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मंगलवार, 31 मार्च 2020
at 7:51 pm | 0 comments |
AN OPEN LETTER OF CPI, UP TO CM UP AND CM TAMILNADDU
भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल
22, कैसर बाग, लखनऊ- 226001
दिनांक- 31
मार्च 2020
उत्तर प्रदेश
के मुख्यमंत्री को भाकपा राज्य काउंसिल का पत्र- 3
By- E-
Mail
सेवामें
श्री योगी आदित्यनाथ जी,
मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
लखनऊ- 226001
विषय- जनपद महाराज गंज के 60 युवा मजदूरों और अन्य अनेक
यूपी वासियों के तमिलनाड्डु में फंसे होने के संबंध में।
महोदय,
हमें भाकपा के प्रदेश भर में फैले कार्यकर्ताओं से और
अन्य राज्यों में फंसे यूपी के पीड़ितों से उनकी कठिनाइयों के बारे में अनेक सूचनाएं
प्राप्त हो रही हैं, लेकिन हम आपके संज्ञान में केवल उन्हीं
चुनींदा को लाते हैं जहां लोग असहनीय स्थिति में पहुँच चुके हैं।
हमें यूपी के जनपद महाराजगंज के ग्राम व पोस्ट- जमुई
पंडित के स्थाई निवासी श्री शैलेश चौधरी मो॰ नं॰ – 9566562130 से सूचना मिली है कि
उनके साथ इस जनपद के 60 मजदूर तमिलनाड्डु के तिरुप्पुर- जनपद में फंसे हैं और अब वे
भूख के कोरोना की गिरफ्त में आचुके हैं।
ये मजदूर U Trenzed
Kolipanye उद्योग में कार्यरत थे जो वर्तमान में Kolipane
Annapurna Compound SF No. 105, Kolipanye Andivaalyam, Tiruppur- 641687 में स्थित है।
वहीं फंसे ये मजदूर केवल हिन्दी बोल पाते हैं, अतएव स्थानीय लोगों और प्रशासन से रूबरू होने में उन्हें बेहद कठिनाई होरही
है।
किसी तरह प्रशासन की ओर से उन्हें कल प्रति व्यक्ति
1/ 2 किलोग्राम आटा मिला जो रात को ही खत्म होगया। फैक्टरी मालिक भी उनकी कोई मदद नहीं
कर रहा। निश्चय ही उन्हें तत्काल मदद नहीं मिली तो वे कोरोना से भले ही बच जायेँ, मगर भूख का अजगर उन्हें निगल जाएगा।
यहां में प्रसंगवश आपके संज्ञान में लाना चाहूँगा कि
हमें यूपी भर से भी ऐसी खबरें मिल रही हैं कि अति गरीब लोगों तक प्रति परिवार आधा किलो
आटा, आधा किलो चावल, पाव भर आलू और पाव भर दाल संबंधित लोगों
ने बांट कर पुण्य कमा लिया और वे भूखों मर रहे हैं। शायद पूंजीवादी व्यवस्था, पूंजीवादी शासन एवं पूंजीवादी मनोव्रत्ति सभी राज्यों में एक ही तरह से काम
कर रही है।
पुनः तमिलनाड्डु में फंसे मजदूरों के संबंध में कहना
चाहूँगा कि भाकपा, उत्तर प्रदेश के राज्य सहसचिव का॰ अरविन्दराज
स्वरूप ने आज तिरुप्पुर के जिलाधिकारी के उपलब्ध नंबरों पर बात करना चाही, पर फोन उठे नहीं।
तदुपरान्त उन्होने उत्तर प्रदेश सरकार के तमिलनाड्डु
के लिये नियुक्त नोडल अधिकारी श्री एम॰ देवराज, IAS तथा अपर पुलिस DGP- कार्मिक
श्री एल॰ बी॰ एंटनी देव कुमार IPS को ई- मेल के जरिये सारी जानकारी
भेजी, जिसकी प्रति मुझे भी प्राप्त हुयी है।
अतएव आपसे अनुरोध है कि उपर्युक्त मजदूरों को तत्काल
भोजन एवं आवास मुहैया कराने तथा किसी भी तरह उन्हें महाराजगंज तक पहुँचाने की व्यवस्था
( जहां उन्हें एकांत में मेडिकल सुपरविजन में रखा जा सकता है ) के आदेश देने का कष्ट
करें।
शीघ्र कार्यवाही की प्रतीक्षा में।
भवदीय
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
प्रतिलिपि आवशक कार्यवाही हेतु- मुख्यमंत्री, तमिलनाड्डु
सोमवार, 30 मार्च 2020
at 7:05 pm | 0 comments |
CPI, UP LETTER TO CM UP AND CM TELANGANA
भारतीय
कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल
22, कैसर बाग, लखनऊ- 226001
दिनांक- 30 मार्च 2020
उत्तर
प्रदेश के मुख्यमंत्री को भाकपा राज्य काउंसिल का पत्र- 2
सेवामें
श्री योगी आदित्यनाथ जी,
मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
लखनऊ- 226001
विषय- जनपद- सोनभद्र के 6 गरीब युवाओं और अन्य अनेक
के तेलांगाना में फंसे होने के संबंध में।
महोदय,
आपके संज्ञान में लाना चाहता हूं कि अन्य अनेक की
तरह उत्तर प्रदेश के जनपद- सोनभद्र के चोपन थाना अंतर्गत ग्राम पटवध के चार गरीब
नौजवान मजदूरी करने को हैदराबाद गये थे। वे जिस दिन वहाँ पहुंचे उसी दिन कर्फ़्यू
लागू होगया और कंपनी बन्द होगयी। भोले- भाले इन युवकों को यदि पहले से चेतावनी
होती तो कर्फ़्यू की घोषणा के मात्र दो दिन पहले वे अपनी यात्रा शुरू न करते।
इस समय ये चारों मजदूर – वामन टेक्स्ट प्रिंट प्रायवेट लिमिटेड, जो जनपद-
हैदराबाद के थाना एवं पोस्ट- घटकेसर के ग्राम-
पीला पाली में है, फंसे हैं। इन मजदूरों के खाने-
पीने की कोई व्यवस्था नहीं होपारही है। जो अल्प रकम वे घर से लेकर गये थे वह भी
खर्च होचुकी है। वे एकदम भूखों मरने के कगार पर हैं।
इन मजदूरों के नाम और मो॰ नं- निम्न हैं-
1- संजय, पुत्र- अमरनाथ, 9621065158
2- संदीप, पुत्र- बंसीलाल, 7030928893 व 8106337408
3- विनोद
कुमार, पुत्र- सुकालू एवं
4- शुभम, पुत्र- चन्दन
इस संबंध में निवेदन करना चाहता हूं कि भाकपा के राज्य
सह सचिव कामरेड अरविन्दराज स्वरूप ने उपर्युक्त के संबंध में गत आधी रात के बाद आपके
द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी श्री टी॰ वेंकटेश एवं अपर पुलिस महानिदेशक- रेलवे, श्री संजीव मित्तल को ई मेल भेज कर मदद दिये जाने का आग्रह किया था।
