनुशंसाओं और केन्द्र सरकार के अड़ियल रूख के कारण 12 जुलाई 1960 से 5 दिवसीय अनिश्चितकालीन...
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बुधवार, 28 जुलाई 2010

धर्मयुद्ध

युद्ध कभी धार्मिक नहीं होता या फिर यों कहा तो युद्ध का कोई धर्म नहीं होता हैयह बात अलग है कि विजय के बाद धर्म जयी के साथ हो जाता हैयदि राम रावण युद्ध में रावण जीत गया होतातो हमारा सारा समय सीता को कुलटा कहते बीततारात कायर, लक्ष्मण हिज, और हनुमान हमें कमजोर नजर आताजगह-जगह भगवान रावण पूजा जाता और विभीषण को देशद्रोही कहते हुए देश से निकाला जातासच...
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अमरीका में हर महीने 13 बैंक फेल

दुनिया में मुक्त बाजार और डीरेगुलेशन (विनियंत्रण) का सबसे बड़ा समर्थक है अमरीका-हमारे प्रधानमंत्री का प्रेरणास्रोत अमरीका। और उसके जेबी संगठन हैंः विश्व बैक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्व व्यापार संगठप-जिनके इशारे पर निर्देश से हमारी आर्थिक नीतियां तय होती हैं। जिसका नवीनतम उदाहरण पेट्रो-उत्पादो के मूल्य तय करने के काम को तेल कम्पनियों के हवाले किया जाना है, जिसके कारण डीजल, पेट्रोल, केरोसिन और रसोई गैस के मूल्य बढ़ गये हैं।विश्व...
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मंगलवार, 27 जुलाई 2010

बुरे समय में नई शुरूआत का स्वप्न

पुस्तक समीक्षा: उपन्यास बरखारचाई - लेखक: असगर वज़ाहतबहुमुखी प्रतिभा के धनी असग़र वजाहत का ताजा उपन्यास बरखारचाई कई दूसरे कारणों के अतिरिक्त इस कारण भी महत्वपूर्ण है कि उम्मीदों के टूटने व स्वप्न भंग के दौर में उम्मीद एक चिर यथार्थ के समान उसमें उपस्थित है। उम्मीद एक लौ की तरह उसमें से फूटती है। ऐसे समय में जबकि कथा साहित्य में बहुत कुछ बदल गया है, भाषा, टेक्निक, विषय चयन की पद्धति तथा उसकी प्रस्तुति का अंदाज, पक्षधरताओं की भंगिमाएं।...
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महंगाई रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के कदम अपर्याप्त - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी

लखनऊ 27 जुलाई। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य कौंसिल ने भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा त्रैमाषिक समीक्षा में उठाये गये कदमों को महंगाई रोकने के लिए नाकाफी बताते हुए कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के बयान से साफ जाहिर है कि खाद्य वस्तुओं की कमरतोड़ महंगाई रिजर्व बैंक का सरोकार नहीं है जबकि यही महंगाई हिन्दुस्तान के 90 प्रतिशत नागरिकों के जीवन को समस्याग्रस्त बना चुकी है। भारतीय रिजर्व बैंक का केवल गैर खाद्य पदार्थों...
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आज के युग में पैसा भगवान से ऊपर है

सुबह पेपर की मुख्य लाइन में घोर अन्याय पढ़कर और झुर्रीवाली बूढ़ी महिला का विलाप करता फोटो देखकर आंखों में आंसू आ गये।भोपाल गैस त्रासदी के 25 साल बाद आये निर्णय को पढ़कर न्यायालय से भी विश्वास उठ गया। जिन लोगों के जिगर के टुकड़ों को इस भीषणतम त्रासदी निगल गई उनके परिवार, बच्चों, सगे संबंधियों के बारे में जरा सोचो। दो वर्ष का कारावास का निर्णय सुनकर उनके दिल पर क्या गुजरी होगी। यही कि आज के दुनिया में जहां पैसों के आगे भगवान को भी...
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सोमवार, 26 जुलाई 2010

5 जुलाई 2010 की अखिल भारतीय हड़ताल - हड़ताल जर्बदस्त सफल! आगे क्या?

