भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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शनिवार, 1 अगस्त 2020

भड़काऊ विज्ञापन पर भड़की भड़की भाकपा

डा॰ अय्यूब और अखबार की कारगुजारी निंदनीय

भाकपा ने माकूल दफाओं में कार्यवाही की मांग की

लखनऊ- 1 अगस्त 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने पीस पार्टी के अध्यक्ष मोहम्मद अय्यूब द्वारा जारी एवं भाजपा के नजदीकी समाचार समूह के उर्दू अखबार में प्रकाशित भड़काऊ और असंवैधानिक विज्ञापन की कड़े शब्दों में निन्दा की है। पार्टी ने अय्यूब और अखबार दोनों के खिलाफ उचित दफाओं में अभियोग चलाने की मांग की है।
एक प्रेस बयान में भाकपा ने कहा कि डा॰ अय्यूब ने भड़कावेपूर्ण एवं असंवैधानिक विज्ञापन जारी किया है। इस विज्ञापन में पं॰ जवाहर लाल नेहरू, डा॰ भीमराव अंबेडकर एवं श्री राम मनोहर लोहिया के लिये भी आपत्तिजनक एवं अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया है। यह असहनीय और निंदनीय है।
यह और अधिक आश्चर्यजनक और आपत्तिजनक है कि इस विज्ञापन को संघ और भाजपा के अंध समर्थक समाचारपत्र समूह के उर्दू अखबार ने प्रकाशित किया है। मोहम्मद अय्यूब को गिरफ़्तार कर जेल भेजा जा चुका है, मगर अभी अखबार के विरूध्द कोई कार्यवाही नहीं की है। जबकि विज्ञापन में निहित दुर्भावना को प्रसारित और प्रचारित तो अखबारों ने ही किया है।
भाकपा ने कहा कि अय्यूब की यह कारगुजारी भाजपा के एजेंडे को ही सिंचित करती है। भाजपा निरंतर न केवल संविधान को चुनौती दे रही है अपितु धार्मिक भावनाओं को भी भड़काने की क्रियाएं कर रही है। भाजपा सरकार कानून व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, कोरोना से निजात दिलाने, रोजगार दिलाने और गरीबों किसानों कामगारों को राहत दिलाने जैसे तमाम मुद्दों में विफल होचुकी है और इसीलिए वह इस प्रकार के कामों को अंजाम दे रही है। अय्यूब जैसों की कारगुजारी इनसे ध्यान बँटाती है और उससे भाजपा को मदद मिलती है।
भाकपा ने मोहम्मद अय्यूब पर माकूल दफ़ाएं लगाने और वैसी ही दफाओं में प्रकाशकों पर भी कार्यवाही करने की मांग की है। वरना इसे एकतरफा कार्यवाही ही माना जायेगा।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश  

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मंगलवार, 28 जुलाई 2020

CPI on Rising Crime in UP


अपराधों की बाढ़ पर भाकपा ने गहरी चिन्ता जतायी
4 अगस्त को वामपंथी दल प्रदेश भर में प्रदर्शन करेंगे
लखनऊ- 28 जुलाई 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने उत्तर प्रदेश में ताबड़तोड़ आपराधिक वारदातों पर गहरी चिन्ता जतायी है। पिछले 24 घंटे में ही प्रदेश में लगभग एक सैकड़ा संगीन वारदातों ने प्रदेश के नागरिकों को पूरी तरह झकझोर के रख दिया है। भाकपा ने कहाकि राज्य सरकार शासन का अधिकार खो बैठी है और अब उसे त्यागपत्र दे देना चाहिये।  
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाक के नीचे गोरखपुर में अपराधियों द्वारा व्यवसायी के पुत्र का अपहरण कर हत्या कर दी गयी। कानपुर देहात में भी एक अपह्रत व्यक्ति की हत्या कर दी गयी। गाजियाबाद में दिन दहाड़े एक परिवार को बंधक बना लूट की गयी। नोएडा में कार सवारों ने फीरोजाबाद के व्यवसायी से नकदी लूट ली। दर्जनों महिलाओं की हत्या कर दी गयी है। दर्जनों कत्ल, दर्जनों आत्महत्यायें और कई दर्जन फ़ौजदारियाँ प्रदेश में पिछले 24 घंटों में हुयी हैं। कई जगह तो पुलिस पर भी हमले हुये हैं।
इन वारदातों से प्रदेश सहम गया है। सामान्य नागरिक अपने को असुरक्षित समझने लगे हैं। अपराधों को रोक पाने में राज्य सरकार की विफलता से वे हैरत में हैं। अपराधों से निपटने का योगी सरकार का पैटर्न फ्लाप होगया है। “ कड़ी कार्यवाही के निर्देश दे दिये गये हैं, अफसरों का तबादला कर दिया गया है, मुआबजे की घोषणा कर दी गयी है” आदि जुमलों से अब जनता ऊब चुकी है।
अपराधों की बाढ़ से बदहवास सरकार अब केवल अंधाधुंध एंकाउंटर्स और मनमानी गिरफ्तारियों से अपराधों पर रोक लगाना चाहती है। जबकि भाकपा की द्रढ़ राय है कि भारी पैमाने पर बेरोजगारी के रहते इस समस्या पर काबू नहीं पाया जा सकता। प्रदेश में पहले से ही व्याप्त बेरोजगारी कोविड संकट में और बढ़ गयी है। रोज ब रोज रोजगार देने की मुख्यमंत्री की घोषणायेँ कागजी साबित हुयी हैं। रोजगार छिनने से हताश और पीढ़ित तमाम लोग आत्महत्यायें कर रहे हैं, रोजगार के लिये जान जोखिम में डाल कर अनेक प्रवासी वापस कार्यस्थल लौट रहे हैं और कई गुमराह तत्व अपराधों में लिप्त होरहे है। यदि सभी को रोजगार दे दिया जाये तो अपराधों की इस बाढ़ को बहुत हद तक थामा जा सकता है। लेकिन सरकार के पास रोजगार देने की कोई योजना नहीं है।

भाकपा द्वारा जारी प्रेस बयान में राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने की मांग और अन्य कई मांगों को लेकर वामपंथी दलों द्वारा 4 अगस्त को समूचे उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन कर आवाज उठायेंगे।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

Left Criticise Law & Order in UP



फिरौती के बावजूद अपह्रत संजीत यादव की हत्या राज्य सरकार की असफलता की द्योतक
वामदलों ने जताया दुख और आक्रोश, परिवार को फिरौती की वापसी और सहयोग राशि देने की मांग की
लखनऊ- 24 जुलाई 2020, उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी, भाकपा- माले एवं आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक ने कानपुर में लैब असिस्टेंट के अपहरण और  उसके परिवार से 30 लाख रुपये बसूलने के बावजूद उसकी हत्या पर गहरा आक्रोश एवं दुख व्यक्त किया है।
वामपंथी दलों ने कहा कि अभी गाजियाबाद में पत्रकार की हत्या की स्याह खबर की स्याही  सूखी भी न थी कि एक और जघन्य कांड होगया। एक गरीब परिवार द्वारा किसी तरह फिरौती की बड़ी धनराशि अदा करने के बाद भी अपह्रत संजीत यादव की हत्या कर दी गयी। एक दो नहीं पूरे 35 दिनों में पुलिस अपह्रत को बचा नहीं सकी।  अपहरण होने पर यदि पुलिस नाकाम रहती थी तो लोग फिरौती देकर अपनों को बचा लेते थे, लेकिन भाजपा के इस कथित रामराज्य में तो फिरौती की लंबी रकम देने के बाद भी जान- माल सुरक्षित नहीं है।
अपने प्रेस बयान में वामदलों ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के तमाम खोखले दाबों और मनमानी बहशियाना कार्यवाहियों के बावजूद उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था अस्त- व्यस्त- ध्वस्त होगयी है। हर दिन, हर पल एक से एक घिनौने और जघन्य अपराध होरहे हैं और 6 हजार से अधिक एंकाउंटर्स के बाद भी अपराधों में रत्ती भर कमी नहीं आयी। समस्या की जड़ कहीं और है और योगी सरकार गोलियां कहीं और दाग रही है।
वामदलों ने कहा कि अनेक समस्याओं के बोझ तले दब कर उत्तर प्रदेश की बहुमत जनता कराह उठी है। राज्य सरकार उनमें से किसी का भी निदान करने में विफल हो चुकी है। संपूर्णतः असफल सरकार शासन करने का नैतिक अधिकार खो बैठी है।
वामदलों ने मांग की कि संजीत यादव के सभी हत्यारों को एनएसए/ गैंगस्टर एक्ट में निरुध्द किया जाये, उसके परिवार को फिरौती वाले रुपये 30 लाख वापस कराये जायें, सरकार की विफलता के एवज में उसे 50 लाख दिये जायें तथा कानपुर के सारे पुलिस प्रशासन का ओवरहाल किया जाये।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश, माकपा के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा माले के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव एवं फारबर्ड ब्लाक के राज्य संयोजक अभिनव कुशवाह ने चेतावनी दी कि बिगड़े हालातों के खिलाफ वामदल आंदोलन को बाध्य होंगे। उन्होने यह भी बताया कि वामदल उत्तर प्रदेश के इन हालातों पर कल वर्चुअल बैठक कर आगे की रणनीति बनायेंगे।
डा॰ गिरीश

