भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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बुधवार, 17 जुलाई 2019

CPI Condemned Ghoraval Carnege


प्रकाशनार्थ

घोरावल हत्याकांड की भाकपा ने निन्दा की

प्रशासनिक लापरवाही देखते हुये न्यायिक जांच की मांग उठाई


लखनऊ- 17 जुलाई, 2019, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने जनपद सोनभद्र की घोरावल तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत मूर्तिया के गांव उभ्भा में हुये गोलीकांड की कड़े से कड़े शब्दों में निन्दा की है। इस जघन्य घटना के लिये पुलिस और प्रशासन की भूमिका को संदिग्ध मानते हुये भाकपा ने इसकी न्यायिक जांच कराये जाने की मांग की है।
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि वहां जमीन विवाद काफी पहले से धधक रहा था, लेकिन पुलिस प्रशासन निष्क्रिय बना रहा। परिणामस्वरूप इतना बड़ा कांड होगया जिसमें अब तक 10 स्त्री पुरुषों की जान चली गयी और 18 लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
डा॰ गिरीश ने आरोप लगाया कि जनपद सोनभद्र में बाहरी लोग पहुँच कर आदिवासियों और अन्य गरीबों की ज़मीनों को तरह तरह से हथिया रहे हैं। आए दिन लोगों को हिंसा और दबंगई को सहना पड़ रहा है। वनाधिकार कानून को भी लागू नहीं किया जारहा। जल जंगल जमीन का जमकर दोहन होरहा है। सरकार और प्रशासन अधिकतर मामलों में शोषक और अत्याचारियों का साथ देरहे हैं। हर बड़ी वारदात पर मुख्यमंत्री कार्यालय से बयान जारी होता है कि मुख्यमंत्रीजी ने संज्ञान लिया है। पर वारदातें रुकने का नाम नहीं लेरही हैं।
भाकपा राज्य सचिव मंडल ने भाकपा की जनपद सोनभद्र इकाई को निर्देश दिया है कि वह घटनास्थल का दौरा कर सचाई उजागर करे और पीड़ितों को न्याय दिलाने को हर संभव कदम उठाये।

डा॰ गिरीश


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गुरुवार, 20 जून 2019

CPI, U.P. Condemns Uttar Pradesh Private University Ordinence 2019


भाकपा ने यूपी निजी विश्वविद्यालय अधिनियम को असंवैधानिक बताया

तत्काल वापस लेने की मांग की


लखनऊ-  भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने यूपी केबिनेट द्वारा पारित उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अध्यादेश 2019' जिसका कि उद्देश्य इन विश्वविद्यालयों में राष्ट्रविरोधी गतिविधियां रोकना बताया जारहा है, को अभिव्यक्ति एवं शिक्षा के आधार और अधिकार पर बड़ा हमला बताया है। भाकपा ने इस अध्यादेश पर कड़ी आपत्ति जताते हुये इसे रद्द करने की मांग की है।
एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि ऐसा अध्यादेश लाने से पहले राज्य सरकार को बताना चाहिये कि किस निजी विश्वविद्यालय में और क्या राष्ट्रविरोधी गतिविधियां होरही हैं और यदि होरहीं हैं तो वे अब तक क्यों जनता के संज्ञान में नहीं लायी गईं? क्यों अब तक उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही नहीं की गयी? जेएनयू के कथित टुकड़े- टुकड़े गैंग जिसकी कि चार्जशीट अदालत द्वारा रद्द की जाचुकी है का बहाना बना कर थोपे जाने वाले इस अध्यादेश को स्वीकार नहीं किया जासकता।
भाकपा ने कहाकि इस तुगलकी अध्यादेश के जरिये भाजपा सरकार उन विश्वविद्यालयों में छात्रों एवं शिक्षकों की लोकतान्त्रिक गतिविधियों को कुचलना चाहती है और संघ नियंत्रित छात्र एवं शिक्षक संगठनों को वाक ओवर देना चाहती है।भाजपा को लोकतान्त्रिक और विपरीत विचार बर्दाश्त नहीं। वह उन्हें कुचलने को तमाम हथकंडे अपना रही है। यह अध्यादेश भी उनमें से एक है।
सच तो यह है कि संघ नियंत्रित विद्यालयों और बौध्दिक शिविरों में आबादी के बड़े हिस्से के प्रति घ्रणा और विद्वेष पैदा करने वाली शिक्षा दी जाती है तथा गांधी, नेहरू के प्रति घ्रणा और नाथूराम गोडसे के प्रति श्रध्दा पैदा की जाती है। असल जरूरत उसे रोके जाने की है।
भाकपा ने कहाकि निजी हाथों में सिमटी शिक्षा आज व्यापार बन गयी है। वह गरीबों और निम्न मध्यम वर्ग के लिये सुलभ नहीं है। जरूरत शिक्षा का राष्ट्रीयकरण करने और उसका बजट बढ़ा कर उसे सर्वसुलभ बनाने की है। सभी को समान शिक्षा दिये जाने का निर्देश माननीय उच्च न्यायालय द्वारा कई साल पहले दिया जाचुका है और भाकपा इसे लागू कराने के लिये माननीय राज्यपाल महोदय को तभी ज्ञापन देचुकी है जब सपा की सरकार थी। लेकिन भाजपा इस बुनियादी सवाल से ध्यान हटाने को ऐसे हथकंडे अपना रही है। भाजपा सरकार छात्रसंघों के चुनाव कराने से भी कतरा रही।
भाकपा ने सभी लोकतान्त्रिक शक्तियों से अपील की कि वे इस गैर जरूरी और असंवैधानिक अध्यादेश को रद्द किए जाने हेतु आवाज उठायेँ।

