भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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बुधवार, 4 दिसंबर 2019

On Ayodhya


अयोध्या-
सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है, समाधान अभी बाकी है

सर्वोच्च न्यायालय की विशिष्ट पीठ द्वारा राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवाद पर 9 नवंबर 2019 को एकमत से दिये गये फैसले के पक्ष और विपक्ष में जब देश भर में बहस छिड़ी हुयी है, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने 28 नवंबर को फैजाबाद/ अयोध्या पहुंच कर फैसले के बाद वहां विवाद से जुड़े पक्षों, प्रबुध्द जनों और आमजनों से उनके सोच और हालात की जानकारी ली।
अपने एक दिवसीय दौरे में भाकपा प्रतिनिधिमंडल ने तमाम लोगों से भेंट की। उनमें कोर्ट में श्री राम जन्म भूमि के प्रमुख पक्षकार और निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेन्द्र दास, बाबरी मस्जिद के पक्षकार श्री इकबाल अंसारी, सूरज कुंज मन्दिर के महन्त श्री जुगल किशोर शास्त्री एवं दैनिक जनमोर्चा के स्थानीय संपादक श्री क्रष्ण प्रताप सिंह आदि प्रमुख थे। प्रतिनिधिमंडल की भेंट बाबरी मस्जिद के एक और पक्षकार हाजी महबूब से भी होनी थी पर तय समय पर उनके अन्यत्र व्यस्त होजाने के कारण यह भेंट नहीं होसकी।
देश भर के राम जन्मभूमि आंदोलन के समर्थक सर्वोच न्यायालय के इस फैसले से गदगद हैं और इसे हिंदूराज स्थापित करने की दिशा में एक मास्टर स्ट्रोक मान कर चल रहे हैं। वहीं अन्य असंख्य हैं जो इस फैसले को तथ्यों, सबूतों और कानून के शासन के ऊपर आस्था और विश्वास की विजय मान रहे हैं। उनका आरोप है कि जिन हिंसक अपराधियों ने 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का ढांचा गिरा दिया और जिन्होने 1949 में ढांचे के भीतर मूर्तियाँ घुसाईं, को सर्वोच्च न्यायालय ने पुरुष्क्रत किया है। इस निर्णय ने हमारे संविधान में विहित देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे की अवधारणा की अवहेलना की है।
देश भर में चल रहे इस विचार मंथन से अन्यमनस्क अयोध्या यद्यपि न खुशी न गम के स्थायी भाव में मस्त जान पड़ती है लेकिन गहराई में जाने पर पता चलता है कि ऊपर से शांत तालाब की तलहटी में भारी हलचल मौजूद है। वह इस मुद्दे पर देश भर के सरोकारों से कम, अपने अंदर के सरोकारों से ज्यादा जूझती नजर आती है।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी भारी बेरीकेडिंग और तैनात पुलिस बलों से आच्छादित अयोध्या में श्रध्दालुओं के आवागमन में कोई कमी नहीं आयी अपितु एक महन्त जी के अनुसार यह 1985 – 90 की तुलना में कई गुना बढ़ी है। मन्दिर आंदोलन ने अयोध्या को काशी और मथुरा की तरह आस्थावानों की प्रमुख पसन्द बना दिया है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद श्रध्दालुओं की आमद में और इजाफा हुआ है और आम दुकानदार और पंडे- पुजारी इससे बेहद खुश हैं। वहीं एक चायखाना चलाने  वाली महिला की प्रातिक्रिया थी कि जिन लोगों के कारण अयोध्या को बार बार पाबंदियां और कर्फ़्यू झेलने पड़ते हैं और गरीबों की रोजी- रोटी पर बन आती है, वे अब भी चुप बैठने वाले नहीं हैं। वह गरीब महिला अब भी मौजूद भारी वैरीकेडिंग पर भी सवाल उठाती है।
मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड और जमात ए इस्लामी जैसे संगठन जहां सर्वोच्च न्यायालय में रिव्यू याचिका दायर करने की घोषणा कर चुके हैं और जमीयत उलमा –ए- हिन्द ने तो अब रिव्यू याचिका दायर भी कर दी है। पर बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाजी इकबाल अंसारी मीडिया के समक्ष दो टूक कहते हैं मुद्दा खत्म होगया, पिटीशन से मतभेद पैदा होंगे। उन्हीं के आवास पर मीडियाकर्मियों द्वारा भाकपा प्रतिनिधिमंडल से इस मुद्दे पर पूछे जाने पर भाकपा प्रतिनिधिमंडल ने जब स्पष्ट कहाकि रिट पिटीशन में जाना किसी का भी संवैधानिक अधिकार है तो उन्होने इसका विरोध भी नहीं किया। वे एक सीधे सादे इन्सान जान पड़े।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बाबरी मस्जिद पक्ष को 5 एकड़ जमीन देने के मामले पर भी भिन्न भिन्न रायें दिखीं। कुछ हैं जो जमीन लेने के पक्ष में नहीं हैं। कई अन्य सुझाव हवा में तैर रहे हैं। पर इकबाल अंसारी साहब ने मुहिम छेड़ दी है कि उनके घर के सामने स्थित जमीन सरकार दे और उस पर महिलाओं के लिये एक कौमी एकता अस्पताल खोला जाये। ज्ञात हो कि राम की इस नगरी में महिलाओं के लिये न तो कोई सरकारी अस्पताल है और न ही किसी अस्पताल में महिला चिकित्सक की तैनाती है। ऐसे में महिलाओं को इलाज और प्रसव के लिये या तो नगर से बाहर जाना होता है या फिर महंगे और लुटेरे किस्म के निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है।