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बुधवार, 22 जुलाई 2020

CPI Condemns slain murder of Journalist: Demanded Resignation of UP Govt.




पत्रकार विक्रम जोशी की मौत पर भाकपा ने रोष जताया, सरकार से त्यागपत्र की मांग की

लखनऊ- 22 जुलाई 2020, गाजियाबाद के पत्रकार विक्रम जोशी की हत्या पर गहरा दुख और रोष जताते हुये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने राज्य सरकार से ज़िम्मेदारी लेने और मुख्यमंत्री के त्यागपत्र की मांग की है।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा ने कहा “ मुख्यमंत्री ने संज्ञान लिया है, कड़ी कार्यवाही के निर्देश दे दिये गये हैं, मुआबजे की घोषणा कर दी गयी है, फलां- फलां को सस्पेंड या तबादला कर दिया गया है, मार दो, ठोक दो “ मुख्यमंत्री द्वारा तीन साल से रोज ब रोज की जा रही घोषणाओं के प्रसारण से उत्तर प्रदेश की जनता तंग आ चुकी है। जनता परिणाम चाहती है और उत्तर प्रदेश सरकार परिणाम दे नहीं पा रही है।
म्रतक पत्रकार पुलिस को लगातार लिखित शिकायतें कर रहे थे, पर पुलिस अकर्मण्यता और अहमन्यता से ग्रसित थी। परिणाम स्वरूप पत्रकार पर जान लेवा हमला हो गया और उनकी दुखद मौत होगयी। हमले से लेकर मौत तक मुख्यमंत्री ने कोई संज्ञान नहीं लिया। पत्रकार का परिवार अनाथ होगया तो अब बड़ी बड़ी घोषणाएँ की जारही हैं। “ इन घोषणाओं को अपने पास रख लीजिये और विक्रम जोशी के परिवार को विक्रम जोशी लौटा दीजिये सम्मानित मुख्यमंत्री जी! “ भाकपा ने आक्रोश के साथ सवाल खड़ा किया है।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा- उत्तर प्रदेश में जंगल राज है। सरकार संरक्षित अपराधी हत्याओं को अंजाम दे रहे हैं, महिलाओं से बलात्कार और उनकी हत्याएं हो रही हैं, ठगी, लूट, छिनेती, अपहरण/ फिरौती और चोरियाँ आदि सरे आम जारी हैं। आपके खोखले दाबों  के बीच कोरोना के मरीज फुटपाथों पर दम तोड़ रहे हैं, अवसाद में लोग आत्महत्याएं कर रहे हैं आदि आदि।
पुलिस आम लोगों के प्रति क्रूर बनी हुयी है। लोगों को पीट रही है, जुर्माने बसूल रही है तथा झूठे मुकदमे दर्ज कर जेल पहुंचा रही है। आम आदमी की शिकायतों पर अमल नहीं किया जाता, जिसका दुष्परिणाम सभी के सामने है। रिश्वतख़ोरी और भ्रष्टाचार सातवें आसमान पर है। फर्जी एंकाउंटरों के जरिये सरकार और पुलिस अपनी ध्वस्त छवि को बचाने में जुटी है। पर जनता की रक्षा एंकाउंटर्स से नहीं होती, उसे सुरक्षा चाहिये, न्याय चाहिये।
भाकपा ने मांग की है कि पत्रकार के परिवार को बिकरू कांड में शहीद पुलिसकर्मियों के समकक्ष पावनायें दी जायें। हत्यारों को एनएसए में निरुध्द किया जाये तथा प्रदेश के सभी नागरिकों के जानमाल की सुरक्षा की जाये। जिम्मेदार अफसरों को दंडित किया जाये तथा व्याप्त अराजकता की सरकार ज़िम्मेदारी ले और त्यागपत्र दे।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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शनिवार, 18 जुलाई 2020

हिन्दुत्व की राजनीति गरीब विरोधी : भाकपा


वाराणसी में नेपाली मजदूर को प्रताड़ित करने वालों पर रासुका लगे
घटना से देश की प्रतिष्ठा को धक्का लगा, गरीबों में उपजा आक्रोश
पूर्व की शिकायतों पर कार्यवाही हुयी होती तो दुस्साहसिक घटना न होती 
लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने गत दिन वाराणसी में एक कथित हिंदूवादी संगठन द्वारा नेपाल के एक युवक के जबरिया मुंडन कराने, उसके सिर पर श्रीराम लिखने और उससे नारे लगवा कर वीडियो वायरल कराने की घटना की कठोर शब्दों में निन्दा की है। भाकपा ने इसे हिन्दुत्व के तालिबानियों की गरीब विरोधी और फासीवादी कार्यवाही करार दिया है। भाकपा ने इस कुक्रत्य को अंजाम देने वालों पर रासुका लगाने की मांग की है।
भाकपा ने कहा कि नेपाल के प्रधानमंत्री के अयोध्या संबंधी बयान से आस्थावानों को धक्का लगना स्वाभाविक है, और कई लोगों ने उसकी लोकतान्त्रिक आलोचना की है। बयान या घटनाओं पर विरोध प्रकट करना किसी का भी लोकतान्त्रिक अधिकार है। लेकिन बयान पर विरोध के नाम पर संबन्धित देश के किसी असहाय नागरिक का उत्पीड़न घोर निंदनीय है। यह घटना इसलिये भी पीड़ादायक है कि गरीब नेपाली लोग सहस्रो वर्षों से आजीविका के लिये भारत आते हैं और अत्यल्प पारिश्रमिक वाले कामों को वफादारी से अंजाम देते हैं। यह घटना इसलिये और पीड़ादायक है कि एक पड़ौसी देश के हिन्दू नागरिक के साथ प्रधानमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र और भारतीय संस्क्रति के प्रतीक नगर वाराणसी में हुयी है।
भाकपा ने आरोप लगाया कि एक नामनिहाद हिन्दू संगठन वाराणसी मे लगातार गैर कानूनी कार्यों में संलिप्त है। पिछले सप्ताहों में ही इसने वाराणसी में भाकपा कार्यालय के बोर्ड पर कीचड़ फेंकने की भड़कावे की कार्यवाही की, भाकपा कार्यालय एवं बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी ( BHU ) के मुख्य द्वारों पर उन्माद फैलाने वाले पोस्टर लगाये और लखनऊ में विधान सभा के सामने स्थित माकपा राज्य कार्यालय के बोर्ड पर कीचड़ उंडेलने का काम भी इसी संगठन का लगता है। भाकपा, माकपा और वामपंथी दलों ने बार बार इसकी लिखित शिकायतें कीं। यदि तभी इस गिरोह को दबोच लिया गया होता तो आज सारे संसार में भारत की प्रतिष्ठा गिराने का दुस्साहस करने की उसकी हिम्मत न होती।
भाकपा ने कहा कि 95 वर्षों से एक संगठन धर्म का चोगा पहन कर गरीब, दलित और आम जन विरोधी और एकल प्रभुत्व के सिध्दांत को परवान चड़ा रहा है। इससे कुकुरमुत्तों की तरह असहिष्णुतावादी संगठन पैदा होरहे हैं और निहितस्वार्थी लोग अराजक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। वाराणसी के इस कुक्रत्य के अलाबा कोयंबटूर में महान समाज सुधारक ई वी रामस्वामी पेरियार की प्रतिमा को भगवा रंग से पोत दिया गया तो रुड़की में अफ्रीकी देश के छात्रों को बुरी तरह पीटा गया। ऐसी ही मानसिकता रखने वाले एएमयू के एक मुस्लिम छात्र ने हिन्दू छात्रा को हिजाब पहनने की धमकी दी। ऐसे तत्व अपनी फर्जी आस्था की आड़ में समय समय पर अलग अलग बहानों से देश के कमजोर वर्गों को प्रताड़ित करते रहते हैं। अफसोस की बात है कि मौजूदा सत्ताधारियों का इन्हें खुला समर्थन मिलता रहता है।
भाकपा ने कहाकि एनएसए और देशद्रोह के कानून ऐसे ही तत्वों के लिये हैं, लेकिन मौजूदा शासक इनका दुरुपयोग अपने राजनेतिक विरोधियों के खिलाफ कर रहे हैं। वे समुदाय विशेष का चोगा पहन कर गरीबों का उत्पीड़न करने और कानून को ठेंगा दिखाने वालों को प्रश्रय प्रदान कर रहे हैं।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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CPI Writes to CM 0f UP


भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल
22, क़ैसर बाग, लखनऊ- 226001
दिनांक- 18 जुलाई 2020
विषय- पीलीभीत जनपद के बीसलपुर में बंदरों के आतंक से जनता की रक्षा करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे भाकपा नेता भीमसेन शर्मा का अनशन समाप्त कराने के संबंध में।
URGENT
सेवामें,
श्री योगी आदित्यनाथ जी,
मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश- 206001
महोदय,
जनपद- पीलीभीत के कस्बे बीसलपुर में बंदरों का आतंक चरम पर है। बंदरों ने जानलेवा हमला कर अनेक लोगों को घायल कर दिया है। बंदरों के आतंक के चलते कई लोग घरों से नहीं निकल पा रहे हैं।
अतएव आम जनों को बंदरों के आतंक से बचाने और बंदरों के हमलों से घायल लोगों की  चिकित्सा कराने की मांग को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के स्थानीय नेता कामरेड भीमसेन शर्मा भाकपा कार्यालय, बीसलपुर में दिनांक- 13 जुलाई से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हुये हैं। खेद की बात है की स्थानीय प्रशासन को सूचना के बावजूद अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। जबकि कामरेड भीमसेन शर्मा के स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आरही है।
यह इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि प्रशासनिक अधिकारी जन सरोकारों के प्रति कैसा और कितना उपेक्षा भाव रखते हैं। लोकतन्त्र में यह शोभनीय नहीं है।
अतएव आपसे अनुरोध है कि जिलाधिकारी पीलीभीत को तत्काल ठोस कार्यवाही के निर्देश दें कि वे जनता की समस्याओं का निराकरण करें। सक्षम अधिकारी को अनशन स्थल पहुँच कर समस्या के निदान का आश्वासन देकर भीमसेन शर्मा का अनशन समाप्त कराना चाहिये। इस विषय में कोई भी हीला हवाली जन सरोकारों के लिये आवाज उठाने वालों के जीवन से खिलवाड़ होगी।
आशा ही नहीं पूरा विश्वास है कि आप त्वरित कार्यवाही के निर्देश अवश्य देंगे।
सधन्यवाद
भवदीय
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
प्रतिलिपि-
जिलाधिकारी- पीलीभीत, उत्तर प्रदेश


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बुधवार, 15 जुलाई 2020

उत्तर प्रदेश में विद्युत व्यवस्था का बुरा हाल




बिजली कटौती से उद्योग, खेती और आम जनजीवन तवाह

सप्ताह के भीतर सुधार करो नहीं तो होगा आंदोलन: भाकपा

लखनऊ- 15 जुलाई 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने कहा कि लखनऊ, वाराणसी आदि कुछ स्थानों को छोड़ कर समूचे उत्तर प्रदेश में अभूतपूर्व बिजली कटौती जारी है। इससे भीषण गर्मी में आम नागरिकों को अकल्पनीय परेशानियां तो हो ही रहीं हैं, खेती और उद्योग को भी भारी हानि होरही है।
बिजली का बार बार आना जाना, कम देर को आना और ज्यादा देर को जाना, अंधाधुंध ट्रिपिंग, लो बोल्टेज, ट्रांसफारमर्स एवं लाइनों में फाल्ट आदि सब हद के बाहर होरहे हैं। जर्जर विद्युत लाइनों और पुराने गिरासू पोल्स का न बदला जाना जान लेवा मसला बन गया है।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आगरा, अलीगढ़ एवं अन्य कई मंडलों में आज तक तो सूखे जैसी स्थिति है। इससे धान की रोपाई और अन्य क्रषिकार्य प्रभावित होरहे हैं। राज्य सरकार तो शायद सूखे की इस स्थिति से अनभिज्ञ बनी हुयी है। नहीं तो अब तक यह क्षेत्र सूखा प्रभावित घोषित होजाना चाहिये था।
उन्होने कहाकि बिजली कटौती का उद्योगों पर भारी प्रभाव पड़ रहा है। कोरोना/ लाक डाउन से उद्योगजगत पहले बहुत प्रभावित हुआ है, अब अंधाधुंध विद्युत कटौती के चलते संभल नहीं पा रहा है। उन्होने सवाल किया कि क्या हम ऐसे ही भारत को आत्मनिर्भर बनायेंगे? क्या इसी तरह चीन को मात देंगे और विश्व गुरु बन जायेंगे?
जहां तक नागरिकों की बात है भीषण गर्मी और उमस से उनका बुरा हाल है। वैसे तो सभी परेशान हैं पर बुजुर्ग, बीमार और बच्चे तो गर्मी से हाल- बेहाल हैं। कोरोना से जूझने को लोगों को मजबूत इम्युनिटी की जरूरत बतायी जा रही है। पर जो बिजली कटौती के चलते रात भर जागेगा वो क्या खाक इम्यूनिटी बना पायेगा?
डा॰ गिरीश ने कहा कि या तो सरकार और विद्युत विभाग ने हथियार डाल दिये हैं या फिर विभाग के निजीकरण के उद्देश्य से व्यवस्थायें भंग की जारही हैं। उन्होने चेतावनी दी कि यदि इस समस्या पर एक सप्ताह के भीतर काबू न पाया गया तो भाकपा और उसके सहयोगी संगठन सड़कों पर उतारने को बाध्य होंगे।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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रविवार, 12 जुलाई 2020

कानपुर बालिका गृह के बाद अब मुजफ्फरनगर बाल दुराचार कांड


मुजफ्फर नगर का बाल गृह दुराचार कांड नैतिकता की दुहाई देने वाले शासकों के मुंह पर करारा तमाचा

भाकपा ने भावी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य के लिये सभी बालक, बालिका आश्रय ग्रहों की जांच की मांग की

