भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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मंगलवार, 6 अक्तूबर 2020

भाकपा एवं माकपा के शीर्ष नेता हाथरस पहुंचे : बिटिया के परिवार से मिल कर दुख जताया और ढाढ़स बंधाया


हाथरस/ लखनऊ - 6 अक्तूबर 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड डी॰ राजा, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी ) के महासचिव का॰ सीताराम येचुरी, भाकपा की सचिव एवं एटक की महासचिव का॰ अमरजीत कौर, माकपा की पॉलिट ब्यूरो सदस्य बृंदा करात, भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश, माकपा के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव आज सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ हाथरस की बिटिया के गांव बूलगड़ी पहुंचे और पीड़ित परिवार की पीढ़ा साझा की और उनको ढाढ़स बँधाया।

परिवार ने वामपंथी नेताओं को पीड़िता की हत्या, हालात और बदसलूकी के बारे में विस्तार से बताया। परिवार अब भी अपने को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है और खुल कर बात करने से डर रहा है। वह न्याय की गुहार लगा रहा है और इसके लिये वह न्यायिक जांच चाहता है। उसकी पीड़ा यह भी है कि माननीय उच्च न्यायालय ने उन्हे 12 अक्तूबर को उपस्थित होने का नोटिस भेजा है और शोक के इन हालातों में उन्हें यह भी पीड़ादायक लग रहा है।

दोनों दलों के शीर्ष नेत्रत्व ने परिवार की पीड़ा को साझा किया और भरोसा दिलाया कि वे उनको न्याय दिलाने को हर स्तर पर सहयोग करेंगे। उपस्थित मीडिया से उन्होने कहा कि यूपी में जिस तरह महिलाओं, बेटियों दलितों और कमजोरों पर जुल्म हो रहे हैं उससे किसी भी इंसान की रूह कांप जाती है। उन्होने सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग की। उन्होने कहा कि बलरामपुर में बलात्कारियों पर एनएसए लगाया गया है क्योंकि वे मुस्लिम हैं। हमें इस पर कोई आपत्ति नहीं, पर यह आश्चर्यजनक है कि देश और दुनियाँ को जिस हादसे ने स्तब्ध कर दिया है, उसके आरोपियों पर एनएसए लगाना तो दूर भाजपा के सांसद और विधायक उन्हें जेल तक में वीआईपी सुविधाएं दिलवा रहे हैं। ऐसी सरकार से न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

एक सवाल के जबाव में वाम नेताओं ने कहा कि दंगाइयों की सरकार मुख्य समस्या से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है और विपक्ष पर दंगा भड़काने का आरोप लगा रही है। इस पर कौन विश्वास करेगा? सच तो यह है कि सरकार संरक्षित आरोपियों के समर्थक प्रतिदिन यहाँ आने वालों पर पथराव कर रहे हैं और उपद्रव करने की हर कोशिश कर रहे हैं। वे यह भी भूल गये हैं कि बाहर से आने वाले लोगों के साथ शालीनता से व्यवहार करना चाहिये, जैसा कि भारत की संस्क्रति कहती है।

वाम नेताओं ने एक स्वर से योगी सरकार को महिलाओं और बालिकाओं के साथ हो रही दरिंदगी को रोकने में असफल बताया और मुख्यमंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग की।

भाकपा नेता डा॰ गिरीश ने जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार से मांग की कि यदि परिवार के लोग उच्च न्यायालय जाने का निर्णय लेते हैं तो उनकी सुरक्षा और लाने ले जाने की ज़िम्मेदारी सरकार और प्रशासन ले। उन्होने कहा कि पीड़ित को न्याय दिलाने की आवाज उठाना हमारा फर्ज है तथा हम आम लोगों से भाई चारा बनाये रखने की भी अपील कराते हैं।

वामदलों के नेताओं के साथ दर्जनों वाहनों के काफिले में सैकड़ों अनुशासित कार्यकर्ता भी मौजूद थे। परन्तु न तो नेताओं की जिंदाबाद का नारा लगा न ही किसी की मुर्दाबाद। कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे यहां संवेदनाएं व्यक्त करने आए हैं न कि राजनीति करने। वैसे ये कार्यकर्ता किसी भी चुनौती  का सामना करने को मुस्तैद थे। मौके पर मौजूद लोग उनकी शालीनता और अनुशासन की प्रशंसा कर रहे थे और स्थानीय प्रशासन भी तनावमुक्त महसूस कर रहा था।

प्रतिनिधि मण्डल में आदिकेशन एडवोकेट, गफ्फार अब्बास, सुहेव शेरवानी सभी भाकपा, ब्रजलाल भारती, भारत सिंह एवं इदरीश सभी माकपा आदि भी शामिल थे। शेष सैकड़ों कार्यकर्ता बैरीकेडिंग के बाहर लाल झंडे लिये खड़े थे।

डा॰ गिरीश

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शनिवार, 3 अक्तूबर 2020

Left Parties Rejected CBI inquiry in Hathras case


 

उत्तर प्रदेश के वामदलों ने सीबीआई जांच की सिफ़ारिश को नकारा

 

लखनऊ- 3 अक्तूबर- उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने योगी सरकार द्वारा हाथरस प्रकरण की जांच के लिये सीबीआई जांच की सिफ़ारिश को पीड़ित परिवार को न्याय से वंचित करने और जांच को विलंबित करने की साजिश बताया है। यह पीड़ित परिवार द्वारा बार बार न्यायिक जांच की गुहार और उच्च न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर जांच कराने की कार्यवाही के विपरीत है। यह आरोपियों के पक्ष में खड़े लोगों और भाजपा की कपटपूर्ण चाल का परिणाम है।

वामपंथी दलों ने कहा कि तोते (सीबीआई) की कारगुजारी अभी हाल में सारा संसार बाबरी मस्जिद दहन केस में देख चुका है। विध्वंसक बार बार दुहराते रहे कि उन्होने ढांचा तोड़ा है और सीबीआई ने उनके बेदाग छूटने की व्यवस्था कर दी। इस जांच पर भला कौन विश्वास कर सकता है।

वामदलों ने कहा कि घटना के दिन 14 सितंबर से लेकर आज तक प्रदेश सरकार और प्रशासन पीड़ित परिवार का जघन्य उत्पीड़न करता रहा है और अब उनके ऊपर सीबीआई जांच थोप कर उत्पीड़न को जारी रखने और न्याय से वंचित करने का षडयंत्र है। रात के साढ़े नौ बजे एसआईटी टीम को पीढ़ितों के घर भेज देना भी उत्पीड़नात्मक कार्यवाही है। राज्य सरकार को इससे बाज आना चाहिये।

वामदलों ने कहा कि जिलाधिकारी हाथरस और लीपापोती करने वाले अन्य अधिकारियों के यथावत पदों पर बने रहते कोई निष्पक्ष जांच संभाव नहीं। उन सभी को माकूल सजा दी जानी चाहिये।

वामदलों के नेताओं माकपा राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश, भाकपा- माले के सचिव सुधाकर यादव एवं फारबर्ड के संयोजक अभिनव सिंह कुशवाहा ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा और हाथरस की बेटी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव,

भाकपा- उत्तर प्रदेश   

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शुक्रवार, 2 अक्तूबर 2020

हाथरस प्रकरण-


 

बिटियाओं के साथ दरिंदगी और दमनकारी जंगलराज के खिलाफ-

 

मुख्यमंत्री के त्यागपत्र और बहू बेटियों की पूर्ण सुरक्षा के लिये-

 