ऐसे में इकबाल अंसारी की इस मुहिम को बल मिल सकता है। भाकपा की स्थानीय इकाई महिला चिकित्सालय के निर्माण और सरकारी अस्पतालों में महिला चिकित्सक की तैनाती के लिये निरंतर आंदोलन चला रही है। यह आश्चर्यजनक ही है कि जो सरकार अयोध्या में विशाल मूर्तियों के निर्माण और दीपोत्सवों पर जनता की गाड़ी कमाई का अरबों रुपये फूँक रही है वह महिलाओं की चिकित्सा के सवाल से बेशर्मी से मुंह मोड़े हुये है।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयानुसार सरकार द्वारा गठित किये जाने वाले ट्रस्ट पर आधिपत्य जमाने और उसमें जगह पाने लिये विभिन्न पक्षों में चल रही प्रतिस्पर्धा के बीच निर्मोही अखाड़े के महन्त श्री दिनेन्द्र दास ने बहुत सध कर अपनी प्रतिक्रिया दी। कहा कि निर्मोही अखाड़े ने तो सबसे पहले मुकदमा लड़ा। अखाड़े ने मुकदमे के लिये जमीन तक बेच दी। वे बताते हैं कि अखाडा परिषद के निर्णय के बाद इसके पंचों से प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा है। विश्व हिन्दू परिषद द्वारा मन्दिर निर्माण के लिये एकत्रित धन, मन्दिर के उसके माडल और तराशे पत्थरों को सरकार को सौंपने के सवाल पर वे कहते हैं कि रामजी का पैसा है, विहिप को स्वयं देदेना चाहिये। अगर नहीं तो सरकार निर्णय लेगी। मन्दिर निर्माण का प्रश्न राजनीति से अलग रहना चाहिये। यह पूछे जाने पर कि निर्णय हुआ है समाधान नहीं हुआ, वे कहते हैं कि 95 प्रतिशत ठीक होचुका है।
बैरीकेडिंग के चलते भाकपा प्रतिनिधिमंडल सूरज कुंज मन्दिर नहीं पहुंच सका। लेकिन उसके महन्त जुगल किशोर शास्त्री ने सदाशयता का परिचय दिया और वे प्रतिनिधिमंडल से मिलने मुख्य सड़क तक चल कर आगये। वहीं एक महिला द्वारा संचालित छोटे से चाय खाने पर उनसे बेवाक चर्चा हुयी।
वे धारा प्रवाह बोलने लगे- हिन्दू बंटा हुआ है, उसमें दलित वर्ग अलग है जो इन झमेलों से परेशानी महसूस करता है, पर वो बोल नहीं सकता, वो कमजोर हैं, विश्व हिन्दू परिषद का माहौल पहले से कम हुआ है, आस्था संविधान सम्मत नहीं है, राष्ट्रवाद संकीर्ण सोच है, महंतों में निजी हितों की लड़ाई है, नेपाल में विकास हुआ है, असल लड़ाई हक- हकूक की है, कम्युनिस्ट उसीको लड़ते हैं, वे किसी संकीर्णता में नहीं।
वे बिना रुके बोलते जाते हैं- मुसलमानों के साथ न्याय नहीं होता, हमेशा मुसलमानों को दबाने का प्रयास किया जाता है, मुसलमानों पर जुल्म आगे भी बढ़ेगा, इसका प्रतिकार करना चाहिए, निर्णय का विरोध होना चाहिये, यह विरोध संविधान सम्मत है, हम कम्युनिस्टों को पसंद करते हैं,’ आदि।
स्थानीय समाचार पत्र जनमोर्चा कार्यालय में अपने कार्य में मशगूल संपादक क्रष्ण प्रताप सिंह से चर्चा हुयी तो लगा कि वे महन्त जुगल किशोर शास्त्री की बात को ही आगे बढ़ा रहे हैं। वे कहते हैं- स्वीकार कर लेना चाहिये कि हिन्दू राष्ट्र बन चुका है, फैसला आया तो तमाम हिन्दू खुश थे, मामला केवल मंदिर- मस्जिद का नहीं था, सवाल मुसलमान की हैसियत दोयम दर्जे की बनाने का है, यह आगे भी चलेगा, प्रधानमंत्री ने झारखंड में भाषण दिया कि 60 साल पुराना विवाद हमने 6 माह में निपटा दिया, यह सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना है, इससे लंबी लड़ाई लड़नी ही होगी, जितनी ज्यादा लड़ाई हम लड़ लेंगे हमारी संतानों को उतनी ही कम लड़नी पड़ेगी,’ आदि।
मंदिर निर्माण की आगे की तस्वीर के बारे में वे इतना ही कहते हैं- हिन्दू धर्म के ठेकेदारों में लड़ाई होगी, ट्रस्ट गठन का मामला कोर्ट में जा सकता है।
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद भी तमाम झगड़े टंटों में उलझी है अयोध्या।
भाकपा के इस प्रतिनिधिमंडल में इन पक्तियों के लेखक के अतिरिक्त भाकपा फैजाबाद के जिला सचिव का॰ रामतीरथ पाठक, राज्य काउंसिल के सदस्य का॰ अशोक तिवारी, उत्तर प्रदेश नौजवान सभा के अध्यक्ष का॰ विनय पाठक, भाकपा अयोध्या के वरिष्ठ नेता का॰ संपूर्णानन्द बाजपेयी, नगर सचिव का॰ ब्रजेन्द्र श्रीवास्तव, वरिष्ठ भाकपा नेता का॰ सूर्यकांत पाण्डेय एवं खेत मजदूर यूनियन के वरिष्ठ नेता का॰ अखिलेश चतुर्वेदी शामिल थे।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव                    दिनांक- 4 दिसंबर 2019
भाकपा, उत्तर प्रदेश