डा॰ गिरीश 


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सोमवार, 17 जून 2019

CPI NEWS


भाकपा राज्य कार्यकारिणी की बैठक संपन्न

चुनाव परिणामों की समीक्षा की गयी

बिजली दरें बढ़ाई गयी तो होगा आन्दोलन

विधान सभा उपचुनावों की तैयारी की जायेगी


लखनऊ- 17 जून 2019, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक आज यहां लालगंज बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट कामरेड हामिद अली एडवोकेट की अध्यक्षता में संपन्न हुयी। बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय सचिव द्वय काम॰ अतुल कुमार अंजान और डा॰ भालचंद कांगो दोनों दिन उपस्थित रहे। दोनों नेताओं ने बैठक को संबोधित किया और हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनावों के संबंध में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा किये गये विश्लेषण पर प्रकाश डाला।
पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य एवं राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने चुनाव समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होने कहाकि इन चुनावों में बहुमत हासिल करने को भाजपा ने हर नाजायज हथकंडा अपनाया। मीडिया, सोशल मीडिया और अपने सघन प्रचार अभियान के जरिये, बेरोजगारी, मजदूरों- किसानों की दयनीय दशा, महंगाई, भरष्टाचार व घोटाले, गिरती अर्थव्यवस्था और समूचे देश में महिलाओं, दलितों, अल्पसंख्यकों और अन्य नागरिक समूहों पर हुयी जुल्म ज्यादती आदि को चर्चा से बाहर धकेल दिया। बड़ी बारीकी से उन्होने धर्म, जाति, सांप्रदायिकता जिसमें मुस्लिम और पाकिस्तान विरोध शामिल था, पुलवामा में हुयी  किरकिरी को छुपाने को कराई गयी बालाकोट स्ट्राइक, सेना के गौरव को अपने हक में भुनाने संघी माडल के हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद को अपने प्रचार का औज़ार बनाया।
इसके अलाबा शासकीय मशीनरी का दुरुपयोग किया, विपुल मात्रा में धन बहाया, बड़े पैमाने पर अरबपतियों और अपराधियों को प्रत्याशी बनाया, जाति के हिसाब से रेबड़ियाँ बांटी गईं और जाति की लकीरों को हिन्दुत्व के आवरण में ढक कर पेश किया गया। सबका साथ सबका विकास की चूंकि कलई खुल गयी थी तो मोदी है तो मुमकिन है और मोदी का कोई विकल्प नहीं जैसे नए हथियारों को आजमाया गया। निर्वाचन आयोग की शर्मनाक पक्षधरता और ईवीएम के कई तरह से उपयोग- दुरुपयोग से भी वोटों का बैलेंस अपने पक्ष में किया। खबरें तो यहाँ तक हैं कि प्रशासकीय मशीनरी की साठ गांठ से भाजपा विरोधी मतदाताओं को दबाव में लेकर एक दिन पहले ही उनके अँगूठों पर स्याही लगा दी गई और अगले दिन उनका वोट डाल दिया गया। विपक्ष के चुनाव अभियान में न केवल रोड़े अटकाये गये बल्कि तमाम विपक्षी कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से नजरबंद कर दिया।
ये भी ध्यान देने की बात है कि चुनाव अभियान में जितनी सीटें जीतने का दाबा मोदी, शाह और अन्य भाजपाई कर रहे थे, अधिकतर एक्ज़िट पोल ने भी लगभग वही आंकड़े  प्रस्तुत किये, कतिपय सरकारी सूत्र भी ऐसे ही दाबे कर रहे थे और नतीजे भी वैसे ही आये। क्या यह सब एक बड़ी साजिश की ओर इशारा नहीं कर रहे? बेगूसराय और अमेठी जैसी कई दर्जन सीटों को हथियाने को विशिष्ट योजना बनाई गयी थी।
समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सरेआम जनादेश का अपहरण है। सरकार बनने के चंद दिनों के भीतर ही देश में जिस तरह के गंभीर सवाल सतह पर आगये हैं उससे और स्पष्ट होजता है कि सुशासन देने की तहजीब भाजपा के पास नहीं है। जल्दी ही इस अपह्रत जनादेश की सचाई सामने आजायेगी।
समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि विपक्ष इतनी बड़ी चुनौती का सामना करने के सवाल पर गंभीर नहीं होसका। बार- बार आगाह करने के बावजूद उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य में एक व्यापक गठबंधन नहीं बनाया गया। कैराना, गोरखपुर, फूलपुर और नूरपुर में कुछ ही माह पहले हुये चुनावों में विपक्ष को सफलता इसलिए मिली थी कि भाकपा सहित तमाम विपक्षी दलों ने साथ दिया था। भाकपा को उम्मीद थी कि उत्तर प्रदेश में भाजपा का रथ थामने के लिए मुख्य दल सभी को साथ लेकर चलेंगे। लेकिन जब ऐसा नहीं होसका तो भाकपा ने अपनी नीतियां जनता के बीच लेजाने के लिए 11 सीटें लड़ीं। शेष सीटों पर हमने अन्य विपक्षी दलों को समर्थन दिया। बिना पूर्व तैयारी के बेहद सीमित साधनों के साथ लड़े गये इस चुनाव में मिले वोटों से भाकपा संतुष्ट है। उसका भरोसा जगा है कि वामपंथ के खिलाफ चलाये जारहे प्रचार अभियान के बावजूद लाखों लोग भाकपा के साथ खड़े हैं। पार्टी ने मतदाताओं, कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों को बधाई दी है।
बैठक में राज्य सरकार द्वारा बिजली की दरों में अभूतपूर्व व्रध्दी के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की गयी। इससे गरीब, मध्यवर्ग, किसान, मजदूर, व्यापारी  आदि सभी तवाह होंगे। यह ईमानदार उपभोताओं को दंडित करने का प्रयास है। सरकार बिजली चोरी, कमीशनखोरी, रिश्वतख़ोरी, लाइन हानि, फाल्ट, कटौती रोक नहीं पारही। विद्युत विभाग द्वारा लगाए गये मीटरों की रफ्तार बहुत अधिक है और उपभोक्ता अनाप- शनाप बिलों से परेशान हैं। अधिक बिल आजाते हैं, मीटर फुक जाते हैं और सारा भार उपभोक्ताओं पर पड़ता है। वर्षों- महीनों तक मामले सुलझाए नहीं जाते और उपभोक्ता बिजली दफ्तरों के चक्कर लगाते रहते है। दो साल में सरकार ने बिजली का उत्पादन बढ़ाने का कोई प्रयास नहीं किया जबकि खपत बड़ी है।
भाकपा ने चेतावनी दी है कि सरकार ने यदि बिजली दरों में कोई भी व्रध्दी की तो भाकपा समूचे प्रदेश में आंदोलन छेड़ देगी। पहले सरकार के पुतले जलाये जायेंगे, सभाएं की जायेंगी और यदि सरकार फिर भी पीछे नहीं हठी तो जिलाधिकारी कार्यालयों पर धरने- प्रदर्शन किये जायेंगे।
राज्य कार्यकारिणी ने उत्तर प्रदेश विधान सभा की दर्जन भर सीटों पर होरहे उपचुनावों में उतारने और उसकी तैयारी शुरू करने का निश्चय किया है।
राज्य कार्यकारिणी बैठक में रेलवे मजदूरों के राष्ट्रीय नेता श्री शिव गोपाल मिश्रा की पत्नी, पुत्र और पोती, उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अध्यक्ष दरवेश यादव की हत्या और पार्टी के वरिष्ठ साथीगण का॰ रामस्वरुप दीक्षित(आगरा), का॰ शंभूदत्त बेलवाल(बरेली), का॰ मुक्तेश्वर राय(गोरखपुर)तथा फिल्म अभिनेता गिरीश कर्नाड के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया गया और उन्हें श्रध्दांजलि अर्पित की गयी। शोक संतप्त परिवारीजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गयी।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश


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गुरुवार, 13 जून 2019

CPI, U.P. Condemns killing of Bar President


उत्तर प्रदेश बार काउंसिल अध्यक्ष की हत्या, महिलाओं के साथ बढ़ती दुराचार की वरदातों और कानून व्यवस्था की बदहाली पर भाकपा ने रोष जताया


लखनऊ- 13 जून 2019, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मण्डल ने कल आगरा में बार काउंसिल उत्तर प्रदेश की नव निर्वाचित प्रथम महिला अध्यक्ष सुश्री दरवेश यादव की निर्मम हत्या पर गहरा दुख व्यक्त किया है। पार्टी को अफसोस और चिन्ता है कि उत्तर प्रदेश में कानून और व्यवस्था की स्थिति बद से बदतर होचुकी है।
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि इससे बड़ी बिडम्बना की बात क्या होगी कि न्यायालय परिसर में वह भी विशिष्ट महिला की हत्या होजाती है। इतना ही नहीं हर रोज अलग अलग जगहों से महिला, बच्चियों के साथ दुष्कर्म और उनकी हत्या की दिल दहलाने वाली खबरें प्रकाशित होरही हैं। आज भी उरई में 6 माह की बच्ची के साथ पैशाचिक क्रत्य की खबर सहित आधा दर्जन दुराचार हत्या और पीड़िता द्वारा आत्महत्या की खबरें प्रकाशित हुयी हैं।
भाकपा राज्य सचिव मण्डल ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि अपराधों की समीक्षा बैठकें होरही हैं, कथित जांच के आदेश दिये जारहे हैं, कड़ी कार्यवाहियों की चेतावनियाँ जारी की जारही हैं मगर स्थिति में सुधार की झलक नहीं दिखाई देती। प्रशासनिक अफसरों के तबादलों से भी कोई लाभ नहीं हुआ। चर्चा है कि उन्हीं अफसरों को हटाया जारहा है जिन्होने चुनावों में भाजपा का साथ नहीं दिया। जिन्होने प्रशासन की मर्यादा को पलीता लगाकर चुनावों में भाजपा के पक्ष में भूमिका निभाई उन्हें उनके जिलों में संगीन वारदातें होने के बाद भी अभयदान देरखा है।
डा॰ गिरीश ने कहाकि महिलाओं के उत्पीड़न और कानून व्यवस्था कि बदहाली को लेकर भाकपा ने गत दिनों में कई जिलों में आंदोलन कर ज्ञापन दिये हैं। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। राज्य सचिव ने जिला इकाइयों से अनुरोध किया कि वे जनहित में निरंतर आवाज उठाते रहें।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश


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सोमवार, 10 जून 2019

CPI Condemns arrest of Press People In UP


मीडियाकर्मियों की गिरफ्तारी की भाकपा ने निन्दा की

लखनऊ- 10 जून 2019, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मण्डल ने राज्य सरकार द्वारा नोएडा के तीन मीडियाकर्मियों- क्रमशः प्रशान्त कनोजिया, इशिता सिंह एवं अनुज शुक्ला की गिरफ्तारी कराने की कड़े शब्दों में निन्दा की है। भाकपा ने उनकी तुरंत रिहाई और उनकी प्रताणना के उद्देश्य से लगाये गए मुकदमों को निरस्त कराने की मांग की है।
एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि  पुलिस का यह कार्य अनैतिक, अधिनायकवादी तो है ही प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता पर हमला है। यह इस बात को दर्शाता है कि अपने राजनैतिक आकाओं को तुष्ट रखने को पुलिस किसी भी हद तक जासकती है।
डा॰ गिरीश ने कहाकि भाजपा और मीडिया के धनपति मालिकों के बीच साठगांठ के चलते कई टीवी चैनल और बड़े अखबार सरकार और शासन के पिट्ठू बन चुके हैं और लुटेरी पूंजीवादी व्यवस्था के बचाव में हर घ्रणित हथकंडा अपना रहे हैं। मीडिया के जो हिस्से इस परिधि से बाहर हैं उनकी आवाज बन्द करने का प्रयास किया जारहा है। सभी लोकतान्त्रिक शक्तियों को इसका विरोध करना चाहिए।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा , उत्तर प्रदेश



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शनिवार, 8 जून 2019

CPI Statement on Aligarh incident


अलीगढ़ में अबोध बच्ची की हत्या पर भाकपा ने रोष जताया

अपराधों की बाढ़ के खिलाफ जिलों में ज्ञापन देने का निर्देश जिला इकाइयों को दिया


 लखनऊ- 8 जून 2019, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने अलीगढ़ जनपद के कस्बा- टप्पल में ढाई साल की अबोध बच्ची के अपहरण के बाद कीगयी न्रशंस हत्या की कड़े से कड़े शब्दों में भर्त्सना की है। भाकपा ने घटना में लिप्त सभी दरिंदों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की मांग की है।

यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन ने शुरू में इस घटना को गंभीरता से नहीं लिया। अपहरण के बाद उसी आबादी में रह रहे कुख्यात अपराधियों को क्यो शिकंजे में नहीं कसा गया? आबादी में ही म्रतका की लाश छिपायी गयी और उसकी जगह तक बदली गयी, पर पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। जब मामले ने तूल पकड़ा तो एसआईटी का गठन और पुलिसकर्मियों के निलंबन जैसी कार्यवाही की गयी।
डा॰ गिरीश ने कहाकि लोक सभा चुनावों के बाद यूपी में अपराधों की बाढ़ ही आगई है। अनेक जिलों में महिलाओं की हत्या और दुराचार के कई मामले हुये हैं तो कत्ल राहजनी अपहरण लूट नकली शराब से मौतों जैसी कार्यवाहियों में भारी बढ़ोत्तरी हुयी है।
लगता है जो अपराधी चुनाव अभियान में लगाये गए थे, जीत के बाद उन्हें अपने मंसूबे पूरे करने की छूट देदी गयी है। अपराधी जनता को हलकान किए हुये हैं तो सरकार और मुख्यमंत्री को जनता की पीड़ा की कोई फिक्र नहीं है। मंत्रीगण जघन्य घटनाओं को आम बात बता कर जनता के जले पर नमक छिड़क रहे हैं। संघ परिवार और भाजपा अपनी असफलताओं पर शर्म करने के बजाय घटना में हिन्दू- मुस्लिम तत्व ढूंढ रहे हैं। पूरा यूपी राम भरोसे छोड़ दिया गया है।
भाकपा ने अन्याय, उत्पीड़न और अपराधों की इन वारदातों पर कडा प्रतिरोध जताया है। भाकपा राज्य सचिव मण्डल ने अलीगढ़ समेत तमाम जिला इकाइयों को निर्देश दिया है कि इन आपराधिक कार्यवाहियों पर विरोध जताते हुये राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारियों को सौंपें।

डा॰ गिरीश

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शुक्रवार, 7 जून 2019

CPI will contest all assembly seats in by poll in U.P.


विधान सभा के उपचुनावों में सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी भाकपा


लखनऊ- 7 जून 2019, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश में रिक्त हुयी सभी 12 सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी। उपर्युक्त जानकारी यहां एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने दी।
उन्होने कहाकि इस संबन्ध में संबंधित जिला इकाइयों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रत्याशियों के संबन्ध में प्रस्ताव तैयार कर राज्य केन्द्र को भेजें। चुनावों की रणनीति पर 15 और 16 जून को लखनऊ में होने वाली राज्य कार्यकारिणी की बैठक में विचार किया जायेगा। बैठक में लोकसभा चुनावों की समीक्षा भी की जाएगी।
बैठक में भाकपा के केन्द्रीय नेतागण भी भाग लेने पहुंच रहे हैं।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा,  उत्तर प्रदेश


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बुधवार, 29 मई 2019

बार बार जहरीली शराब से होरही मौतों के लिये मुख्यमंत्री जिम्मेदार : भाकपा




लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मण्डल ने बाराबंकी में जहरीली शराब से एक बार फिर दो दर्जन निर्दोष लोगों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। भाकपा की सदिच्छा है कि इलाज करा रहे सभी लोग जल्द स्वस्थ होकर अपने परिवार के बीच पहुँचें।
घटना पर अफसोस जताते हुये भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि एक योगिया वस्त्रधारी की सरकार के शासन काल में जहरीली शराव के पीने की एक दो नहीं पूरी आठ घटनायें होचुकी हैं। खुद बाराबंकी में यह दूसरी घटना है। इन घटनाओं में अब तक डेढ़ सौ से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। और अन्य दर्जनों नाजुक अंग गंवा चुके हैं।
लेकिन इन घटनाओं को रोका नहीं जासका है। घटना के बाद हर बार कहा जाता है कि योगीजी ने सख्त कार्यवाही के निर्देश देदिए हैं। कुछ अफसरों को निलंबित कर दिया जाता है, मुआबजा दिया जाता है, कार्यवाहियों का नाटक किया जाता है और जांच बैठा दी जाती है मगर नतीजा सिफर रहता है। खबर तो यह भी है कि बाराबंकी में जिस दुकान से यह जहरीली शराब बेची गयी उस पर गत माहो में भी जहरीली शराब पकड़ी गयी थी। मगर कोई कार्यवाही नहीं हुयी क्योंकि ठेकेदार शासक दल से संबंधित है।
भाकपा ने मांग की कि अब कोरी बयानबाजी और कार्यवाही से कुछ होने वाला नहीं है। अब जबावदेही तय होनी चाहिये। भाकपा ने सवाल कियाकि क्या इन संगीन मामलों के लिये मुख्यमंत्री जिम्मेदार नहीं हैं? क्या आबकारी मंत्री की कोई ज़िम्मेदारी नहीं है? क्या उनका काम खाली बयानवाजी करना या दिखावटी कार्यवाही करना मात्र है?
डा॰ गिरीश ने कहाकि आवकारी अधिनियम में सजा ए मौत का प्रावधान करने के बाद भी इन घटनाओं की पुनराव्रत्ति नहीं रुकी क्योंकि अपराधियों को विश्वास है कि सत्ताधारी दल से रसूखों के चलते वे साफ बच निकलेंगे। वैसे भी अधिकाधिक मुनाफा और पैसे कमाने की मानसिकता के आगे कड़े क़ानूनों का कोई मतलब नहीं है। भाजपा बिना परिश्रम किये अधिक धन कमाने की मानसिकता पर पनपती है और धर्म का नशा फैला कर जहरीली शराब बेचने की ज़िम्मेदारी से साफ बच निकलती है।
डा॰ गिरीश ने कहाकि यद्यपि मुआबजा स्थाई समाधान नहीं है फिर भी भाकपा मांग करती है कि म्रतक आश्रितों को पर्याप्त मुआबजा दिया जाये तथा घायलों के संपूर्ण उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था की जाये। लेकिन इससे भी आवश्यक बात यह है कि उच्च स्तर पर पर नैतिक और रचनात्मक ज़िम्मेदारी तय हो ताकि भविष्य में ऐसी जनसंहारक वारदातें न हों।