वामपंथी दलों ने समूचे उत्तर प्रदेश में गांधी प्रतिमाओं पर किये आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन

 

लखनऊ- 2 अक्तूबर 2020, हाथरस की बेटी से दरिंदगी, आधी रात को जबरिया किये गये अंतिम संस्कार, बलरामपुर, भदोही, बुलंदशहर, बागपत, फ़तेहपुर में बेटियों के साथ हाल में हुयी दरिंदगी और हर जगह पुलिस प्रशासन का शर्मनाक आचरण, दलितों महिलाओं और किसानों पर अत्याचार, नफरत की राजनीति, मीडिया और राजनेताओं पर पुलिस- प्रशासन के क्रूर हमलों के खिलाफ आज वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं ने लगभग हर जिले में गांधी प्रतिमाओं पर धरने प्रदर्शन किये तथा मौन अनशन किये। वामपंथी दलों ने मुख्यमंत्री के त्यागपत्र और हाथरस के डीएम और एसपी पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की।

कोरोना काल में हुयी वामपंथ की अनेक कार्यवाहियों में आज की कार्यवाही अभूतपूर्व थी। इतना ही नहीं लगातार कई दिनों से वामपंथी दल और उनके सहयोगी जन संगठन उत्तर प्रदेश में इन वारदातों पर उद्वेलित हैं और लगातार सड़कों पर उतर कर आंदोलित हैं। भले ही मीडिया की उपेक्षा का वे सामना कर रहे हैं।

आज यद्यपि सभी जिलों के वामपंथी पार्टियों एवं जनसंगठनों के कार्यकर्ताओं ने दमखम दिखाया लेकिन हाथरस में कर्फ़्यू जैसी पाबंदियों को भेद कर भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश एवं अन्य कार्यकर्ताओं ने गांधी प्रतिमा पर पहुँच कर धरना दिया। लखनऊ में अलग अलग स्थानों से गांधी प्रतिमा पर धरना दे रहे वामपंथी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया जिनमें माकपा राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, मुकुट सिंह मधु गर्ग एवं माले के लीडर रमेश सेंगर सहित अनेक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें देर शाम रिहा किया गया। भाकपा कार्यकर्ताओं को भी जाने से रोक दिया गया।

कानपुर शहर, उरई, गाजीपुर, सुल्तानपुर, गोरखपुर, सोनभद्र, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, नोइडा, मुरादाबाद, चित्रकूट, बांदा, झांसी, बाराबंकी, गोंडा, कानपुर देहात, बुलंदशहर, कासगंज, लालगंज(आजमगढ़), भदोही, जौनपुर, फैजाबाद, कुशीनगर, शामली, फ़तेहपुर, लखीमपुर खीरी, बदायूं, मैनपुरी, मेरठ, आदि जिलों की सूचना बयान जारी होने तक लिखित रूप में प्राप्त हुयी है।

भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि हाथरस में प्रशासनिक, पुलिस, भाजपा और जातीय संगठनों का आतंक बना हुआ है। आंदोलन करने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं पर पुलिस संरक्षण में संगठित गुंडे पत्थर वरसा रहे हैं, नामी गिरामी टीवी चेनलों के एंकर्स और कैमरामैन आदि को न केवल बिटिया के घर जाने से रोका जा रहा है अपितु महिला पत्रकारों से अशोभनीय व्यवहार किया गया है। बिटिया के परिवार को बंधक बना लिया गया है और उसे प्रताड़ित किया जा रहा है। दुख दर्द बांटने आने वाले राजनेताओं को न केवल रोका जा रहा है बल्कि उनसे मारपीट तक की जा रही है। यह सब राज्य सरकार के दूषित आदेशों के तहत किया जा रहा है। वामपंथी दल इसकी कड़े शब्दों में निन्दा कराते हैं।

वामदलों ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस्तीफे और बहू बेटियों की सुरक्षा की गारंटी तक संघर्ष जारी रहेगा।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश  

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गुरुवार, 1 अक्तूबर 2020

यूपी में जंगलराज

 

 

उत्तर प्रदेश बना बलात्कार प्रदेश- बेटियों की सुरक्षा के लिये चिन्तित माँ- बाप

 

हाथरस के बाद अब बलरामपुर सहित कई जगह हुयी दरिंदगी की वारदातें

 

हाथरस की सीमाएं सील, राजनेताओं को घुसने से रोका: लोकतन्त्र तार तार

 

वामदलों ने पुनः मांग की- इस्तीफा दें योगी  आदित्यनाथ

 

कल गांधी प्रतिमाओं पर आक्रोश जतायेंगे वामपंथी दल

 

लखनऊ- 1 अक्तूबर 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने अपने प्रेस बयान में कहा है कि बालिकाओं और महिलाओं से दरिंदगी और उनकी जघन्य हत्याओं को रोक पाने में पूरी तरह विफल योगी सरकार दरिंदगी के खिलाफ उठ रही हर आवाज को कुचलने पर उतर आयी है।

हाथरस में धारा 144 लागू कर दी गयी है, 4 से अधिक लोगों को पुलिस इकट्ठा नहीं होने दे रही है, जनपद की सीमायें सील कर दी गईं हैं, हर राजनेतिक व्यक्ति को जनपद में प्रवेश करने से बलपूर्वक रोका जा रहा है, पीड़िता के गाँव को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और पीड़िता के परिवार के प्रति संवेदनायें व्यक्त करने जाने वालों को बलपूर्वक खदेड़ा जा रहा है। विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा रहा है और सैकड़ों के खिलाफ मुकदमे लिखे जा रहे हैं। बलात्कारों पर खुल कर राजनीति करने वाली राज्य सरकार अब विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है। वह पूरी तरह लोकतन्त्र को कुचलने पर आमादा है।

हाथरस की बेटी की चिता की आग अभी ठंडी नहीं हुयी थी कि जनपद बलरामपुर में हाथरस से भी भयानक वारदात हुयी है। जनपद के थाना गैसड़ी के ग्राम मझौली की दलित छात्रा का स्कूल से लौटते समय अपहरण कर लिया, उसके साथ गैंगरेप किया गया, उसके दोनों पैर तोड़ दिये गये, कमर तोड़ दी गयी, इससे पहले मुंह बंद करने के लिये घातक इंजेक्शन ठूंस दिया। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत होगयी।

इसके अलावा शाहजहांपुर, बुलंदशहर, आजमगढ़ में भी इसी तरह की जघन्य घटनायें सामने आयी हैं। यूपी में प्रति दिन इसी तरह की लगभग दर्जन भर वारदातें घट रही हैं। हर बेटी के माता पिता अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिये चिन्तित हैं। अन्याय के लिये उठ रही हर आवाज को योगी सरकार पुलिस- प्रशासन के बल पर कुचल रही है।

भाकपा का आरोप है कि यूपी में महिलाओं, दलितों, अल्पसंख्यकों, किसानो और मजदूरों का अलग अलग तरीकों से उत्पीड़न किया जा रहा है। नित रोज उठ रहे मुद्दों को उठाने वाले विपक्ष एवं वामपंथी कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। यह सब उस सरकार को बचाने के लिये किया जा रहा है जो प्रशासन पर से नियंत्रण खो बैठी है, बेटियों और आम आदमी की रक्षा करने में असमर्थ है और नैतिक रूप से पराजित हो चुकी है।

भाकपा वामपंथ की इस मांग को पुनः दोहराती है कि शासन का नैतिक अधिकार खो चुके मुख्यमंत्री को पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं और उन्हें पद से त्यागपत्र  दे देना चाहिए।