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सोमवार, 2 दिसंबर 2019

CPI on Price rise and atrocity on women


प्रकाशनार्थ-
मोबायल नेटवर्क, रसोई गैस और आम महंगाई तथा महिला हिंसा
के खिलाफ प्रदेश भर में प्रतिरोध जतायेगी भाकपा
लखनऊ- 2 दिसंबर 2019, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने मोबायल नेटवर्क कंपनियों द्वारा मोबायल फोन का बिल 42 प्रतिशत तक महंगा करने, गैर सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेन्डर की कीमतों में रुपये 13. 50 की व्रद्धि और वाराणसी सहित 6 एयरपोर्ट के निजीकरण के फैसलों की कड़े शब्दों में निन्दा की है।
भाकपा ने हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक के साथ बर्बरता और हत्या की भी कठोरतम शब्दों में निन्दा की। महिला हिंसा की वारदातों में अचानक बढ़ोत्तरी पर भी भाकपा ने गहरी चिन्ता जताई है।  
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि टेलीकॉम कंपनियों पर बकाया करों को अदा करने का निर्देश सर्वोच्च न्यायालय ने कंपनियों को दिया था। सरकार ने उनके असमर्थता प्रकट करने पर उन्हें राहत प्रदान करने का आश्वासन दिया था। लेकिन दोनों ने मिल कर सारा भार उपभोक्ताओं पर लाद दिया है।
प्याज की आसमान छूती कीमतों, अन्य चीजों की महंगाई और आर्थिक मंदी की मार से जनता पहले ही लहूलुहान है। इस पर गैस और मोबायल नेटवर्क की महंगाई से जनता की तकलीफ़ें और बढ़ जाएंगी। आज मोबायल गरीब लोगों की अहम जरूरत बन गया है। इसी तरह निजीकरण की मार भी जनता पर पढ़ रही है। निजी बैंकों और कंपनियों को लाभ पहुँचाने को वाहन स्वामियों पर फास्ट टेग लागू किया जारहा है और एयरपोर्ट्स को लेने वाली निजी कंपनियाँ जनता पर भार शिफ्ट कर रही हैं।
भाकपा इस सब पर कड़ा विरोध जताती रही है। भाकपा ने उत्तर प्रदेश में अपनी जिला इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे प्याज और दूसरी वस्तुओं की महंगाई, आये दिन  पेट्रोल डीजल की कीमतों में होने वाली व्रद्धि, मोबायल नेटवर्क और गैस की कीमतों में व्रद्धि, निजीकरण, महिला हिंसा और बिगड़ती कानून व्यवस्था और वाहन चालकों पर फास्ट टेग थोपने तथा अन्य ज्वलंत सवालों पर एक साथ अथवा अलग अलग दिन प्रतिरोध जताएं और ज्ञापन दें।
भाकपा की स्पष्ट राय है कि इन सवालों पर तत्काल और निरंतर आंदोलन की जरूरत है तभी विभाजनकारी और जनविरोधी सरकारों के पैरों में बेड़ियाँ डाली जा सकती हैं।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश


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शनिवार, 23 नवंबर 2019

CPI, U.P. on Maharashtra


प्रकाशनार्थ
घोर अनैतिक और असंवैधानिक है महाराष्ट्र का सत्ता हस्तांतरण
विपक्ष को एकजुट हो जनता के बीच जाना होगा: भाकपा
लखनऊ- 23 नवंबर 2019, महाराष्ट्र में भाजपा द्वारा रात के अंधेरे में सरकार बनाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने कहाकि अरुणाञ्चल, गोवा और कर्नाटक आदि में तख़्ता पलट के बाद भाजपा ने एनसीपी में सैंध लगा कर आज महाराष्ट्र में भी अवैध सत्ताहरण कर लिया। भाकपा इस घोर अवसरवादी, असंवैधानिक, आलोकतांत्रिक और अनैतिक कारगुजारी की कड़े शब्दों में निन्दा करती है। इस पाप को जनता का मेंडेट बता कर छिपाया नहीं जसकाता।
इस घटना से संवैधानिक संस्थाओं और संवैधानिक पदों पर आसीन महानुभावों के क्रियाकलापों के बारे में बेहद चिन्ता योग्य सवाल खड़े होगये हैं।
जिन वजहों से राष्ट्रपति शासन लगाया गया वह कैसे रातोंरात खत्म होगयीं और उसे  समाप्त करा दिया गया और एक अवैध सरकार पदारूढ़ कर दी गयी। जो भाजपा दो सप्ताह पहले सरकार बनाने में असमर्थता प्रकट कर चुकी थी रातोंरात उसके बहुमत के दाबों का राज्यपाल ने कैसे परीक्षण कर लिया। तीव्र सूचना माध्यम भी अभी तक अनभिज्ञ हैं कि राज्यपाल ने फड़नवीस के पक्ष में खड़े विधायकों की वैधता तसदीक की अथवा नहीं। और अगर की तो उसकी प्रक्रिया और परिणाम जनता के सामने क्यों नहीं रखे गये? क्यों केन्द्र से लेकर दो तिहाई भारत पर राज्य करने वाली पार्टी के मुख्यमंत्री को रात के अंधेरे में सरकार गठन की कारगुजारी करनी पड़ी।
हमारी द्रढ़ राय है कि सारा खेल भाजपा और केंद्र सरकार में बैठे शीर्ष नेत्रत्व की अगुवाई में खेला गया है। महाराष्ट्र में भाजपा के नेता राणे ने सप्ताह भर पहले मीडिया के सामने स्पष्ट रूप से कह दिया था कि उन्हें सरकार बनाने के लिये बहुमत जुटाने का निर्देश मिला है और हम किसी भी कीमत पर सरकार बनायेंगे। ये कीमत इतनी घ्रणित होगी किसी ने भी शायद ही सोचा हो। तोडफोड और राजनैतिक बलात्कार का यह खेल आगे भी जारी रहेगा।
सभी विपक्षी दलों को संवैधानिक मर्यादाओं के लगातार हनन के विरूध्द एकजुट होकर जनता के बीच जाना होगा और जनता को जाग्रत कर भाजपा की अनैतिक और असंवैधानिक गतिविधियों के विरूध्द लामबंद करना होगा। भाजपा की गोद में झूल रही क्षेत्रीय पार्टियों को भी अपने अस्तित्व की रक्षा के लिये सावधान होजाना चाहिये।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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सोमवार, 18 नवंबर 2019

CPI on Unnav


प्रकाशनार्थ
उन्नाव के उद्वेलित किसानों से वार्ता करे सरकार
अपने ही लोगों से लाठी- गोली से निपटना अनुचित और निंदनीय
लखनऊ- 18 नवंबर 2019, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने उन्नाव में दो दिन से किसानों पर होरहे लाठीचार्ज और बल प्रयोग पर हैरानी जताई है और सरकार से किसानों के मुद्दों का हल निकालने की मांग की है।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति में अब भी खामियाँ हैं और किसानों को हमेशा ऐसा लगा रहता है कि सरकार उनकी ज़मीनों को कम कीमत पर लेकर अधिक कीमत पर बेच कर लाभ कमाती है। यदि उन्हें यह विश्वास हो कि उनकी दीगई भूमि से होने वाले लाभ में उनका भी हिस्सा होगा तो किसानों को सड़क पर उतरने को बाध्य न होना पड़ता।
डा॰ गिरीश ने कहाकि उन्नाव के किसानों को क्या पता था कि जिस सरकार को वे अपनी सरकार समझते हैं वह उनके साथ कश्मीरियों जैसा वर्ताव करेगी। पुलिसजनों को भी शायद ही आभास रहा हो कि अपने हुक्मरानों के आदेश पर वे अपने जिन किसान भाइयों से दरपेश हैं वे आक्रोश में उनके लिये पत्थर उठा लेंगे।
भाकपा राज्य सचिव ने सरकार से मांग की किसानों को वार्ता कर संतुष्ट करे और वेवजह बल प्रयोग से बाज आये।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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शनिवार, 9 नवंबर 2019