लखनऊ- मुजफ्फर नगर के शुक्रताल स्थित एक आश्रम में अबोध और गरीब बच्चों के साथ दुराचार और अत्याचार के खुलासे ने भाजपा के रामराज के ढकोसले की धज्जियां बिखेर कर रख दी हैं। बहुचर्चित कानपुर बालिका गृह कांड के बाद एक माह के भीतर यह दूसरा मामला है जिससे नैतिकता की दुहाई देने वाले सत्ताधारियों के मुंह पर कालिख पुत गयी है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने इस बात पर गहरा रोष और आक्रोश जताते हुये इसे समाज के लिये बहुत ही घातक बताया है। त्रिपुरा और मिजोरम के गरीब घरों के बच्चे पढ़ाने लिखाने के नाम पर इस कथित आश्रम में लाये जाते थे। आश्रम के साधुवेशधारी दो मठाधीश उन्हें कोरोना की दवा बता कर शराब पिलाते थे, गंदी फिल्में दिखाते थे और फिर अनैतिक दुष्कर्म करते थे। प्रतिरोध करने पर उन्हें बुरी तरह पीटा जाता था। यह शर्मनाक खेल वर्षों से चल रहा था।
इतना ही नहीं उन बच्चों से भारी काम कराये जाते थे। उनके घरों से आया पैसा हड़प लिया जाता था। पर यह सब बच्चों के यौन शोषण के सामने छोटा अपराध है। अफसोस की बात है कि यह सब ऐसी जगह चल रहा था जिसे लोग पवित्र स्थान मानते हैं और श्रध्दा और आदर के साथ देखते हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि बालकों को रखने के लिये इस आश्रम का कहीं कोई रजिस्ट्रेशन तक नहीं था। यह सब नेहरूकाल में नहीं योगीकाल में घटित होरहा था।
सामाजिक शख्सियतों और संस्थाओं के प्रयास से दुराचार कांड का भंडाफोड़ हुआ है और दोनों बाबा जेल भी भेजे गये हैं। पर यह सब इसलिए चल रहा है कि तमाम दुराचारी बेखौफ हैं। किसी को नहीं मालूम कि कानपुर बालिका गृह कांड की जांच होरही है या नहीं। फिर जांच के परिणाम की तो बात ही छोड़ दीजिये।
भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहा कि यह जरूरी होगया है कि इस तरह के तमाम आश्रमों, बालिका ग्रहों और बाल ग्रहों की सघन जांच कराई जाये और देश के भविष्य गरीबों के बालक और बालिकाओं का जीवन बरवाद होने से बचाया जाये। पार्टी ने आशा व्यक्त की कि गैर कानूनी और आपराधिक ठोक- ठाक में संलिप्त यूपी सरकार इस दिशा में शीघ्र ठोस कदम उठायेगी।
भाकपा ने छात्र, युवा और मानवाधिकार संगठनों से अपील की कि वे पीढ़ित बालक बालिकाओं को न्याय दिलाने को अपने नैतिक दायित्व का निर्वाह करें।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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शुक्रवार, 10 जुलाई 2020

CPI on Kanpur encountar


विकास दुबे की हत्या और मकान का ढहाया जाना आकाओं को बचाने की साजिश
विकास दुबे प्रकरण सिस्टम में व्याप्त सड़ांध का प्रतीक
भाकपा ने पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच की मांग की
सिस्टम में सुधार जनवादी आंदोलनों से ही संभव
लखनऊ- 10 जुलाई 2020, विकास दुबे और उसके साथियों का फर्जी एंकाउंटर करके पुलिस ने अपने तमाम पापों को तो ढाँप ही लिया उसकी हत्या कर और उसका मकान ढहा कर उन सारे सबूतों को मिटा दिया जिससे उसके पूर्व और वर्तमान के आश्रयदाता सांसत में फंस सकते थे। अतएव यह निंदनीय तो है ही, चिंतनीय भी है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्पष्ट राय है कि विकास दुबे प्रकरण से सिस्टम में व्याप्त होचुकी सड़ांध सामने आचुकी है। आपरेशन क्लीन उसी सड़ांध का एक गैर कानूनी रुप है। न्यायिक प्रक्रिया की पूर्ण असफलता के इस दौर में शासक वर्ग अपनी छवि बचाने की कोशिश में तथा अपने निहित राजनैतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिये ऐसे मनमाने कदम उठा रहे हैं जिनसे विधि का शासन पूरी तरह नष्ट होने की ओर है। यह हमारे लोकतन्त्र और लोकतान्त्रिक ढांचे के लिये बेहद खतरनाक है।
उम्मीद कम है पर अब भी सिस्टम में सुधार की कोशिश की जानी चाहिये। पहली जिम्मेदारी सर्वोच्च अदालत और अदालतों की है कि वे जन मानस का विश्वास अर्जित करें। सर्वोच्च अदालत को उसके समक्ष दायर याचिका को गंभीरता से लेते हुये विकास दुबे प्रकरण की न्यायिक जांच करानी चाहिये। योगी सरकार द्वारा आपरेशन क्लीन के नाम पर मनमाने ढंग से की जा रहीं हत्याओं पर रोक लगा कर फास्ट ट्रेक कोर्ट से वादों के निस्तारण के आदेश दिये जाने चाहिए। विधि के शासन की रक्षा के लिये यह बेहद जरूरी है।
भाकपा का स्पष्ट द्रष्टिकोण है कि कार्यपालिका के हर हिस्से- सरकार, पुलिस और प्रशासन पर से जनता का पूरा विश्वास उठ चुका है। व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन से ही विश्वास बहाली संभव है। और व्यवस्था में परिवर्तन जनता के जनवादी आंदोलनों से संभव है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी समाज की स्वस्थ और जनवादी शक्तियों को एकजुट कर ऐसे आंदोलन को खड़ा करने का प्रयास करेगी और समाज हितैषी ताकतों से सहयोग की उम्मीद करेगी।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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प्रशिक्षु डाक्टरों को मिला भाकपा का साथ


प्रशिशु डाक्टरों को दिया जा रहा है दिहाड़ी मजदूरों से कम मानदेय

भाकपा उत्तर प्रदेश ने की अन्य राज्यों के समकक्ष करने की मांग

लखनऊ- 10 जुलाई 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने उत्तर प्रदेश के मेडिकल कालेजों में प्रशिक्षु ( Interns ) डाक्टरों का मानदेय बढ़ाने की मांग का मजबूती के साथ समर्थन करते हुये मानदेय तत्काल बढ़ाने की मांग राज्य सरकार से की है।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा उत्तर प्रदेश के सचिव डा॰ गिरीश ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया की एमबीबीएस पास किये इन प्रशिक्षु डाक्टरों को दिहाड़ी मजदूरों से भी कम मानदेय दिया जा रहा है। उन्हें 12- 12 घंटे ड्यूटी करने के एवज में मात्र रुपये 7500/- प्रति माह यानी कि 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय दिया जारहा है।
जबकि अन्य कई राज्यों में यह मानदेय रूपये 20 हजार प्रति माह या इससे ऊपर हैं। केंद्र सरकार ने भी अपने मेडिकल कालेजेज़ में यह मानदेय बढ़ा कर रु॰ 23,500 प्रति माह कर दिया है। अपने इस शोषण से व्यथित उत्तर प्रदेश के कई मेडिकल कालेजों के प्रशिक्षु डाक्टरों ने मजबूरन हड़ताल की राह पकड़ी है, हालांकि कई जगह वे कोविड- 19 की ड्यूटी को द्रढ़तापूर्वक अंजाम दे रहे हैं।
यह दौर जितना नाजुक है प्रशिक्षु डाक्टरों की मांग भी उतनी ही बाजिव है। अतएव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य सरकार से मांग करती है कि वह प्रशिक्षु डाक्टरों का मानदेय कम से कम अन्य राज्यों के समकक्ष बढ़ाने की फौरन और फौरन घोषणा करे।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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गुरुवार, 9 जुलाई 2020