बेटियों को न्याय दिलाने, हर तरह का उत्पीड़न रोके जाने, नफरत की राजनीति और लोकतन्त्र की हत्या से बाज आने आदि सवालों पर उत्तर प्रदेश में वामपंथी दल कल गांधी जयंती पर गांधीजी की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण करने के बाद विरोध प्रदर्शन करेंगे।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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मंगलवार, 29 सितंबर 2020

 


 

हाथरस की पीड़िता की मौत पर भाकपा गहरा दुख जताया

 

मुख्यमंत्री से महिलाओं की रक्षा न कर पाने की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुये त्यागपत्र की मांग की

 

लखनऊ- 29 सितंबर 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने हाथरस की पीड़िता की आज दिल्ली में हुयी मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। भाकपा ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में प्रदेश सरकार और हाथरस पुलिस प्रशासन की इस जघन्य वारदात के प्रति उदासीनता की निंदनीय करतूत ने समाज को हिला कर रख दिया है। सामाजिक और राजनीतिक संगठन निरंतर आवाज उठाते रहे मगर सिस्टम अपने ही ढर्रे पर रेंगता रहा।

यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा ने कहा कि भले ही अन्य घटनायें हाथरस की तरह देश और समाज की नजरों में न आ पायें पर उत्तर प्रदेश में यह हर रोज हो रहा है। कोविड काल में ही बलात्कार और हत्या की हुयी वारदातों को ही संकलित कर दिया जाये तो एक पुस्तक का रूप ले लेगी। हमेशा की तरह इस बार भी प्रदेश सरकार के मुखिया ने नैतिक ज़िम्मेदारी लेने के बजाय दुख प्रकट कर दिया। नियमानुसार धनराशि दिला कर कर्तव्य की इतिश्री कर दी।

भाकपा मांग करती है कि अवलाओं की रक्षा कर पाने में असमर्थ मुख्यमंत्री को त्यागपत्र दे देना चाहिये। हाथरस प्रकरण में हीला- हवाली के लिए प्रशासन में ज़िम्मेदारी तय होनी चाहिये और देश और समाज को आश्वस्त करना चाहिये। फास्ट ट्रेक कोर्ट गठित कर दिया गया है। सिस्टम की ओर से पैरवी में कोई चूक न हो इस बात की गारंटी की जानी चाहिये।

भाकपा मांग करती है कि नियमों से ऊपर उठ कर पीड़िता के परिवार को अतिरिक्त राशि प्रदान की जानी चाहिए। भाकपा और उसके सहयोगी संगठन उत्तर प्रदेश में महिलाओं की रक्षा के सवाल पर मुस्तैदी से आवाज उठाते रहे हैं और उठाते रहेंगे।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

 

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सोमवार, 28 सितंबर 2020

CPI Today


 

भाकपा ने आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी एवं लोकतान्त्रिक आंदोलनों को कुचलने की निन्दा की

 

लखनऊ- 28 सितंबर 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने राज्य सरकार पर तीखे आरोप लगाये कि वह महामारी का लाभ उठा कर जनवादी आंदोलनों को कुचल रही है, जबकि भाजपा और और संघ परिवार सहित तमाम संगठनों को हर तरह की गतिविधियों की छूट दी हुयी है। भाकपा ने इन कार्यवाहियों की कड़े शब्दों में निन्दा की।

आज ही सरकार ने विपक्षी ताकतों के तमाम कार्यक्रमों मे बाधा उत्पन्न की। निजीकरण के विरोध में मशाल जुलूस निकाल रहे बिजली कर्मचारी संघ एवं अन्य सभी संगठनों के नेताओं को अभी शाम गिरफ्तार कर लिया। बहराइच में आज शहीद भगत सिंह के जन्म दिवस पर रोजगार मार्च निकाल रहे भाकपा, नौजवान सभा एवं स्टूडेंट्स फेडरेशन के कार्यकर्ताओं को बलपूर्वक रोका गया जबकि कई दिनों पहले कार्यक्रम की अनुमति के लिये आवेदन कर दिया गया था। गत दिनों मऊ में क्रषि बिल की प्रतियाँ जला रहे भाकपा जिला सचिव और किसान सभा के नेताओं को संगीन दफाओं में बन्द कर दिया। 25 सितंबर को क्रषि बिल के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले वामदलों, भाकपा एवं अन्य दलों के प्रतिरोध प्रदर्शनो को ना केवल रोका गया अपितु मुकदमे तक दर्ज किये गये। आज भी प्रदेश भर में विपक्षी दलों और कर्मचारी नेताओं की जगह जगह गिरफ्तारियाँ की गईं।

भाकपा ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार और केन्द्र सरकार की जन विरोधी नीतियों और दमनकारी कारगुजारियों से जनता त्राहि त्राहि कर उठी है। राजनीतिक दल और विभिन्न वर्गीय संगठन जनता का साथ दे रहे हैं और सड़क पर उतर रहे हैं। योगी सरकार पुलिस के बल पर इन आंदोलनों को कुचलने पर आमादा है। वे ये भी भूल गये हैं कि वे उसी लोकतान्त्रिक व्यवस्था के तहत सत्ता में आये हैं जिसको कि वे कुचलने का कुचक्र रच रहे हैं। ये लोकतन्त्र और लोकतान्त्रिक संस्थाओं की हत्या का प्रयास है जिसमें उन्हें मुंह की खानी पड़ेगी। न तो आंदोलनकारी पीछे हटेंगे न लोकतन्त्र को वे समाप्त कर पाएंगे।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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शुक्रवार, 25 सितंबर 2020

किसान विरोधी कानून पर हस्ताक्षर न करें राष्ट्रपति : वाम दल

 

किसानों के सफल प्रतिरोध के लिये वाम दलों ने उन्हें बधाई दी

 

विपक्ष पर किसानों को भड़काने का आरोप लगा कर किसानों का अपमान कर रहे हैं प्रधानमंत्री

 

लखनऊ- 25 सितंबर 2020, उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने कहा कि किसान विरोधी क़ानूनों के खिलाफ किसान संगठनों का संयुक्त प्रतिरोध आज उत्तर प्रदेश में व्यापक पैमाने पर संपन्न हुआ। किसानो और उनके समर्थक दलों और  संगठनों ने प्रदेश में बड़े पैमाने पर धरने दिये, प्रदर्शन किये, रास्ते जाम किये और सरकार के पुतले फूंके। अनेक जगह किसानों के समर्थन में बाजार भी बन्द हुये।

उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने इस अभूतपूर्व कार्यवाही के लिए उत्तर प्रदेश और देश के किसानों, मजदूरों, युवाओं एवं छात्रों को बधाई दी है। वामपंथी पार्टियों, उनके सहयोगी मजदूर, छात्र और नौजवान संगठनों ने भी इस कार्यवाही में बड़े पैमाने पर भाग लिया और सरकार को उसके कुक्रत्यों पर आईना दिखाया।

वामपंथी दलों का आरोप है कि किसान विरोधी इन काले क़ानूनों का हमला देश के 90 प्रतिशत किसान झेल नहीं पायेंगे। अपनी उपजों की कीमतों के लिए वे कारपोरेट घरानों के सामने घुटने टेकने और अंततः अपनी ज़मीनों को कार्पोरेट्स के आगे सरेंडर करने को मजबूर होंगे। ये विशाल किसान समुदाय को मजदूर बनाने की साजिश है। ये मंडी समितियों की खरबों रुपये की संपत्ति को कार्पोरेट्स के क्रषि माल्स के लिये सौंपने की तैयारी है। यह कथित राष्ट्रवादियों का विश्व व्यापार संगठन और बहुराष्ट्रीय निगमों के सामने शर्मनाक सरेंडर है।