CPI, U.P. on Ayodhya Verdict


प्रकाशनार्थ
अयोध्या फैसले पर भाकपा उत्तर प्रदेश का बयान

लखनऊ- 9 नवंबर 2019, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय जिसे कि संविधान द्वारा विवाद निस्तारण की सर्वोच्च संस्था का दर्जा दिया है, ने लंबे समय से लंबित अयोध्या विवाद पर अपना फैसला सुना दिया है। इस फैसले से दशकों से लंबित एक कानूनी विवाद का पटाक्षेप होगया है।
सभी आस्थाओं को समान बताते हुये सम्मानित सर्वोच्च अदालत ने यह संतुलित और स्वीकार्य फैसला दिया है। इसे नीति, न्याय और धर्मनिरपेक्षता के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिये। इसे किसी भी पार्टी, पक्ष और वादी की जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिये। किसी को भी भड़कावे की किसी भी कार्यवाही से बचना चाहिये।
भाकपा उत्तर प्रदेश रेखांकित करती है कि फैसला आने के बाद पूरा दिन बीत जाने के बाद देश और प्रदेश से किसी अप्रिय वारदात की कोई सूचना नहीं मिली है। यह मेल मिलाप की हमारी साझा विरासत और सन्स्क्रति की देन है। पार्टी सभी से अपील करती है कि वे आगे भी शांति और सद्भाव बनाये रखें।
भाकपा फैसले का गहनता से अध्ययन करेगी और भविष्य में उसके प्रभावों पर विचार करेगी।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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सोमवार, 4 नवंबर 2019

CPI Demands Resignation of Power Minister


प्रकाशनार्थ
भाकपा राज्य कार्यकारिणी की बैठक संपन्न
ऊर्जा मंत्री को हटाये जाने की मांग की
आंदोलन संबंधी कई निर्णय लिये गये
लखनऊ- 4 नवंबर 2019, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य कार्यकारिणी ने यूपी पावर कोरपोरेशन के कर्मचारियों के भविष्यनिधि के धन के निवेश में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार को गंभीरता से लेते हुये इसके लिये राज्य सरकार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।
यहाँ संपन्न भाकपा राज्य कार्यकारिणी की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि भ्रष्टाचार का खुलासा होने पर कुछ अधिकारियों की गिरफ्तारी, सीबीआई जांच की सिफ़ारिश अथवा पिछली सरकार पर आरोप लगा कर योगी सरकार भ्रष्टाचार के इन आरोपों से मुक्त नहीं हो सकती। यहाँ गंभीर सवाल यह उठता है कि मौजूदा सरकार में ढाई साल से यह घोटाला चल रहा था और सरकार खामोश थी। अपनी इस खामोशी का जबाव योगी सरकार को देना ही होगा।
भाकपा ने मांग की कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री को तत्काल हटाया जाना चाहिये। उनके पद पर रहते किसी भी एजेंसी से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। सीबीआई से भी नहीं जो कि भाजपा सरकार के पिंजड़े का तोता बनी हुयी है।
भाकपा राज्य कार्यकारिणी ने इस सवाल को जनता की अदालत में लेजाने का निर्णय भी लिया है। पूरे नवंबर महीने जिलों में पंचायत- बार्ड स्तर से शुरू कर जिला स्तर तक सभाएं, जागरूकता मार्च, हस्ताक्षर अभियान तथा धरने और प्रदर्शन कर ऊर्जा मंत्री को बर्खास्त करने, सभी दोषियों को कठोर सजा दिलाने, कर्मचारियों के धन को उन्हें मिलने की गारंटी करने और उत्तर प्रदेश में हर सरकारी विभाग में फैले अपार भ्रष्टाचार से जनता को निजात दिलाने की मांग की जायेगी।
इसके अतिरिक्त बिजली की बढ़ी दरें कम करने, बिजली विभाग द्वारा अतिरिक्त सीक्यौरिटी के नाम पर बसूली जारही भारी धनराशि की बसूली पर रोक लगाने, राशन प्रणाली को पूर्व की तरह सर्व सुलभ बनाने, महंगाई पर लगाम लगाने, तमाम विभागों में खाली पड़ी जगहों पर भर्ती करने, मनरेगा के तहत काम देने, किसानों की एकमुश्त कर्जमाफी व उन्हें फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिलाने, कानून व्यवस्था दुरुस्त करने तथा दलितों, महिलाओं और सभी कमजोर तबकों पर होरहे अत्याचारों को रोके जाने समेत स्थानीय सवालो को भी उठाया जायेगा
राज्य कार्यकारिणी ने राम मन्दिर- बाबरी मस्जिद विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अगले सप्ताह संभावित फैसले को द्रष्टिगत रखते हुये राज्य सरकार से कानून व्यवस्था बनाये रखने को कड़े कदम उठाने की मांग की है। अभी से इस बात पर ध्यान देने की मांग की है कि परंपरागत दबंग सांप्रदायिक तत्व अशांति फैलाने के अपने षडयंत्रों में आम लोगों को न फंसा लें। भाकपा ने रेखांकित किया कि आम लोग केन्द्र सरकार की आर्थिक नीतियों और तानाशाहीपूर्ण कारगुजारियों से व्यथित हैं और किसी पचड़े में पड़ना नहीं चाहते। परंतु उनकी इन गंभीर समस्याओं से ध्यान हटाने को सरकार समर्थक तत्व किसी भी हद तक जा सकते हैं। भाकपा ने अपने सभी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से आग्रह किया है कि वो चौकसी बरतें और भाईचारा बनाये रखने को हर जन- प्रयास करें।
भाकपा राज्य कार्यकारिणी ने अपने शीर्षस्थ और संघर्षशील नेता कामरेड गुरुदास दासगुप्ता के निधन पर शोक व्यक्त कर उन्हें श्रध्दांजलि अर्पित की। संसदीय पटल से उनके द्वारा जनता के हित में की गयी कार्यवाहियों और बेहद विपरीत दौर में देश के ट्रेड यूनियन आंदोलन को पुनः खड़ा करने के उनके प्रयासों को जनता के बीच लेजाने का निर्णय भी राज्य कार्यकारिणी ने लिया है। इसके लिये पूरे नवंबर माह जिलों में श्रध्दांजलि सभाएं आयोजित की जाएंगीं जिनमें सभी मजदूर कर्मचारी संगठनो, सामाजिक संगठनों और राजनैतिक दलों और संघर्षशील व्यक्तियों को भी आमंत्रित किया जायेगा।
बैठक में राजनैतिक एवं चुनाव समीक्षा रिपोर्ट राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने प्रस्तुत की। सहसचिव कामरेड अरविन्दराज स्वरूप ने सदस्यता नवीनीकरण आदि सांगठनिक सवालों पर रिपोर्ट प्रस्तुत की। बैठक की अध्यक्षता कामरेड गफ्फार अब्बास ( एडवोकेट ) मथुरा ने की।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश  

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बुधवार, 30 अक्तूबर 2019

CPI Condemned death in Police custody in Amethi District.


