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शुक्रवार, 19 जून 2015

उत्तर प्रदेश में बिजली के दामों में वृध्दि का भाकपा ने किया विरोध. वापसी की मांग की.

लखनऊ-१९ जून २०१५. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत् नियामक आयोग द्वारा प्रदेश में एक साथ विद्युत् मूल्यों में की १७ प्रतिशत बढ़ोत्तरी की कड़े शब्दों में आलोचना की है. भाकपा ने राज्य सरकार से बढ़ी कीमतों को तत्काल वापस लेने की मांग की है. यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा.गिरीश ने कहा कि राज्य में बिजली की दरें पहले से ही कई राज्यों से अधिक हैं, अब उपभोक्ताओं पर एक साथ १७ प्रतिशत बिजली कीमतों की वृध्दि थोप दी गयी है. यह कैसी बिडंबना है कि जो सरकार जनता को उसकी जरूरत के लायक बिजली नहीं दे पारही, वह लगातार उसकी कीमतों में इजाफा करती जारही है. निजी उत्पादकों से महंगी बिजली खरीदने, विद्युत् विभाग में व्याप्त भारी भ्रष्टाचार और यहाँ तक कि लाइन हानियों का भार भी आम उपभोक्ता पर लादा जारहा है. डा.गिरीश ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा चलायी जारही नीतियों के परिणामस्वरूप जनता पहले से ही महंगाई के बोझ तले दबी हुयी है. केन्द्र द्वारा पेट्रोलियम पदार्थों की ऊँची कीमतें बसूलने के अलाबा कई कदम उठाये गये हैं जिनसे महंगाई ने छलांग लगाई है. इसके अतिरिक्त प्रदेश सरकार अपने नागरिकों से पेट्रोलियम पदार्थों पर पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक वेट बसूल कर रही है, यहाँ अधिक वाहन कर बसूला जारहा है और वाहन कर बसूलने के बाद ऊपर से वाहनों पर टोल टेक्स भी बसूला जारहा है. जनता की लुटाई में केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच होड़ मची है. महंगाई से जनता की कमर टूटी जारही है. बिजली की कीमतों में ताजा बढोत्तरी ने जनता की तबाही का रास्ता खोल दिया है. भाकपा इस पर कड़ा विरोध प्रकट करती है और राज्य सरकार से मांग करती है कि वह इस बढोत्तरी को तत्काल रद्द करे. भाकपा इस मुद्दे पर जनता के साथ है और सरकार ने इस वृध्दि को रद्द नहीं किया तो वह सडकों पर उतरने को बाध्य होगी. भाकपा ने अपनी जिला इकाइयों से भी अनुरोध किया है कि यदि बिजली कीमतों में हुयी वृध्दि को २४ घंटों के भीतर वापस नहीं लिया जाता तो वह जनता के हित में और जनता को साथ लेकर जनवादी तरीकों से विरोध प्रदर्शन करें. डा. गिरीश

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