वामपंथी दलों ने कहा कि प्रधानमंत्री विपक्षी दलों पर किसानों को भड़काने का आरोप लगा कर किसानों का अपमान कर रहे हैं। सरकार की नीतियों से खोखले बनने से क्षुब्ध किसान जब प्रतिरोध कर रहे हैं तो पीएम उनकी बुद्धिमत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। यह आपत्तिजनक भी है और निंदनीय भी। वामपंथी दलों ने किसान कार्यवाहियों को पुलिस बलों के बल पर बाधित करने का आरोप भी लगाया। उन्होने देश में कई जगह किसानों पर संघियों के संगठित गिरोहों के हमलों की भी निन्दा की।

वामपंथी दलों ने देश के राष्ट्रपति से मांग की कि वे किसान हित में काले क़ानूनों पर हस्ताक्षर न करें। अन्यथा यह प्रतिरोध शायद ही थमेगा।

उपर्युक्त बयान भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- माले के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव, फारबर्ड ब्लाक के राज्य संयोजक अभिनव कुशवाहा एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने जारी किया है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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बुधवार, 23 सितंबर 2020

ट्रेड यूनियनों का संयुक्त प्रदर्शन

 

पूंजीपतियों की धनलिप्सा की पूर्ति के लिये मजदूरों और किसानों को तवाह कर रही है भाजपा सरकार

 

भाकपा ने मजदूर संगठनों के संयुक्त प्रतिरोध प्रदर्शन के लिये उन्हें बधाई दी

लखनऊ- 23 सितंबर 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने कल संसद में पारित मजदूर विरोधी काले कानून, निजीकरण, बेरोजगारी और श्रमिकों के ऊपर केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे तीखे हमलों के के विरूध्द संयुक्त ट्रेड यूनियनों के प्रतिरोध कार्यक्रम की सफलता पर उन्हें बधाई दी।

यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा ने कहा कि जैसे जैसे मजदूरों- किसानों युवाओं के साथ सरकार की धोखाधड़ी (चीटिंग) बढ़ती जा रही है उनका प्रतिरोध भी तेज होता जा रहा है। आज के प्रतिरोध कार्यक्रमों के आयोजनों में कई जगह सरकारी बाधाओं के बावजूद श्रमिकों ने जोरदार प्रदर्शन किये। अनेक जगहों पर उन्हें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं का सक्रिय समर्थन हासिल हुआ।

भाकपा ने कहा कि गत सप्ताहों के घटनाक्रमों साबित कर दिया है कि सरकार पूरी तरह बड़े पूँजीपतियों और कार्पोरेट्स के साथ खड़ी है। उनकी धन लिप्सा को पूरी करने को किसान- कामगारों को तवाह करने वाले कानून बनाती जा रही है। उत्तर प्रदेश की एक कथित दलित पार्टी का सरकार के इन क्रत्यों में सरकार के साथ खड़ा होना आश्चर्यजंक ही नहीं मजदूर विरोधी क्रत्य है जिसके लिए मेहनतकश उसे माफ नहीं करेंगे।

भाकपा ने टीवी चेनलों पर आरोप लगाया कि मजदूरों किसानों और नौजवानों पर जब अभूतपूर्व हमले होरहे हैं नामी- गिरामी टीवी चेनल देश का ध्यान भटकाने को बालीवुड और ड्रग्स आदि पर समय खराब कर रहे हैं। वे मजदूरों किसानों और युवाओं के सवालों को पूरी तरह नकार रहे हैं। समाज को इस पर बहस चलानी चाहिये। बालीवुड के गरिमामय लोगों को भी सरकार और मीडिया के इस खेल के खिलाफ सामने आना चाहिये।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा , उत्तर प्रदेश

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मंगलवार, 22 सितंबर 2020

उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों का आह्वान-

 

 

भारतीय संसद को विनष्ट करने के प्रयास के विरूध्द मजबूती से प्रतिरोध दर्ज कराओ!

क्रषि क़ानूनों के खिलाफ किसान संगठनों के 25 सितंबर के प्रतिरोध को संपूर्ण समर्थन प्रदान करो!!

 

लखनऊ- 22 सितंबर 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी, भाकपा, माले- लिबरेशन एवं आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक के राज्य नेत्रत्व की एक आन लाइन बैठक आज संपन्न हुयी।

बैठक में विचार विमर्श के उपरान्त पारित प्रस्ताव में कहा गया कि भाजपा सरकार द्वारा क़ानूनों को रौंद कर देश की खेती को गिरवी रखने के लिये सभी संसदीय प्रक्रियाओं और कायदे क़ानूनों को हवा में उड़ाने की कारगुजारियों की वामपंथी दल कड़े शब्दों में निन्दा करते हैं। संसदीय लोकतन्त्र के इस विनष्टीकरण से फासीवाद के पूर्वाभास का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

राज्य सभा में मत विभाजन और मतदान की मांग करने वाले विपक्ष के सांसदों को निलंबित कर यदि भाजपा सोचती है कि वह विपक्ष का मुंह बंद कर देगी, तो वह दिन में सपने देख रही है। देश की जनता ने अनेक संघर्षों से लोकतन्त्र को परवान चढ़ाया है और वे भाजपा की इस शातिराना कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगी। वामपंथी पार्टियां भी भारतीय संसद, भारत के संविधान और हमारे धर्मनिरपेक्ष लोकतान्त्रिक गणतन्त्र की रक्षा के संकल्प को दोहराती हैं। वामपंथी दल आम लोगों का आह्वान करते हैं कि वे हमारे संवैधानिक गणराज्य पर हो रहे संगीन हमलों के विरूध्द विरोध प्रकट करने को आगे आयें।

क्रषि कानूनों के संबंध में वाम दलों ने कहा कि सरकार द्वारा थोपे गये ये कानून देश की खेती और हमारे किसानों को बरवाद कर देंगे। सारे क्रषि क्षेत्र को क्रषि- विपणक कारपोरेट्स को हस्तांतरित करने से न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली पूरी तरह खत्म हो जायेगी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली संपूर्णतः विनष्ट हो जायेगी, बेशर्म काला बाजारियों और विशालकाय कारपोरेट्स को खाद्यान्नों और खाद्य पदार्थों की जमाखोरी की खुली छूट मिल जायेगी, जिससे वे खाद्य पदार्थों की क्रत्रिम किल्लत पैदा कर सकेंगे और कीमतों को मनमाने तरीके से बढ़ा सकेंगे। ये कानून भारत की खाद्य सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल देंगे। निश्चय ही यह विश्व व्यापार संगठनों के आदेशों और उरुग्वे वार्ताओं की प्रतिपूर्ति का संघी संस्करण है।

वामपंथी दलों ने कहा कि समय से पहले एमएसपी घोषित करने की सरकार की कवायद किसानों में उपजे आक्रोश को ठंडा करने की कोशिश और उन्हें भ्रम में डालने वाली है। अपने कुक्रत्यों से किसानों और युवाओं के बीच पूरी तरह बेनकाव मोदी सरकार अब विपक्ष पर उन्हें भड़काने का आरोप लगा रही है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार आंदोलित किसानों और नौजवानों पर जिस बहशियाना ढंग से हमलावर है वामदल उसकी कड़े शब्दों में निन्दा करते हैं।

वामपंथी पार्टियां उत्तर प्रदेश भर की अपनी समस्त इकाइयों से अपील करती हैं कि इन क़ानूनों को वापस लेने के लिये 'अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वयन समिति' द्वारा 25 सितंबर को प्रतिरोध के आह्वान के प्रति पूर्ण समर्थन और एकजुटता प्रदर्शित करें।