अमेठी में पुलिस हिरासत में मौत की भाकपा ने निन्दा की

प्रदेश सरकार से नैतिक ज़िम्मेदारी स्वीकारने की मांग की


लखनऊ- 30 अक्तूबर 2019, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने जनपद अमेठी के थाने में पुलिस हिरासत में एक युवक की मौत/ हत्या की कठोर शब्दों में भर्त्सना की है। पार्टी ने दोषियों को चिन्हित कर उन्हें कड़ी सजा दिलाने की मांग की है।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे से टीवी चेनलों पर  “ अमन चैन के ढाई साल “ का अखंड कीर्तन प्रसारित कराने वाली भाजपा सरकार के हाथ से कानून व्यवस्था फिसल चुकी है और प्रदेश में हर किस्म के अपराधों की बाढ़ आई हुयी है। पुलिस अपराधों को रोक नहीं पारही परन्तु उस पर एक के बाद एक हिरासत में हत्याओं के आरोप लग रहे हैं। अभी कुछ ही दिन पहले जनपद हापुड़ के पिलखुआ थाने में पुलिसकर्मियों ने एक व्यक्ति की पीट पीट कर हत्या कर दी थी।
मुख्यमंत्री जी को अपराधों की बाढ़ और पुलिस द्वारा कानून हाथ में लेने की घटनाओं की नैतिक ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए। यह उत्तर प्रदेश है, जम्मू कश्मीर नहीं कि मारे गए लोगों को आतंकवादी बता कर टरकाया जासके। पुलिस हिरासत में हुयी मौत/ हत्या के लिये किसी मुसलमान को जिम्मेदार ठहरा कर भी नहीं बचा जा सकता है। ये ऐसी हत्याएं हैं जिनकी ज़िम्मेदारी से सरकार बच नहीं सकती।
भाकपा ने पीढ़ित परिवार को मुआबजा दिये जाने की मांग भी की है।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

  

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रविवार, 13 अक्तूबर 2019

Jazia Tex by UP Govt. on Electricity consumer


प्रकाशनार्थ एवं प्रसारणार्थ-

सीक्यौरिटी के नाम पर विद्युत उपभोक्ताओं पर भारी आर्थिक बोझ लादने के उत्तर प्रदेश सरकार के कदम की भाकपा ने कड़े शब्दों में भर्त्सना की।

आर्थिक मंदी और इस सवाल पर 16 अक्तूबर को विरोध प्रदर्शन का किया आह्वान।

 लखनऊ- 13 अक्तूबर 2019, हाल ही में बिजली की कीमतों में 12 प्रतिशत से अधिक व्रध्दि का भार उपभोक्ताओं पर थोपने से भी जब उत्तर प्रदेश की भगवा सरकार का पेट नहीं भरा तो उसने दीपावली के अवसर पर विद्युत उपभोक्ताओं को प्रताड़ित करने का एक और तरीका ढूंढ लिया है। इसके तहत उपभोक्ताओं पर जो आर्थिक भार लादा जारहा है उससे उपभोक्ता कराह उठेंगे।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने एक बयान में खुलासा किया कि विद्युत विभाग द्वारा उपभोक्ताओं को नोटिस भेज कर वित्त वर्ष 2019- 20 के लिये अतिरिक्त “सीक्यौरिटी राशि” की मांग की जारही। जनता की निगाहों से ओझल किन्ही मनमाने नियमों के तहत यह राशि उपभोक्ताओं द्वारा गत वर्ष उपभोग की गयी बिजली की औसत 45 दिन की कीमत के बरावर मांगी जारही है।
यदि किसी उपभोता का गत वर्ष 45 दिनों का औसत बिल 10,000 रुपये था तो उसे इस अग्रिम सीक्यौरिटी की मद में 10,000 रुपये जमा करने होंगे। इसी तरह यदि यह राशि 5, 4, 2 अथवा 1 हजार रही होगी तो इतनी ही राशि अब जमा करनी होगी। यदि किसी उपभोक्ता का गत वर्ष 45 दिन का औसत बिल 15, 20 अथवा 25 हजार रहा होगा तो उसे इतनी राशि इस मद में जमा करनी होगी।  यह धनराशि नोटिस जारी होने के 30 दिनों के भीतर जमा कर विद्युत विभाग को लिखित रूप में अवगत कराना होगा। ऐसा न करने पर बिजली कनेक्सन काट दिया जायेगा।
अभूतपूर्व आर्थिक मंदी की मार से व्यथित लोगों पर जब विद्युत विभाग के ये नोटिस पहुँचने शुरू हुये तो उनके होश उड़ गए। उन्हें अपनी दीवाली अंधेरी नजर आने लगी। मध्यमवर्ग और गरीब वर्ग इस पेनल्टी की कल्पना मात्र से सिहर उठा है। उसे अपने पुश्तेनी कनेक्सन पर अलग से यह भारी राशि जमा करने का कोई औचित्य नजर नहीं आरहा। वह इसे सरकार द्वारा जनता की खुली लूट मान रहा है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य काउंसिल इस भारी भार को विद्युत उपभोक्ताओं पर थोपने के राज्य सरकार के कदम की कड़े शब्दों में निन्दा करती है। अभी अभी लागू हुयी महंगी दरों से ही उपभोक्ता हलकान हैं और अब इस अतिरिक्त भार की मार को वे सहन नहीं कर पाएंगे। जैसे जैसे ये नोटिस उपभोक्ताओं पर पहुँच रहे हैं उनकी बेचैनी बढ़ती जारही है। कभी भी यह बेचैनी आक्रोश का रूप ले सकती है।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि आए दिन कटौती और नित रोज होरहे फाल्ट्स से उपभोक्ता पहले ही परेशान हैं। उनके ऊपर हाल ही में कीमतें बढ़ा कर भारी बोझ लाद दिया और अब सीक्यौरिटी के नाम पर यह चोट की जारही है। लाखों दीप जला कर दीवाली मनाने वाले मुख्यमंत्री को जनता की दीवाली में अंधेरा घोलने वाली इस कार्यवाही को तत्काल रद्द करना चाहिये। भाकपा सरकार की इस कारगुजारी का पुरजोर विरोध करती है और इसे फौरन रद्द करने की मांग करती है।  
भाकपा ने अपनी समस्त जिला इकाइयों से आग्रह किया है कि वे 16 अकूबर को सभी वामपंथी दलों के साथ मिल कर सरकार द्वारा थोपी जारही इस अनैतिक वसूली के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करें। प्रदर्शन के दौरान नौजवानों, किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों, व्यापारियों  और आर्थिक मंदी से पीढ़ित अन्य तबकों की समस्याओं को भी उठाया जाये।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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शनिवार, 5 अक्तूबर 2019