देश का आम आदमी बेहद गुस्से में है; मनमोहन सिंह सरकार की जनविरोधी नीतियों को जनता स्वीकार नहीं करती। देश के आम लोगों का यह गुस्सा और यूपीए-दो सरकार के प्रति उनका मोहभंग 5 जुलाई 2010 की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के रूप में सामने आया। यह राष्ट्रव्यापी हड़ताल जबर्दस्त सफल हुई और वस्तुतः भारत बंद बन गयी।अति प्रतीक्षित उच्चाधिकार प्राप्त मंत्रिसमूह ने न केवल पेट्रोल, डीजल, किरोसिन और रसोई गैस के मूल्य बढ़ाने की घोषणा की बल्कि पेट्रोल और डीजल...
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जब शहीद सोने जाते हैं

जब शहीद सोने जाते हैंतो मैं रुदालियों1 से उन्हें बचाने के लिए जाग जाता हूँ।मैं उनसे कहता हूँ रू मुझे उम्मीद है तुम बादलों और वृक्षोंमरीचिका और पानी के वतन में उठ बैठोगे।मैं उन्हें सनसनीखेज वारदात और कत्लोगारत की बेशी-कीमत2,से बच निकलने पर बधाई देता हूँ।मैं समय चुरा लेता हूँताकि वे मुझे समय से बचा सकें।क्या हम सभी शहीद हैं ?मैं ज़बान दबाकर कहता हूँ:धोबीघाट के लिए दीवार छोड़ दो गाने के लिए एक रात छोड़ दो।मैं तुम्हारें नामों को जहाँ...
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ऐसे समय में भी

एक ऐसे समय मेंजब मुसलमान शब्दआतंक का पर्याय हो गया हैमैं ख़ुश हूँकि मेरे शहर में रहते हैंबादशाह हुसेन रिज़वीजो इंसान हैं उसी तरहजिस तरह होता हैकोई भी बेहतर इंसानपक्षी उनकी छत से उड़करबैठते हैं हिन्दुओं की छत परऔर उनके पंजों में बारूद नहीं होताउनके घर को छूकरनहीं होती जहरीली हवाउसी तरह खिलते हैं उनके गमलों में फूलजैसे किसी के भीउनका हृदय हातिमताई हैजिसमें है हर दुःखी के लिएसांत्वना के शब्दसच्चे आँसू/और बहुत सारा वक़्तहालांकि इतने...
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शनिवार, 24 जुलाई 2010

महंगाई पर विषमताओं का द्वंद्व

23 जुलाई को बेहतर मानसून की संभावनाओं (बात दीगर है कि मानसून अभी तक विलम्बित ही नहीं बल्कि सामान्य से काफी कम है) का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने मार्च 2011 तक मुद्रा स्फीति में भारी गिरावट की उम्मीद जताते हुए कहा कि मार्च 2011 में यह 6.5 प्रतिशत रह जाएगी जबकि जून 2010 में यह 10.55 प्रतिशत रही है।इसी दिन, गौर करें इसी दिन के सुबह के अखबारों में सरकार के हवाले से एक समाचार छपा कि सब्जियों के दाम घटने...
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शनिवार, 17 जुलाई 2010

सुनो हिटलर

हम गाएंगे / अंधेरों में भी /जंगलों में भी / बस्तियों में भी /पहाड़ों पे भी / मैदानों में भी /आँखों से / होठों से /हाथों से / पाँवों से /समूचे जिस्म से /ओ हिटलर!हमारे घाव / हमारी झुर्रियाँ /हमारी बिवाइयाँ / हमारे बेवक़्त पके बाल /हमारी मार खाई पीठ / घुटता गला/सभी तोआकाश गुनगुना रहे हैं।तुम कब तक दाँत पीसते रहोगे?सुनो हिटलर--!हम गा रहे हैं।- वेणूगो...
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शुक्रवार, 16 जुलाई 2010

अलविदा कामरेड हुकम सिंह भण्डारी

टिहरी षहर के ठीक सामने पड़ने वाली पट्टी रैका । दोनों के बीच भीलींगना नदी, भागीरथी की सहायक। पट्टी दोगी की तरह रियासत का एक बेहद गरीब और उपेक्षित इलाका । लोक मान्यताओं के मुताबिक घोषित तौर पर रागस भूमि। राक्षस का विकट क्षेत्र, जिसमें जाने से ऐषतलब देवता भय खाते हैं । देवी-देवता वहां से दूर-दूर, बाहर-बाहर रहते हैं ।उस रैका कीे ऊँचाई पर, पहाड़ की चोटी पर बसे एक गांव पोड़या में बयासी साल पहले हुकमसिंह भण्डारी ने जन्म लिया था । अपने...
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खाद्य सुरक्षा एवं महंगाई पर राष्ट्रीय सम्मेलन द्वारा अंगीकृत घोषणापत्र