इस पर श्री मित्तल का जबाव मिला है कि 14 अप्रेल तक
कुछ भी संभव नहीं है और स्थानीय प्रशासन को सूचना दे दी गयी है। उन्होने स्थानीय प्रशासन
के नंबर- 100, 040- 23434343, 9490616780
संपर्क करने हेतु और खाने की व्यवस्था के लिये 040- 21111111 नंबर भेजा है परंतु न
तो वहां अभी तक कोई सहायता पहुंची न पीड़ितों का उनसे संपर्क हो पारहा है।
कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपकी ओर से सभी यूपी वासियों
की मदद के दाबे दर दाबे किये जारहे हैं, वहीं सारा मामला असहाय
पीड़ितों पर ही छोड़ पल्लू झाड़ने की चेष्टा की जारही है।
विपत्ति में फंसे इनके अभिभावकों और हम सबकी प्रबल
ख्वाहिश है कि उनके वहां खान पान और सुरक्षा की तत्काल व्यवस्था कराई जाये।
साथ ही तेलांगाना में फंसे इन युवको एवं अन्य यूपी
वासी मजदूरों, नागरिकों को शीघ्र से शीघ्र उनके घरों तक
पहुंचाया जाये। घर पहुँचने पर जांच के बाद वे एकांतवास में रखे जा सकते हैं।
वे सभी एक ऐसी यातना झेल रहे हैं जिसके लिये वे कतई
जिम्मेदार नहीं हैं।
आशा ही नहीं पूरा विश्वास है कि आप इस ज्वलंत
समस्या के निदान हेतु शीघ्र ठोस कार्यवाही अवश्य करेंगे। साभिवादन
भवदीय
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
प्रतिलिपि आवश्यक कार्यवाही हेतु- मुख्यमंत्री, तेलांगाना प्रदेश हैदराबाद।
शनिवार, 28 मार्च 2020
at 7:29 pm | 0 comments |
CPI UP LETTER TO CM UP
भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल
22, क़ैसर बाग, लखनऊ- 226001
दिनांक- 28
मार्च 2020
मुख्यमंत्री
उत्तर प्रदेश के नाम पत्र ( 1 )
सेवामें
श्री आदित्य नाथ जी,
मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
विषय- मुंबई में फंसे उत्तर प्रदेश और उत्तर भारतीय
वासियों को वापस घर पहुंचाने के संदर्भ में
महोदय,
संचार माध्यमों से ज्ञात हुआ कि आपने कोरोना से निपटने
के प्रयासों के तहत शासन स्तर पर कई कमेटियां गठित कर दी हैं। विश्वास जगा कि अब प्रदेश
की जनता का हित होगा।
यह भी ज्ञात हुआ कि मुंबई सहित महाराष्ट्र में फंसे
यूपी के लोगों की मदद हेतु भी एक कमेटी और नोडल अधिकारी तय कर दिये गये हैं। इसके लिये
नवी मुंबई स्थित यूपी भवन के फोन और मोवायल नंबर – 022-17811861, 9137452239, 9702901598, एवं 9821058315
पर मदद हेतु संपर्क करने की बात भी कही गयी है।
क्योंकि यूपी के महाराष्ट्र और मुंबई में फंसे हुये
लोगों की दिक्कतों के बारे में मुझे लगातार सूचनायें मिल रहीं थीं अतएव जनहित मैंने
इन नंबरों को फेस बुक और तमाम वाट्सएप ग्रुपों में प्रसारित कर दिया। अनेक संवेदनशील
लोगों ने इसे शेयर कर दिया। फलस्वरूप यह सूचना तमाम पीड़ितों और प्रभावितों तक पहुंच
सकी।
परिणामस्वरूप तमाम लोगों ने आज उपर्युक्त नंबरों पर
मदद हेतु संपर्क किया, पर पूरे दिन फोन नहीं उठे। उदाहरण के
लिये मुंबई- बांद्रा ईस्ट बेहराम नगर में तकरीबन 50- 60 व्यक्ति अलीगढ़ जनपद के पहासू
व मिर्ज़ा चांदपुर एवं हाथरस के फंसे हुये हैं। उनमें से एक हाथरस निवासी श्री संजय
खान भी हैं जिनका मोबायल नंबर- 9536642121 है।
ये सब गरीब मजदूर और दस्तकार वहाँ पाई पाई को मुंहताज
हैं। कर्फ़्यू की अचानक घोषणा और उससे पहले ही ट्रेन आदि के बंद होने के कारण वे घर
भी नहीं आसके। मुंबई में कोरोना की भयावहता और ऊपर से भोजन और चिकित्सा सेवाओं की कमी
ने इन्हें व्यग्र कर दिया है और वे घर आना चाहते हैं।
संजय खान के अनुसार यूपी, बिहार और उत्तरी राज्यों के लाखों- लाख लोग इसी विपत्ति में फंसे हैं और उन्हें
वहां तत्काल निकाल कर घर पहुंचाने की जरूरत है।
इन्हें बसों और ट्रेन कंपार्टमेंट्स को मजबूत पोलीथिन
से पार्टीशंड करके लाया जा सकता है।
अतएव आपसे अनुरोध है कि अचानक महा विपत्ति में फंसे
इन लोगों को शीघ्र अतिशीघ्र अपने घरों को पहुंचाने को ठोस कदम उठायेँ। इस महायज्ञ में
केन्द्र सरकार की मदद लेना भी अपरिहार्य होगा। सधन्यवाद।
भवदीय
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
प्रतिलिपि- सभी संचार माध्यमों को।
शुक्रवार, 27 मार्च 2020
at 9:06 pm | 0 comments |
प्रकाशनार्थ-
उत्तर प्रदेश
से बाहर फंसे यूपी वालों के हालात बेहद संगीन
तत्काल और
ठोस कदम उठाये राज्य सरकार: भाकपा
लखनऊ- 27 मार्च 2020, भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि वे देश के विभिन्न
राज्यों में फंसे उत्तर प्रदेश के श्रमिकों और अन्य नागरिकों को अपने घर वापस लाने
अथवा उनको वहीं हर तरह की सुरक्षा दिलाने को तत्काल ठोस कदम उठाये।
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव ने कहा
कि उन्हें उत्तर प्रदेश के जिलों जिलों से अपने पार्टी साथियों से रिपोर्टें मिल रही
हैं कि उनके जनपदों के तमाम लोग पूर्व घोषणा के बिना अचानक हुये लाक डाउन के चलते दिल्ली, बंबई, कलकत्ता तथा तथा देश के अन्य राज्यों में फंसे
हैं और वे भुखमरी के कगार पर पहुँच चुके हैं। कुछ लोगों ने उनसे संपर्क भी किया है
और मीडिया भी खौफनाक तस्वीरें बयां कर रहा है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रीजी ने यूपी में फंसे अन्य