वामपंथी पार्टियां अपनी सभी जिला इकाइयों का आह्वान करती हैं कि अन्य राजनैतिक दलों से विचार विमर्श कर केन्द्र सरकार को इन क़ानूनों को वापस लेने को बाध्य करने को प्रतिरोध प्रदर्शन हेतु कार्यक्रमों का निर्धारण करें और किसानों का पूरी तरह साथ दें।

आभाषी बैठक में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश, माकपा राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा- माले के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव एवं आ॰ इ॰ फारबर्ड ब्लाक के राज्य संयोजक अनुभव कुशवाहा ने भाग लिया।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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गुरुवार, 17 सितंबर 2020

नौजवानों को रोजगार चाहिये लाठी नहीं

 

बेरोजगार दिवस पर बेरोजगारों पर लाठीचार्ज और गिरफ्तारी की भाकपा ने निन्दा की

 

लखनऊ- 17 सितंबर 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मण्डल ने राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस पर जबर्दस्त दस्तक देने के लिये उत्तर प्रदेश और देश के युवाओं और छात्रों को क्रांतिकारी अभिवादन पेश करते हुये उनके साथ संपूर्ण एकजुटता व्यक्त की है। भाकपा ने उत्तर प्रदेश और देश के अन्य कई राज्यों में भाजपा सरकारों की पुलिस द्वारा युवाओं पर जबर्दस्त लाठीचार्ज एवं उनकी गिरफ्तारियों की कड़े शब्दों में निन्दा की है।

भाकपा ने आंदोलन में उतरने के लिये अखिल भारतीय नौजवान सभा एवं आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी बधाई दी है।

यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा सचिव मण्डल ने कहा कि युवा समुदाय बेरोजगारी से तो पहले से ही त्रस्त था अब उन्हें संविदा पर काम पर रखे जाने की योगी सरकार की घोषणा से वह और भी हताश हो गया है। वह यह भी समझ रहा है कि सरकार ने विशेष सुरक्षा बल SSF का गठन भी जनवादी आंदोलनों को कुचलने को किया है। वह इसे बर्दाश्त करने को तैयार नहीं।

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि जो नौजवान 2 करोड़ युवाओं को रोजगार के वायदे पर भाजपा को सत्ता तक पहुंचाया था आज वह संघ प्रतिष्ठान की धोखाधड़ी को पूरी तरह समझ गया है, और मोदी मोदी की रट लगाने वाला वही नौजवान अब उनके जन्मदिवस पर ही आंदोलन कर रहा है।

भाकपा ने कहा कि वह नौजवानों के इस संघर्ष में पूरी तरह साथ है। भाकपा नौजवानों से अपेक्षा रखती है कि वे इस संघर्ष को सरकार बदलने तक सीमित न रख, व्यवस्था में बदलाव के संघर्ष का रूप देंगे।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा , उत्तर प्रदेश   

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मंगलवार, 15 सितंबर 2020

विशेष सुरक्षा बल SSF अध्यादेश लोकतन्त्र विरोधी , तत्काल रद्द करे राज्य सरकार


 

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मण्डल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विशेष सुरक्षा बल SSF के गठन को जनतंत्र को कुचलने और जनतान्त्रिक अधिकारों को हड़पने का एक और तुगलकी कदम बताया और इस अध्यादेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

भाकपा ने इस बल के गठन को औचित्यहीन बताते हुये कहा कि एक असीमित अधिकारों वाला बल लोकतन्त्र के लिए बेहद घातक है। विशेष सुरक्षा बल किसी को भी बिना आधार अथवा वारंट के गिरफ्तार कर जेल भेज सकता है, इसके लिये उसे मजिस्ट्रेट की अनुमति की भी जरूरत नहीं होगी। किसी भी निर्दोष को गिरफ्तार करने के अपराध में बिना सरकार की इजाजत के कोई अदालत इसका संज्ञान नहीं ले सकती। निश्चय ही सरकार इसका दुरुपयोग अपने विपक्षियों को प्रताड़ित करने के लिये करेगी। इस बल को निजी तौर पर एंगेज कर इसका दुरुपयोग किया जा सकता है।

भाकपा ने कहा कि अपराधों को नियंत्रित करने के लिये देश/ प्रदेश में पहले से ही अनेक सक्षम कानून हैं। लेकिन उनका सदिच्छा से प्रयोग करने के बजाय जनविरोधी सरकार एक के बाद एक निरंकुश कानून बनाती जा रही है। लोकतान्त्रिक शक्तियां इन तानाशाही कदमों को कदापि बर्दाश्त नहीं करेंगीं।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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सोमवार, 14 सितंबर 2020

CPI Protests on Economy and Unemployment


रोजगार देने और अर्थवयवस्था को सुधारे जाने को लेकर भाकपा ने धरने- प्रदर्शन आयोजित किये

 

लखनऊ- 14 सितंबर 2020, अर्थव्यवस्था की तवाही और उसके जनता पर पड़ रहे दुष्प्रभावों एवं लोकतन्त्र को खतरे में डालने की सरकारों की कारगुजारियों के विरूध्द एवं कोरोना काल में रोजगार, भोजन, चिकित्सा, शिक्षा व जीवन की सुरक्षा की गारंटी के लिये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा देशव्यापी आंदोलन के आह्वान पर आज समूचे ऊतर प्रदेश में जिलों में धरने- प्रदर्शन किये गये एवं ज्ञापन सौंपे गये।

भाकपा राज्य मुख्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि केन्द्र सरकार द्वारा भारत की अर्थव्यवस्था को खंडहर में तब्दील कर देने और केन्द्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लोकतन्त्र को गहरे संकट में फंसा देने के विरोध में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने आज सारे देश और उत्तर प्रदेश में प्रतिरोध दर्ज कराया है। आप सबको ज्ञात ही है कि आज ही संसद का सत्र शुरू हो रहा है। इस प्रतिरोध के माध्यम से देश की जनता के ऊपर थोपे गए मुसीबतों के पहाड़ के बारे में हम सरकार और संसद का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। साथ ही माननीय राज्यपाल, उत्तर प्रदेश और उनकी सरकार को भी संबोधित करना चाहते हैं।  

विज्ञप्ति में कहा गया है कि देश की अर्थव्यवस्था का पतन नोटबंदी से शुरू होगया था और जीएसटी के लगाने से पतन को और भी गति मिली। रही सही कमी मूर्खतापूर्ण तरीके से किये गये लाकडाउन ने पूरी कर दी। परिणामस्वरूप अच्छी- भली संभावनाओं वाली जीडीपी  – 23. 9 प्रतिशत तक गिर गयी। सरकार की यही रीति- नीति जारी रही तो अभी इसमें और गिरावट आ सकती है और आर्थिक संकट और भी गहराने की तमाम संभावनायें मौजूद हैं।

अर्थव्यवस्था के इस पैदा किये हुये संकट ने बड़े पैमाने पर बेरोजगारी पैदा कर दी है। छंटनी उद्योग बन्दी, निष्कासन, जबरिया रिटायरमेंट आदि के जरिये इसे और बढ़ाया जा रहा है। बेरोजगारी और गरीबी के अवसाद से पीडित तमाम लोग आत्महत्यायें कर रहे हैं। जनता की आर्थिक मजबूती से ही देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, पर सारे आंकड़े बताते हैं कि सरकार जनता को आर्थिक रूप से कमजोर कर पूँजीपतियों/ कार्पोरेट्स को मालामाल कर रही है, अतएव हमारी अर्थव्यवस्था नीचे जा रही है।