CPI on Surrender of VIKAS DUBEY

विकास का आत्म समर्पण अपराधी, सत्ता और पुलिस के अपवित्र गठजोड़ का परिणाम

भाकपा ने पूछताछ और ट्रायल गैर भाजपा शासित राज्य में कराने की मांग की

लखनऊ- 9 जुलाई 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने इस बात पर हैरत जतायी कि कानपुर पुलिस के दुर्दांत हत्यारे विकास दुबे की लोकेशन के बारे में यूपी पुलिस लगातार झूठ बोलती रही और उसने बड़े ही नाटकीय अंदाज में भाजपा शासित राज्य मध्य प्रदेश के उज्जैन में आत्मसमर्पण कर दिया। इससे अपराधी, भाजपा, राजनीति और पुलिस प्रशासन के गठजोड़ का एक बार फिर खुलासा हो गया।
प्रहसन के अब तक के शो से यह साफ होगया कि योगीराज में पुलिस गरीबों, कमजोरों, दलितों, अल्पसंख्यकों और आमजनों को ठोकती- पीटती रही है और उसके पहलू में एक से एक खौफनाक दस्यु फलते फूलते रहे हैं। सप्ताह भर पूर्व हुये लोमहर्षक कांड के बाद यूपी पुलिस जिस तरह कानून को रौंदती रही है, उससे स्पष्ट होगया कि वह न केवल अयोग्य है, वह कानून की परवाह तक नहीं करती।
आधा दर्जन कथित अपराधी मार गिराए गये, पूरे प्रदेश में सर्च एंड ठोको अभियान चलाया गया पर वह सुरक्षित है जिसके अपराध की एवज में यह सब किया जा रहा है। इससे शहीद पुलिसकर्मियों की न्याय की आस धूमिल हुयी है। सैटिंग की परतें उघड़ती जारही हैं और अपवित्र गठजोड़ का खुलासा होता जा रहा है। उसकी मां ने भी बयान बदल दिये हैं और विकास भी वही बोलेगा जो सत्ता बुलवाना चाहेगी। जनता को सिर्फ प्रहसन के अगले खंडों का मूक दर्शक बने रहना है।
भाकपा ने मांग की कि विकास दुबे से पूछताछ गैर भाजपा शासित राज्य के पुलिसबलों द्वारा उच्च न्यायालय के तीन सिटिंग जजों के पैनल के समक्ष की जाये और ट्रायल भी गैर भाजपा शासित राज्य में चलाया जाये।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश  
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शुक्रवार, 3 जुलाई 2020

CPI on Kanpur Episode


कानपुर कांड- पुलिस प्रशासन के राजनीतिकरण की देन: भाकपा

लखनऊ- 3 जुलाई 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने कानपुर जनपद में गत रात एक शातिर अपराधी से मुठभेड़ में एक क्षेत्राधिकारी सहित 8 पुलिसकर्मियों की शहादत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। भाकपा ने शहीद पुलिसकर्मियों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये शोक संतप्त उनके परिवारों के प्रति गहरी सहानुभूति जताई है। भाकपा ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि यूपी में जंगलराज व्याप्त है इसका इससे बड़ा उदाहरण हो नहीं सकता। एक ऐसा शातिर अपराधी जिसके खिलाफ 60 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं वह कैसे और किसके संरक्षण के तहत बाहर घूम रहा था, इस सवाल का जबाव सरकार को देना होगा। क्यों उस पर गैंगस्टर एक्ट, रासुका अथवा अन्य धाराएँ लगा कर जेल के भीतर नहीं रखा गया? बार बार मार दो, ठोक दो की भाषा बोलने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी क्या इस छुट्टा घूम रहे अपराधी के इस जघन्य कुक्रत्य की नैतिक ज़िम्मेदारी लेंगे?
भाकपा उत्तर प्रदेश में निरंतर होरही गंभीर आपराधिक वारदातों पर लगातार आवाज उठाती रही है जिसे योगी सरकार हवा में उड़ाती रही है। योगी सरकार ने पुलिस को राजनीतिक शख़्सियतों को फंसाने और जन आंदोलनों को कुचलने के काम में लगा रखा है। पुलिस प्रशासन का राजनीतिकरण कर दिया गया है।  उसके पास अपराधियों से निपटने को उतना समय नहीं जितना होना चाहिये। दूसरे शातिर अपराधियों के शासक दल के नेताओं से गहरे रसूख हैं और सामान्यतः पुलिस उन पर हाथ डालने से घबराती है। जहां हाथ डाला गया उसका नतीजा सामने है। पुलिस के मूवमेंट की इस अपराधी गिरोह को कैसे जानकारी मिली इसकी भी जांच होनी चाहिये।
भाकपा ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में एक से एक बड़ी आपराधिक घटनायें हो रही हैं, बड़े बड़े घपले घोटालों की परतें उघड़ रही हैं, दबंग कमजोरों पर अत्याचार कर रहे हैं पर हर मामले में मुख्यमंत्री का एक ही रटा रटाया बयान होता है कि कड़ी कार्यवाही के निर्देश दे दिये गए हैं, दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। अब इससे काम चलाने वाला नहीं है। जनता नतीजे चाहती है। योगी सरकार नतीजे दे नहीं पा रही है।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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गुरुवार, 2 जुलाई 2020

विचारधीन मामले में संपत्तियाँ जब्त करने का आदेश रद्द हो: भाकपा




लखनऊ- आपराधिक मामलों में आपराधिक अभियोग चले, बिना अभियोग साबित हुये संपत्तियां जब्त करने की कारगुजारियाँ बन्द हों, लोगों के रोजगार पर डाका डालने के तालिबानी फरमान रद्द हों, इस चेतावनी के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने सीएए विरोधी आंदोलन में विभिन्न धाराओं में निरुद्ध लखनऊ के धर्मवीर सिंह एवं माहेनूर चौधरी की संपत्ति जब्त कर बेदखल करने की कार्यवाही की कड़े शब्दों में निन्दा की।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा ने आरोप लगाया की प्रदेश की भाजपा सरकार विपक्ष और आम लोगों को इस हद तक भयभीत कर देना चाहती है कि आगे वे सरकार के गलत से गलत कामों पर चुप बैठे रहें। इसी उद्देश्य से प्रदेश में कई नेताओं की गिरफ्तारियाँ की जारही हैं, कई से जुर्माना बसूलने की अवैध कार्यवाहियाँ की जारही हैं तो बिना जुर्म साबित हुये ही लोगों की संपत्तियां जब्त की जारही हैं। धर्मवीर सिंह एवं माहेनूर की संपत्तियों की जब्ती के आदेश भी इसी उदेश्य से की गयी कारगुजारी हैं।
हम सभी को अच्छी से याद है कि 1857 की क्रान्ति को दबा देने के बाद 140 वर्षों तक अँग्रेजी हुकूमत ने यह सब निरंतर जारी रखा था। आखिर उनका जो हश्र हुआ वो सबके सामने है।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय तक ने यह साफ तौर पर कहा है कि सामुदायिक हिंसा के मामले में बसूली की कार्यवाही माननीय उच्च न्यायालय अथवा जिला न्यायालय के द्वारा ही की जा सकती है। अतएव इस विषय में अपर जिलाधिकारी, लखनऊ का निर्णय सीधे सीधे सर्वोच्च न्यायालय की अवहेलना है। आशा की जानी चाहिए कि माननीय उच्च न्यायालय इसका स्वतः संज्ञान अवश्य लेगा। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि वसूली की यह कार्यवाही 19 दिसंबर के बाद इसी उद्देश्य से लागू किए गए एक अध्यादेश के तहत की जा रही है जो पूर्णतया अवैध है।
भाकपा ने कहा कि एक ओर सरकार बार बार कोरोना महामारी और सीमाओं के संकट का हवाला दे कर सबकी एकता की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जनता की आवाज को कुचलने के एजेंडे पर निरन्तर आगे बड़ रही है। यह लोकतन्त्र और उसकी सम्रद्ध परंपराओं का हनन है, जिसे जन समुदाय बहुत देर तक सहन नहीं कर पायेगा। भाकपा ने इन तुगलकी आदेशों को तत्काल वापस लेने की मांग की।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश


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बुधवार, 1 जुलाई 2020

Press Note of Left Parties of UP


वामपंथी दलों ने ट्रेड यूनियनों द्वारा आयोजित हड़तालों का समर्थन किया
लखनऊ- 1 जुलाई 2020, उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी, भाकपा- माले (लिबरेशन) एवं आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक ने 2 से 4 जुलाई तक कोयला क्षेत्र के श्रमिकों और 3 जुलाई को केन्द्रीय ट्रेड यूनियन संगठनों कीप्रस्तावित संयुक्त हड़तालों को अपना समर्थन प्रदान किया है।
यह दोनों हड़तालें श्रम क़ानूनों को समाप्त करने, काम के घंटे बढ़ाने, सार्वजनिक क्षेत्र और कोयला क्षेत्र के निजीकरण एवं पेट्रोल-डीजल की कीमतों में निरंतर व्रद्धि व महंगाई के खिलाफ एवं लाक डाउन से प्रभावित मजदूरों को आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग को लेकर आयोजित की जा रही हैं। किसानों और खेतिहर मजदूरों के संगठनों ने वर्गीय मांगों को लेकर इस हड़ताल को अपना समर्थन प्रदान किया है।
भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश, माकपा के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा- माले के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव एवं फारबर्ड ब्लाक के राज्य संयोजक अभिनव कुशवाहा ने वामपंथी कार्यकर्ताओं से ज्वलंत मुद्दों को लेकर की जारही इस हड़ताल को समर्थन प्रदान करने का आह्वान किया है।
डा॰ गिरीश


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सोमवार, 29 जून 2020

Left Agitation against Petroliam Price hike in UP



पेट्रोल, डीजल की कीमतों में निरंतर और असहनीय उछाल के विरूध्द-

उत्तर प्रदेश भर में वामपंथी दलों के व्यापक और जुझारू प्रदर्शन

लखनऊ- 29 जून 2020, उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने आज अपने को अनलाक करते हुये सड़कों पर संघर्ष का बिगुल बजा दिया। केन्द्रीय नेत्रत्व के आह्वान पर आज चारों वामदलों- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी, भाकपा, माले- लिबरेशन एवं आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक ने मोदी सरकार द्वारा 23 दिनों से लगातार बढ़ाये जारहे पेट्रोल डीजल के मूल्यों और कमरतोड़ महंगाई के खिलाफ जिलों जिलों में संघर्ष का शंखनाद   कर चेतावनी दे दी कि यदि उसने जनता को लूट कर तवाह करने वाले अपने कदमों को पीछे न खींचा तो आगे उसे और व्यापक संघर्षों का सामना करना पड़ेगा। उनके इस संघर्ष को किसानों, खेतिहर मजदूरों, युवाओं, छात्रों और महिला संगठनों का भी साथ मिला।
वामपंथी दल और उनके सहयोगी संगठन लाक डाउन के काल में भी निरंतर संघर्षरत थे और मर्यादाओं का पालन करते हुये कोई दर्जन भर कार्यक्रमों का आयोजन किया था। पर जुल्म जब बड़ता है तो पाबंदियाँ टूट जाती हैं, पानी जब जोर मारता है तो बंधे तक ढह जाते हैं की कहावत को चरितार्थ करते हुये हजारों वाम कार्यकर्ताओं ने आज प्रतिरोध का बिगुल फूंक दिया।
टीवी चेनलों ने भले ही इस बड़ी कार्यवाही से आंखें मूँद ली थीं, लेकिन सोशल मीडिया आक्रोशपूर्ण नारों के प्रदर्शन की गूंज से पटा पड़ा था। वामदलों के इस दाबे को कोई भी सोशल मीडिया पर जाकर चैक कर सकता है। कई जिलों में कई कई जगह कार्यक्रम हुये तो कई जगह पुलिस ने पाबंदियां थोपने का पुश्तैनी काम किया। लेकिन दमन का यह दुष्चक्र वामपंथी कार्यकर्ताओं के कदम रोक न सका।
सोशल मीडिया के माध्यम से शाम 5 बजे तक जिन जिलों की कार्यवाहियों को जाना गया उनकी फहरिश्त लंबी है। लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, कानपुर शहर, मथुरा, मेरठ, गोरखपुर, आगरा, कानपुर देहात, जालौन, इलाहाबाद, झांसी, चित्रकूट, सुल्तानपुर, सोनभद्र, अलीगढ़, गाजियबाद, कुशीनगर, गाजीपुर, महाराजगंज, बुलंदशहर, मुरादाबाद, शामली, औरैया, कासगंज, बांदा, इटावा, मैनपुरी, फ़तेहपुर ( खागा ), जौनपुर, चंदौली, मिर्जापुर, बहराइच, बलरामपुर, फरुखाबाद, रायबरेली, आजमगढ़ ( लालगंज ), बलिया, भदोही, बाराबंकी, हाथरस, गोंडा, देवरिया, मऊ, बस्ती, अंबेडकर नगर, हमीरपुर, आदि जगहों पर कार्यक्रमों की सूचना सायं 5 बजे तक मिल चुकी थी।
इस संबंध में राष्ट्रपति महोदय एवं राज्यपाल उत्तर प्रदेश को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपे गए।
ज्ञापनों में कहा गया है कि गत तीन सप्ताह से अधिक होगये, पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार व्रद्धि होरही है। इस व्रद्धि से पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतें रुपये 80 प्रति लीटर के पार होगयी हैं। यह भी उस समय होरहा है जबकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अभूतपूर्व गिरावट आयी। इस गिरावट का लाभ आम जनता को मिल पाता उससे पहले ही केन्द्र सरकार ने पेट्रोल डीजल पर उत्पाद कर और राज्य सरकारों ने वैट बढ़ा दिया। रही सही कसर प्रतिदिन पेट्रोल डीजल की कीमतें बढ़ा कर तेल कंपनियों ने पूरी कर दी। रसोई गैस की कीमतें भी काफी बढ़ चुकी हैं। यह भारत ही है जहां पेट्रोल, डीजल पर विश्व में सर्वाधिक लगभग 69 प्रतिशत टैक्स लिया जारहा है।
73 साल में यह भी पहली बार हुआ है कि डीजल की कीमतें पेट्रोल से अधिक होगयी है। निश्चय ही यह बेहद संकटपूर्ण स्थिति है। इससे खेती, उद्योग, ट्रांसपोर्ट और नागरिक आवागमन सभी महंगे होगये हैं। परिणामस्वरूप महंगाई ने छलांग भरना शुरू कर दी। यह सब उस समय और अधिक तकलीफ बढ़ाने वाला है जब कोरोना संकट और लाक डाउन से भयंकर पैमाने पर बेरोजगारी फैली है और आम नागरिकों की जेब खाली है। बदतर हालत में पहुंच चुकी अर्थव्यवस्था के सामने और अधिक संकट खड़ा होगया है। इस सबसे वेपरवाह सरकार जनता को लूटने में जुटी है।
पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ी कीमतों की मार से किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और आम जनता को राहत दिलाने के लिये वामपंथी दल लगातार आवाज उठा रहे हैं, लेकिन मगरूर सरकारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। अतएव वामपंथी दलों ने देश भर में पुनः अभियान छेड़ा है। अवाम की कुछ अन्य समस्याओं को भी उठाया गया है-
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पर्याप्त कमी तत्काल की जाये। रसोई गैस की कीमतें भी कम की जायें। पेट्रोल एवं डीजल पर हाल ही के सप्ताहों में बढ़ाये गये उत्पाद कर और वैट को तत्काल वापस लिया जाये। पेट्रोल, डीजल एवं रसोई गैस की पूर्व की मूल्य नियंत्रण प्रणाली लागू की जाये। महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार पर कारगर रोक लगायी जाये।
आयकर के दायरे से बाहर समस्त परिवारों के खाते में हर माह रुपये- 7500 अगले 6 माह तक निरंतर डाले जायें। हर जरूरतमन्द परिवार को प्रति व्यक्ति 10 किलोग्राम के हिसाब से अनाज अगले 6 माह तक निरंतर मुहैया कराया जाये।
उत्तर प्रदेश में चरमरा चुकी कानून व्यवस्था की हालत को नियंत्रण में किया जाये। महिलाओं, दलितों और अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न रोका जाये। कोविड अस्पतालों और एकांत केन्द्रों की दयनीय व्यवस्थाओं में सुधार लाया जाये। अधिकाधिक जांच करा कर लोगों का मानवीय संजीदगी से मुफ्त इलाज कराया जाये। मनरेगा का आकार बढ़ाया जाये और भ्रष्टाचार से बचाया जाये।
साथ ही इस मांग को भी जोरदारी से उठाया गया कि जनता के हित में आवाज उठाने वाले विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का राजनैतिक उत्पीड़न बंद किया जाये। अन्य गतिविधियों की तरह विपक्ष की राजनैतिक गतिविधियों को अनलाक किया जाये।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश, माकपा राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा- माले, लिबरेशन के सचिव का॰ सुधाकर यादव एवं फारबर्ड ब्लाक के संयोजक अभिनव कुशवाहा ने प्रदेश के सभी वामपंथी नेताओं, कार्यकर्ताओं, सहयोगी संगठनों, शुभचिंतकों एवं आम जनता को इस सफल जन कार्यवाही के लिये क्रांतिकारी बधाई प्रेषित की है और उम्मीद की है कि आने वाले दिनों में वे जनता के ज्वलंत सवालों पर और भी सघन कार्यवाहियों के लिये तत्पर रहेंगे।
जारी द्वारा-
डा॰ गिरीश