राज्यों के लोगों को उनके घर पहुंचाने और अन्य राज्यों से ऐसी ही अपेक्षा की थी और
आज उन्होने अधिकारियों की नोडल कमेटी भी बना दी है। लेकिन बाहर फंसे लोगों के हालात
इतने संगीन हैं कि तनिक भी ढिलाई भारी हानि पहुंचा सकती है।
समस्या की गंभीरता को देखते हुये शासन से वार्ता करने
के प्रयास भी किये लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के फोन उठे नहीं। भाकपा पुनः मांग करती
है कि यूपी के लोगों की रक्षा करे यूपी सरकार।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
शनिवार, 14 मार्च 2020
at 6:08 pm | 0 comments |
प्रकाशनार्थ-
जुर्माना
बसूल अध्यादेश को तत्काल वापस ले यूपी सरकार: भाकपा
लखनऊ- 14 मार्च, 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने कल योगी सरकार द्वारा जारी
किए गये ‘यूपी रिकवरी फार डेमेज टू पब्लिक एंड प्रायवेट प्रापर्टी
अध्यादेश’ को प्रदेश की जनता और न्यायव्यवस्था के लिये आघात बताया
है और इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है।
भाकपा राज्य सचिव मण्डल ने आरोप लगाया कि भाजपा और उसकी
सरकारें सदैव से संविधान और न्याय की व्यवस्था की धज्जियां बिखेरती रही हैं। जो न्यायिक
फैसला उनके हित में होता है उसे मानती हैं और जो उनके लक्ष्यों के विपरीत होता है उसे
ठुकरा देती हैं। बावरी मस्जिद ध्वंस प्रकरण में भी उन्होने राष्ट्रीय एकता परिषद और
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की धज्जियां बिखेर कर रख दी थीं।
अब सप्ताह भर पहले उत्तर प्रदेश के उच्च न्यायालय द्वारा
पोस्टर हटाने के आदेश को इस सरकार ने न केवल ढीढ्ता से ठुकरा दिया अपितु उसके विरूध्द
सर्वोच्च न्यायालय में जा पहुंचे। और जब वहाँ से भी इनके कुक्रत्य को हरी झंडी नहीं
मिली तो सरकार अध्यादेश लेकर आगयी।
इस सरकार को जनता के हितों की कतई कहीं फिक्र नहीं।
ओला, वारिश और तूफान से हुयी जन- धन हानि की इसे फिक्र नहीं, बेरोजगारों की कोई चिन्ता नहीं, अपराध और अपराधियों
पर इसका कोई अंकुश नहीं, महंगाई की तरफ इसका कोई ध्यान नहीं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवायें इसने पंगु कर रखी हैं,
विकास योजनाओं में कमीशनखोरी धड़ल्ले से चल रही है, इसके चहेते
अफसर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, कई पर आपराधिक मुकदमे कायम होरहे
हैं, दफा 144 लगा कर पुलिस- प्रशासन को राजनैतिक हथियार बना कर
यह जनता, जनांदोलन और विपक्ष को कुचल रही है धर्म का लबादा ओढ़
कर अधार्मिक आचरण कर रही है।
लोगों को कोरोना से उतना खतरा नहीं जितना इस सरकार से
खतरा है।
भाकपा इस अध्यादेश का कड़ा विरोध करती है और इसको तत्काल
वापस लेने की मांग करती है।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
बुधवार, 11 मार्च 2020
at 12:52 pm | 0 comments |
दिल्ली के
दंगा पीड़ितों की मदद हेतु धन एकत्रित करें
शीघ्र से
शीघ्र भेजे जाने की भाकपा की अपील
दिनांक- 11
मार्च 2020,
प्रिय साथी,
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद ने सभी
राज्य कमेटियों से आग्रह किया है कि वे दिल्ली के दंगा पीड़ितों की मदद के लिये आम जनता
से धन एकत्रित कर शीघ्र भेजें। आप जानते ही हैं कि राज्य प्रायोजित दिल्ली के भीषण
दंगों में 55 से अधिक लोग मारे गये हैं, सैकड़ों गंभीर रूप
से घायल हुये हैं, तमाम घर उजड़ चुके हैं और अरबों- खरबों की संपत्ति
का नुकसान हुआ है। इन्हें हम सबकी सहायता की जरूरत है।
यूपी में भी विगत दिनों सरकार की दरिंदगी के चलते लगभग
दो दर्जन लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा है, सैकड़ों घायल हुये
हैं और लोगों की संपत्तियों की बरवादी हुयी है।
अतएव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी अपनी सभी जिला इकाइयों
से अपील करती है कि वे संवेदनशील नागरिकों और आम जनता से धन एकत्रित कर शीघ्र से शीघ्र
राज्य कार्यालय को भेजें।
हम सभी संवेदनशील नागरिकों से अपील करते हैं कि दंगा
पीड़ितों को राहत और पुनर्वास के लिये अपना योगदान अवश्य प्रदान करें।
ये धनराशि निम्नांकित खाते में डालें या नकद राज्य कार्यालय
पर जमा करें।
CPI, U.P. A/C-
Communist Party of India, U. P. State Council
A/C No. –
353302010017252
353302010017253
IFS Code UBIN 0535338
Union Bank of India, Awadh Clarks Branch, Lucknow
आशा ही नहीं पूरा विश्वास है आप शीघ्र धनराशि एकत्रित
कर जमा करेंगे।
सधन्यवाद
आपका साथी
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
सोमवार, 9 मार्च 2020
at 4:56 pm | 0 comments |
CPI welcomes High Courts Deccission on Posters in Lucknow
प्रकाशनार्थ-
उच्च न्यायालय
ने दिया वसूली पोस्टर हठाने का फैसला
भाकपा ने
सरकार से जनता से माफी मांगने की मांग की
लखनऊ- 9 मार्च 2020, भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी, उत्तर प्रदेश के सचिव मण्डल ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय
के उस निर्णय का स्वागत किया जिसके तहत सीएए विरोधी आंदोलनकारियों के लखनऊ में फोटो
होर्डिंग लगाने को अवैध ठहराया गया है और उन्हें फौरन हटाने के निर्देश दिये हैं।