केन्द्रीय वित्त मंत्री देश की अर्थव्यवस्था के बारे में लगातार झूठे दाबे कर रही हैं और झूठ पर झूठ बोल रही हैं। आर्थिक पैकेज के बारे में निरा झूठ बोला गया। अब उस सबकी कलई खुल गयी है। लगातार झूठ बोलने वाली वित्त मंत्री को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, अतएव उन्हें तत्काल पद से हठाया जाना चाहिये। हिन्दुत्व के नाम पर कुछ भी चलेगा’, इसे देश अब बर्दाश्त करने वाला नहीं है।

केन्द्र और राज्य सरकार कोरोना से लोगों को बचाने और इलाज तीमारदारी और दवा उपलब्ध कराने में असमर्थ रही हैं। गरीब लोग बीमारियों से बेमौत मर रहे हैं। तमाम लोग निजी अस्पतालों की लूट के शिकार बन रहे हैं। बेरोजगारी और महंगाई ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है।

आर्थिक मोर्चे, सीमाओं की रक्षा और सुशासन देने में पूरी तरह विफल सरकार अब आक्रोशित लोगों के लोकतान्त्रिक अधिकारों को कुचल रही है। वह संविधान की हत्या से बाज नहीं आ रही। कार्पोरेट्स नियंत्रित टीवी चैनल्स के जरिये क्रत्रिम मुद्दे उछाल कर जनता को गुमराह करने में लगी है।   

उत्तर प्रदेश में अपराधों की भरमार है- सरकार लाचार है, ऊपर से नीचे तक फैला भ्रष्टाचार बेकाबू हो रहा है और शासकीय गुंडागर्दी चरम पर है। सरकार लोकतन्त्र की हत्या कर रही है। असफल मुख्यमंत्री सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार खो बैठे हैं।

राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि भाकपा “जीवनयापन के साधनों की उपलब्धता, समानता और न्याय के लिये- भारत और भारत के संविधान की रक्षा के लिये सदा प्रतिबध्द रही है और रहेगी।“ इसी संकल्प के साथ आज राष्ट्रपति और राज्यपाल को संबोधित 10 सूत्रीय मांग पत्र सौंपे गये हैं, जो निम्न प्रकार हैं-

1-  जर्जर अर्थव्यवस्था में सुधार के लिये हर संभव कदम उठाये जायें। बड़े पैमाने पर रोजगार दिये जायें, रोजगार छीनना बन्द किया जाये। रोजगार देने में सक्षम सार्वजनिक क्षेत्र को बेचना तत्काल बन्द किया जाये। मध्यम, लघु और कुटीर उद्योगों को डूबने से बचाने को हर संभव सहायता दी जाये।

2-  लोगों की क्रय शक्ति बढ़ने से ही उत्पादन का चक्र बढ़ता है। अतएव सबके खाते में छह माह तक रु॰ 10 हजार प्रति माह डाले जायें। मनरेगा का दायरा बढ़ाया जाये और शहरी मनरेगा भी शुरू की जाये।

3-  कोरोना काल में क्रषी ने अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा दिया है मगर किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। उसे सुधारने के हर संभव प्रयास किये जायें। किसान विरोधी 3 अध्यादेशों को वापस लिया जाये।

4-  लाक डाउन में श्रमिकों के पलायन से अर्थव्यवस्था की रीढ़ टूट गयी और श्रम तथा श्रमिकों की अपरिहार्यता सिध्द हो गयी। अतएव श्रमिक विरोधी कानून और कदम वापस लिये जायें।

5-  केन्द्र सरकार निरंतर लोकतन्त्र और संविधान विरोधी कार्यों में लिप्त है, उन पर लगाम लगाई जाये।

6-  उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था बेहद खराब है। सरकार पुलिस- प्रशासन को अपने राजनैतिक औज़ार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। जनता की लोकतान्त्रिक और राजनीतिक गतिविधियों को बाधित किया जा रहा है। अघोषित तानाशाही दमन का पर्याय बनी हुयी है। इस सब पर रोक लगा कर लोकतान्त्रिक बदलाव लाये जायें।

7-  कोरोना से निपटने में केन्द्र और राज्य सरकारें आवश्यक भूमिका निभाने में फेल रही हैं। लोगों का जीवन और स्वास्थ्य नष्ट हो रहा है। अन्य बीमारियों ने भी पैर पसारना शुरू कर दिया है। बाढ़ ने भी तवाही मचा रखी है। लोगों के जीवन और स्वास्थ्य को बचाने को गंभीर और ठोस प्रयास किये जायें।

8-  समय की मांग है कि सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत किया जाये।

9-  कोरोना काल की फीस माफ की जाये। गरीब बच्चों की पढ़ाई का इंतजाम किया जाये।

10- पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में पर्याप्त कमी की जाये। महंगाई को भी नीचे लाया जाये।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

 

 

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रविवार, 13 सितंबर 2020

खोखले हैं सरकार के आर्थिक मदद के दावे


 

रोजगार दो! लघु उद्योगों और खेती को सीधे आर्थिक पैकेज दो!!

 

ध्वस्त अर्थव्यवस्था को उबारने की मांग को लेकर भाकपा कल देश भर में आंदोलन करेगी।

 

लखनऊ- 13 सितंबर 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने आरोप लगाया है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाइयों (एमएसएमई) को बचाने अथवा उनके उच्चीकरण के बारे में केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार के सारे दावे खोखले हैं। यदि सरकारें सचमुच इन इकाइयों को प्रमोट करना चाहती हैं तो उन्हें सीधे आर्थिक मदद के लिये पैकेज की घोषणा करनी होगी। उन्हें आर्थिक मदद की ज़िम्मेदारी बैंकों पर डाल देने से न तो बेरोजगारों को काम मिलेगा, न -23. 9 प्रतिशत तक गिर चुकी जीडीपी ऊपर आयेगी और न भारत आत्मनिर्भर बन सकेगा।

एक प्रेस बयान में  भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में राज्य और जिले का उद्योग विभाग एमएसएमई के निर्माण अथवा  उच्चीकरण के लिये अभ्यर्थियों से प्रस्ताव लेकर कर्ज के लिये क्षेत्र की बैंकों के पास भेज देते हैं। लेकिन बैंकें उन्हें रद्दी की टोकरी में डाल देती हैं। सरकारी योजनाओं में दिये कर्जों के फंसने से बैंकें फूंक फूंक कर कदम उठा रही हैं और कर्ज देने से हिचकिचा रही हैं। अतएव यदि सरकार लघु उद्यमियों की मदद करना चाहती है तो उनकी इकाइयों को सीधे धनराशि उपलब्ध कराये।

सरकार की मौजूदा नीति के चलते समूचे उत्तर प्रदेश में लघु-  मध्यम  उद्यम लगाने या उन्हें उच्चीक्रत करने को उत्सुक लाखों लाख लघु उद्यमी दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। इस संदर्भ में सबसे सटीक उदाहरण जनपद- सहारनपुर की तहसील देवबंद के ग्राम- तैय्यबपुर बड़ा निवासी श्री चन्द्रपाल का है।