1 जुलाई 2010 को चार वामपंथी पार्टियों - भाकपा, भाकपा (मा), फारवर्ड ब्लाक और आरएसपी ने दिल्ली के मावलंकर भवन में खाद्य सुरक्षा एवं महंगाई पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन ने निम्न घोषणापत्र जारी किया:"राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं महंगाई पर राष्ट्रीय सम्मेलन इस पर अपनी गंभीर चिन्ता व्यक्त करता है किगेहूं, चावल, खाद्य तेलों, चीनी, दालों और सब्जियों समेत आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है जिससे देश...
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बुधवार, 14 जुलाई 2010

गड़े मुर्दे मत उखाड़ें, वक्त के तकाजे को अमल करें - एटक की अपील

प्रिय कामरेड पंधे,“आपकी पत्रिका “वर्किंग क्लास” (जून 2010) में प्रकाशित का. जीवन राय के आलेख की तरफ हमारा ध्यान दिलाया गया है। उस आलेख को हमने गंभीरता से पढ़ा है।आप कृपया स्मरण करें कि आपके कार्यालय में ही कोयला हड़ताल के प्रश्न पर चर्चा हुई थी और हमने सुझाव दिया था कि हड़ताल की तारीख आगे बढ़ायी जाय और अन्य टेªड यूनियनों के परामर्श से हड़ताल की वैकल्पिक तारीख तय की जाय। असलियत में एटक के राष्ट्रीय सचिव रमेन्द्र कुमार ने इस बारे में...
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कंपनी अफसरों का वेतन करोड़ों में - करते क्या हैं वे मोटे पगार वाले?

दो भारत बन रहा है। एक ‘शाइनिंग इंडिया’ तो दूसरा ‘दरिद्र भारत’। इसी तरह श्रम के भी दो मानक हो गये हैं ‘आफिसर्स पर्क’ और ‘मजदूरों की दिहाड़ी’। कंपनी के सीइओ के वेतन करोडों में, लेकिन मजदूरों की दिहाड़ी मुश्किल से दो अंकों में। प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक देश में कारपोरेट जगत में सौ से अधिक अधिकारियों का मासिक वेतन एक करोड़ रुपए से अधिक है और यह संख्या शुरूआत भर है। भारत में कुल मिलाकर 4500 से अधिक सूचीबद्ध कंपनियां हैं, जिनमें 175 ने...
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मंगलवार, 13 जुलाई 2010

पिछड़ा

महंगाई की घनघोर आंधीभ्रष्टों बेईमानों जन-शत्रुओंसंग काले-धनियों की चांदीआमजन बेचारा थका हाराहर पल गिरते उठते जूझतेहर तरह वहीं है जाता माराकमाने की पहली ही जुगतराह खर्च ही जाते-आतेलगाये रोज़ ही करारी चपतरिक्शा टेम्पो जरूरत, भाड़ामजबूर जेब खीेंचे बीस-पच्चीसपर वह बढ़ चालिस पे अड़ाकार स्कूटर स्कूटी बाईकपास अपने न हो तब भीतन-तेल चारों ओर निकाले हाईकहो जो दुपहिया चार-पहियाउछलते कूदते तेल की मारमुंह गाये हाय दैया रे दैयानित-दिन आटा,दाल तरकारीऊपर...
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नागार्जुन की याद

नागार्जुन को ध्यान में रखते हुए उनसे संबंधित ढेर सारी बातें सामने आने के लिए होड़ मचाने लगती हैं। वे ऐसी बातें हैं, जो उनके बाद की पीढ़ी से लेकर आज तक के लेखकों में दुर्लभ हैं। नागार्जुन जिस दौर में साहित्य जगत में कलम लेकर आये, उस दौर में जीवन में किसी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए पहले त्याग करना अनिवार्य समझा जाता था। निराला ने एक गीत में लिखा...
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