उच्च न्यायालय का यह निर्णय ढीठ, तनाशाह और लोकतन्त्र विरोधी सरकार के मुंह पर करारा तमाचा है। सरकार को इस
कुक्रत्य के लिये आम जनता से क्षमा मांगनी चाहिये। लेकिन सरकार को अभी भी अक्ल नहीं
आयी और वह खीझ मिटाने को उच्च न्यायालय के निर्णय के विरूध्द सर्वोच्च न्यायालय पहुँचने
का इरादा जता रही है।
भाकपा सचिव मण्डल ने कहाकि राज्य सरकार के रवैय्ये से
लग रहा है कि वह जनता से डरी हुयी है और भयवश वह जनता और उसकी आवाज उठाने वालों के
संघर्ष को कुचलना चाहती है। इसका कारण है कि भाजपा और उसकी सरकार लगातार जनता की जेब
के धन को पूँजीपतियों की झोली में डाल रही है।
संविधान, लोकतन्त्र, मानवाधिकार और निजता का हनन करने वाली सरकार से उत्तर प्रदेश में लोग, लोकतान्त्रिक शक्तियाँ और लोकतान्त्रिक संस्थाएं निरंतर संघर्षरत हैं और आज
का उच्च न्यायालय का निर्णय भी उसी संघर्ष का परिणाम है। निश्चय ही तानाशाहों को सर्वोच्च
न्यायालय में भी हार का सामना करना पड़ेगा।
और धीरे धीरे वह समय भी करीब आरहा है जब उत्तर प्रदेश
की जनता इस तानाशाह सरकार को इतिहास के कूड़ेदान तक पहुंचा देगी।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
शनिवार, 7 मार्च 2020
at 4:53 pm | 0 comments |
मन की बात
जब सरकार
न दे साथ
तो पीड़ितों
का संबल बन सकता है आपका हाथ
डा॰गिरीश
उत्तर प्रदेश में इन तीन दिनों में प्रक्रति के
थपेड़ों ने आम जनजीवन को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। भारत की अर्थव्यवस्था की
रीढ़ किसान और उसकी फसलों को चौपट कर दिया है। बरवादी की इस दास्तान के बीच उत्तर
प्रदेश की योगी सरकार की निष्ठुरता भी सामने आगयी है। आपदा के इस कठिन दौर में भी
वह अपने हिन्दुत्व के एजेंडे को ही परवान चढ़ाने में जुटी है।
हानि बहुतरफा है। ओलों, वर्षा और तूफानी हवाओं ने गेहूं व जौ की फसल को जमीन पर लिटा दिया है।
खेतों में भरे पानी के कारण वे उठ कर सीधे हो नहीं सकते और वांच्छित अनाज और भूसा
दे नहीं सकते। जब तक पानी सूखेगा, आलू जमीन में सड़ कर मलबे
में तब्दील हो जायेंगे। काटी जाचुकी तिलहन की फसल की गहाई- ओसाई हो नहीं सकती और
जो खेतों में खड़ी है वह काटे जाने से पहले बरवाद हो जायेगी। बुंदेलखंड और
दक्षिणाञ्चल के जिलों में होने वाली चना, मसूर और मौंठ जैसी
फसलों की रिकवरी असंभव है। टमाटर अब खेतों में ही सड़ेंगे।
जायद की फसल उग रही थी, उसके नन्हें पौधे जमीन में विलीन होगये। आम, नीबू
और मौसम के दूसरे फलों के बौर और फूल झड़ गये। आम के बौर को तो चमक भी मार गयी।
ईंट भट्टों पर बनी कच्ची ईंटें मिट्टी के मलबे में
तब्दील होगयीं। ग्रामीण और शहरी पशुपालक होली के लिये गोबर की गुलेरियाँ बना कर
बेचते हैं और खुद स्तेमाल करते हैं। वे भी पूरी तरह नष्ट होगयीं।
बिजली पत्तन से प्रदेश में लगभग दर्जन भर
मौतें होचुकी हैं। कच्चे मकान और झौंपड़ी
नष्ट होचुकी हैं।
बरवादी की चपेट में समूचा उत्तर प्रदेश है। पश्चिमी
उत्तर प्रदेश, ब्रज क्षेत्र, मध्य, तराई, बुंदेलखंड, पूर्वोत्तर
और दक्षिणपूर्व आफत ने सभी को चपेट में लिया है। लोग हतप्रभ हैं, किसान बेचैन हैं पर प्रदेश सरकार अन्यमनस्क बनी हुयी है। उसका पूरा ज़ोर सीएए
विरोधी आंदोलनकारियों से बदला लेने पर केन्द्रित है।
उत्तर प्रदेश सरकार की प्राक्रतिक आपदाओं की
उपेक्षा से इन इन तीन सालों में किसान की आर्थिक स्थिति पंगु बन कर रह गयी है। आए
दिन प्रदेश के किसी न किसी हिस्से से किसानों की आत्महत्याओं की खबरें मिलती रहतीं
हैं। कई जगह तो पूरे के पूरे किसान परिवार ने मौत को गले लगा लिया।
धार्मिक चोगे में अपना जनविरोधी और किसान विरोधी
चेहरा छिपाए बैठी उत्तर प्रदेश सरकार ने आँखें मूँद लीं और फसल बीमा कंपनियों ने
घोटालों से तिजौरियाँ भर लीं। नोएडा, जौनपुर एवं
प्रदेश के कई अन्य भागों में भूमियों की उचित कीमतें मांगने पर किसान लाठियों से
धुने गए तो अयोध्या में श्री राम की मूर्ति लगाने के लिए किसानों से जबरिया भूमि
छीनी जारही है।
उत्तर प्रदेश के किसान दोहरी आपदा झेल रहे हैं। एक
ओर उन्हें कुदरत के कहर का सामना करना पड़ रहा है तो दूसरी ओर उसे सरकार के डंडे की
मार सहन करनी पड़ रही है।
वक्त है कि आम जन और किसान को निदान खोजना ही होगा।
संगठित आवाज उठा कर सरकार को बाध्य करना होगा कि वह फसल हानि का सप्ताह के भीतर
आंकलन कराये और उन्हें शत प्रतिशत मुआबजा दिलाये। आंकलन कमेटियों में ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, इन चुनावों में हारे हुये
प्रत्याशी और किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल किए जाने चाहिये। तैयार रिपोर्ट को
अंतिम रूप देने से पहले ग्राम पंचायत कार्यालय पर चस्पा करना चाहिए ताकि किसान
दाबा कर सकें और रिपोर्ट में सुधार किया जा सके। पट्टेदारों और बटाईदारों को सीधे
भुगतान किया जाना चाहिए। सभी भुगतान चौपाल लगा कर राष्ट्रीयक्रत बैंकों के चेकों
के जरिये किये जाने चाहिए।
इस प्राक्रतिक आपदा से किसानों का होली का त्यौहार
फीका पड़ गया। मोदीजी का तो कोरोना वायरस से फीका पड़ चुका है। आम शहरियों का दिल्ली
की सरकार प्रायोजित हिंसा और सीएए, एनपीआर और एनआरसी