शिक्षित और उत्साही चंद्रपाल अपने बल पर छोटे पैमाने पर मशरूम उगाने और फूड प्रोसेसिंग के काम में दशकों से जुटे हैं। अनेक पुरुस्कार और प्रशस्ति पत्र पा चुके हैं। बैंकों से जब भी छोटा मोटा कर्ज लिया समय पर चुकता करने के सर्टिफिकेट्स हासिल किये बैठे हैं। अनुसूचित जाति के युवा श्री चंद्रपाल की उद्यमशीलता से जनपद के उच्चाधिकारी और संबंधित विभाग सुपरिचित हैं। उनके बारे में यदि सबकुछ लिखा जाये तो एक महाग्रंथ बन जायेगा।

किसी व्यक्ति विशेष के बारे में यह सब लिखने का तात्पर्य सरकार को सच्चाई से अवगत कराना है, न कि उसकी प्रशंसा करना।

इन्हीं चन्द्रपाल ने सरकार के परिपत्रों का संज्ञान लेते हुये अपनी रजिस्टर्ड और क्रियाशील इकाई “पोराला फूड्स प्रोसेसिंग केन्द्र” के उच्चीकरण के लिये खाद्य एवं प्रसंस्करण विभाग, सहारनपुर को नियमानुसार प्रस्ताव दिया। विभाग ने प्रस्ताव स्वीक्रत कर सेंट्रल बैंक आफ इंडिया शाखा- मंझौल को भेज दिया। बैंक मैनेजर ने यह कह कर कि सरकार ने प्रस्ताव भेजा है तो पैसे भी सरकार से ले लो, प्रस्ताव खारिज कर दिया। इस पूरे प्रकरण में भागदौड़ और आवश्यक कागजात तैयार करने में धन और समय की हानि हुयी सो अलग।

यह कहानी अकेले चंद्रपाल की नहीं है। अपने पैरों पर खड़े होने को उत्सुक उत्तर प्रदेश के तमाम होनहार युवा और लघु उद्यमी इसी तरह सरकार की झांसेबाजी का शिकार होरहे हैं और सरकारी विभागों और बैंकों की चौखट पर एड़ियाँ रगड़ रहे हैं। सरकार नित-नयी हवाई घोषणायेँ और खोखले जुमले गड़ती चली जा रही है। कोरोना और लाक डाउन से तवाह हुयी अर्थव्यवस्था के सुधार के लिये कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।

भाकपा ने मांग की कि सरकार यदि संजीदा है तो खुद बैंकों से लोन ले और अपने स्तर से लघु उद्यमियों को आर्थिक सहायता प्रदान करे। वरना बेरोजगारी को दूर करने, ध्वस्त अर्थव्यवस्था को सुधारने और आत्मनिर्भर भारत बनाने के उसके दावे धरे के धरे रह जायेंगे। अतएव उसे माडल के तौर पर चन्द्रपाल के प्रोजेक्ट को भी सहायता देनी चाहिए और चंद्रपाल जैसे लाखों लाख अन्य लघु उद्यमियों को भी।

डा॰ गिरीश ने कहा कि अर्थव्यवस्था, रोजगार और किसान, कामगार और नौजवानोंके अन्य ज्वलंत सवालों पर भाकपा कल 14 सितंबर को सारे देश में आंदोलन करेगी।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा,  उत्तर प्रदेश 

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बुधवार, 9 सितंबर 2020

अर्थव्यवस्था की बरवादी और लोकतन्त्र पर खतरों के विरूध्द भाकपा का देशव्यापी प्रतिरोध दिवस 14 सितंबर को


 

लखनऊ- भारत की अर्थव्यवस्था को खंडहर में तब्दील कर देने और लोकतन्त्र को गहरे संकट में फंसा देने के विरोध में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 14 सितंबर को सारे देश में प्रतिरोध दर्ज करायेगी। ज्ञातव्य हो कि इसी दिन संसद का सत्र शुरू होने जा रहा है।

यह निर्णय गत दिन जूम एप के माध्यम से संपन्न पार्टी के केन्द्रीय सचिव मण्डल की बैठक में लिया गया है।

बड़े पैमाने पर बेरोजगारी पैदा करने वाली, गरीबी बढ़ाने वाली एवं जीवनयापन के साधनों को तहस नहस करने वाली मोदी सरकार की विनाशकारी आर्थिक नीतियों के विरूध्द जनता को संगठित किया जायेगा।

देश की अर्थव्यवस्था के बारे में लगातार झूठे दाबे करने और झूठ बोलने वाली वित्त मंत्री को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, अतएव उनसे पद छोड़ने की मांग की जायेगी।

भाकपा “जीवनयापन, समानता और न्याय के लिये- भारत और भारत के संविधान की रक्षा के लिये सदा प्रतिबध्द रही है और रहेगी”, इस संकल्प के साथ आंदोलन किया जाएगा।

भाकपा के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अपराधों की भरमार, भ्रष्टाचार और शासकीय गुंडागर्दी सहित उन सभी सवालों को उठाया जायेगा जिन्हें भाकपा विगत कई माहों से लगातार उठाती रही है।

डा॰ गिरीश

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शनिवार, 29 अगस्त 2020

उत्तर प्रदेश मेन एक और दिन अपराधियों के नाम


 

सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार खो चुकी है राज्य सरकार: भाकपा ने दोहराया

 

लखनऊ- गांवों, कस्बों और शहरों में तो स्त्री- पुरुष, दलित- अल्पसंख्यक एवं आम जन, हत्या, बलात्कार, हमलों, अपहरण, लूट जैसी जघन्य वारदातों के निरन्तर शिकार हो रहे हैं और मुख्यमंत्री अपराधों में कमी के फर्जी आंकड़े पेश कर रहे हैं, ऐसे में राजधानी में मुख्यमंत्री आवास के निकट गौतमपल्ली इलाके के हाई सीक्यौरिटी क्षेत्र में रेलवे अधिकारी के सरकारी आवास में दिन- दहाड़े उनकी पत्नी और युवा बेटे की हत्या ने राज्य सरकार के सुशासन के दावों की कलई खोल कर रख दी है।

आज ही मथुरा दिल्ली हाईवे पर स्कूटी सवार युवती से छेड़छाड़ और उसे घसीट कर वाहन में डालने की तथा जमुना एक्सप्रेसवे पर चलती बस में बलात्कार की दिल कंपकंपाने वाली खबरें भी आ रही हैं। मैनपुरी में प्रेमी- प्रेमिका की जूतों से पिटाई, उनका जुलूस और लखीमपुर में परिवार के कई लोगों की हत्या की खबरें भी अन्य आपराधिक खबरों के बीच सुर्खियां बटोर रहीं हैं। हमेशा की तरह मुख्यमंत्री द्वारा संज्ञान लिये जाने और कड़ी कार्यवाही किये जाने की खबरें भी चैनलों पर प्रसारित की जा रही हैं।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मंडल ने घटना/ घटनाओं पर दुख, आश्चर्य और रोष जताया है। एक प्रेस बयान में पार्टी ने अपने इस स्टैंड को फिर दोहराया है कि उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार खो बैठी है।

भाकपा यह निरन्तर कहती रही है कि अपराधियों से निपटने और अपराधों को कंट्रौल करने की राज्य सरकार की कार्यवाहियाँ सुर्खियां बटोरने और लोगों को बरगलाये रखने की द्रष्टि से की जा रहीं हैं ताकि बिखरते वोटों को साधा जा सके। अपने इन मंसूबों को पूरा करने के लिये इस सरकार ने पुलिस- प्रशासन का व्यापक राजनीतिकरण कर डाला है। नतीजे सबके सामने हैं।

भाकपा उम्मीद करती है कि सभी दुर्दांत घटनाओं के आरोपियों को शीघ्र पकड़ा जायेगा। लेकिन सबसे बड़ा काम लोगों के मन में गहराई तक समा चुकी असुरक्षा की भावना को निकालने का है जिसमें योगी सरकार पूरी तरह से विफल है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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शुक्रवार, 28 अगस्त 2020