डा॰ गिरीश


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रविवार, 31 मार्च 2019

भाकपा ने चन्द्रशेखर रावण को वाराणसी से प्रत्याशी बनाने की पेशकश की।


वाराणसी से मोदी के विरूध्द चन्द्रशेखर रावण सबसे उपयुक्त उम्मीदवार

भाकपा ने की उन्हें संयुक्त प्रत्याशी बनाये जाने  की अपील


 लखनऊ- 31 मार्च 2019, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने समस्त विपक्षी दलों से अनुरोध किया कि वे वाराणसी से श्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ भीम आर्मी के नेता श्री चन्द्रशेखर रावण को संयुक्त प्रत्याशी बनायें।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि चन्द्रशेखर भी कामरेड कन्हैया कुमार की तरह फासीवादी, सांप्रदायिक, मनुवादी और कारपोरेट ताकतों के खिलाफ प्रतिरोध की सशक्त आवाज बन कर उभरे हैं। मोदी के ढकोसले को उजागर करने को वे वाराणसी में वे सबसे उचित प्रत्याशी हो सकते हैं। भाकपा ऐसी हर आवाज के साथ है। 
डा॰ गिरीश ने कहाकि यदि श्री रावण वाराणसी से चुनाव लड़ते हैं तो भाकपा उनका पुरजोर समर्थन करेगी। यदि वे भाकपा के टिकिट पर चुनाव लड़ना चाहेंगे तो पार्टी उन्हें यह मौका अवश्य देगी।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा  उत्तर प्रदेश


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बुधवार, 13 मार्च 2019

CPI asked action against U.P. Govt.for not checking manufacturing of illicit liquor.


उत्तर प्रदेश में जहरीली शराब से मौतों पर भाकपा ने रोष जताया

निर्वाचन आयोग से कड़ी से कड़ी कार्यवाही की मांग की

लखनऊ- 13 मार्च, 2019- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य इकाई ने कानपुर में जहरीली शराब से पुनः हुयी मौतों पर गहरी चिंता जताई है। भाकपा ने प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाओं का इजहार करते हुये म्रतकों के परिवारों और शराब के सेवन से बीमारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है।

भाकपा ने निर्वाचन आयोग से भी आग्रह किया है कि वह उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर बन रही और बिक रही अवैध शराब के मामले में शीघ्र संज्ञान ले और योगी सरकार के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करे।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि यह आश्चर्यजनक है कि उत्तर प्रदेश में जहरीली शराब पीने से लगातार बड़ी संख्या में मौतें होरही हैं और कर्मकांडी सरकार मौत के इस पेय का निर्माण और वितरण रोक नहीं पारही है। जितने लोग देश में आतंकी घटनाओं में मारे गये हैं उससे कहीं ज्यादा योगी राज में जहरीली शराब से मारे जाचुके हैं। लेकिन योगी सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। जहां कोई दुर्घटना घट जाती है वहां तात्कालिक तौर पर कुछ कार्यवाही कर दी जाती है।
भाकपा ने इस संबंध में भारत निर्वाचन आयोग से भी तुरत संज्ञान लेकर कड़ी कार्यवाही करने का आग्रह किया है। डा॰ गिरीश ने कहाकि निर्वाचन आयोग के लखनऊ दौरे के समय हुयी भेंट में उन्होने आयोग के समक्ष यह सवाल मजबूती से उठाया था कि उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर अवैध शराब बन रही है जिसका चुनावों में दुरुपयोग किया जायेगा।
 निर्वाचन आयोग ने इस पर कार्यवाही का आश्वासन दिया था। लेकिन चुनावों की घोषणा के बावजूद न केवल नकली शराब बन रही है अपितु परचूनी की दुकानों तक पर बिक रही है। यह गरीबों के लिए जानलेवा तो है ही, चुनावों की निष्पक्षता को भी संदेह के घेरे में लाने वाला है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश


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सोमवार, 4 मार्च 2019

Press Note of CPI, UP


पुलवामा आतंकी हमले पर श्वेतपत्र जारी करे केन्द्र सरकार

दरोगा भर्ती प्रक्रिया में आरक्षितों को किनारे किया गया

भाकपा राज्य काउंसिल में कई निर्णय लिये गये


लखनऊ- 4 मार्च 2019, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की यहां संपन्न दो दिवसीय बैठक में पुलवामा और उसके बाद लगातार होरहे आतंकी हमलों और उनमें होरही हमारे जवानों की मौतों पर गहरा दुख व्यक्त किया और हमलों की कड़े शब्दों में निन्दा की गई।
भाकपा राज्य काउंसिल ने केन्द्र सरकार से मांग की वह पुलवामा आतंकी हमले और उसके बाद के घटनाक्रमों पर श्वेतपत्र जारी करे ताकि जनता के मन में व्याप्त शंकाओं का समाधान किया जासके और उचित बहस चलायी जसके।
 भाकपा को अपने सुरक्षाबलों की बहादुरी पर गर्व है। जिस तरह से हमारी वायु सेना ने मध्य रात्रि को सीमा के पार जाकर लक्ष्यों पर हमले बोले, बेशक वे प्रशंसनीय हैं। पर मोदी सरकार,  भाजपा और गोदी मीडिया ने जिस तरह से वोट वटोरने को राजनीति फैलाई और मरने वाले आतंकवादियों की संख्या के बारे में बड़े चड़े दाबे किये जनता इसकी सच्चाई जानना चाहती है। जनता खुफिया सूचनाओं के बावजूद हुये पुलवामा जैसे भयावह आतंकी हमले की सच्चाई भी जानना चाहती है। सरकार का दायित्व है कि वह जनता का भ्रम दूर करे अतएव श्वेतपत्र जारी करे।
बैठक के भीतर हुये विचार विनिमय की जानकारी देते हुये भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने बताया कि बैठक में इस बात पर आश्चर्य प्रकट किया कि दरोगा भर्ती परीक्षा में अनुसूचित वर्ग / आरक्षित वर्ग के योग्य अभ्यर्थी नहीं मिले और 800 स्थान खाली छोड़ दिये गए। भाजपा शासन में चयनसमितियों में सामंती सोच के लोगों की भरमार रही है जिसने जानबूझ कर इस वर्ग को रोजगार से बाहर रखा है। भाकपा का दाबा है आज इस वर्ग में योग्य नौजवानों की कमी नहीं। राज्य सरकार को चयन प्रक्रिया से गुजर चुके अभ्यर्थियों में से सीरियल वाइज़ 800 लोगों को तत्काल भर्ती करनी चाहिए। अन्यथा इस भर्ती की उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से जांच करानी चाहिए।
भाकपा राज्य काउंसिल ने गत माह संपन्न राज्य कार्यकारिणी बैठक के इस मंतव्य की पुष्टि की जिसमें कहा गया था कि उत्तर प्रदेश में यदि भाजपा के विरूध्द सभी धर्मनिरपेक्ष शक्तियों को एकजुट किया गया होता तो नतीजे निश्चय ही शानदार रहे होते। लेकिन कुछ दलों ने निजी हितों को देश के हितों से ऊपर समझा और एक लंगड़ा गठबंधन बना लिया। भाकपा उत्तर प्रदेश में वामपंथी धर्मनिरपेक्ष और लोकतान्त्रिक शक्तियों की एकजुटता के लिये प्रयासरत है। डा॰ गिरीश ने कहाकि इसके नतीजे जल्दी ही सामने आयेंगे।
बैठक सदस्यता नवीनीकरण जल्द पूरा करने, लोकसभा चुनावों कि तैयारी और चुनाव फंड जनता से एकत्रित करने पर भी अहम फैसले किये गये।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा , उत्तर प्रदेश


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बुधवार, 27 फ़रवरी 2019

भाकपा प्रतिनिधिमंडल की निर्वाचन आयोग से भेंट


भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने आज केन्द्रीय निर्वाचन आयोग की टीम से योजना भवन में भेंट कर उन्हें उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव से पहले की पेचीदा स्थितियों से अवगत कराया. निर्वाचन आयोग ने सभी बिन्दुओं को गंभीरता से सुना और उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया. भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश के नेतृत्व में मिले इस प्रतिनिधिमंडल में राज्य कार्यकारिणी सदस्य फूलचंद यादव एवं राज्य काउन्सिल सदस्य विनय पाठक भी थे. निम्न प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया गया-