CPI UP Appeal for Cooperation


उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव 2019-
आर्थिक और अन्य सहयोग हेतु भाकपा राज्य काउंसिल की अपील।

प्रिय मित्रो,
उत्तर प्रदेश विधान सभा के 21 अक्तूबर 2019 को होने जारहे उप चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ( CPI ) 5 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। ये सीटें हैं बलहा ( बहराइच ), घोसी ( मऊ ), जलालपुर ( अंबेडकर नगर ), प्रतापगढ़ तथा मानिकपुर ( चित्रकूट )। अभी 23 सितंबर को संपन्न हमीरपुर विधान सभा के चुनाव में भी पार्टी ने प्रत्याशी उतारा था और तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सम्मानजनक वोट हासिल किये थे।
अनेक कठिन परिस्थितियों के बावजूद भाकपा ने प्रदेश में 5 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का साहस दिखाया है। आप सब भलीभाँति अवगत हैं कि देश और उत्तर प्रदेश में भाकपा सांप्रदायिक, फासीवादी, आर्थिक वरवादी की ओर धकेलने वाली ताकतों के खिलाफ जम कर संघर्ष कर रही है। वामपंथी एकता के लिये जी जान से जुटी भाकपा महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, दलितों- अल्पसंख्यकों- महिलाओं और अन्य सभी कमजोर वर्गों पर होरहे जुल्मों के खिलाफ मजबूती से आवाज उठा रही है। जाति का मुखौटा लगा कर पूंजीवादी शोषण पर पर्दा डालने वाली पार्टियों को भी भाकपा बेनकाव करने के अभियान में जुटी है।
देश और उत्तर प्रदेश में विपक्ष की कमजोरी से फासीवादी ताकतों का मनोबल सातवें आसमान पर है। ऐसे में विधान सभा के पटल पर भाकपा की अनुपस्थिति सभी लोकतन्त्र पसन्द व्यक्तियों और शक्तियों को अखर रही है। अतएव भाकपा जो कि संसद से सड़क तक संघर्ष करती है का प्रतिनिधित्व विधान सभा में अति आवश्यक है। इसी उद्देश्य से हम उपचुनावों में 5 सीटों पर चुनाव में उतरे हैं।
इन पांच विधानसभा क्षेत्रों की जनता से अपील है कि वे तन मन धन से भाकपा प्रत्याशियों की मदद करें और उन्हें भारी बहुमत से विधान सभा में पहुंचायेँ।
प्रदेश भर की भाकपा जिला कमेटियों, पार्टी कार्यकर्ताओं, सहयोगी संगठनों और और शुभचिंतकों से भी हमारा अनुरोध है कि लोकतन्त्र बचाने के इस जनयुध्द में हर तरह से सहयोग प्रदान करें। आपसे जल्द से जल्द और तत्काल आर्थिक सहायता की भी दरकार है।

आप अपना आर्थिक योगदान भाकपा के राज्य मुख्यालय, 22 कैसर बाग लखनऊ में किसी भी समय जमा कर सकते हैं।

अथवा

भाकपा राज्य काउंसिल के खाते में भी जमा कर सकते हैं।

खाते का विवरण निम्न प्रकार है-

Communist Party of India UP State Council
A/C No 353302010017252
Union Bank of India
Awadh Clarks Branch
Lucknow
IFS Code:UBIN 0535338

आपके शीघ्र समुचित सहयोग की प्रतीक्षा में

डा॰ गिरीश, सचिव

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल

22, कैसर बाग, लखनऊ- 226001
Mob. No. 9412173664
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CPI, UP Appeals for election fund and other cooperation in assembly Bypoll


उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव 2019-
आर्थिक और अन्य सहयोग हेतु भाकपा राज्य काउंसिल की अपील।