के आंदोलनकारियों के शर्मनाक उत्पीड़न से पड़ चुका है। दर्द उन्होने दिया है मरहम
हमें तलाशना होगा।
किसान सभा और वामपंथी कार्यकर्ताओं को तत्काल किसानों
और गांवों की तरफ रुख करना चाहिये। मौके पर जाकर अपने स्तर से फसलहानि का ब्यौरा तैयार
कर सामूहिक रूप से प्रशासन के समक्ष पेश करना चाहिये।
हम संकल्प करें कि होली का त्यौहार पूरी तरह सादगी
से मनायेंगे। आस्था की उन्मत्तता में ईंधन नहीं जलायेंगे। होली पर अनाज के दाने
जला कर नष्ट नहीं करेंगे। रंग गुलाल नहीं खेलेंगे। हाथ नहीं मिलाएंगे, गले नहीं मिलेंगे। धूल मिट्टी कीचड़ को हाथ नहीं लगाएंगे। परंपरागत
अभिवादन से प्रेम और भाईचारे का इजहार करेंगे।
प्राक्रतिक आपदा, दंगों की तवाही
और कोरोना की दहशत के बीच हमारी सामूहिक कार्यवाहियाँ पीड़ितों क
और इससे जो भी आर्थिक बचत हो उसे बरवाद किसानों, दंगों में म्रतकों और विनष्ट संपत्तियों वाले परिवारों तक पहुंचाएंगे। प्राक्रतिक
आपदा, दंगों की तवाही और कोरोना की दहशत के बीच हमारे ये सामूहिक
प्रयास ही पीड़ितों के लिए मरहम साबित होंगे। संकल्प लें कि हम अपने इन संकल्पों से
संवेदन शून्य शासकों को जगायेंगे- नया और सहिष्णु समाज बनाएँगे।
मंगलवार, 25 फ़रवरी 2020
at 7:19 pm | 0 comments |
CPI apeal for peace in U.P.
प्रकाशनार्थ-
अलीगढ़ और
उत्तर प्रदेश में शान्ति बनाये रखेँ: भाकपा
भाकपा ने
भाजपा और संघ पर लगाया सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप
लखनऊ- 25 फरबरी 2020, भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने अलीगढ़ के घटनाक्रमों पर चिन्ता जताते हुये अलीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और समूचे प्रदेश की जनता से शान्ति और भाईचारा बनाये
रखने की अपील की है। भाकपा ने दिल्ली की हिंसा में म्रतकों के परिवारों के प्रति गहरी
संवेदना व्यक्त की है।
राज्य सचिव मंडल की ओर से जारी एक प्रेस बयान में कहा
गया है कि CAA, NPR और NRC विरोधी आंदोलन की व्यापकता, उसके अनुशासन, उसके अहिंसात्मक स्वरूप और उसको बड़े पैमाने पर लोकतान्त्रिक शक्तियों से मिल
रहे समर्थन के चलते संघ भाजपा और उसकी सरकारें विचलित होगयी हैं और वे अब उसे बदनाम
कर, हिंसा का आरोप लगा कर उसकी आड़ में सांप्रदायिक विभाजन पैदा
करना चाहती हैं। इसके लिये वे अपने ट्रेण्ड काडर और पुलिस- प्रशासन का संयुक्त स्तेमाल
कर रही हैं।
दिल्ली के दुखद घटनाक्रमों से प्रेरित होकर अलीगढ़ में
भी शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे आंदोलन पर पहले संघ समर्थकों ने पथराव किया और पुलिस
प्रशासन ने भी आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग कर आतंक और संशय पैदा करने का प्रयास किया।
संघी जहां आंदोलन को सांप्रदायिक रूप देकर उसे बदनाम करना और अंततः नष्ट करना चाहते
हैं, वहीं पुलिस प्रशासन सत्ताधारियों को तुष्ट करने को अविवेकपूर्ण तरीके से बल
प्रयोग कर रहे हैं। निहित स्वार्थों के तहत दोनों ही भूल रहे हैं कि इसके दीर्घकालिक
परिणाम देश और समाज के लिये अहितकर होंगे।
उल्लेखनीय है कि मानवाधिकार आयोग और न्यायपालिका ने
गत माहों में पुलिस की अतिवादिता पर सवाल उठाए हैं।
भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहाकि लोकतन्त्र में किसी
आंदोलन की सफलता उसके अहिंसात्मक स्वरूप से तय होती है। अतएव आंदोलनकारियों को भी इसे
अहिसात्मक बनाये रखने के लिये और अधिक मशक्कत करनी होगी। खासकर तब जब शासक दल, सरकार और प्रशासन ने उन्हें उकसा कर हिंसा की ओर प्रव्रत्त करने के मंसूबे
बना रखे हैं। अतएव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सभी आंदोलनकारियों से अपील करती है कि
वे किसी भी तरह के उकसाबे में न आयें और आंदोलन को महात्मा गांधी की सीख पर चल कर संपूर्णतः
अहिंसक बनाये रखें। उन्हें समर्थन के नाम पर राजनैतिक रोटियाँ सेक रहे लोगों से भी
सावधान रहना होगा और मनमाने ढंग से दिये जारहे बन्द आदि के नारों का भी परीक्षण करना
होगा।
भाकपा ने दिल्ली की हिंसा में म्रत पुलिस जवान और नागरिकों
की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है और उन्हें न्याय दिलाने को न्यायिक जांच की मांग
की है।
भाकपा आम लोगों से अपील करती है कि वे राजनीति प्रेरित
शक्तियों के उकसावे में न आयें और शान्ति और भाईचारा बनाए रखें।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
सोमवार, 17 फ़रवरी 2020
at 3:47 pm | 0 comments |
Decissions of CPI State Council Meeting
प्रकाशनार्थ
बजट के जनविरोधी
फैसलों, आर्थिक गिरावट, महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ
भाकपा और
वामदलों का प्रदेशव्यापी आंदोलन कल से
लखनऊ- 17 फरबरी 2020, भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी की राज्य काउंसिल की दो दिवसीय बैठक आज यहां संपन्न हुयी। बैठक में आंदोलनो और संगठन संबंधी कई निर्णय लिए
गए हैं। बैठक की अध्यक्षता भाकपा मैनपुरी के वरिष्ठ नेता का॰ रामधन ने की। केंद्रीय
सचिव मण्डल के सदस्य कामरेड भालचंद कांगो ने राष्ट्रीय/ अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति पर
