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शनिवार, 22 मई 2010

बैंक कर्मचारियों का वेतन वार्ता हेतु नवॉं वेतन समझौता - दो लाख 60 हजार सेवारत व एक लाख सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन लाभ

तीस माह की लम्बी जद्दोजहद के बाद अन्ततोगत्वा ऑल इंडिया बैंक इम्पलाईज एसोसियेषन के नेतष्त्व में यूएफबीयू द्वारा 8 लाख बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों, जो कि 26 सरकारी बैंकों, 12 निजी बैंकों और 8 विदेषी बैंकों में काम करते हैं, के वेतन वष्द्धि हेतु द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर कर दिये गये जिससे 01।11.2007 से 17.50 प्रतिषत् की वेतन वृद्धि पिछली बकाया राषि के भुगतान सहित कर्मचारियो ंको मिलने का मार्ग प्रषस्त हो गया। इस समझौते से 3 लाख 50 हजार ऐसे कर्मचारी एवं अधिकारी जो वर्ष 1993 से 2010 के बीच सेवानिवृत्त हो चुके हैं और वर्ष 1993 में कतिपय यूनियन नेताओं के बहकावे में आकर पेंषन योजना का विकल्प नहीं दे पाये थे, भी 27.09.2009 से पेंषन प्राप्त कर सकेंगें । इस समझौते से बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों में अपार खुषी का वातावरण है तथा इससे कर्मचारियों की यूनियन और उसके नेतृत्व में आस्था सुदृढ़ हुई है। इस समझौते की मुख्य बातें निम्न प्रकार हैंः-01. सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों को हमेेषा से मिलने वाली पेंषन सुविधा को बन्द करने के बावजूद, बैंक प्रबन्धन एवं सरकार के गठजोड़ की तमाम नापाक साजिषों को विफल करते हुये यूनियन सभी कर्मचारियों के लिये पेंषन सुविधा जो कि एक आवष्यक सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बहाल कराने में सफल रही है । 02. पेंषन के समझौते से न केवल वर्तमान में कार्यरत् दो लाख 60 हजार कर्मचारी/अधिकारी सेवानिवृत्ति के बाद पेंषन प्राप्त कर सकेंगें बल्कि पिछले 15 वर्षों में सेवानिवृत्त हो चुके एक लाख से अधिक कर्मचारी एवं उनकी मत्यु की दषा में उनके परिजन पेंषन का लाभ उठा सकेंगें।03. यूनियन ने लिपिक वर्ग जिसके लिये भर्ती की न्यूनतम योग्यता प्रथम श्रेणी में हाई स्कूल है, की भर्ती के समय न्यूनतम वेतन एवं परिलब्धियॉं लगभग 12000/- कराने में सफलता प्राप्त की है ताकि करोड़ो षिक्षित बेरोजगार ईमानदारी से जीवन यापन कर सकें।04. सरकार एवं बैंकर्स के तमाम प्रयासों के बावजूद एआईबीईए के वर्ष 1964 के निर्णय कि हम अपने वेतन का फैसला स्वयं बैंक प्रबन्धन के साथ वार्ता से करेंगें, को एक बार फिर नवीं बार लागू करने में यूनियनें सफल रही हैं। सरकारी कर्मचारियों की तरह बैंक कर्मचारियों का फैसला तीसरे पक्ष के निर्णय पर निर्भर नहीं है। यही कारण है कि छठें वेतन आयोग की घोर कर्मचारी विरोधी सिफारिषें यथा - वर्ग चार के 18 लाख पदों को समाप्त कर देना, ठेके पर काम कराना आदि को बैंक यूनियनों द्वारा मजबूती के साथ नकार दिया गया है। 