प्रिय मित्रो,
उत्तर प्रदेश विधान सभा के 21 अक्तूबर 2019 को होने जारहे उप चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ( CPI ) 5 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। ये सीटें हैं बलहा ( बहराइच ), घोसी ( मऊ ), जलालपुर ( अंबेडकर नगर ), प्रतापगढ़ तथा मानिकपुर ( चित्रकूट )। अभी 23 सितंबर को संपन्न हमीरपुर विधान सभा के चुनाव में भी पार्टी ने प्रत्याशी उतारा था और तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सम्मानजनक वोट हासिल किये थे।
अनेक कठिन परिस्थितियों के बावजूद भाकपा ने प्रदेश में 5 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का साहस दिखाया है। आप सब भलीभाँति अवगत हैं कि देश और उत्तर प्रदेश में भाकपा सांप्रदायिक, फासीवादी, आर्थिक वरवादी की ओर धकेलने वाली ताकतों के खिलाफ जम कर संघर्ष कर रही है। वामपंथी एकता के लिये जी जान से जुटी भाकपा महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, दलितों- अल्पसंख्यकों- महिलाओं और अन्य सभी कमजोर वर्गों पर होरहे जुल्मों के खिलाफ मजबूती से आवाज उठा रही है। जाति का मुखौटा लगा कर पूंजीवादी शोषण पर पर्दा डालने वाली पार्टियों को भी भाकपा बेनकाव करने के अभियान में जुटी है।
देश और उत्तर प्रदेश में विपक्ष की कमजोरी से फासीवादी ताकतों का मनोबल सातवें आसमान पर है। ऐसे में विधान सभा के पटल पर भाकपा की अनुपस्थिति सभी लोकतन्त्र पसन्द व्यक्तियों और शक्तियों को अखर रही है। अतएव भाकपा जो कि संसद से सड़क तक संघर्ष करती है का प्रतिनिधित्व विधान सभा में अति आवश्यक है। इसी उद्देश्य से हम उपचुनावों में 5 सीटों पर चुनाव में उतरे हैं।
इन पांच विधानसभा क्षेत्रों की जनता से अपील है कि वे तन मन धन से भाकपा प्रत्याशियों की मदद करें और उन्हें भारी बहुमत से विधान सभा में पहुंचायेँ।
प्रदेश भर की भाकपा जिला कमेटियों, पार्टी कार्यकर्ताओं, सहयोगी संगठनों और और शुभचिंतकों से भी हमारा अनुरोध है कि लोकतन्त्र बचाने के इस जनयुध्द में हर तरह से सहयोग प्रदान करें। आपसे जल्द से जल्द और तत्काल आर्थिक सहायता की भी दरकार है।
आप अपना आर्थिक योगदान भाकपा के राज्य मुख्यालय, 22 कैसर बाग लखनऊ में किसी भी समय जमा कर सकते हैं।
अथवा
भाकपा राज्य काउंसिल के खाते में भी जमा कर सकते हैं।
खाते का विवरण निम्न प्रकार है-
Communist Party of India UP State Council
A/C No 353302010017252
Union Bank of India
Awadh Clarks Branch
Lucknow
IFS Code:UBIN 0535338
आपके शीघ्र समुचित सहयोग की प्रतीक्षा में
डा॰ गिरीश, सचिव
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल
22, कैसर बाग, लखनऊ- 226001

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आर्थिक और अन्य सहयोग हेतु भाकपा राज्य काउंसिल की अपील।

प्रिय मित्रो,
उत्तर प्रदेश विधान सभा के 21 अक्तूबर 2019 को होने जारहे उप चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ( CPI ) 5 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। ये सीटें हैं बलहा ( बहराइच ), घोसी ( मऊ ), जलालपुर ( अंबेडकर नगर ), प्रतापगढ़ तथा मानिकपुर ( चित्रकूट )। अभी 23 सितंबर को संपन्न हमीरपुर विधान सभा के चुनाव में भी पार्टी ने प्रत्याशी उतारा था और तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सम्मानजनक वोट हासिल किये थे।
अनेक कठिन परिस्थितियों के बावजूद भाकपा ने प्रदेश में 5 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का साहस दिखाया है। आप सब भलीभाँति अवगत हैं कि देश और उत्तर प्रदेश में भाकपा सांप्रदायिक, फासीवादी, आर्थिक वरवादी की ओर धकेलने वाली ताकतों के खिलाफ जम कर संघर्ष कर रही है। वामपंथी एकता के लिये जी जान से जुटी भाकपा महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, दलितों- अल्पसंख्यकों- महिलाओं और अन्य सभी कमजोर वर्गों पर होरहे जुल्मों के खिलाफ मजबूती से आवाज उठा रही है। जाति का मुखौटा लगा कर पूंजीवादी शोषण पर पर्दा डालने वाली पार्टियों को भी भाकपा बेनकाव करने के अभियान में जुटी है।
देश और उत्तर प्रदेश में विपक्ष की कमजोरी से फासीवादी ताकतों का मनोबल सातवें आसमान पर है। ऐसे में विधान सभा के पटल पर भाकपा की अनुपस्थिति सभी लोकतन्त्र पसन्द व्यक्तियों और शक्तियों को अखर रही है। अतएव भाकपा जो कि संसद से सड़क तक संघर्ष करती है का प्रतिनिधित्व विधान सभा में अति आवश्यक है। इसी उद्देश्य से हम उपचुनावों में 5 सीटों पर चुनाव में उतरे हैं।
इन पांच विधानसभा क्षेत्रों की जनता से अपील है कि वे तन मन धन से भाकपा प्रत्याशियों की मदद करें और उन्हें भारी बहुमत से विधान सभा में पहुंचायेँ।
प्रदेश भर की भाकपा जिला कमेटियों, पार्टी कार्यकर्ताओं, सहयोगी संगठनों और और शुभचिंतकों से भी हमारा अनुरोध है कि लोकतन्त्र बचाने के इस जनयुध्द में हर तरह से सहयोग प्रदान करें। आपसे जल्द से जल्द और तत्काल आर्थिक सहायता की भी दरकार है।
आप अपना आर्थिक योगदान भाकपा के राज्य मुख्यालय, 22 कैसर बाग लखनऊ में किसी भी समय जमा कर सकते हैं।
अथवा
भाकपा राज्य काउंसिल के खाते में भी जमा कर सकते हैं।
खाते का विवरण निम्न प्रकार है-
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22, कैसर बाग, लखनऊ- 226001

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आर्थिक और अन्य सहयोग हेतु भाकपा राज्य काउंसिल की अपील।

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उत्तर प्रदेश विधान सभा के 21 अक्तूबर 2019 को होने जारहे उप चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ( CPI ) 5 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। ये सीटें हैं बलहा ( बहराइच ), घोसी ( मऊ ), जलालपुर ( अंबेडकर नगर ), प्रतापगढ़ तथा मानिकपुर ( चित्रकूट )। अभी 23 सितंबर को संपन्न हमीरपुर विधान सभा के चुनाव में भी पार्टी ने प्रत्याशी उतारा था और तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सम्मानजनक वोट हासिल किये थे।
अनेक कठिन परिस्थितियों के बावजूद भाकपा ने प्रदेश में 5 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का साहस दिखाया है। आप सब भलीभाँति अवगत हैं कि देश और उत्तर प्रदेश में भाकपा सांप्रदायिक, फासीवादी, आर्थिक वरवादी की ओर धकेलने वाली ताकतों के खिलाफ जम कर संघर्ष कर रही है। वामपंथी एकता के लिये जी जान से जुटी भाकपा महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, दलितों- अल्पसंख्यकों- महिलाओं और अन्य सभी कमजोर वर्गों पर होरहे जुल्मों के खिलाफ मजबूती से आवाज उठा रही है। जाति का मुखौटा लगा कर पूंजीवादी शोषण पर पर्दा डालने वाली पार्टियों को भी भाकपा बेनकाव करने के अभियान में जुटी है।
देश और उत्तर प्रदेश में विपक्ष की कमजोरी से फासीवादी ताकतों का मनोबल सातवें आसमान पर है। ऐसे में विधान सभा के पटल पर भाकपा की अनुपस्थिति सभी लोकतन्त्र पसन्द व्यक्तियों और शक्तियों को अखर रही है। अतएव भाकपा जो कि संसद से सड़क तक संघर्ष करती है का प्रतिनिधित्व विधान सभा में अति आवश्यक है। इसी उद्देश्य से हम उपचुनावों में 5 सीटों पर चुनाव में उतरे हैं।
इन पांच विधानसभा क्षेत्रों की जनता से अपील है कि वे तन मन धन से भाकपा प्रत्याशियों की मदद करें और उन्हें भारी बहुमत से विधान सभा में पहुंचायेँ।
प्रदेश भर की भाकपा जिला कमेटियों, पार्टी कार्यकर्ताओं, सहयोगी संगठनों और और शुभचिंतकों से भी हमारा अनुरोध है कि लोकतन्त्र बचाने के इस जनयुध्द में हर तरह से सहयोग प्रदान करें। आपसे जल्द से जल्द और तत्काल आर्थिक सहायता की भी दरकार है।
आप अपना आर्थिक योगदान भाकपा के राज्य मुख्यालय, 22 कैसर बाग लखनऊ में किसी भी समय जमा कर सकते हैं।
अथवा
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Communist Party of India UP State Council
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आर्थिक और अन्य सहयोग हेतु भाकपा राज्य काउंसिल की अपील।

