भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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बुधवार, 16 जुलाई 2014

सिकंदराराऊ(हाथरस) कांड प्रशासनिक लापरवाही और विभाजनकारी ताकतों की करतूत- भाकपा

लखनऊ- १६ जुलाई- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का एक प्रतिनिधि मंडल राज्य सचिव डा. गिरीश के नेत्रत्व में आज हाथरस जनपद के कस्बा सिकन्दराराऊ पहुंचा जहां गत दिनों एक विवाहिता को धोखे से ससुराल से लाकर सामूहिक दुराचार किया गया और इसके बाद पीड़िता ने आग लगा कर आत्महत्या कर ली अथवा उसकी हत्या कर दी गयी. पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन द्वारा बरती लापरवाही एवं उपेक्षा की प्रतिक्रिया में आक्रोशित लोग सडकों पर उतर आये थे और वहां अनेक वाहन एवं ठेले- खोमचे फूंके गये. सांप्रदायिक और जातीय विभाजन का खेल खेलने वालों ने वहां जमकर अपना खेल खेला और कस्बा भयंकर दंगों की गिरफ्त में आने से बाल-बाल बच गया. पीडिता के परिवार, पड़ोसियों एवं स्थानीय नागरिकों से व्यापक चर्चा के बाद प्रेस को जारी रिपोर्ट में भाकपा नेताओं ने कहा कि पीड़ित मृतका के साथ हुई दरिंदगी के बाद स्थानीय प्रशासन सक्रिय होगया होता और दरिंदों के खिलाफ तत्काल कठोर कदम उठाये होते तो इसकी इतनी विकराल प्रतिक्रिया नहीं होती. अपराधियों को पकड़ने में हीला हवाली की गयी और म्रत्यु से पूर्व पीडिता के मजिस्ट्रेटी बयान तक नहीं लिए गये. यह जानते हुये भी कि पीडिता और दरिन्दे अलग अलग संप्रदाय के हैं और घटना दूसरा मोड़ भी ले सकती है, प्रशासन ने मृतका के अंतिम संस्कार से पहले ऐतियादी जरूरी कदम नहीं उठाये. सड़कों पर उतरी आक्रोशित भीड़ को समझा बुझा कर शांत करने के बजाय पुलिस प्रशासन ने लाठी गोली का सहारा लिया. मौके का लाभ उठाने को सांप्रदायिक और जातीय विभाजन की राजनीति करने वाले तत्व सक्रिय होगये और बड़े पैमाने पर आगजनी कर डाली. बड़े वाहनों के अतिरिक्त समुदाय विशेष के ठेले खोमचों को खास निशाना बनाया गया. यहां उल्लेखनीय है कि समाजवादी पार्टी के शासन में संप्रदाय विशेष के गुंडों और असामाजिक तत्वों का मनोबल बढ़ जाता है और वे खुलकर गुंडई करते हैं. पुलिस प्रशासन भी उनके विरुध्द कार्यवाही से बचता है. इसकी बहुसंख्यक समुदाय में प्रतिक्रिया होती है सांप्रदायिक तत्व इसका लाभ उठाते हैं. आज उत्तर प्रदेश में यह प्रतिदिन होरहा है. राज्य सरकार को इस परिस्थिति को समाज के व्यापक हित में समझना चाहिये और प्रशासन को आवश्यक निर्देश देने चाहिये. सम्बंधित समाज के उन ठेकेदारों को भी इन तत्वों को पटरी पर लाने को काम करना चाहिये जो वोटों के समय समाज के ठेकेदार बन जाते हैं. भाकपा का आरोप है कि आगजनी की घटनाओं के बाद पुलिस ने पीड़िता के दलित बहुल मोहल्ले पर हमला बोल दिया. एक युवक गोली से तो दूसरा पुलिस के ट्रक की चपेट में आकर घायल होगया. घरों के दरवाजे तोड़ डाले गये और महिलाओं और बच्चों तक को पीट पीट कर घायल कर दिया गया. बदले की भावना से और बिना जांच किये ही दर्जनों लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया. तमाम लोगों को गिरफ्तार करने की धमकी पुलिस देरही है. लोग खौफ के साये में हैं और पलायन कर रहे हैं. भाकपा इस सबकी कठोर शब्दों में निंदा करती है. भाकपा मांग करती है कि पीड़िता से दुराचार करने वाले सभी अपराधियों को गिरफ्तार किया जाये, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाये, आगजनी के बाद गिरफ्तार किये गये निर्दोष लोगों को जाँच कर छोड़ा जाये, पीडिता के परिवार को मुआबजा दिया जाये तथा घायलों को भी मुआबजा दिया जाये. भाकपा के इस प्रतिनिधिमंडल में डा. गिरीश के साथ राज्य काउन्सिल सदस्य बाबूसिंह थंबार, चरण सिंह बघेल, पपेन्द्र कुमार, सत्यपाल रावल, द्रुगपाल सिंह, विमल कुमार एवं मनोज कुमार राजौरिया आदि शामिल थे. डा. गिरीश

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