अप्रेल मई 2019 में होने जारहे लोकसभा चुनाव में रिकार्डतोड़ धन बहाए जाने की संभावना है. भ्रष्टाचार के जरिये उन पूंजीवादी राजनैतिक दलों ने जो सत्ता में हैं और रहते आये हैं, भारी पैमाने पर कालाधन इकट्ठा कर लिया है जिसका प्रयोग वे अवैध तरीकों से आगामी चुनावों में करेंगे. ये दल ऐसे प्रत्याशियों को टिकिट देने जारहे हैं जिनके पास अपार धन संपदा है. आप अवगत ही हैं कि मौजूदा लोकसभा में बड़ी संख्या में करोडपति चुन कर पहुंचे थे. इस बार इससे भी ज्यादा करोडपति और अरबपति चुनाव मैदान में होंगे. एक मोटा अनुमान है कि इस चुनाव में 2014 के लोकसभा चुनावों से दोगुने से भी अधिक धन व्यय किया जाना है. विदेशी विशेषज्ञों ने भी ऐसी ही राय व्यक्त की है. इससे लोकतंत्र को गंभीर खतरा है.
गत चुनावों में भी बड़े पैमाने पर शराब और पैसा बांटने की खबरें खुल कर सामने आयीं थीं और इस बार भी ऐसा होने जारहा है. केन्द्र सरकार द्वारा ऐन चुनाव से पहले सरकारी खैरातें भी भेजी जारही हैं. यह वोट हासिल करने का हथकंडा है. सच तो यह है कि मतदान से दो- तीन दिन पहले सारी मर्यादायें तोड़ कर धन, उपहार और शराब बांटी जाती है और चुनावी मशीनरी अकर्मण्य बनी रहती है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जैसे अति अल्प खर्च में चुनाव लड़ने वाले दलों को इससे भारी हानि पहुँचती है.
निर्वाचन आयोग द्वारा लगायी गयी पाबंदियां भी छोटे दलों तक ही सिमट जाती हैं. धनवान राजनीतिक दल हैलिकोप्टर्स चुनाव अभियान चलाते हैं और हम जैसे चार पहिया वाहनों से प्रचार करने वालों के स्टार कैम्पेनर्स को जगह जगह चैकिंग का सामना करना पड़ता है जिससे काफी समय खराब होता है. कई बार सुरक्षाबल अपमानित भी करते हैं. छोटी मोटी चुनाव सामग्री भी साथ लेकर नहीं जाने दिया जाता है. अलग से वाहन किराये पर लेकर चुनाव सामग्री भेजने लायक आर्थिक स्थिति भाकपा की नहीं है.
उत्तर प्रदेश में चुनाव से पूर्व भी धर्मोन्माद, जातीय उन्माद और युध्दोन्माद फैला कर चुनाव प्रभावित करने की कोशिशें चल रही हैं और चुनाव प्रचार के दौरान भी कुछ दल ऐसा अवश्य करेंगे.
निर्वाचन आयोग की स्थाई मशीनरी न होने से सारा चुनाव संचालन सरकारी मशीनरी के हाथों में आजाता है जिसका कि राजनैतिकीकरण होचुका है. और वह "जिसका शासन उसका काम" के सिध्दांत पर काम करती है. ईवीएम मशीन की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं अतएव वीवीपेट के साथ मतदान कराये जाने की जरूरत है.
अतएव लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों के हित में हम आपसे निम्न निवेदन कर रहे हैं-
1- निर्वाचन के समय आयोग द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक खर्च पर कारगर रोक लगायी जाये.
2- मतदान से पहले अवैध रूप से बांटे जाने वाले धन, उपहार एवं शराब आदि का वितरण सख्ती से रोका जाये.
3- स्टार कैम्पेनर्स को रास्ते में चेकिंग से मुक्त रखा जाये. प्रचार सामग्री साथ लेजाने की उन्हें अनुमति देनी चाहिये.
4- धार्मिक उन्माद जातीय उन्माद और युध्दोन्माद का सहारा लेने वाले दलों को पहले सख्त चेतावनी दीजाये और न मानने पर उनके विरुध्द नियमानुसार कार्यवाही की जाये.
5- निर्वाचन कार्य में लगायी गयी मशीनरी के शासक दल के प्रति समर्पण पर अंकुश लगाने को कड़े कदम उठाये जायें.
6- निर्वाचन अधिक से अधिक वीवीपेट सहित मशीनों के साथ कराया जाये.
7- निर्वाचन हेतु प्रथक निर्वाचन मशीनरी के गठन पर भी विचार किया जाये.
8- भविष्य में समानुपातिक निर्वाचन प्रणाली लागू करने पर विचार किया जाये ताकि धनबल, बाहुबल, जातिवाद, संप्रदायवाद जैसे अनैतिक हथकंडों के बजाय नीतियों के आधार पर चुनाव हो और हमारा लोकतंत्र मजबूत हो.


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रविवार, 17 फ़रवरी 2019

CPI and CPI-M codemned Pulvama terrorist attack


पुलवामा की आतंकी कार्यवाही पर कम्युनिस्ट पार्टियों ने गहरा क्षोभ व्यक्त किया

आगामी तीन दिनों तक प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन करेंगी वामपंथी पार्टियां


लखनऊ- 17 फरबरी 2019, पुलवामा में हुये आतंकवादी हमलों से उत्पन्न स्थिति पर विचार करने को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एवं भारत की कम्युनिस्ट पार्टी( मार्क्सवादी ) की एक संयुक्त बैठक आज यहाँ भाकपा के राज्य कार्यालय पर संपन्न हुयी।
बैठक में पुलवामा में शहीद हुये सुरक्षाबलों की शहादत पर गहरा रोष प्रकट किया गया। साथियों ने दो मिनट का मौन रख कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही शहीदों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाओं का इजहार किया।
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश एवं माकपा के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव ने आतंकवादियों की इस कायराना हरकत की कड़े शब्दों में निन्दा की तथा कहाकि आतंक की राजनीति देश में गहरी जड़ें जमा चुकी है और इससे निपटने को राजनेतिक और सख्त प्रशासनिक कदम उठाने होंगे। जजवाती बयानबाजी और युद्धोन्माद फैलाने से समस्या का हल संभव नहीं है।
दोनों कम्युनिस्ट नेताओं ने कहाकि पिछले कई माह से तमाम खुफिया एजेंसियां आतंकी हमले की सूचनाएँ देरही थीं और पाकिस्तान के मीडिया में आतंकवादियों की हमले की धमकियां प्रकाशित होरही थीं फिर भी इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक लिए आतंकवादी टहलते रहे और इतना बड़ा और घ्रणित  कांड कर डाला। यह सरकार के स्तर पर बड़ी चूक है जिसको जम्मू कश्मीर के राज्यपाल ने स्वीकारा भी है।
लेकिन देश का मगरूर नेत्रत्व तब भी चुनावी वैतरणी पार करने की कवायद में जुटा था और आज भी अपनी संकीर्ण राजनैतिक कुचेष्टाओं से बाज नहीं आरहा। यहाँ तक कि पाकिस्तान विरोध के नाम पर अल्पसंख्यकों को डराने धमकाने के निंदनीय प्रयास भी किए जारहे हैं। संतोष की बात है कि देश की जनता ने आतंकवाद के विरुद्ध जबर्दस्त एकजुटता प्रदर्शित की है वहीं शांति और भाईचारा बिगाड़ने वालों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि आतंक की इस घ्रणित कार्यवाही का पुरजोर विरोध किया जाये और आतंकवाद के खिलाफ सख्त तार्किक कार्यवाही की मांग की जाये। निर्णयानुसार भाकपा और माकपा के कार्यकर्ता आगामी तीन दिनों तक जिलो जिलों में इस घटना के विरुद्ध अन्य वामदलों के साथ मिल कर विरोध प्रदर्शन करेंगे। साथ ही आम जनता से शान्ति और भाईचारा बनाये रखने की अपील करेंगे। विरोध प्रदर्शन में धरना/ प्रदर्शन/ आतंकवाद का पुतला दहन/ केंडिल मार्च आदि शामिल हैं।
भाकपा एवं माकपा नेत्रत्व ने सभी वामपंथी लोकतान्त्रिक शक्तियों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा ,  उत्तर प्रदेश