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मंगलवार, 23 जून 2020

Press Note of Left Parties, UP


उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों का प्रेस बयान-
वामपंथी दलों ने उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों की राजनैतिक गतिविधियों पर से रोक हटाने की मांग की
लोकतन्त्र में ऐसा पहली बार हुआ है जब सत्तापक्ष सड़कों पर है और विपक्ष को ताले में बन्द किया हुआ है
सारे कायदे- कानून ताक पर रख शासक दल धड़ल्ले से चला रहा है अपनी कारगुजारियाँ
वामदलों ने गलवान घाटी में शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, उन्हें लाल सलाम पेश किया
लखनऊ- 23 जून 2020, उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, एमएल- लिबरेशन एवं आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक के प्रादेशिक पदाधिकारियों ने आज आन लाइन बैठक की। वाम नेताओं ने सर्वप्रथम गलवान घाटी में चीन के साथ मुठभेड़ में शहीद हुये भारतीय सेना के अफसरों और सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, उन्हें रेड सेल्यूट पेश किया और शोक संतप्त उनके परिवारों के प्रति गहरी सहानुभूति प्रकट की।
तदुपरान्त वामपंथी दलों ने निम्न बयान जारी किया-
उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की सरकार और शासक दल- भाजपा नफरत, दहशत और दमन की राजनीति कर रहे हैं। कोरोना काल, लाक डाउन और अब अनलाक- 1 में सरकार और शासक दल अपने एजेंडों और गतिविधियों को खुले आम अंजाम दे रहे हैं, वहीं उन्होने लाक डाउन और कोविड- 19 के बहाने विपक्ष को क्वारंटाइन में डाल दिया है और आम जनता पर निर्दयता पूर्वक हमले जारी रखा है। अब सीमाओं पर संकट के नाम पर वह अपने एजेंडे को धड़ल्ले से लागू कर रहे हैं। वामदलों ने विपक्ष पर लादी गयी अलोकतांत्रिक पाबंदियों को तत्काल हटाने की मांग की है।
एक प्रेस बयान में वामदलों ने कहा कि सत्ता और उसके बल पर अर्जित धन के बल पर भाजपाई वर्चुअल रैलियां कर रहे हैं और प्रसारण सुनने के लिये भाजपा कार्यालयों, भाजपा नेताओं के आवासों और अनेक स्थलों पर लगाये गए एलईडी टीवी के सामने बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे होरहे हैं। सामाजिक दूरी की सरेआम धज्जियां बिखेरी जारही हैं। सरकार की कथित उपलब्धियों के प्रचार- प्रसार के लिये कार्यकर्ताओं के झुंड गावों, शहरों में न केवल पर्चे बांट रहे हैं अपितु सभाएं तक कर दे रहे हैं। सरकारी सामग्री को हथिया कर सामूहिक रूप से वितरण कर रहे हैं।
इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने शराब बिक्री शुरू करा दी जिससे दुकानों पर लंबी लाइनें लग रही हैं और मयखानों में भीड़ जुट रही है। देवालयों और पवित्र नदियों के स्नान में भीड़ें जमा होरही हैं। अब तो जगन्नाथ रथ यात्रा तक आयोजित की जारही है। भाजपा के मंत्रियों, सांसदो और विधायकों द्वारा दी जा रही पार्टियों और क्षेत्र भ्रमणों में भीड़ जमा होने के वीडियो लगातार वायरल होरहे हैं। आम जनता के आक्रोश को तो समझा जा सकता है पर चीनी सामान का आयात करने के लिये जिम्मेदार भाजपा सरकार के समर्थक लोग भी कथित चीनी सामान की होली जलाने का नाटक कर रहे हैं। कानून, सोशल डिस्टेन्सिंग और लाक डाउन नियमों की धज्जियां हर तरह बिखेरी जारही हैं।
कोविड-19 से निपटने में सरकार की नीतियों और कार्यवाहियों में छेद ही छेद हैं। क्वारंटाइन सेंटर्स, आइसोलेशन सेंटर्स एवं कोविड अस्पतालों की दुर्व्यवस्थायें जान लेवा साबित होरही हैं। लोग वहां जाने से भयभीत हैं और बीमारियों को छिपा रहे हैं। तमाम लोगों की जानें जारही हैं जिनका कोविड मौतों में रिकार्ड नहीं है। प्रायवेट टेस्ट एजेंसीज और प्रायवेट हॉस्पिटल मिल कर लोगों की चीटिंग कर रहे हैं। सरकार अपनी व्यवस्थाओं के गुणगान में लगी है। अब तो कोविड महामारी की परवाह छोड़ भाजपा और सरकार चुनावों की तैयारियों में जुट गयी है। जनता को राम भरोसे छोड़ दिया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम घटे तो सरकारों ने बड़ी मात्रा में उत्पाद कर और वैट लगा दिया। अब पेट्रोल डीजल के दाम 16 दिन से लगातार बढ़ रहे हैं और रुपये 80 प्रति लीटर के पार होगये हैं। 73 सालों में यह पहली बार हुआ है कि कीमतों में डीजल अब पेट्रोल के बराबर पहुँच गया है। कोविड पीड़ित जनता अब महंगाई की मार झेल रही है। बिजली के बड़े हुये बिल उनकी कठिनाइयों को और भी बढ़ा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कानून- व्यवस्था जर्जर हो चुकी है। हत्या, लूट, चोरी, डकैती, छिनैती सभी बड़े पैमाने पर हो रहे हैं। महिलाओं दलितों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचारों की तो झड़ी ही लग गयी है। दलितों अल्पसंख्यकों के बीच के विवादों को सांप्रदायिक रूप देकर अल्पसंख्यकों पर रासुका लगाई जा रही है। कानपुर का बालिका गृह कांड राज्य सरकार के नाम पर कलंक का टीका है।
6900 शिक्षक भर्ती, एक नाम पर कई कई शिक्षकों की नियुक्ति और पशुधन विभाग के घोटाले सरकार में उच्च स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार के चन्द उदाहरण हैं। राशन वितरण, मनरेगा में धांधली और सरकारी विभागों में रिश्वतख़ोरी चरम पर हैं। अब गरीबों को मिलने मुफ्त मिलने वाला राशन अगले माह से बंद किया जारहा है, जबकि उसके कई माह तक जारी रहने की जरूरत है। लाक डाउन में पुलिस प्रशासन निरंकुश होगया है और नियमों के पालन कराने के नाम पर आम नागरिकों, व्यापारियों और ट्रांसपोर्टर्स का भारी उत्पीड़न कर रहा है।
मजदूरों को काम तो दूर तमाम उद्योग बंद होरहे हैं और वे बेरोजगार बनाये जारहे हैं। घरों को लौटे मजदूर काम न मिलने से जान की परवाह छोड़ पुनः पलायन कर रहे हैं। किसानों की फसलों के बाजिव दाम मिल नहीं पारहे हैं। सरकारी योजनाओं में रिश्वतख़ोरी के चलते उसका लाभ किसी तबके को मिल नहीं पारहा है।  इस सबके विरूध्द उठने वाली आवाज को दबाने का काम आज लाक डाउन के नाम पर किया जारहा है।  
महामारी की आड़ में सरकार तुगलकी कानून थोपती जा रही है। वह विपक्ष पर जुल्म ढारही है। विपक्षी नेताओं को जेल में डाला गया। ज्ञापन सौंपने जा रहे वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। सीएए के विरोध में आंदोलन करने वालों को प्रताड़ित किया जा रहा है और उन पर गैर कानूनी जुर्माना ठोका जारहा है। विपक्ष को दफा 144 और महामारी अधिनियम के जरिये दीवारों के पीछे धकेल दिया गया है। योगी सरकार आतंक का पर्याय बन गयी है।
लोकतन्त्र में सरकार दफ्तर में रहती है और विपक्ष सड़कों पर होता है। पर मोदी- योगी राज में यह उलटा कर दिया गया है। यहाँ सरकार सड़क पर है और विपक्ष को नजरबंदी में डाल दिया गया है। यह जनता द्वारा अपने खून पसीने से सींचे गये लोकतन्त्र के लिये अशुभ ही नहीं घातक भी है।
अतएव वामपंथी दल सरकार से मांग करते हैं कि विपक्ष के ऊपर थोपी हुयी पाबंदियों को तत्काल हटाया जाये। राजनैतिक गतिविधियों पर से लाक डाउन को हटाया जाये। यह लोकतन्त्र की मजबूती के लिये जरूरी तो है ही, कोविड महामारी से निपटने और सीमाओं पर मौजूद संकट का मिल कर मुक़ाबला करने के लिये भी अति आवश्यक है।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी,
डा॰ हीरालाल यादव, राज्य सचिव
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी
सुधाकर यादव, राज्य सचिव
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, एमएल- लिबरेशन
अभिनव कुशवाहा, राज्य संयोजक
आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक


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सोमवार, 22 जून 2020

कानपुर बालिका गृह कांड की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच हो: भाकपा




लखनऊ- 22 जून 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने कानपुर के राजकीय बालिका गृह में 57 लड़कियों के कोरोना पाजिटिव एवं 7 के गर्भवती मिलने को प्रदेश सरकार के नाम पर कलंक बताया है। भाकपा ने इसे मुजफ्फरपुर संवासिनी गृह कांड की पुनराव्रत्ति बताया है।
एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने प्रशासन के इस तर्क को कि वे बालिका गृह में आने से पहले से गर्भवती थीं, खारिज करते हुये कहा कि यह बात सार्वजनिक होने से पहले प्रशासन को बता देनी चाहिए थी। उनकी गृह में प्रवेश से पहले जांच करा कर सार्वजनिक की जानी चाहिए थी। उनका कोविड-19 से संक्रमण होना प्रशासन की तैयारियों पर और गहरे सवाल खड़े करता है।
भाकपा ने मांग की कि इसकी निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच जरूरी है। सवाल किया कि शासन- प्रशासन में कोई है जो समाज को झकझोर देने वाली घटनाओं की नैतिक ज़िम्मेदारी ले।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा,  उत्तर प्रदेश

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शनिवार, 20 जून 2020

CPI Protests


सीमाओं पर संकट और कोरोना के बहाने आम जनता पर बोझ लादना बर्दाश्त नहीं किया जायेगा

पेट्रोल, डीजल एवं रसोई गैस की लगातार बढ़ती कीमतों के विरूध्द भाकपा ने किये विरोध प्रदर्शन

लखनऊ- 20 जून 2020, पेट्रोल एवं डीजल की गत दो सप्ताह में लगातार बढाई गयी कीमतें वापस लेने, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अभूतपूर्व गिरावट का लाभ जनता को मिलने से रोकने के लिये केन्द्र सरकार द्वारा बढ़ाये गए उत्पाद कर एवं राज्य सरकार द्वारा बढ़ाये गये जीएसटी को वापस लेने, रसोई गैस की बढ़ी हुयी कीमतों को वापस लेने, पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस की पूर्ववर्ती मूल्य नियंत्रण प्रणाली को पुनः लागू करने तथा अवाम को सता रही महंगाई को नीचे लाने की मांगों को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने आज देश भर में और उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन किये।
यद्यपि राष्ट्रीय स्तर से पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्यव्रद्धि के विरूध्द आंदोलन का आह्वान किया गया था, लेकिन उत्तर प्रदेश में भाकपा ने मजदूरों किसानों और आम आदमी को व्यथित कर रहे उन सभी सवालों को भी उठाया जिनको भाकपा और वामपंथ उत्तर प्रदेश में लाक डाउन लागू होने के बाद से निरंतर उठा रहे हैं। धरने/ प्रदर्शनों के उपरांत राष्ट्रपति एवं राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन स्थानीय प्रशासन को सौंपे गये।
आंदोलन को कामयाब बताते हुये भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि कोरोना और लाक डाउन के चलते आम आदमी की जेब पहले से ही खाली है, महंगाई बढ़ा कर सरकार उसे और खाली करे देरही है। पिछले 14 दिनों से पेट्रोल और डीजल की कीमतें हर रोज बढ़ायी जारही हैं और ये क्रमशः रुपये 80 और 70 के पार पहुँच गयी हैं। सीमाओं पर संकट के नाम पर सरकार के पिट्ठूओं ने इस मुजरिमाना व्रद्धि को अपरिहार्य बताना शुरू कर दिया है। यह काबिले बर्दाश्त नहीं और भाकपा इसे बर्दाश्त नहीं करेगी।
भाकपा राज्य सचिव मंडल ने दावा किया कि आज यूपी में तमाम जगह भाकपा कार्यकर्ताओं ने भीषण गर्मी, कुछ जिलों में भारी बरसात और प्रशासन की तानाशाही के बावजूद जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपे। टीवी चैनल इसे भले ही न दर्शायें, अखबारों में यह राष्ट्रीय खबर भले ही न बने लेकिन सोशल मीडिया आंदोलन की खबरों और फोटोज से भरा पड़ा है।
सच तो यह है कि कोरोना विपत्ति काल में भाकपा और वामपंथ ही लगातार जनता की आवाज उठा रहे हैं, क्षेत्रीय ताक़तें तो खामोश बैठी हुयी हैं। भाकपा और वामपंथ आने वाले दिनों में शोषित, पीड़ित जनता की और भी मुखर आवाज बनेगा, भाकपा ने विश्वास जताया है। भाकपा राज्य सचिव मंडल ने सभी भाकपा और वामपंथी कार्यकर्ताओं को उनके इस अनथक संघर्षों के लिये क्रांतिकारी बधाई दी है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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