प्रकाश डाला। राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने राजनैतिक और सहसचिव का॰ अरविन्दराज स्वरूप ने
सांगठानिक रिपोर्ट प्रस्तुत की जिस पर 31 सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया।
बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुये भाकपा राज्य सचिव
डा॰ गिरीश ने बताया कि बजट के जनविरोधी, प्राविधानों खासकर
जरूरी सेवाओं के आबंटनों में कटौतियों, सभी सीमाएं लांघ चुकी
महंगाई, सार्वजनिक क्षेत्र को बेलगाम तरीके से बेचा जाना, किसानों को कर्ज के जाल में में फांस कर उनकी आर्थिक स्थिति को जर्जर बना
रही कुनीतियों तथा युवाओं को व्यथित कर रही बेरोजगारी आदि के खिलाफ कल 18 फरबरी को
प्रदेश भर में वामदलों के साथ मिल कर आंदोलन करने का निश्चय किया गया है।
इसके अलाबा अङ्ग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ शाही नेवी के
विद्रोह 22 फरवरी 1946 की यादगार दिवस से शुरू कर 23 मार्च शहीद भगत सिंह, सुखदेव एवं राजगुरु के बलिदान दिवस तक वैचारिक- राजनैतिक अभियान चलाया जायेगा।
इस पूरे माह भाजपा, उसकी सरकार और संघ की सांप्रदायिक, फासिस्टी और विभाजनकारी कारगुजारियों तथा उनकी जनविरोधी, लोकतन्त्र विरोधी संविधानविरोधी कार्यवाहियों को उजागर करने को विभिन्न कार्यक्रमों
का आयोजन किया जायेगा। व्यापक भागीदारी के साथ गोष्ठियाँ, सभाएं
आदि आयोजित कर जनता को आगाह और लामबंद किया जायेगा।
इसी तरह कामरेड गोविन्द पनसारे, जिनकी कि अंधराष्ट्रवादियों ने निर्मम हत्या कर दी थी के शहादत दिवस को “तर्क
और तार्किकता दिवस” के रूप में आयोजित किया जायेगा तथा 21 फरबरी 1848 को प्रकाशित हुये
कम्युनिस्ट घोषणा पत्र को समर्पित- “ मार्क्सवाद लेनिनवाद की प्रासंगिकता दिवस’’ के रूप में आयोजित किया जायेगा।
20 मार्च को खेतिहर मजदूरों, दलितों और गरीब जनता के सवालों पर दिल्ली में आयोजित रैली को समर्थन प्रदान
करने का निर्णय भी लिया गया।
1 मार्च को लखनऊ में आयोजित होने जारहे नौजवान सभा के
राज्य स्तरीय कन्वेन्शन को सफल बनाने का आह्वान भी किया गया।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
शनिवार, 8 फ़रवरी 2020
at 1:30 pm | 0 comments |
Left Parties Protest Against Anti people Budget
प्रकाशनार्थ-
बजट के
जनविरोधी प्राविधानों के खिलाफ 12 से 18 फरबरी तक
अभियान चलायेंगे वामपंथी दल
लखनऊ- 8 फरबरी 2020, उत्तर
प्रदेश के वामपंथी दलों- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की
कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-
माले, लिबरेशन और फारबर्ड ब्लाक के पदाधिकारियों की एक बैठक
आज यहाँ संपन्न हुयी।
बैठक में वामदलों द्वारा देश भर में जनविरोधी
केंद्रीय बजट जिससे कि जनता की समस्याएं और बढ़ेंगी के खिलाफ अभियान को उत्तर
प्रदेश में चलाने की रणनीति पर चर्चा हुयी।
बैठक में कहा गया कि मोदी सरकार ने लोगों पर
अवांच्छित भारी बोझ लाद कर अर्थव्यवस्था को भारी क्षति पहुंचाई है। साथ ही यह
सरकार धनवानों और कारपोरेटों को अधिकाधिक छूटें देती जारही है जिससे कि लोगों की
आर्थिक असमानता की खाई पहले से कहीं अधिक चौड़ी हुयी है। अभाव व गरीबी से त्रस्त लोग
खुद और समूचे परिवार के साथ आत्महत्याएं कर रहे हैं।
अतएव वामपंथी दलों के अभियान में निम्न मुद्दों को
प्रमुखता से उठाया जाएगा-
राष्ट्र के आर्थिक आधार- सार्वजनिक क्षेत्र के
उपक्रमों का निजीकरण पूरी तरह रोका जाये। लोगों की जीवन भर की कमाई एवं बचतों का
संग्रह एलआईसी का विनिवेशीकरण फौरन रोका जाये। यह जनता के धन को छीन कर कारपोरेट्स
को सौंपना है।
उद्योगों की बंदी और उनको सीमित करने, छंटनी तथा खाली जगहों को भरे न
जाने से बड़ी संख्या में बेरोजगारी बड़ी है। रोजगार दिये जायें, बेरोजगारी भत्ता दिया जाये और रु॰ 21, 000 न्यूनतम
वेतनमान दिया जाये।
सरकार की नीतियों से खेती और किसानों का संकट
असहनीय स्थिति में पहुँच गया है। अतएव एकमुश्त कर्जमाफ़ी तथा फसलों की समुचित कीमत
दी जाये।
अति आवश्यक क्षेत्रों में सरकार द्वारा भारी
कटौतियाँ की गयीं हैं। जैसे खाद्य सब्सिडी में रु॰ 75,532 करोड़, क्रषी, मछलीपालन और
अन्य संबंधित मामलों में रु॰ 30,683 करोड़, MNREGA में रु॰ 9,500 करोड़, सामाजिक कल्याण पर रु॰ 2,640 करोड़, शहरी विकास पर रु॰ 5,765 करोड़ तथा स्वास्थ्य पर रु॰
1,169 करोड़ तथा अन्य कटौतियाँ की गयीं हैं। इससे करोड़ों
भारतीय गरीबी के गर्त में धकेल दिये जायेंगे। अतएव इन कटौतियों को रद्द कर कम से
कम पिछले स्तर पर आबंटन किये जायें।
लोगों के जीवनयापन पर यह असहनीय हमले उस समय किये
जारहे हैं जबकि मोदी सरकार संविधान पर आक्रमण कर रही है, सीएए, एनपीआर और एनआरसी को लागू कर लोगों को बांटने, उनके बीच घ्रणा और हिंसा को भड़काने की कोशिश कर रही है। उत्तर प्रदेश की
सरकार दमन, अत्याचार और लोकतन्त्र को कुचलने पर आमादा है।
बैठक में निर्णय लिया गया और आह्वान किया गया कि 12
से 18 फरबरी तक प्रदेश भर में संयुक्त रूप से अभियान चलाया जाये। नुक्कड़ सभाएं, सभाएं, गोष्ठियाँ, तथा पदयात्राएं आयोजित की जायें। सप्ताह
भर के अभियान का समापन 18 फरबरी को बड़े आयोजन के साथ किया जाये।