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बुधवार, 13 फ़रवरी 2019

इलाहाबाद और अलीगढ़ की घटनाओं से भाजपा की बदहवासी उजागर : भाकपा




लखनऊ- एक ओर भाजपा सरकार एक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को छात्रों के आयोजन में भाग लेने हेतु इलाहाबाद जाने से रोकने का घोर अलोकतांत्रिक कदम उठाती है वहीं दूसरी ओर प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी- ए॰ एम॰ यू॰ पर हमला बोलने के लिए अपनी अराजक फौज भेज कर दंगा भड़काने की साजिश रचती है। दोनों ही घटनाएँ बेहद आपत्तिजनक हैं जिनकी सभी लोकतान्त्रिक शक्तियों को निंदा करनी चाहिए।
इतना ही नहीं कल की घटनाओं से बौखलाये संघ गिरोह ने अलीगढ़ और उसके बहाने देश के अन्य भागों में सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ाने के उद्देश्य से एएमयू में मन्दिर बनाने हेतु कार सेवा करने का ऐलान कर दिया और दंगाइयों की भीड़ को आज एएमयू की ओर कूच करा दिया। यदि पुलिस ने उन्हें रोका न होता तो कुछ भी अनहोनी होसकती थी।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने यहाँ जारी एक प्रेस बयान में कहाकि  ये घटनायें इस बात की ओर इशारा करती हैं कि अपना जनाधार खिसकने से भाजपा बेहद परेशान है और 2019 में वोट हासिल करने को सांप्रदायिक लपटें पैदा करने पर आमादा है। लेकिन संतोष की बात यह है कि अब आम जनता उनके हथकंडों को भलीभाँति समझ गयी है और उन्हें हर बार मुंह की खानी पड़ रही है।
डा॰ गिरीश ने कहाकि जो लोग एएमयू में मुस्लिम फ्रंट बनाए के नाम पर मीटिंग कर रहे थे उनका उद्देश्य भाजपा के हाथ में एक मुद्दा देना था। भाकपा उसकी भी आलोचना करती है। हर दिन एएमयू को लक्ष्य बनाकर कुछ न कुछ उत्पात मचाने वाली भाजपा को उन्होने फिर से एक मुद्दा थमा ही दिया। अब कल की मारपीट में शामिल एएमयू छात्रों पर देशद्रोह के आरोप मढ़ने की साजिश रची  जारही है, परन्तु देशद्रोह का आरोप अगर किसी पर बनता है तो उन संघियों पर बनता है जो कल एएमयू पर हमला बोलने पहुंचे थे।
डा॰ गिरीश ने सवाल कियाकि जब इलाहाबाद में धर्म संसद के नाम पर एकत्रित दंगाइयों की भीड़ से कुंभ की फिजा नहीं बिगड़ी तो एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय में एक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के जाने से क्या आसमान टूट पड़ता? उन्होने यह भी सवाल उठाया है कि जब भाजपा आज तक अयोध्या में मन्दिर का निर्माण नहीं करा सकी तो उसके द्वारा एएमयू में मन्दिर निर्माण का शिगूफ़ा उछालना एक विध्वंसकारी षडयंत्र नहीं तो क्या है? सच तो यह है कि मोदी और योगी की सरकारें हर तरह से बेनकाब होगयीं हैं और अब वे तानाशाही, दादागीरी और सांप्रदायिकता के बल पर ही चुनावी लक्ष्य हासिल करना चाहती हैं।
भाकपा ने सभी वामपंथी एवं जनवादी शक्तियों का आह्वान कियाकि वे भाजपा की इन फासिस्टी कारगुजारियों का माकूल जबाव दें।

डा॰ गिरीश

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शनिवार, 9 फ़रवरी 2019

उत्तर प्रदेश-- जहरीली शराब से मौतों के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार : भाकपा ने मुख्यमंत्री से की स्तीफ़े की मांग




लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने उत्तर प्रदेश में जहरीली शराब से होरही मौतों पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया है। भाकपा ने इन मौतों के लिये प्रदेश मुख्यमंत्री को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है और उनसे त्यागपत्र की मांग की है।  
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आरोप लगाया कि उनकी प्राथमिकता में उत्तर प्रदेश में सरकार चलाना नहीं अपितु लोगों को गुमराह करना और विपक्ष पर हमले बोलना है। प्रदेश के शासन पर ध्यान देने के बजाय वे राम कुंभ गाय गंगा नामों की बदली जैसे भ्रामक मुद्दों पर ही सारी ऊर्जा खपाये रहते हैं। यही वजह है कि यूपी की कानून व्यवस्था तार तार होचुकी है और अब मौत की शराब से प्रदेश में लगभग 100 लोगों की मौत होचुकी है और अन्य कई मौत के आगोश में सिमटते जारहे हैं।
भाकपा राज्य सचिव ने आरोप लगाया कि संवेदनहीन सरकार और उसका प्रशासन मौतों का आंकड़ा कम करके दिखाने को शवों के पोस्टमार्टम न करके उन्हें स्वाभाविक मौतें बता कर टरका रहा है। कइयों को सरकारी अस्पतालों में जगह नहीं मिली और उन्होने निजी अस्पतालो में दम तोड़ दिया तथा परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया। इस तरह के सारे म्रतकों का आंकड़ा जुटाया जाये तो और अधिक पहुंचेगा।
डा॰ गिरीश ने कहाकि योगी के सत्ता संभालने के बाद यह तीसरा बड़ा हादसा है जिसमें जहरीली शराब से बड़े पैमाने पर मौतें हुयीं हैं। गत माहों में जब ऐसा ही हादसा हुआ था तो मैंने स्वयं सरकार को आगाह किया था कि उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में अवैध शराब का धंधा बड़े पैमाने पर चल रहा है। मैंने यह भी खुलासा किया था कि शराब माफिया ने अब सत्ताधारी दल में पैठ बना ली है और सत्ताधारी दल के लोग इस धंधे से बड़े पैमाने पर अवैध कमाई कर मालामाल होरहे हैं। लेकिन योगी सरकार ने तब मामले को गंभीरता से लेने के बजाय म्रतको के परिजनों को कुछ मुआबजा देकर और छोटे अपराधियों पर चलताऊ कार्यवाही करके कर्तव्य की इतिश्री कर दी थी। यदि उसी समय कठोर कार्यवाही की गयी होती तो आज इतना बड़ा हादसा न होता।
भाकपा ने कहाकि योगी सरकार इन मौतों के लिये सीधे तौर पर जिम्मेदार है। लोगों की सामूहिक मौतों के लिये जिम्मेदार योगी को इसकी नैतिक ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए और अपने पद से स्तीफ़ा देकर हिमालय में जाकर प्रायश्चित करना चाहिये। भाकपा ने हर म्रतक के परिवार को रु॰ 25 लाख का मुआबजा और शराब पीड़ितों को इलाज के लिये रु॰ 5 लाख की धनराशि फौरन प्रदान करनी चाहिये।

डा॰ गिरीश

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शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019

ओलों से हुयी फसलहानि की तत्काल भरपाई करे सरकार : भाकपा




लखनऊ- 8 फरबरी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने गत रात उत्तर प्रदेश के विभिन्न भागों में हुयी भारी ओला व्रष्टि से फसलों की तवाही पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है। पार्टी ने सरकार से फसल हानि की त्वरित रूप से भरपाई की मांग की है। पार्टी ने इस बात पर अफसोस जताया कि गत पखबाड़े हुयी ओला व्रष्टि से बरवाद हुयी फसलों का अभी तक मुआबजा नहीं दिया गया।
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि गत रात प्रदेश के मेरठ, सहारनपुर, अलीगढ़, आगरा, मुरादाबाद, बरेली मंडलों में व्यापक रूप से और कानपुर व लखनऊ मंडलों के कुछ जिलों में सामान्य रूप से ओला व्रष्टि हुयी है। नोएडा, बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा जनपदों के कुछ हिस्सों में तो सड़कों पर बरफ की मोटी  चादर बिछ गयी। इससे सरसों और आलू की फसलों को भारी हानि पहुंची है। इससे आवारा पशुओं से तवाहहाल किसानों की और अधिक तवाही हुयी है।
डा॰ गिरीश ने कहाकि सरकार कुंभ में मस्त है और किसान बरवाद होरहा है। भाकपा पुनः मांग करती है कि ओलों से हुयी फसल हानि की शत शत भरपाई अविलंब की जाये।