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उत्तर प्रदेश विधान सभा के 21 अक्तूबर 2019 को होने जारहे उप चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ( CPI ) 5 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। ये सीटें हैं बलहा ( बहराइच ), घोसी ( मऊ ), जलालपुर ( अंबेडकर नगर ), प्रतापगढ़ तथा मानिकपुर ( चित्रकूट )। अभी 23 सितंबर को संपन्न हमीरपुर विधान सभा के चुनाव में भी पार्टी ने प्रत्याशी उतारा था और तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सम्मानजनक वोट हासिल किये थे।
अनेक कठिन परिस्थितियों के बावजूद भाकपा ने प्रदेश में 5 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का साहस दिखाया है। आप सब भलीभाँति अवगत हैं कि देश और उत्तर प्रदेश में भाकपा सांप्रदायिक, फासीवादी, आर्थिक वरवादी की ओर धकेलने वाली ताकतों के खिलाफ जम कर संघर्ष कर रही है। वामपंथी एकता के लिये जी जान से जुटी भाकपा महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, दलितों- अल्पसंख्यकों- महिलाओं और अन्य सभी कमजोर वर्गों पर होरहे जुल्मों के खिलाफ मजबूती से आवाज उठा रही है। जाति का मुखौटा लगा कर पूंजीवादी शोषण पर पर्दा डालने वाली पार्टियों को भी भाकपा बेनकाव करने के अभियान में जुटी है।
देश और उत्तर प्रदेश में विपक्ष की कमजोरी से फासीवादी ताकतों का मनोबल सातवें आसमान पर है। ऐसे में विधान सभा के पटल पर भाकपा की अनुपस्थिति सभी लोकतन्त्र पसन्द व्यक्तियों और शक्तियों को अखर रही है। अतएव भाकपा जो कि संसद से सड़क तक संघर्ष करती है का प्रतिनिधित्व विधान सभा में अति आवश्यक है। इसी उद्देश्य से हम उपचुनावों में 5 सीटों पर चुनाव में उतरे हैं।
इन पांच विधानसभा क्षेत्रों की जनता से अपील है कि वे तन मन धन से भाकपा प्रत्याशियों की मदद करें और उन्हें भारी बहुमत से विधान सभा में पहुंचायेँ।
प्रदेश भर की भाकपा जिला कमेटियों, पार्टी कार्यकर्ताओं, सहयोगी संगठनों और और शुभचिंतकों से भी हमारा अनुरोध है कि लोकतन्त्र बचाने के इस जनयुध्द में हर तरह से सहयोग प्रदान करें। आपसे जल्द से जल्द और तत्काल आर्थिक सहायता की भी दरकार है।
आप अपना आर्थिक योगदान भाकपा के राज्य मुख्यालय, 22 कैसर बाग लखनऊ में किसी भी समय जमा कर सकते हैं।
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भाकपा राज्य काउंसिल के खाते में भी जमा कर सकते हैं।
खाते का विवरण निम्न प्रकार है-
Communist Party of India UP State Council
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अनेक कठिन परिस्थितियों के बावजूद भाकपा ने प्रदेश में 5 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का साहस दिखाया है। आप सब भलीभाँति अवगत हैं कि देश और उत्तर प्रदेश में भाकपा सांप्रदायिक, फासीवादी, आर्थिक वरवादी की ओर धकेलने वाली ताकतों के खिलाफ जम कर संघर्ष कर रही है। वामपंथी एकता के लिये जी जान से जुटी भाकपा महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, दलितों- अल्पसंख्यकों- महिलाओं और अन्य सभी कमजोर वर्गों पर होरहे जुल्मों के खिलाफ मजबूती से आवाज उठा रही है। जाति का मुखौटा लगा कर पूंजीवादी शोषण पर पर्दा डालने वाली पार्टियों को भी भाकपा बेनकाव करने के अभियान में जुटी है।
देश और उत्तर प्रदेश में विपक्ष की कमजोरी से फासीवादी ताकतों का मनोबल सातवें आसमान पर है। ऐसे में विधान सभा के पटल पर भाकपा की अनुपस्थिति सभी लोकतन्त्र पसन्द व्यक्तियों और शक्तियों को अखर रही है। अतएव भाकपा जो कि संसद से सड़क तक संघर्ष करती है का प्रतिनिधित्व विधान सभा में अति आवश्यक है। इसी उद्देश्य से हम उपचुनावों में 5 सीटों पर चुनाव में उतरे हैं।
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प्रदेश भर की भाकपा जिला कमेटियों, पार्टी कार्यकर्ताओं, सहयोगी संगठनों और और शुभचिंतकों से भी हमारा अनुरोध है कि लोकतन्त्र बचाने के इस जनयुध्द में हर तरह से सहयोग प्रदान करें। आपसे जल्द से जल्द और तत्काल आर्थिक सहायता की भी दरकार है।
आप अपना आर्थिक योगदान भाकपा के राज्य मुख्यालय, 22 कैसर बाग लखनऊ में किसी भी समय जमा कर सकते हैं।
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