बैठक में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश, माकपा के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा- माले
के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव एवं फारबर्ड ब्लाक के राज्य सचिव एस॰ एन॰ सिंह
चौहान ने भाग लिया।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
मंगलवार, 31 दिसंबर 2019
at 7:24 pm | 0 comments |
नये साल में वामदलों के नये अभियान का शुभारंभ : 8 जनवरी की हड़ताल का समर्थन
प्रकाशनार्थ-
मोदी- योगी
सरकार की लोकविरोधी नीतियों के खिलाफ वामदलों का अभियान पहली जनवरी से
8 जनवरी को
होने वाली मजदूरों किसानों की हड़ताल का समर्थन करेंगे उत्तर प्रदेश के वामदल
लखनऊ- 31 दिसंबर 2019, वामपंथी दलों के केंद्रीय आह्वान पर उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने मोदी
सरकार की मजदूर, खेतिहर मजदूर, किसान, आमजन और नौजवान विरोधी आर्थिक नीतियों और विभाजनकारी सामाजिक- राजनैतिक नीतियों
के खिलाफ उत्तर प्रदेश में नए वर्ष के पहले दिन 1 जनवरी से 7 जनवरी 2020 के बीच प्रदेश
व्यापी अभियान संगठित करने और 8 जनवरी को प्रस्तावित आम हड़ताल को समर्थन देने का निर्णय
लिया है।
संयुक्त बयान में वामदलों ने कहाकि मोदी सरकार की मुट्ठी
भर कारपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने वाली नीतियो के कारण देश बरवादी के कगार पर आपहुंचा
है। बेरोजगारी 45 वर्षों के उच्चतम स्तर पर है जिससे नौजवान अभूतपूर्व संकट का सामना
कर रहे हैं। शैक्षिक बजट की कमी, शिक्षा के निजीकरण और व्यापारीकरण
तथा विद्यालयों को आरएसएस की प्रयोगशाला बना देने से छात्रों का दम घुट रहा है और वे
इसका प्रतिरोध कर रहे हैं। खोखली होचुकी स्वास्थ्य सेवाओं के कारण आम और गरीब लोग इलाज
के अभाव में मौत के शिकार होरहे हैं।
आर्थिक मंदी ने अर्थव्यवस्था की नींव खोखली कर दीं हैं।
औद्योगिक और क्रषी उत्पादन गिर कर न्यूनतम स्तर पर आगया है। उपभोक्ता की जेब खाली है
और बिक्री घटी है। आयात बड़ा है और निर्यात घटा है। इस कारण बेरोजगारी और बड़ रही है।
रुपये की कीमत घटती ही जारही है। खाली खजाने को रिजर्व बैंक से उधारी लेकर भरा जारहा
है। महंगाई चरम पर है। प्याज डेढ़ सौ रुपये किलो तक पहुँच गयी, पेट्रोल 80 और डीजल 70 को छूरहा है। रसोई गैस की कीमतें भी काफी ऊंची होगयीं
हैं। भ्रष्टाचार ने पूर्व के सारे रिकार्ड तोड़ दिये हैं।
खेती के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में किसानों को
मदद पहुँचाने के बजाय किसानों को कुछ खैरात देकर फुसलाया जाया जारहा है। इससे किसान
अभूतपूर्व संकट का शिकार हैं। खेतिहर मजदूर और भी अधिक बदहाल हैं। उद्योग और व्यापार
की कमर नोटबंदी और जीएसटी ने तोड़ रखी है और ग्रामीण जनों के सीजनल रोजगार के रास्ते
बन्द होचुके हैं।
वेश कीमती सरकारी क्षेत्र को बेचा जारहा है। रेल तक
प्रायवेट की जारही हैं। अंबानी, अदानी जैसे मुट्ठी भर लोगों को
मालामाल किया जारहा है। देश की पूंजी का बड़ा हिस्सा मुट्ठी भर पूँजीपतियों पर जाचुका
है और गरीब भयंकर गरीबी में नारकीय जीवन जी रहे हैं। जनता में भयंकर आक्रोश है। इससे
ध्यान बंटाने और लोगों को प्रताड़ित करने के उद्देश से तीन तलाक, कश्मीर, सीएए, एनपीआर और एनआरसी
जैसे लोकतन्त्र विरोधी कार्य निरंतर जारी हैं। संविधान को तहस नहस किया जारहा है। विरोध
करने पर लाठी, डंडे और गोलियां बरसाई जारही हैं। तमाम निर्दोषों
को संगीन धाराओं में जेल भेजा जारहा है।
केन्द्र की तबाहकारी नीतियों को यूपी सरकार और भी ताकत
से लागू कर रही है। कानून व्यवस्था तार- तार होचुकी है, महिलाओं, अल्पसंख्यकों, दलितों, युवाओं और छात्रों से दुश्मन जैसा वरताव किया जारहा है। भ्रष्टाचार चरम पर है और यूपी सरकार भय आतंक और तानाशाही
की पर्याय बन चुकी है। किसानों को गन्ने का बकाया नहीं मिल रहा, फसलों की उचित कीमत नहीं मिल रही है। मनरेगा की उपेक्षा और रोजगार योजनाओं
के अभाव में ग्रामीण मजदूर तवाह होरहे हैं। योगी सरकार दिखाबे के और बरगलाने वाले संकीर्ण
एजेंडों को चला रही है। असली मुद्दों से मुंह
चुरा रही है। लोग गुस्से में हैं और सड़कों पर उतर रहे हैं। उन्हें सरकारी मशीनरी के
बल पर रौंदा जारहा है। ठोक दो, मार दो,
बन्द कर दो, बदला लिया जायेगा, छोड़ा नहीं
जाएगा जैसे भयानक शब्द कोई और नहीं सूबे की सरकार का मुखिया बोल रहा है।
वामपंथी दल उत्तर प्रदेश में इन सवालों पर लगातार अपनी
पूरी ताकत से पुरजोर आवाज उठा रहे हैं। अब इन सभी सवालों पर 1 से 7 जनवरी के बीच गाँव, गली और नुक्कड़ तक अभियान चलाया जायेगा और देश के दस केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों
द्वारा आहूत्त और किसान- खेतिहर मजदूर संगठनों द्वारा समर्थित 8 जनवरी की हड़ताल को
समर्थन दिया जायेगा।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी-
( मार्क्सवादी ) के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव एवं भाकपा- माले- लिबरेशन के
राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव ने वामपंथी दलों की जिला कमेटियों का आह्वान किया है कि
वे 1 से 7 जनवरी के बीच सघन अभियान चलायें और 8 जनवरी की हड़ताल को पुरजोर समर्थन प्रदान