05. बैंक कर्मचारी अपनी मेहनत से जो लाभ कमाता है, बैंक उसी में से बैंक कर्मचारियों को वेतन एवं सुविधायें देते हैं, सरकारी कर्मचारियो ंकी भॉंति बैंक कर्मचारियों के वेतन की पूर्ति आम जनता पर टैक्स लगाकर नहीं की जाती। अतः वेतन वष्द्धि जो न्यायोचित हो और बैंकों की आर्थिक स्थिति के परिपेक्ष्य में तर्कसंगत हो, पर ही यूनियनें समझौता करती है। 06. बैंक प्रबन्धन एवं सरकार गम्भीर बेरोजगारी के बावजूद ठेके पर काम कराने को बढ़ावा दे रही है। यूनियनों ने इस समझौते में किसी भी प्रकार के काम को ठेके पर देने की अतिरिक्त अनुमति नहीं दी है। 07. बैंक यूनियन की एकता को छिन्न-भिन्न करने एवं सदस्यों का नेतृत्व में विष्वास कमजोर करने के लिये तमाम तरह की अफवाहें पिछले 30 माह से जारी रहीं और पिछले तीन दिनों में ऐसे तत्व यूनियन को बदनाम करने के लिये दिन-रात सक्रिय रहे। संतोष का विषय है कि बैंक कर्मचारियों ने ऐसे तत्वों को पूरी तरह तिरस्कृत कर दिया। 08. सरकार की देष विरोधी एवं जन-विरोधी आर्थिक नीतियों का विरोध करने के लिये गठित यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस को छिन्न-भिन्न करने के लिये तमाम प्रयास किये गये। यह गर्व का विषय है कि इन सभी साजिषों को विफल करते हुये शत्-प्रतिषत् बैंक कर्मचारियांे का प्रतिनिधित्व करने वाली 9 यूनियनों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किये। 09. सरकार द्वारा 35 लाख सरकारी कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग की सिफारिषों के अनुरूप दी गयी वेतन वृद्धि पर 12 हजार 5 सौ करोड़ रूपया खर्च किया गया जबकि 8 लाख बैंक कर्मचारियों की वेतन वृद्धि पर समझौते के अंतर्गत 5200 करोड़ रूपया प्रतिवर्ष अतिरिक्त व्यय किया जा रहा है । इसके अलावा पेंषन का विकल्प देने पर जहॉं कर्मचारी 2800 करोड़ रूपये का अंषदान देंगें वहीं प्रबन्घन 6300 करोड़ रूपया खर्च करेंगें। 30 माह के बकाया भुगतान पर बैंकों को 13000 करोड़ रूपया और पेंषन विकल्प सहित कुल 19300 करोड़ रूपया खर्च करना पड़ेगा। कहा जाता है कि सरकारी कर्मचारियों का वेतन 60 प्रतिषत् से 90 प्रतिषत् बढा दिया गया है जो सिवाय गुमराह करने के कुछ नहीं है। यही कारण है किमध्यम एवं निम्न श्रेणी के कर्मचारी अपने को ठगा महसूस करते हुये लगातार आन्दोलनरत् हैं।हम इस अवसर पर जहॉं प्रदेष के बैंक कर्मचारियों को उनकी एकजुटता संघर्षषीलता एवं सफल हड़तालों के बाद मिली इस सफलता के लिये बधाई देते हैं वहीं बैंक कर्मचारियों की जायज मॉंगों का समर्थन करने के लिये सभी ट्रेड यूनियनों एवं प्रेस मीडिया का धन्यवाद करते हैं। हम इस अवसर पर इस बात का पुनः संकल्प लेते हैं कि सरकार द्वारा सरकारी बैंको ंको बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को बेचने के उद्देष्य से इनके निजीकरण की जो साजिष की जा रही है, उनका मजबूती के साथ विरोध किया जायेगा। यह समझौता 31 अक्टूबर, 2012 तक के लिये लागू है, उसके बाद फिर जहॉं हम अपनी वेतन वृद्धि की मॉंग के लिये संघर्ष करेगें वहीं देष की आम जनता विषेषकर बैंक ग्राहकों के हितों की रक्षा करने के लिये सरकार से टकराने में किसी प्रकार की हिचकिचाहट न रखते हुये यूनियन को आगे बढ़ायेगें ।
- एन.के.बंसल

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