डा॰ गिरीश


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शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2019

जुमलेबाज सरकार का जुमला बजट आमजनों ने ठुकराया; भाकपा




लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने केन्द्र सरकार के अंतिम बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहाकि यह जुमलेबाज सरकार का जुमला बजट है जो उसका अंतिम संस्कार कर देने को काफी है। सूट बूट वाले लोग इसकी तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं जबकि किसान, कामगार, बेरोजगार नौजवान और आम लोग इससे ठगा महसूस कर रहे हैं।
किसानों से इस सरकार ने चलते चलते भी वही छलाबा किया जो वह उनके साथ पाँच साल से करती आरही है। उनकी आमदनी दोगुना करने के जुमले के पूरी तरह उजागर होने के बाद और किसानों की आत्महत्याओं के लगातार जारी रहने के बाद सरकार ने उन्हें रु॰ 17 प्रतिदिन का लालीपाप थमाया है जिसको किसान जले पर नमक छिड़कने के समान मान रहे हैं। कई राज्य सरकारों द्वारा किसानों को दी जारही राहत के मुक़ाबले ये ऊंट के मुंह में जीरा है।
 2017- 18 में बेरोजगारों की संख्या में बेतहाशा व्रध्दी हुयी है मगर रोजगार देने के मोर्चे पर यह बजट एकदम फ्लाप है। मनरेगा के बजट में जितनी कटौती पूर्व के बजटों में की गयी थी उसको इस बजट में भी पूरा नहीं किया गया। मजदूरों व अन्य वर्गों की भलाई के लिए कीगयी घोषणाएँ बजट आबंटन से मेल नहीं खातीं। उनके लागू होने के बारे में भी तमाम संशय बने हुये हैं। गरीब मजदूरों को इसे पाने के लिये 100 रुपये साल अदा करने पड़ेंगे।
सामान्य गरीबों को दिये आरक्षण का लाभ देने की सीमा 8 लाख निर्धारित होने के बाद आयकर दाताओं को उम्मीद बंधी थी कि उन्हें भी आयकर में 8 लाख आमद तक पर छूट मिलेगी लेकिन सरकार ने उन्हें भी हताश- निराश किया है। बजट भाषण में 5 लाख तक की आमद पर छूट के भ्रम से उल्लसित लोगों का उल्लास 10 मिनट में ही आसमान से जमीन पर आगया जब उन्हें पता लगा कि यह छूट तो केवल 5 लाख तक की आमदनी वालों के लिये है। समाज के अन्य सामान्य तबके भी ठगा ही महसूस कर रहे हैं।
डा॰ गिरीश ने कहाकि यह सरकार मूंगफली देकर बादाम देने का प्रचार करने में माहिर है। वह उसने आज के बजट में भी किया है। बजट पेशी के दौरान मोदी और उनकी मायावी मंडली द्वारा सैकड़ों बार मेजें थपथपा कर और मोदी मोदी के नारे लगा कर पैदा किया गया क्रत्रिम जोश 10 मिनट भी नहीं ठहर पाया जब टीवी चैनलों पर किसानों और आमजनों ने इसका पर्दाफाश कर दिया। चुनावी लाभ की गरज से कागजी घोषणाओं से सजाया संवारा गया बजट वजूद में आने से पहले ही निर्वस्त्र होगया।
यह अन्तरिम बजट था लेकिन सरकार ने सारी नैतिकता और संवैधानिक मर्यादाएं लांघ कर पूर्ण बजट पेश कर दिया। चुनावी लाभ के लिये सरकार सारी सीमाएं लांघने पर आमादा है।
कुल मिला कर यह कार्पोरेट्स के हितों का रक्षक बजट है इसीलिए औद्योगिक संगठन उसकी प्रशंसा के पुल बांध रहे हैं। पूंजीवाद से अवाम की बढ़ रही नाराजी को कम करने को कुछ खैरातें बांटने का नाटक किया गया है। पर रिश्वतख़ोरी और अफसरशाही के चलते ये सारी योजनाएं जमीन पर पहुँचने से पहले ही दम तोड़ देतीं हैं यह हर कोई जानता है। डा॰ गिरीश ने कहाकि आजादी के 71 साल में आये हर बजट से जनता अपने जीवन की बेहतरी की उम्मीद लगाये रही पर  जनता की हालत आज भी जस की तस बनी हुयी है। जनता का उत्थान समाजवाद में ही संभव है पूंजीवाद में नहीं। यह इन 71 सालों में स्पष्ट होगया है।

डा॰ गिरीश

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सोमवार, 28 जनवरी 2019

मुजफ्फरनगर दंगों के दोषियों से केस वापस लेने की करतूत की भाकपा ने निन्दा की



 

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने मुजफ्फरनगर दंगों के संगीन धाराओं वाले केसों को वापस लेने के राज्य सरकार के फैसले की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है।
भाकपा ने राज्य सरकार के इस निर्णय को न्याय के सिध्दांत की हत्या बताते हुये इस कदम को तत्काल वापस लेने की मांग की है। पार्टी ने आशा व्यक्त की कि अदालतें जिस स्तर पर भी संभव हो इसका संज्ञान लेंगीं न्याय को दोहरा बनाने की भाजपा सरकार की इस करतूत को रद्दी की टोकरी में डाल देंगी।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि 2013 में मुजफ्फरनगर और उसके समीपस्थ जिलों में भाजपा और संघ द्वारा प्रायोजित दंगों में सरकारी तौर पर 66 लोग मारे गये थे और 50 हजार से अधिक लोग विस्थापित हुये थे। माली नुकसान का तो आंकलन कर पाना भी बेहद कठिन है। दंगाइयों के खिलाफ 125 से अधिक केस दर्ज हुये थे जिनमें अधिकतर भाजपा के नेतागण हैं। उनमें से कई तो सांसद, विधायक अथवा भाजपा के संगठन के उच्च पदों पर आसीन हैं।
ऐसे राजनैतिक अपराधियों से संगीन केसों को वापस लेकर सरकार राजनीति में हिंसक अपराधियों की प्रतिष्ठा का काम कर रही है। आगामी लोकसभा चुनावों से पहले केस वापस लेकर भाजपा संगीन अपराधियों को संदेश देना चाहती है कि वे चुनावों में भाजपा का साथ दें तो उन्हें भी बिना ट्रायल मुक्ति मिल जायेगी। यह भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता के दुरुपयोग का गंभीर मामला है जिसका सामाजिक जीवन पर गंभीर असर पड़ेगा।
डा॰ गिरीश ने कहाकि भाजपा की कथनी करनी में अंतर है। वह सामान्य लोगों पर फर्जी मुकदमे लगा रही है, यूपीकोका जैसे कानून बनाती है और उसकी पुलिस तमाम नौजवानों को बिना आपराधिक सबूतों के फर्जी एंकाउंटर कर मौत के घाट उतारने का काम कर रही है। वहीं भाजपा अपने कार्यकर्ताओं पर लगे संगीन केसों को मनमाने ढंग से खत्म कर देना  चाहती है। इससे पहले स्वयं मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ ने अपने ऊपर लगे मुकदमे वापस लेलिए थे। तिकड़मों और कथित धर्मनिरपेक्ष दलों के नेताओं की साठ गांठ से कई भाजपाई और संघी बाबरी ध्वंस के केसों से न केवल आज तक बचे हुये हैं बल्कि सत्तासुख भोग रहे हैं।
भाकपा राज्य सचिव ने कहाकि सरकार के इस निंदनीय और समाजविरोधी कदम का पुरजोर विरोध किया जाएगा। 5 फरबरी को भाकपा तमाम जिलों में इसके विरोध में प्रदर्शन कर ज्ञापन देंगी।