करें।
जारी द्वारा-
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा उत्तर प्रदेश
सोमवार, 30 दिसंबर 2019
at 6:14 pm | 0 comments |
UP- Left parties to stop atrocities on common masses
प्रकाशनार्थ-
उत्तर
प्रदेश में हिंसा और दमन को लेकर वामदलों ने
व्यापक
पैमाने पर ज्ञापन दिये
लखनऊ- 30 दिसंबर 2019, उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रायोजित हिंसा जिसमें अब तक 22 लोग मारे जाचुके
है, वाराणसी, लखनऊ तथा प्रदेश के अन्य भागों
में वामपंथी दलों, सिविल सोसायटी और आमजनता खास कर अल्पसंख्यकों
की गिरफ्तारी, कर्फ़्यूनुमा धारा 144 के साये में यूपी भर में
चल रहे दमन के राज के खिलाफ और सीएए एनपीआर और एनआरपी की वापसी की मांगों को लेकर भारतीय
कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी
), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- माले- लिबरेशन एवं अन्य
वामपंथी दलों द्वारा आज 30 दिसंबर 2019 को उत्तर प्रदेश भर में ब्लाक, तहसील और जिला स्तर पर ज्ञापन दिये गये। कई जगह संविधान की प्रस्तावना की
उद्देशिका का वाचन कर उसकी रक्षा का संकल्प लिया गया।
उत्तर प्रदेश के वामदलों के
इस आह्वान के समर्थन में दिल्ली में वामपंथी दलों ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया जिसे
वामदलों के शीर्ष नेताओं सहित तमाम प्रबुध्द लोगों ने संबोधित किया। कई अन्य राज्यों
में भी यूपी में सरकारी आतंक के खिलाफ वामदलों द्वारा इसी तरह के प्रतिरोध प्रदर्शन
किए गये। उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने उन सभी को इस एकजुटता प्रदर्शन के लिये धन्यवाद
दिया है।
यूपी में कर्फ़्यूनुमा 144 और
हिंसा के माहौल के चलते वामदलों ने केवल शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन देने की अपील की
थी, मगर यह कार्य बहुत ही व्यापक पैमाने पर हुआ। पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण, न केवल जिला मुख्यालयों अपितु ब्लाक और तहसील स्तरों पर भी ज्ञापन दिये गये।
कई जगहों पर अधिकारियों ने वामपंथी कार्यकर्ताओं को धमकियाँ दीं तो कई अन्य जगह अधिकारियों
ने काले क़ानूनों के पक्ष में तर्क देकर स्वामिभक्ति का परिचय दिया। पर वामदल इन धमकियों
से डरने वाले नहीं हैं।
स्थानीय अधिकारियों
के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति एवं राज्यपाल को दिये गये ज्ञापनों मांग की गयी है
कि विभाजनकारी, भय का पर्याय बने और और संविधान को तहस- नहस करने वाले नागरिकता संशोधन
कानून ( CAA ) को रद्द किया जाये। NPR
एवं NRC लागू करने की योजना निरस्त की जाये। CAA के पारित होने के बाद हुयी हिंसा की न्यायिक जांच कराई जाये। जांच में
पुलिस- प्रशासन की भूमिका भी शामिल की जाये। हानि की भरपाई के नाम पर की जारही
जबरिया और गैर कानूनी कार्यवाही को अविलंब रद्द किया जाये।
पुलिस प्रशासन द्वारा बदले
की भावना से की जारही गिरफ्तारियाँ बंद की जायें। छानबीन और पर्याप्त सबूत मिलने
के बाद ही गिरफ्तारी की जाये।
वाराणसी में 19 दिसंबर
2019 को राष्ट्रीय आह्वान के अंतर्गत शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे वामपंथी दलों और
सिविल सोसायटी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगाई गयी संगीन धाराओं को रद्द कर
उन्हें अविलंब बिना शर्त रिहा किया जाये।लखनऊ एवं प्रदेश के अन्य स्थानों पर
वामपंथी बुद्धिजीवियों, सिविल सोसायटी के लोगों और अन्य नागरिकों जिन्हें वैचारिक आधार पर
प्रताड़ना के उद्देश्य से गिरफ्तार किया गया है उन्हें बिना शर्त, तत्काल रिहा किया जाये। उन पर लगे मुकदमे वापस किए जायें। अन्य को फँसाने
की कारगुजारी रोकी जाये।
लोकतांत्रिक गतिविधियो को
कुचलने के उत्तर प्रदेश सरकार के कदमों पर रोक लगाई जाये। पुलिस कार्यवाही में
म्रतको के परिवारीजनों को मुआबजा दिया जाये, संपत्तियों के नुकसान की भरपाई की
जाये। गिरफ्तारियों के नाम पर लोगों के आवासों, दुकानों और
अन्य संपत्तियों की तोड़फोड़ बंद कराई जाये।
कर्नाटक में
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य कार्यालय में आगजनी की त्वरित जांच कराकर
दोषियों को गिरफ्तार किया जाये। मणिपुर में भाकपा के राज्य सचिव एल॰ सोतीन कुमार
की जमानत के बाद पुनः गिरफ्तारी निंदनीय है। उन्हें तत्काल रिहा किया जाये।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के
राज्य सचिव डा॰ गिरीश, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी) के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल
एवं भाकपा माले – लिबरेशन के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव ने उत्तर प्रदेश के सभी वामपंथी
कार्यकर्ताओं को इस दमघोंटू माहौल में अवाम की आवाज उठाने के लिये बधाई दी है। उन्होने
कहाकि आगामी दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जायेगा।
वामपंथी नेताओं ने सूबे में
धारा 144 हटाने की अपील की ताकि लोकतान्त्रिक आंदोलन को कुचलने के लिये उसका दुरुपयोग
न हो।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
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