हालात असामान्य हैं, NEET और JEE को फिलहाल रद्द करे सरकार : भाकपा


लखनऊ-  भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मंडल ने केन्द्र सरकार को चेतावनी दी कि वह छात्रों और राज्यों पर अपना तुगलकी एजेंडा थोपने से बाज आये और कोविड-19 के इस दौर मे उनके ऊपर NEET एवं JEE न थोपे।

एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि आज भारत में कोविड संक्रमित मरीजों की प्रतिदिन संख्या विश्व में सबसे ज्यादा है। जब भारत में मुट्ठी भर मरीज थे तब सरकार ने सारे देश को तालाबन्दी में धकेल दिया था और अब जब यह संख्या बढ़ कर हालातों को भयावह बना रही है तब सरकार NEET और JEE का आयोजन करा रही है।

सरकार अनलाक के दौर में भी केवल अपनी पूंजीपति- माफिया लाबी के हितों में काम कर रही है और आम जनता के हितों को कुचल रही है। वह शराब के ठेकों की तरह उन सभी चीजों में छूट दे रही है जो जनता के हितों पर चोट पहुंचा रहे हैं। विद्यालयों में प्राचार्यों और आचार्यों की तमाम जगहें खाली पड़ीं हैं। अन्य विभागों में भी तमाम रिक्तियाँ हैं। पर सरकार उनकी भर्ती परीक्षाओं को टाल रही है। रोजगार देने के वायदों और दावों से मुकर रही है।

जहां तक कोविड काल में भर्ती परीक्षाओं में व्यवस्थाओं का सवाल है, हम इसे यूपी में बी॰एड॰ प्रवेश परीक्षाओं के दौरान देख चुके हैं, जब इन परीक्षा केन्द्रों को अव्यवस्थाओं ने जकड़ लिया था और ट्रांसपोर्टेशन की अव्यवस्थाओं के चलते कई अभ्यर्थियों की मार्ग दुर्घटनाओं में मौत होगयी थी।

कोविड- प्रकोप के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश के एक बड़े भाग में बाढ़ आयी हुयी है, पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन अभी 30 प्रतिशत भी चलायमान नहीं है, होटलों और धर्मशालाओं पर ताले लटके हुये हैं, गरीब और मध्यवर्गीय अभ्यर्थी न तो निजी तौर पर आवागमन का खर्च वहन कर सकते हैं न ठहरने का। जबकि एक परीक्षा केन्द्र तक पहुँचने के लिये उन्हें 250 से 500 किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। इन तबकों से जुड़े छात्र तालाबन्दी में कोचिंग लेना तो दूर किताबें तक नहीं खरीद सके हैं।

वैसे भी शिक्षा समवर्ती सूची में आती है, अतएव केन्द्र सरकार राज्य सरकारों पर JEE और NEET थोप नहीं सकती। छात्रहित में कई राज्य सरकारें इसका विरोध कर रही हैं और वे सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच रही हैं। केन्द्र को अपने अधिकारों को राज्यों पर थोपने से बाज आना चाहिये। भाकपा केन्द्र की माइकले युग में ले जाने वाली शिक्षा नीति का विरोध करती है।

भाकपा राज्य सचिव मंडल ने निर्णय किया कि NEET एवं JEE आयोजित करने के छात्र विरोधी- गरीब विरोधी निर्णय का हर संगठन द्वारा हर स्तर पर विरोध किया जायेगा। भाकपा की राय है कि इन प्रवेश परीक्षाओ को कुछ महीने टाला जा सकता है और शैक्षणिक सत्र को छोटा कर 6 माहों में समेटा जा सकता है, और प्रतिदिन 5- 6 घंटे पढ़ाई करा कोर्स पूरा किया जा सकता है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

 

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बुधवार, 19 अगस्त 2020

गरीबों को प्राविधिक शिक्षा से वंचित करने का प्रयास है उत्तर प्रदेश में 40 आईटीआई का निजीकरण


गरीबों को प्राविधिक शिक्षा से बाहर कर उन्हें आज का एकलव्य बनाने का रास्ता उत्तर प्रदेश सरकार ने तैयार कर दिया है। विश्वगुरु बनाने के नारे और उसको लागू करने के खोखलेपन ने उत्तर प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। मामला 40 आईटीआई के निजीकरण का है।

प्रदेश में पहले ही प्रायवेट के मुक़ाबले सरकारी आईटीआई की संख्या नगण्य है। 2931 निजी तो 307 पुरुष सरकारी और 12 महिला आईटीआई प्रदेश भर में संचालित हैं। अब इनमें से 40 का निजीकरण किया जा रहा है। पहले चरण में 16 और दूसरे चरण में 24 के निजीकरण का खाका तैयार किया जा चुका है।

निजीकरण के लिये गुणवत्ता सुधारने का तर्क दिया जा रहा है। ये कितना भौंथरा है इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है की प्रदेश के तमाम प्रायवेट आईटीआई में उपयुक्त इमारत नहीं है। प्रयोगशाला और महंगे उपकरणों की बात तो जाने ही दीजिये। शिक्षकों के नाम पर वहाँ एक सूची मात्र है और वेतन कागजों पर वितरित कर दिया जाता है। हां, उपयुक्त राशि दे कर छात्रों को पास कराने की गारंटी वहां रहती है।

नए सत्र में प्रवेश इन्हीं निजीक्रत आईटीआई में होगा जिसकी फीस 54 गुना तक ज्यादा होगी। अभी रुपए 480 सालाना से बढ़ कर फीस 26 हजार तक हो जायेगी। जो गरीब छात्र अभी 480 रुपये भरने में असमर्थ हैं, वे 26 हजार रुपये कहाँ से लायेंगे पता नहीं। उधर प्रायवेट लाबी को अरबों रुपए कीमत का बना बनाया स्ट्रक्चर कौड़ी कीमत पर हासिल हो जायेगा। इसमें भ्रष्टाचार की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता। मायावती के शासन में चीनी मिलों की बिक्री में धांधली का मामला सबके सामने है।

इन आईटीआई में कार्यरत स्टाफ के बारे में भी अभी नीति स्पष्ट नहीं की गई है। उनको अब तक मिल रहे उच्चीक्रत वेतन को कोई निजी आईटीआई दे पाएगी, यह असंभव जान पड़ता है।

क्या आत्मनिर्भरता का मोदी-मंत्र गरीबों के लिये उलटा पड़ने वाला है? कोरोना काल में गरीबों के सहारा बने संस्थानों को बेच कर आपदा को अवसर में बदला जा रहा है। आईटीआई के निजीकरण के फैसले से तो यही साबित होता है।

हम प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील करते हैं कि गरीबों को प्राविधिक शिक्षा के हक से वंचित करने के इस फैसले को पलट दें। हम गरीबों के हक में आवाज उठाने का संकल्प लेते हैं, और आप से भी अपील करते हैं कि अपनी आवाज उठायें और गरीबों का सहारा बनें।

जो भी इस मुहिम का भाग बनना चाहते हैं, कम से कम एक चिट्ठी प्रदेश के मुखिया को तत्काल प्रेषित करें। अपनी क्रिया को मीडिया और सोशल मीडिया तक जरूर पहुंचायें। इंसान के जीवन की सार्थकता जरूरतमंदों के हक में आवाज उठाने में है, किसी ढिंढोरची के कहने पर थाली- ताली बजाने में नहीं।

डा॰ गिरीश

9412173664

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