डा॰ गिरीश

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बुधवार, 23 जनवरी 2019

ओला और तूफान से हुयी हानि का पूरा मुआबजा तत्काल दे सरकार: भाकपा उत्तर प्रदेश




लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश की राज्य कार्यकारिणी ने प्रदेश भर में ओला व्रष्टि और तूफान से हुयी बरवादी पर भारी चिन्ता का इजहार किया है। पार्टी ने राज्य सरकार से इस बरवादी पर तत्काल ध्यान केन्द्रित करने की मांग की है।
यहां जारी बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि उत्तर प्रदेश के किसान पहले ही आवारा पशुओं, नील गायों, बन्दरों आदि से फसल की बरवादी की मार झेल रहे थे अब मौसम की मार ने उनकी समस्याओं को और भी बड़ा दिया है। गत दो दिन से ओलों के गिरने और बवंडर से सरसों, आलू आदि की फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है और अब मौसम विभाग ने आगे भी वारिश, ओले और तूफान आने की भविष्यवाणी की है। इससे किसानों के माथे पर चिन्ता की लकीरें खिंचना स्वाभाविक है।
एक ओर किसानों पर चहुंतरफा मार पड़ रही है वहीं सरकार इन समस्याओं से मुंह चुरा रही है। वह ऐसे कामों में लिप्त है जिनसे जनता के हितों का कोई सरोकार नहीं। भाकपा ने सरकार से किसानों की इस हानि का सौ फीसद मुआबजा तत्काल दिलाने और प्राक्रतिक आपदा से उन्हें बचाने की मांग की है। भाकपा ने फसल बीमा कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाने और हर क्षेत्र में हुयी न्यूनतम हानि को आधार मान कर बीमा भुगतान की मांग की है।
भाकपा राज्य सचिव ने कहाकि यदि सरकार ने हानि की भरपाई के लिये तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाये तो भाकपा 5 फरबरी को प्रदेश भर में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेगी।
डा॰ गिरीश

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शनिवार, 19 जनवरी 2019

Matter for Pamphlate


( 5 फरबरी 2019 को जिला मुख्यालयों पर होने वाले आंदोलन के पर्चे का प्रारूप )


झूठी नाकारा और झांसेबाज़ सरकार को जगाने को 5 फरबरी 2019 को जिला मुख्यालय चलो

किसानों कामगारों महिलाओं और सभी कमजोरों की आवाज बुलंद करने को भाकपा का प्रदर्शन


भाइयो और बहिनो,
केन्द्र और प्रदेश की झूठी, नाकारा और झांसेबाज़ सरकारों के कारनामों से हर तबका परेशान है। सरकार की गोधन नीति से तो किसान ही नहीं हर आदमी परेशान है। आवारा पशुओं के झुंड किसानों की फसल को नष्ट कर रहे हैं। पीड़ित किसान भीषण सर्दी में ठिठुरते हुये फसलों की रखवाली कर रहे हैं। खूंख्वार सांड उन पर हमले बोल रहे हैं। हर दिन किसी न किसी के मारे जाने या घायल होने की खबरें मिल रही हैं। किसान जब उन्हें पकड़ कर बंद करते हैं तो उन पर मुकदमे दर्ज किये जारहे हैं। कई जगह इन पशुओं को लेकर किसानों में आपसी झगड़े भी होराहे हैं। सरकार और संघियों द्वारा नियंत्रित पशुशालायें धन के दोहन का जरिया बनी हुयी हैं। वहाँ से गायों/ बछड़ों को भगा दिया जाता है या फिर चारा पानी नहीं दिया जाता। वे भूख से तड़प तड़प कर मर रहे हैं। भाजपाई और संघी गोभक्तों का चोगा पहन कर पशु व्यापारियों को प्रताड़ित कर रहे हैं और पुलिस से मिल कर उनसे धन वसूल रहे हैं। इनमें से शायद ही कोई हो जो गाय को पालता हो।
दूसरे किसान कामगार भी बेहद परेशान हैं। खुद मुख्यमंत्री ने 14 दिन के भीतर गन्ने के बकाए का मय ब्याज के भुगतान कराने अथवा मिल मालिकों के खिलाफ मुकदमे लिखे जाने का वायदा किया था। लेकिन पुराने बकाये का भुगतान तो दूर नए बकाये और होगये। पहले धान बाजरा की फसलों की उचित कीमतें न मिलने से परेशान किसान अब आलू आदि की कीमतों में गिरावट का खामियाजा भुगत रहा है। ग्रामीण नौजवानो और मजदूरों को रोजगार देने वाली मनरेगा को पर्याप्त धन न मिलने से वह दम तोड़ रही है। धन के अभाव में लोग बच्चों की फीस तक नहीं देपारहे और कई तो परेशान हो आत्महत्याएं कर रहे हैं। सरकार ने बिजली के दाम बड़ा दिये और भुगतान करने में असमर्थ लोगों के कनेक्सन काटे जारहे हैं। उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किये जराहे हैं।
ये सरकार रामराज लाने का सपना दिखा कर सत्ता में आयी थी पर प्रदेश में अपराधों की बाड़ ने लोगों को परेशान कर दिया है। हर तरह के अपराध चरम पर हैं। पर सबसे बड़ी दुर्दशा बहू बेटियों की है। प्रतिदिन उनके साथ बलात्कार और सामूहिक बलात्कार की दिल दहलाने वाली घटनायेँ होरही हैं। कई की हत्या कर दी जाती है तो कई सिस्टम से तंग आकर आत्महत्यायें कर रही हैं। यह योगी सरकार के माथे पर कलंक है। दलितों अल्पसंख्यकों पर भी तमाम तरह के अत्याचार होरहे हैं। सरकारी योजनायेँ भ्रष्टाचार की भेंट चड़ चुकीं हैं तो पुलिस प्रशासन में खुल कर भ्रष्टाचार होरहा है। आम आदमी तवाह बरवाद होरहा है।
रोजगार घट रहे हैं। साढ़े चार लाख स्थान केन्द्रीय सेवाओं में तो 40 लाख राज्यों की सेवाओं में खाली पड़े हैं जिन्हें भरा नहीं जारहा। भर्तियों में धांधली के चलते भर्ती प्रक्रियाएं बाधित होरही हैं। रोजगार देने के नाम पर सामान्य आरक्षण का झुनझुना पकड़ा दिया जिनके नए नियम बनाने तक भर्ती प्रक्रिया रुकी रहेगी। फिर चुनावी आचार संहिता लग जायेगी तो भर्तियाँ भी रुक जाएंगी। हर तरह से युवाओं पर ही गाज गिर रही है। दो करोड़ को रोजगार देने का वायदा पकौड़े तलने की नसीहत में बदल गया। किसानों की आमदनी दो गुना होना तो दूर वे पुनः कर्ज के जाल में फंस गये। कालाधन कम होने के बजाय और भी बड़ गया।  सरकार की नीतियों- नोटबंदी, जीएसटी और खनन प्रक्रिया के भ्रष्टाचार में डूबे रहने से मजदूर मिस्त्री आदि बेकार बैठे हैं। ऊपर से महंगाई सबके लिए डायन बनी हुयी है। पेट्रोल डीजल रसोई गैस जैसी जरूरी चीजें बेहद महंगी हैं। डालर के मुक़ाबले रुपये की कीमत का असर हर चीज पर पड़ रहा है। घपले घोटालों में तो पिछली सरकारों के रिकार्ड को ही तोड़ दिया।
जनता की इन सभी संगीन परेशानियों की फिक्र न तो केन्द्र सरकार को है और न उत्तर प्रदेश सरकार को। पूरे 5 साल उन्होने राम मंदिर गंगा गाय की थोथी गाथा गाते ही गुजार दिये। अब कह रहे हैं कि मंदिर 2025 में बनेगा। चुनावों में फिर से वे कुछ थोथे नारे लेकर आयेंगे और आप सभी को छलने की दोबारा कोशिश करेंगे। आप सभी को इनके इस छल से सावधान रहना होगा।
उपरयुक्त जनता की प्रमुख समस्याओं को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने उत्तर प्रदेश भर में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। हम अपने इस जनपद में भी 5 फरबरी को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन/ धरना आयोजित करने जारहे हैं। आपसे अनुरोध है कि आप भी शामिल हों।

निवेदक

जिला काउंसिल

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जनपद- ………………………….


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